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चिकन सूप बनाने की आसान रेसिपी

 सामग्री :

चिकन ( 200 ग्राम)

कौर्न फ्लोर ( 03 बड़े चम्मच)

अंडा (1)

गाजर ( 01 नग)

टमाटर (1)

लहसुन ( 03 कली)

सिरका ( 01 बड़ा चम्मच)

अदरक ( 01 इंच का टुकड़ा)

जानें कैसे बनाएं कीमा मटर

काली मिर्च ( 1/2 छोटा चम्मच)

चिली सौस ( आवश्यकतानुसार)

नमक (स्वादानुसार)

बनाने की विधि :

सबसे पहले अदरक को धो लें और लहसुन की कलियां छील कर दोनों को एक साथ मिलाकर पीस लें.

अब एक प्रेशर कुकर लें, उसमें चिकन, अदरक-लहसुन का पेस्ट, काली मिर्च डाल दें और आवश्यकतानुसार पानी भी मिला दें.

क्रिस्पी भुट्टे के पकौड़े

इसके बाद कुकर को बंद करके उसे मध्यम आंच पर 20 मिनट तक पका लें.

पकने के बाद कुकर को उतार लें और उसका ढक्कन खोल दें और ठंडा होने दें.

उसके बाद कुकर का पानी और चिकन पीस अलग-अलग कर लें.

चिकन में से हड्डियों को अलग कर दें और इसके बाद उबले चिकन का गुनगुना पानी लेकर उसमें कौर्न फ्लोर को घोल लें और चिकन के छोटे-छोटे पीस कर लें.

फिश मौली रेसिपी

साथ ही गाजर और टमाटर को भी धुल कर बारीक-बारीक काट लें.

अब कुकर को पुन: आंच पर रखें, उसमें चिकन का पानी, चिकन पीस, गाजर और टमाटर डाल दें और मध्यम आंच पर थोड़ी देर पकने दें.

उसके बाद उसमें अंडा तोड़ कर डालें और लगभग 15 मिनट तक पकने दें.

जब सूप थोड़ा गाढ़ा हो जाए, तो गैस बंद कर दें, इसके बाद उसमें सिरका और चिली सौस डाल दें और कुकर का ढ़क्कन बंद कर दें.

पांच मिनट के बाद कुकर का ढ़क्कन खोलें और अब आपका चिकन सूप तैयार है.

समर ड्रिंक : फ्रूट टिंगल

मैंगो पैन केक

अगर आप आम के शौकीन हैं, तो अब तक आप आम का अचार, मैंगो आइसक्रीम, मैंगो शेक,  मैंगो कुल्फी और खट्टी-मीठी चटनी के अलावा आप मैंगो पैन केक विद आइसक्रीम भी बना सकती हैं. तो झट से आपको इसकी रेसिपी बताते हैं.

सामग्री :

आम (02 छिले और कटे हुए)

वनीला आइसक्रीम ( 02 स्कूप)

शहद ( 02 छोटे चम्मच)

आटा ( 150 ग्राम)

दूध ( 250 मिली)

शक्कर ( 03 छोटे चम्मच)

मक्खन ( 01 छोटा चम्मच)

बेकिंग पाउडर ( 1/4 छोटा चम्मच)

बनाने की विधि :

सबसे पहले पैन केक के लिए बताई गयी सामग्री को आपस में अच्छी तरह से मिला कर पेस्ट बना लें.

अब एक नौन स्टिक पैन में मक्खन डाल कर उसे गर्म करें.

मक्खन के गर्म होने पर पैनकेक का मिश्रण उसमें डाल दें और इसे सुनहरा होने तक भूनें.

मिश्रण के भुन जाने पर आंच बंद कर दें और मिश्रण को ठंडा होने दें.

मिश्रण के ठंडा होने पर उसपर आधी आइसक्रीम, आम का गूदा और शहद मिला दें.

अब आपका मैंगो पैन केक्स रोल तैयार है.

इसे सर्विंग बाउल में निकालें और ऊपर से आइसक्रीम डाल कर मैंगो पैन केक विद आइसक्रीम टेस्ट करें.

बाईं करवट सोने के हैं बड़े फायदे, आप भी जाने

लोगों के सोने का तरीका अलग अलग होता है. कोई दाईं ओर करवट ले कर सोता है तो कोई बाईं ओर. बहुत से लोगों को पेट के बल सोने की आदत होती है. आपके सोने के तरीके में आपकी सेहत का राज छिपा हुआ है. आपकी सेहत सोने के तरीके से काफी प्रभावित होती है.

इस खबर में हम आपको बाईं करवट सोने के फायदों के बारे में बताएंगे.

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  • हमारा दिल बाईं ओर होता है. जब हम उसी तरफ करवट कर के सोते हैं को हमारे दिल पर कम दबाव होता है और हमारी सेहत के लिए ये फायदेमंद होता है.
  • डाइजेशन के लिए भी बाईं ओर करवट कर के सोना अच्छा होता है. असल में बाईं तरफ करवट लेकर सोने से शरीर में मौजूद वेस्ट मटेरियल आसानी से छोटी आंत से बड़ी आंत तक पहुंच जाता है. इसके बाद वेस्ट मटेरियल शरीर से आसानी से बाहर निकल जाता है और व्यक्ति को पेट संबंधी समस्याएं होने का खतरा कम होता है.
  • जानकारों की माने तो बाईं करवट हो कर सोना सेहत के लिहाज से काफी अच्छा होता है. इस पोजिशन में सोने से पाचन अंग बेहतर काम करते हैं.
  • प्रेग्नेंसी में महिलाओं को खास तौर पर बाईं करवट के सोना चाहिए. ऐसा इसलिए क्योंकि इस जेस्चर में उनकी कमर पर कम दबाव पड़ता है साथ ही गर्भाशय और भ्रूण में खून का बहाव अच्छे से होता है.
  • जिन लोगों को सोते वक्त खर्राटा लेने की समस्या होती है उनके लिए ये जेस्चर काफी अच्छा होता है. दरअसल, बाईं करवट लेकर सोने से जुबान और गला न्यूट्रल पोजिशन में रहते हैं, जिससे सोते समय सांस लेने में कोई दिक्कत नहीं होती है.
  • इन सारे फायदों के अलावा बाईं करवट लेकर सोने से गर्दन और कमर दर्द से राहत मिलती है. किडनी और लिवर बेहतर तरीके से काम करते हैं. गैस और सीने में जलन की समस्या नहीं होती है. अल्जाइमर का खतरा भी कम होता है.

मेकअप रिमूव करने के लिए अपनाएं ये 5 होममेड टिप्स

मेकअप करने के बाद उसे हटाना भी चेहरे के लिए बहुत जरूरी होता है. मेकअप न हटाने पर वह स्किन के रोमछिद्रों को बंद कर देता है, जिससे चेहरे पर मुंहासे, झुर्रियां जैसी परेशानियां हो जाती हैं. जिस तरह मेकअप करते वक्त सही प्रोडक्ट्स का खास ध्यान रखती हैं उसी तरह मेकअप रिमूव करते वक्त भी सही प्रोडक्ट्स का ध्यान रखना बहुत जरूरी है. कई महिलाएं मेकअप के लिए तो महंगे-महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करती हैं, लेकिन बात जब मेकअप रिमूव करने की आती है, तो नौर्मल फेस वौश का ही इस्तेमाल करती हैं. मेकअप हटाने के लिए सीधे फेस वौश का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे मेकअप सही ढंग से रिमूव नहीं हो पाता है और स्किन भी खिंची-खिंची नजर आती है.

खुद बनाएं मेकअप रिमूवर

मेकअप हमेशा मेकअप रिमूवर से ही रिमूव करना चाहिए. अगर आप के पास मेकअप रिमूवर नहीं है या खत्म हो गया है तो आप घर पर ही मेकअप रिमूवर बना सकती हैं. इस के लिए आप को अतिरिक्त पैसे खर्च करने की जरूरत नहीं है.

1. नेचुरल कोकोनट औयल है फायदेमंद

खाने से लेकर बालों तक को चमकदार बनाने वाला नारियल का तेल हमारी स्किन के लिए भी बहुत लाभदायक है. नारियल तेल में बहुत से पोषक तत्त्व और विटामिन पाए जाते हैं, जो हमारी स्किन के स्वास्थ्य के लिए काफी लाभदायक होते हैं. नारियल का तेल मेकअप रिमूवर का भी काम करता है.

दरअसल, मेकअप में ऐसे पदार्थ होते हैं जो स्किन से चिपक जाते हैं और आसानी से नहीं छूटते हैं. ऐसे में आप नारियल के तेल से आसानी से मेकअप को रिमूव कर सकती है. मेकअप रिमूव करने के लिए नारियल के तेल को पूरे चेहरे पर लगाएं और 5 मिनट बाद कौटन से क्लीन कर लें. इस से मेकअप भी रिमूव हो जाएगा और स्किन भी हैल्दी रहेगी.

2. फ्रैश स्किन के लिए दूध

दूध पीना जितना सेहत के लिए फायदेमंद है उतना ही चेहरे के लिए भी फायदेमंद है. इसे हटाने के लिए दूध का भी इस्तेमाल कर सकती हैं. मेकअप हटाने के लिए मलाई वाले दूध का इस्तेमाल करें. पहले पूरे चेहरे पर दूध लगा लें और फिर थोड़ी देर बाद कौटन से क्लीन कर लें. इस से चेहरा क्लीन तो होगा ही, फ्रैश-फ्रैश भी नजर आएगा.

3. शहद और बेकिंग सोडा

शहद और बेकिंग सोडे का मिश्रण किसी भी तरह के मेकअप को आसानी से रिमूव कर देता है. मेकअप को हटाने के लिए रुई पर शहद और 1 चुटकी बेकिंग सोडा डालें. फिर उस से पूरे चेहरे को क्लीन कर लें.

4. खीरे से करें फेस पर मसाज

सलाद में खाया जाने वाला खीरा सौंदर्य के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है. इस में विटामिन सी, के और बीटा कैरोटीन जैसे पोषक तत्त्व मौजूद होते हैं, जो बालों और स्किन को स्वस्थ रखने में बहुत लाभकारी माने जाते हैं. खीरे को नैचुरल क्लींजर और टोनर की तरह भी इस्तेमाल किया जाता है. यह स्किन की डीप क्लींजिंग कर उसे ताजगी का एहसास कराता है. मेकअप रिमूव करने के लिए खीरा बहुत फायदेमंद है. इस के लिए खीरे का पेस्ट बना लें. अब उस में बादाम का तेल मिलाएं. फिर इस पेस्ट को पूरे चेहरे पर लगाएं. थोड़ी देर मसाज कर के पानी से धो लें.

5. खूबसूरती को रखेगा बरकरार ऐलोवेरा और वैसलीन

ऐलोवेरा औषधीय गुणों से भरपूर पौधा है. यह चेहरे का सौंदर्य बरकरार रखने के लिए बहुत लाभदायक है. वैसलीन स्किन को रुखेपन से बचाती है. साथ ही उसे मौइश्चराइज भी करती है. इस पैट्रोलियम जैली में किसी भी प्रकार का हानिकारक कैमिकल नहीं होता. ऐलोवेरा और वैसलीन के मिश्रण से आसानी से मेकअप भी रिमूव कर सकती हैं. मेकअप रिमूव करने के लिए ऐलोवेरा और वैसलीन का मिश्रण बना लें. मिश्रण में वैसलीन की मात्रा ज्यादा रखें. अब इस मिश्रण को पूरे चेहरे पर लगा लें. कुछ देर बाद कौटन की मदद से मेकअप क्लीन कर लें.

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कारगिल गर्ल: अधर में लटकी जाह्नवी की ‘गुंजन सक्सेना बायोपिक’

कारगिल युद्ध के समय भारत की पहली फीमेल फाइटर पायलट रही गुंजन सक्सेना की जिंदगी पर बन रही बायोपिक फिल्म ‘कारगिल गर्ल’ बीच में ही फंस गई है. दरअसल जब भी किसी सैन्य अधिकारी पर फिल्म बनानी हो, तो उस सैन्य अधिकारी के पारिवारीक सदस्यों के साथ साथ रक्षा मंत्रालय से इजाजत लेना जरूरी होता है. फिल्म के निर्माताओं ने रक्षा मंत्रालय के पास अपनी इस फिल्म के संबंध में सारे दस्तावेज जमा करके इजाजत मांगी है. लेकिन अभी तक रक्षा मंत्रालय ने इस फिल्म को लेकर स्वीकृति प्रदान नही की है.

लीड रोल में है जाह्नवी कपूर…

इस फिल्म में जाह्नवी कपूर, गुंजन सक्सेना का किरदार निभा रही हैं, जबकि गुंजन सक्सेना के भाई के किरदार में एक्टर अंगद बेदी और पिता के किरदार में पंकज त्रिपाठी नजर आएंगे. फिल्म की शूटिंग इन दिनों लखनऊ में हो रही है.

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Gunjan_Saxena-JanhviKapoor

सूत्रों का दावा है कि 28 अपैल्र से इस फिल्म के लिए कुछ पारिवारिक सीन लखनऊ में ही एअरफोर्स स्टेशन के करीब फिल्माए जाएंगे. इसके बावजूद इस फिल्म को लेकर निर्माताओं की तरफ से कोई अधिकारिक बात नही की जा रही है.

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5 टिप्स: ऐसे दूर करें गर्दन का कालापन

आमतौर पर आप अपने चेहरे की सफाई पर जितना ध्यान देती हैं,  उतना गर्दन की सफाई पर ध्यान नहीं देती. इस तरह आपके गर्दन पर मैल जमने लगती है और धीरे-धीरे मैल का कालापन जम जाता है. आपको ऐसे कुछ घरेलू टिप्स बताते हैं, जिससे आप अपनी गर्दन को साफ और सुंदर बना सकती हैं.

  1. संतरे का छिलका

संतरे में भी विटामिन सी भरपूर मात्रा में होती है. इसलिए संतरे के छिलके और दूध को मिलाकर एक पेस्ट तैयार कर लें. नहाने से पहले इस पेस्ट से रोजाना अपने गर्दन की मालिश करें. कुछ दिनों में आपको फर्क नजर आने लगेगा.

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2. नींबू का रस

नींबू में विटामिन सी और सिट्रिक एसिड होता है. इसकी वजह से इसे प्राकृतिक ब्लीच भी कहते हैं. गर्दन का कालापन हटाने के लिए नहाने से पहले पांच या दस मिनट तक गर्दन पर नींबू का टुकड़ा रगड़ें. अगर आपकी त्वचा बहुत ज्यादा नाजुक है तो आप इसमें गुलाब जल मिला सकती हैं. इसके लगातार प्रयोग से आपकी गर्दन पर जमी मैल छूट जाएगी.

3. आलू

आलू में केटाकोलिस नाम का एंजाइम पाया जाता है. यह एंजाइम दरअसल, स्क‍िन को ठंडक पहुंचाता है और काले धब्बों को साफ करता है. आप आलू का रस निकाल कर नहाने से पहले अपनी गर्दन पर रगड़ें. बेहतर परिणाम के लिए आप आलू के रस में नींबू का रस भी मिला सकती हैं.

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4. बेसन

बेसन एक तरह से नेचुरल स्क्रबर है, जो डेड स्क‍िन को हटाने में बहुत मददगार होता है. इसके अलावा इसे लगाने से त्वचा में चमक भी आती है. गर्दन का कालापन हटाने के लिए आप बेसन का इस्तेमाल पानी या दूध मिलाकर कर सकती हैं. इसमें यदि चुटकी भर हल्दी डाल दें तो इसका असर और बढ़ जाएगा.

5. खीरा

आपने कई बार खीरे का इस्तेमाल मास्क के तौर पर देखा होगा. इसकी मूल वजह यही है कि खीरा त्वचा की डेड स्क‍िन्स की मरम्मत कर उसे तरोताजा बनाता है. खीरे को कस कर गर्दन पर लगाएं. दस मिनट बाद खीरे के रस से दस मिनट तक गर्दन की मालिश करें और फिर धो लें. कालापन दूर हो जाएगा.

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5. केला

घर में रखे-रखे केला यदि ज्यादा पक गया है और उसे कोई खा भी नहीं रहा है तो उसका इस्तेमाल आप अपनी गर्दन पर जमी मैल हटाने के लिए कर सकती हैं. केले का पेस्ट बनाएं और उसमें जैतून का तेल मिला लें. इस मिश्रण को गर्दन पर लगाएं. दस मिनट रखें और फिर हल्के हाथों से मालिश करते हुए धो दें.

यूं कोई बेवफा नहीं होता

किसी शायर ने क्या खूब कहा है कि – कुछ तो मजबूरियां रही होंगी, यूं कोई बेवफा नहीं होता… सच है कि नाजायज या समाज में गलत मानी जाने वाली चीजों की ओर इन्सान किसी न किसी मजबूरी में ही उन्मुख होता है, वरना बदनामी ओढ़ने का शौक भला किसे होता है? कहीं न कहीं कोई न कोई कमी जरूर होती है, जिसकी भरपाई इन्सान गलत तरीके से करने की कोशिश करता है. ‘मैं, तुम और वो’ में ‘वो’ उस कमी को पूरा करता है जो ‘मैं’ और ‘तुम’ के बीच पैदा हो गयी है. हाल ही में एक्स्ट्रा मैरिटल डेटिंग ऐप ‘ग्लीडेन’ ने एक सर्वे रिपोर्ट जारी करते हुए खुलासा किया है कि दस में से सात शादीशुदा महिलाएं किसी न किसी रूप में पति को धोखा देती हैं. यह सर्वे भारतीय युगल के बीच हुआ है, जिसमें पांच लाख से अधिक लोग शामिल हुए. ‘महिलाएं अडल्टरी या व्यभिचार क्यों करती हैं’ शीर्षक से हुए इस सर्वेक्षण में यह बात सामने आयी है कि बेंगलुरु, मुंबई और कोलकाता में ऐसी  महिलाओं की संख्या सबसे अधिक है, जो पति के अलावा भी किसी अन्य पुरुष के प्रति या तो आकर्षित हैं, या उनके साथ मानसिक, शारीरिक या भावनात्मक सम्बन्ध में हैं. इस सर्वे में 5 लाख भारतीय ग्लीडन यूजर्स में से 20 फीसदी पुरुषों और 13 फीसदी महिलाओं ने अपने जीवनसाथी को धोखा देने की बात स्वीकार की है. कई महिलाएं अपने पति को सिर्फ इसलिए धोखा देती हैं क्योंकि उनकी शादी नीरस हो गयी है तो कुछ इसलिए क्योंकि पति उनके घरेलू कामों में उनका हाथ नहीं बंटाते हैं. हालांकि इस सर्वेक्षण से यह खुलासा भी हुआ है कि बाहरी पुरुष या बाहरी स्त्री के साथ सम्बन्ध बनने के बाद दम्पत्ति का आपसी सौहार्द और शादीशुदा जिन्दगी ज्यादा अच्छी हो गयी है. यही नहीं, शादी से बाहर एक साथी को खोजने से उन्हें अपने जीवन में उत्साह का अहसास हुआ है. सर्वे में दस में से चार महिलाओं का मानना है कि अजनबियों के साथ मौजमस्ती के बाद उनके जीवनसाथी के साथ उनका रिश्ता और अधिक मजबूत हुआ है.

नास्तिकता की ओर बढ़ रही है दुनिया

–  औरत की बेवफाई पर एक्स्ट्रा मैरिटल डेटिंग ऐप ‘ग्लीडेन’ की सर्वे रिपोर्ट चौंकाने वाली है.

–  सर्वे के मुताबिक दस में से सात शादीशुदा महिलाएं किसी न किसी रूप में पति को धोखा देती हैं.

–  बेंगलुरु, मुंबई और कोलकाता में ऐसी बेवफा महिलाओं की संख्या सबसे अधिक है, जिनका सम्बन्ध पति के साथ पर-पुरुष से भी है.

अधूरी रह गई डौन बनने की चाहत

दरअसल वैवाहिक जीवन में प्यार के साथ-साथ शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक सम्बन्धों की जरूरत मर्द और औरत दोनों को ही होती है. सेक्स से जुड़ी किसी भी बात को पुरुष बड़े आराम से शेयर कर लेते हैं, जबकि महिलाएं शर्म और हिचकिचाहट महसूस करती हैं. यही कारण है कि स्त्री चरम सुख और पूर्ण आनन्द प्राप्त करने के बारे में स्वयं कुछ नहीं कह पाती, लेकिन सेक्स एक ऐसी आग है जो भड़कने के बाद आसानी से शांत नहीं होती. इसी चक्कर में वह अन्य पुरुष की तरफ आकर्षित हो जाती हैं.

कोई समझेगा इन के दर्द को

इसी तरह दाम्पत्य जीवन में भावनात्मक लगाव होना भी बहुत जरूरी है. शारीरिक सम्बन्धों का सुख तभी हासिल होता है जब जोड़े के बीच भावनात्मक लगाव, प्रेम और विश्वास हो. शारीरिक सम्बन्ध कोई मशीनी क्रिया नहीं है. यह पूरी तरह दिल-दिमाग से जुड़ी प्रक्रिया है. जब तक महिला अपने पुरुष के प्रति प्रेम महसूस नहीं करती है, तब तक उसका शरीर सेक्स के लिए तैयार नहीं होता है. ऐसे में वैवाहिक जीवन का सेक्स सम्बन्ध भी बलात्कार बन कर ही रह जाता है. बार-बार इस प्रताड़ना से गुजरती ऐसी महिला का किसी ऐसे पुरुष की ओर आकर्षित हो जाना, जिसके प्रति वह प्यार महसूस करने लगे, कोई आश्चर्य की बात नहीं है. अनसुईया जब पति के साथ बिस्तर पर होती है, तो जब तक पड़ोस के नौजवान और आकर्षक युवक सौरभ की कल्पना न करे, उसका शरीर पति के साथ सेक्स के लिए तैयार ही नहीं होता है. प्रत्यक्ष तौर पर तो वह पति के साथ हमबिस्तर होती है, मगर उसकी कल्पना में सौरभ ही होता है. इस कल्पना से उसे पति के साथ सम्बन्ध बनाने में आसानी होती है. यह सच सत्तर प्रतिशत महिलाओं का सच है, और यह ‘कल्पना’ उनके लिए इसलिए जरूरी हो जाती है क्योंकि पति मानसिक और भावनात्मक तौर पर पत्नी से जुड़ा ही नहीं होता है और सेक्स को एक शारीरिक क्रिया समझ कर फटाफट निपटा लेना चाहता है.

ममता, मजहब और माशूक

महिला का किसी अन्य पुरुष के साथ सम्बन्ध बनाने के और भी कई कारण होते हैं. एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर के चलते आज समाज में अनेक अपराध पनप रहे हैं, कहीं घरेलू हिंसा हो रही है, कहीं कत्ल हो रहे हैं, कहीं तलाक हो रहे हैं. भारतीय समाज के लिए ऐसी खबरें अच्छी तो नहीं हैं, लेकिन कभी यह जानने की कोशिश नहीं की जाती है कि आखिर ऐसा होता ही क्यों है?

इसी कड़ी में कल आगे पढ़िए- औरतें ‘बेवफा’ होने के लिए मजबूर क्यों हो जाती हैं?

फाल के बाद

भाग-1

स्कूल बस से उतरते ही नेहल की नजर आसपास खड़े पेड़ों पर गई. पतझड़ का मौसम आ चुका है. पत्तों के बिना पेड़ कितने उदास और अकेले लगते हैं. ठीक वैसे ही जैसे मम्मी के मरने के बाद नई जूलियन मौम, पापा और छोटी बहन स्नेहा के होने के बावजूद, घर बेहद सूना और उदास लगता है.

जूलियन मौम के आते ही 8 वर्ष की नेहल, अचानक बड़ी बना दी गई. हर बात में उसे जताया जाता कि वह बड़ी हो गई है. शी इज नो मोर ए बेबी. 4 साल की स्नेहा की तो वह मां ही बन गई है. पहली बार स्नेहा को शावर देती नेहल के आंसू शावर के पानी के साथ बह रहे थे. मम्मी जब दोनों बहनों को टब में बबल बाथ देती थीं तो कितना मजा आता था. पूरी तरह से भीगी नेहल को देख, जूलियन मौम ने डांट लगाई, ‘‘सिली गर्ल, इतनी बड़ी हो गई, छोटी बहन को ढंग से शावर भी नहीं दे सकती. तुम्हारी मम्मी ने तुम्हें कुछ नहीं सिखाया है. इन फैक्ट, स्नेहा को भी खुद बाथ लेना चाहिए.’’

मम्मी के नाम पर नेहल की आंखें फिर बरसने लगीं.

‘‘डोंट बिहेव लाइक ए चाइल्ड. गो टु योर रूम एंड क्राई देयर,’’ जूलियन मौम ने झिड़का था.

नियमानुसार 12 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को घर में अकेले नहीं छोड़ा जा सकता. जूलियन मौम से उन की बार की नौकरी छोड़ने के लिए पापा ने रिक्वेस्ट की थी. पापा को अच्छा वेतन मिलता था. नौकरी छोड़ कर जूलियन ने पापा पर एहसान किया था. फें्रड््स के साथ दिन बिता कर घर जरूर आ जातीं, पर नेहल के स्कूल से लौटने का वक्त, उन के आराम का होता. उन के आराम में खलल न पड़े, इसलिए नेहल को घर की चाबी थमा दी गई. उसे सख्त हिदायत थी कि वह बिना शोर किए घर में आए और जूलियन मौम को परेशान न करे.

अकसर नेहल को रोता देख कर स्नेहा भी रो पड़ती थी. अचानक नेहल चैतन्य हो जाती… सोचती, प्यार करने वाली मम्मी अब नहीं हैं तो क्या वह तो स्नेहा को मां जैसा प्यार दे सकती है. आंसू पोंछ नेहल जबरन हंस देती.

घर का बंद दरवाजा खोलती नेहल को याद आता, मम्मी उसे लेने बस स्टैंड आती थीं. कई कोशिशों के बावजूद मम्मी कार ड्राइव नहीं कर पाईं. मजबूरी में नेहल को स्कूल बस से आना पड़ता. मम्मी अपनी इस कमी के लिए दुखी होतीं. काश, वह अपनी बेटियों को खुद कार से ला पातीं. ड्राइविंग के प्रति उन के मन का भय कभी नहीं छूट पाया.

स्कूल से लौटी नेहल को मम्मी हमेशा उस का मनपसंद स्नैक कितने प्यार से खिलाती थीं. स्नेहा तो उन की गोद में बैठ कर ही खाना खाती. पनीली आंखों से ब्रेड और जैम गले से उतारती नेहल को याद आया कि आज स्नेहा की छुट्टी जल्दी होती है. अधखाई ब्रेड किचन ट्रैश में डाल, नेहल बस स्टैंड तक दौड़ती गई. अगर वह वक्त पर नहीं पहुंची तो बस से उतरी स्नेहा कितनी डर जाएगी. मम्मी कहा करती थीं, ‘यह अजनबी देश है. यहां कभी भी कोई हादसा हो सकता है. बस स्टैंड से घर के सूने रास्ते में भी कोई दुर्घटना हो सकती है.’

पहली बार अकेले घर तक आनेजाने में नेहल को सचमुच डर लगा था, पर छोटी बहन को बस स्टैंड तक पहुंचाने और लाने के दायित्व ने उस का डर दूर कर दिया.

पापा के साथ भारत से आते समय मम्मी कितनी उत्साहित थीं. नए घर को सजाती, गुनगुनाती मम्मी के साथ घर में खुशी का संगीत बिखर जाता. नन्हेनन्हे हाथों से मम्मी की मदद करती 4 वर्ष की नेहल का मुंह चूमते मम्मी थकती नहीं थीं. एक दिन पापा ने मम्मी को समझाया, ‘कभी भी कोई जरूरत हो, खतरा हो, फोन पर 911 डायल कर देना. तुरंत पुलिस मदद को आ जाएगी.’

पापामम्मी के साथ नेहल और स्नेहा डिजनीलैंड गई थीं. डिजनीलैंड की सैर करतीं राजकुमारियों के परिधान में सजीं नेहल और स्नेहा की सिंडरेला, एरियल और बेल के साथ पापा ने ढेर सारी फोटो ली थीं. उन चित्रों में नेहल और स्नेहा राजकुमारी जैसी दिखतीं. मम्मी गर्व से कहतीं, ‘मेरी दोनों बेटियां सच में राजकुमारी ही लगती हैं. इन के लिए राजकुमार खोजने होंगे.’

‘अरे, देखना, हमारी राजकुमारियों को लेने खुद राजकुमार दौड़े आएंगे.’

सबकुछ कितना अच्छा था, पर अब तो वह सब सपना ही लगता है.

पापा के प्रमोशन के साथ आफिस की पार्टियां बढ़ गई थीं. कभीकभी पापा बार भी जाने लगे थे. मम्मी देर रात तक उन के इंतजार में जागती रहतीं. इस के बाद ही मम्मी बेहद उदास रहने लगी थीं. मां को रोते देख, नेहल मां से चिपट जाती.

‘मम्मी, तुम रो क्यों रही हो?’

‘कुछ नहीं, आंखों में कुछ चला गया था, बेटी.’

‘तुम्हारी आंखों में हमेशा कुछ क्यों चला जाता है, मम्मी?’

‘अब नहीं जाएगा. आदत पड़ जाएगी.’

मां के इस जवाब से संतुष्ट नेहल, उन के आंसू पोंछ देती.

अब पापा के पास घर के लिए जैसे समय ही नहीं था. नेहल और स्नेहा घर के बाहर जाने को तरस जातीं. अकसर रात में मम्मीपापा की बातें नेहल को जगा देतीं. ऐसी ही एक रात नेहल ने मम्मी को कहते सुना था :

‘मेरा नहीं तो इन बच्चियों का तो खयाल कीजिए. नेहल बड़ी हो रही है. अगर उसे सचाई का पता लगा तो सोचिए, उस पर क्या बीतेगी?’

‘वह आसानी से सचाई स्वीकार कर लेगी. यह अमेरिका है. यहां तलाक बहुत कामन बात है. उस के कई साथियों की सौतेली मां या पिता होंगे.’

‘पर हम तो अमेरिकी नहीं हैं. जरा सोचो, तुम इतने ऊंचे ओहदे पर हो, एक बार में काम करने वाली औरत के साथ संबंध जोड़ना क्या ठीक है?’

‘जूलियन बहुत अच्छी है. हालात की वजह से उसे बार में काम करना पड़ रहा है. उस का पति उसे पैसा कमाने के लिए मजबूर करता है. उस ने वादा किया है कि शादी के बाद वह काम छोड़ देगी.’

‘उस का वादा आप को याद है पर अपना वादा आप भूल गए? हमेशा मेरा साथ निभाने का वादा किया था. इन्हीं बच्चियों पर आप जान देते थे,’ मम्मी का गला रुंध गया.

‘तुम जो चाहो, करने को आजाद हो. मैं अब और साथ नहीं निभा सकता,’ रुखाई से पापा ने कहा.

‘तुम्हारे विश्वास पर ही मैं अपने पापा से रिश्ता तोड़ कर तुम्हारे साथ आई थी. मां तो पहले ही नहीं थीं. अब पापा भी साथ नहीं देंगे,’ बात पूरी करतीकरती मम्मी रो पड़ी थीं.

‘अपना रोनाधोना छोड़ो. तुम्हें हर महीने तुम्हारे खर्च के पैसे मिलते रहेंगे. जूलियन के बिना मैं नहीं जी सकता. उसे अपने पति से तलाक लेने में कुछ समय लगेगा. इस बीच तुम्हारे लिए अपार्टमेंट का इंतजाम कर दूंगा.’

‘नहींनहीं, आप ऐसा मत कहो. इन छोटी बच्चियों के साथ अकेली इस अनजाने देश में जिंदगी कैसे काटूंगी.’

‘वक्त पड़ने पर इनसान और उस की आदतें बदल जाती हैं. तुम भी हालात से एडजस्ट कर लोगी. मुझे और परेशान मत करो. अगर ज्यादा तंग किया तो कल से होटल में शिफ्ट कर जाऊंगा. मुझे नींद आ रही है.’

उस के बाद मम्मी की सिसकियां धीमी पड़ गई थीं.

सुबह मम्मी का उदास चेहरा देख, नेहल जैसे सब जान गई कि मम्मी की आंखों में अकसर कुछ क्यों पड़ जाता है. शंका मिटाने के लिए पूछ बैठी :

‘मम्मी, जूलियन कौन है?’

‘तुझे जूलियन का नाम किस ने बताया, नेहल?’

‘रात को सुना था…’

‘देख नेहल, अगर कभी तेरी मम्मी न रहे तो स्नेहा के साथ अपने नाना के पास भारत चली जाना.’

‘तुम क्यों नहीं रहोगी, मम्मी? हम ने तो नाना को कभी देखा भी नहीं है. हम तुम्हारे साथ रहेंगे,’ नेहल डर गई थी.

‘डर मत, बेटी. मैं कहीं नहीं जाऊंगी,’ डरी हुई नेहल को मां ने सीने से चिपटा लिया.

मम्मी अब अकसर बीमार रहने लगीं. असल में उन के अंदर जीने की इच्छा ही खत्म हो गई थी. डाक्टर को कहते सुना था कि बीमारी से लड़ने के लिए विल पावर का मजबूत होना जरूरी है. आप की पत्नी कोआपरेट नहीं करतीं. उन्होंने तो पहले ही हार मान ली है.

बीमारी की वजह से मम्मी और बच्चियों की मदद के लिए जरीना को बुलाया गया था. विधवा जरीना पाकिस्तान से अपने इकलौते बेटे और बहू के पास हमेशा के लिए रहने आई थीं. बहू जूलियन को सास का हमेशा के लिए आना कतई बरदाश्त नहीं था. बहू की हर बेजा बात जरीना सह जातीं. बहू के साथ बेटा भी पराया हो चुका था, यह बात जल्दी ही उन की समझ में आ गई थी. एक दिन बहू ने साफसाफ कहा, ‘इस देश में कोई मुफ्त की रोटियां नहीं तोड़ता. आप दिन भर बेकार बैठी रहती हैं. किसी के घर खाना पकाने का काम शुरू कर दें तो दिल लग जाएगा. हाथ में चार पैसे भी आ जाएंगे.’

‘क्या मैं मिसरानी का काम करूं? तुम्हारी इज्जत को बट्टा नहीं लग जाएगा?’

‘किसी भी काम को नीची नजर से नहीं देखा जाता. आप के बेटे के बौस की बीवी बीमार हैं. घर में 2 छोटी लड़कियां हैं. आप उन की मदद कर देंगी तो उन पर हमारा एहसान होगा. शायद आप के बेटे को जल्दी प्रमोशन भी मिल जाए.’

जरीना बहू को फटीफटी आंखों से देखती रह गईं. इंजीनियर बेटे की मां दूसरे के घर खाना पकाने का काम करेगी. मां के आंसुओं को नकार, एक सुबह बेटा उन्हें नेहल के घर पहुंचा आया.

संकुचित जरीना को मम्मी ने अपने प्यार और आदर से ऐसा अपनाया कि जरीना को मम्मी के रूप में एक बेहद प्यार करने वाली बेटी मिल गई. मम्मी उन्हें अम्मां पुकारतीं और बेटियों से उन का परिचय नानी कह कर कराया था. जरीना नानी का प्यार पा कर नेहल और स्नेहा खुश रहने लगीं. अच्छीअच्छी कहानियां सुना कर नानी उन का मन बहलातीं. उन की हर फरमाइश पूरी करतीं. मम्मी कहतीं, ‘आप इन्हें बिगाड़ रही हैं, अम्मां. आने वाले समय में जाने इन्हें क्या दिन देखने पड़ें.’

‘ऐसा क्यों कहती हो, बेटी. यह तो मेरी खुशकिस्मती है, जो इन की फरमाइशें पूरी कर पाती हूं. अपने पोते के लिए तो मैं….’ गहरी सांस लेती नानी आंचल से आंसू पोंछ लेतीं.

शायद मम्मी की बीमारी की वजह से पापा ने जूलियन का नाम लेना बंद कर दिया था. नेहल सोचती अगर मम्मी बीमार ही रहें तो शायद पापा जूलियन को भूल जाएं. मम्मी का उदास चेहरा देख, उसे अपने सोच पर गुस्सा आता. काश, मम्मी अच्छी हो जातीं.

अचानक एक रात पापा ने उसे यह कहते हुए उठाया था, ‘तुम्हारी मम्मी को अस्पताल ले जाना है. स्नेहा को भी उठा दो.’

क्या होगा सुपरहीरोज का खात्मा

निर्माताः केविन फिएग

निर्देशक: एंथनी रूसो, जौ रूसो

कलाकार: रौबर्ट डाउनीक्रिस इवांस, क्रिस हेम्सवर्थ, स्कारलेट जोहानसन और अन्य

रेटिंग: चार स्टार

बुराई पर अच्छाई की जीत पर भारत में सैकड़ों फिल्में बन चुकी हैं. मगर हौलीवुड ने अपने सुपर हीरो द्वारा पूरे विश्व को बुरी शक्तियों से बचाने वाली 22वीं फिल्म बना डाली, जिसका अंत ‘‘अवेंजर्स गेम एंड’ के साथ हो गया. बहरहाल, इस फिल्म में इसी सीरीज की पुरानी फिल्मों के सीन्स के साथ कई जटिल नाटकीय घटनाक्रमों के साथ ही कभी न मरने वाले यानी कि अजेय सुपर हीरो को श्रृद्धांजली भी दी गयी है.

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कहानीः

थैनोस (जोश ब्रोलिन) के खिलाफ आइरन मैन (रौबर्ट डाउनी), कैप्टन अमरीका (क्रिस इवांस), थौर (क्रिस हैम्सवर्थ), हल्क (मार्क रैफलो), ब्लैक विडो (स्कारलेट जोहानसन), जरेमी रेनर, ऐंट मैन (पौल रड), कैप्टन मार्वल (ब्री लार्सन) ने एकजुट होकर जंग छेड़ दी हैं. वास्तव में एंट मैन (पौल रड) इन सुपर हीरोज को आकर बताता है कि क्वांटम थ्योरी के जरिए वह अतीत में जाकर थैनोस से पहले उन मणियों को हासिल करें, तो इंफीनिटी वार की स्थिति से बचा जा सकता है. उस जंग में जिन अपनों को खो दिया गया था,उन्हें भी वापस लाया जा सकता है.

लेकिन क्या यह सभी क्वांटम थियरी को चाक चैबंद करके अतीत में जाकर विभिन्न जगहों से मणियों को हासिल कर पाएंगे. क्या अब थैनोस की बुराइयों का अंत हो पाएगा? क्या अवेंजर्स अपने प्यारों को वापस ला पाते हैं? क्या सुपर हीरोज का जलवा बरकरार रह पाता है? इन सारे दिलचस्प सवालों व कहानी के उतार चढ़ाव के लिए आपको अवेंजर्स देखनी होगी.

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कैसी है फिल्म…

इस साल की बहुप्रतीक्षित यह फिल्म दर्शकों की उम्मीदों पर खरी उतरती है. मार्वल सिनेमैटिक यूनिवर्स के लिए यह शानदार एंडिंग है. दर्शकों ने इसके कुछ पात्रों को काफी पसंद किया. इसमें जिस तरह से कहानी का विस्तार होता रहा है, वह सदैव रोमांचक रहा. क्रिस्टोफर मार्कस व स्टीफन एम सी फीली की पटकथा फिल्म की असली हीरो तो इसकी पटकथा ही है. लेखक व निर्देशक ने हिंसा व नाटकीय घटनाक्रमों के बीच भावनाओं के सागर को भी बरकरार रखने में अद्भुत सफलता पायी. इस फिल्म से क्वांटम भौतिकी थियरी को नए आयाम मिले.

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डायरेक्शन…

फिल्म ‘‘अवेंजर्स एंडगेम’’की गति धीमी है, पर लगता है कि ऐसा जान बूझकर किया गया. जिससे चरित्रों का गहन विकास और उनसे मिलने वाली सशक्तप्रेरणा अच्छे ढंग से उभर सके. निर्देशक ने इंफरनिटी वार के बाद के हालात में सबसे पहले सुपर हीरो को स्थापित किया, कि वह किस तरह अपने कारनामों और सुपर पावर्स से दूर आम जीवन बिता रहे हैं. मगर जब एंट मैन आकर उनके अंदर अपनों को दोबारा वापास लाने का जज्बा भरता है, तब कहानी सरपट दौड़ती है. इस तरह तीन घंटे की फिल्म में से आखिरी आधे घंटे की फिल्म ही महत्वपूर्ण है, इसके बावजूद फिल्म बोर नही करती है. इसके लिए फिल्म के एडीटर भी बधाई के पात्र हैं.

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एक्टिंग….

जहां तक एक्टिंग का सवाल है, तो हर कलाकार ने बेहतरीन अभिनय किया है. आइरन मैन (रौबर्ट डाउनी जूनियर), कैप्टन अमरीका (क्रिस इवांस), थौर (क्रिस हैम्सवर्थ), हल्क (मार्क रैफलो), ब्लैक विडो (स्कारलेट जोहानसन), जरेमी रेंटर, ऐंट मैन (पौल रड) सुपर हीरो का रोल करते हुए अपनी अभिनय प्रतिभाकी छाप छोड़ जाते हैं. (थैनोस) जोश ब्रोलिन तो लार्जर देन लाइफ ही नजर आते हैं.

Edited by- Nisha Rai

मोदी का अयोध्या से बस चुनावी रिश्ता

कलयुग में राम की उपेक्षा के बहुत सारे उदाहरण हैं. इनमें से एक यह भी है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी शंकर की नगरी वाराणसी से तो गहरा रिश्ता रखते हैं पर राम की नगरी अयोध्या से उनका केवल चुनावी रिश्ता ही रह गया है. 2014 के लोकसभा चुनाव में वह राजकीय इंटर कालेज के मैदान पर चुनावी सभा करने के लिये गये थें. उस समय वह भारतीय जनता पार्टी के प्रधानमंत्री पद के प्रत्याशी थें. 2014 का लोकसभा चुनाव जीत कर नरेन्द्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बनें.

डिग्री और पत्नी त्याग पर खामोशी क्यों ?

2014 से 2019 के बीच देश विदेश के हर शहर वें गये होंगे पर अयोध्या में राम मंदिर नहीं आये. अपनी चुनावी जीत के बाद धन्यवाद देने काशी गयें. कुंभ में डुबकी लगाने प्रयागराज गये पर अयोध्या नहीं आयें. 2019 के लोकसभा चुनाव प्रचार में भी वह अयोध्या ना आकर फैजाबाद और अंबेडकर नगर संसदीय सीट को जोड़ने वाली मया बाजार में रैली करने ही आ रहे हैं जो अयोध्या से 27 किलोमीटर दूर है.

नेता तो नेता, जनता महा बेवकूफ

2014 के चुनाव जीत कर केन्द्र सरकार में प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेद्र मोदी को अयोध्या बुलाने के तमाम प्रयास यहां के संतों ने किया. संतों का मानना था कि प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेन्द्र मोदी को अयोध्या आना चाहिए था. नरेन्द्र मोदी अयोध्या आने के बाद भी राम मंदिर नहीं गये हैं. इससे मंदिर की राजनीति करने वाले संतों में निराशा का भाव है. भाजपा के नेता और कार्यकर्ता इस पर खुलकर बोलने से बचते हैं. वें इसे कोई मुददा नहीं मानते. पर वह इस सवाल का जबाव नहीं दे पाते हैं कि राम मंदिर और अयोध्या से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरी का मर्म क्या है ?

मेनका के बिगड़े सुर

अयोध्या में राम मंदिर ही वह मुददा है जिस के आधार पर भाजपा ने अपनी विजय यात्रा तय कीं. इसी मुददे पर 1992 में भाजपा की उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान की चुनी हुई सरकारें बर्खास्त की गई थी. आज बहुमत की सरकार बनाने के बाद भी नरेंद्र मोदी की अयोध्या यात्रा चुनावी होकर रह गई है. एक तरफ वह काशी में शिव की महिमा का बखान करते हैं दूसरी तरफ अयोध्या से उनकी दूरी बनी है. वें अयोध्या आकर भी राम मंदिर नहीं जा सके हैं.

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