Download App

सुलझ न सकी परिवार की मर्डर मिस्ट्री: भाग 2

सुलझ न सकी परिवार की मर्डर मिस्ट्री: भाग 1

अब आगे पढ़ें

आखिरी भाग

पुलिस दूसरे दिन भी वैज्ञानिक के परिवार की मौत की गुत्थी सुलझाने में जुटी रही. हालांकि मौके के हालात और सुसाइड नोट से साफ था कि डा. प्रकाश ने पत्नी, बेटी व बेटे की हत्या के बाद खुद आत्महत्या की थी. लेकिन फिर भी पुलिस यह सोच कर हर एंगल से जांच करती रही कि कहीं यह कोई साजिशपूर्ण तरीके से किसी बाहरी व्यक्ति की ओर से की गई वारदात तो नहीं है.

मामले की गुत्थी सुलझाने के लिए पुलिस को डा. प्रकाश के घर में बाथरूम में मिले 3 मोबाइल फोन से मदद मिलने की उम्मीद थी, इसलिए इन मोबाइलों की काल डिटेल्स निकलवाई गई. इस के अलावा इन मोबाइलों का डेटा रिकवर करने का प्रयास भी किया गया.

फोरैंसिक लैब की जांच में पता चला कि बाथरूम में मिले 3 मोबाइलों में एक वाटरप्रूफ था, लेकिन उस पर पैटर्न लौक था, जिस से वह खुल नहीं सका. पुलिस को दूसरे दिन डा. प्रकाश के घर से 2 मोबाइल और मिले. ये मोबाइल भी बंद थे. इन को भी साइबर एक्सपर्ट के पास भेजा गया. उन के फ्लैट से मिले लैपटौप और आईपैड को जांच के लिए सीआईडी की साइबर लैब भेजा गया.

पुलिस ने अदिति के दोस्तों से भी अलगअलग पूछताछ की. उन्होंने बताया कि अदिति ने उन से नौकरी छूटने की वजह से पापा के तनाव में होने की चर्चा की थी. अदिति के दोस्तों से पुलिस को ऐसी कोई ठोस वजह पता नहीं चली जिस से इस मामले की गुत्थी सुलझने में मदद मिलती.

सन फार्मा कंपनी में पूछताछ में पता चला कि डा. प्रकाश ने स्वेच्छा से नौकरी छोड़ी थी. कंपनी में उन का पद और सैलरी पैकेज काफी अच्छा था. कंपनी में किसी से उन का कोई विवाद भी सामने नहीं आया.

डा. सोनू सिंह के बारे में पुलिस को पता चला कि उन का बौद्ध धर्म से जुड़ाव था. उन्होंने अपनी सोसायटी में बौद्ध धर्म के अनुयाइयों की कम्युनिटी भी बनाई हुई थी. इस कम्युनिटी की वह ग्रुप लीडर थीं. सोसायटी में सोनू सिंह को बोल्ड महिला माना जाता था जबकि प्रकाश सिंह सौम्य स्वभाव के थे.

तीसरे दिन भी काफी माथापच्ची और जांचपड़ताल के बावजूद पुलिस को इस मामले में कोई तथ्य हाथ नहीं लगा. यह जरूर पता चला कि सोनू सिंह, अदिति और आदित्य की हत्या में जिस चाकू का उपयोग किया गया था, वह करीब एक साल पहले डा. प्रकाश सिंह द्वारा ही खरीदा गया था.

अदिति ने उस समय सोप डायनामिक्स स्टार्टअप शुरू किया था. वह घर में कौस्मेटिक व कुछ विशेष साबुन बनाती थी. अदिति ने साबुन व अन्य सामान के टुकड़े करने के लिए यह चाकू पिता से मंगवाया था.

डा. प्रकाश के घर मिले 4 कुत्तों को ले कर भी विवाद हो गया. ये कुत्ते अदिति का दोस्त उस की याद के रूप में सहेज कर अपने पास रखना चाहता था जबकि दूसरी तरफ अदिति की मौसी सीमा अरोड़ा इन कुत्तों को अपने साथ ले जाना चाहती थीं.

विवाद बढ़ने पर यह मामला पीपुल फौर एनिमल संस्था के जरिए सांसद मेनका गांधी तक पहुंच गया. मेनका गांधी के हस्तक्षेप से चारों कुत्तों को पुलिस की निगरानी में नैशनल डौग शेल्टर होम भेज दिया गया.

/ये भी पढ़ें- शराबी पति : क्यों झेलना ही पड़ता है ?

चौथे दिन नौकरानी जूली से पूछताछ में सामने आया कि सन फार्मा की नौकरी छोड़ने के बाद डा. प्रकाश अधिकांश समय घर पर रहते और यूट्यूब पर वीडियो देखते थे. इस से पुलिस ने अनुमान लगाया कि डा. प्रकाश ने शायद यूट्यूब देख कर हत्याकांड की योजना बनाई होगी.

नौकरानी ने बताया कि कुछ दिन पहले फ्लैट में फरनीचर का काम हुआ था. उस दौरान कारपेंटर अपना एक हथौड़ा इसी घर में छोड़ गया था. संभवत: उसी हथौड़े से डा. प्रकाश ने परिवार के 3 सदस्यों की जान ली.

पांचवें दिन पुलिस ने दोनों पक्षों के रिश्तेदारों की मौजूदगी में डा. प्रकाश के घर की तलाशी ली. इस की वीडियोग्राफी भी कराई गई. घर की अलमारियों और लौकरों में रखे दस्तावेजों की भी जांच की गई. हालांकि पुलिस को तलाशी और जांचपड़ताल में ऐसा कोई तथ्य नहीं मिला, जिस से डा. प्रकाश की परेशानी और इस हत्याकांड के पीछे के कारणों का पता चलता.

छठे दिन पुलिस को मोबाइल फोनों की जांच रिपोर्ट मिली. इस में बताया गया कि डा. सोनू व अदिति के मोबाइल में डेटा नहीं मिला. वाट्सऐप चैट व गैलरी से फोटो, वीडियो डिलीट थे. इस से यह नया सवाल खड़ा हो गया कि क्या डा. प्रकाश ने हत्या के बाद पत्नी व बेटी के मोबाइल का डेटा डिलीट किया था. अगर उन्होंने डेटा डिलीट किया था तो उस में ऐसे क्या मैसेज व फोटो थे. रिपोर्ट आने के बाद पुलिस ने इन मोबाइल फोनों के डेटा रिकवर करने के लिए साइबर एक्सपर्ट की मदद ली.

बाद में की गई जांच में पुलिस को ऐसा कोई तथ्य नहीं मिला, जिन से इस मामले में रहस्य की कोई परत उजागर हो पाती. इस बीच 8 जुलाई को डा. प्रकाश के परिजनों ने पुलिस उपायुक्त (पूर्व) सुलोचना गजराज को एक पत्र दे कर इस पूरे मामले को एक साजिश का परिणाम बताया और इस की जांच सीबीआई से कराने की मांग की. परिजनों ने सुसाइड नोट की हस्तलिपि पर भी सवाल उठाए.

डा. प्रकाश की बड़ी बहन के दामाद कौशल का कहना था कि इस वारदात के पीछे जमीन का विवाद भी हो सकता है. इस का कारण है कि उन की मामीजी यानी सोनू सिंह के पिता की वाराणसी की जमीन को ले कर सोनू सिंह और उन की बहन के बीच विवाद था.

पलवल वाले स्कूल की जमीन को ले कर भी कुछ विवाद चल रहे थे. यह जमीन डा. प्रकाश ने अपनी बहन शकुंतला से पैसे उधार ले कर खरीदी बताई गई. परिजनों का यह भी कहना था कि डा. प्रकाश का 2 साल पहले मेदांता अस्पताल में बाइपास औपरेशन हुआ था. औपरेशन से उन की जिंदगी तो बच गई थी, लेकिन वे अंदर से पूरी तरह खोखले हो गए थे.

कौशल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और हरियाणा के मुख्यमंत्री को इस मामले में पत्र लिख कर सुसाइड नोट की हस्तलिपि और दस्तखतों पर भी सवाल उठाए. इस के लिए उन्होंने डा. प्रकाश की ओर से कुछ दिन पहले दिए गए एक चैक की फोटोप्रति भी संलग्न की.

कौशल के अनुसार, सुसाइड नोट पर किए हस्ताक्षर पर डा. प्रकाश के जैसे हस्ताक्षर बनाने का प्रयास किया गया है जबकि वे असली हस्ताक्षर नहीं हैं.

यह बात भी सामने आई कि डा. प्रकाश अपनी ससुराल वालों की वाराणसी की जमीन एकडेढ़ करोड़ रुपए में बेचना चाहते थे. इस जमीन पर सोनू सिंह की बहन भी दावा जता रही थीं. जमीन बेचने के सिलसिले में डा. प्रकाश जल्दी ही बनारस भी जाने वाले थे.

चर्चा यह भी है कि डा. प्रकाश पर बैंकों और रिश्तेदारों का काफी कर्ज था. इस कर्ज को ले कर वह तनाव में थे. गुरुग्राम के मकान की किस्तें भी समय पर नहीं चुकाने की बात सामने आई थी.

सन फार्मा की नौकरी छोड़ने के बाद वह अलग से तनाव में थे. हालांकि कहा यही जा रहा है कि उन की हैदराबाद की एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में नई नौकरी की बात हो गई थी. इस के लिए वह 3 जुलाई को फ्लाइट से हैदराबाद भी जाने वाले थे, लेकिन इस से पहले ही यह मामला हो गया.

ये भी पढ़ें- समाज की दूरी से दो लोगों को फांसी: भाग 2

डा. प्रकाश की मौत के बाद उन की संपत्तियों को ले कर अलगअलग दावे जताने की चर्चा भी शुरू हो गई थी. हालांकि औपचारिक रूप से तो किसी पक्ष ने दावे नहीं किए थे, लेकिन दोनों ही पक्षों के लोग अपनेअपने तरीकों से डा. प्रकाश और उन की पत्नी की संपत्तियों और कर्ज के बारे में पता लगा रहे थे.

कहा जा रहा है कि डा. प्रकाश की अधिकांश संपत्तियां उन की पत्नी सोनू सिंह के नाम से हैं. सोनू की बहन सीमा अरोड़ा ने डा. प्रकाश के कुछ स्कूल खोलने के लिए स्टाफ को कह दिया है.

बहरहाल, डा. प्रकाश सिंह का हंसताखेलता खुशहाल परिवार उजड़ गया. कथा लिखे जाने तक पुलिस को इस मामले में कोई ऐसा सुराग नहीं मिला, जिस के जरिए रहस्य का परदा उठ पाता. डा. प्रकाश ने अपनी जान से ज्यादा प्यारी बेटी और बेटे के अलावा पत्नी को मौत के घाट उतारने के बाद खुद आत्महत्या क्यों कर ली, यह रहस्य सा बन कर रह गया है.

पुलिस को कोई चश्मदीद गवाह भी नहीं मिला. डा. प्रकाश के घर के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों से भी पुलिस कोई सुराग नहीं लगा सकी. ऐसे भी कोई साक्ष्य नहीं मिले कि इस वारदात में किसी बाहरी व्यक्ति का हाथ हो. इन सभी कारणों से वैज्ञानिक प्रकाश के परिवार की हत्या और आत्महत्या का मामला फिलहाल मिस्ट्री बन कर रह गया.

सौजन्य: मनोहर कहानियां

सावधान! बच्चों पर न डालें पढ़ाई का प्रेशर

अगर आप भी बच्चों पर पढ़ाई का प्रेशर डालते हैं तो हो जाइए सावधान क्योंकि बच्चों पर पढ़ाई का प्रेशर डालना मतलब बच्चों की जिंदगी को खतरे में डालना और उसकी जिंदगी बर्बाद करना है. एक बच्चा जब प्रेशर में आकर पढ़ाई करता है तो ना ही उसका पढ़ाई में मन लगता है और ना ही उसे वो अच्छे से कर पाता है.

आप सभी ने थ्री इडियड मूवी तो देखी ही होगी उस फिल्म का भी यही संदेश था कि मशीन बनकर या प्रेशर में आकर हम कभी भी पढ़ाई नहीं कर सकते हैं. हम सिर्फ एक मशीन ही बनकर रह जाते हैं.और फिर ऐसी पढ़ाई का कोई फायदा नहीं जो हमसे हमारी जिंदगी के खुशी के पल को छीन ले या जिंदगी को..

आपने खबरें तो बहुत सी सुनी होंगी कि बच्चें ने फेल होने के डर से आत्महत्या कर ली या फिर कम नंबर आए बच्चा डीप्रेशन  में चला जाता है. 2018 में एक रिर्पोट आई जिसके अनुसार हर 24 घंटे में करीब 26 बच्चों ने आत्महत्या की…इसका कारण था पढ़ाई का प्रेशर,सफल न हो पाने का डर….  पैरेंट्स अक्सर बच्चों को वो करने के लिए मजबूर करते हैं जो बच्चा नहीं करना चाहता जैसे कि अगर बच्चा मैथ्स नहीं पढ़ना चाहता या उसकी दिलचस्पी सिंगिंग या डासिंग में होती है तो भी उसे मजबूरी में मैथ्स लेना पड़ता है या उसे इंजिनियरिंग करने को कहा जाता है. ज्यादातर मां-बाप यही सोचते हैं कि उनका बेटा डौक्टर, ल़ौयर या इंजिनियर बने लेकिन अगर बच्चा वो नहीं करना चाहता तो बेमन से वो पढ़ाई करता है और फिर कई बच्चे फेल होने के डर से आत्महत्या कर लेते हैं तो कई इस डर से की वो अपनी जिंदगी में कुछ नहीं कर पाए.

ये भी पढ़ें- घरखर्च में पेरैंट्स का दखल कितना सही ?

बच्चों को  वो करने दें जिसमें उनकी रूची हो जरा सोचिए अगर आप उनको उनकी मर्जी की पढ़ाई करने देंगे उनपर प्रेशर नहीं डालेंगे तो बच्चा अपनी लाइफ के उन चीजों में आगे जा सकता है जो वो करना चाहता. आप खुद सोचिए क्या आज संगीत में करियर नहीं है, क्या आज फोटोग्राफी में करियर नहीं है,या फिर डासिंग में करियर नहीं है? कोई अच्छा पत्रकार बन रहा है तो कोई अच्छा पेंटर….

ये भी पढ़ें- क्या आप को भी है परफैक्ट साथी की तलाश ?

बच्चों पर पढ़ाई का प्रेशर कम होने से वो बिमार भी कम पड़ते हैं और साथ ही जब वो अपनी रुची का कार्य करते हैं तो उस कार्य में वो जरूर सफल होते हैं.आजकल प्रतिस्पर्धा इतनी बढ़ गई कि अगर पढ़ाई के प्रेशर की वजह से बच्चे को लगता है कि वो सफल नहीं हो पा रहा है ऐसे में वो कुछ गलत भी कर बैठता है.आगे निकलने की होड़ में वो नकल तक का सहारा लेता है जो कहीं से भी सही नहीं है.एग्जाम की टेंशन, लाइफ की टेंशन की वजह से नींद भी पूरी नहीं हो पाती है और बच्चा मानसिक तनाव से गुजरता है.

पढ़ाई के प्रेशर पड़ने से बच्चा दिमाग पर ज्यादा जोर देता है क्योंकि वो खुद उसे करना नहीं चाहता उसका मन नहीं होता.और ये बच्चे की सेहत के लिए बिल्कुल भी अच्छा नहीं होता.और पढ़ाई के नाम पर बच्चों को मशीन बना देना बिल्कुल भी सही नहीं है.एक रिर्पोट के मुताबिक जब बच्चों से ज्यादा उम्मीदें या आशाएं होती हैं जो कि बच्चा पूरा नहीं कर सकता है फिर भी अभिभावकों के कारण वो कोशिश करता है तो ऐसे में बच्चा सबसे ज्यादा तनाव में रहता है. माना कि हर अभिभावक चाहता है कि उसके बच्चे कुछ अच्छा करें लेकिन अच्छे के चक्कर में वो अपने बच्चों को मानसिक तनाव देते हैं साथ ही जब दूसरों से तुलना करते हैं तो बच्चे का आत्मविश्वास घटता है ऐसे में जो बच्चा करना चाहता है वो भी नहीं कर पाता है.इसलिए कभी भी अपने बच्चे की किसी दूसरे बच्चे से तुलना न करें.बच्चा जो करना चाहता है उसेक लिए उसे प्रेरित करें,अगर वो पढ़ाई में कमजोर है तो उसका उत्साह बढ़ाएं कि वो कर सकता है और उसे डांटे नहीं बल्कि प्यार से समझाएं और उसका साथ दें.

ये भी पढ़ें- पत्नी से छुटकारा लेने के लिए अपराध का सहारा ?

आजकल तो बच्चे खेल कूद में इतना आगे जा रहें हैं कि नेशनल गेम्स खेल कर गोल्ड मेडल जीत कर देश का मां-बाप का नाम रौशन कर रहे हैं…हो सकता है आपके भी बच्चें में कुछ ऐसी ही प्रतिभा हो.अगर आपके बच्चे को पढ़ाई करना बोरिंग लगता है तो उसके साथ खेल-खेल में पढ़ाई को मनोरंजनात्मक तरीके से पढ़ा सकते हैं जो आपके बच्चे को अच्छा लगेगा.बच्चों को कुछ समझाने के लिए उनके ही अंदाज में उनकी किसी मनपसंद चीज का उदाहर दें.इस तरह से आप उसके पढ़ाई को रोचक बना सकते हैं.

धन्नो : भाग 2

अनु को दिल्ली आए अब 10-12 वर्ष हो गए थे. अब तो वह शिक्षा मंत्रालय में, शिक्षा प्रणाली के योजना विभाग में कार्य करने लगी थी. अत: उस स्कूल के बाद छात्रों व अध्यापकों के साथ उस की नजदीकियां खत्म हो गई थीं. अकसर अनु को वहां की याद आती थी. उस स्कूल की लगभग सभी अध्यापिकाएं….सब के जीवन में कहीं न कहीं कोई न कोई कमी तो थी ही. कोई स्वास्थ्य से परेशान तो कोई अपने पति को ले कर दुखी. कोई समाज से तो कोई मकान से.

जहां सब सुख थे, वहां भी हायतौबा. मिसेज भंडारी बड़े हंसमुख स्वभाव की महिला थीं, संपन्न, सुंदर व आदरणीय. उन्हें ही अनु कार्यभार सौंप कर आई थी. वे अकसर अपनी सास के बारे में बात करती और कहती थीं, ‘‘मेरी सास के पास कोई दुख नहीं है, फिर भी वे दुख ढूंढ़ती रहती हैं, वास्तव में उन्हें सुखरोग है.’’

एक दिन अनु दिल्ली के एक फैशनेबल मौल में शौपिंग करने गई थी. वहां अचानक उसे एक जानापहचाना चेहरा नजर आया. करीने से कढ़े व रंगे बाल, साफसुथरा, मैचिंग सिल्क सलवार- सूट, हाथों में पर्स. पर्स खोल कर रुपयों की गड्डी निकाल कर काउंटर पर भुगतान करते हुए उन के हाथ और हाथों की कलाइयों पर डायमंड के कंगन.

‘‘भानुमतीजी, आप…’’अविश्वास के बीच झूलती अनु अपलक उन्हें लगभग घूर रही थी.

‘‘अरे, अनु मैडम, आप…’’

दोनों ने एकदूसरे को गले लगाया. भानुमती के कपड़ों से भीनीभीनी परफ्यूम की खुशबू आ रही थी.

अनु ने कहा, ‘‘अब मैं मैडम नहीं हूं, आप सिर्फ अनु कहिए.’’

अनु ने देखा 4-5 बैग उन्हें डिलीवर किए गए.

‘‘आइए, यहां फूडकोर्ट में बैठ कर कौफी पीते हैं,’’ अनु ने आग्रह किया.

‘‘आज नहीं,’’ वे बोलीं, ‘‘बेटी आज जा रही है, उसी के लिए कुछ गिफ्ट खरीद रही थी. आप घर आइए.’’

अनु ने उन का पता और फोन नंबर लिया. मिलने का पक्का वादा करते हुए दोनों बाहर निकल आईं. अनु ने देखा, एक ड्राइवर ने आ कर उन से शौपिंग बैग संभाल लिए और बड़ी सी गाड़ी में रख दिए. अनु की कार वहीं कुछ दूरी पर पार्क थी. दोनों ने हाथ हिला कर विदा ली.

भानुमतीजी की संपन्नता देख कर अनु को बहुत खुशी हुई. सोचने लगी कि बेचारी सारी जिंदगी मुश्किलों से जूझती रहीं, चलो, बुढ़ापा तो आराम से व्यतीत हो रहा है. अनु ने अनुमान लगाया कि बेटा होशियार तो था, जरूर ही अच्छी नौकरी कर रहा होगा. समय निकाल कर उन से मिलने जरूर जाऊंगी. भानुमतीजी के 3-4 फोन आ चुके थे. अत: एक दिन अनु ने मिलने का कार्यक्रम बना डाला. उस ने पुरानी यादों की खातिर उन के लिए उपहार भी खरीद लिया.

दिए पते पर जब अनु पहुंची तो देखा बढि़या कालोनी थी. गेट पर कैमरे वाली सिक्योरिटी. इंटरकौम पर चैक कर के, प्रवेश करने की आज्ञा के बाद अनु अंदर आई. लंबे कौरीडोर के चमकते फर्श पर चलतेचलते अनु सोचने लगी कि भानुमतीजी को कुबेर का खजाना हाथ लग गया है. वाह, क्या ठाटबाट हैं.

13 नंबर के फ्लैट के सामने दरवाजा खोले भानुमतीजी अनु की प्रतीक्षा में खड़ी थीं. खूबसूरत बढि़या परदे, फर्नीचर, डैकोरेशन.

‘‘बहुत खूबसूरत घर है, आप का.’’

कहतेकहते अचानक अनु की जबान लड़खड़ा गई. वह शब्दों को गले में ही घोट कर पी गई. सामने जो दिखाई दिया, उसे देखने के बाद उस में खड़े रहने की हिम्मत नहीं थी. वह धम्म से पास पड़े सोफे पर बैठ गई. मुंह खुला का खुला रह गया. गला सूख गया. आंखें पथरा गईं. चश्मा उतार कर वह उसे बिना मतलब पोंछने लगी. भानुमतीजी पानी लाईं और वह एक सांस में गिलास का पानी चढ़ा गई. भानुमतीजी भी बैठ गईं. चश्मा उतार कर वे फूटफूट कर रो पड़ीं.

‘‘देखिए, देखिए, अनुजी, मेरा इकलौता बेटा.’’

हक्कीबक्की सी अनु फे्रम में जड़ी 25-26 साल के खूबसूरत नौजवान युवक की फोटो को घूर रही थी, उस के निर्जीव गले में सिल्क के धागों की माला पड़ी थी, सामने चांदी की तश्तरी में चांदी का दीप जल रहा था.

‘‘कब और कैसे?’’

सवाल पूछना अनु को बड़ा अजीब सा लग रहा था.

‘‘5 साल पहले एअर फ्रांस का एक प्लेन हाइजैक हुआ था.’’

‘‘हां, मुझे याद है. अखबार में पढ़ा था कि पायलट की सोच व चतुराई के चलते सभी यात्री सुरक्षित बच गए थे.’’

‘‘जी हां, ग्राउंड के कंट्रोल टावर को उस ने बड़ी चालाकी से खबर दे दी थी, प्लेन लैंड करते ही तमाम उग्रवादी पकड़ लिए गए थे परंतु पायलट के सिर पर बंदूक ताने उग्रवादी ने उसे नहीं छोड़ा.’’

‘‘तो, क्या वह आप का बेटा था?’’

‘‘हां, मेरा पायलट बेटा दुष्यंत.’’

‘‘ओह,’’ अनु ने कराह कर कहा.

भानुमतीजी अनु को आश्वस्त करने लगीं और भरे गले से बोलीं, ‘‘दुष्यंत को पायलट बनने की धुन सवार थी. होनहार पायलट था अत: विदेशी कंपनी में नौकरी लग गई थी. मेरे टब्बर का पायलट, मेरी सारी जिंदगी की जमापूंजी.’’

‘‘उस ने तो बहुत सी जिंदगियां बचा दी थीं,’’ अनु ने उन के दुख को कम करने की गरज से कहा.

‘‘जी, उस प्लेन में 225 यात्री थे. ज्यादातर विदेशी, उन्होंने उस के बलिदान को सिरआंखों पर लिया. मेरी और दुष्यंत की पूजा करते हैं. हमें गौड तुल्य मानते हैं. भूले नहीं उस की बहादुरी और बलिदान को. इतना धन मेरे नाम कर रखा है कि मेरे लिए उस का हिसाब भी रखना मुश्किल है.’’

अनु को सब समझ में आ गया.

‘‘अनुजी, शायद आप को पता न होगा, उस स्कूल की युवा टीचर्स, युवा ब्रिगेड ने मेरा नाम क्या रख रखा था?’’

अस्वस्थ व अन्यमनस्क होती हुई अनु ने आधाअधूरा उत्तर दिया, ‘‘हूं… नहीं.’’

‘‘वे लोग मेरी पीठ पीछे मुझे भानुमती की जगह धनमती कहते थे, धनधन की माला जपने वाली धन्नो.’’

अनु को उस चपरासी की शरारती हंसी का राज आज पता चला.

‘‘कैसी विडंबना है, अनुजी. मेरे घर धन आया तो पर किस द्वार से. लक्ष्मी आई तो पर किस पर सवार हो कर…उन का इतना विद्रूप आगमन, इतना घिनौना गृहप्रवेश कहीं देखा है आप ने?’’

यह है दुनिया का दूसरा बड़ा पार्क, जो पहाड़ पर स्थित है

इस पार्क में सब से ऊपर हरक्यूलिस की विशाल प्रतिमा लगी है. इस के अलावा यहां पर खास तरह के हाइड्रो न्यूमेटिक उपकरण लगे हैं, जिन से यहां लगे फव्वारों में पानी प्रवाहित होता है. पिछली एक शताब्दी से टेक्नोलौजी में काफी परिवर्तन आया है. इधर कुछ दशकों से तो टेक्नोलौजी में ऐसी क्रांति सी आई है कि ज्यादातर चीजें डिजिटल होती जा रही हैं.

अब टेक्नोलौजी ने भले ही हर क्षेत्र में तरक्की कर ली है, लेकिन बीसवीं सदी के शुरुआती दौर तक ऐसा कुछ नहीं था. पुराने जमाने के बादशाहों और राजामहाराजाओं के महलों में फव्वारे भी होते थे, जिन के अवशेष अभी हैं. उस समय भव्य भवन कुछ इस तरह बनाए जाते थे कि उन में पंखे, कूलर अथवा एसी की जरूरत नहीं होती थी.

ये भी पढ़ें- 8 साल का चेस चैंपियन 

आप मुगल काल में बने किलों में जा कर पुराने जमाने की टेक्निक को देख समझ सकते हैं. लाल किला इस की साक्षात मिसाल है. बर्ग पार्क की बात करें तो दूसरे विश्वयुद्ध के समय बमबारी के दौरान इस पार्क को काफी नुकसान हुआ था. 1968 से 1974 के बीच इसे दोबारा आर्ट म्युजियम बनाया गया.

ये भी पढ़ें- इस गड्ढे से निकले 2720 किलो हीरे

हैडलाइनें जो दिखाई नहीं दीं: ‘नींबू-मिर्च’ ने मचाई देश की राजनीति में खलबली !

आज एक विशेष बैठक में निर्णय लिया गया कि सुरक्षा को मजबूत करने के लिए सीमा पर दो किलोमीटर तक नींबू और मिर्च की खेती की जाएगी. वैदिक ज्ञान से युक्त विशेषज्ञों से 5000 करोड़ का टेंडर बिना अनुबंध किया गया है. अब भारत पर किसी की टेढ़ी नजर नहीं लगेगी.

सुरक्षामंत्री ने खुद डाले नींबू के बीज –

भारत की सभी सीमाओं के आस-पास एक मजबूत सुरक्षा घेरा बनाने हेतु आज से भारत सरकार ने सभी सीमाओ पर नींबू की खेती करने की घोषणा की. इस ऐतिहासिक निर्णय का शुभारंभ खुद सुरक्षामंत्री जी ने नींबू के बीज डालकर किया. सरकार ने नींबू मिर्ची की खेती को आगे बढ़ाने के लिये विशेष फंड का इस बजट में प्रावधान किया.

घरों के बाहर नींबू-मिर्च लटकाना अनिवार्य घोषित –

सरकारी आदेश के अनुसार अपने व्यवसाय और परिवार को दूसरों की बुरी नजर से बचाने के लिये घरों के बाहर नींबू मिर्च लटकाना अनिवार्य घोषित किया गया है. जनता की सुरक्षा हेतु अब नींबू मिर्ची लगाना अनिवार्य है, वरना, जुर्माना लग सकता है. कोर्ट ने भी नींबू मिर्ची लगाने पर हरी झंडी दिखा दी है.

वाहनों पर भी नींबू-मिर्च टांगना अनिवार्य –

यातायात के नियमो में सुरक्षा को लेकर और कड़े नियम बनाए गए हैं. अब से लोगों को अपने वाहनों पर नींबू-मिर्च टांगना अनिवार्य है. नियम तोड़ने पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा. हालांकि, इसकी घोषणा बाद में की जाएगी. साथ ही कोर्ट में ही जुर्माने का भुगतान करना होगा.

ये भी पढ़ें- सड़क संशोधन चालान लगाम या लगान

मंत्रियों ने कुर्सियों से बांधे नींबू-मिर्च –

सरकार के इस फ़ैसले से प्रभावित होकर कुछ मंत्रीगण आज नींबू और मिर्च से बनी मालाएं लेकर अपने-अपने दफ़्तर पहुंचे और मालाएं अपनी-अपनी कुर्सी से बांध दीं. अब कुर्सी चले जाने के डर से रात में चिंताग्रस्त हो उन्हें जागना नहीं पड़ेगा.

नींबू-मिर्च की खेती पर अनुदान की घोषणा –

सरकार ने नींबू-मिर्च की खेती करने पर अनुदान की घोषणा की. ऊर्जा विभाग ने किसानों को दी जाने वाली बिजली पर प्रति यूनिट 10 पैसे छूट की घोषणा की.

सरकार के फैसले की खबर का असर –

  1. नींबू मिर्ची के भावों में भारी उछाल.
  2. किसानों के चेहरे खिले.
  3. सेंसेक्स ने लगाई छलांग.
  4. नींबू मिर्ची की कालाबाजारी शुरू.

मुफ्त नींबू-मिर्च के लिए जुटी भीड़, लाठीचार्ज में दो घायल

सरकार ने घोषणा की कि वह राशन की दुकानों पर नींबू-मिर्च सबको मुफ्त में देगी. इस खबर से राशन की दुकानों पर भारी भीड़ जुट गई. भीड़ को नियंत्रित करने के पुलिस ने लाठी चलाई. इसमें दो की हालत गंभीर बनी हुई है. सरकार ने मामले में जांच कमेटी का गठन किया. दूसरी तरफ, बैंक कर्मचारियों के काम में बढ़ोतरी हो गई है क्योंकि नींबू-मिर्च की खेती के लिए लोन लेने वालों की भीड़ बढ़ गई है.

ये भी पढ़ें- राफेल पर राजनाथ की “शस्त्र पूजन नौटंकी”

पीओके को अपने आधिपत्य में लाने का नया फार्मूला –

पूरे POK में राफेल के द्वारा नींबू-मिर्च फैलाए जाएंगे. इससे पाक खुद-ब-खुद POK भारत को सौंप देगा.

नींबू-मिर्च व हवन सामग्री के साथ बाबाओं को सीमा पर किया गया तैनात –

सरकार द्वारा जल्द ही समस्त बाबाओं को नींबू-मिर्च और हवन सामग्री लेकर देश सुरक्षा की दृष्टि से सीमा पर तैनात रहने के अनिवार्य आदेश दिये जा रहे हैं.

पाकिस्तान की नज़र हमारे कश्मीर पर है. केसर-वेसर की खेती छोड़कर कश्मीर में नींबू के बाग लगवाए जाने चाहिए और मिर्ची की खेती शुरू करवानी चाहिए, फिर देखिए दुश्मन देश आंख उठाकर भी देखने की हिम्मत नहीं करेगा.

राफेल के गले मे नीम्बू मिर्ची की माला
बुरी नज़र वाले तेरा मुंह काला
हिन्दुस्तानी टोटका है दमदार
क्या कर लेगा अब पकिस्तान
क्या कर लेगा चाइना वाला

 ‘गी टीवी’, ‘कल तक’, ‘बिडिंया टीवी’ और ‘सिपब्लिक चैनल’ चैनल के बीच मची होड़…

आज ‘गी टीवी’ एक खोजी पत्रकार ने खोज निकाला कि जिन जिन लड़ाइयों में भारत को हार का सामना करना पड़ा है, उसमें वायुसेना के विमान बिना सुरक्षा के निकल गये थें. वहीं अन्य युद्धों में जहां सुरक्षा नियमों का पूर्ण पालन हुआ यानी युद्धक विमानों को नींबू मिर्ची की शक्ति से लैस कर उतारा गया वहां दुश्मन को आसानी से धूल चटा दिया गया.

वहीं ‘कल तक’ के विशेष संवाददाता ने खबर दी है कि अब घरेलू विमानों को भी इस विशेष सुरक्षा से लैस होने की सलाह दी गई है.

‘बिडिंया टीवी’ के खजत शर्मा ने इस खबर की पुष्टि की है कि अमेरिका, इंग्लैंड, आस्ट्रेलिया, फ्रांस सहित कई यूरोपीय देशों ने सुरक्षा के विभिन्न टोटकों को भारत से आयात करने में रुचि दिखाई है. यहां तक की राफेल निर्माताओं ने अगली खेप की सप्लाई से पहले इन विभिन्न प्रतीकों को बाय डिफाल्ट शामिल करने की बात की है.

‘सिपब्लिक चैनल’ में तो एक गर्मा गर्म बहस में एक नये मंत्रालय की आवश्यकता पर बल दिया गया जो प्राचीन संस्कृति के नाम पर भूले बिसरे विस्मृत परंपरागत टोटकों को फिर से प्रयोग में लाने के लिए प्रयास करेगा. बहस में इस बात पर भी बल दिया गया कि टोटकों पर सिर्फ रक्षा मंत्रालय का ही हक न रहे इस पर विशेष ध्यान दिया जाए.

पाकिस्तान ने बुलाई आपात बैठक…

सारे चैनलों पर ये दिन भर दिखाया जाता रहा कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री भारत के इस नये रक्षा प्रणाली से हतप्रभ हो एक आपातकालीन बैठक बुलाई है जिसमें सिंध पंजाब और लाहौर के पुराने टोटकों को पुनर्जीवित करने के बारें में विचार किया जाएगा. वहीं चीन के अखबारों में इस बाबत हंसी उड़ाई गई कि टोटकों के उपयोग में भारत अभी उनसे बहुत पीछे है. ज्ञातव्य है कि देश में चीनी सामानों की तरह चीनी टोटकों की भी भारी बिक्री होती है.

ट्विटर-फेसबुक पर दूसरे टोटकों की चर्चा…

इस बीच टिव्टर, फेसबुक और वाट्सएप में भी टोटकों का बाजार गर्म रहा. लोग नींबू मिर्ची से अधिक प्रभावी टोटकों की चर्चा करते दिखें. विपक्ष ने इस बात पर सरकार की टांग खींचने में कोई कसर नहीं छोड़ी है कि उन्होंने नींबू जैसे छोटे टोटके का प्रयोग किया है, कम से कम संतरे का सहारा लिया जा सकता था.
फिलहाल नींबू मिर्ची की शक्ति पर शोध कार्य शुरू कर दिया गया है.

बुआ जी ने भी अपनाया टोटका…
दीपू को बुखार है? तो जरूर किसी की बुरी नजर लगी होगी. अरे, डौक्टर फोक्टर क्या करेगा. एक काम करो, दीपू के सिर के ऊपर से पैर तक सात बार नींबू वार लो और फिर उसके बाद इस नींबू के चार टुकड़े करके किसी सुनसान जगह पर या किसी चौराहें पर फेंक आओ और हां, नींबू के टुकड़े फेकने के बाद पीछे मुड़कर न देखना. देखना तुम्हारा दीपू एकदम भलाचंगा हो जाएगा.

एडिट बाय- निशा राय

अपनी अपनी खुशियां : भाग 2

उस ने उसे मजबूर तो नहीं किया था? संजय को बुलाने से पहले वह उस से पूछ तो लेती, सलाह तो कर लेनी चाहिए थी. और अब नौकर की तरह थैला थमा कर उसे बाजार की ओर ठेल दिया है. यह ठीक है कि शिखा को उस ने घर में पूरा हक देने का वादा जरूर किया था, मगर उसे एकदूसरे की बेइज्जती करने का तो अधिकार नहीं है.

इस की कुछ न कुछ सजा जरूर संजय और शिखा को मिलनी चाहिए. वे दोनों फूड पौयजन से बीमार हो जाएं तो कैसा रहे? रूपेश के दिमाग में एकदम विचार उभरा. हां, यह ठीक रहेगा. उस के कदम एक डिपार्टमैंटल स्टोर की ओर बढ़े.

‘‘आप के यहां कोई ऐसी डब्बाबंद सब्जी है जिस से फूड पौयजन होने का खतरा हो?’’ उस ने सेल्समैन से सीधा सवाल किया.

‘‘क्या मजाक करते हैं, साहब? हमारे यहां तो बिलकुल ताजा स्टौक है,’’ सेल्समैन ने दांत निकालते हुए कहा.

‘‘एकआध डब्बा भी नहीं?’’

‘‘क्या आप स्वास्थ्य विभाग से आए हैं?’’ सेल्समैन ने सतर्क हो कर पूछा.

‘‘नहीं, डरो नहीं. हां, यह बताओ कि कोई ऐसा डब्बा…’’

‘‘जी नहीं. हम इमरजैंसी से पहले और इमरजैंसी के बाद भी अच्छा ही माल बेचते रहे हैं,’’ सेल्समैन ने कहा.

‘‘अच्छा, कोई ऐसी दुकान का पता बता दो जहां ऐसी डब्बाबंद सब्जी मिल जाए.’’ अपनी बेइज्जती के बाद की भावना से पागल हो रहे रूपेश ने 500 रुपए का नोट सेल्समैन की तरफ सरकाया.

‘‘क्रांति बाबू, जरा पुलिस को फोन करना. यह पागल आदमी किसी की हत्या करना चाहता है,’’ सेल्समैन ने टैलीफोन के करीब बैठे एक नौजवान से कहा.

पुलिस का नाम सुन कर रूपेश उड़नछू हो गया. 500 रुपए का नोट काउंटर से उठाने की भी उसे सुध न रही, संजय व शिखा को बीमार कर देने का विचार भी उस के दिमाग से उड़ गया. अब तो वह उन दोनों की सेहत ठीक रहने की ख्वाहिश कर रहा था. उस के डरे हुए मस्तिष्क में यह विचार उभरा कि संजय व शिखा को कुछ हो गया तो सेल्समैन की गवाही पर वह पकड़ लिया जाएगा.

रात को खाने के बाद कौफी का दौर चला. वे चारों बैठक में बैठे थे. संजय अपने चुटकुलों से सब को हंसाता रहा.

‘‘क्या बात है, डार्लिंग, तुम कुछ नहीं बोल रहे हो?’’ अर्चना ने रूपेश के करीब सरकते हुए कहा.

‘‘मैं तो कहता हूं, रूपेशजी, यदि सब लोग आप की तरह समझदार हो जाएं तो प्रेम के कारण होने वाली सारी समस्याएं समाप्त हो सकती हैं,’’ संजय ने कहा.

‘‘और प्रेम में निराश हो कर आत्महत्याएं भी कोई न करे,’’ अर्चना बोली.

‘‘मानव जाति को कितना अच्छा सुझाव दिया है रूपेशजी ने,’’ शिख ने कहा.

‘‘मगर पहले तो तुम अडि़यल घोड़े की तरह दुलत्तियां झाड़ रही थीं, मरनेमारने की धमकियां दे रही थीं,’’ रूपेश ने शिखा की तरफ देख कर कहा.

‘‘तब मैं तुम्हारे दिल की गहराई नाप नहीं पाई थी.’’

‘‘अच्छा भई, तुम दिल की गहराइयां नापो. हम तो नींद की गहराइयों में उतरने चले,’’ संजय उठ खड़ा हुआ, ‘‘शिखा डार्लिंग, सोने का कमरा किधर है?’’

‘‘वह बाएं कोने वाला इन का है और दाएं वाला हमारा.’’

‘‘अच्छा भई, गुडनाइट,’’ स्लीपिंग गाउन सरकाता हुआ संजय दाईं ओर के सोने के कमरे की ओर बढ़ गया.

संजय के चले जाने के बाद कुछ देर तक अर्चना अंगरेजी पत्रिका के पन्ने पलटती रही. फिर वह भी अंगड़ाई ले कर उठ खड़ी हुई.

‘‘सोना नहीं है, रूपेश डार्लिंग?’’

‘‘तुम चलो, मैं थोड़ी देर और बैठूंगा.’’ रूपेश ने अनमने स्वर में कहा.

‘‘ओके, गुडनाइट.’’

‘‘गुडनाइट,’’ रूपेश कुछ नहीं बोला लेकिन शिखा ने स्वेटर पर सलाई चलाते हुए कहा.

फिर बैठक में खामोशी छा गई. घड़ी की टिकटिक और शिखा की सलाइयों की टकराहट इस खामोशी को तोड़ देती. रूपेश अनमना सा कुरसी पर बैठा रहा.

‘‘अब सो जाइए, 1 बजने को है, मुझे तो नींद आ रही है,’’ शिखा ऊन के गोलों में सलाइयां खोंसती हुई बोली.

शिखा ने स्वेटर और ऊन के गोलों को कारनेस पर टिका कर एक अंगड़ाई ली, रूपेश की तरफ देखा और और फिर पलट पड़ी दाएं कोने वाले सोने के कमरे की ओर.

‘‘रुक जाओ, शिखा,’’ रूपेश तड़प कर शिखा और कमरे के दरवाजे के बीच बांहें फैला कर खड़ा हो गया, ‘‘बेशर्मी की भी हद होती है.’’

‘‘बेशर्मी, कैसी बेशर्मी? रूपेश डार्लिंग, तुम ने मुझे जो हक दिया है मैं उसी का इस्तेमाल कर रही हूं. हट जाओ, मेरी वर्षों से मुरझाई हुई खुशियों के बीच दीवार न बनो. मुझे खुशियों का रास्ता दिखा कर राह में कांटे न बिछाओ.’’

‘‘अपने पति के सामने ऐसा कदम उठाते हुए तुझे डर नहीं लगता? शर्म नहीं आती?’’

‘‘डर, शर्म आप से? क्यों? यह तो बराबरी का सौदा है. रात काफी हो चुकी है, सो जाइए. आप का कमरा उधर है,’’ शिखा ने बाएं कोने में कमरे की ओर इशारा किया, ‘‘छोडि़ए, मेरा रास्ता.’’

‘‘बेशर्म, मैं ने सपने में भी नहीं सोचा था कि तुम इतनी गिर सकती हो. तुम्हारी इस हरकत से एक पति के दिल पर क्या गुजर सकती है, यह तुम ने कभी सोचा है?’’ रूपेश की आंखें क्रोध से जल उठीं.

‘‘मर्द जब दूसरी पत्नी ब्याह कर लाता है तब क्या अपनी पहली पत्नी के दिल में उठने वाली चीखों की शहनाइयों के शोर को सुनता है? रातरातभर कोठों पर ऐश की शमाएं जलाने वाले पति कभी अपनी पत्नी के दिल के अंधेरों में झांक कर देखते हैं? हर जवान लड़की पर लार टपकाने वाला पति कभी यह भी सोचता है कि उस की पत्नी के गालों पर आंसू के निशान क्यों बने रहते हैं? आप ने जब अर्चना को लाने की तजवीज पेश की थी, तब मैं भी रोईचिल्लाई थी. अब मैं संजय के पास जा रही हूं तो आप क्यों चीख उठे?’’

‘‘मैं उस का सिर तोड़ दूंगा,’’ रूपेश कमरे की तरफ बढ़ा.

‘‘अरे, रुको तो,’’ शिखा ने उस की बांह पकड़ ली.

‘‘मैं कुछ सुनना नहीं चाहता. उसे इसी वक्त चलता कर दो.’’

‘‘और अर्चना?’’

‘‘वह भी जाएगी. मेरा फैसला गलत था. मैं अंधे जज्बात की धारा में बह गया था,’’ रूपेश ने हथियार डाल दिए.

‘‘अंधे जज्बात नहीं, वासना ने तुम्हें अंधा कर दिया था. रूपेश भैया,’’ संजय  पूरे कपड़े पहन अतिथिकक्ष के दरवाजे पर खड़ा था.

रूपेश कभी सोने के कमरे की तरफ और कभी अतिथिकक्ष के दरवाजे पर खड़े संजय की ओर देख रहा था.

‘‘जी हां, आप का खयाल ठीक है. मैं सोने के कमरे में स्लीपिंग सूट पहन कर गया जरूर था. किंतु दूसरे दरवाजे से बाहर निकल गया था,’’ संजय ने कहा, ‘‘आप को फिर कोई शो करना हो तो याद कीजिएगा. यह रहा मेरा कार्ड.’’

‘नितिन…निर्देशक तथा स्टेज आर्टिस्ट,’ रूपेश कार्ड की पहली पंक्ति पर अटक गया.

‘‘आगे हमारे ड्रामा क्लब का पता भी लिखा है. नोट कर लीजिए,’’ नितिन मुसकरा दिया.

रूपेश मुंह फाड़ कभी कार्ड को तो कभी उस युवक को देख रहा था, जो संजय से नितिन बन गया था.

‘‘यह नितिन है, हमारे शहर के माने हुए कलाकार और भैया के जिगरी दोस्त. जब मैं ने भैया को आप की अर्चना को साथ रखने की जिद के बारे में लिखा तब उन्होंने नितिन की सहायता से यह सारा नाटक रचवाया,’’ शिखा ने सारी बात समझाते हुए कहा.

‘‘ओह,’’ रूपेश ने एक लंबी सांस ली और धम से सोफे पर बैठ गया.

तापसी पन्नू ने कंगना रानौत की बहन रंगोली चंदेल से ये कहा, पढ़े पूरी खबर

इन दिनों कंगना रानौत की बहन ने हर किसी से पंगा लेना शुरू कर दिया है. फिर चाहे मीडिया हो या कलाकार. हाल ही में जब विश्व प्रसिद्ध शौर्प शूटर चंद्रो तोमर और प्रकाशी तोमर की जिंदगी पर बनी फिल्म ‘‘सांड की आंख’ का ट्रेलर लांच हुआ, तो रंगोली चंदेल ने तापसी पन्नू के खिलाफ मोर्चा खेलते हुए उनके अभिनय पर कई तरह की टिप्पणी कर डाली. इस पर तापसी ने सोशल मीडिया पर कुछ जवाब दिया, पर फिर भी रंगोली चंदेल ने आपना काम जारी रखा.

हाल ही में जब तापसी पन्नू से हमारी ‘एक्सक्लूसिव मुलाकात’  हुई, तो ‘सांड़ की आंख’ का ट्रेलर आने के बाद उठे विवाद पर बड़ी साफगोई से तापसी ने कहा- ‘‘मुझे यह सवाल बहुत ही स्टूपिड/ मुर्खतापूर्ण लगता है, जब एक कलाकार/अभिनेत्री से यह पूछा जाए कि इस उम्र या इस लुक का किरदार क्यों निभा रही हैं ?

ये भी पढ़ें- ‘कार्तिक और नायरा’ की शादी की खबर सुनकर, ‘वेदिका’ का क्या होगा रिएक्शन

मैं तो कलाकार हूं. मेरा काम ही है दूसरे किरदार में ढलना. मैं हर फिल्म में तापसी बनकर तो नहीं आउंगी. यह आधारहीन व मूर्खतापूर्ण बात लगी, पर जब कुछ लोगों ने यह बात उठायी,  तो मुझे लगा कि कम से कम एक बार में सोशल मीडिया के द्वारा इसका जवाब दे दूं. जिससे बार बार मुझसे यह सवाल न पूछा जाए. मगर कुछ लोगों ने मुझे मुफ्त में प्रचार देने का ठेका ले रखा है. यह आश्चर्यजनक बात है कि मेरे पास मेरा प्रचार करने के लिए वक्त नहीं है, पर बाकी लोग मेरा प्रचार कर रहे हैं.’’

जब हमने उनसे पूछा कि ‘क्या इसकी मूल वजह यह है कि वर्तमान समय में कलाकारों के बीच असुरक्षा की भावना कुछ ज्यादा हो गयी है? ’तो तापसी ने इसके लिए सोशल मीडिया को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा-‘‘सोशल मीडिया ज्यादा हो गया है. पहले हर बात लोगों तक पहुंचाने का जरिया सिर्फ पत्रकार हुआ करते थे. पहले पत्रकार के माध्यम से ही यह बातें कही जाती थीं, जिसमें समय लगता था. जब पत्रकार इंटरव्यू के लिए मिलता था, तभी इस तरह की बाते की जा सकती थी. पर इस बीच जो समय बीतता था,  उसमें सब कुछ ठंडा पड़ जाता था. मगर अब सोशल मीडिया ऐसा हथियार है कि दिमाग में कोई बात आयी, तुरंत सोशल मीडिया पर उसी मूड़ में लिख मारा. तीर कमान से निकलकर कभी सही तो कभी गलत जगह लगता है, पर लगता है. सोशल मीडिया में सब कुछ इंस्टेंट/त्वरित हो गया है, तो इंस्टेंट मूड़ में स्टेंट प्रतिक्रिया आ जाती है. यह भावनाएं तो इंसान की हैं, पहले भी होती थी, आज भी हैं.’’ पर तापसी सोशल मीडिया को महज नुकसानदायक भी नही मानती. वह कहती हैं- ‘‘जब हर चीज लिमिट से बाहर हो तो नुकसान करती है. मैं सोशल मीडिया के हर प्लेटफार्म पर हूं, क्योंकि सोशल मीडिया पर कुछ सकारात्मक चीजें भी हैं. मैं सभी खबरें औन लाइन पढ़ती हूं. दूसरे देशों में बैठे लोग, जिन्हें मैं पसंद करती हूं, उन तक पहुंच सकती हूं. उनके बारे में मुझे सोशल मीडिया से जानकारी मिलती है. कुछ लोगों से मैं सोशल मीडिया के कारण जुड़ी रहती हूं.

पर सोशल मीडिया में कुछ नकारात्मक बातें भी हैं. कुछ लोग कुछ भी बोलते रहते हैं.’’

आखिर कंगना रानौत की बहन रंगोली चंदेल सोशल मीडिया पर तापसी के खिलाफ कुछ न कुछ क्यों लिखती रहती हैं? इस पर तापसी ने कहा- ‘‘पता नहीं, उनको मुझसे प्यार क्यों है? पर उनसे कहना चाहती हूं कि आप मेरी जिंदगी में महत्व नही रखती. मैं आपसे दरख्वास्त करती हूं कि प्लीज आप अपना समय, अपनी ताकत/इफर्ट मुझ पर व्यर्थ में मत गंवाओ. क्योंकि आप दीवार पर सिर मारोगी, तो आपका सिर फटेगा. मैं दीवार हूं. मुझे अभिनय नही आता. मैं फिल्मों में यूं ही दीवार की तरह खड़ी रहती हॅूं. फिर भी आप अपना समय मेरे लिए बर्बाद न करें. मैं आपकी बहन की शुभचिंतक तो नहीं, मगर प्रशंसक जरुर हूं. कृपया समय व अपनी एनर्जी बर्बाद न करे, आपको कोई प्रतिक्रिया नही मिलेगी. आप जो कर रहे हो, करते रहो, मेरी फिल्मों या मेरे पीछे पड़ने से न आपको कुछ मिलेगा और न ही मुझे.’’

रंगोली चंदेल ने सोशल मीडिया पर लिखा है कि तापसी को अभिनय नही आता. वह तो सस्ती कौपी हैं. इस पर तापसी कहती हैं-‘‘देखिए, अंतिम निर्णायक तो दर्शक ही है कि मुझे अभिनय आता है या नही, मेरी फिल्में अच्छी हैं या नहीं. इसका निर्णय आप या मैं खुद नहीं कर सकती. इसका निर्णय हमारे दर्शक ही करेंगे. मैंने इतने साल तक इतनी फिल्में कर ली. मैं हर वर्ष चार चार फिल्में कर ली. साढ़े नौ वर्ष का करियर सफलता पूर्वक चलता आया है, तो मेरे अंदर कुछ तो ऐसा होगा, जिसे दर्शक देखना चाहता है. यहां पर न आपाका गौड फादर था और न मेरा कोई गौड फादर है.’’

ये भी पढ़ें- फिल्म ‘कबीर सिंह’ की आलोचना पाखंडपना है : शाहिद कपूर

असफलता के बाद मिलती है कामयाबी

सफलता और असफलता एक ही सिक्के के दो पहलू हैं. किसी के सर पर जल्दी ही सफलता का सहरा बंध जाता है तो किसी को असफलता ही हाथ लगती है. अंग्रेजी की एक कहावत है ट्राय एंड ट्राय अगैन यू विल गेट सक्सेस यानि प्रयास करते रहो एक दिन सफलता अवश्य मिलेगी. आज जितनी भी सुख सुविधा हमारे पास हैं ऐसा नहीं है कि इनका अविष्कार एक ही बार में हो गया था. बल्कि कितनी बार उन लोगों को असफलता का मुंह देखना पड़ा होगा इस बात का हमें अंदाजा भी नहीं होता. तो जरूरी है की हमें असफलता के सामने घुटने नहीं टेकने चाहिये बल्कि उन असफलताओं से सिख लेकर हमें आगे बढ़ना चाहिये तो आइए जनते हैं कैसे अपनी असफलताओं से हम सफलता हासिल कर सकते हैं.

अपनी कमजोरियों को पहचाने

हमारे अंदर की सोच यदि नकारात्मक हो जाये तो हम कभी भी कामयाब नहीं हो सकते और वही नकारात्मक सोच हमें कमजोर बना देगी. ऐसे में हम खुद की कमजोरियों को पहचाने. इससे आप भविष्य में वो गलतियां नहीं दोहराएंगे व आपका आत्म विश्वास बढ़ेगा.

जटिलताओं से न घबराये

आपके सामने आने वाली चुनौतियों से बिलकुल न घबराये. हमेशा उनका डट कर सामना करें. ऐसा नहीं है कि अगर कोई मुश्किल है तो हमें कभी भी हार मान कर अपना रास्ता बदल देना चाहिये बल्कि उस मुसीबत का सामना करने से ही हमें सफलता की सीधी का रास्ता हासिल हो सकता है. जिस तरह लगातार रस्सी को पत्थर पर घिसने से पत्थर पर निशान पड़ जाते है उसी तरह परिश्र्म, करने से आपको कामयाबी अवश्य हासिल होगी.

ये भी पढ़ें- संचार के हर माध्यम के लिये जरूरी है कौशल होना

असफलता पर विचार करें

आपने जितने भी सफल लोगों की कहानी सुनी हैं. उसमें एक बात गौर करने वाली है और वो ये कि उन सभी लोगों ने कई बार असफलता का सामना किया है. थौमस अल्वा एडिसन जिन्होंने बल्ब का अविष्कार किया इससे पहले उनको 999  बार असफलता ही हाथ लगी थी, अल्बर्ट आईंस्टीन को सभी ने मंदबुद्धि कहा था लेकिन उनके सिद्धांतों और थिअरी ने उन्हें दुनिया का सबसे बड़ा साइंटिस्ट  बना दिया.  तो अपनी असफलताओं से सिख ले की आप से कहा चूक हो रही है और फिर आगे बढे ,एक दिन कामयाबी आपके कदम अवश्य चूमेगी.

शार्ट कट न अपनाए

सफलता पाने का कोई शार्ट कट नहीं होता इसलिये कोई भी शार्ट कट न अपनाए. कई बार यह सुनने को मिलता है कि फलां आदमी ने सफलता बहुत कम समय में पा ली. क्योंकि उसने शौर्ट-कट अपनाया था.  सफलता पाने के लिए शौर्ट कट अपनाना सुनने में तो अच्छा लगता है, लेकिन ऐसी कामयाबी ज्यादा दिनों तक नहीं चलती. और न ही आपको ऐसी कामयाबी वो खुशी दे पाती है जिसमे आपकी मेहनत और लगन नहीं होती.

 रखें इन बातों का ध्यान

सफलता के बहुत से तरीके हो सकते हैं, लेकिन हर सफल इंसान की कुछ बातें होती है. वे बहुमुखी प्रतिभा के धनी होने के साथ ही एक लक्ष्य को लेकर केंद्रित भी होते हैं. वे अनुशासित होने के साथ ही जुनूनी  होते हैं. वे अपने हर काम को अहमियत देते हैं. काम के प्रति उनकी रूचि सकारात्मक होती है.

ये भी पढ़ें- जल्द ही निपटा लें जरूरी काम, 11 दिन बंद रहेंगे बैंक

राफेल पर राजनाथ की “शस्त्र पूजन नौटंकी”

राजनाथ सिंह की शस्त्र- पूजा, आज देशभर में चर्चा का बयास बनी हुई है. ऐसा आजादी के बाद पहली दफे हो रहा है,जब भारत सरकार के एक कबीना मंत्री को शस्त्र पूजा करने का नाटक अपने देश में करने की जगह, विदेशी धरती फ्रांस के सर जमी पर करने की मजबूरी आन पड़ी है. ताकि प्रचार प्रसार का स्पेस कुछ ज्यादा मिले और देश में इसका बेहतरीन संदेश प्रसारित हो जाए.

यही वजह है कि भारत का रक्षा मंत्री एक गुप्त एजेंडे के तहत विजयदशमी को अपना टारगेट निर्धारित करता है. और शास्त्र- पूजा विधि विधान से करता है, इसका सीधा संदेश यह है कि पाकिस्तान के हुक्मरान! और वहां की आवाम भयभीत हो जाए…! और देश की जनता का खून उबाल मारने लगे, इसी गहरी सोच के साथ “प्रतीकों “का इस्तेमाल सरकार के वरिष्ठ मंत्री राजनाथ सिंह कर रहे हैं. और सीधी सरल बात यह की इस संपूर्ण परियोजना के पीछे राष्ट्रीय स्वयं संघ और उसके विचारकों का दिमाग काम कर रहा है.

झूठ बोल रहे हैं रक्षा मंत्री!

आज रक्षा मंत्री का शस्त्र पूजन और राफेल की खबर सुर्खियां बटोर रही है. देश की हर एक प्रिंट, इलेक्ट्रौनिक मीडिया में यह खबर प्रमुखता से रिलीज़  हुई है. और क्यों ना हो, जब देश की सरकार की एक-एक सोच, कदम को मीडिया स्थान देता है तो भला राफेल डील और शस्त्र पूजा को स्पेस क्यों नहीं मिलेगा. यह खबर है कि “विजयदशमी पर भारत को मिलेगा पहला राफेल जेट, होंगे यह बड़े बदलाव.”

ये भी पढ़ें- क्लाइमेक्स पर पटवारी और पटवारियों की जंग! 

मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक “8 अक्टूबर यानी विजयादशमी के दिन भारत को अपना पहला राफेल जेट मिलने वाला है” फिर अगली पंक्ति में ही झूठ का पर्दाफाश करते कहा गया है कि” इसकी डिलीवरी अगले साल की जाएगी.”

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह फ्रांस पहुंच चुके हैं और राफेल में फ्रांसीसी एयरपोर्ट के बेस से उड़ान भरेंगे आज एयर फोर्स डे के मौके पर भारत को पहला राफेल मिलेगा, यह दो इंजन वाला लड़ाकू विमान है यह भारत को हवा से हवा में मार करने की अद्भुत क्षमता देगा. राजनाथ सिंह खुश हैं कह रहे हैं, आज इसे हैंड ओवर किया जाएगा आपको भी यह सेरेमनी  देखनी चाहिए.

दरअसल रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह आज एक खबर का निर्माण करने पहुंचे हैं वह है शस्त्र पूजा. आज सिर्फ हमारे रक्षा मंत्री राफेल में उड़ान  भरेंगे, फोटो सेशन होगा और राफेल जेट हमें आज हैंड ओवर या कहें,  मिलेगा नहीं, यह भारत की धरती पर आज नहीं आएगा. सरकारी सूत्रों की खबर कहती है यह अगले साल ही भारत की सर जमी पर कदम रखेगा फिर रक्षा मंत्री का शस्त्र पूजन का क्या अर्थ है?

सरकार प्रतीक गढ़ रही है

सरकार, नरेंद्र दामोदरदास मोदी की सरकार प्रतीक गढने में माहिर है. कब, कहां और कैसे बारंबार संपूर्ण ऊर्जा के साथ जनता जनार्दन को, आज की यह यह मोदी सरकार, ग्राहय हो यह प्रयास बड़ी शिद्दत के साथ किए जाते हैं. और मोदी सरकार की “थिंकटैंक” यह प्रयास निरंतर कर रहा है या मानता भी है की कोई भी मौका, राष्ट्रवाद और मोदी वाद उभारने से, चुकना नहीं है. यही कारण है कि ‘हाउडी मोदी’ शो हो या उनका देश वापसी का समय उसे “महोत्सव” बना दिया जाता है. इसी की अगली कड़ी है राफेल जेट की खरीदी, जिसे यह मोदी सरकार कुछ ऐसे प्रचारित कर रही है मानो राफेल जेट के आते ही पाकिस्तान आत्मसमर्पण कर देगा. और रक्षा मंत्री शस्त्र  पूजा तो, एक ऐसा ढकोसला है जो मोदी सरकार के भक्तों को कारु के खजाने की मानिंद जान पड़ रहा है. यह देश में हिंदुत्व कि लहर पैदा  करने की एक सोची समझी रणनीति के अलावा कुछ नहीं है. और मोदी सरकार कहीं चूकती भी नहीं है.

विपक्ष की बोलती बंद है

इधर विपक्ष अर्थात कांग्रेस की लीडरान सोनिया गांधी हों,  या राहुल गांधी अथवा अन्य सब की बोलती बंद है. राफेल जेट की खरीदी के घोटाले, घपले की बात करने वाले राहुल गांधी इन दिनों देश से बाहर हैं. और आज कांग्रेस राफेल पर कुछ भी बोलने से कतरा रही है तो क्या  राफेल  पर जो आरोप राहुल गांधी ने लगाए थे,  वह सब चुनावी स्टंट थे?

पहले यह राफेल जेट की खेप, पितृपक्ष में आने वाली थी. कहते हैं इसे सरकार द्वारा रोका गया और प्रतीक जोड़ने के लिए 8 अक्टूबर अर्थात विजयादशमी का समय -काल चुना गया है. क्या यह अच्छा नहीं होता कि राफेल जेट, जब भी भारत आता, तब प्रधानमंत्री मोदी संपूर्ण मंत्रियों सहित  हमारी सरकार उसका पूजन करती,  तब शायद देश की आवाम का खून और तेजी से उबाल मारता और और भाजपा के वोट भी पक्के होते.

ये भी पढ़ें- संक्रमण काल से बाहर आता नेपाल : उपेंद्र यादव उपप्रधानमंत्री, नेपाल

‘कार्तिक और नायरा’ की शादी की खबर सुनकर, ‘वेदिका’ का क्या होगा रिएक्शन

स्टार प्लस का मशहूर सीरियल ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ दर्शकों का फेवरेट शो बना हुआ है. हाल ही में इस सीरियल में कार्तिक नायरा के बीच की दूरीयां दिखाई जा रही थी. सीरियल की कहानी से ऐसा प्रतित हो रहा था कि कार्तिक नायरा अब एक हो भी पाएंगे या नहीं.  इस शो के दर्शकों के लिए खुशखबरी है कि अब कार्तिक नायारा एक हो गए. ये खुशखबरी दर्शकों के लिए  ट्रीट की तरह साबित होगा.

जी हां सही सुना आपने कार्तिक-नायरा एक हो गए. चलिए बताते हैं आपको कार्तिक नायरा कैसे एक हो गए और इन दोनों के बारे में जानकर वेदिका का रिएक्शन क्या  रहा?

दरअसल कार्तिक और नायरा ने एक बार फिर से शादी कर ली है. और उन्होंने ये शादी नशे की हालत में की है. भले ही कार्तिक और नायरा एकदूसरे से गुस्सा क्यों न हो जाए पर वो आज भी एकदूसरे से प्यार करते हैं. इधर कार्तिक और नायरा की डिवोर्स की तैयारी चल रही है. तो वही उन दोनों ने अपने प्यार के आगे मजबुर होकर शादी कर ली है.

ये भी पढ़ें- फिल्म ‘कबीर सिंह’ की आलोचना पाखंडपना है : शाहिद कपूर

https://www.instagram.com/p/B3W2l-9BYtg/?utm_source=ig_web_copy_link

आपको बता दें. कार्तिक-नायरा किडनैप हो गई थे और उन दोनों को गुंडों ने एक स्टोर रूम में बंद कर दिया था. उसी हालत में कार्तिक-नायरा अपना इमोशन बांटते दिखे. नशे की हालत में दोनों अपने दिल की बात कहें और फिर से सात फेरे लिए.

https://www.instagram.com/p/B3V0vAah4q_/?utm_source=ig_web_copy_link

तो वही उधर उनके किडनैपिंग से वेदिका खुद को दोषी मानती है और कहती है, मैं इतना नीचे कैसे गिर सकती हूं. लेकिन कोर्ट में नायरा कार्तिक की शादी की खबर सुनकर उसके होश उड़ जाएंगे. वेदिका गुस्से में  आग बबूला होती नजर आएगी. अपकमिंग एपिसोड में देखना ये दिलचस्प होगा कि कार्तिक नायरा के एक होने से वेदिका का अगला कदम क्या होगा.

‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’: कायरव की कस्टडी छीन जाने के बाद नायरा हो जाएगी गायब

अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिएसब्सक्राइब करें