2019 के चुनावों में यदि नरेंद्र मोदी अपनी सफलताओं का आकलन जनता से करवाने के लिए उतर रहे हैं तो मीडिया दूसरे नंबर का उम्मीदवार है. पहले कभी भी मीडिया इस बुरी तरह निशाने पर नहीं आया है.

मीडिया की निष्पक्षता व ईमानदारी पर प्रश्नचिह्न तो हमेशा लगते रहे हैं पर इस बार जिस तरह मीडिया ने सरकारी पक्ष लिया है और जिस तरह कुछ चैनलों व समाचारपत्रों ने अपनी नीतियां बनाई हैं, उन से मीडिया भी जनता के सामने कटघरे में खड़ा हो गया है.

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