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फेस्टिवल स्पेशल 2019: घर पर बनाएं काजू की पूड़ियां  

काजू की पूड़ियां बनाना काफी आसान है और  आप इसे बहुत कम समय में बना भी लेंगी. आप इन पूड़ियों को स्नैक्स में भी यूज कर सकती हैं. तो चलिए जानते हैं काजू की पूड़ियां कैसे बनाएं.

सामग्री

1 कप पिसा हुआ काजू

3 चम्मच दूध

3 हरी इलायची का चूर्ण

100 ग्राम चीनी

2 बूंद बादाम एसेंस

1/4 चम्मच केसर

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बनाने की वि​धि

एक बाउल लें और उसमें इलायची पाउडर, बादाम एसेंस, काजू और चीनी डालें और इन्हें अच्छी तरह से मिला लें.

थोड़ी-सी केसर को एक चम्मच दूध में गर्म कर लें. अब इस दूध को तैयार मिश्रण में डालें और फिर इसे गूथकर छोटी-छोटी लोई बना लें.

अब पौलिथीन की दो शीट्स लें और इन्हें स्लैप पर बिछा लें.

अब आटे की बोल्स को गोलाकार बेल लें.

सारी पूड़ियां तैयार होने के बाद इन्हें बेकिंग ट्रे में रख लें और 15 से 20 मिनट तक 190 डिग्री सेल्सियस पर बेक करें.

आप चाहें तो इन पूड़ियों को बेक करने की जगह तबे पर भी सेक सकती हैं.

फिर ठंडी होने पर सर्व करें.

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मुंह की बदबू से औफिस परेशान!

आशीष यूं तो बहुत अच्छा कर्मचारी है, मन लगा कर काम करता है, हरेक की मदद करने के लिए भी तैयार रहता है, मगर उससे दोस्ती करने या उसके साथ एक प्याली चाय तक पीने के लिए कोई तैयार नहीं होता है. लंच टाइम में वह अकेला ही अपनी डेस्क पर बैठ कर लंच करता है, और चाय के वक्त टीस्टौल पर भी अकेला ही नजर आता है. वजह है उसके सांसों की बदबू, जो उसके साथियों को उससे दूर रखती है. उसके पास चंद मिनट खड़ा होना भी दुश्वार है. औफिस की लिफ्ट में अगर वह गया है तो दूसरा आदमी लिफ्ट में घुसते ही बदबू के मारे नाक पर रूमाल रख कर बाहर हो जाता है.

कई बार हमें पता ही नहीं चलता कि हमारे मुंह से आने वाली दुर्गन्ध हमारे आसपास के वातावरण को कितना प्रदूषित कर देती है. वहीं दूसरों के मन में हमारी छवि भी बहुत खराब हो जाती है. दांतों की सड़न के कारण मुंह से आने वाली बदबू बीमारियों का कारण भी बनती है. आजकल ज्यादातर औफिस एयरकंडीशनर लगे होने के कारण बिल्कुल बंद बनाये जाते हैं, ताकि ठंडी हवा बाहर न निकले. सारी खिड़कियों पर बंद शीशे होते हैं. ताजी हवा का आवागमन ही बंद होता है. ऐसे में कर्मचारियों के मुंह से निकलने वाली गंदी और बदबूदार हवा उसी हवा में मिल जाती है, जो सब सांस में ले रहे हैं. एक नई स्टडी बताती है कि ऑफिस में ऐसी खराब हवा फैलाने के जिम्मेदार इंसान हैं. शोध में पाया गया है कि एक आम आदमी औफिस  में अमूमन एक हफ्ते में 40 घंटे तक बिताता है. इन घंटों में ऑफिस के बंद कमरों या हॉल में खराब हवा यानी वायु प्रदूषण फैलने की एक बड़ी वजह इंसानों की सांसों की बदबू भी है. अब अमेरिकन असोसिएशन फौर एरोसोल रिसर्च कौन्फ्रेंस में विस्तार से इस समस्या से निपटने पर विचार हो रहा है. यह कॉन्फ्रेंस 14 से 18 अक्टूबर तक पोर्टलैंड में होगी.

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दिन-दिन बढ़ते वायु प्रदूषण का हमारे शरीर और सेहत पर कितना बुरा प्रभाव पड़ता है इसे लेकर दुनियाभर में गंभीरता दिखायी जा रही है और लोग इसे लेकर चिंतित भी हैं. प्रदूषित हवा की वजह से फेफड़ों से जुड़ी कई बीमारियां, दिल से जुड़ी बीमारियां और कैंसर तक होने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है. जब हम वायु प्रदूषण के बारे में सोचते हैं, तो पहला ख्याल यही आता है कि बाहर सड़कों की प्रदूषित हवा से बचें. घर से बाहर हवा में ऐसा जहर अमूमन गाड़ियों से निकलने वाले धुएं और गंदगी घोलते हैं. लेकिन इस शोध के बाद पता चलता है कि इन्सानों की सांसों की बदबू भी वायु प्रदूषण का एक बड़ा कारण है.

हवा में किन प्रदूषक तत्वों का हो रहा उत्सर्जन

इस स्टडी के को-औथर ब्रैन्डन बूर कहते हैं कि अगर आप चाहते हैं कि आपके औफिस काम करने वाले कर्मचारियों की प्रौडक्टिविटी बेहतर हो और उन्हें काम करने के लिए बेहतर एयर क्वालिटी मिले तो यह बेहद जरूरी है कि आप इस बात को समझें कि आपके औफिस की हवा में क्या है और किस तरह के प्रदूषक तत्वों का उत्सर्जन हवा में हो रहा है. औफिस की आंतरिक एयर क्वालिटी को क्या चीज प्रभावित करती है और किस तरह इंसान इंडोर एयर पलूशन में भागीदार हैं.

ब्रैन्डन बूर कहते हैं कि औफिस के वेंटिलेशन सिस्टम के अलावा हमारी सांसों में मौजूद कम्पाउंड आइसोप्रीन, बौडी डियोड्रेंट, मेकअप, हेयर केयर प्रोडक्ट्स, बाल, नाखून जैसी चीजों से निकलने वाली स्मेल भी औफिस के अंदर और बाहर की एयर क्वालिटी को नकारात्मक रूप से प्रभावित करती है.

डेली ऐक्टिविटीज बनती हैं बदबू का कारण

ज्यादातर लोगों का ऐसा मानना है कि मुंह की साफ-सफाई सही ढंग से न करने या गलत फूड हैबिट्स की वजह से मुंह से बदबू आने लगती है. इनके अलावा दिनभर में हम कुछ ऐसी ऐक्टिविटीज भी करते हैं जो मुंह की बदबू का कारण बनती हैं लेकिन आमतौर पर लोगों को इसके बारे में पता नहीं होता. अमेरिकन डेंटल असोसिएशन के मुताबिक, सही समय पर खाना न खाने से भी मुंह में ड्रायनेस होने लगती है जिससे मुंह से बदबू आ सकती है. इसके अलावा ठीक से ब्रश न करना, सही टूथपेस्ट का इस्तेमाल न करना, दांतों की सड़न, तम्बाकू युक्त चीजों का सेवन, धूम्रपान आदि से उत्पन्न बदबू भी आॅफिस की हवा को खराब करती है.

समस्या को हल्के में न लें

अगर नियमित रूप से और अच्छी तरह से ब्रश करने के बाद भी आपके मुंह से बदबू आती है तो तुरंत डौक्टर से सलाह मशविरा लें. विशेषज्ञों की मानें तो मुंह से लंबे समय तक बदबू आना टाइप 2 डायबीटीज, लंग्स, लिवर और किडनी संबंधित बीमारी होने का संकेत हो सकता है.

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आया ड्राई स्किन का मौसम

सर्दियां शुरू होते ही हमारी त्वचा में बदलाव दिखने लगते हैं. सर्दियों की हवा स्किन में खिचांव, रूखापन और चमक को खत्म कर देती है. सर्दियां आते ही स्किन ड्राई हो जाती है. कभी-कभी तो स्किन पर लाल-लाल रैशेज दिखने लगते हैं. वहीं कुछ लोगों की स्किन सर्दियों में इसकदर रूखी हो जाती है कि जगह-जगह से फटने पर खून तक रिसने लगता है. होंठों का फटना भी सर्दियों में आम है. सर्दियों में स्किन का सबसे ज्यादा ख्याल रखना पड़ता है. हम बदलते मौसम को तो नहीं रोक सकते लेकिन अपने लाइफस्टाइल में कुछ बदलाव कर स्किन को सुंदर और हेल्थी जरूर बना सकते हैं.

रखें स्किन का ख्याल

सर्दियों में कभी भी बहुत ज्यादा गर्म पानी से न नहाएं. नहाने का पानी हमेशा गुनगुना ही होना चाहिए. गर्म पानी स्किन के नेचुरल ऑयल्स को हटा देता है जिसकी वजह से स्किन बहुत ड्राई हो जाती है. अगर आपकी स्किन ड्राई ही है तो चेहरे और शरीर पर साबुन का इस्तेमाल कम करें. साबुन में उपस्थित कास्टिक आपकी स्किन को काफी नुकसान पहुंचाता है. फेस वॉश या बॉडी वाश का पीएच (पोटेशियम हाइड्रोक्साइड) आपकी स्किन के पी.एच के समान होता है जिसके इस्तेमाल से ड्रायनेस काम होती है. फिर भी अगर आपको चेहरे पर रूखापन महसूस हो तो अपने चेहरे को साबुन या फेसवाश की जगह क्लींजिंग मिल्क से साफ करें, सादे पानी से धोकर चेहरे पर अल्कोहल फ्री टोनर और मॉइश्चराइजर का भी इस्तेमाल करें.

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अगर आपकी स्किन ड्राई है तो शरीर के लिए एक अच्छा बौडी लोशन या बौडी बटर का इस्तेमाल करें और चेहरे के लिए एक अच्छा मौइस्चराइजर पास रखें. एक अच्छा मौइश्चराइजर या बौडी लोशन खरीदते समय याद रखें कि उसमें अच्छे नेचुरल औयल्स जैसे बादाम, जैतून और ग्लिसरीन मौजूद हों.

यदि आपकी स्किन औयली है तो भी सर्दियों के मौसम में उसमें पानी की कमी हो जाती है. औयली स्किन वाले चेहरे को एक जेल बेस्ड मौइश्चराइजर की जरूरत होती है जिसमें औयल ना हो पर अच्छे मौइश्चराइजिंग एजेंट्स जैसे एलोवेरा, ग्लिसरीन, हैलुरोनिक एसिड, कुकुम्बर और वाटरमेलन के गुण हों. इसके साथ ही आप जितना ज्यादा पानी पियेंगे, आपकी स्किन उतनी ही हाइड्रेटेड रहेगी. भले ही आपको सर्दियों में कम प्यास लगती हो, पर बदलते मौसम में आपको कम से कम आठ गिलास पानी पीना आवश्यक है. बाहरी जंक फूड के बजाय पौष्टिक खाना खाएं. फल और सब्जियों का अधिक से अधिक प्रयोग करें. हमारा शरीर जितना स्वस्थ होगा उतनी ही सुन्दर और ग्लोइंग हमारी स्किन भी होगी.

जिस तरह हमारा सांस लेना जरूरी है उसी तरह स्किन का सांस लेना भी जरूरी है. हमारी स्किन के ऊपर एक डेड स्किन की परत बन जाती है जिसकी वजह से हमारी स्किन सांस नहीं ले पाती है. डेड सेल्स की वजह से हमारी स्किन सूखी दिखती है और उसमें ग्लो नहीं आता. इन डेड सेल्स को समय-समय पर हटाना बहुत जरूरी होता है जिसे हम एक्सफोलिएशन कहते है. इसके लिए हफ्ते में दो बार फेस स्क्रब का इस्तेमाल जरूर करें ताकि यह डेड स्किन हट जाए. स्किन का हेल्दी होना बहुत जरूरी है क्योंकि वो हमारे शरीर का एक कवच है. इसलिए सिर्फ सुन्दर दिखने के लिए स्किन का ध्यान रखना जरूरी नहीं है, इसका स्वस्थ होना भी जरूरी है.

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यूपी कांग्रेस चीफ अजय कुमार लल्लू के राजनीतिक संघर्ष की दास्तां

आजादी के बाद से ही देश में कांग्रेस की हुकूमत रही. सबसे पुरानी पार्टी ने देश में सबसे ज्यादा शासन किया. केंद्र के साथ कई राज्यों में भी सरकारें रहीं. कश्मीर से कन्याकुमारी तक कांग्रेस का वर्चस्व होता था. 1999 में पहली बार बीजेपी ने जोड़ तोड़ के सरकार बनाई. अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री बनें. पांच साल तक सरकार चली लेकिन 2004 में कांग्रेस ने भाजपा को सत्ता से उखाड़ फेंका. तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष सोनियां गांधी ने प्रधानमंत्री पद का त्याग किया और मनमोहन सिंह को पीएम बना दिया गया. 2009 को जनता का आशीर्वाद एकबार फिर कांग्रेस को मिला. लेकिन 2014 में भाजपा ने कांग्रेस को धराशायी कर दिया था. इन पांच सालों में कांग्रेस के खिलाफ कई बड़े जनांदोलन भी हुए जिन्होंने देश की जम्हूरियत का मूड बदल दिया. खैर ये सब इतिहास की बातों का उल्लेख इसलिए भी जरूरी था क्योंकि आज देश की सबसे बड़ी पार्टी कांग्रेस सबसे कमजोर बन चुकी है और पुनर्निमाण की प्रक्रिया से गुजर रही है.
देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस सबसे मुश्किल दौर से गुजर रही है. कांग्रेस का सामना बीजेपी से तो है ही साथ ही संगठन में बदलाव भी एक बड़ी समस्या बनता जा रहा है. कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश अध्यक्ष का चुनाव कर लिया है. प्रदेश अध्यक्ष के लिए पार्टी ने अजय कुमार लल्लू के नाम पर मोहर लगाई है. अजय कुमार लल्लू यूपी कांग्रेस में एक कद्दावर नेता के रूप में अपनी जगह बनाई है. दिल्ली में जिस तरह से अरविंद केजरीवाल को धरना प्रदर्शन के लिए जाना जाता है उसी तरह से यूपी में अजय कुमार को भी धरना के लिए जाना जाने लगा था. कुछ लोग तो उनको धरना कुमार भी कहते थे.

अब हम बताते हैं कि आखिरकार अजय कुमार हैं कौन? कांग्रेस ने काफी मंथन के बाद यूपी की कमान अजय कुमार लल्लू को सौंपी हैं. इस बार यूपी की कमान ऐसे व्यक्ति को सौंपी गई जो जमीन से उठकर ऊपर आया है. वो ऐसा नेता नहीं है कि जो महज आला कमान की जी हुजूरी में लगे रहे. अजय कुमार ऐसे नेता है जिसे श्रमिक और मजदूर भी कहा जा सकता है के हाथों में यूपी की कमान सौंपी जा सकती है. इतना ही नहीं कांग्रेस सूत्रों की मानें तो प्रदेश कांग्रेस कमेटी में युवाओं को ज्यादा ही तरजीह दी जाएगी.

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लल्लू को लेकर 2007 में ही ये ऐलान कर दिया गया थी कि वह एक न एक दिन बड़ा नेता बनेगा. तब लल्लू कांग्रेस नही बल्लिक निर्दल उम्मीदवार थ. ये एक ऐसा नाम है जिसे इलाकाई लोग “धरना कुमार” के नाम से भी जानते, पहचानते हैं. वजह साफ है वह हमेशा से ही संघर्षशील रहे. तमाम मामलों में पुलिस की लाठियां खाईं पर जनहित के मुद्दे को छोड़ा नहीं.

अजय लल्लू को नजदीक से जानने वाले बताते हैं कि 2007 में बतौर निर्दल उम्मीदवार मिली पराजय से उन्होंने काफी कुछ सीखा. हालांकि वह तब बतौर मजदूर दिल्ली चले गए और दिहाड़ी पर काम करने लगे पर अपनी विधासभा के लोगों से उनका संपर्क कायम रहा. लोग उन्हें बुलाते रहे, ऐसे में वह फिर लौटे और शुरू हो गया उनका चिरपरिचित अंदाज में धरना प्रदर्शन का सिलसिला. कभी गन्ना किसानों के लिए तो कभी नदियों की रक्षा और कटान से लेकर होने वाले नुकसान को लेकर.

ऐसे संघर्षशील व जुझारू नेता पर निगाह गई कांग्रेस की और पार्टी ने उन पर पूरा इत्मिनान जताते हुए टिकट दे दिया. कांग्रेस का यह दांव तब यानी 2012 में सटीक बैठा और अजय लल्लू ने तमकुहीराज सीट कांग्रेस की झोली में डाल दी. इस जीत ने विपक्षियों को चौका दिया. इसके बाद 2017 की वह मोदी लहर भी उनका कुछ न बिगाड़ पाई और उन्होंने लगातार दूसरी बार फतह हासिल कर ली.

लोकसभा चुनाव 2019 के परिणाम आने के बाद पूर्वांचल प्रभारी प्रियंका गांधी की निगाह उन पर पड़ी तो उन्होंने उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंप दी. जिम्मेदारी थी, पूर्वांचल की भंग कांग्रेस कमेटियों के लिए नए पदाधिकारी चुनने का. इसके बाद प्रियंका ने उत्तर प्रदेश में जितने भी मुद्दे उठाए उन सब में अजय लल्लू ने उनका भरपूर साथ दिया. चाहे वह सोनभद्र का उम्भा नरसंहार प्रकरण हो या उन्नाव प्रकरण, या मिर्जापुर में बच्चों को मिड डे मील में नमक रोटी देने का मुद्दा, हर मसले पर लल्लू प्रियंका के साथ कंधा से कंधा मिला कर खड़े नजर आए.

उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी में जातीय समावेशी फार्मूले को साधा गया है. कमेटी में लगभग 45 फीसदी पिछड़ी जातियों को प्रतिनिधित्व दिया गया है. पिछड़ी जाति में भी हशिए पर खड़ी अतिपिछड़ी जातियों पर ज्यादा फोकस किया गया है. दलित आबादी को करीब 20 फीसदी का नेतृत्व दिया गया है. इस नेतृत्व में प्रभुत्वशाली दलित जातियों के अलावा अन्य जातियों को भी नेतृत्व का मौका मिला है. मुस्लिम नेतृत्व करीब 15 फीसदी है. जिसमें पसमांदा मुस्लिम कयादत पर भी जोर दिया गया है. नई कांग्रेस कमेटी में लगभग 20 फीसदी सवर्ण जातियों का प्रतिनिधित्व है. कांग्रेस ने जातीय समीकरण को समावेशी जातीय प्रतिनिधित्व के फार्मूले से साधने की कोशिश की है. कमेटी में महिलाओं को भी उचित प्रतिनिधित्व दिया गया है.

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नई कमेटी में जनाधार वाले संघर्षशील कार्यकर्ताओं को जगह मिली है. जिसमें कई नए चेहरे भी शामिल हैं. कांग्रेस के नए संगठन से साफ-साफ दिख रहा है कि उत्तर प्रदेश की सड़कें जनांदोलनों से खाली नहीं होंगी. कांग्रेस महासचिव ने भी सोनभद्र, उन्नाव और शाहजहांपुर कांड में अपनी सक्रियता दिखाकर पहले ही साफ कर दिया था कि आने वाली कांग्रेस सड़कों पर लड़ती दिखेगी.

सूत्र बताते हैं कि लगभग चार माह से कांग्रेस की कई टीमें उत्तर प्रदेश की खाक छान रहीं थीं. कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी खुद उत्तर प्रदेश के कार्यकर्ताओं, नेताओं और बुद्धिजीवियों के साथ बैठक करके सलाह मशविरा ले रहीं थीं. उत्तर प्रदेश में छह राष्ट्रीय सचिव लगातार पूरे प्रदेश का भ्रमण कर रहे थे. प्रियंका गांधी के टीम के लोग जिले -जिले घूमकर जमीनी पड़ताल कर रहे थे.

रंगोली ने कंगना को बताया रेखा की कौपी, तो फैंस का ये रहा रिएक्शन

बौलीवुड आदाकारा कंगना रनौत की बहन रंगोली चंदेल  आए दिन विवादों में घिरी रहती है.  मशहूर आदाकार रेखा के जन्मदिन पर रंगोली चंदेल  अपनी बहन को लेकर ऐसा कुछ कह दिया. जिससे फैंस उन्हें ट्रोल करने लगे. जी हां, दरअसल रंगोली चंदेल मशहूर आदाकारा रेखा को सोशल मीडिया पर बर्थ डे विश करना चाह रही थीं.

बता दें, अभिनेत्री रेखा के बर्थडे पर रंगोली ने ट्वीट करते हुए कहा कि आज मैं कंगना को एक्सपोज करूंगी. वो रेखा की सस्ती कौपी हैं. ये कुछ तस्वीरें हैं. आप देखिए और डिसाइड कीजिए. हालांकि रंगोली के इस ट्वीट पर कई लोगों ने उन्हें ट्रोल किया. और काफी सारे कमेंटस भी आने लगे. आपको यूजर्स के कुछ कमेंट्स बताते हैं.

https://twitter.com/Rangoli_A/status/1182182016655081473

 

एक यूजर्स ने लिखा कि कंगना, रेखा के पैर के धूल के बराबर भी नहीं है. तो वही दूसरे यूजर्स ने कहा कि रेखा एक क्लासी और लेजेंड महिला हैं लेकिन कंगना मुंहफट है और वे कभी भी रेखा के स्तर की बराबरी नहीं कर पाएंगी. एक शख्स ने ये भी लिखा कि वे सिर्फ राखी सावंत की कौपी हो सकती हैं,  रेखा की नहीं.

https://twitter.com/Rangoli_A/status/1182180102395686912

आपको बता दें कि कंगना और रेखा एक दूसरे के प्रति प्रेम को पहले भी जाहिर कर चुकी हैं. रेखा ने कंगना की तारीफ करते हुए ये भी कहा था कि अगर मेरी बेटी होती तो वो जरुर कंगना की तरह ही होती. रेखा ने उन्हें रियल लाइफ झांसी की रानी भी कहा था जब उनके द्वारा डायरेक्ट की गई फिल्म मणिकर्णिका रिलीज हुई थी. इस फिल्म में कंगना ने मेन लीड भी प्ले किया था.

बिन सजनी घर : भाग 1

टिंगटौंग, टिंगटौंग…लगातार बजती दरवाजे की घंटी से समीर हड़बड़ा कर उठ बैठा. रात पत्नी मौली को मुंबई के लिए रवाना कर एयरपोर्ट से लौटा तो घोड़े बेच कर सोया था. आज दूसरा शनिवार था, औफिस की छुट्टी जो थी, देर तक सोने का प्लान किस कमबख्त ने भंग कर दिया. वह अनमनाया सा स्लीपर के लिए नीचे झुका, तो रात में उतार फेंके बेतरतीब पड़े जूतेमोजे ही नजर आए. घंटी बजे जा रही थी, साथ ही मेड की आवाज-

‘‘अब जा रही हूं मैं, साहब, 2 बार पहले भी लौट चुकी हूं.’’

समीर ने घड़ी देखी, उफ, 10 बज गए, मर गया, ‘‘अरे रुको, रुको, आता हूं.’’ वह नंगेपांव ही भागा. मोजे के नीचे बोतल का ढक्कन, जो कल पानी पी कर बेफिक्री से फेंक दिया था, पांव के नीचे आया और वह घिसटता हुआ सीधा दरवाजे से जा टकराया. माथा सहलाते हुए दरवाजा खोला, तो मेड ने गमले के पास पड़ी दूध की थैली और अखबार उसे थमा दिए.

‘‘क्या साहब, चोट लगी क्या?’’ खिसियाया सा ‘कोई नहीं’ के अंदाज में उस ने सिर हिलाया था.

‘‘मैं तो अब वापस घर को जाने वाली थी,’’ कह कर रामकली ने दांत निपोरे, ‘‘घर पर बच्चे खाने के लिए बैठे होंगे.’’

‘‘अरे मुझे क्यों थमा रही है, बाकी काम बाद में करना, पहले मुझे चाय बना दे और यह दूध भी उबाल दे. बाकी मैं कर लूंगा,’’ समीर माथा सहलाते स्लीपर ढूंढ़ता बाथरूम की ओर बढ़ गया.

चाय तैयार थी. उस ने टीवी औन किया, न्यूज चैनल लगा, चाय की चुस्कियों के साथ पेपर पढ़ने लगा.

साहब, ‘‘मोटर सुबह नहीं चलाया क्या आप ने, पानी बहुत कम कम आ रहा, ऐसे तो काम करते घंटों लग जाएंगे, साहब.’’

समीर की जबान दांतों के बीच आ गई. शाम को मौली ने मेरे कपड़े धोए थे, बोला भी था कि सुबह मोटर याद से चला लेना वरना पानी नहीं मिलेगा?

‘‘मैं भूल गया, खाली किचेनकिचेन कर लो और जाओ. वैसे भी घर कोई गंदा नहीं रहता. मौली फुजूल में करवाती रहती है सफाई, कुछ ज्यादा ही शौक है उसे.’’

काम खत्म कर मेड जाने को हुई, ‘‘बाहर बालकनी से कपड़े याद से उतार लेना, साहब, अभी सूखे नहीं. बारिश वाला मौसम हो रहा है. दरवाजा बंद कर लो, साहब.’’ वह चली गई.

‘‘ठीक है, ठीक है, जाओ.’’

चलो बला टली. अब आराम से जैसे चाहे रहूंगा. वह सोफे पर कुशन पर कुशन लगा टांगें फैला कर लेट गया. कितना आराम है. वाह, 2 बजे मैच शुरू होने वाला है, अब मजे से देखूंगा. वरना मौली सोफे पर कहां लेटने देती. उस के दिमाग में अचानक आया कि रोहित, जतिन, सैम को भी साथ मैच देखने के लिए बुला लेता हूं, कुछ दिन तो पहले सी आजादी एंजौय करूं.

उस ने कौल किया तो एक के साथ दो दो और आ गए.

‘‘अरे वाह, यार रितेश, विवेक, मोहित तुम भी. अरे वाह, कमाल हो गया, यार, कितने दिनों बाद हम मिले.’’

‘‘तेरी तो शादी क्या हुई, दोस्तों को पराया ही कर दिया, और आज बुलाया है वह भी जब भाभी घर पर नहीं.’’

‘‘तभी तो हिम्मत पड़ी बेचारे की,’’ सभी हंसने लगे.

‘‘यार, कहां भेज दिया भाभी को?’’

‘‘और कहां, मुंबई यार, हफ्तेदस दिनों के लिए. मायका भी है और उस की सहेली की शादी भी.’’

‘‘तब तो आजादी, बेटा समीर, 10 दिन मजे कर.’’

‘‘अच्छा, बोल, चाय या कौफी पीनी है तुम सब को? हां, तो किचेन उधर है और फ्रिज इधर. बना लो मेरे लिए भी.’’ समीर हंसा था.

फिर तो जिस का मन जो आया, जब आया, बनाया, खायापिया. खाना समीर ने बाजार से मंगवा लिया. डायनिंग टेबल तक कोई न गया, वहीं सोफे के पास सैंटर टेबल घसीट कर सब ने खापी लिया. मैच खत्म हुआ तो जीत का जश्न मनाने के लिए पिज्जापेस्ट्री की पार्टी हुई. सारे घर में हर प्रकार के जूठे बरतनों की नुमाइश सी लग गई. खानेपीने के सामान भी मनमरजी से बिखरे पड़े थे जैसे. उन के जाने के बाद समीर का ध्यान घर के बिगड़े नक्शे की ओर गया, शुक्र मनाया कि मौली घर पर नहीं है, वरना इतना एंजौय न कर पाता. वह अभी ही बिखरा हुआ सब सही करवाती. कोई नहीं, कल छुट्टी है. कौन सा औफिस जाना है, मिनटों में सब अस्तव्यस्त ठीक कर लूंगा कल. तभी बिजली कड़की और घर की लाइट गुल हो गई. घुप अंधेरा. कोई सामान तो ठिकाने पर था नहीं. पौकेट में हाथ डाला तो मोबाइल भी नहीं था, जो टौर्च यूज कर लेता. शायद किचेन में रखी थी. वह तेजी से किचेन की ओर लपका तो टेबल से टकराया और नीचे गिर गया. उस ने उठने के लिए टेबल का सहारा लिया तो फैले रायते में हाथ सन गया. कटोरे का रायता टेबल से नीचे गिर कर कपड़ेजूते पर से होता कारपेट पर फैल गया था. ‘क्या मुसीबत है…चल कोई नहीं, 10 मिनट तो लगेंगे, हो जाएगा सब साफ,’ सोचते हुए सोफा कवर से हाथ साफ कर डाले. फिर ध्यान आया, अरे यार, एक और काम बढ़ा लिया. कोई नहीं, मेड को ऐक्स्ट्रा पैसे दे दूंगा, ऐसी क्या आफत है?

आखिरकार माचिसमोमबत्ती टटोलते हुए सही जगह पहुंच गया.

‘शुक्र है, मिल गई अपनी जगह,’ उस ने राहत की सांस ली, मोमबत्ती जलाई तो उस के चेहरे की मुसकराहट के साथ रोशनी चारों ओर फैल गई.

‘अब साले मेरा खून पी रहा था…’ उस ने पटाक से हाथ पर खून पीते मच्छर को मारा था. मौली 10 दिनों से सचेत कर रही थी समीर को. ‘इन्वर्टर का पानी कब से खत्म है, डाल दो वरना किसी दिन लाइट जाएगी तब पता चलेगा, मोटेमोटे मच्छर काटेंगे, पानी ला कर भी रख दिया.’ याद आया था समीर को. कैंडल एक ओर जमा कर, उस ने पानी डाल कर इन्वर्टर चालू किया, तो लाइट आ गई. कमरा प्रकाश से नहा गया.

‘जय हो मौली श्री की, यार तुम ने बौटल ला कर न रखी होती तो आज ये मच्छर मेरा कचूमर निकाल देते. डेंगू, चिकनगुनिया करवा ही डालते. उफ, नहीं … थैंक्यू मौली डियर.’

प्रकाश में कमरे में बिखरी गंदगी चमकने लगी और कारपेट पर फैला रायता भी. उस का ध्यान अपने कपड़ों की ओर गया.

पहले तो इन्हें बदलता हूं…कहां गया वो स्लीपिंग सूट, नाहक ही वह खूंटी पर ढूंढ़ रहा था. वह बैड पर तो सिकुड़ा सा एक ओर पड़ा था जहां सुबह उतार कर फेंका था. मौली थोड़े ही यहां है जो झाड़ कर टांग देती. वह मुसकराया. मौली को याद करते हुए बिस्तर पर औंधा लेट गया.

बादल जोर से कड़के और मूसलाधार बारिश शुरू हो गई.

‘उफ, भूल गया’, हड़बड़ा कर खड़ा हो गया, ‘बालकनी से कपड़े ही नहीं उतारे.’

वह भागा, सारे कपड़े पानी से सराबोर थे. सुबह से कई बार बूंदाबांदी पहले ही झेल चुके थे. थोड़ी गंध सी आने लगी थी कपड़ों में. उस ने नाक सिकोड़ी, ‘उंह, कैसी अजीब गंध है. क्या दिमाग पाया है बेटा समीर, उतारने से फायदा क्या. और धुलने दे इन्हें बारिश के साफ पानी में. चल, सो जा.’ वह कमरे में आ कर वाशरूम गया. वहां तो और सड़ी सी गंध व्याप्त थी.

‘छिछि दिनभर यारों ने जाजा कर यह हाल किया है. शिट…’ फ्लश किया, तो हुआ ही नहीं, पानी ही नहीं था. सुबह 5 बजे मोटर औन करनी ही है बेटा समीर याद से, वरना तो गया काम से…’ वह अलार्म लगा बेफिक्री से सो गया.

‘‘साहब, कितनी गंदगी मचा दी एक दिन में, क्या हाल बना दिया घर का, सारे के सारे बरतन ही निकाल डाले. मुझ से तो न हो पाएगा, साहब. किसी और को बुला लो,’’ रामकली की किटकिट शुरू हो गई थी.

‘‘कोई नहीं, तू कर, हो जाएगा. आज पानी भरा हुआ है, तेजतेज आएगा. मैं सौ रुपए अलग से भी दे दूंगा.’’

रामकली एक घंटे तक काम करते हुए बड़बड़ाती ही रही. ‘जमादार को कूड़ा भी क्यों नहीं दिया, गंध मार रहा है.’

‘कैसे काम कराती है मौली ऐसी गंवारों से, उफ,’ समीर पेपर ले कर बैठ गया.

‘‘साहब, कारपेट पकड़ लो, आज तो धूप खिली है, बाहर ही साफ कर दूंगी, सूख भी जाएगी. यहां नीचे का फर्श भी साफ हो जाएगा.’’

‘‘क्या मुसीबत है, चलो जल्दी करो,’’ वह मुंह बनाते हुए उठने लगा.

‘‘साहब, कल के बरतन भी आप ने नहीं समेटे थे, आज के धुले बरतनों से तो पूरा पलेटफौर्म ही भर गया. अच्छे से सहेज लेना, साहब, बहुत संभाल कर धोए हैं, कांच ही कांच, रे बाबा.’’ दोनों कारपेट उठाए हुए धूप में आ गए थे.

‘‘ओ तेरी की, साहब, आप ने तो कपड़े भी नहीं उतारे तार पर से. क्या साहब? सब गंध मारने लगे, फिर से धोने पड़ेंगे, साहबजी.’’

‘‘6 पैंट, 6 शर्टें, स्लीपिंग सूट, चादरें, मौली को अभी ही सब धो कर जाना था, क्या करूंगा, कल तो औफिस है…शिट.’’

‘‘सब ले जा कर मशीन में ही तो घुमाना है, साहब, ये पकड़ो,’’ उस ने कपड़े उतार कर समीर को पकड़ा दिए और अंदर काम निबटाने चली गई. समीर ने वाश्ंिग मशीन का ढक्कन खोला और सारे कपड़े उस में पटक दिए. पानी व साबुन डाला और मशीन सैट कर चालू कर दी. फोन पर ब्रैड, बटर, अंडे, मैगी और्डर कर के मंगा लिए. रामकली चली गई तो उस ने चल रहा हलका म्यूजिक लाउड कर लिया और अपना नाश्ता बनाने साफ किचेन में एक शेफ के अंदाज में घुसा.

‘आज बनाऊंगा अपना पहले वाला जिंजरगार्लिक औमलेट, करारे बटर टोस्ट और बेहतरीन कौफी. यार, इतने बरतन… मौली ही आ कर रखेगी, पर मैं पैन और चाय के लिए भगौना कहां से ढूंढ़ूं, मिल गया.’ उसे हैंडल दिखा, पकड़ कर जो खींचा, कई सारे बरतन धड़धड़ा कर नीचे गिर गए, जो कांच के थे, टूट गए थे. उस की जबान दांतों के बीच आ गई थी, मौली के मायके के महंगे वाले इंपौर्टेड सैट के 3 कप 2 गिलास एक प्लेट धराशायी पड़े थे.

‘अजब आफत है, कैसे बेतुके रख गई बेवकूफ मेड,’ उस ने पैर से टुकड़े एक ओर किए, बड़े टुकड़े डस्टबिन में डाले और मनोयोग से नाश्ता बनाने जुट गया.

‘वाह, क्या खुशबू है, क्या स्वाद.’ तभी मोबाइल बज उठा. उधर से मौली थी, बोली, ‘‘क्या चल रहा है?’’

‘‘अभी अपना बढि़या सा ब्रैकफास्ट तैयार किया है, बाद में वेज तड़का मैगी का लंच.’’

‘‘इतनी लेट ब्रैकफास्ट, क्या बनाया शेफ साहब ने, जरा मैं भी तो सुनूं,’’ वह हंसी.

‘‘तुम होती तो हैरान होती, तुम होती तो खुश होती, तुम होती तो ये खाती, तुम होती तो वो…’’ वह अमिताभ बच्चन के डायलौग के अंदाज में बोलते हुए मुसकरा रहा था.

‘‘अच्छा अच्छा, बस. कल की तैयारी कर ली? कपड़े कल प्रैस होने के लिए दे दिए थे न?’’ वह हंसते हुए बोली.

उसे ध्यान आया कपड़े, मशीन में कब से पड़े रह गए, भूल ही गया था, मरा…

 

‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’: क्या कायरव को पता चल गई कस्टडी की सच्चाई

स्टार प्लस का मशहूर सीरियल ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’  में हाई वोल्टेज ड्रामा चल रहा है. जिससे दर्शकों का काफी इंटरटेन हो रहा है. पिछले एपिसोड में आपने देखा  कि नशे की हालत में कार्तिक और नायरा गुंडों से बचकर भाग जाते हैं.

घर के मंदिर में दोनों शादी करना चाहते हैं. नायरा, कार्तिक को अपने कमरे में ले आती है, वो कहती है कि रूम से दूसरी चुनरी ले लेंगे, दोनों कमरे में जाकर सो जाते हैं. वहां नायरा का भाई नक्ष आता है लेकिन कार्तिक को देख नहीं पाता और कायरव को वहां सुलाकर चला जाता है.

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उधर वेदिका रोते हुए सुबह दादी के पास आती है और कहती है कि कार्तिक कल रात भी घर नहीं आए है. वो दादी से कहती है कि उसने कार्तिक को कौल किया था पर कार्तिक का फोन कायरव ने उठाया और उसने बताया कि वो यहीं सो रहे हैं. कार्तिक नायरा के पास हैं.

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उधर नायरा की नींद खुलती है और कार्तिक को वहां देखकर हैरान रह जाती है. कार्तिक और नायरा दोनों याद करने की कोशिश करते हैं लेकिन उन्हें ज्यादा कुछ याद नहीं आता है. इसके बाद कार्तिक वहां से घर चला जाता है. वहां सभी उससे सवाल करते हैं लेकिन वो बताता है कि उसकी किडनैपिंग हुई इसके अलावा उसे कुछ याद नहीं है.

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उधर कार्तिक और नायरा दामिनी मिश्रा (वकील) के घर पहुंचते हैं. वहां एक बार फिर कार्तिक और नायरा मिलकर एक दूसरे से यही पूछने की कोशिश करते हैं, कि कुछ याद आया क्या लेकिन उन्हें कुछ याद नहीं आता है.

इसके बाद दोनों को वहां किसी की शादी की तस्वीर दिखती है देखते ही दोनों को याद आ जाता है कि दोनों ने नशे में शादी कर ली थी.  वेदिका वहां आती है और ये सब सुनकर उसके होश उड़ जाते है.

वेदिका वहां से चली जाती है. दोनों वकील दामिनी मिक्षा और कुमार वहां आते हैं. दोनों ज्वाइंट कस्टडी के पेपर पर साइन करने को कहते हैं. नायरा और कार्तिक पेपर पर साइन कर देते हैं. कार्तिक को नायरा को साथ देखकर वकील दामिनी मिश्रा सोचती है कि वो कार्तिक के साथ इतना नौर्मल क्यों है.

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अपकमिंग एपिसोड में ये देखना दिलचस्प होगा जब कायरव को पता चलेगा कि उसकी मम्मी और पापा कस्टडी का केस कर रहे हैं. तो उसका रिएक्शन क्या होगा.

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अगर आपके भी पैरों में है शू बाइट के निशान तो पढ़ें ये खबर

नए जूते पहनने की खुशी तब दुख में बदल जाती है जब पैरों में छाले पड़ जाते हैं. हो सकता है आपका पैर भी कभी कटा हो और आपने भी यह दर्द झेला हो. इससे गंदे छाले हो जाते हैं, जिनमें कुछ दिनों तक बहुत दर्द होता है और बाद में वह निशान के रूप में उभर आता है.

शू बाइट से बचने के लिए कोई भी नया जूता पहनने से पहले उसके किनारों पर पेट्रोलियम जेली लगाएं, जिससे वहां का एरिया मुलायम हो जाए और पहनने पर वह ना काटे. अगर शू बाइट की वजह से त्वचा में जलन शुरू हो गई हो तो, उस पर ऐलोवेरा का रस लगा लें.

अगर आपके पैरों में भी शू बाइट के निशान हैं तो, इन खास टिप्स से ये दाग दूर हो जाएंगे.

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हल्दी और नीम

अगर जूते से पैरों में छाले पड़ गए हों या फिर उसके दाग रह गए हों तो आप हल्दी और नीम का पेस्ट लगा सकते हैं. इस पेस्ट को 20 मिनट तक लगाएं. यह छाले को पूरी तरह से सुखा देगा और दाग भी नहीं बनेगा.

कपूर और नारियल

पैरों में छाले अगर खुजली कर रहे हैं तो कपूर के चूरे में कुछ बूंद नारियल तेल डाल लें. इसे थोड़ी-थोड़ी देर पर घाव पर लगाने से दर्द ठीक हो जाएगा और दाग भी नहीं बनेगा.

बादाम और जैतून

बादाम को पीस कर उसमें जैतून का तेल मिलाकर प्रभावित त्वचा पर मसाज करें. जब चमड़ी मुलायम हो जाए तब पैरों को धो लें.

चावल के आटे का पेस्ट

चावल के आटे का पेस्ट बनाएं और उसे छाले पर लगाएं. 15 मिनट लगाए रखने के बाद जब वह सूख जाए तब पैरों को गुनगुने पानी से धो लें.

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ऐसे बनाएं आलू मटर पनीर

आज आपको आलू मटर पनीर बनाने की रेसिपी बताने जा रहे हैं.जो बनाने में बेहद आसान है. आलू मटर पनीर को रोटी या चावल के साथ सर्व कर सकती है. तो चलिए जानते हैं इसकी रेसिपी.

समाग्री

250 ग्राम मटर

250 ग्राम पालक

500 ग्राम आलू

250 ग्राम पनीर (छोटे टुकड़ों में कटा एवं तला हुआ)

एक टुकड़ा अदरक

2 टमाटर

3-4 तेजपत्ता

2 बड़ी इलायची

2 हरी मिर्च (बारीक कटी)

लाल मिर्च का पाउडर

एक छोटा चम्मच जीरा

1/2 पिसा हुआ कच्चा नारियल

आधा चम्मच हल्दी पाउडर

2 बड़े चम्मच धनिया पाउडर

250 ग्राम घी

1/2 चम्मच गर्म मसाला

नमक स्वादानुसार

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बनाने की विधि:

सबसे पहले पालक को अच्छी तरह धोकर उबाल लें.

इसके बाद इसे पीस लें और फिर मटर के दानों को हल्का सा उबालें.

इसके बाद आलू को भी उबाल लें.

आलू को घी में हल्का तलें और अब इसमें हरी मिर्च, टमाटर,अदरक और सारे मसाले मिलाकर घी में भून लें, तुरंत इसमें पालक को भी डालकर भून लें.

अब तले हुए आलू मटर, पनीर को मिला लें और स्वाद अनुसार नमक डाल लें.

फिर इसमें पानी डालकर गाढ़ा रस तैयारकर लें.

अंत में आंच से उतार कर बारीक कटा हुआ हरा धनिया ऊपर से डालकर पूरी के साथ गरमागरम परोसें.

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पतिपत्नी के बीच क्यों कम हो रहा प्यार?

प्यार के बाद प्रेमी जोड़े शादी तो बड़ी आसानी से कर लेते हैं, मगर जब निभाने की बारी आती है तब वही रिश्ता बोझ लगने लगता है. आजकल ऐसे शादीशुदा जोड़ों की संख्या तेजी से बढ़ रही है जिन के बीच वक्त के साथ प्यार में कमी आने लगी है और नतीजा यह कि सालों रिश्ते में टिके रहने के बाद एक दिन तलाक लेने का फैसला ले लेते हैं.

विवाह का बंधन बहुत ही पेचीदा इंसानी रिश्ता है और अधिकतर लोग बहुत कम तैयारी के साथ इस बंधन में बंधते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि वे एकदूसरे के लिए ही बने हैं. डा. डीन एस. ईडैल कहते हैं कि हमें ड्राइविंग लाइसैंस पाने के लिए कुछ हद तक अपनी काबिलीयत दिखानी पड़ती है पर वहीं शादी का सर्टिफिकेट पाने के लिए सिर्फ मात्र दस्तखत ही काफी हैं.

हालांकि बहुत से पतिपत्नी अंत समय तक खुशहाल जीवन व्यतीत करते हैं, मगर काफी पतिपत्नी के बीच तनाव रहता है और इस का कारण है एकदूसरे से काफी उम्मीदें पाले रखना. शादी के पहले पतिपत्नी एकदूसरे से काफी उम्मीदें पाल बैठते हैं, मगर जिंदगीभर साथ निभाने के लिए जो हुनर चाहिए होता है, वह उन के पास नहीं होता. शुरूशुरू में जब लड़कालड़की एकदूसरे के करीब आते हैं, तब उन्हें लगता है दोनों एकदूजे के लिए ही बने हैं और उन के साथी जैसा दुनिया में और कोई है ही नहीं. उन्हें लगता है, एकदूसरे का स्वभाव भी काफी मिलताजुलता है, लेकिन शादी के कुछ सालों बाद ही उन की एकदूसरे के प्रति भावनाएं खत्म सी होने लगती हैं और जब ऐसा होता है तब यह वैवाहिक जीवन को तबाह, बरबाद कर सकता है.

कुछ शादियां तो अपनी मंजिल तक पहुंच जाती हैं, मगर कुछ बीच में ही दम तोड़ देती हैं, क्यों? आइए जानते हैं:

जरूरत से ज्यादा उम्मीदें: स्नेहा कहती है कि जब उसे राहुल से प्यार हुआ तब लगा वही उस के सपनों का राजकुमार है. उस के जैसा दुनिया में दूसरा कोई नहीं है और अब उस के जीवन में सिर्फ रोमांस ही रोमांस होगा. दोनों एकदूसरे की बांहों में बांहें डाल कर हंसतेखेलते जीवन गुजार देंगे. मगर शादी के कुछ सालों बाद ही स्नेहा को अपने सपनों के राजकुमार में एक शैतान नजर आने लगा, क्योंकि वह उस की एक भी उम्मीद पर खरा नहीं उतरा.

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लव स्टोरी वाली फिल्में, रोमांटिक गाने प्यार की ऐसी तसवीरें पेश करते हैं कि हकीकत में भी हमें वही नजर आने लगता है. मगर हम भूल जाते हैं कि यह सचाई से कोसों दूर होता है. लैलामजनूं, हीररांझा का प्यार इसलिए अमर हो गया, क्योंकि वे विवाह के बंधन में नहीं बंध पाए, अगर बंधते तो शायद उन के भी कुछ ऐसे ही बोल होते. शादी से पहले की मुलाकातों में शायद लड़कालड़की को लगे कि उन के सारे सपने साकार हो जाएंगे, मगर शादी के बाद वे इस नतीजे पर पहुंचते हैं कि वाकई वे सपनों की दुनिया में ही खोए हुए थे. बेशक पतिपत्नी को अपनी जिंदगी में एकदूसरे से उम्मीदें पालना गलत नहीं है, मगर इच्छाएं इतनी भी न पालें कि सामने वाला पूरा ही न कर पाए.

आपसी तालमेल की कमी: एक शादीशुदा औरत का कहना है कि वह और उस के पति हर मामले में एकदम अलग राय रखते हैं. कभी उन के विचार मिले ही नहीं मानों एक पूरब है तो दूसरा पश्चिम. उस का एक दिन भी ऐसा नहीं जाता, जब वह अपने पति से शादी करने के फैसले पर पछताती न हो.

शादी के कुछ समय बाद ही उसे लगने लगा कि उस का साथी बिलकुल भी वैसा नहीं है जैसा उस ने सोचा था. इस बात पर डा. नीना एस. फील्ड्स का कहना है कि अकसर शादी के बाद एक इंसान के गुण साफ नजर आते हैं, जिन्हें शादी के पहले नजरअंदाज कर दिया जाता है. इस का परिणाम यह होता है कि शादी के कुछ सालों बाद पतिपत्नी शायद इस नतीजे पर पहुंचें कि उन का एकदूसरे के साथ कोई तालमेल बैठ ही नहीं सकता. एकदूसरे के विचार न मिलने के बावजूद कितनी जोडि़यां इसलिए शादी के बंधन में बंधी रह जाती हैं, क्योंकि समाज और लोग क्या कहेंगे और कुछ तो समझ ही नहीं पाते कि इस रिश्ते को निभाएं या तोड़ दें.

लड़ाईझगड़े: पतिपत्नी के बीच तकरार न हो, ऐसा हो ही नहीं सकता. लेकिन तकरार जब हद से ज्यादा बढ़ जाए तब क्या किया जाए? इस पर डा. गोलमैन लिखते हैं कि अगर शादी का बंधन मजबूत है तो पतिपत्नी को लगता है कि वे बेझिझक एकदूसरे से शिकायत कर सकते हैं, लेकिन अकसर गुस्से में आ कर शिकायत ऐसे तरीके से की जाती है जिस से नुकसान होता है और इस के जरीए अपने साथी के चरित्र पर कीचड़ उछाला जाता है, जिसे दूसरा कतई बरदाश्त नहीं कर पाता और झगड़ा बढ़ता जाता है.

जब पतिपत्नी गुस्से में आपे से बाहर हो जाते हैं तब उन का घर घर न रह कर एक जंग का मैदान बन जाता है और पिसते हैं उन के बच्चे. झगड़ा सुलझाने के बजाय वे अपनी जिद पर अड़े रहते हैं. उन के शब्द कब हथियार का रूप ले लेते हैं पता ही नहीं चलता.

इस बारे में विशेषज्ञों का कहना है कि जो झगड़े काबू से बाहर हो जाते हैं उन में सब से ज्यादा नुकसान तब होता है जब पतिपत्नी एकदूसरे को कुछ ऐसी बातें कह देते हैं जो उन के वैवाहिक जीवन को खतरे में डाल देती हैं. उन्हें ऐसी बातें नहीं बोलनी चाहिए.

पल्ला झाड़ लेना: शादी के कुछ सालों बाद अपने वैवाहिक जीवन से ऊब कर एक पत्नी ने कह दिया कि अब उस से नहीं होगा, क्योंकि अपने वैवाहिक जीवन को बचातेबचाते वह थक चुकी है. उसे मालूम है जब इस से कोई फायदा ही नहीं, तो फिर क्यों वह रिश्ता बचाने की कोशिश में लगी हुई है? अब उसे सिर्फ अपने बच्चे से मतलब है.

कहते हैं जब पतिपत्नी एकदूसरे से प्यार करते हैं, तो बेइंतहा प्यार करते हैं. मगर जब बेरुखी बढ़ती है, तो बढ़ती ही चली जाती है. एकदूसरे से वैमनस्य पाल लेते हैं. मगर कुछ पतिपत्नी इसलिए रिश्ते निभाते चले जाते हैं कि और चारा क्या है?

इसी पर एक पति का कहना है कि बेमन से विवाह  के बंधन में बंधे रहना ऐसी नौकरी के समान है जिसे करने का मन नहीं है, पर फिर भी करनी पड़ती है. आप अपनी ओर से लाख अच्छा करने की कोशिश करें, पर सामने वाले को उस बात की कद्र नहीं होती. वहीं एक पत्नी का कहना है कि वह अपनी शादीशुदा जिंदगी से अब निराश हो चुकी है. बहुत कोशिश की उस ने रिश्ते सुधारने की, पर सब बेकार.

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निराशा, तालमेल की कमी, लड़ाईझगड़ा और बेरुखी तो सिर्फ चंद वजहें हैं जिन की वजह से पतिपत्नी के बीच प्यार की कमी हो सकती है. लेकिन क्या सिर्फ यही वजहें हैं या कुछ और भी हैं?

कुछ और कारण शादी दरकने के पैसा: पतिपत्नी के बीच पैसा एक सैंसिटिव इशू होता है. जब दोनों कमाऊ हैं, तो अपना वेतन कैसे खर्च करना है और कहां इन्वैस्ट करनी है, यह विवाद का विषय बन जाता है और झगड़ा होने लगता है. अत: इस से बचने के लिए पतिपत्नी को मिलबैठ कर हर महीने का बजट बनाना चाहिए और जहां भी पैसा लगाना है एकदूसरे को जानकारी होनी चाहिए.

जिम्मेदारियां: देखा गया है कि 67% पतिपत्नी के प्यार में पहला बच्चा आते ही कमी आ जाती है और पहले से 8 गुना ज्यादा झगड़े होने लगते हैं. कुछ हद तक इस की वजह यह होती है कि दोनों अपने कामों से इतने थक जाते हैं कि खुद के लिए भी उन्हें फुरसत नहीं मिलती.

फरेब, धोखा: एकदूसरे पर भरोसा, सफल शादीशुदा जिंदगी के लिए निहायत जरूरी है. एकदूसरे पर भरोसा टूटना, पतिपत्नी के रिश्ते को बरबाद कर सकता है.

लैंगिक संबंध: चाहे कितना भी मनमुटाव हो जाए दोनों के बीच, अगर सैक्स संबंध सही है, तो झगड़ा, मनमुटाव भी ज्यादा देर नहीं टिक पाता. लेकिन जब वही संबंध नहीं रह पाता उन के बीच तो फिर नौबत के तलाक तक पहुंचते देर नहीं लगती.

हस्तक्षेप: पतिपत्नी के संबंधों में हस्तक्षेप करना, पतिपत्नी के संबंधों में किसी दूसरे का दखल या सैक्स से संतुष्ट न होने के कारण किसी दूसरे को चाहने लगना आदि कारणों से भी मनमुटाव उत्पन्न होने लगता है.

बच्चों पर क्या होता है असर: आप की शादीशुदा जिंदगी कैसी है इस का साफ असर बच्चों पर पड़ता है. डा. गोलमैन ने शादीशुदा जोड़ों पर लगभग 20 साल तक खोजबीन की. 10-10 साल के 2 अध्ययनों में उन्होंने देखा कि नाखुश मातापिता के बच्चों की हृदय गति, अठखेलियां करते वक्त ज्यादा तेज चलती है और उन्हें शांत होने में वक्त लगता है. मातापिता के कारण बच्चे पढ़ाई में भी अच्छे अंक नहीं ला पाते, जबकि बच्चे पढ़ने में होशियार होते हैं. वहीं दूसरी तरफ जिन पतिपत्नी के बीच सही तालमेल होता है उन के बच्चे पढ़ाई के साथसाथ सामाजिक कार्यों में भी बेहतर होते हैं.

पतिपत्नी के रिश्ते में मनमुटाव न हो, रिश्ता न टूटे, दांपत्य जीवन सुखमय हो, वैवाहिक जीवन में कोई समस्या न हो इस के लिए जरूरी है पतिपत्नी आपसी समस्याएं खुद निबटा लें. किसी तीसरे को अपनी जिंदगी में हस्तक्षेप न करने दें.

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