कारगिल युद्ध के समय भारत की पहली फीमेल फाइटर पायलट रही गुंजन सक्सेना की जिंदगी पर बन रही बायोपिक फिल्म ‘कारगिल गर्ल’ बीच में ही फंस गई है. दरअसल जब भी किसी सैन्य अधिकारी पर फिल्म बनानी हो, तो उस सैन्य अधिकारी के पारिवारीक सदस्यों के साथ साथ रक्षा मंत्रालय से इजाजत लेना जरूरी होता है. फिल्म के निर्माताओं ने रक्षा मंत्रालय के पास अपनी इस फिल्म के संबंध में सारे दस्तावेज जमा करके इजाजत मांगी है. लेकिन अभी तक रक्षा मंत्रालय ने इस फिल्म को लेकर स्वीकृति प्रदान नही की है.

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