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अफसोस… ‘गब्बर’ नहीं दिखेगा इस वर्ल्ड कप में

अपने पिछले मैच में औस्ट्रेलियाई कंगारुओं को शतक से सबक सिखाने वाले भारतीय ओपनर बल्लेबाज शिखर धवन इस विश्व कप से बाहर हो गए हैं. रविवार, 9 जून को औस्ट्रेलिया के खिलाफ मैच में चोटिल हुए शिखर धवन अब वर्ल्ड कप में नहीं खेल सकेंगे.

शिखर धवन को तेज गेंदबाज नाथन कुल्टर नाइल की उछाल लेती गेंद लगी थी. इस के बावजूद उन्होंने 109 गेंद में 117 रन की बेहतरीन पारी खेली थी. लेकिन उस चोट की वजह से वे फील्डिंग के लिए मैदान पर नहीं उतरे थे. उन की जगह रविंद्र जडेजा ने फील्डिंग की थी.

स्कैन के बाद चोटिल अंगूठे में फ्रैक्चर की बात सामने आई. लिहाजा, डौक्टरों ने उन्हें 3 हफ्ते आराम की सलाह दी हैं.

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कौन लेगा उन की जगह

शिखर धवन की जगह टीम में बतौर ओपनर बल्लेबाज किसे मौका मिलेगा, इसे ले कर अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी लेकिन सूत्रों के मुताबिक, टीम की तरफ से श्रेयस अय्यर का नाम आगे बढ़ाया गया है. विकेट कीपर ऋषभ पंत को टीम में शामिल किया जा सकता है. केएल राहुल भी रोहित शर्मा के साथ बल्लेबाजी की शुरुआत कर सकते हैं.

चूंकि रोहित शर्मा दाएं हाथ के बल्लेबाज हैं तो हो सकता है कि विपक्षी टीम के गेंदबाजों को परेशान करने के लिए किसी बाएं हाथ के बल्लेबाज को बतौर ओपनर आजमाया जाए.

13 जून को भारतीय टीम का मुकाबला न्यूजीलैंड के साथ है, शायद तभी खुलासा होगा कि क्रिकेट के ‘गब्बर’ की जगह किस खिलाड़ी को मिलती है. वैसे, फौर्म में चल रहे शिखर धवन का यों विश्व कप से बाहर जाना भारतीय टीम के लिए कतई अच्छी बात नहीं है, वह भी तब जब शिखर धवन और रोहित शर्मा की जोड़ी ने मिल कर रनों के अंबार लगाए हैं.

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क्या सृष्टि रोडे ने तोड़ा रोहित सुचांती का दिल, जानें इस खबर की सच्चाई

बिग बौस 12 की प्रतिभागी सृष्टि रोड़े इन दिनों काफी चर्चे में है. आपको बता दें, इनके एक्स बायफ्रेंड मनीष नागदेव ने ब्रेकअप के लिए पूरी तरह से सृष्टि को जिम्मेदार बता दिया था. दरअसल मनीष ने इंस्टाग्राम पर एक इमोशनल मैसेज शेयर कर अपने ब्रेकअप की पूरी कहानी बताई थी. लेकिन इसके बाद अब तक सृष्टि रोड़े की ओर से किसी तरह का बयान सामने नहीं आया है.

 

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मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक मनीष नागदेव से अलग होने के बाद सृष्टि रोड़े का रोहित सुचांती के साथ भी ब्रेकअप हो गया है. रोहित सुचांती इस ब्रेकअप के बाद काफी टूट गए हैं. वही मनीष नागदेव ने कहा कि सृष्टि ने मेरा गलत इस्तेमाल किया है. खबरों की माने तो मनीष और रोहित के बाद अब सृष्टि किसी और शख्स को डेट कर रही हैं और जल्दी ही शादी भी करने वाली है.

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बिग बौस 12 में सृष्टि रोड़े और रोहित सुचांती की गहरी दोस्ती को लेकर कई तरह की अफवाहें फैली थी. घर से बाहर निकलने के कुछ ही दिनों बाद सृष्टि और मनीष नागदेव के ब्रेकअप की खबर सामने आ गई थी. मनीष की खास दोस्त और एक्ट्रेस काम्या पंजाबी ने इन दोनों के रिश्ते के टूटने की वजह रोहित सुचांती की एंट्री को बताया था.

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इस क्रिकेटर की हो सकती है ‘खतरों के खिलाड़ी 10’ में एंट्री

हाल ही में युवराज सिंह ने इंटरनेशनल क्रिकेट से अलविदा लिया. ये पल पूरे भारतीय क्रिकेट प्रेमियों के लिए काफी इमोशनल रहा. अब उनके फैंस युवराज सिंह को अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट खेलते हुए नहीं देख पाएंगे. युवराज के क्रिकेट की दुनिया  से अलविदा कहते हुए उनकी एक फोटो पत्नी हेचल कीच ने भी अपने इंस्टाग्राम पर शेयर की थी. इस इमोशनल सीन पर हेचल कीच ने लिखा, ‘और इसके साथ एक युग समाप्त हो गया. खुद पर गर्व करो हसबैंड, अब जिंदगी का दूसरा पन्ना शुरू… बहुत सारा प्यार.

 

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मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक  अब युवराज सिंह छोटे पर्दे पर लौटने वाले हैं. युवराज सिंह खतरों के खिलाड़ी 10′ में एंट्री ले सकते हैं. इस शो के मेकर्स ने उन्हें इस टीवी रियल्टी शो के लिए अप्रोच भी किया है.

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दरअसल युवराज की पत्नी कीच ने कहा, ‘अगर युवराज को इस टीवी शो के लिए अप्रोच किया जाता है तो वो इसे नहीं करेंगे. वैसे अभी तो इस टीवी रियल्टी शो को आने में समय है. ऐसे में देखना होगा कि युवराज सिंह नजर आएंगे या नहीं.

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5 टिप्स: हेल्थ के लिए ही नहीं स्किन के लिए भी फायदेमंद है लेमन टी

गरमी में स्किन का ख्याल रखना, लेकिन यह एक मुश्किल काम है, जिसके लिए आप मार्केट से कईं फेस प्रौडक्ट खरीदती होंगी लेकिन कभी हमारे घर में कुछ ऐसी चीजें मौजूद होती हैं, जो हमारी स्किन को नेचुरली फायदा पहुंचाती है. जिसमें लेमन टी भी एक प्रौडक्ट है. कुछ लोगों का मानना है कि लेमन टी से अगर फेस को वौश किया जाए तो ये स्किन को फायदा पहुंचाता है.  लेमन टी हेल्थ के साथ-साथ फेस को भी ग्लोइंग बनाने में मदद करता है. साथ ही इसके कई फायदे होते हैं, जिसके बारे में आज हम आपको बताएंगे….

1. पिंपल से छुटकारा पाने के लिए ट्राई करें लेमन टी

अगर आपके चेहरे पर बहुत पिंपल हैं तो लेमन टी से अपने फेस को रोजाना वौश करें. इसमें ऐसे तत्‍व होते हैं जो पिंपल पैदा करने वाले कीटाणुओं को मार देते हैं और स्किन को पिंपल फ्री बनाने में मदद करते हैं.

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2. ब्‍लैकहेड्स दूर करने में मदद करती है लेमन टी

लेमन टी से हल्‍के हाथों से मसाज करने पर ब्‍लैकहेड्स निकल जाते हैं और स्किन पर कोई भी ब्‍लैकहेड्स नहीं रहता है. जिससे शाइनी स्किन मिल जाती है.

3. औयली स्किन के लिए बेस्ट है लेमन टी

कई लोगों की स्‍कीन इतनी ज्‍यादा औयली होती है कि उनकी स्किन पर कोई भी चीज असर नहीं करती है. ऐसे में लेमन टी काफी मददगार है. ये स्किन को औयल फ्री बनाने में मदद करती है.

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4. स्किन की क्लीनिंग के लिए ट्राई करें लेमन टी

यह नेचुरल क्‍लींजर की तरह काम करता है. लेमन टी से स्किन पर हल्‍के हाथों से स्‍क्रब करने पर स्‍किन में सौफ्टनेस आ जाता है और वह अच्‍छे से क्‍लीन भी हो जाती है.

5. काले धब्‍बों से दूर करने में मदद करती है लेमन टी

अगर आपकी स्किन पर काले धब्‍बे या पैचेस हैं तो लेमन टी से चेहरे को वौश करें, इससे काले धब्‍बे दूर हो जाते हैं और चेहरा शाइन और ग्लोइंग दिखने लगता है.

13 टिप्स: ऐसे पीछा छुड़ाएं पति की प्रेमिका से

रायपुर में एक महिला ने अपने एएसआई पति पर अपनी बहन के साथ दुष्कर्म का आरोप  लगाया . पत्नी ने इस की शिकायत डीडी नगर थाने में दर्ज कराई. पत्नी की शिकायत पर पुलिस द्वारा पति के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई.

महिला ने पुलिस को बताया कि उस का पति राजेंद्र बर्मन यातायात विभाग में एएसआई के पद पर कार्यरत है और उसवह खुद भी दूसरे शहर में जॉब करती है. इस वजह से उस ने अपनी ममेरी बहन को बच्चों की देखभाल के लिए बुला रखा था. कुछ दिन पहले उस ने अपने पति और बहन को आपत्तिजनक हालत में देखा तो अपनी बहन से पूछताछ की. तब बहन ने बताया कि राजेंद्र बर्मन कई साल से उस के साथ गलत काम करता रहा है और विरोध करने पर बदनाम करने की धमकी देता है.

किसी भी शादी में तरहतरह की समस्याएं आती हैं. कई दफा पतिपत्नी वैवाहिक रिश्ते से बाहर संबंध तलाश करते हैं या फिर पति बद्तमीज और गलत आदतों का शिकार हो सकता है. वह दुष्कर्मी और शराबी भी हो सकता है. ऐसे में स्त्री का जीवन जीना मुहाल होने लगता है.ये गंभीर मसले है और परिवार के साथसाथ समाज के लिए भी ठीक नहीं है.

चीन में लवर फेडिंग का ट्रेंड

चीन में एक नया व्यवसाय तेजी से बढ़ रहा है जो पतिपत्नियों को उन के लवर यानी प्रेमी या प्रेमिका से अलग करने के लिए काम करता है. इसे ‘लवर फेडिंग’ यानी लवर को दूर भगाना कहा जाता है. यहां कई लोग अपनी ज़िंदगी से अपने कथित दुश्मन को निकाल फेंकने के लिए हज़ारों डॉलर खर्च करने को तैयार हैं.

मिंग ली, शू ज़िन के साथ मिल कर बीते 18 सालों से लव अस्पताल नाम से यह ख़ास अस्पताल चला रहे हैं. अब तक उन के पास लाखों लोग मदद के लिए आ चुके हैं. मदद मांगने वालों में महिलाएं अधिक होती हैं.

अस्पताल की सहसंस्थापक मिंग ली मदद मांगने वाली महिलाओं को सफल शादी के राज़ और अपने पति का ध्यान नहीं भटकने देने के लिए क्या करना चाहिए इस बारे में सलाह देती हैं.

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पति को तलाक नहीं देना चाहती

45 साल की रूपा देवी अपनी धीमी और थोड़ी कांपती सी आवाज़ में बताती हैं कि वे पति से अलग होना नहीं चाहती थी मगर पति के जीवन में आई कम उम्र की प्रेमिका ने सब खराब कर दिया . उन के और उन के पति के बीच खराब हो चुके संबंध अब बेहतर हैं और पहले के मुक़ाबले काफ़ी मज़बूत भी हो गये हैं. यह संभव हुआ रिलेशनशिप एक्सपर्ट की मदद से.

वह बताती हैं कि उन्होंने कई सप्ताह तक मैराइटल थेरपी ली और इस दौरान सकारात्मक सोच बनाने के बारे में सीखा. उन्होंने जाना की कैसे एक बेहतर और आकर्षक पत्नी बना जा सकता है.

उन्होंने पहले फैसला लिया था कि वह अपने पति की प्रेमिका को उन से दूर करने के लिए कितने भी पैसे खर्च कर देंगी.  इस के लिए किसी एजेंट को हायर कर उसे अपने पति की 25 साल की खूबसूरत और स्टाइलिश सेक्रेटरी के पास भेजने की योजना थी ताकि वह पति की प्रेमिका के पास जा कर यह बताये कि अपने से दोगुने उम्र के किसी  पुरुष की बजाय जीवन में बेहतरी की उम्मीद करनी चाहिए और किसी अच्छे हमउम्र जीवनसाथी की तलाश करनी चाहिए .

जल्द ही उन्हें अहसास हो गया कि इस चक्कर में हजारों खर्च कर भी उन्हें सुकून हासिल नहीं हो रहा है. वह पति को तलाक़ देने के लिए भी अपने मन को तैयार नहीं कर पा रही थीं.

वह कहती हैं, “हम लोगों ने साथ में मुश्किल वक़्त का सामना किया है. मैं इतनी जल्दी हार नहीं मान सकती. मैं दूर होने को वैसे भी कभी सही नहीं मानती और फिर मैं जल्द 50 साल की हो जाऊंगी. मेरे जैसी महिलाओं के लिए घर से निकल कर बाहर काम करना आसान नहीं.”

यदि आप भी इस तरह की किसी समस्या से ग्रस्त हैं तो आइये जानते हैं कुछ संभावित उपायों के बारे में.

  1. यदि आप का जीवनसाथी किसी और के साथ इन्वौल्व होने लगा है तो आप पति की उस प्रेमिका से बात कर और अपने वैवाहिक रिश्ते की दुहाई दे कर इस बात के लिए राज़ी कर सकती हैं कि वह उस के पति से दूर चली जाए और आप के वैवाहिक जीवन में आग न लगाए. किसी और की तलाश कर ले. इस के लिए बातचीत बहुत कायदे से और मनोवैज्ञानिक ढंग से करनी होगी.

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2. पति के बौस को राजी करना होगा कि वह किसी अन्य शहर में उन का ट्रांसफर कर दें,

3. अपने मातापिता या दोस्तों से डिस्कस कर कोई रास्ता निकालें. कोई योजना बनाएं

4. पति के चरित्र के बारे में गंदी बातें कर के यानी उन्हें बदनाम कर के भी आप पति की प्रेमिका से पीछा छुड़ाने की बात पर विचार कर सकती हैं.

5. वंशानुगत बीमारी बता कर उन की प्रेमिका को उन से नफ़रत करने के लिए बाध्य कर सकती हैं.

6. आप बिना लड़ेझगड़े चुपचाप कुछ समय के लिए उन की जिंदगी से जा कर देख सकती हैं. संभव है उन्हें आप की अहमियत का अहसास हो जाए.

7. आप खुद को सुधारने और संवारने का रास्ता भी चुन सकती हैं. इस से जहाँ आप का आत्मविश्वास बढ़ेगा वहीँ पति के भी वापस आप के पास लौटने की सम्भावना बढ़ जायेगी.

8. कभीकभी जो काम लड़ाईझगड़े नहीं कर पाते वह प्यार कर जाता है. सो एक बार प्यार के सहारे उन्हें अपनी ओर खींचने की भरपूर कोशिश करें.

9. आप प्रेमिका को दूर भगाने से संबंधित सेवाएं मुहैया करने वाली कंपनी या प्राइवेट डिटेक्टिव एजेंसी से एजेंट्स भी हायर कर सकती हैं. ये एजेंट्स प्रेमिका से दोस्ती करते हैं और उन की आपत्तिजनक तस्वीरें लेते हैं. फिर उसे मदद मांगने आई महिला को देते हैं. जब पति को पता चलता है कि उस की प्रेमिका उस के प्रति वफादार नहीं है तो अधिकतर मामलों में पति अपनी पत्नी और परिवार के पास लौट आते हैं

10. यदि पति आप की सहेली या बहन के साथ आप के आगे ही गलत हरकतें कर रहा है तो तुरंत उसे टोकिये और सावधान कीजिये की वह आइंदा ऐसा करने की सोचे भी नहीं. आप कानून का सहारा भी ले सकती हैं. पति जिस के साथ गलत करने का प्रयास कर रहा है उसे पति की नजरों से हमेशा के लिए दूर करने का प्रयास करें.

11. यदि पति के जीवन में एक प्रेमिका के जाते ही दूसरी आ जाती है और यह सिलसिला समाप्त नहीं होता तो समझ जाइये कि ऐसे लोग कभी संभल नहीं सकते. वे अपनी आदत से कभी बाज नहीं आएंगे और आप कभी खुश नहीं रह पाएंगी. ऐसे में पति को तलाक देना ही एक बेहतर ऑप्शन होगा.

12. इसी तरह पति एक गलत काम के बाद बिना किसी शर्मिंदगी के वैसे काम ही दोहराते रहते हैं तो आप को बिना किसी पश्चाताप या अफ़सोस के तुरंत उन्हें छोड़ने का फैसला ले लेना चाहिए. क्यों कि ऐसे शख्स कभी नहीं बदलते और आप नाहक ही उन के बदलने का इन्तजार करतेकरते आप अपनी जिंदगी तबाह कर डालेंगी.

13. पति की प्रेमिका किसी ट्यूमर की तरह होती है  और पहली चीज़ जो करनी चाहिए वह है उस से छुटकारा पाना. इस के बाद वैवाहिक रिश्ता खुद ही धीरेधीरे स्वस्थ और मज़बूत हो जाता है.

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इन टिप्स को अपनाकर लिपस्‍टिक को बनाएं लौंग लास्टिंग

लिपस्‍टिक लगाना भी अपने आप में एक कला है. लिपस्‍टिक को होठों पर लगाना कोई कठिन कार्य नहीं है, पर इसे लगाते समय कई तरह की सावधानियां बरतने की जरूरत होती है, साथ ही इसके लिए थोड़ी खास तैयारी भी करनी पड़ती है. होठों को खूबसूरत और आकर्षक दिखाने के लिए जरूरत है कि हमारे होठ फटे न हो और साथ ही जिस लिपस्‍टिक को हम इस्तेमाल कर रहें हैं, वह किसी अच्छी कंपनी का हो. ध्यान रखें कि लोकल  लिपस्‍टिक का इस्तेमाल करने से बचें, क्योंकि इसमें इस्तेमाल होने वाले सस्ते कैमिकल आपके होठों की शोभा को बिगाड़ सकते हैं.

कई बार ऐसा होता है कि हम किसी पार्टी में जाने के लिए घर से अच्छे से तैयार होकर और होठों पर एक अच्छी सी लिपस्‍टिक लगाकर निकलते हैं पर पार्टी में पहुंचते पहुंचते यह हल्की हो जाती है.

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lipstick

अगर आप के साथ भी ऐसा ही होता हो तो अब आपको फिक्र करने की जरूरत नहीं है क्योंकि हम यहां कुछ ऐसे टिप्स आपको दे रहे हैं, जिन्हें अपनाकर आप लिपस्‍टिक को लंबे समय तक के लिए अपने होठों पर लगाकर रख सकती हैं.

सबसे पहले आपको इस बात के लिए सुनिश्चित होना होगा कि आपके होठ पर कोई मृत त्वचा तो नहीं है. अगर ऐसा है तो इसे हटाने के लिए किसी अच्छे प्रोडक्ट का इस्तेमाल कर पहले होठों पर स्क्रब करें. अब इसके बाद ऐसे लिप बाम का इस्तेमाल करें जिसमें तैल न हो.

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लिपस्‍टिक  लगाने से पहले अपने होठों के ऊपर थोड़ा सा क्लिंजर लगा कर साफ करें और बाद में फाउंडेशन का प्रयोग करें. ये आपके लिपस्‍टिक के सही रंग को निखारने में मदद करती है.

tips lipstick

सीधा लिपस्‍टिक का उपयोग करने के बजाय इसे लगाने के लिए हमेशा एक ब्रश का इस्तेमाल करें. अगर आप किसी बोल्ड या गहरे रंग का लिपस्‍टिक इस्तेमाल करना चाहती हैं, तो कंसीलर की मदद से अपने होठों पर आउटलाइन करें. ऐसा करने से आपके लिपस्‍टिक का रंग बाहर की तरफ नहीं फैलेगा.

लिप लाइनर का भी इस्तेमाल करें. यह लिपस्‍टिक की अपेक्षा थोड़ा ड्राय होता है, जो लंबे समय तक आपकी  लिपस्‍टिक को बनाये रखने में मदद करता है.

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अब इन लाइन्स के अंदर लिपस्‍टिक को लगाएं. लिपस्‍टिक लगाने के बाद एक टिश्यु लेकर इसे अपने होठों के ऊपर रखें और इसके ऊपर कोई मेकअप पाउडर लगा लें. ये तरीका अक्सर फैशन शो में मौडल्स अपनाया करती हैं. ये तरीका आपके लिपस्‍टिक के रंग को लंबे समय के लिए सेट करता है.

अब इसके ऊपर थोड़ा और लिपस्‍टिक लगा लें. इसके बाद कोई अच्छा सा लिप-ग्लौस लगाएं और इसे फिनिशिंग टच दें.

क्यों जरूरी है चबा कर खाना?

खाने के अच्छे पाचन के लिए हमेशा हिदायत दी  गई  है कि हम अच्छे से भोजन चबा कर खाएं, जिससे पेट में रसायन का स्राव होता है और खाना अच्छे  से हजम हो जाता है. पर जिस तरह की लोगों की लाइफस्टाइल हो गई है, इन कायदों का पालन काफी मुश्किल हो गया है. पर अच्छे सेहत के लिए जरूरी है कि हम अच्छे से भोजन चबा कर खाएं, जिससे पेट में रसायन का स्राव होता है और खाना अच्छे से हजम हो जाता है. इसके साथ ही आप को जल्दी  जल्दी भूख भी नहीं लगती और वजन भी नियंत्रण में रहता है.

कैसे चबाना चाहिए खाना?

  1. भोजन के चबाने के भी कई कायदे हैं. बेहतर होता है कि हम भोजन को एक साथ ना खा कर बल्कि उसके छोटे-छोटे टुकडे कर के खाएं. खाने को तब तक चबाना चाहिए जब तक वो आपके मुंह में घुल ना जाए. एक और बात जो आपको ध्यान देनी चाहिए कि भले ही खाना सूखा या गीला उसे कभी भी तुरंत ना निगलें.
  2. धीरे धीरे भोजन चबाने से मुंह में बनने वाले लार से भोजन मुलायम हो जाता है और पाचन क्रिया और आसान हो जाती है.
  3. चबा चबा कर खाने के अपने फायदे भी हैं, जो भोजन के बेहतर पचने के अलावा और भी ज्यादा जरूरी हैं.

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  1. जब आप धीरे धीरे खाना खाते हैं तो आपका दिमाग आपको एक सिग्नल भेजता है कि अब आपका पेट भर चुका है. और आप ओवर इटिंग नहीं करते हैं.
  2. भोजन को चबाते वक्त मुंह से अधिक लार निकलती है. भोजन चबाते वक्तप उसमें मिला विटामिन और पौष्टिक तत्वक सभी आ कर लार के साथ मिल जाते हैं जिससे हमें ऊर्जा मिलती है. यदि आहार ठीक प्रकार से ना चबाया गया तो पाचन में कठिनाई पैदा होगी और पेट दर्द तथा गैस की समस्याम उत्प्न्नआ हो जाएगी.
  3. यदि आप ठीक प्रकार से खाना चबाएंगे तो यह आपके मुंह को भी फायदा पहुंचाएगा. मुंह की लार मुंह की बदबू और कीटाणुओं से लड़ने में मददगार होती है. इसमें हाइड्रोजन कार्बोनेट होता है जो कि प्ले ग को पैदा होने से रोकता है. लार दातों में फसे भोजन के कड़ को भी साफ करता है.

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‘अस्थमा’: सावधानी हैं जरुरी…

दिल्ली की 11 प्रतिशत जनसंख्या दमे से पीडि़त है. इस की वजह तेजी से बढ़ता हवा प्रदूषण और लोगों में बढ़ती धूम्रपान की आदत है. दमा अपने आप में चिंता का विषय है, उस से भी ज्यादा चिंता का विषय है दमा, हार्ट अटैक और स्ट्रोक जैसी गंभीर बीमारियों का संबंध. एक जैसे लक्षणों की वजह से बहुत से ऐसे मामले सामने आते हैं जिन में कंजस्टिव हार्ट फेल्योर को दमा का अटैक समझ लिया जाता है. दोनों के इलाज की अलगअलग पद्धति होने और जांच में देरी होने से गंभीर जटिलताएं हो सकती हैं और वह जानलेवा भी साबित हो सकता है.

दमा के इलाज के लिए आमतौर पर इनहेलर का इस्तेमाल किया जाता है. अगर हार्ट फेलियर होने पर इनहेलर दे दिया जाए तो गंभीर अरिहद्मिया होने से मरीज की जल्दी मौत हो सकती है. दमा और कंजस्टिव हार्ट फेल्योर के लक्षण एक जैसे होते हैं, जिन में सांस टूटना और खांसी है. यह जागरूकता फैलाना जरूरी है कि अपनेआप दवा देने से पहले और खुद ही अपनी बीमारी का पता लगाने से पहले डाक्टर से सलाह लेना जरूरी है. सही समय पर डाक्टरी सलाह लेने से जानलेवा हालात को रोका जा सकता है. कुछ खून जांच की पद्धतियां हैं जिन से कार्डिएक ओरिजिन और प्ल्यूमिनरी ओरिजिन का फर्क पता चलता है. इन में से एक टैस्ट है एमटी पीआरओबीएनपी ऐस्टीमेशन, जिसे स्क्रीनिंग पौइंट औफ केयर टैस्ट कहा जाता है. ऐसे टैस्ट से कई बार अस्पताल में गैरजरूरी भरती होने की परेशानी से बच सकते हैं.

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आमतौर पर लोग यह मान कर चलते हैं कि दमा और हार्ट अटैक में कोई भी समानता नहीं है, एक सांस प्रणाली को प्रभावित करता है तो दूसरा दिल के नाड़ीतंत्र को. जबकि तथ्य यह है कि दोनों में आपसी संबंध हैं, जो मरीज दमा से पीडि़त है. बिना दमा वालों के मुकाबले उसे हार्ट अटैक होने की 70 प्रतिशत संभावना ज्यादा होती है. इस के कई कारण हो सकते हैं जिन में तीव्र जलन और सूजन शामिल होती है. कुछ किस्म की जलन शरीर के लिए फायदेमंद होती है लेकिन पुरानी जलन जो नाक की एलर्जी, दमा, रिह्यूमेटौ आर्थ्राइटिस, एथीरोस्कलेरेसिसि की वजह से होती है, स्थायी नुकसान कर सकती है.

दमे के इलाज के लिए प्रयोग होने वाली कुछ दवाएं दमे के मरीजों में दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ा देती हैं. उदाहरण के लिए बीटा एमोनिस्टस, जो मांसपेशियों को आराम देने में मदद करती है, का प्रयोग दमा के मरीजों को तुरंत आराम देने के लिए प्रयोग की जाती है. एडीनालीन डेरीवेटिव्ज, औल बीटा एगोनिस्टस दिल पर नकारात्मक असर डालने के लिए जानी जाती है. यह खून में पोटैशियम के स्तर को कम करने के लिए भी जिम्मेदार होती है. यह दिल की रफ्तार में गड़बड़ी पैदा करती है. दमे को नियंत्रित करने में प्रयोग होने वाली कोर्टिकोस्टीरौयड्स को भी रक्त धमनियों में फड़फड़ाहट की वजह समझा जाता है. यह हर डाक्टर की जिम्मेदारी है कि वह दमा नियंत्रण के लिए प्रयोग होने वाली दवाओं के नकारात्मक असर के बारे में मरीजों को जागरूक करें. इसलिए दवाओं का ज्यादा प्रयोग और अपनेआप दवा लेने से परहेज करना चाहिए.

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यह जरूरी है कि दमे को नियंत्रित रखा जाए ताकि हालत बिगड़ कर दिल की समस्या बनने तक न पहुंच सके. दमे का उचित इलाज करने के लिए नियमित तौर पर लक्षणों का ध्यान रखना और इस बात का खयाल रखना चाहिए कि फेफड़े कितने अच्छे ढंग से काम कर रहे हैं. इन बातों का ध्यान रख कर दमे के इलाज को बेहतर तरह से योजनाबद्ध किया जा सकता है. दमे को नियंत्रित करने के लिए सक्रिय भूमिका निभा कर दमे के इलाज को लाभदायक बनाया जा सकता है और दमे के अटैक को रोका जा सकता है, लंबे समय तक दमे को नियंत्रित किया जा सकता है और इस तरह लंबे समय में होने वाली समस्याओं को रोक सकते हैं. सरकार को चाहिए कि वह नागरिकों को साफ और धूल रहित पर्यावरण प्रदान करे. उसे पर्यावरण प्रदूषण को काबू करने के लिए सख्त कदम उठाए जाने चाहिए, उद्योगों और वाहनों के लिए नियम सख्त बनाने चाहिए, हवा की गुणवत्ता मापने के लिए मौनिटरिंग स्टेशनों के नैटवर्क को बेहतर बनाना चाहिए और लोगों में जागरूकता फैलानी चाहिए. यह भी देखा गया है कि अनियंत्रित दमा दिल पर दबाव बढ़ा देता है, जिस वजह से दिल का दायां हिस्सा काम करना बंद कर देता है. इसलिए यह बेहद जरूरी है कि इलाज कर रहे डाक्टर दमे के मरीजों में दिल की समस्याओं के खतरे को टालने के लिए हर संभव उपाय करें. दमे और दिल के रोगी के आपसी संबंध के बारे में लोगों को जागरूक कर के उन्हें चेतन रखा जा सकता है. इस तरह उन्हें समय पर आवश्यक कदम उठाने में मदद मिल सकती है.

समर रेसिपी: आम पन्ना

सामग्री

कच्चा आम (400 ग्राम)

पानी (2 कप)

काला नमक (1/2 टेबलस्पून)

इलायची पाउडर (1 टेबलस्पून

भुना जीरा पाउडर (1 टेबलस्पून)

काली मिर्च पाउडर  ( ¼ छोटा टेबलस्पून)

पुदीने की कुछ पत्ते पत्तियां (6-7)

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बनाने की विधि:

सबसे पहले कच्चे आम को उबाल लें.

उबलाने के बाद इसे ठंढ़ा कर लें.

फिर पुदीने के पेस्ट के साथ इसमें  थोड़ा नींबू का रस मिलाएं.

इलायची पाउडर, भुना जीरा पाउडर, काला नमक  और पुदीने की पत्तियां डालकर अच्छे से मिला लें, फिर सर्व करें और  आम पन्ना का आनंद लें.

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एक बहानेबाज संस्कृति

बच्चों की छुट्टी हो और अपनी नहीं, तो मुसीबत रहती है. जरा निश्ंिचतता का अनुभव कर के देर से उठी थी, पर यह देख कर मूड बिगड़ गया कि फूलमती ने फिर गोल मारा था. सब काम हड़बड़ी में हुआ. सुबहसुबह रसोईघर से उस के द्वारा बरतनों की उठापटक की मधुर ध्वनि से जरा चैन पड़ता था और उसी ध्वनि के इंतजार में आज देर तक रजाई में पड़ी रही. अब जैसेतैसे तैयार हो कर निकलने को ही थी कि छोटे साहब, जो अब तक बड़े के साथ दूसरे कमरे में हंगामा करने में व्यस्त थे, हाजिर हुए.

‘‘मां, आज तो मेरी परियोजना जरूर तैयार करनी है.’’

‘‘क्यों जी, देखते नहीं, कितनी व्यस्त हूं. ऊपर से फूलमती भी नहीं आई है. कल रविवार है न, कल देखूंगी. अरे, नहींनहीं, कल तो हमारे यहां ही किट्टी पार्टी है. ऐसा करो, परसों शाम को याद दिलाना.’’

‘‘ओफ्फोह, मां, आप ने परसों भी यही कहा था कि दूसरे शनिवार को याद दिलाना. अब सोमवार को अध्यापिका डांटेंगी,’’ अमित का पारा चढ़ता जा रहा था. वैसे वह भी ठीक था अपनी जगह. कब से तो पीछे पड़ा था. मुझे फुरसत नहीं मिल पा रही थी. मोहित को पढ़ाई से ही समय नहीं मिल पाता था. स्कूल वाले भी खूब हैं. जानते भी हैं कि 7-8 साल का बच्चा अकेले पर्वत का माडल नहीं बना सकता. डाल देते हैं मुसीबत मांबाप के सिर पर. स्कूल में ही क्यों नहीं बनवाते यह सब?

‘‘देखो अमित, तुम सोमवार को अध्यापिका से कह देना कि मां की तबीयत खराब थी और पिताजी दौरे पर गए हुए थे. बाजार से सामान कौन लाता? ठीक है? अब जाने दो मुझे.’’

मैं आंख बचाती पर्स संभालने लगी. अमित नाराजगी के अंतिम चरण पर था, ‘‘पिछली बार भी यही बहाना बनाया था कि मां बीमार है. यह भी कोई तरीका है भला.’’

‘‘अच्छा, अच्छा, बस, इस बार और सही…’’ पर्स में से 4 टाफियां निकाल कर उसे थमाती हुई मैं आगे बढ़ी ही थी कि पति महोदय अखबार के पीछे मुंह निकालते हुए बोले, ‘‘अरे, जा रही हो कालिज. भई, वह संजीव अपनी गाड़ी मांग रहा था एक दिन के लिए, भाई की शादी है, क्या कहूं?’’

‘‘मेरी मारुति? उसे दोगे. कतई नहीं. खुद तो महाकंजूस है वह. याद नहीं, पिछली बार मेरी 10 किताबें ले गया था और 10 बार याद दिलाने पर 2 फटी हुई जिल्दें वापस करता कैसा रिरिया रहा था, ‘बहनजी, मेरा साला दिल्ली ले गया था. गाड़ी में कहीं छूट गईं.’ अब भी उस का साला आ गया तो? हरगिज नहीं देनी कार हमें.’’

‘‘तो कह दूं कि…क्या कह दूं? साफ मना करते तो बनेगा नहीं. अफसर का भतीजा है, भई. भुगतना तो हमें पड़ता है न.’’

‘‘अरे, कुछ भी कह दो. कह देना कि सर्विर्सिंग के लिए गई है, ब्रेक ठीक नहीं थे या कुछ भी. ठीक है?’’

फिर एक कदम बढ़ाया कि फोन घनघना उठा. उठाया, ‘‘हैलो, कौन…ओह सरलाजी, कहिए कैसे याद किया? अरे, अपना शनिवार कहां भई. मास्टर लोग ठहरे हम तो. हां, फूलमती को तो मैं भी याद कर रही हूं, सुबह से ही. पहले लोग भगवान का नाम ले कर उठते थे, अब हम उस की बंदी को पुकारते उठते हैं. क्या? नहीं आएगी 3 दिन तक. अरे बाबा, मर जाऊंगी मैं तो. बीमार होगी शायद? क्या, आप को संदेशा भेजा है कि बीमार हूं. और खुद मकान बनाने के काम में लगी है परिवार सहित. अच्छा, धोबी ने बताया है. देखा, ये नीच लोग ऐसे ही बहानों से तो हमें लूटते हैं. ये सब दोहरी कमाई करने के बहाने हैं. इस बार उस के पैसे जरूर काटूंगी. सच बता देती तो क्या पता मैं खुद ही छुट्टी दे देती. गुस्सा भी न आता इतना. अच्छा चलूं, देर हो रही है.’’

मन ही मन कुढ़ती हुई मैं बाहर निकल आई. सच, ईमानदारी व शराफत का तो नाम ही नहीं रहा जैसे आजकल.

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10 नंबर बस स्टाप के पास कुछ भीड़ थी. नई लाडली कार थी और नौसिखिया मैं. सो, जरा धीमेधीमे चलाने लगी. एकदम लतिका पर नजर पड़ी. 1-2 और लड़कियां साथ थीं उस के. ‘ग्रांड साड़ी सेल’ के बैनर वाले एक तंबू में सपाटे से घुसी जा रही थीं सब. खीज उठी मैं. उसे तो कल समझाबुझा कर आज के सेमिनार का काम सौंपा था और यह तो यहां साडि़यां खरीदने में लगी है. देख लूंगी उसे भी.

मैं ने ही उसे दया कर के किसी तरह अपने विभाग में एक लंबी अवकाश रिक्ति पर लगवाया था. यह सोच कर कि गरीब घर की लड़की है. वरना यहां तो किसी रिक्ति की सूचना पर लंबी लाइन लग जाती है. अब मेहनत से अपनी जगह बनाने के बजाय सदा काम से कतराती है. मुंह पर तो कुछ नहीं कहती. कह भी कैसे सकती है? पर प्राय: कुछ भी काम या उत्तरदायित्व की बात से किसी न किसी तरह बच निकलती है.

कालिज पहुंचते ही जल्दी से मैं भूगोल विभाग में पहुंची तो सामने मेज पर लतिका का प्रार्थनापत्र पड़ा मुंह चिढ़ा रहा था, ‘‘…अकस्मात अस्वस्थ हो जाने से महाविद्यालय आने में असमर्थ हूं. कृपया एक दिन का आकस्मिक अवकाश दें.’’

गुस्से में मेरे मुंह से कुछ अपशब्द निकलतेनिकलते रह गए. अस्वस्थ है बहानेबाज. वहां सेल पर साडि़यां खरीदी जा रही हैं. कल ही साफसाफ मना कर देती तो आज यह फजीहत तो न होती मेरी. आज रुकना पड़ता, दौड़धूप होती…बस, भाग ली चुपचाप.

खैर, सेमिनार तो होना ही था. विश्वविद्यालय से 2 भूगोलशास्त्री पधारे थे. उन के आवास व भोजन का प्रबंध भी करना था, जो लतिका को सौंपा था. किसी तरह दूसरे विभाग से नए प्राध्यापकों को पकड़ा, सो उचित व्यवस्था हो गई. प्राचार्य ने भी उदार मुसकराहट का आदानप्रदान किया, पर मन खिन्न हो गया था.

कार निकालने लगी तो माखन सामने आ गया, ‘‘मेमसाहब, गाड़ी चमक रही है न?’’

‘‘हां भई, चमक तो खूब रही है. तुम्हारा काम लगता है, धन्यवाद.’’

‘‘मेमसाहब, घरवाली को बोल रखा है, बाई की गाड़ी रोज चमचमाती होनी चाहिए. बस, मेमसाहब, वो साहब को बोल देना, मैं ने दूसरा आवेदनपत्र रोजगार दफ्तर में भिजवा दिया है. वहां के बाबू को भी खुश कर रखा है. अब जैसे ही कारखाने से मांग जाएगी, वह मेरा नाम भेज देगा. अब आगे साहब को देखना है.’’

माखन ने इसी महाविद्यालय से 4-5 साल पहले बी.ए. किया था. जब कहीं नौकरी नहीं मिली तो किसी तरह रसायन विभाग में चपरासी व सहायक के पद पर रखवा दिया था उसे. अब पीछे पड़ा था कि कारखाने में कोई जगह मिल जाए. इसे क्या पता कि साहब ही तो सर्वेसर्वा नहीं थे.

‘‘देखो माखन, मैं ने पहले भी कहा था कि वहां बड़ी लंबी लाइन लगी रहती है. सबकुछ कायदे से होता है. फिर अनुभव भी तो चाहिए.’’

‘‘अरे, मेमसाहब, मालूम है. मैं ने सब मामला तय कर रखा है. पिछड़ी जाति का प्रमाणपत्र बनवा लिया है अपने विधानसभा सदस्य से. पिछले चुनाव में हमीं ने तो जिताया था उन्हें. अब तो है न उम्मीद? सच्ची, बहुत घूम लिए, मेमसाहब.’’

मैं सकपका गई. असली ब्राह्मण परिवार का था वह. उस के चाचा अब भी तीजत्योहारों पर कालोनी में कथा बांचते थे.

‘‘भई, तुम पत्र तो आने दो दफ्तर से, फिर साहब से ही बात करना. मुझे इन बातों का ठीक से कुछ मालूम नहीं.’’

कार चलाई, तो दिमाग भी कहीं घूमने लगा. जा किधर रहे हैं सब लोग? कहां होगी सीमा? क्या सचमुच आज झूठ के बिना गुजारा नहीं है? बाबा कहा करते थे कि जब सब रास्ते बंद हो जाएं तो भगवान को पुकारना चाहिए. पर लगता है, आज की वास्तविकता यह है कि जब कोई उपाय न दिखाई दे तो झूठ, बहानों व हेराफेरी का सहारा लेना चाहिए. शायद जनता जान गई है कि पुकारने से भगवान किस्सेकहानियों में ही प्रकट होते थे. आज उन के नाम से काम नहीं निकलता है.

हां, झूठ व बेईमानी से अकसर काम चल जाता है. उदाहरण सामने रहते ही हैं, कहीं ‘झूठे का मुंह काला’ नहीं दिखता और ‘सच्चे का बोलबाला’ भी सुनीसुनाई बात लगती है. फिर बाद की सोचने की फिक्र किसे है? अभी फिलहाल, इसी पल की मुसीबत किसी न किसी तरह टल जाए. कल किस ने देखा है? पकड़े भी गए तो कौन हरिश्चंद्र का जमाना है. कह देंगे, सब करते हैं, हमीं कौन अलग हैं. ‘सब चलता है’ का मुहावरा कितना चल पड़ा है आजकल.

विचारों में डूबी चली जा रही थी कि अचानक घर की याद आई. याद आया कि फूलमती नहीं आई और पतिदेव भी घर पर हैं. यानी खाना ढंग से बनाना पड़ेगा. सोचा, पनीर व अंडे वगैरह लेती चलूं. गाड़ी टी.टी. नगर की ओर मोड़ी. सुपर बाजार के सामने पार्क करने की जगह ढूंढ़ ही रही थी कि चौंक पड़ी. स्कूल यूनीफार्म पहने 5-6 लड़कों में यह अपना मोहित ही तो है न. हां, हां, वही था. उस के हाथ घुमा कर बोलने के अंदाज से पहले ही पहचान लिया था, अब तो और स्पष्ट दिखने लगा था.

अरे, ये सब तो रंगमहल से निकल रहे हैं. 3 बज चुके थे, शो खत्म हुआ होगा. कई दिन से जिद कर रहा था फिल्म देखने की. अभी परसों ही तो अपने पिता से करारी डांट खाई थी कि ये फिल्मों का चस्का छोड़ो, बोर्ड का इम्तिहान है, मेहनत करो. और यह जनाब स्कूल से खिसक, यहां शोभा बढ़ा रहे हैं. हम से कह रहा था कि 11 बजे से अतिरिक्त कक्षाएं हैं, गणित और विज्ञान की. मेरे देखतेदेखते सब लड़के हंसते खिलखिलाते टैंपो में सवार हो कर ओझल हो गए.

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पहले से उदास मन और व्यथित हो उठा. बिना कार रोके मैं सीधे घर पहुंची. अमित बाहर अपने टामी के साथ गेंद उछालने में लगा था.

‘‘अमित, तुम्हारे पिताजी कहां हैं, बेटे?’’

‘‘मां, हरीश चाचा आए हैं, उन के साथ सोने के कमरे में टेलीविजन पर मैच देख रहे हैं. क्या आप को पता है कि आस्ट्रेलिया ने 100 रन बना लिए हैं और उन का एक भी विकेट नहीं गिरा. गए हम लोग तो. मैं होता तो मालूम है, क्या करता, एक…’’

‘‘अच्छा, अच्छा, जरा चुप कर अब. मेरा सिर दर्द कर रहा है,’’ मैं खीज कर बोली.

‘‘मां, एक मजेदार बात तो सुनती जाओ. खूब हंसोगी. हरीश चाचा कह रहे थे कि चाची उन्हें घर पर टेलीविजन नहीं देखने दे रही थीं, भंडार की सफाई को कह रही थीं, इसलिए चाचा बहाना बना कर आए हैं कि पिताजी की तबीयत खराब है, देखने जाना है. अब दोनों ब्रिज खेल रहे हैं व टेलीविजन भी देख रहे हैं. चाचा ने चाची को क्या बुद्धू बनाया. मजा आ गया.’’

‘‘सुनो, अमित, अपनी परियोजना का सारा सामान अपने कमरे में रखो चल कर मेज पर. मैं अभी कौफी पी कर जुटती हूं तुम्हारे साथ. और सुनो, ठहरो, पहले जरा पिताजी को बुला लाओ इधर.’’

अमित खुशीखुशी उछलता हुआ अंदर भागा. मैं साड़ी बदल मुंहहाथ धोने लगी.

‘‘क्यों भई, बड़ी देर कर दी आज. बहुत भूख लगी है. सब परांठे वगैरह खत्म कर दिए हैं, कुछ करो जल्दी से,’’ पत्ते हाथ में पकड़े साहब ने फरमान जारी किया.

‘‘सुनिए तो, संजीवजी से साफसाफ कह दो कि आशा कार नहीं दे सकती. ज्यादा जरूरत है तो किराए पर लेने का प्रबंध कर देते हैं. और हां, अपने इन मित्र महोदय से भी कह दो कि घर पर फोन कर के बता दें कि आप की तबीयत बिलकुल ठीक है व आप दोनों बैठे ताश खेल रहे हैं.

‘‘सुनो जी, हां, आज से यह बहानेबाजी व गोलमाल बंद. कम से कम इस घर में. और मोहित आए तो कह दीजिए कि बाहर जाना हो या फिल्म देखनी हो, तो हमें बता कर जाए, आगे मैं देखूंगी. आप कृपया इतना ही सहयोग दें तो बहुत है.’’

अचकचाए से ये कुछ कहने को हुए, पर मेरी मुखमुद्रा देख चुपचाप अंदर चले गए. मैं सोचने लगी कि खाना बनाऊं या अमित का हिमालय पर्वत. दोनों कार्य कुछ विशेष कठिन तो नहीं हैं.

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– डा. अंजिला आनंद

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