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सेल्फी लेने की आदत है जानलेवा, पढ़ें पूरी खबर

आजकल युवाओं के बीच में सेल्फी के लिए जैसा क्रेज देखा जा रहा है वो हैरान कर देने वाला है. इससे उनका काफी नुकसान होता है. लोगों की ये आदत अब जानलेवा बन चुकी है. हाल ही में हुई एक स्टडी में ये बात सामने आई कि सेल्फी लोगों में कौस्मेटिक सर्जरी के लिए प्रौत्साहित करती है.

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स्टडी के मुताबिक, सेल्फी लेने के बाद लोगों में मानसिक दबाव अधिक हो जाता है. ज्यादा सेल्फी लेने वाले लोग अधिक चिंतित महसूस करते हैं. उनका आत्मविश्वास कम हो जाता है और वे शारीरिक आकर्षक में कमी महसूस करते हैं. ज्यादा सेल्फी लेने वाले लोगों में अपने लुक्स को लेकर काफी हीन भावना बढ़ जाती है, ये भावना इतनी तीव्र होती है कि वो अपनी कौस्मेटिक सर्जरी कराने की सोचने लगते हैं.

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इस स्टडी में करीब 300 लोगों को शामिल किया गया है.  अध्ययन में पाया गया कि किसी फिल्टर का उपयोग किए बिना सेल्फी पोस्ट करने वाले लोगों में चिंता बढ़ने और आत्मविश्वास में कमी देखी जाती है. सेल्फी लेने और उन्हें सोशल मीडिया पर पोस्ट करने के बाद मूड खराब होता है और इसका सीधा असर आत्मविश्वास पर पड़ता है.

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स्टडी में ये भी देखा गया है कि ये मरीज सेल्फी लेने और उन्हें सोशल मीडिया पर पोस्ट करने के बाद अधिक चिंतित, आत्मविश्वास में कमी और शारीरिक आकर्षण में खुद को कमतर आंकते हैं. यही नहीं, जब मरीजों ने अपनी सेल्फी बार-बार ली तथा अपनी सेल्फी में बदलाव की तो सेल्फी के हानिकारक प्रभाव को महसूस किया.

4 टिप्स: स्किन के लिए भी फायदेमंद हैं अंडे की सफेदी

खाने में जितना अंडा पोषक होता है, आपकी स्किन के लिए भी ये उतना ही असरदार होता है. यह एंटी-एजिंग भी है. अंडे का मास्‍क हमारी स्किन को जवां बनाने के साथ निखार भी देता है. इससे स्किन मजबूत नजर आती है और साथ ही झुर्रियां भी दूर होती हैं. अंडे के सफेद हिस्से में प्रोटीन और एलबुमिन की प्रचुर मात्रा होती है जिससे स्किन टोनिंग होती है. अंडे का मास्‍क ब्‍लेकहैड्स, झाइयां और अन्‍य तकलीफें भी दूर करता है. इससे आपकी स्किन सौफ्ट और शाइनी हो जाती है. अंडे की सफेदी यानी एग व्हाइट फेस मास्क से स्किन टाइट होती है और यह स्किन का सारा औयल सोख लेता है. यही नहीं, इसमें पाए जाने वाले विटामिन्स और मिनरल्स स्किन के लिए भी फायदेमंद होते हैं.

1. स्किन टाइटनिंग में असरदार है अंडे की सफेदी

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अंडे की सफेदी में ऐसे गुण होते हैं जो स्किन के पोरस् को छोटा कर स्किन टाइट बनाने में मदद करते हैं. आप अंडे की सफेदी का मास्क बनाकर उसमें नींबू में डाल सकती हैं. इसे अपने चेहरे पर लगाएं. कुछ मिनट तक इंतजार करें. इसके बाद गुनगुने पानी से धुल लें. आप सप्ताह में दो बार इसका इस्तेमाल कर सकती हैं.

2. औयली स्किन के लिए भी है असरदार अंडे की सफेदी…

औयली स्किन में मुंहासो और एक्ने की प्रौब्लम ज्यादा होती है. अंडे की सफेदी औयली स्किन के लिए भी बहुत कारगर है. इससे आपकी स्किन में मौजूद अतिरिक्त औयल बाहर निकल जाता है. मास्क लगाने से पहले अपने चेहरे को गुनगुने पानी से धुल लें. अंडे की पतली परत चेहरे पर लगाएं और सूख जाने दें. सूखने के बाद ठंडे पानी से धो लें. अपने चेहरे को पोंछने के लिए मुलायम तौलिए का इस्तेमाल करें.

3. अंडे की सफेदी से मिलेगा कील-मुंहासों से छुटकारा

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ऐक्ने ऑयली स्किन या त्वचा की ऊपरी परत पर धूल जमा होने की वजह से होते हैं. अंडे की सफेदी से आपकी त्वचा का एक्स्ट्रा तेल निकल जाता है जिससे अपने आप ऐक्ने और पिंपल खत्म हो जाते हैं. जिन जगहों पर एक्नै हों, वहां पर सावधानी से मास्क लगाएं. सख्त ब्रश का इस्तेमाल ना करें. योगर्ट, हल्दी भी इसमें ऐड कर सकते हैं.

4. चेहरे के बाल को हटाने में है कारगर अंडे की सफेदी

चेहरे पर उगे छोटे-छोटे बालों से छुटाकारा दिलाने में भी अंडे की सफेदी मददगार है. माथे, गाल और अपर लिप्स पर छोटे-छोटे बाल हटाने के लिए एग व्हाइट लगा सकते हैं. जब यह सूख जाए तो मास्क को खींचकर हटा लें.

8 होममेड टिप्स : ऐसे पाएं दो मुंहे बालों से छुटकारा

बालों पर अत्‍यधिक रसायनिक उत्पाद का इस्तेमाल, बार-बार धोना, खराब तरह से बालों की देखभाल आदि से भी बालों पर बुरा असर पड़ता है. जब बालों को सही पोषण नही मिलता तो वह खराब होने लगते हैं. फिर यही खराब बाल धीरे धीरे दो मुंहे हो जाते हैं. अगर बालों कि अच्‍छी देखभाल न की गई तो उनकी जान को खतरा हो सकता है. हमारे घरों में इतनी प्राकृतिक चीजे हैं, जिसका इस्तेमाल कर आप अपने बालों को दो मुंहा होने से बचा सकती हैं. तो आइए जानते हैं इसके बारे में.

  1. पपाया पैक आपके बालों के लिए काफी अच्छा हो सकता है. इस पैक को बनाने के लिये पपीते को मिक्‍सी में पीस कर उसमें आधा कप दही मिलाइये. इस हेयर पैक को पूरे बालों में लगाइये खास कर कि दो मुंहे बालों पर. फिर आधे घंटे के बाद बाल धो लीजिये.

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2. आधा कप दूध ले कर उसमें 1 चम्‍मच क्रीम मिक्‍स कीजिये और सिर पर लगा लीजिये. इसे 15 मिनट छोड़ने के बाद अच्‍छे से धो लीजिये.

3. अरंडी के तेल में बादाम तेल और औलिव औयल को एक सीमित मात्रा में डालें. फिर इसे अपने बालों में लगाइये और बालों को तौलिये से ढंक लीजिये, 30 मिनट के बाद पानी से धो लीजिये.

4. अंडे की जर्दी ले कर उसमें 1 चम्‍मच बादाम तेल मिलाइये. इससे सिर कि मसाज कीजिये और 1 घंटे के लिये छोड़ दीजिये, फिर शैंपू से बालों को धो लीजिये.

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5. आधा कप काली उरद दाल को 1 चम्‍मच मेथी के दानों के साथ बारीक पीस लीजिये. उसके आधा कप दही मिलाइये और बालों पर लगा कर दो घंटों के लिये छोड़ दीजिये. फिर हल्‍के शैंपू से बालों को धो लीजिये.6

6. 1 चम्‍मच शहद और आधा चम्‍मच दही मिला कर सिर पर लगाइये और दो मुंहों को इससे ढांक दीजिये. 20 मिनट के बाद सिर को पानी से धो लीजिये.

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7. थोड़े से औलिव औयल को गैस पर हल्‍का सा गरम कीजिये और इससे बालों तथा सिर की मसाज कीजिये. 30 मिनट के बाद सिर को धो लीजिये.8

8. अपने शैंपू के साथ दो बूंद जोजोबा औयल मिलाइये. इसे लगाने से बालों मुलायम हो जाएंगे और उन्‍हें नमी मिलेगी.

तो अब सरोगसी पर फिल्में

भारत में संस्कृति व साहित्य का वैभवशाली इतिहास है. हमारे यहां फिल्मों के लिए कहानियों या विषयों की कोई कमी नही है. इसके बावजूद भेड़चाल का शिकार बौलीवुड एक ही समय में एक ही विषय पर एक साथ कई फिल्में बनाते हुए आपस में ही प्रतिस्पर्धा करता रहता है. इसी के चलते इन दिनों एक तरफ करण जौहर सरोगसी पर फिल्म बना रहे हैं ,तो दूसरी तरफ दिनों वीजन भी सरोगसी पर ही फिल्म बना रहे हैं.

2012 तक बनी सरोगसी पर फिल्में

सूत्रों के अनुसार जब सरोगसी पद्धति से माता पिता बनना बहुत ज्यादा चलन में नहीं था,तब भी सरोगसी पर बौलीवुड में इक्का दुक्का फिल्में बनती रही हैं. सबसे पहले 1983 में लेख टंडन ने विक्टर बनर्जी, शर्मिला टैगोर व शबाना आजमी को लेकर फिल्म ‘‘दूसरी दुल्हन’’ बनायी थी. उसके बाद 2001 में अब्बास मस्तान ने सुष्मिता मुखर्जी, सलमान खान और प्रीति जिंटा को लेकर फिल्म ‘‘चोरी चोरी चुपके चुपके’’ बनायी थी. फिर 2002 में मेघना गुलजार ने तब्बू, सुष्मिता सेन, संजय सूरी और पलाश सेन को लेकर फिल्म ‘‘फिलहाल’’ बनायी थी. इन तीनो फिल्मों में से ‘दूसरी दुल्हन’ में शबाना आजमी और ‘चोरी चोरी चुपके चुपके’ में प्रीति जिंटा ने सरोगसी मदर का किरदार निभाया था,जो कि असलियत में वेश्या होती हैं. यानी कि सभ्य परिवार की औरत को ‘सरोगेटेड मदर’ के रूप में यह फिल्मकार नहीं दिखा पाए थे. इसके बाद 2010 में ओनीर ने ‘आई एम आफिया’ तथा 2012 में शुजीत सरकार ने ‘विक्की डोनर’ बनायी थी. ‘आई एम आफिया और ‘विक्की डोनर’ में सरोगसी के साथ साथ स्पर्म डोनर का भी मसला रहा. जबकि 2011 में समृद्धि पोरे ने मराठी भाषा में सरोगसी पर फिल्म ‘‘मला आई व्हायचे’’ बनाई थी, जिसमें वेश्या की बजाय मजबूरी में एक गरीब महिला के सरोगेट मदर बनने की कहानी थी. मगर यह सभी फिल्में सरकार द्वारा सरोगसी को जायज ठहराने वाले 2016 में बनाए गए कानून से पहले बनी थीं.

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सरोगसी से फिल्मी हस्तियों में माता पिता बनने की मची है होड़

सरकार द्वारा सरोगसी पर कानून बनाए जाने से पहले ही शाहरुख खान व गौरी खान (अबराम का जन्म मई 2013 में) आमीर खान व किरण राव (आजाद का जन्म दिसंबर 2011 में) सोहेल खान व सीमा खान (योहान खान का जन्म जून 2011 में) इसी पद्धति से माता पिता बने थे. मगर सरोगसी पर कानून बनने के बाद करण जोहर, एकता कपूर, तुषार कपूर, श्रेयश तलपड़े व उनकी पत्नी दीप्ति, साक्षी तंवर, कृष्णा अभिषेक व उनकी पत्नी कष्मीरा शाह, सनी लियोनी और उनके पति डैनियल, जय भानुशाली और उनकी पत्नी माही विज, समीर सोनी और उनकी पत्नी नीलम कोठारी, गुरमीत चैधरी और उनकी पत्नी दैबलीना बनर्जी अब तक सरोगसी पद्धति से माता पिता बन कर खुश हैं.

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अब होगी सरोगसी पर फिल्मों की बाढ़

सूत्रों का दावा है कि 2016 में सरकार द्वारा ‘सरोगसी’ पर कानून बनाए जाने के बाद अब एक बार फिर सरोगसी के विशय पर बौलीवुड में कई फिल्में बन रही हैं. इनमें से एक फिल्म दिनेश वीजन बना रहे हैं. सूत्रों के अनुसार 2011 की मराठी में सरोगसी पर बनी फिल्म ‘‘माला आई व्हायचे’’ के अधिकार हासिल कर  अब ‘‘मैडौक फिल्मस’’ के दिनेश वीजन ने इसे हिंदी में ‘‘मामा मिया’’ के नाम से बना रहे हैं. इस फिल्म में कृति सैनन के होने की भी बात कही जा रही है. जबकि कृति सैनन की तरफ से इसकी स्वीकृति नहीं हो पा रही है. सूत्र बताते है कि फिल्म ‘‘मामा मिया’’ की पटकथा लिखी जा रही है. यह मराठी फिल्म का ज्यों का त्यों रीमेक नही है, बल्कि मराठी फिल्म के कौन्सेप्ट को लेकर नए सिरे से कथा व पटकथा लिखी जा रही है. सूत्र दावा कर रहे हैं कि हिंदी फिल्म की पृष्ठभूमि और किरदार बहुत अलग होगे.

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बौलीवुड में चर्चा है कि करण जौहर निर्मित और राज मेहता के निर्देशन में बन रही फिल्म ‘‘गुड न्यूज’’ को रोमांटिक कौमेडी फिल्म के रूप में प्रचारित किया जा रहा है, जबकि यह फिल्म भी कथित तौर पर सरोगसी पर ही है. इस फिल्म में अक्षय कुमार, करीना कपूर खान, दिलजीत दोसांज, किआरा अडवाणी व जिम्मी शेरगिल की अहम भूमिकाएं हैं. इतना ही नही कुछ दूसरे फिल्मकार भी सरोगसी पर फिल्में बना रहे हैं, पर इन्होंने अभी तक अपने पत्ते नहीं खोले हैं.

वोट राजनीति में धर्म-जाति

देश में हो रहे आम चुनावों के लिए किए गए पार्टियों के गठबंधनों, ट्विटर व फेसबुक पर पोस्टों, और उन पर कमैंटों से जो तसवीर निकल रही है उस से यह साफ हो रहा है कि कांग्रेस के अलावा तकरीबन सभी पार्टियों में जम कर पौराणिक स्मृतिप्रद जाति, धर्म, भेद का जहर फैला हुआ है. विशुद्ध ब्राह्मण व उन के भक्त, जिन में कुछ वैश्य, कायस्थ और अमीर किसान या सरकारी नौकरी वाले शामिल हैं, दूसरी पार्टियां छोड़ कर भारतीय जनता पार्टी में जा रहे हैं. वे अपने गुरुओं के आदेशों पर अमल कर रहे हैं.

समाजवादी पार्टी व बहुजन समाज पार्टी अपनीअपनी जातियों की पार्टियां हैं. वे न तो देश, न आर्थिक नीतियों की सोच रही हैं, उन्हें जातियों पर वर्चस्व बनाए रखना ज्यादा जरूरी लग रहा है. यही लालू प्रसाद यादव की पार्टी का हाल है. पश्चिम बंगाल व ओडिशा में ऊंची जातियों के नेता भाजपा के खिलाफ हैं इसलिए कि वहां गरीबी के कारण उत्पन्न हुए रोष के आगे पौराणिक व्यवस्था ढीली हो गई. ममता बनर्जी और नवीन पटनायक बाकायदा पूजापाठी हैं पर वे उस का झंडा नहीं उठा रहे. दोनों ने अपनेअपने राज्य पर एकाधिकार का लाभ जातिगत भेदभाव को भुनाने में नहीं उठाया.

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भाजपा इन दोनों राज्यों में ब्राह्मणों और भक्त वैश्यों के बल पर कुछ दम दिखाने की कोशिश में लगी है. कांग्रेस 1947 से या यों कहिए 1895 से ही ऊंची जातियों की पार्टी रही है. लेकिन उस ने नीची जातियों को कभी दुत्कारा नहीं. हां, ऐसा भी कुछ नहीं किया कि जातिभेद समाप्त हो जाए. भाजपा और कांग्रेस में फर्क यह है कि भाजपा जातिभेद को भड़का कर लाभ उठाना चाहती है जबकि कांग्रेस इस पर वालपेपर चढ़ा कर. शिक्षा, तार्किक विचारों, स्वतंत्रताओं के नारों के 150 वर्षों बाद आज भी भारत पूरा का पूरा जातीय दलदल में फंसा है.

2019 का यह चुनाव इस दलदल को और बदबूदार बना रहा है. 2014 में नरेंद्र मोदी ने विकास, भ्रष्टाचारमुक्त, रोजगार, देशरक्षा के नारे लगाए थे जिस से पिछड़ी, निचली जातियों को लगा था कि बीमार कांग्रेस के मुकाबले सक्रिय भाजपा जातीय कहर से कहीं ज्यादा मुक्ति दिलाएगी, लेकिन हुआ उलटा.

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भाजपा के गलीगली के नुमाइंदे आज पौराणिक नियमों के चौकीदार बन बैठे हैं. वे हाथ में लट्ठ रख रहे हैं पौराणिकद्रोह के खिलाफ. ‘मैं भी चौकीदार’ की आवाज कट्टरपंथी सोच की सुरक्षा की आवाज है. किसी भी देश का विकास तब तक संभव नहीं जब तक उस का हर यूनिट एकमन से अपने विकास के लिए काम न करे. दूसरे का विध्वंस कुछ न देगा. आपस में वैरभाव शक्ति और पैसा दोनों खर्च तो कराता ही है, यह नई सोच पर लोहे की दीवार जैसी चौकीदारी भी खड़ी करता है. यहां दीवारें और उन पर खड़े चौकीदार सीमा पर नहीं, गलीगली, महल्लेमहल्ले, गांवगांव में हैं.

भूल जाइए कि देश में कोई सामाजिक या आर्थिक क्रांति होने वाली है, चुनावों में चाहे कोई जीते. मोदीजेटली की चौकीदारी बैंकों के बारे में जो भी आंकड़े दिए जाते हैं वे इतने उलझे व अगरमगर वाले होते हैं कि उन्हें समझना कठिन होता है, पर फिर भी जो बात मोटीमोटी समझ आ रही है उस के हिसाब से वर्ष 2017-18 में भारतीय बैंकों के, रिजर्व बैंक औफ इंडिया के मुताबिक, 41,167 करोड़ रुपए धोखेबाज खा गए.

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चौकीदारों में मोदीजेटली मौजूद हैं पर 2016-17 के मुकाबले 2017-18 में धोखेबाजों ने बैंकों को 72 प्रतिशत ज्यादा चूना लगा डाला. चौकीदार रातदिन कहते रहते हैं कि एक कालाबाजारी न बचेगा, एक रिश्वतखोर न बचेगा, एक करचोर न बचेगा. पर देश का धन इस तरह रातदिन बरबाद हो रहा है, यह निहायत ही शर्म की बात है. बैंकों की मारफत ही स?ारा लेनदेन हो, इस के लिए मोदीजेटली उपाय ढूंढ़ते रहते हैं जिन्हें वे आमजन पर जबरन थोप सकें. लेकिन बैंकों में जमा पैसे धोखेबाज भी निकाल ले जा रहे हैं और वे भी जो दिए गए कर्ज को चुका नहीं पा रहे. बैंकों के 10,39,700 करोड़ रुपए के कर्ज शक के दायरे में हैं. वे शायद लौटाए नहीं जाएंगे.

किसानों के कर्ज माफ करने पर हल्ला मचाने वाले मोदीजेटली उन 10 लाख करोड़ रुपयों के कर्ज के बारे में बहुत कम ही कुछ कहते हैं क्योंकि 5 वर्षों के अपने शासन में वे तो बैंकों का धंधा बढ़ाने में ही लगे रहे थे. नोटबंदी और जीएसटी से उन्होंने बैंकों को खूब धंधा दिया. बैंकों ने इसे भगवान का छप्पर फाड़ कर दिया समझा और उसे ऐसे ही लुटाया जैसे योगी आदित्यनाथ अनावश्यक कुंभ पर, शिवराज सिंह चौहान नर्मदा यात्रा पर और नरेंद्र मोदी पटेल की मूर्ति पर खर्च करने में सीना फुलाते हैं.

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बैंकों का पैसा जनता की धरोहर है, पर अब बैंक इसे जनता से मिला टैक्स मानने लगे हैं और बैंकों के अफसर महापंडों की तरह उसे उन्हें दे डालते हैं जिन्हें वे खुश करना चाहते हैं. मोदीजेटली के युग में भारतीय रिजर्व बैंक से ले कर छोटे से छोटा बैंक सरकारी इशारे पर चल रहा है और अपने खर्च पूरा करने के लिए जजमानों को तरहतरह के दामों की फेहरिस्त पकड़ा रहा है. बैंकों ने हर अकाउंट में से कुछ पैसे बिना पूछे निकालने के कंप्यूटरों से प्रोग्राम बना डाले हैं और शिकायत करने वाले को सिबिल के ग्रहचक्कर में डाल कर धर्मभ्रष्ट होने का विधान बना डाला है.

बैंकों के साथ यह खिलवाड़ देश के व्यापार में बढ़ती मंदी का परिणाम है. देश की अर्थव्यवस्था के आंकड़े ऊंचाइयां छू रहे हैं. इन आंकड़ों से खुश न हों क्योंकि भारत ही दुनिया का सब से ज्यादा तेजी से जनसंख्या बढ़ाने वाला देश भी है. ज्यादा लोग काम करेंगे, चाहे कितना खराब करें, कुल मिला कर तो उत्पादन बढ़ेगा. देखना तो यह है कि प्रतिव्यक्ति आय कितनी सुधर रही है. इस में भारत पड़ोसी चीन से 5 गुना कम है और अमेरिका से 30 गुना कम. जो नेता बैंकों को नहीं संभाल पा रहे, उन्हें आंकड़ेबाजी पर हल्ला करने का हक नहीं है, न ही कैशलैस का मंत्र पढ़ने का हुक्म देने का है.

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पीरियड्स के दर्द से बचना है तो इन बातों का रखें ध्यान

महिलाओं को मासिक धर्म यानि पीरियड्स में काफी परेशानी होती है. सुस्ती और मूड स्विग्स के अलावा उन्हें काफी तेज दर्द का सामना भी करना पड़ता है. कई लड़कियां इस वक्त में इसता परेशान होती हैं कि वो डिप्रेशन में चली जाती हैं. इन दिनों में आपको काफी सोच समझ कर और संतुलित खान पान रखना चाहिए. मासिक धर्म के दौरान अपनी सेहत को बनाए रखने के लिए आपको पौष्टिक आहार लेना चाहिए. इस खबर में हम आपको बताएंगे कि इस दौरान आप किस तरह की खानपान से दूरी बनाएं जिससे आपको ज्यादा परेशान ना होना पड़े.

  • फैट वाले खानों से रहे दूर

avoid these eatables during periods

इस दौरान आप फैट वाले खानों से दूर रहें. जैसे मीट में भारी मात्रा में सैच्यूरेटेड फैट पाया जाता है. इसके सेवन से आपके पेट में सूजन और दर्द हो सकता है. पिरीयड्य में ये परेशानी काफी ज्यदा बढ़ जाती है. इस दौरान अगर आपको नौन वेज में कुछ खाना हो तो आप मछली का सेवन कर सकती हैं.

  • शराब

avoid these eatables during periods

शराब हमेशा नुकसानदायक होता है. इसे कभी भी हाथ नहीं लगाना चाहिए. पर खास कर के इस वक्त शराब को और भी ज्‍यादा नुकसानदायक होती है. इससे ये डिप्रेशन होती है. यह खून को और भी ज्‍यादा पतला बनाती है, जिससे पीरियड्स कई दिनों के लिये बढ़ सकते हैं. चाय पीजिये ना कि शराब.

  • गैस बनाने वाले खानों को कहें ना

avoid these eatables during periods

पीरियड्य के दौरान ऐसे सभी खाद्य पदार्थों से आप दूरी बना लें जो गैस बनाती हों. फास्ट फूड, तले हुए खानोंसे बचें और साबुत आहार खाएं जो कि हेल्‍दी होते हैं. असके अलावा आप मेवे भी खा सकती हैं.

  • चीनी युक्‍त खाद्य पदार्थों से बनाएं दूरी

avoid these eatables during periods

कोशिश करें कि स दौरान चीनी युक्‍त खाद्य पदार्थ पीरियड्स के समय ना खाएं. ये और भी ज्‍यादा दर्द पैदा करते हैं.पर अगर मीठा खाने का मन करे भी तो, आप मीठे फल जैसे, आम, तरबूज या सेब आदि खा सकती हैं.

  • बेक किया हुआ फूड

avoid these eatables during periods

बेक्ड फूड हमेशा लोगों को काफी आकर्षित करते हैं. ये काफी टेस्टी होते हैं. पर इसमें भी ट्रांस फैट भारी मात्रा में होता है. पीरियड्स के दौरान इससे दूरी बनाएं क्योंकि यह आपके एस्‍ट्रोजन लेवल को बढ़ा सकता है और इससे यूट्रस में दर्द होता है. इसकी जगह पर आप ब्रेड खा सकती हैं, जिससे आपको काफी सारा फाइबर मिले.

बर्थडे पर सगाई करने की बजाय थाईलैंड भागे वरूण धवन, जानें क्यों

वरुण धवन के दिमाग में क्या चल रहा है, यह उनसे बेहतर कोई नहीं जान सकता. एक तरफ वरुण धवन दावा करते हैं कि वह अपनी बचपन की दोस्त व प्रेमिका नताशा दलाल के साथ इसलिए हैं, क्योंकि उनका अपना निजी व्यक्तित्व है और उनकी अपनी आवाज है. इसके बावजूद वरुण धवन और नताशा दलाल की शादी का रहस्य गहराता जा रहा है. कुछ दिन पहले ही हमसे बात करते हुए वरुण धवन ने साफ साफ कहा था कि फिलहाल वह शादी नहीं कर रहे हैं. उनका पूरा ध्यान सिर्फ अपने करियर को संवारने पर है.

अचानक थाईलैंड चले गए वरुण धवन…

बहरहाल, अब तक यह तय था कि वरुण धवन नवंबर माह में नताशा दलाल के संग डेस्टीनेशन वेडिंग करेंगे. लेकिन अब ये खबरें आ रही हैं कि वह इस साल शादी के बंधन में नही बंधने वाले हैं. वरुण की शादी का रहस्य इसलिए भी गहरा गया है, क्योंकि वरुण धवन ने अपने पिता डेविड धवन की सारी योजना पर पानी फेरते हुए थाईलैंड चले गए.

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डेविड करने वाले थे सेलिब्रेशन…

डेविड धवन ने योजना बनाई थी कि वरुण धवन के 32 वें जन्मदिन यानीकि 24 अप्रैल को जन्मदिन के मौके पर वह वरुण और नताशा की सगाई के साथ ही फिल्म ‘‘कुली नंबर वन’’ का रीमेक बनाने की भी घोषणा करेंगे. मगर अफसोस डेविड धवन ऐसा कुछ नहीं कर पाए. क्योंकि वरुण दो दिन पहले ही थाईलैंड चले गए. बेचारे डेविड धवन ने अपने बड़े बेटे रोहित धवन,बहू व पोती संग केक काटकर वरुण धवन का जन्म दिन मना लिया.

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पिता को देनी पड़ी सफाई…

वरुण धवन की सगाई टलने के बाद कई तरह की अफवाहों का बाजार गर्म होने लगा आखिरकार डेविड धवन को सामने आकर एक वेब साइट से कहना पड़ा कि सगाई जरुर टली है, पर शादी होगी.

डेविड धवन ने कहा- ‘‘वरुण धवन बैचलर पार्टी मनाने के लिए अपने दोस्तों के संग थाईलैंड गए हैं. हमने घर पर केक काटकर उसका जन्मदिन मनाया और फोन पर उसे जन्मदिन की बधाई दी. इन दिनों वह अपनी फिल्मों की शूटिंग में काफी व्यस्त है. इसलिए शादी के लिए उसके पास समय नहीं है. इसलिए अब यह शादी 2020 में ही होगी.’’

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Edited by- Nisha Rai

अब करण जौहर और एकता की राह पर चलेंगे विपुल

लेखक-शान्तिस्वरुप त्रिपाठी

बौलीवुड में स्टूडियो सिस्टम के शुरू होते ही विदेशी स्टूडियो ने धड़ल्ले से भारत में प्रवेश कर लिया था, लेकिन चार-पांच वर्ष के अंदर ही यह विदेशी स्टूडियो पूरी तरह से असफल हो गए, मगर इस बीच इन्होंने बौलीवुड के निजी फिल्म निर्माताओं की कमर तोड़कर रख दी. धीरे-धीरे निजी निर्माताओं ने अपनी दुकानदारी बंद करनी शुरू कर दी. तो वहीं आदित्य चोपड़ा, करण जोहर, एकता कपूर जैसे फिल्म निर्माताओं ने वक्त की नब्ज को पहचान कर कौरपोरेट कल्चर को अपनाते हुए स्टूडियो सिस्टम की तरह काम करना शुरू किया.

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ऐसे में भला निर्माता निर्देशक विपुल अम्रतलाल शाह कब तक चुप बैठते. वैसे भी बतौर निर्माता उनकी ‘फोर्स टू’,‘कमांडो 2’ और बतौर निर्माता निर्देशक ‘नमस्ते लंदन’ सहित कुछ फिल्में लगातार बौक्स औफिस पर धराशाही हो चुकी है. इसलिए अब विपुल अम्रतलाल शाह ने भी अपनी फिल्म निर्माण कंपनी को ‘स्टूडियो’ में बदलते हुए एक साथ कई फिल्मों और वेब सीरीज के निर्माण की घोषणा की है.

क्या होगा सुपरहीरोज का खात्मा

विपुल अम्रतलाल शाह ने अपनी कंपनी के तहत निर्मित की जाने वाली फिल्मों के निर्देशन के लिए कई सफल निर्देशको को अनुबंधित किया है. इनमें ‘द गाजी अटैक’ फेम निर्देशक संकल्प रेड्डी, फिल्म ‘लाहौर’ फेम राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त निर्देशक संजय पूरण सिंह चैहाण, ‘कमांडो 2’ फेम देवेन भोजानी को अनुबंधित किया है. इसके अलावा दो वेब सीरीज बनाने जा रहे हैं, जिसमें से एक वेब सीरीज गुजराती के मशहूर लेखक हरकिशन मेहता के उपन्यास पर है. यह कहानी है 1812 से 1855 के बीच 1919 लोगों की हत्या करने वाले कुख्यात ठग आमीर अली की. और दूसरी वेब सीरीज चिकित्सा जगत में इंसानों पर दवाओं के जो खतरनाक प्रयोग किए जा रहे हैं, उस पर है.

संकल्प रेड्डी भारतीय इतिहास को बदल देने वाली सच्ची घटना पर आधारित फिल्म का निर्देशन करेंगे, जबकि संजय पूरण सिंह चैहाण रहस्य रोमांच प्रधान एक्शन फिल्म निर्देशित करेंगें. जबकि देवेन भोजानी की फिल्म की कहानी एक इंसान और उसके कुत्ते की भावना प्रधान कहानी है. जबकि चौथी फिल्म का निर्देशन वह स्वयं करने वाले हैं.

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खुद विपुल अमृतलाल शाह कहते हैं, ‘‘मैं अपनी नई फिल्मों को लेकर काफी उत्साहित हूं. यह सभी विविधता पूर्ण विषयों पर हैं और बेहतरीन निर्देशकों द्वारा निर्देशित की जा रही हैं. मैं स्वयं एक ऐसी शैली की फिल्म पर काम कर रहा हूं, जिस तरह की फिल्म मैने स्वयं आज तक नही देखी है.’’

क्या यही है अंधा कानून

आप ने किसी से उधार ले रखा हो और चुका न पाने पर देने वाला यदि जलील कर जाए तो क्या इसे आत्महत्या के लिए उकसाना कहेंगे? कम से कम तमिलनाडु के एक मजिस्ट्रेट और वहां के उच्च न्यायालय का तो यही खयाल है. तमिलनाडु के अर्जुनन ने राजगोपाल को 2001 में क्व80 हजार उधार दिए थे. सालभर बाद जब उस ने क्व80 हजार मूल और क्व5 हजार ब्याज मांगा तो राजगोपाल ने आत्महत्या कर ली और लिख गया कि आत्महत्या कर्ज देने वाले के तकाजों के कारण कर रहा हूं.

सैक्स संबंधों में उदासीनता क्यों

समझ नहीं आता कि इस देश की अदालतें कैसी हैं कि इस मामले में पैसे देने वाले को ही गुनहगार मान सकती हैं. छोटी अदालत और बड़ी अदालत दोनों ने अर्जुनन को कैद की सजा सुना डाली. भारतीय दंड विधि की धारा 306 के अंतर्गत आत्महत्या के लिए उकसाना अपराध है पर अपना पैसा वापस मांगना कैसे आत्महत्या के लिए उकसाना हो गया?

अगर कमजोर दिल का कोई व्यक्ति अपनी गलती पर कहे बुरेभले पर आत्महत्या कर लें तो इसे उकसाना कहना तो कानून का माखौल उड़ाना है. कानून तो यह चाहता है कि कोई इस तरह का माहौल न बना दे कि आदमी को आत्महत्या के लिए मजबूर होना पड़े.

खतरे में है व्यक्तिगत स्वतंत्रता

घरों में इस तरह की बातें बहुत होती हैं. पति या सास की डांट, पिता की फटकार, बहन के रूठने, प्रेमिका के न करने पर अकसर लड़कियांलड़के आत्महत्या कर लेते हैं पर यह आत्महत्या के लिए मजबूर करना नहीं कहा जा सकता. सुप्रीम कोर्ट ने अर्जुनन को राहत दी पर 15 साल बाद. क्व80 हजार देने पर अर्जुनन को लाखों रुपए वकीलों को देने पड़े होंगे. उस पर हर समय तलवार लटकती रही होगी. हो सकता है कुछ दिन जेल में भी रहा हो.

सावधान, आप बेचे जा रहे हैं

कानून व्यावहारिक होने चाहिए, अदालतों को उन्हें ढंग से लागू करना चाहिए. मनमानी बातें नहीं होनी चाहिए. सुप्रीम कोर्ट को तो पुलिस, मजिस्ट्रेट और हाई कोर्ट सब को फटकारना चाहिए था कि आखिर क्यों ऐसा फैसला दिया कि एक बेगुनाह न्याय के लिए भटकता रहा?

मेमोरी शार्प करना चाहते है तो ये खबर है आपके लिए

फिट बौडी और फिट ब्रेन से ही हम पूरी तरह से हेल्दी कहलाते हैं. बौडी को हेल्दी रखने के लिए हम अच्छी डाइट और एक्सरसाइजेज करते हैं. पर क्या दिमाग की सेहत के लिए आप कुछ करते हैं? हम आपको बता दें कि दिमाग की सेहत हमारे खानपान पर निर्भर करती है. हम क्या खाते हैं क्या नहीं, हमारे मानसिक स्थिति को प्रभावित करती है. ऐसे में जरूरी है कि आप अपने खानपान को ले कर काफी सजग रहें.

इस खबर में हम ऐसे खास खुराक के बारे में बताएंगे जिसको अपनी डाइट में शामिल कर आप अपने दिमाग को तेज बना सकते हैं. तो आइए जाने खास डाइट प्लान के बारे में.

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हल्दी

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हल्दी में कई ऐसे तत्व पाए जाते हैं जो तनाव को दूर करने में काफी मददगार होते हैं. हल्दी में मौजूद कर्क्यूमिन व्यक्ति के भीतर फील-गुड हार्मोन तो डोपामाइन और सेरोटोनिन अवसाद संबंधित लक्षणों को कम करने का काम करते हैं. दिमाग तेज करने के लिए हल्दी का आधा चम्मच काफी असरदार होता है.

अश्वगंधा

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तनाव को दूर कर दिमाग को स्वस्थ रखने का बेहद पुराना नुस्खा है अश्वगंधा. स्ट्रेस हार्मोंस को कम करने के लिए इसका प्रयोग किया जाता है. दिमाग को तेज करने के लिए एक चम्मच अश्वगंधा का पाउडर रात को सोने से पहले गर्म दूध के साथ लें, कुछ ही दिनों में आपको असर दिखेगा.

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बुढ़ापे में चाहिए अच्छी याददाश्त तो ये खबर है आपके लिए है

बेरी

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ब्लूबेरी हो स्ट्रौबेरी या ब्लैक बेरी, एंटीऔक्सीडेंट से भरपूर होने की वजह से दिमाग के लिए बेहद फायदेमंद होता है. यह आपकी एकाग्रता में वृद्ध‍ि करने में भी सहायक है.

अखरोट

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अखरोट आपके दिल के साथ साथ दिमाग के लिए भी काफी असरदार होता है. इसमें अल्फा इनोलेनिक एसिड के साथ कई अन्य पोषण तत्व मौजूद होते हैं. जो दिमाग तक पर्याप्त मात्रा में औक्सीजन पहुंचाकर रक्तसंचार बढ़ाने का काम करते हैं. जिसकी वजह से मेमोरी शार्प होती है.

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