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दिल्ली, मुंबई, बैंगलुरु जैसे महानगरों में बसने वाले मध्यम और उच्चवर्गीय एकल परिवारों की संख्या निरंतर बढ़ती जा रही है. ऐसे परिवारों की महिलाओं के पास शिक्षा, समय और पैसे की कमी नहीं है. पति के काम पर और बच्चों के स्कूल चले जाने के बाद उन के पास काफी खाली वक्त होता है. आज इसी खाली वक्त, शिक्षा और क्षमता का प्रयोग कर के बहुत सी महिलाओं ने बड़ेबड़े व्यवसाय खड़े कर लिए हैं. इस तरह उन्होंने न सिर्फ पैसा कमाने में पति का सहयोग किया, बल्कि घर में रहते हुए, घर को, कामों को नजरअंदाज किए बगैर पारिवारिक जिम्मेदारियों को निभाते हुए अपने समय का बेहतरीन उपयोग किया है.

खाने ने दिया रोजगार

दिल्ली की कैलाश कालोनी में रहने वाली सरन कौर की उम्र करीब 60 साल है. उन के 3 बेटे हैं. तीनों ही अब सैटल हो चुके हैं. उन की पढ़ाईलिखाई, शादियां और नौकरी में सैटल होने में सरन कौर की महत्त्वपूर्ण भूमिका रही है. वे पंजाब से ब्याह कर दिल्ली आई थीं. पति के पास नौकरी नहीं थी. घर में ही आगे के कमरे में उन्होंने एक किराने की दुकान खोल रखी थी. परिवार में तब सरन कौर के पति, सास, देवर और देवरानी थे.

सरन कौर के बच्चे हुए, परिवार बढ़ा तो किराने की दुकान से घर का खर्चा निकालना मुश्किल होने लगा. तब सरन कौर ने पति के काम में सहयोग करने की ठानी. उन्हें खाना बनाने का शौक था. पंजाबी खाना बनाने में तो उन्हें महारत हासिल थी. अत: उन्होंने कैलाश कालोनी के थाने में जा कर अपने महल्ले के सीनियर सिटिजन की लिस्ट हासिल कर ली. फिर उन्होंने घरघर जा कर उन बूढ़े लोगों से मुलाकात की, जो अपने बच्चों की नौकरी के सिलसिले में दूसरे शहर या विदेश में बसने के कारण अकेले पड़ गए थे और जिन से चूल्हाचौका अब नहीं हो पाता था.

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बहुत से बुजुर्ग होटल से खाना मंगवाते थे या नौकरों के हाथ से बने कच्चेपक्के खाने पर जी रहे थे. सरन कौर ने उन्हें बहुत कम रेट पर अपने घर से खाना भिजवाने की बात कही. धीरेधीरे महल्ले के कई घरों में बुजुर्गों को घर का बना ताजा और गरम खाना सरन कौर पहुंचाने लगीं. उन के बनाए खाने की प्रशंसा होने लगी तो जल्द ही उन के ग्राहकों की संख्या बढ़ने लगी. सरन कौर का टिफिन सिस्टम चल निकला. पैसा बरसने लगा.

आज सरन कौर के पास एक बड़ी किचन है, जिस में 10-12 नौकर हैं, जो रोजाना करीब 300 टिफिन तैयार करते हैं. डिलिवरी बौय समय से टिफिन ग्राहकों तक पहुंचाते हैं. आज सरन कौर के ग्राहकों में सिर्फ बुजुर्ग लोग ही नहीं, बल्कि पेइंगगैस्ट के तौर पर दूसरे शहरों से आ कर रहने वाले लोग और औफिस में काम करने वाले लोग भी शामिल हैं. होटल या रेहड़ी के मसालेदार और अस्वस्थकर खाने की जगह मात्र 100 रुपए में घर की बनी दाल, चावल, सब्जी, रोटी, सलाद, दही उन्हें ज्यादा स्वादिष्ठ और सेहतमंद लगता है. सरन ने अपनी मेहनत और लगन से न सिर्फ परिवार को संभाला, बल्कि कई अन्य लोगों को भी रोजगार उपलब्ध कराया.

गुड अर्थ गुड जौब

दिल्ली के छतरपुर में एक फार्महाउस में बनी ‘गुड अर्थ’ कंपनी की वर्कशौप को देख कर मैं दंग रह गई. यह कंपनी आज किसी परिचय की मुहताज नहीं है. इस में तैयार होने वाला सामान अपनी खूबसूरती, कलात्मकता और ऊंचे दाम की वजह से अमीर वर्ग में काफी लोकप्रिय है.

‘गुड अर्थ’ की मालकिन अनीता लाल उन बड़े उद्योगपतियों में से एक हैं, जिन्होंने अपने शौक को अपना व्यवसाय बना कर न सिर्फ अपनी रचनात्मकता को नए आयाम दिए, बल्कि सैकड़ों महिलाओं के लिए रोजगार के रास्ते भी तैयार कर दिए. उन की लगन, हिम्मत, जिद, कुछ नया करने का शौक और प्रतिभा ने ‘गुड अर्थ’ जैसी कंपनी की नींव डाली.

आज देशभर में ‘गुड अर्थ’ के तमाम शोरूम्स में विभिन्न प्रकार की कलात्मक वस्तुओं, वस्त्र, ज्वैलरी आदि की बिक्री होती है. इन वस्तुओं पर जो कलाकारी, नक्काशी, रंगरोगन, बेलबूटे दिखाई पड़ते हैं, वे अद्भुत होते हैं और उन्हें बनाने वाली महिलाओं की उच्च रचनात्मकता का परिचय देते हैं.

‘गुड अर्थ’ की वस्तुओं पर मुगलकालीन चित्रकारी, राजस्थानी लोककला के नमूने, लखनवी और कश्मीरी कढ़ाई के जो बेहद खूबसूरत बेलबूटे नजर आते हैं, उस की वजह है स्वयं अनीता लाल का देश की कला के प्रति गहरा लगाव. भारत की कलात्मक विरासत को जीवित रखने और उसे नए रंग में ढाल कर आगे ले जाने वाली अनीता लाल ने 20 साल पहले अपना व्यवसाय तब शुरू किया था, जब अपने बच्चों को उन्होंने सैटल कर दिया था, क्योंकि उन की पहली वरीयता उन का परिवार और उन के बच्चे थे.

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वे शुरू से ही आजाद खयाल की थीं उन की अपनी सोच थी, क्षमता और प्रतिभा थी. मातापिता का सहयोग उन्हें प्राप्त था. घर में इस बात की आजादी थी कि अपनी शिक्षा, क्षमता और प्रतिभा का प्रयोग वे जहां और जैसे करना चाहें, कर सकती हैं.

वे कहती हैं, ‘‘चूंकि घर में कोई दकियानूसी खयालों का नहीं था और लड़कियों को भी लड़कों की तरह शिक्षा, प्यार और पालनपोषण मिला, लिहाजा मेरे काम में कभी कोई व्यवधान नहीं आया. आज मैं एक सफल व्यवसायी हूं

तो अपने परिवार के प्यार और सहयोग के कारण ही.’’

अनीता लाल की शादी एक धनी व्यवसायी परिवार में हुई, जहां पैसे की कोई कमी नहीं थी. वे चाहतीं तो आराम से घर में बैठ कर अपना जीवन व्यतीत कर सकती थीं, लेकिन उन्होंने हाथ पर हाथ धरे घर में बैठे रहने या हाइप्रोफाइल पार्टियां ऐंजौय करने के बजाय एक ऐसे व्यवसाय को शुरू करने की सोची, जिस में वे ज्यादा से ज्यादा महिलाओं को जोड़ कर उन्हें अपने पैरों पर खड़ा कर सकें. उन का लक्ष्य पैसा कमाना नहीं था, वरन हिंदुस्तान की कला और कारीगरों को नए आयाम देना, महिलाओं को रोजगार से जोड़ना और लीक से हट कर कुछ नया और बेहतर करना था.

अनीता कहती हैं, ‘‘हम ने अपनी महिला कर्मियों के लिए कभी कोई सख्त नियम नहीं रखे. वे अपनी सुविधानुसार अपने काम के घंटे खुद तय करती हैं. यहां उन्हें हर तरह की सुविधा और आजादी है. मेरा मानना है कि औरत की पहली जिम्मेदारी उस का घर और बच्चे हैं. मैं ने भी अपने बच्चों के बड़े होने के बाद ही अपना व्यवसाय शुरू किया था. इसलिए ‘गुड अर्थ’ में कार्यरत किसी भी महिला के लिए उस का घर प्रथम है.

‘‘मेरा मानना है कि जिंदगी भी अच्छी तरह चले और काम भी. इस के लिए जरूरी है कि महिलाएं मानसिक रूप से तनावमुक्त रहें. तनावमुक्त वे तभी रहेंगी जब हम उन की परेशानियों को समझें और उन्हें मिल कर दूर करें.

‘‘हमारे देश में महिलाएं लगातार हिंसा, बलात्कार, भेदभाव का शिकार हो रही हैं. यदि उन्हें सिर्फ 2 चीजें- पहली शिक्षा और दूसरी रोजगार हासिल हो जाए तो उन पर होने वाले अपराधों पर विराम लग जाए. शिक्षा से समझ बढ़ेगी और रोजगार से पैसा आएगा.’’

सरन कौन, अनीता लाल जैसी महिलाओं को देख कर कहा जा सकता है कि मजबूत और सकारात्मक सोच रखने वाली महिलाएं न सिर्फ खुद सशक्त हो रही हैं, बल्कि दूसरों को भी सशक्त बना रही हैं.

व्यावहारिकता, अनुभव और कौशल विपरीत से विपरीत स्थिति में भी जीवनयापन में सहायता करता है. ऐसा नहीं है कि अशिक्षित महिलाओं में कौशल एवं हुनर कम है. कृषि, कुटीर उद्योग, पारंपरिक व्यवसाय, पशुपालन, दुग्ध व्यवसाय जैसे कार्यों की तरफ महिलाएं तेजी से बढ़ रही हैं.

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औरत के सशक्त होने से एक परिवार ही नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र भी सशक्त होता है. महानगरों में एकल परिवार की कितनी ही महिलाएं हैं, जिन के पास खूब खाली वक्त है, जिस का सदुपयोग कर के वे अपनी शिक्षा, शौक और क्षमता को नष्ट होने से बचा सकती हैं और परिवार, समाज और देश को कुछ अद्भुत दे सकती हैं.

उंची उड़ान: भाग 1

समाज में ऐसी औरतों और ऐसे पुरुषों की कमी नहीं है, जो जीवनसाथी को खिलौना समझ बैठते हैं. हालांकि वक्त आने पर उन्हें इस की सजा भी जरूर मिलती है. तृप्ति ऐसी ही औरत थी जो पहले पति से खेलती रही और फिर उसे कैंसर रोगी साबित कर के…

घटना 13 नवंबर, 2018 की है. तृप्ति जय तेलवानी जिस समय अपने 3 साल के बेटे के साथ पुणे शहर के थाना चिखली पहुंची, उस वक्त दोपहर का एक बजने वाला था. महिला एसआई रत्ना सावंत उस समय किसी पुराने मामले की फाइल देख रही थीं. घबराई और रोती हुई तृप्ति जब उन के पास पहुंची तो वह समझ गई कि इस के साथ जरूर कुछ गलत हुआ है.

उन्होंने तृप्ति को सामने कुरसी पर बैठा कर उस से इत्मीनान से बात की. उस ने आंसू पोंछते हुए कहा, ‘‘मैडम मेरा नाम तृप्ति जय तेलवानी है. मैं चिखली के घरकुल इलाके की साईं अपार्टमेंट सोसायटी में पति के साथ रहती हूं.’’ कह कर तृप्ति फिर से रोने लगी.

एसआई रत्ना सावंत ने उसे धीरज बंधाते हुए कहा, ‘‘देखिए, आप रोइए मत. आप के साथ जो भी हुआ है, मुझे विस्तार से बताएं ताकि मैं आप की मदद कर सकूं.’’

रत्ना सावंत की सहानुभूति पर तृप्ति अपने आंसू पोंछते हुए बोली, ‘‘मैडम, मैं बरबाद हो गई हूं. मेरी तो दुनिया ही उजड़ गई. मेरे पति ने फांसी लगा कर आत्महत्या कर ली है.’’

तृप्ति की बात सुन कर एसआई रत्ना सावंत चौंकी. वह उसी समय पुलिस टीम के साथ मौके की ओर रवाना हो गईं. इस की सूचना उन्होंने उच्चाधिकारियों को भी दे दी थी.

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एसआई रत्ना सावंत अपनी टीम के साथ जब मौके पर पहुंचीं तो वहां लोगों की भीड़ लगी थी. मृतक जय तेलवानी के मातापिता और अन्य लोग भी वहां मौजूद थे.

पुलिस जब बैडरूम  में पहुंची तो बैड पर जय तेलवानी का शव पड़ा था. मांबाप और अन्य लोग उस के शव के साथ लिपट कर रो रहे थे. एसआई रत्ना सावंत ने जब लाश का निरीक्षण किया तो उस के गले पर फंदे का निशान देख कर उन्हें पहली नजर में मामला आत्महत्या का लगा.

एसआई रत्ना सावंत ने मृतक की पत्नी तृप्ति जय तेलवानी से इस संबंध में पूछताछ की तो उस ने बताया कि वह पिछले कुछ दिनों से अपनी लाइलाज बीमारी से परेशान थे. इन्हें ब्लड कैंसर था. आज सुबह जब मैं 11 बजे अपने बच्चे को लेने स्कूल गई तो ये ठीक थे, लेकिन जब स्कूल से लौटी तो दरवाजा अंदर से बंद मिला.

कई बार कालबैल बजाने और आवाज देने के बाद भी जब दरवाजा नहीं खुला, न कोई आहट हुई तो मैं घबरा गई. मैं ने दूसरी चाबी ला कर दरवाजा खोला तो मेरी चीख निकल गई. जय गले में साड़ी बांध कर पंखे से लटके हुए थे.

चीखनेचिल्लाने की आवाजें सुन कर पड़ोसी फ्लैट में आ गए. उन्होंने पति को नीचे उतार कर बैड पर लिटा दिया और अस्पताल जाने के लिए एंबुलेंस भी मंगा ली, लेकिन तब तक उन की मौत हो चुकी थी.

पुलिस की जांच में आत्महत्या के निशान तो मिल रहे थे, लेकिन आत्महत्या का कारण समझ नहीं आ रहा था. तृप्ति तेलवानी अपने बयान में जिस लाइलाज बीमारी की बात कह रही थी, उस बीमारी के संबंध में वह यह भी नहीं बता सकी कि जय का किस अस्पताल में इलाज चल रहा था.

यह बात पुलिस के गले नहीं उतर रही थी. जब मृतक को ब्लड कैंसर था तो उस का किसी अस्पताल में इलाज क्यों नहीं कराया. और फिर बिना जांच कराए यह कैसे पता चला कि जय को ब्लड कैंसर है. उसी दौरान थानाप्रभारी बालाजी सोनटके मौकाएवारदात पर पहुंच गए. उन के साथ फोरैंसिक टीम भी थी.

मौकामुआयना करने के बाद अधिकारियों ने मृतक के घर वालों से इस बारे में पूछताछ की. इस के बाद वह थानाप्रभारी को आवश्यक दिशानिर्देश दे कर चले गए.

वरिष्ठ अधिकारियों के जाने के बाद थानाप्रभारी बालाजी सोनटके ने मौके की काररवाई पूरी कर के जय तेलवानी के शव को पोस्टमार्टम के लिए पुणे के सेसून डाक अस्पताल भेज दिया. थानाप्रभारी ने इस मामले की जांच एसआई रत्ना सावंत को सौंप दी.

एसआई रत्ना सावंत ने मृतक जय तेलवानी की कैंसर की बीमारी के संबंध में आसपड़ोस के लोगों से बात की. उन्होंने बताया कि इस बारे में उन्हें वाट्सऐप मैसेज द्वारा ही जानकारी मिली थी कि जय तेलवानी को ब्लड कैंसर है. लेकिन यह बात जय तेलवानी ने नहीं बताई, वह तो एकदम स्वस्थ दिखता था.

अगले दिन पुलिस के पास पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी आ गई. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कैंसर जैसी घातक बीमारी का कोई जिक्र नहीं था. इस का मतलब यह था कि सोशल मीडिया पर जय तेलवानी को कैंसर रोगी होने की बात किसी ने एक सोचीसमझी साजिश के तहत फैलाई थी. यह बात फैला कर किसे लाभ हो सकता है, पुलिस इस की जांच में जुट गई.

इसी दौरान जय तेलवानी के मातापिता पुलिस थाने पहुंचे. उन्होंने थानाप्रभारी बालाजी सोनटके को बताया कि उन के बेटे की आत्महत्या की जिम्मेदार उन की बहू तृप्ति है. इस के बाद पुलिस ने अपनी तफ्तीश का रुख तृप्ति की तरफ मोड़ दिया.

तृप्ति पर नजर रख कर जांच अधिकारी उस वीडियो की तलाश में जुट गईं जो सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी. इस वीडियो में जय तेलवानी को कैंसर रोगी बता कर आर्थिक सहायता की मांग की गई थी.

बताया जाता है कि यह वीडियो देख कर जय तेलवानी मानसिक रूप से परेशान हो गए थे. चूंकि वह भलेचंगे स्वस्थ थे और किसी ने उन का कैंसर रोगी का वीडियो बना लिया. वह वीडियो क्लिप जांच अधिकारी रत्ना सावंत को को भी मिल गई थी.

पुलिस की आईटी टीम ने जब उस वीडियो की जांच की तो पता चला कि तृप्ति ने ही उसे सोशल मीडिया प्लेटफार्म टिकटौक पर अपलोड किया था. तृप्ति के खिलाफ सबूत मिल गया तो पुलिस ने उसे पूछताछ के लिए थाने बुला लिया. वीडियो के आधार पर जब तृप्ति तेलवानी से पूछताछ की गई तो पहले तो वह साफ मुकर गई, लेकिन बाद में उस ने अपना गुनाह स्वीकार कर लिया.

21 वर्षीय तृप्ति तेलवानी ने बताया कि अपनी महत्त्वाकांक्षा और ख्वाहिशें पूरी करने के लिए उस ने सोशल मीडिया का सहारा लिया था. पूछताछ में यह बात सामने आई है कि पूछताछ में यह बात सामने आई है कि वह पुणे के छोटे से गांव की रहने वाली थी लेकिन उस के सपनों की उड़ान ऊंची थी. उस ने अपने दोस्तों और सहेलियों के बीच अपना एक क्रेज बना कर रखा था.

कालेज समय में नित नए फैशन के कपड़े पहनना, दिल खोल कर पैसे खर्च करना उस का शौक बन गया था. उस के इस अनापशनाप खर्च और मांग पर मांबाप परेशान रहते थे.

उन्हें चिंता इस बात की भी थी कि आगे चल कर इस लड़की का क्या होगा. वह तृप्ति को समझाने की काफी कोशिश करते थे पर तृप्ति ने मांबाप की सलाह को कभी गंभीरता से नहीं लिया.

तृप्ति के लक्षणों को देखते हुए मांबाप ने 16 साल की उम्र में ही उस की शादी पिपरी चिचवड़, पुणे के रहने वाले देवीदास तेलवानी के बेटे जय तेलवानी के साथ कर दी. यह 2017 की बात है. जय तेलवानी उस परिवार का एकलौता बेटा था.

25 वर्षीय जय तेलवानी सीधासादा युवक था. वह अपनी पढ़ाई पूरी कर अपने एक रिश्तेदार के प्लंबिंग बिजनैस में सहयोगी था.

तृप्ति को बहू के रूप में पा कर देवीदास और सभी घर वाले खुश थे. उन्हें क्या पता था कि तृप्ति के सुंदर चेहरे के पीछे उस की कितनी गंदी सोच छिपी है. इस का एहसास उन्हें धीरेधीरे होने लगा था.

आजादी के साथ रहने वाली तृप्ति को ससुराल जेल की तरह लगती थी. वह वहां से बाहर निकलने के लिए फड़फड़ाने लगी तो सास ने उसे समाज की मर्यादा का पाठ पढ़ाया. उस ने सास की सीख न सिर्फ हवा में उड़ा दी बल्कि वह उन से झगड़ने भी लगी.

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बातबात पर वह जय तेलवानी के मांबाप और परिवार वालों से लड़ बैठती थी, जिसे ले कर जय परेशान हो जाता था. जब वह तृप्ति को समझाने की कोशिश करता तो उस का सीधा जवाब होता, ‘‘मेरी शादी तुम्हारे साथ हुई है, तुम्हारे मांबाप और परिवार वालों के साथ नहीं.’’

घर के बने कीटनाशक स्प्रे

घर के पिछवाड़े लहलहाती ताजा सब्जियां, टोकरियों में तैयार किया सलाद गार्डन, हर्बल क्यारी, पेड़ों से सटी लताओं पर लगी तोरई या लौकी, गुच्छों में लटकते टमाटर, तरहतरह के फूल किसी भी सुघड़ गृहिणी के बागबानी के शौक के परिचायक हैं.

बागबानी के शौकीन अपनी कड़ी मेहनत और लगन से किचन गार्डन को संभालने की हर संभव कोशिश में लगे रहते हैं. उन की कोशिशों के बावजूद सब्जियों की पत्तियों पर कीड़े व फफूंदी लग जाती है. इस के चलते पत्तियों का झड़ना जारी रहता है.

आम धारणा है कि सब्जियों की पत्तियों पर बाजार में मौजूद कीटनाशकों का छिड़काव करने से कीड़े मर जाते हैं, पर कृषि वैज्ञानिक पौधों पर दवाओं के छिड़काव का समर्थन नहीं करते. ऐसे में आप अपने किचन में उपलब्ध सामान से कुछ ऐसे कीटनाशक स्प्रे झटपट तैयार कर सकते हैं जो पेड़ों के लिए हानिकारक नहीं होते.

एफिड, पाउडरी मिल्ड्यू, छोटी मकड़ी, फफूंदी आदि पौधों की फोटोसिंथेसिस प्रक्रिया को निष्क्रिय  बना सकें, इस के लिए प्राकृतिक तरीके से कीटनाशक स्प्रे बनाएं जो बनाने में आसान, ईकोफ्रैंडली, वातावरण का संतुलन बनाने में सहायक होने के साथसाथ झटपट व आसानी से तैयार हो जाते हैं.

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पौधों की देखभाल के लिए कीटनाशक स्प्रे बनाने के लिए स्प्रे बोतल, लिक्विड सोप, लहसुन पाउडर या पेस्ट और मिनरल औयल या बेबी औयल की जरूरत होती है.

किसी भी साधारण से किचन गार्डन में कीटपतंगों से निबटने के लिए इन सामग्रियों से कई प्रकार के कीटनाशक स्प्रे बनाए जा सकते हैं.

सोप स्प्रे कीटनाशक

सामग्री : एक चम्मच लिक्विड सोप, 3 से 5 लिटर पानी.

विधि : इन दोनों को अच्छी प्रकार से मिला लें. स्प्रे बोतल में डाल कर पौधे के पत्तों के दोनों ओर हलकाहलका स्प्रे करें. कीट खुदबखुद मर जाएंगे. ऐसा करने से पहले इस बात पर ध्यान अवश्य दें, ऐसा तो नहीं कि आप बालटी भर साबुन का पानी सीधे गमले या क्यारी में डाल रही हैं.

बेकिंग सोडा स्प्रे

सामग्री : एक चम्मच डिश वाशिंग लिक्विड, 3 से 5 लिटर पानी, 3 चम्मच बेकिंग सोडा.

विधि : इन तीनों चीजों का मिश्रण बना लें. इस घोल को स्प्रे बोतल में डाल कर कीटों से ग्रसित पौधों के पत्तों के दोनों ओर स्प्रे करें.

यदि पौधे ज्यादा खराब हैं तो गलेसड़े पत्तों को निकाल कर फेंक दें. फफूंदी लगे पौधों के लिए यह स्प्रे बहुत कारगर होता है.

लहसुन स्प्रे

सामग्री : एक गांठ लहसुन, 3 से 5 लिटर पानी.

विधि : लहसुन छील कर इस की कलियों को मिक्सी में एक कप पानी में अच्छी तरह से पीस लें. स्प्रे बोतल में डाल कर फ्रिज में एक दिन के लिए रख दें. अगले दिन अच्छी प्रकार से छलनी से इसे छान लें. फिर पानी में इसे डालें. स्प्रे बोतल में भर कर कीटग्रसित पौधों पर इस का हफ्ते में 1 या 2 बार छिड़काव करें.

लहसुन और मिर्चीयुक्त स्प्रे

सामग्री : 7-8 कलियां लहसुन,

एक चम्मच लाल पिसी मिर्च, एक कद्दूकस किया प्याज, एक चम्मच लिक्विड सोप, 3 से 5 लिटर गरम पानी.

विधि : सारी सामग्री को गरम पानी में घोल लें. 2 दिन रखा रहने दें. इस घोल का स्प्रे बोतल में डाल कर रखें और ग्रसित पौधों पर इस का छिड़काव करें. यह स्प्रे गोभी में लगने वाले कीड़ों जैसे रेंगते कैटरपिलर, एफिड और फ्ली बीटल को नष्ट करने में बहुत ही फायदेमंद होता है.

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दूध का स्प्रे

सामग्री : कुछ मात्रा में दूध.

विधि : भगोने में जो दूध बच जाता है, कई गृहिणियां इसे सिंक में फेंक देती हैं. ऐसा न करें, बल्कि इस में कुछ पानी मिला दें. स्प्रे बोतल में भर कर इस का छिड़काव फफूंदीयुक्त पौधे या जिस पर पाउडरी मिल्ड्यू कीट रहता हो, सप्ताह में 3 बार करें. पौधा हराभरा हो जाएगा.

अजब गजब: इस जोड़े ने हनीमून के लिए बुक कर ली पूरी ट्रेन

आज आपको एक ऐसे कपल के बारे में बताने जा रहे हैं, जो अपने हनीमून को खास बनाने के लिए एक ऐसा काम कर गए, जिसे जानकर आप हैरान हो जाएंगे. जी हां, इस कपल  ने पूरी स्पेशल ट्रेन अपने हनीमून के लिए बुक करा ली. तो आइए जानते हैं इस कपल के बारे में.

एक रिपोर्ट के अनुसार रेल विभाग से जारी की गई सूचना में बताया गया है कि 30 साल के ग्राहम विलियम्स लिन और 27 की सिल्विया प्लासिक ने नीलगिरी की पहाड़ियों में अपने हनीमून के लिए मेत्तुपलयम से उधगमंडलम के बीच सफर करने के लिए ये पूरी ट्रेन बुक कराई थी.

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ग्राहम और सिल्विया ने अपनी वन वे ट्रिप पर करीब तीन लाख रुपये खर्च करके नीलगिरी के खूबसूरत नजारों का मजा लिया.  मेत्तुपलयम और कून्नूर स्टेशन  के प्रबंधकों ने इस जोड़े का सम्मान पूर्वक स्वागत किया था.

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‘नींबू’ बना सबसे ‘मारक यंत्र’

अगर नींबू और नारियल रखने से वाहन की सुरक्षा होती तो भारत में कोई दुर्घटना ही नहीं होती. लड़ाकू विमान राफेल के टायर के नीचे ‘नींबू’ रखने से विमान की सुरक्षा हो ना हो पर हरियाणा और महाराष्ट चुनाव के पहले पूजापाठ के मुददे को वापस चर्चा में ला दिया है. राफेल के नीचे ‘नींबू’ देख कर विदेशी भले ही चौंक रहे हो पर भारत के लोग इसे धर्म से जोड़ कर देख रहे है. उनकी निगाह में यह धर्म और रक्षा से जुड़ा मसला है. जनता में इसी भ्रम को सरकार बनाये रखना चाहती है. जिससे धर्म के नाम पर उसे वोट मिलते रहे.

विजयादशमी के दिन केन्द्र के गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने फ्रांस में लड़ाकू विमान राफेल को खरीदने के बाद सबसे पहले नींबू और ओम लिखा तो उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कन्याभोज और गाय को गुड़ खिलाया. देश का एक वर्ग इन घटनाओं की आलोचना कर रहा है तो वहीं पूजा पाठ का समर्थन करने वाले लोग सरकार के कदम के साथ खड़े है. भाजपा को लग रहा है कि पूजापाठ के दम पर ही वह आगे भी चुनाव जीत जायेगी. ऐसे में वह अपने इस कदम की तारीफ कर रही है. देश की जनता पर जिस तरह से पूजापाठ का नशा चढा है. उसे भाजपा अपने लिये मुफीद मान रही है. यही वजह है कि हरियाणा महाराष्ट के विधानसभा चुनावों में स्टार प्रचारक के रूप में सबसे अधिक मांग उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की है.

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सरकार ने देश की सुरक्षा के लिये लड़ाकू विमान राफेल खरीदा. इसके बाद राफेल की सुरक्षा के लिये नींबू खरीदे. देश के रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने फ्रांस में राफेल पर 3 मिनट की उड़ान भरने से पहले राफेल पर ओम का निशान बनाया इसके बाद राफेल के टायर के नीचे नींबू रखने का टोटका किया. राफेल की खरीददारी में भ्रष्टाचार के आरोप में घिरी सरकार टायर के नीचे नींबू रखने के बाद सोशल मीडिया पर आलोचनाओं से घिर गई. लड़ाकू विमान राफेल से अधिक चर्चा नींबू मिर्चा की होने लगी. किसी ने इसे राफेल से अधिक ताकतवर बताया तो किसी ने इसको सबसे ताकतवार मान कर सीमा की सुरक्षा करने के लिये कहा.

रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने विजयादशमी के दिन फ्रांस में लड़ाकू विमान राफेल से उड़ान भरने से पहले राफेल के पहिये के नीचे नींबू रखे और विमान पर ओम का निशान बनाया. जैसे ही राफेल के पहिये के नीचे नींबू रखी तस्वीरें वायरल हुई आलोचनाओं का एक दौर सोशल मीडिया पर शुरू हो गया. देश में लड़ाकू विमान राफेल से अधिक चर्चा ‘नींबू मिर्चा’ की शुरू हो गई. सोशल मीडिया पर लोगों ने सरकार को सलाह देना शुरू कर दिया किया अब पाकिस्तान से सुरक्षा के लिये सीमा पर कंटीले तारों की जगह पर नींबू के पेड़ लगवाने चाहिये.
आम लोगों के द्वारा ही नहीं विपक्ष ने भी केन्द्र सरकार के इस काम की आलोचना की. टीवी चैनलों पर इसको लेकर बहस शुरू हो गई. केन्द्र में सरकार चलाने वाली भरतीय जनता पार्टी ने इसको धर्म और कर्मकांड से जोड़ कर इसका प्रचार किया. सरकार का यह काम कोई अचानक नहीं हो गया था. यह उनकी योजना का हिस्सा है. इसके बहाने वह हिन्दुत्व के एजेंडे का जनता के बीच मजबूती से रखना चाहते है. सरकार ने योजना के अनुसार विजयादशमी के दिन का चुनाव किया. विजयादशमी के दिन भारत में क्षत्रिय बिरादरी के शस्त्र पूजन का रिवाज है. इसी दिन राम के द्वारा रावण को मारे जाने को प्रतीकात्मक रूप से मनाया जाता है.

केन्द्रीय गृहमंत्री क्षत्रिय है. ऐसे में विजयादशमी के दिन उनको लड़ाकू विमान राफेल को लेने फ्रांस भेजा गया. फ्रांस में एक भव्य समारोह आयोजित करके लड़ाकू विमान भारत को दिया गया. रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने इसकी ओम बनाकर और नींबू रखकर इसकी पूजा की और फिर उडान भरी. भाजपा ने विजयदशमी, क्षत्रिय और शस्त्र पूजन को सामने रखा. लड़ाकू विमान के टायर के नीचे नींबू रखकर पूरा मामला पूजापाठ से जोड़ दिया. असल में भाजपा को लग रहा है कि उसका पूजा पाठ का मामला अभी भी जनता के बीच काम कर रहा है ऐसे में वह पूजापाठ को ही आगे कर रही है.

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भारत में टोटकों पर सबसे अधिक भरोसा किया जाता है. नींबू और मिर्चा का प्रयोग नजर उतारने के लिये बहुत पहले से किया जा रहा है. जनता में यह टोटके पूरी तरह से रचेबसे है. राफेल के टायर के नीचे नींबू को देखकर विदेशियो को भले ही आश्चर्य हो रहा था. वह सोच रहे थे कि विज्ञान के इस युग में भी भारत के लोग अभी भी पूजा और टोटकों में घिरे हुये है. अगर नींबू रखने से वाहन की सुरक्षा हो सकती तो भारत में कोई दुर्घटना ही नहीं होती. भारत में अधिकांश वाहनों की खरीददारी के समय नींबू और नारियल टायर के नीचे रखा जाता है.

दिशा पाटनी ने दिखाया सिक्स पैक एब्स

बौलीवुड एक्ट्रेस बागी गर्ल, दिशा पाटनी फिटनेस को लेकर काफी एक्टिव रहती हैं. वे अकसर सोशल मीडिया पर बहुत एक्टिव रहती हैं. अपने फैंस से कनेक्ट रहने के लिए वह अकसर इंस्टाग्राम हैंडल से वीडियोज और तस्वीरें शेयर करती रहती हैं. दिशा अपनी फिटनेस के साथ साथ जिमनास्ट के मूव्स के लिए भी फेमस हैं. हाल ही में दिशा ने एक मस्त हौट फोटोशूट करवाया है और  इस वीडियो को उन्होंने इंस्टाग्राम पर भी शेयर किया है. ये शूट calvin klein ब्रैंड के लिए किया गया है. सेक्सी ब्लैक ब्रा में दिशा बेहद बोल्ड और खूबसूरत लग रही थीं. इसमे उनका लुक बहुत ही खूबसूरत लग रहा था.

एक्टिंग कैरियर

बौलीवुड में फिल्म ‘एम एस धोनी  से सुशांत सिंह राजपूत के साथ अपने एक्टिंग करियर की शुरुआत करने वाली एक्ट्रेस दिशा पटानी कुछ फिल्मों से ही सबके दिलों पर छा गईं. अपने एक्टिंग और टैलेंट  और बोल्ड फोटो शूट की वजह से पर उन्होंने लाखों फैंस का दिल जीता और कुछ बोल्ड फोटो की वजह से ट्रोल का शिकार भी हुई. बोल्ड फोटो की वजह से कई भद्दे कमेंट्स का सामना भी करना पड़ा. आपको बता दें,  एक्ट्रेस दिशा पटानी किसी फिल्मी बैकग्राउंड से  नही हैं. आज वो जिस मुकाम पर है उसके लिए उन्हें काफी संघर्ष भी करना पड़ा था.

एक  रिपोर्ट के मुताबिक एक्ट्रेस दिशा पटानी ने कहा कि अगर लोग आपको पसंद नहीं करते तो इसमें आप कुछ नहीं कर सकते हैं. दिशा पटानी ने इंटरव्यू में कहा, ‘लोग हमेशा मेरे साथ दयालू रहे हैं और उन्होंने मुझे अपनाया है. अगर आपको जनता पसंद नहीं करती है तो इसका स्टार किड होने से कोई लेना-देना नहीं होता.अगर आप प्रतिभाशाली और मेहनती हैं तो लोग आपको जरूर अपनाएंगे.

दिशा पटानी ने आगे कहा, ‘ये बिल्कुल भी मैटर नहीं करता कि आप कहां से हैं. शाहरुख खान  उस समय कुछ नहीं थे जब वह फिल्म इंडस्ट्री में आए थे और आज देखिए उन्हें.’

वर्क फ्रंट

दिशा के वर्क फ्रंट की बात करें तो आखिरी बार दिशा पटानी फिल्म ‘भारत’ में नजर आईं थीं. इस फिल्म में उनके साथ सलमान खान और कैटरीना कैफ लीड रोल में थे. इसके बाद अब दिशा फिल्म ‘मलंग’ में नजर आने वाली हैं. इस फिल्म में उनके साथ अनिल कपूर और आदित्य रॉय कपूर लीड रोल में हैं. खबरों की माने तो दिशा जल्द ही एक अनाम मूवी में कार्तिक आर्यन संग नज़र आएंगी. और ‘किक 2’ जैसी फिल्मों में भी दिखाई देंगी.

बोल्ड लुक

दिशा पाटनी अपने लुक्स और तस्वीरों को लेकर काफी सुर्खियों में रहती हैं. इसके पहले दिशा ने बाथटब में लाइट मेक अप के साथ  कुछ फोटोज क्लिक कराई थी जिसमें उनके लुक्स को देखकर सभी  सभी दंग रह गए थे. दिशा ने एक इनरवेयर प्रोडेक्ट बेचने वाली कंपनी का प्रोडेक्ट इंडोर्स करते हुए फोटो पोस्ट की है. इस तस्वीर में बेहद बोल्ड लग रही हैं.

उनके रेड कलर की बिकनी में फोटो को देखने के बाद कुछ फैन्स उनकी तारीफ कर रहे हैं तो वहीं कुछ लोग नाराजगी जाहिर कर रहे हैं.

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ट्रोल की शिकार

दिशा की पोस्ट के कमेंट बौक्स में एक यूजर ने लिखा- ऐसी होती हैं भारतीय नारी? जिनको साड़ी पहननी होती है. ये अपना शरीर प्रदर्शन कर रही हैं. क्या यही संस्कार हैं? आप बॉलीवुड स्टार हैं इसका मतलब ये नहीं है कि आप कुछ भी करेंगी. थोड़ी तो शर्म कर लो. वहीं एक अन्य यूजर लिखता है- इतनी बेशर्मी क्यों? एक अन्य फौलोवर ने लिखा- शर्म कर लो भइया. दिशा की शेयर की गई इस फोटो को अबतक 16 लाख से ज्यादा लाइक्स मिल चुके हैं. जबकि कमेंट्स की संख्या 21 हजार से ज्यादा है. दिशा की पोस्ट पर पौजिटिव कमेंट्स से ज्यादा निगेटिव कमेंट्स ही किये गए हैं.

ऐसी अफवाह है कि दिशा अभिनेता टाइगर श्रौफ को डेट कर रही हैं. हालांकि दोनों ने ही अपने रिश्ते को लेकर चुप्पी साध रखी है.

‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’: कस्टडी केस जीतने से पहले इस कड़े इम्तिहान से गुजरेगा कार्तिक

छोटे पर्दे का मशहूर सीरियल ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ में लगातार महाट्विस्ट चल रहा है. फिलहाल कहानी का एंगल कैरव की कस्टडी केस के इर्द गिर्द घूम रही है. पिछले एपिसोड में आपने देखा कि पहली सुनवाई में कैरव की कस्टडी रद्द हो चुकी है. तो वही  दूसरी सुनवाई से पहले कार्तिक की वकील दामिनी मिश्रा नायरा के खिलाफ ठोस सबूत इकठ्ठा करने में जुटी है.

हाल ही में दिखाया गया है कि दामिनी ने ही कार्तिक और नायरा को किडनैप करवाया. और इतना ही नहीं उन गुंडों ने कार्तिक और नायरा को बेहोशी का इंजेक्शन भी दे दिया.  नशे की हालत में नायरा और कार्तिक अपनी पुरानी बातों को याद करने लगे और फिर इमोशनल हो गए थे और एक दूसरे के साथ रोमांटिक पल भी गुजारे. नशे के हालत में ही दोनों ने  फिर से शादी कर ली.

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आने वाले एपिसोड में आप देखेंगे कि कार्तिक और नायरा गुंडों से बचकर भाग निकलेंगे और दोनों खुद को बचाने के लिए सिंघानिया हाउस में छिप जाएंगे. और वो दोनों एक ही कमरे में पूरी रात गुजारेंगे. अब देखना ये दिलयस्प होगा कि जब वेदिका को पता चलेगा तो वो क्या करती है.

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असल आने वाले दिनों में सुवर्णा कार्तिक से कैरव की कस्टडी केस को वापस लेने के लिए कहेगी वो कार्तिक के समझाने की कोशिश करेगी और कहेगी, उसके फैसले से न वेदिका को खुशी मिलेगी और ना ही उससे नायरा को कुछ हासिल होगा. इन सबके बीच कहीं ना कहीं वह खुद भी काफी परेशान हो रहा है. अब तो ये आने वाले एपिसोड में ही पता चलेगा कि अपनी मां की बात सुनने के बाद कार्तिक क्या फैसला लेगा.

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शादी से पहले कौंट्रासैप्टिव पिल लें या नहीं ?

किशोरावस्था में अकसर किशोर दूसरे लिंग के प्रति आकर्षित हो शारीरिक संबंध बनाने के लिए उत्सुक रहते हैं. वे प्रेमालाप में सैक्स तो कर लेते हैं, परंतु अपनी अज्ञानता के चलते प्रोेटैक्शन का इस्तेमाल नहीं करते जिस के परिणामस्वरूप विभिन्न प्रकार की लैंगिक बीमारियों का शिकार हो जाते हैं.

आंकड़ों के अनुसार भारत में हर साल 15 से 19 वर्ष की 1.6 करोड़ लड़कियां गर्भधारण कराती हैं. इस छोटी उम्र में गर्भधारण करने का सब से बड़ा कारण किशोरों का अल्पज्ञान और नामसझी है. बिना प्रोटैक्शन के किए जाने वाले सैक्स से सैक्सुअली ट्रांसमिटेड इन्फैक्शन सर्वाइकल कैंसर और हाइपरटैंशन जैसी बीमारियां होने का खतरा रहता है. ये बीमारियां लड़के व लड़की दोनों को हो सकती हैं.

किशोरों में प्रैगनैंसी और असुरक्षित सैक्स से होने वाली बीमारियों को ले कर मूलचंद अस्पताल, दिल्ली की सीनियर गाईनोकोलौजिस्ट डा. मीता वर्मा से बात की. उन्होंने किशोरों के इस्तेमाल हेतु कौंट्रासैप्टिव पिल्स और उन के खतरों के बारे में विस्तार से जानकारी दी:

कौंट्रासैप्टिव पिल क्या है और इसे कब व कैसे लेना चाहिए?

यह इमरजैंसी कौंट्रासैप्टिव है. इसे पोस्ट कोर्डल और मौर्निंग आफ्टर पिल भी कहते हैं. आई पिल एक हारमोन है. इस का बैस्ट इफैक्ट तब होता है जब इसे सैक्स के 1 घंटे के आसपास लें. इसे 72 घंटों में 2 बार 24 घंटों के अंतराल में लिया जाता है. इमरजैंसी कौंट्रासैप्टिव की तब जरूरत होती है जब लड़की के साथ बलात्कार हुआ हो. अनचाहे गर्भ का खतरा हो या फिर कंडोम फट जाए. लोग विथड्रौल तकनीक का भी इस्तेमाल करते हैं. इस में यदि अंडरऐज ईजैक्यूलेशन हो गया हो तो फिर इस पिल का इस्तेमाल करते हैं. यदि पीरियड अनियमित हैं और आप सुरक्षा को ले कर चिंतित हैं तो इस स्थिति में भी इमरजैंसी कौंट्रासैप्टिव पिल्स की जरूरत होती है.

यदि कोई लड़की इसे आदत बना ले तो इस के क्या विपरीत प्रभाव हो सकते हैं?

नहीं, इसे आदत नहीं बनाना चाहिए. इस के बहुत से साइड इफैक्ट होते हैं. यदि लड़की किशोरी हो तो सब से पहले तो उसे सैक्स ऐजुकेशन होनी चाहिए. आजकल तो यह नैट में भी उपलब्ध है. 8वीं और 9वीं कक्षा की किताबों में भी इस की जानकारी दी गई है. लड़कियों को पता होना चाहिए कि यह पिल किस प्रकार काम करती है. इस की डोज हैवी होती है. हैवी डोज लेने से मासिकचक्र प्रभावित होता है. वह अनियमित हो जाता है. इस के अलावा उलटियां व चक्कर आना, स्तनों में दर्द, पेट में दर्द और असमय रक्तस्राव हो सकता है. यदि आप सैक्सुअली ऐक्टिव हैं तो आप को कौंट्रासैप्टिव का प्रयोग केवल इमरजैंसी में ही करना चाहिए. इस के साइड इफैक्ट में सब से बड़ा खतरा ट्यूब की प्रैगनैंसी का है. इसलिए यदि इमरजैंसी शब्द कहा जा रहा है तो केवल इमरजैंसी में ही प्रयोग करें. वैसे भी यह 90% ही कारगर है 100% नहीं.

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शादी से पहले इस पिल के इस्तेमाल करने पर क्या लड़की को शादी के बाद गर्भधारण करने में किसी तरह की परेशानी हो सकती है?

अगर लड़की ने लगातार दवा का इस्तेमाल किया है तो बिलकुल होगी. कभीकभार लेने पर परेशानी नहीं आएगी. यदि इस से मासिकचक्र प्रभावित हुआ है तो परेशानी होनी लाजिम है, क्योंकि आप ने ओवुलेशन प्रौसैस यानी अंडा बनने की प्रक्रिया को प्रभावित किया है. आई पिल का अधिक इस्तेमाल ट्यूब जोकि अंडे को कैच करती है की वेर्बिलिटी को रेस्ट्रेट कर देता है. ऐसे में जब आप शादी से पहले हर बार अपने ओवुलेशन को डिस्टर्ब करेंगी तो शादी के बाद गर्भधारण में मुश्किल हो सकती है.

बाजार में और किस तरह की कौंट्रासैप्टिव पिल्स हैं, जिन का इस्तेमाल किया जा सके?

भारत में केवल पिल उपलब्ध है, जो लिवोनोगेरट्रल है. इस में एक टैबलेट 750 माइक्रोग्राम की होती है. ये 2 टैबलेट 24 घंटों के अंतराल में ली जाती हैं. भारत में 1500 माइक्रोग्राम की टैबलेट अभी उपलब्ध नहीं है, क्योंकि उस की डोज अत्यधिक हैवी है. आजकल इमरजैंसी कौंट्रासैप्टिव में एक और दवा, अंडर ट्रायल है, जिसे यूलीप्रिस्टल कहते हैं. चूंकि यह अभी अंडर ट्रायल है, इसलिए इस का प्रयोग केवल डाक्टर की सलाह पर ही किया जाना चाहिए.

क्या इस पिल के अलावा कोई दूसरा बेहतर विकल्प है?

यह पिल तो इमरजैंसी कौंट्रासैप्टिव है ही, इस के अलावा और कई बर्थ कंट्रोल हैं. सब से अच्छा कंडोम ही है. यह बहुत सी संक्रमण वाली बीमारियों से बचाता है और इस के प्रयोग से इन्फैक्शन भी नहीं होता. इस के अलावा दूसरे

बर्थ कंट्रोल ऐप्लिकेशन भी बाजार में उपलब्ध हैं, जिन का इस्तेमाल किया जा सकता है, जैसे वैजिनल टैबलेट्स. इन्हें कंडोम के साथ इस्तेमाल करना चाहिए. यदि फर्टाइल पीरियड में सैक्स किया जाए तो कंडोम और वैजिनल टैबलेट, दोनों का ही प्रयोग करें. आजकल ओवुलेशन का पता लगाने के लिए किट्स भी उपलब्ध है. उन से पता लगाएं. वैजिनल टैबलेट्स और कंडोम का एकसाथ इस्तेमाल करें. इस से डबल सुरक्षा मिलेगी.

क्या कंडोम 100% सुरक्षित है?

हां, यदि इस का इस्तेमाल ठीक तरह से किया जाए तो यह बैस्ट कौंट्रासैप्शन है. लड़कियां सैक्स के दौरान वैजिनल टैबलेट्स का भी इस्तेमाल कर सकती हैं, जिस से सुरक्षा दोगुनी हो जाएगी.

यदि लड़की मां बनने के डर से एक की जगह 2 या 3 गोलियां खा ले तो इस के क्या दुष्प्रभाव हो सकते हैं?

नहीं, जो डोज जैसे लिखी है उसे वैसे ही लें. न तो दवा स्किप करें और न ही समय से पहले व ज्यादा लें. यदि आई पिल लेने के 3 हफ्ते बाद तक सैक्स के दौरान कंडोम का इस्तेमाल नहीं किया तो ट्यूब की प्रैगनैंसी हो सकती है. यदि 3 हफ्ते बाद तक पीरियड्स न हों तो प्रैगनैंसी टैस्ट करें.

यदि लड़की यह पिल खा कर किसी प्रकार की परेशानी महसूस करती है और घर वालों को इस बारे में न बता कर चुप रहती हैं तो क्या इस के कोई दूरगामी प्रभाव हो सकते हैं?

जब कोई लड़की सैक्सुअली ऐक्टिव है और किसी लड़के के साथ सैक्स कर सकती है तो वह चुपचाप जा कर डाक्टर से कंसल्ट भी कर सकती है. यदि लड़की कमा रही है और पढ़ीलिखी है तो डाक्टर की सलाह लेने में हरज क्या है? घर वालों से तो वैसे भी किसी तरह की परेशानी नहीं छिपानी चाहिए. किसी न किसी से जरूर शेयर करनी चाहिए. यदि पैसे नहीं हैं तो सरकारी अस्पतालों के डाक्टर फ्री सलाह देते हैं.

इस पिल से ट्यूब की प्रैगनैंसी होने का खतरा होता है जो जानलेवा हो सकता है. इस बात का हमेशा ध्यान रखें कि सुरक्षित होने के बावजूद आई पिल से गर्भाशय के बाहर की प्रैगनैंसी हो सकती है जिस से लड़की की जान को खतरा हो सकता है.

युवाओं को सुरक्षित सैक्स संबंधी क्या सलाह देना चाहेंगी?

युवाओं को यह बताना चाहूंगी कि यदि वे 18 साल से बड़े हैं और सैक्स करते हैं तो इस में कोई बुराई नहीं है, मगर कंडोम का जरूर इस्तेमाल करना चाहिए. असुरक्षित सैक्स एचआईवी, एसटीआई व सर्वाइकल कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों का कारण हो सकता है. लव, अफेयर, सैक्स और फिजिकल रिलेशनशिप अपनी जगह है और सुरक्षा अपनी जगह. शरमाएं नहीं, बल्कि सही सलाह लें.

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क्या आपको किसी खास मौके के लिए फटाफट बढ़ाने हैं बाल ?

अगर आपको किसी खास मौके के लिए बाल बढ़ाने हैं तो आपको कुछ टिप्स बताते है. जो  बाल बढ़ाने के लिए काफी मददगार साबित हो सकता है.

रेग्युलर ट्रिमिंग करवाएं

अगर आप जल्दी बाल बढ़ाना चाहती हैं तो आपको इन्हें रेग्युलर्ली ट्रिम करवाना होगा. इससे स्प्लिट एंड्स खत्म होते हैं, जिससे बाल टूटते नहीं और हेयर ग्रोथ होती है.

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हीट से डैमेज बचाएं

स्टाइलिंग प्रौडक्ट्स जैसे स्ट्रेटनर्स और कर्लर्स आपके बाल डैमेज करते हैं। बालों की तेजी से ग्रोथ के लिए उनका हेल्दी होना जरूरी है.

सही पोषण लें

बाल बढ़ाने के लिए आपको सही डायट लेनी चाहिए, बाल बढ़ाने के लिए सबसे जरूरी फैक्टर है. आपको प्रोटीन जैसे अंडे, दही और नट्स लेने की जरूरत है.

ज्यादा शैंपू न करें

रोजाना शैंपू करने से स्कैल्प के नेचुरल औइल निकल सकते हैं, जो बालों को रिपेयर करने के लिए जरूरी होते हैं. हफ्ते में 3-4 बार ही बाल धोएं.

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बालों में औयल जरूर लगाएं

सप्ताह में कम से कम दो बार अपने बालों का जरूर मसाज करें. इससे आपके बालों को सही पोषण मिलेगा.

फेस्टिवल स्पेशल : ऐसे बनाएं कस्टर्ड कसाटा

फेस्टिवल के मौके पर आप कस्टर्ड कसाटा जरूर ट्राई करें. यह स्वादिष्ट होने के साथ साथ खाने में भी लाजवाब है.

सामग्री

1/3 कप कस्टर्ड पाउडर

1/3 कप चीनी

1/3 कप पानी

3 सफेद ब्रैड किनारे कटी हुई

3 कप दूध

2 बड़े चम्मच काजू

पिस्ता व बादाम कटे हुए

2 बड़े चम्मच टूटीफ्रूटी

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बनाने की विधि

दूध में ब्रैड भिगो अच्छी तरह मैश कर लें. कस्टर्ड पाउडर, चीनी और पानी मिला कर घोल तैयार करें. एक नौनस्टिक पैन में आंच पर अच्छी तरह घोटें. गाढ़ा बन जाए. तब इसे निकाल लें.

अब दूधब्रैड वाला मिश्रण आंच पर घोटें. थोड़ा सा गाढ़ा हो जाए तो उसे भी निकाल लें. कस्टर्ड पाउडर वाले मिश्रण को ब्रैड वाले मिश्रण में मिला कर चर्न करें ताकि एकसार हो जाए.

ठंडा करें फिर एक ऐल्यूमिनियम के बरतन जिस में आइसक्रीम जमाते हैं उस में ड्राईफू्रट और टूटीफ्रूटी डाल कर फ्रीजर में रख दें. 6-7 घंटों में कस्टर्ड कसाटा तैयार हो जाएगा.

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– व्यंजन सहयोग : नीरा कुमार

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