धर्म के नाम पर दान दक्षिणा देने का पाखंड शुरू से ही चला आ रहा है लेकिन अब यह सिर्फ एक व्यापार का साधन बन चुका है. आज हर धार्मिक स्थान पर आपको ऐसे व्यापारी बैठे मिलेंगे जो पूजा-पाठ का सहारा लेकर लोगों के न सिर्फ भावनाओं और विश्वास के साथ खेलते हैं, उन्हें कंगाल भी बना देते हैं.

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