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कन्याऋण

नेहा के ससुराल से लौट कर आने के बाद से ही मांजी बहुत दुखी और परेशान लग रही हैं. बारबार वह एक ही बात कहती हैं, ‘‘अनुभा बेटी, काश, मैं ने तुम्हारी बात मान ली होती तो आज मुझे यह दिन नहीं देखना पड़ता. तुम ने मुझे कितना समझाया था पर मैं अपने कन्याऋण से उऋण होने की लालसा में नेहा की जिंदगी से ही खिलवाड़ कर बैठी. अब तो अपनी गलती सुधारने की गुंजाइश भी नहीं रही.’’

अनुभा समझ नहीं पा रही थी कि मांजी को कैसे धीरज बंधाए. जब से उस ने नेहा को सुबहसुबह बाथरूम में उलटियां करते देखा उस का माथा ठनक गया था और आज जब डा. ममता ने उस के शक की पुष्टि कर दी तो लगता है अनर्थ ही हो गया.

डाक्टर के यहां से लौटने के बाद मांजी ने जब उस से पूछा तो उन की मानसिक अवस्था को देखते हुए वह उन से सच नहीं बोल पाई और यह कह दिया कि एसिडिटी के कारण नेहा को उलटियां हो रही थीं. लेकिन अनुभा को लगा था कि उस की सफाई से मांजी के चेहरे से शक और संदेह के बादल छंट नहीं पाए थे. उन्हें सच क्या है, इस का आभास हो गया था.

सहसा अनुभा की नजरें नेहा की ओर उठीं. वह सारी चिंताओं से अनजान अपनी गुडि़या से खेल रही थी. उस के साथ क्या हो रहा था और आगे क्या होगा? उस का जरा सा भी एहसास उसे नहीं था. अबोध नेहा को देख कर तो उस का मन यह सोच कर और भी खराब हो गया कि कैसे वह भविष्य में आने वाली मुश्किलों का सामना कर पाएगी.

यद्यपि नेहा उस की ननद है पर अनुभा ने सदैव उसे अपनी बेटी की तरह ही समझा है. जब शादी होने के बाद अनुभा ससुराल आई थी, उस समय नेहा 4 साल की रही होगी.

ससुराल आने पर अनुभा ने जब पहली बार नेहा को देखा, तभी उस के प्रति उस के मन में सहानुभूति और प्रेम जाग उठा था, क्योंकि मायके में उस के घर के पास ही मंदबुद्धि और मानसिक रूप से विकलांग बच्चों का एक स्कूल था. इस कारण ऐसे बच्चों के मनोभावों से उस का पूर्व परिचय रहा था. वह जानती थी कि नेहा का बौद्धिक और शैक्षणिक विकास आम बच्चों की तरह नहीं हो सकता इसलिए नेहा की सारी जिम्मेदारियां उस ने शुरू से ही अपने ऊपर ले ली थीं.

अनुभा ने नेहा को मानसिक रूप से अविकसित बच्चों के विशेष मनो- चिकित्सा केंद्र में प्रवेश भी दिलवाया था ताकि अपने समान बच्चों के बीच रह कर उस में किसी प्रकार की हीनभावना नहीं आ पाए. वह नेहा को घर पर भी उस की समझ के अनुसार कभी माला पिरोने, कभी पेंटिंग करने तो कभी घर के छोटेमोटे कामों में व्यस्त रखती थी.

नेहा को भी शुरू से ही अनुभा से गहरा लगाव हो गया था. वह हर समय भाभीभाभी कह कर उस के इर्दगिर्द घूमती रहती. जबकि नेहा की नासमझी की हरकतों से तंग आ कर कई बार मांजी अपना आपा खो कर उस पर हाथ उठा देतीं. उस के भाई तथा दूसरी भाभियां भी नेहा को बातबात में टोकते या डांटते रहते थे.

नेहा उम्र में जरूर बड़ी हो रही थी पर उस की बुद्धि और समझ तो 5-6 साल के बच्चे जितनी हो कर ठहर गई थी. घर में नेहा को किसी की भी डांट पड़ती तो वह भाग कर अनुभा के पास चली आती. वह कभी उसे प्यार से समझाती तो कभी गंभीर हो कर उस की गलती का एहसास करवाने का प्रयास करती.

नेहा 18 वर्ष की हो गई. उस की हमउम्र लड़कियों के जब शादीविवाह होने लगे तो वह भी कभीकभी बहुत भोलेपन से उस से पूछती, ‘भाभी, मेरा विवाह कब होगा? मेरा दूल्हा घोड़ी पर बैठ कर कब आएगा?’

वह नेहा को समझाती, ‘अभी तो तुम्हें पढ़लिख कर बहुत होशियार बनना है, फिर कहीं जा कर तुम्हारा विवाह होगा.’ नेहा उस के इस तरह समझाने पर संतुष्ट हो कर सबकुछ भूल कर खेलने में व्यस्त हो जाती पर नेहा के ऐसे सवाल उसे अकसर भविष्य की चिंता में डाल जाते.

एक दिन सास ने उस के पति नवीन के सामने नेहा के विवाह का प्रसंग छेड़ते हुए बताया कि उन की पड़ोसिन गोमती देवी ने अपने रिश्ते के चाचा के बेटे के लिए नेहा के रिश्ते की बात चलाई है. मांजी के मुंह से अचानक नेहा के विवाह की चर्चा सुन कर नवीन और अनुभा दोनों ही अवाक् रह गए.

नवीन ने कहा भी, ‘मां, नेहा जिस स्थिति में है, उस का विवाह करना क्या उचित होगा? दूसरे, क्या वे लोग नेहा के बारे में सबकुछ जानते हैं. यदि उन लोगों को अंधेरे में रख कर हम ने विवाह किया तो यह रिश्ता कितने दिन निभ पाएगा?’

नवीन की बातों को सुन कर मांजी एक बार तो गंभीर हो गईं, फिर कुछ सोच कर बोलीं, ‘बेटा, मैं ने गोमती देवी से सारी बात स्पष्ट करने के बाद ही तुम्हारे सामने इस रिश्ते की बात छेड़ी है. लड़के के एक पांव में पोलियो होने की वजह से वह बैसाखी से चलता है. उन लोगों ने इस संबंध को स्वीकार करने के बदले में 3 लाख रुपए नकद मांगे हैं, बाकी जो कुछ दहेज में हम नेहा को दें, वह हमारी इच्छा है. अब जब अपनी बेटी में ही कमी है तो हमें थोड़ा झुकना तो पडे़गा ही.’

मांबेटे की बातचीत सुन रही अनुभा अब स्वयं को रोक नहीं सकी और बोली, ‘मांजी, बीच में बोलने के लिए मैं क्षमा चाहूंगी पर मैं एक बात जरूर कहना चाहूंगी कि नेहा के विवाह का फैसला करने से पहले हमें एक बार सारी स्थितियों पर गंभीरता से विचार कर लेना चाहिए.’

‘सारी स्थितियों को स्पष्ट करने से तुम्हारा तात्पर्य क्या है बहू?’ मांजी ने उसे टोकते हुए पूछा.

‘मांजी, मेरे कहने का मतलब है कि दूसरों के बहलावे में आ कर हमें नेहा की शादी का फैसला नहीं करना चाहिए. मैं ने तो अपनी मौसी की लड़की को देखा है. उस की स्थिति भी कमोबेश नेहा जैसी ही थी. मेरी मौसी ने रुपयों का लालच दे कर एक गरीब घर के लड़के से अपनी बेटी का विवाह कर दिया पर शादी के 2 माह बाद ही उस के ससुराल वालों ने उसे यह कहते हुए वापस लौटा दिया कि उस कम दिमाग लड़की के साथ उन के बेटे का निभाव नहीं हो सकता. उन्होंने मेरी मौसी के रुपए भी हड़प लिए और उन की बेटी को भी वापस भेज दिया. मांजी, मुझे डर है कि हमारी नेहा के साथ भी ऐसा ही कुछ न घट जाए.’

अनुभा की सलाह का उस की सास पर कोई असर नहीं हुआ. वह बोलीं, ‘बहू, यह जरूरी नहीं है कि जो तुम्हारी मौसेरी बहन के साथ हुआ, वैसा ही नेहा के साथ भी घटित हो. मुझे गोमती जीजी ने भरोसा दिया है कि उन के रिश्तेदार बहुत भले और नेक इनसान हैं, वे हमारी नेहा को बहुत प्यार से रखेंगे.’

‘मांजी दूसरे लोगों की बातों से तो हम अपनी नेहा के भविष्य का फैसला नहीं कर सकते,’ अनुभा बोली, ‘नेहा की शादी कर के हमें क्या लाभ होगा? कल को शादी के बाद वह गर्भवती हो गई और उस की संतान भी उस जैसी ही होगी तो कितनी मुसीबत हो जाएगी?’

अनुभा की बात सुन कर सास और भी झल्ला गईं. वह आवेश में बोलीं, ‘वाह बहू, तुम भी कितनी दूर की सोचती हो, तुम्हारी अपनी कोई बेटी नहीं है न इसीलिए तुम क्या जानो, कन्यादान का धर्म क्या होता है? कोई भी मां अपनी बेटी को जीवन भर कुंआरी नहीं रख सकती. मैं तो अब तक यही समझ रही थी कि नेहा को उस की दोनों छोटी भाभियां तो नहीं चाहतीं पर कम से कम तुम तो उस को दिल से चाहती हो पर आज तुम्हारी बातों को सुन कर लगा कि वह मेरा भ्रम था.

‘तुम्हें शायद इस बात की चिंता है कि नेहा की शादी के लिए तुम्हारे पति को 2-4 लाख रुपए की व्यवस्था करनी पड़ेगी पर तुम्हें घबराने की जरूरत नहीं है. तुम्हारे ससुरजी ने नेहा के जन्म के समय ही उस के विवाह के लिए 25 हजार की एफ.डी. करवा दी थी जो अब ब्याज समेत 5 लाख की है. मैं उसी से नेहा के विवाह की सारी व्यवस्था कर लूंगी.’

नवीन इतनी देर तक मौन रह कर दोनों की बातें सुन रहा था. अंत में वह अनुभा को डांटते हुए बोला, ‘तुम मां से क्यों बहस कर रही हो. जब उन को तुम्हारी बात ठीक नहीं लग रही है तो इस विषय पर चर्चा बंद करो.’

फिर नवीन मां से बोला, ‘मां, आप जो भी फैसला करेंगी, मुझे मान्य है. नेहा के विवाह के लिए रुपए की व्यवस्था की चिंता करने की आप को जरूरत नहीं है, मैं सारा इंतजाम कर दूंगा.’

2 माह बाद नेहा के विवाह की तारीख तय हो गई. इस बीच नवीन और उस के दोनों भाई नेहा के ससुराल जा कर लड़के और उस के परिवार से मिल आए. वहां से वापस लौटने के बाद नवीन ने नेहा की ससुराल वालों के लालचीपूर्ण रवैये और लड़के के दब्बूपन के बारे में मां को बता कर अपना असंतोष दिखाया था पर मां अपने निर्णय पर दृढ़ रही थीं.

विवाह की तैयारियों में व्यस्त अनुभा जब भी नेहा को देखती, उस की आंखें भर आतीं. नेहा शादीविवाह का असली मतलब क्या है, इस बात से पूरी तरह अनजान थी पर अपने लिए आए ढेर सारे सामान को देख कर उस की आंखें खुशी से चमक उठती थीं. वह बारबार अनुभा से पूछती, ‘भाभी, यह सारी चीजें मेरी हैं न? भाभी, बबलू, टीना, रीना और मिनी मुझे अपनी चीजें छूने नहीं देते. दोनों भाभियां भी मुझे अपना सामान नहीं देखने देतीं, अब मैं भी अपना सामान किसी को छूने

नहीं दूंगी.’ कभी नेहा कहती, ‘भाभी, शादी में मुझे भी घाघराचुन्नी पहनाओगी न.

हां, साथ में

मैचिंग चूडि़यां भी पहनाना. मुझे लाल रंग बहुत अच्छा लगता है.’

नेहा की बालसुलभ जिज्ञासाएं देख कर कभी अनुभा सोचती, चलो, नेहा के जीवन में कभी तो खुशी के क्षण आए, चाहे थोडे़ समय के लिए ही सही. उस ने शादी के पहले नेहा को उस के वैवाहिक जीवन के बारे में भी जानकारी देने का प्रयास किया. उस का, अपने पति तथा ससुराल के दूसरे सदस्यों से कैसा व्यवहार हो, इस बारे में भी उसे विस्तार से समझाया.

नेहा उस की बातें सुन कर कुछ क्षण तो गंभीर हो जाती पर फिर अपनी वही बालसुलभ बातें और हरकतें करने लगती.

अनुभा को यह देख कर हैरानी होती कि ज्यादातर रिश्तेदार नेहा की शादी के फैसले पर उस की सास को बधाइयां देते हुए कहते, ‘चलो जी, आप ने तो बेटी की शादी कर के बहुत अच्छा किया. अब आप कन्याऋण से उऋण हो जाएंगी.’ उन की बातें सुन कर उस की सास अपने चेहरे पर गर्वीली मुसकान लाते हुए उस की ओर नजर डालती, ताकि उस को एहसास हो कि नेहा के विवाह का विरोध कर वह कितनी बड़ी गलती कर रही थी.

नेहा के ससुराल जाने के बाद घर एकदम सूना हो गया. उस की बालसुलभ हरकतें रहरह कर अनुभा को याद हो आतीं. मांजी भी नेहा के जाने के बाद से उदास रहने लगी थीं. यद्यपि वे सब के सामने अपनी मनोदशा जाहिर नहीं करतीं पर सब की तरह उन के मन में भी यह आशंका जरूर थी कि नेहा ससुराल में एडजस्ट हो पाएगी कि नहीं.

नेहा को ससुराल गए एक माह से अधिक हो गया था. शुरूशुरू में तो उस से हर दिन ही फोन पर बात हो जाती थी और वह खुश भी लगती थी पर धीरेधीरे उस की आवाज में उदासी छलकने लगी. अब फोन पर वह बोलने लगी थी, ‘भाभी, मुझे यहां अच्छा नहीं लगता. यह लोग सारे समय मुझे देख कर हंसते हैं और मुझे पागल कह कर चिढ़ाते हैं. ये सब बहुत गंदे हैं, राजेश भी इन के साथ मेरा मजाक उड़ाता है.’

नेहा की बातें सुन कर अनुभा को थोड़ी चिंता होनी लगी थी पर वह नेहा को यही समझाती कि वह जिद न करे. सब की बात माने.

पिछले एक सप्ताह से वे जब भी फोन करते नेहा के ससुराल वाले कोई न कोई बहाना बना कर उस से बात नहीं होने देते. कभी कहते, नेहा बाजार गई है, कभी बाथरूम में है तो कभी सो रही है. एक दिन नवीन ने राजेश से बात करने की कोशिश की पर वह भी उन से बात करने से कतराता रहा.

उस दिन रविवार था. नवीन, मांजी और अनुभा ड्रांइगरूम में बैठे नेहा की ही बात कर रहे थे कि नवीन बोला, ‘मां, आज एक बार मैं फिर नेहा से बात करने की कोशिश करता हूं, यदि आज भी उस से बात नहीं हो पाती है तो मैं कल नेहा को कुछ दिनों के लिए उस के ससुराल से ले कर आने की सोच रहा हूं.’

इतना कह कर नवीन नेहा के ससुराल फोन डायल करने लगा. संयोग से उस दिन नेहा ने ही फोन उठाया था.

नवीन की आवाज सुनते ही वह फोन पर ही जोरजोर से रो पड़ी, ‘भैया, आप लोग फोन क्यों नहीं करते? आप यहां से मुझे ले जाओ. ये लोग बहुत खराब हैं. मुझे बहुत तंग करते हैं. मैं इन के पास नहीं रहूंगी.’

नेहा आगे कुछ कहती उस के पहले ही किसी ने रिसीवर उस के हाथ से छीन कर रख दिया था.

अब तो कुछ सोचने का प्रश्न ही नहीं था. उन लोगों ने तय किया कि शाम की ट्रेन से ही नवीन और अनुभा नेहा के ससुराल जा कर एक बार वस्तुस्थिति की जानकारी लें. नेहा की बात सुन कर घर में सब का ‘मूड’ खराब हो गया था.

सुबह अचानक अपने घर में नवीन और अनुभा को देख कर नेहा के ससुराल वाले सकपका गए. नेहा को जब उन के आने का पता चला तो वह दौड़ती हुई आई और नवीन को देखते ही उस से लिपट गई. नेहा की आंखों में दहशत और खौफ देख कर दोनों घबरा गए और अनुभा ने ज्यों ही उस की पीठ पर हाथ फेरा, वह जोरजोर से सुबक पड़ी. बारबार एक ही बात दोहरा रही थी, ‘भाभी, मुझे अपने साथ ले चलो, ये सब लोग बहुत गंदे हैं. मैं इन के घर कभी नहीं आऊंगी.’

नेहा को इस तरह रोते देख कर एक बार तो उस की सास और ससुराल के दूसरे लोग घबरा गए पर तुरंत ही उस की सास अपने को संभालती उन पर हावी होने का प्रयास करते हुए बोली, ‘आप लोगों ने मेरे साथ बहुत बड़ा धोखा किया है. मुझ से कहा गया था कि लड़की थोड़ी भोली और नादान है पर शादी के बाद पता चला कि आप की बहन तो मानसिक रूप से अविकसित है. हम लोगों ने फिर भी इस को समझाने और निभाने की बहुत कोशिश की पर यह तो बहुत ही जिद्दी और ढीठ है. अच्छा हुआ, आप खुद अपनी बहन को लेने आ गए, वरना हमें इस को आप के पास पहुंचाना पड़ता.’

नेहा की सास को समझाने का प्रयास करते हुए नवीन ने कहा, ‘मांजी, हम लोगों ने तो गौतमी मौसी के माध्यम से सारी बातों का पहले ही खुलासा कर दिया था पर उस समय तो आप ने इस रिश्ते से इनकार नहीं किया बल्कि नेहा को अपनाने के एवज में हम से दहेज के अलावा 3 लाख रुपए नकद अलग से मांगे थे, जो हम ने आप को दिए, फिर धोखे में रखने का प्रश्न ही कहां उठता है?’

‘3 लाख रुपए दे कर आप ने मुझ पर कोई एहसान नहीं किया है,’ नेहा के जेठ ने जोर से कहा, ‘राजेश के लिए तो इस से भी अधिक दहेज देने वालों के प्रस्ताव आ रहे थे पर मेरी ही मति फिर गई थी कि मैं आप के झांसे में आ गया. अब मुझे आप से कोई बहस नहीं करनी, आप अपनी बहन को ले कर लौट जाएं तो बेहतर होगा.’

इसी बीच नेहा के ससुर और ननदोई भी आ गए. नवीन और अनुभा को अचानक अपने घर में देख कर वे हैरान लग रहे थे. नेहा के ससुर ने उस के ननदोई का जैसे ही नवीन से परिचय कराया और वह हाथ मिलाने के लिए नवीन की तरफ बढ़ा, नेहा नवीन को अपनी ओर खींचते हुए चिल्ला पड़ी, ‘भैया, इस के पास मत जाना, यह बहुत खराब है. इस ने जैसे मुझे काटा था, आप को भी काट लेगा.’

नेहा क्या कह रही है, एक बार तो किसी को समझ में नहीं आया. लेकिन उस के ननदोई जरूर सकपका गए थे पर नेहा फिर उस की ओर इशारा करते हुए बोली, ‘भैया, इस को मारो, यह बहुत गंदा है. जब राजेश अपनी मां के साथ बाहर गया हुआ था तो इस ने जबरन मेरे कमरे में घुस कर मेरे साथ बहुत गंदी हरकतें कीं और मैं ने जब इसे रोका तो इस ने मुझे काटा और मेरे सारे कपड़े उतार कर मेरे साथ जबरदस्ती की,’ इतना बताते हुए नेहा अपनी साड़ी का पल्ला फेंकते हुए अपने ब्लाउज को खोल अपने शरीर पर जगहजगह काटे और खरोंचों के निशान दिखाने लगी.

नेहा के इस रहस्योद्घाटन से कमरे में सन्नाटा सा छा गया. उस के ससुराल वालों की निगाहें झुक गईं. खासकर उस के ननदोई का तो बुरा हाल था. नवीन ने दोनों हाथों से अपनी आंखों को ढांपते हुए अनुभा से कहा, ‘अनुभा प्लीज, नेहा को कमरे में ले जा कर उस के कपड़े ठीक करो. अब हमें एक पल भी यहां नहीं ठहरना है.’

नेहा के ससुर ने इतना कुछ हो जाने पर भी नेहा की बात को झुठलाने की कोशिश करते हुए कहा, ‘नेहा एकदम झूठ बोल रही है. हमारे जवांई बाबू तो बहुत नेक और शरीफ इनसान हैं, वह भला ऐसी गंदी हरकत क्यों करेंगे?’

नवीन ने उन की ओर घृणा से देखते हुए कहा, ‘मुझे आप की कोई सफाई नहीं सुननी है. मेरी बहन कभी भी झूठ नहीं बोलती. मेरी बहन के साथ जो घिनौना और वहशियाना कुकर्म आप के घर में हुआ है, उस के लिए शर्मिंदगी या अफसोस जाहिर करने के बजाय आप फिर झूठ बोल कर मुझ पर हावी होना चाहते हैं, धिक्कार है आप लोगों को. पिछले सप्ताह भर से आप नेहा को हम से बात नहीं करने दे रहे थे, तभी मुझे दाल में कुछ काला होने का शक हो गया था पर अपने ही घर की बहूबेटियों के साथ ऐसा दुर्व्यवहार आप लोग करेंगे, इस की मैं ने सपने में भी कल्पना नहीं की थी.’

नवीन ने वहां से उठते हुए बेहद दुखी मन से कहा, ‘आज से हमारे बीच के सारे रिश्ते खत्म हो गए. ऐसे दरिंदे और हैवान लोगों के बीच अपनी बहन को छोड़ने के बजाय मैं उसे आजीवन अपने घर में रखना बेहतर समझूंगा. पर यह याद रखें, मैं इतनी आसानी से आप को छोड़ने वाला नहीं. आप की इस हरकत के लिए आप को जेल की हवा नहीं खिलाई तो मेरा भी नाम नवीन नहीं.’

नवीन की इस धमकी से नेहा के सासससुर घबरा गए. उन्होंने हाथ जोड़ कर नवीन को शांत करने का प्रयास किया पर वह यह कहते हुए उठ गया कि मुझे आप से अब कोई बहस नहीं करनी है. मैं अपनी बहन को हमेशा के लिए ले कर जा रहा हूं.

नेहा के साथ भारी मन से वे घर लौट आए थे. मांजी ने जब नेहा को देखा और उस के साथ हुए हादसे के बारे में सुना तो वह सिर थाम कर बैठ गई थीं.

बहुत देर बाद जब वे सामान्य हुईं तो बोलीं, ‘बेटा, यह सब मेरी वजह से हुआ है. मैं मां होते हुए भी अपनी बेटी का सब से बड़ा अहित कर गई. तुम लोगों की बात मान कर नेहा के  विवाह के लिए जिद नहीं करती तो आज मेरी बेटी की यह दुर्दशा नहीं होती. कन्याऋण से उऋण होने के बदले मैं तो तन, मन, धन तीनों से हाथ धो बैठी.’

नेहा के बारे में सोचतेसोचते अनुभा इतनी खो गई कि उस को समय का पता ही नहीं चला. नेहा ने जब आ कर उसे बताया कि मां बुला रही हैं तो वह यथार्थ की दुनिया में वापस आई.

अनुभा मांजी को गंभीर देख कर उन के पास जा कर बैठ गई. मांजी की आंखों में अभी भी आंसू थे. अपने आंसू पोंछते हुए वह बोलीं, ‘‘अनुभा, तुम जब से नेहा को डाक्टर के पास दिखा कर आई हो, मुझे चिंता लग रही है. बेटी, तुम मुझ से लाख छिपाओ पर मैं हकीकत जान गई हूं.’’

मांजी से नजरें चुराते अनुभा बोली ‘‘मांजी आप व्यर्थ ही चिंता कर रही हैं…’’

मांजी ने उस को बीच में ही टोका, ‘‘बेटी, उम्र में तुम से बड़ी होने के कारण मेरे जीवन के अनुभव भी तुम से अधिक हैं. तुम्हारा नजरें चुरा कर मुझ से बात करना मेरे विश्वास को पुख्ता करता है. मैं चाहती हूं कि अब अधिक समय सोचने में नष्ट करने से बेहतर है कि इस समस्या का अविलंब समाधान हो.’’ अपना गला साफ कर के मांजी फिर बोलीं, ‘‘नेहा जब अपना रखरखाव भी ठीक से करने में असमर्थ है तो इस स्थिति में वह मां बनने की जिम्मेदारी कैसे संभाल सकती है? ससुराल के लोग कैसे हैं यह तुम देख कर आई हो. इसीलिए मैं ने सारी स्थितियों पर विचार कर के ही यह फैसला किया है कि हम जितनी जल्दी नेहा को इस समस्या से मुक्ति दिलवा दें, उतना ही बेहतर है. यह शायद मेरा सब से बड़ा प्रायश्चित होगा.’’

अनुभा, मांजी में आए इस अप्रत्याशित बदलाव को देख कर हैरान थी. डेढ़ 2 माह पहले जो महिला कन्यादान के ऋण से उऋण होने तथा किसी भी हालत में बेटी को कुंआरी नहीं रखने की पुरातन विचारधारा में विश्वास करती थी, आज वह अचानक ही इतनी आधुनिक और व्यावहारिक कैसे हो गईं? खैर, जो भी हो मांजी का यह बदलाव उसे बहुत समयोचित लगा.

हंसादसानी गर्ग 

युवराज ने कहा क्रिकेट को अलविदा

तब उन में न जाने कौन सा फुतूर हावी था कि मानो उन्होंने हर मैच को अपने नाम करने की जिद सी ठान ली थी. वे सचिन तेंदुलकर के वर्ल्ड कप जीतने के सपने के लिए खेल रहे थे या अपनी अनजान बीमारी से लोहा ले रहे थे, यह भी एक सुखद राज बन कर रह गया है. कभी मैदान पर मोहम्मद कैफ के साथ क्रिकेट की बेहतरीन जुगलबंदी दिखाने वाले इसी जुझारू खिलाड़ी ने 10 जून, 2019 को क्रिकेट के हर फॉर्मेट को आखिरी सलाम कह दिया है. अंडर19 क्रिकेट से सब को अपना दीवाना बना लेने वाले इस आलराउंडर ने क्रिकेट प्रेमियों को न भूलने वाला तमाशा दिखाया. बाएं हाथ के इस खिलाड़ी के लिए मानो क्रिकेट खेलना बाएं हाथ का ही खेल था. तभी तो 40 टैस्ट मैचों की 62 पारियों में युवराज सिंह उर्फ युवी के नाम कुल 1,900 रन हैं, जिस में 3 सेंचुरी और 11 हाफ सेंचुरी शामिल हैं.

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वनडे मैचों की बात करें तो युवराज सिंह ने 304 मैचों की 278 पारियों में कुल 8,701 रन बटोरे. इन मैचों में उन्होंने 14 शतक और 52 अर्धशतक जड़े थे. इस के अलावा 58 ट्वेंटी20 मैचों में उन्होंने 1,177 रन बनाए जिन में 8 हाफ सेंचुरी लगाईं.

युवराज सिंह गेंदबाजी करने में पीछे नहीं रहे. टेस्ट मैचों में कुल 9, वनडे मैचों में 111 और ट्वेंटी20 में उन्होंने 28 विकेट अपने नाम किए हैं.

अपनी रिटायरमेंट के मौके पर युवराज सिंह ने बताया, ‘बचपन से मैं ने अपने पिता का देश के लिए खेलने का सपना पूरा करने की कोशिश की… अपने 25 साल के कैरियर और खासतौर पर 17 साल के इंटरनेशनल कैरियर में कई उतारचढ़ाव देख. अब मैं ने आगे बढ़ने का फैसला ले लिया है. इस खेल ने मुझे सिखाया कि कैसे लड़ना है, गिरना है, फिर उठना है और आगे बढ़ जाना है.’

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जब भी युवराज सिंह की दिलेरी की बात की जाएगी तब एक खास मैच जरूर याद आएगा. मैच क्या, एक ऐसा ओवर जिस में युवराज सिंह ने नया इतिहास रच दिया था. दरअसल, साल 2007 के ट्वेंटी20 वर्ल्ड कप में इंगलैंड के खिलाफ खेलते हुए उस के तेज गेंदबाज स्टुअर्ट ब्रॉड के एक ही ओवर में लगातार 6 छक्के और उसी मैच में सिर्फ 12 गेंद पर बनाए अर्धशतक का वर्ल्ड रिकॉर्ड आज भी युवराज सिंह के नाम है.

भारत को साल 2011 के वनडे वर्ल्ड कप में जीत दिलाने में भी युवराज सिंह ने गेंद और बल्ले दोनों से खुद को बारबार साबित किया था. तब उन के शानदार खेल के लिए उन्हें ‘मैन ऑफ द टूर्नामेंट’ चुना गया था. इस वर्ल्ड कप में उन्होंने 362 रन बनाए थे और 15 विकेट भी लिए थे.

जानें, दबंग 3 में कौन बनेंगे सलमान के पिता

बौलिवुड एक्टर सलमान खान फिल्म दबंग 3 की शूटिंग में व्यस्त हैं. एक बार फिर सलमान खान के साथ सोनाक्षी सिन्हा दबंग 3 में नजर आने वाली हैं. ताजा खबर के मुताबिक इस फिल्म में धर्मेन्द्र की एंट्री होगी.

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आपको बता दें, फिल्म में डिम्पल कपाड़िया के होने की चर्चा थी. ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक डिम्पल कपाड़िया दबंग 3 में नजर नहीं आएंगी. दबंग 3 में इस बार धर्मेंद्र की एंट्री होगी. रिपोर्ट्स के मुताबिक धर्मेंद्र, सलमान खान के पिता का रोल निभाएंगे.

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दबंग 2 में विनोद खन्ना ने सलमान खान के पिता का रोल निभाया था. आपको बता दें, फिल्म की रीलीज डेट अभी फाइनल नहीं हुई है. इस फिल्म का डायरेक्शन प्रभुदेवा कर रहे हैं.

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पसोपेश में ‘सुशासन बाबू’

एनडीए-2 के सत्ता में आने के बाद घटक दलों के साथ रिश्ते मधुर नहीं चल रहे हैं. बिहार में एनडीए के सबसे प्रमुख दल जनता दल युनाइटेड और भारतीय जनता पार्टी के साथ रिश्तो में चुनाव के पहले वाली गर्मजोशी नहीं दिख रही है. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूसरे बार सरकार बनाने के बाद मंत्रिमंडल में जदयू की हिस्सेदारी ना होने से आपस में नाराजगी की बातें उठने लगी थी.

बिहार में भी यह कहा जाने लगा कि जदयू और भाजपा बहुत दिनों तक साथ नहीं रहेंगे. जनता दल युनाइटेड ने केन्द्र सरकार में मंत्री पद ना मिलने से नाराजगी की बात को नकार दिया.इसके बाद भी भाजपा और जदयू के रिश्ते आपस में मधुर नहीं है. बिहार के मुख्यमंत्री और जदयू के नेता नीतीश कुमार ने साफ कर दिया कि राजद केवल बिहार में एक साथ चुनाव लड़ेगा. बिहार के बाहर जदयू एनडीए का हिस्सा नहीं होगा. वह भाजपा के खिलाफ भी चुनाव लड़ेगा. बिहार के मुख्यमंत्री और जदयू के नेता नीतीश कुमार ने कहा कि जदयू बिहार में 2022 के विधानसभा चुनाव राजद के साथ लड़ेगा.

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बिहार के बार दूसरे प्रदेशों जम्मू-कश्मीर, झारखंड, हरियाणा, और दिल्ली में भाजपा और जदयू अलग अलग चुनाव लड़ेंगे. बिहार में दोस्ती और बिहार के बाहर जनता दल युनाइटेड का यह कदम बताता है कि जदयू नेता और बिहार के मुख्यमंत्री ‘सुशासन बाबू’ के नाम से जाने जाने वाले नीतीश कुमार एनडीए के साथ दोस्ती को लेकर पसोपेश में है. बिहार में अपनी कुर्सी बचाने के लिये नीतीश कुमार को भाजपा का साथ जरूरी लगता है.

वही बिहार से बाहर निकलते ही उनको भाजपा का साथ मजबूरी हो जाता है. ऐसे में वह अपनी सुविधा के हिसाब से एनडीए के साथ चलना चाहते हैं. नीतीश कुमार का यह कदम अवसरवादी कदम माना जा रहा है. नीतीश कुमार देश के उन नेताओं में गिने जाते हैं जिनकी छवि बेहद साफ सुथरी है. उनकी गिनती नवीन पटनायक जैसे नेताओं के समक्ष की जाती है.

इसके बाद भी नीतीश कुमार बिहार में अपनी पुरानी पकड़ मजबूत नहीं रख पाये. वह बराबर सहयोगी बदलते रहे. भाजपा का साथ छोड़ कर वह राजद और कांग्रेस के साथ महागठबंधन का हिस्सा बने. फिर महागठबंधन तोड़कर भाजपा के साथ जाकर एनडीए का हिस्सा बन गये.

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2019 के लोकसभा चुनाव के बाद वह एनडीए के साथ भी वह केवल बिहार की सीमाओं तक ही सीमित रह सके. अब वह बिहार के बाहर एनडीए का हिस्सा नही रहेंगे. यही पसोपेश सुशासन बाबू की छवि को बिगाड़ रहा है. अब उनको अवसरवादी नेता माना जा रहा है. कुछ लोग यह भी मान रहे हैं कि 2022 तक नीतीश कुमार भाजपा के साथ दोस्ती को लेकर नया दांव चल सकते हैं क्योकि भाजपा के साथ रहते उनको हिंन्दुत्व के साथ चलना पड़ेगा. जो नीतीश कुमार के लिये लाभकारी नहीं होगा. भाजपा उत्तर प्रदेश की तरह बिहार में भी छोटे दलों को दरकिनार करना चाहती हैं.

एक्टर गिरीश कर्नाड का 81 की उम्र में निधन

सिनेमा जगत के जाने-माने सितारे गिरीश कर्नाड का सोमवार को लंबी बीमारी के बाद बेंगलुरु में निधन हो गया. ये अभिनेता और लेखक थे. 81 साल की उम्र में इनका निधन हो गया. इनके मौत की वजह मल्टीपल और्गन फेलियर बताया गया. गिरीश कर्नाड ने सलमान खान की फिल्म ‘एक था टाइगर’ और ‘टाइगर जिंदा है’ में भी काम किया था. उनकी अखिरी बौलीवुड फिल्म ‘टाइगर जिंदा है’ इसमें उन्होंने  डा. शेनौय का किरदार निभाया था.

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गिरीश कर्नाड का जन्म 19 मई 1938 को महाराष्ट्र के माथेरान में हुआ था. इन्होंने कर्नाटक आर्ट कौलेज से ग्रेजुएशन किया था. आगे की पढ़ाई इंग्लैंड में पूरी की और फिर भारत लौट आए. उन्होंने चेन्नई में औक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस में सात साल तक काम किया. लेकिन कुछ समय बाद इस्तीफा दे दिया. इसके बाद वे थियेटर के लिए काम करने लगे.

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इन्हें भारत के जाने-माने समकालीन लेखक, फिल्म निर्देशक, अभिनेता, और नाटककार के तौर पर भी जाना जाता था. ये पद्म ज्ञानपीठ, भूषण, पद्म श्री और पुरस्कारों से नवाजे गए.

कन्नड़ और अंग्रेजी दोनों ही भाषाओं में गिरीश कर्नाड की एक जैसी पकड़ थी. उनका पहला नाटक कन्नड़ में था, जिसे बाद में अंग्रेजी में अनुवाद किया गया. उनके नाटकों में ‘अंजु मल्लिगे’, ‘अग्निमतु माले’, ‘नागमंडल’ ‘ययाति’, ‘तुगलक’, ‘हयवदन’, और ‘अग्नि और बरखा’ काफी चर्चित हैं.

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4 टिप्स: काजल को फैलने से ऐसे रोकें

काजल लगाना भी एक कला है. हालांकि सिर्फ सही तरीके से काजल लगा लेना ही पर्याप्त नहीं है. जरूरी है कि आपका काजल इस तरह लगा हो कि यह फैले नहीं. काजल फैल जाए तो पूरा मेकअप खराब लगने लग जाता है. ऐसे में आप  इन टिप्स को अपनाकर अपने काजल को फैलने से रोक सकती हैं.

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  1. काजल लगाने से पहले बहुत जरूरी है कि आप अपना चेहरा टोनर से साफ कर लें. इससे त्वचा पर मौजूद तेल साफ हो जाएगा जिससे काजल के फैलने का डर कम हो जाएगा.
  2. काजल लगाने से पहले आंखों के नीचे थोड़ा पाउडर लगा लें. आप चाहें तो आंखों के नीचे ब्रश या स्पंज की मदद से पाउडर लगा सकती हैं.

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  1. हमेशा वाटर प्रूफ काजल का इस्तेमाल करें. वाटरप्रूफ काजल फैलता भी नहीं है और लंबे समय तक टिका भी रहता है.
  2. आईलाइनर लगाकर काजल लगाने से यह कम फैलता है.

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डायबिटीज: अपने खाने में जरूर शामिल करें ये 4 चीजें

डायबिटीज के रोगी को हमेशा खान-पान का खास ख्याल रखना चाहिए. एक शोध के मुताबिक भारत में लगभग 7.2 करोड़ डायबिटीज के रोगी हैं, जिनके 2025 तक 13.4 करोड़ तक होने की आशंका है. डायबिटीज के रोगी को  ब्लड प्रशर के आवश्यक लेवल को बनाए रखने के लिए नियमित अंतराल पर कुछ खाते रहना जरूरी होता है. तो चलिए जानते हैं, डायबिटीज के रोगी को ऐसा क्या खाना चाहिए, जो शुगर लेवल को बढ़ने से रोकने में फायदेमंद होंगे.

  1. पालक

पालक में विटामिन C और K भरपूर मात्रा में होते हैं. इसके अलावा पालक में और भी कई गुण होते हैं. जैसे पालक मैग्नेशियम, आयरन और मैग्निज से भरपूर होती है. इस पत्तेदार सब्जी को खाने से आप कई तरह के फायदे उठा सकते हैं. यह आपकी आंखों के लिए फायदेमंद है. इसके साथ ही साथ ब्लड प्रेशर को भी नियंत्रण में रखने में मददगार है.

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2. मेथी दाना

इससे शरीर का ब्लड शुगर लेवल नियंत्रित रहता है और डायबिटीज से बचाव होता है. यह डायबिटीज या मधुमेह को कंट्रोल करने में मददगार है. मेथी दाना के पानी में यह ताकत होती है कि वह ब्लड शुगर के लेवल को कम कर सके. इसमें काफी मात्रा में फाइबर होता है जो पाचन क्रिया को तेज करता है. इसके साथ ही यह शरीर द्वारा शुगर के इस्तेमाल को भी बेहतर करता है.

3. गाजर

मधुमेह या डायबिटीज रोगियों के लिए गाजर का इस्तेमाल फायदेमंद है. गाजर की शुगर आसानी से पच जाती है. गाजर खाने का एक और बड़ा फायदा यह होता है कि इससे मधुमेह की समस्या से बचा जा सकता हैं. जब आप गाजर को रोज़ाना अपने भोजन में शामिल करते हैं, तो इससे आपके शरीर में मौजूद इन्सुलिन की मात्रा को बरकरार रखने में मदद मिलती है. रिक्त या फालतू शुगर ग्लाइकोजन में बदल कर पेट और मांसपेशियों पर एकत्रित हो जाती है.

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4. चुकंदर

चुकंदर में आयरन और पोटेशियम के भरपूर चुकंदर खून को साफ करने का काम करता है. इसी वजह से स्किन पर दाने जैसे पिंपल्स और एक्ने जैसी समस्याएं नहीं होती. चुकंदर में मौजूद आयरन, सोडियम, पोटेशियम, फास्फोरस आपके शरीर को ताकत तो देते ही हैं साथी ही आपको बीमारियों से भी दूर रखते हैं. चुकंदर में नाइट्रेट्स की मात्रा खूब होती है. जिस वजह से इसको खाने से नाइट्राइट्स और गैस नाइट्रिक औक्साइड में बदल जाता है. ये दोनों ही चीजें हमारी धमनियों को चौड़ा करने और ब्लड प्रेशर को कम करने में मदद करती हैं.

अब इलायची दूर करेगी ये 4 ब्यूटी प्रौब्लम

हर घर में इलायची मौजूद होती है, जिसे हम कभी खाना बनाने या चाय बनाने के लिए इस्तेमाल करते हैं. ये हेल्थ के लिए तो अच्छी होती है, लेकिन क्या आपको पता है कि इलायची स्किन के लिए भी फायदेमंद होता है. इलायची में नेचुरल गुण होने के कारण इसे कौस्मेटिक के तौर पर स्किन के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है. आज हम आपको इलाइचा के कुछ टिप्स बताएंगे, जिससे आपको एक ब्यूटीफुल और क्लीन स्किन मिलेगी.

बौडी डिटौक्स करने के लिए बेस्ट है इलाइची

इलायची में मौजूद बीजों को खाने से बौडी डिटौक्‍स होती है. इसमें एंटीसेप्टिक और एंटीबैक्टीरियल गुण मौजूद होते हैं, जिससे स्किन एलर्जी को ठीक करने में काफी मदद मिलती है. इलायची खाने से बौडी में मौजूद टौक्सिन बाहर निकलते हैं और स्किन में नेचुरल ग्लो आता है.

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ड्राई लिप्स के लिए ट्राई करें इलायची

सर्दी हो या गर्मी बदलते मौसम में होंठ फटने की प्रौब्लम आम है. अगर आपके होंठ भी फट रहे हैं इलायची को पीसकर उसे मक्खन के साथ मिलाकर दिन में दो बार लगाएं. हफ्तेभर में आपको शाइनी लिप्स मिल जाएंगे.

ब्‍यूटी स्‍लीप और ग्‍लोंइग स्किन के लिए परफेक्ट है इलायची

अगर आपको रात को नींद नहीं आती है और इस वजह से आपको पूरे दिन आपका चेहरा थका हुआ लगता है, तो रात को इलायची खाएं या इसकी खुश्‍बू सूंघे. आप चाहे तो दूध में भी इलायची मिलाकर पीने से आपको जल्‍द ही ब्यूटी स्लीप मिलेगी. इलायची की खुशबू आपके नर्व्स को आराम देने के साथ ही स्ट्रेस बस्टर का भी काम करती है.

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फेस के रेडनेस के लिए ट्राई करें इलायची

इलायची की एंटी-बैक्टीरियल गुण के कारण स्किन क्लीन हो जाती है. आप इस पेस्ट को मुंहासों पर लगाकर रातभर सो जाएं और सुबह ठंडे पानी से चेहरा साफ कर लें. इससे चेहरे से रेडनेस खत्म हो जाएगी और आपकी स्किन हाइड्रेटेड रहेगी. इस पेस्ट को बनाने के लिए आप एक कटोरी लें और इसमें 1 चम्मच इलायची पाउडर के साथ शहद डालकर मिक्स करें. अब इस पेस्ट को मुंहासों के दाग पर लगाएं.

चक्कर 20 लाख के बीमे का

23जनवरी, 2019 की बात है. सुबह के यही कोई 9 बजे थे. लोग अपनेअपने कामधंधे पर जा रहे थे. तभी अचानक रतलाम जिले के कमेड गांव में रहने वाले हिम्मत पाटीदार के घर से रोनेचीखने की आवाजें आने लगीं. हिम्मत पाटीदार के पिता लक्ष्मीनारायण पाटीदार घर के बाहर चबूतरे पर गमगीन बैठे थे.

गांव के लोगों ने जब उन से पूछा तो उन्होंने रोते हुए बताया कि रात को किसी ने उन के बेटे हिम्मत की हत्या कर दी है. थोड़ी ही देर में यह खबर पूरे गांव में फैल गई. हिम्मत की लाश गांव से बाहर खेत में पड़ी हुई थी. कुछ ही देर में उस जगह गांव के तमाम लोग पहुंच गए.

हिम्मत को दबंग किसान माना जाता था. उस के ताऊ के बेटे संजय पाटीदार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में जिला स्तर के पदाधिकारी थे. हिम्मत पाटीदार भी आरएसएस से जुड़ा था, इसलिए उस की हत्या से गांव के लोगों में काफी आक्रोश था.

इस घटना की जानकारी बिलपांक थानाप्रभारी विनोद सिंह बघेल को मिली तो वह अपनी टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए. हिमत की लाश उस के खेत में पड़ी हुई थी. पुलिस ने जब लाश का मुआयना किया तो देखा, उस का गला रेता हुआ था.

पहचान छिपाने के लिए हत्यारे ने उस का चेहरा जलाने की कोशिश भी की थी, जबकि उस की पहचान की दूसरी चीज मोबाइल उस के पास पड़ा था. साथ ही उस की जैकेट व पैंट की जिप खुली हुई थीं. उस की पौकेट डायरी में फोटो व दूसरे कागज रखे मिले.

थानाप्रभारी ने यह जानकारी अपने उच्चाधिकारियों को दे दी. कुछ ही देर में एडीशनल एसपी प्रदीप शर्मा, एसडीपीओ मान सिंह चौहान भी घटनास्थल पर आ गए. दोनों अधिकारियों ने भी लाश का मुआयना किया. उन्हें आश्चर्य इस बात पर हुआ कि जब हत्यारों ने मृतक की पहचान छिपाने के लिए उस के चेहरे को जलाया था तो उस की पहचान की दूसरी चीजें वहां क्यों छोड़ दीं.

मौके पर एफएसएल अधिकारी अतुल मित्तल को भी बुला लिया गया था. उन्होंने घटनास्थल से सबूत जुटाए. उसी दौरान एसपी गौरव तिवारी भी घटनास्थल पर पहुंच गए. मौकामुआयना करने के बाद एसपी गौरव तिवारी ने आईजी (उज्जैन रेंज) राकेश गुप्ता को स्थिति से अवगत कराया. इस के बाद हिम्मत पाटीदार के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया.

मृतक की जेब से जो पौकेट डायरी मिली, पुलिस ने उस की जांच की तो उस में एसबीआई इंश्योरेंस, एफडी, एटीएम पिन आदि की जानकारी थी.

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मोबाइल की जांच की तो वाट्सऐप मैसेज, काल रिकौर्डिंग, गैलरी की फोटो, वीडियो, हिस्ट्री आदि डिलीट मिले. जबकि उस मोबाइल पर रात को इंटरनेट यूज किया गया था.

मृतक के शरीर पर स्ट्रगल का कोई निशान नहीं था. एक चश्मदीद ने पुलिस को बताया कि हिम्मत रात को खेत पर आया तो था लेकिन उस ने पंपसेट चालू नहीं किया था. यह सारी बातें पुलिस के लिए शक पैदा करने वाली थीं.

छानबीन करने पर जहां हिम्मत पाटीदार के एक प्रेमप्रसंग की बात पता चली तो वहीं पुलिस को पता चला कि गांव से मदन मालवीय नाम का एक आदमी लापता है. मदन पहले हिम्मत के खेत पर मजदूरी किया करता था.

संघ से जुड़े लोग हिम्मत पाटीदार के हत्यारों को जल्द गिरफ्तार करने की मांग कर रहे थे. इस संबंध में पुलिस प्रशासन पर भी दबाव बनाया जा रहा था. पुलिस को डर था कि कहीं संघ से जुड़े लोग इस मामले को ले कर कोई आंदोलन खड़ा न कर दें. लिहाजा पुलिस तत्परता से जांच में जुट गई.

एसपी गौरव तिवारी ने दूसरे दिन भी घटनास्थल की बारीकी से जांच की. हिम्मत परिवार के परिजनों ने उन्हें बताया कि 22 जनवरी की रात को हिम्मत बाइक से खेतों में पानी लगाने के लिए पंपसेट चालू करने गया था. सुबह खेत में उस की लाश मिली.

पुलिस की समझ में यह बात नहीं आ रही थी कि हिम्मत जब पंपसेट चालू करने गया था तो उस ने पंपसेट चालू क्यों नहीं किया. साथ ही यह भी कि वह अपने साथ घर से पंपसेट के कमरे की चाबी भी नहीं ले कर गया था, जबकि रात को काफी ठंड थी.

एसपी गौरव तिवारी को यह जानकारी भी मिल चुकी थी कि हिम्मत पाटीदार के यहां मदन मालवीय नाम का जो नौकर काम करता था, वह भी घटना वाली रात से ही लापता है. लिहाजा उन्होंने थानाप्रभारी को मदन मालवीय के बारे में जांच करने के निर्देश दिए.

2 दिन बाद गांव में चर्चा होने लगी कि हिम्मत हत्याकांड में पुलिस हिम्मत के जिस पुराने नौकर मदन मालवीय को खोज रही है, उस की भी हत्या हो चुकी है. लोगों का मानना था कि हिम्मत के खेत में जो लाश मिली थी, वह हिम्मत पाटीदार की नहीं बल्कि नौकर मदन मालवीय की थी.

चूंकि पुलिस को पहले ही लाश की शिनाख्त पर शंका थी, इसलिए एसआई कैलाश मालवीय ने पोस्टमार्टम के समय लाश के थोड़े से अंश को डीएनए टेस्ट के लिए सुरक्षित रखवा लिया था.

पुलिस को गांव से बाहर कुछ दूरी पर एक जोड़ी जूते पड़े मिले थे. उन जूतों की पहचान मदन मालवीय के जूतों के तौर पर हुई. इस से सवाल उठा कि अगर हिम्मत पाटीदार की हत्या करने के बाद मदन मालवीय गांव से फरार हो रहा था तो अपने जूते फेंक कर नंगे पांव क्यों गया होगा.

घटना वाली रात मदन एक खेत पर सिंचाई कर रहा था, उस के जूतों पर जो गीली मिट्टी लगी मिली, वैसी ही मिट्टी हिम्मत की बाइक पर पिछले फुटरेस्ट पर लगी मिली. इस से शक हुआ कि घटना की रात मदन हिम्मत पाटीदार की बाइक पर बैठा था. पुलिस का शक बढ़ा तो उस ने मदन मालवीय के मामले की जांच तेजी से शुरू की.

पुलिस ने हिम्मत के खेत से जो लाश बरामद की थी, उस का अंडरवियर ले कर मदन के घर पहुंची. मदन के घर वालों ने उस अंडरवियर को तुरंत पहचान लिया. वह मदन का ही था. इस शिनाख्त के बाद पुलिस ने मदन के परिजनों के खून के नमूने ले कर डीएनए टेस्ट के लिए सागर स्थित लेबोरेटरी भेज दिए.

दूसरी तरफ पुलिस ने अब हिम्मत पाटीदार की जिंदगी में झांकने की कोशिश शुरू कर दी. पता चला कि हिम्मत के ऊपर 26 लाख का कर्ज हो गया था. इस से वह काफी परेशान था. लगभग महीने भर पहले ही उस ने एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस से अपना 20 लाख रुपए का बीमा करवाया था, जिस का उत्तराधिकारी उस ने अपनी पत्नी को बनाया था.

बीमे की सिलसिलेवार जानकारी हिम्मत ने अपनी पौकेट डायरी में नोट कर रखी थी, जो घटनास्थल पर मिली थी. इस से पुलिस को यह शक हुआ कि संभव है हिम्मत ने अपनी कदकाठी के मदन की हत्या कर खुद को मृत साबित करने की कोशिश की हो ताकि उस की मौत पर पत्नी को बीमा राशि मिल जाए.

यह शक उस समय और भी पुख्ता हो गया जब 2 दिन बाद सागर लेबोरेटरी से डीएनए की जांच रिपोर्ट आ गई. इस से साफ हो गया कि खेत में मिला शव हिम्मत का नहीं, बल्कि उस के नौकर मदन मालवीय का था.

इस जानकारी के बाद पुलिस टीम गांव पहुंच गई. इस दौरान हिम्मत के परिवार वाले चिता के ठंडे होने पर अस्थि चुन कर ले लाए थे. चूंकि डीएनए जांच से उस लाश की पुष्टि मदन मालवीय के रूप में हो चुकी थी, इसलिए पुलिस ने हिम्मत के घर वालों से अस्थि कलश मदन के परिजनों को दिलवा दिया.

मदन की हत्या की पुष्टि होने पर उस गरीब के घर का माहौल गमगीन हो गया. बूढ़ी मां बेहोश हो गई तो मदन की मूकबधिर पत्नी अपना होशोहवास खो बैठी.

अब तक कहानी साफ हो चुकी थी कि हिम्मत पाटीदार ने बीमे की बड़ी रकम हड़पने के लिए अपनी कदकाठी के मदन मालवीय की हत्या करने के बाद उस के शव को अपने कपड़े पहनाए और शव के आसपास अपनी पहचान की चीजें छोड़ दीं. यानी उस ने खुद को मरा साबित करने की कोशिश की थी, इसलिए पुलिस अब हिम्मत पाटीदार की तलाश में जुट गई.

एसपी गौरव तिवारी ने हिम्मत पाटीदार की तलाश के लिए एक टीम गठित कर दी. टीम जीजान से जुट गई थी. 4 दिन की मेहनत के बाद पुलिस टीम ने हिम्मत पाटीदार को राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले की अरनोद तहसील स्थित प्रसिद्ध होरी हनुमान मंदिर के पास एक धर्मशाला से गिरफ्तार कर लिया. बिलपांक थाने ला कर उस से पूछताछ की गई तो पूरी कहानी इस प्रकार सामने आई—

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कमेड निवासी हिम्मत पाटीदार खुद को बड़ा नेता समझता था. उस के शाही खर्च थे, जबकि आमदनी सीमित थी. धीरेधीरे हिम्मत पर 26 लाख रुपए का कर्ज हो गया. इस कर्ज के चलते वह पिछले 2 सालों से काफी परेशान था. कर्ज से छुटकारा पाने का उसे कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा था.

इसी बीच करीब 6 महीने पहले हिम्मत ने टीवी पर एक ऐसा क्राइम सीरियल देखा, जिस में एक व्यक्ति खुद को मरा साबित करने के लिए अपनी ही कदकाठी के एक दूसरे युवक की हत्या कर उस का चेहरा बिगाड़ने के बाद लाश को खुद के कपड़े पहना कर फरार हो जाता है. इस तरह वह पुलिस और समाज की नजरों में मर जाता है.

इस सीरियल को देख कर हिम्मत का दिमाग घूम गया. उसे लगा कि वह भी ऐसा कर के कर्ज से छुटकारा पा सकता है. लेकिन इस से कोई फायदा नहीं होने वाला था, क्योंकि वह मृत साबित तो हो जाता लेकिन उस का कर्ज तो यूं का यूं ही रह जाता, इसलिए सोचविचार के बाद उस ने एक महीने पहले एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस से अपना 20 लाख रुपए का बीमा करवा लिया.

यह पैसा हिम्मत की मौत के बाद उस की पत्नी को मिलने वाला था. इतना करने के बाद उस ने एक डायरी बना कर उस में वे तमाम बातें सिलसिलेवार लिख दीं, जिन की मदद से उस के बाद पत्नी और परिवार वाले आसानी से उस के मरने का लाभ उठा सकें.

अब हिम्मत को तलाश थी, किसी एक ऐसे व्यक्ति की जिस की कदकाठी उस से मिलतीजुलती हो, ताकि अपनी जगह वह उस की हत्या कर सके. इस के लिए उस ने गांव में कल्लू नाम के एक युवक का चयन कर उस से दोस्ती बढ़ा ली.

वह अकसर उसे रात के समय अपने खेत पर पार्टी के लिए बुलाने लगा, लेकिन कल्लू और हिम्मत में एक अंतर था. हिम्मत अपने बाल छोटे रखता था, जबकि कल्लू के बाल काफी बड़े थे. सो हिम्मत ने प्रयास कर के कल्लू के बाल कटवा कर अपनी तरह के करवा दिए.

सारी व्यवस्था बना कर 22 जनवरी की रात को उस ने कल्लू का कत्ल करने की योजना बना ली. वह रात एक बजे घर से खेत की सिंचाई करने की बात कह कर बाइक ले कर निकल गया. खेत पर पहुंच कर उस ने कल्लू को फोन किया, लेकिन कल्लू ने उस का फोन रिसीव नहीं किया.

हिम्मत ने कल्लू के अलावा इस काम के लिए अपने पुराने नौकर मदन मालवीय का भी दूसरे नंबर पर चयन कर रखा था. मदन की कदकाठी भी हिम्मत जैसी ही थी. मदन आजकल दूसरे किसान के खेत पर काम करता था, लेकिन उस के पास मोबाइल नहीं था. इसलिए हिम्मत बाइक ले कर मदन को लेने खुद ही उस के खेत पर पहुंच गया.

हिम्मत के कहने पर मदन मालवीय उस के साथ बाइक पर बैठ कर उस के खेत पर आ गया. मौका देख कर हिम्मत ने तलवार से मदन मालवीय की गरदन काट कर हत्या कर दी.

फिर उस का चेहरा जलाने के बाद उस के शव को अपने कपड़े जूते पहना दिए. इस के बाद अपनी पहचान के कागज उस की जेब में ठूंस कर वह वहां से फरार हो गया.

हिम्मत की योजना थी कि पत्नी को बीमा का पैसा मिल जाने के बाद उसे ले कर कहीं दूर जा कर बस जाएगा, लेकिन पुलिस टीम ने हिम्मत पाटीदार की पूरी योजना पर पानी फेर दिया.

(कहानी सौजन्य- मनोहर कहानियां)

अगर आपको भी हैं लीवर इंफेक्शन, तो करें ये टिप्स फौलो 

लीवर ह्यूमन बौडी का एक महत्त्वपूर्ण पार्ट है. जहां एक ओर यह अद्भुत संग्रहालय है वहीं दूसरी ओर यह एक रासायनिक कारखाना भी है. खाने का डाईजेशन और एनर्गी उत्पादन यहीं होता है. इस की कोशिकाओं में पुनर्जीवित होने की अद्भुत क्षमता होती है. ऐसे में इस का संक्रमण शारीरिक क्षति है और विडंबना यह है कि यह रोग महामारी का रूप ले रहा है.

वायरल हेपेटाइटिस : इस रोग का कारक वायरस है. इस वायरस के कई रूप हैं. हेपेटाइटिस ए वायरस रोगी के मल से रोग को फैलाता है. संक्रमण के 2 हफ्ते बाद तक रोगी के मल में इन्हें देखा जा सकता है. अस्वच्छता तथा भीड़भाड़ का माहौल रोग फैलाने में सहायक होते हैं. रक्त तथा समलैंगिक यौन संपर्क से भी रोग फैलता है. संक्रमण के दिन से लगभग 2-4 सप्ताह के भीतर रोग के लक्षण दिखने लगते हैं. हेपेटाइटिस बी वायरस मुख्यतया रक्त द्वारा फैलता है. रोगी के काम में आई सूई द्वारा किसी स्वस्थ व्यक्ति को सूई लगाने से या संक्रमित व्यक्ति का रक्त किसी स्वस्थ व्यक्ति को देने जैसी प्रक्रिया से यह रोग फैलता है. शिशु में मां द्वारा भी यह रोग फैलता है. संक्रमण के दिन से 4 से 20 सप्ताह के भीतर रोग के लक्षण प्रकट होने लगते हैं. हेपेटाइटिससी वायरस भी रक्त द्वारा रोग फैलाता है जैसे रक्तदान, संक्रमित सूई का प्रयोग आदि. संक्रमण दिवस से ले कर 2 से 26 सप्ताह के भीतर रोग के लक्षण प्रकट होने लगते हैं. हेपेटाइटिस डी वायरस को अपनी संख्या बढ़ाने के लिए बी वायरस की आवश्यकता रहती है. संक्रमण दिवस से 6 से 9 सप्ताह के भीतर रोग के लक्षण प्रकट होने लगते हैं. हेपेटाइटिस ई वायरस रोगी के मल द्वारा रोग को फैलाता है. संक्रमण दिवस से 3 से 8 सप्ताह के भीतर रोग के लक्षण प्रकट होने लगते हैं.

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कैसे करें इसकी पहचान

इस रोग के सामान्य लक्षण : बदन में सुस्ती, भूख बंद हो जाना, जी मिचलाना, उल्टियां, दस्त आदि. इस के साथ पीलिया की उपस्थिति लीवर  दोष पर ध्यान आकृष्ट करती है. लीवर  भी आकार में बढ़ जाता है जिस के फलस्वरूप पेटदर्द की शिकायत बढ़ने लगती है. कभी-कभी हिपेटाइटिस बी वायरस के संक्रमण से रोगी को बोलने में भी असुविधा होने लगती है. लीवर  के साथसाथ रोगी की तिल्ली तथा लिंफ ग्रंथियां भी आकार में बढ़ने लगती हैं.

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जब रोग अनियंत्रित हो कर दीर्घ अवधि वाला क्रौनिक हिपेटाइटिस बन जाता है तो उपरोक्त सभी लक्षण एकसाथ प्रकट होते हैं. महिलाओं में मासिक रक्तस्राव बंद हो जाता है. नाक से नकसीर फूटने लगती है. बदन में जगहजगह रंगीन चकत्ते उभरने लगते हैं तथा खुजलाना आम समस्या बन जाती है. सभी जोड़ों में दर्द रहने लगता है. गुरदे, फेफड़े आदि भी संक्रमणयुक्त हो उठते हैं. थाइरायड ग्रंथि की कार्यप्रणाली में भी बाधा आती है.

उपचार

  1. रोगी को पूर्ण विश्राम करना चाहिए. किसी भी सूरत में थकान नहीं होनी चाहिए. सिर्फ नित्यकर्म के लिए ही बिस्तर छोडे़ और किसी सूरत में नहीं.
  2. पौष्टिक आहार का विशेष महत्त्व है. लगभग 2 हजार से 3 हजार कैलौरी का प्रतिदिन समावेश आवश्यक है. फल, ग्लूकोज के सेवन का विशेष महत्त्व है. प्रोटीनयुक्त भोजन श्रेष्ठ है. हां, वसायुक्त भोजन न लें.

हेपेटाइटिस वैक्सीन

  1. हेपेटाइटिस ए के लिए स्वस्थ व्यक्ति के रक्त प्रोटीन (इम्यूनो ग्लोब्यूलीन) को प्रयुक्त किया जाता है. इस की खुराक 0.02-0.05 सी.सी./किलोग्राम शारीरिक भार है. स्कूली बच्चों में इस प्रकार का टीकाकरण कर के देखा गया मगर यह उपाय ज्यादा प्रभावी नहीं है और न ही यह बचाव पद्धति अधिक लोकप्रिय हुई है.
  2. हेपेटाइटिस बी के लिए टीके की प्रथम खुराक जिस दिन दी जाए, उस के ठीक 1 महीने बाद दूसरी तथा पहली के 6 महीने बाद तीसरी खुराक दी जाती है. यह टीका 1 सीसी की खुराक में दिया जाता है. 10 वर्ष से कम आयु के बच्चों में इस की खुराक आधा सीसी होती है.

हेपेटाइटिस : कुछ अन्य रूप

  1. कई बार रोग दीर्घकालीन बन जाता है जिसे चिकित्सकीय भाषा में क्रौनिक पर्सिस्टैंट हेपेटाइटिस कहा गया है. ऊपरी पेट में दर्द, थकान, भूख बंद हो जाना, वसीय भोजन माफिक न आना आदि रोग के प्रमुख लक्षण हैं. यह रोग पूरी तरह ठीक भी हो जाता है.
  2. कई बार यकृत कोशिकाएं खुद को ही नष्ट करने लगती हैं. इसे वैज्ञानिक परिवेश में आटो इम्यून हेपेटाइटिस कहते हैं. यह स्थिति स्त्रियों में जीवन के मध्याह्न या वृद्धावस्था में देखने को मिलती है. यकृत व तिल्ली के आकार में वृद्धि, पीलिया, बुखार, नकसीर, बोलने में कष्ट, शरीर पर रंगीन चकत्ते आदि लक्षण प्रकट होते हैं. रोग के निवारण के लिए स्टीरौयड औषधियां प्रयुक्त की जाती हैं. इस प्रकार की स्थिति अनेक बार यकृत सीरोसिस या यकृत कैंसर में भी परिवर्तित हो सकती है.
  3. क्रौनिक लोब्युलर हिपेटाइटिस रोग भी कई बार इंसान में देखने को मिलता है. यह वायरस बी व सी का संयुक्त संक्रमण है. उचित इलाज से रोग शतप्रतिशत ठीक हो जाता है.

इस प्रकार लगभग एक दर्जन वायरस हैं जो रोग कारक हैं. ए वायरस बच्चों पर जल्दी आक्रमण करता है. बहरहाल, बात चाहे कोई हो, यह रोग भोजन, दूषित जल, अस्वच्छ वातावरण तथा भीड़भाड़ के माहौल से फैलता है.

 

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