सुनील अचारकाटे भोपाल के कारोबारी इलाके एमपी नगर में खुद का प्रिंटिंग प्रैस चलाते हैं. जिस दिन प्रैस में देररात तक काम चलना होता है उस दिन शाम से ही उन की सांसें फूलने लगती हैं. वजह, काम का दबाव या तनाव नहीं, बल्कि दिमाग पर आवारा कुत्तों का छाया आतंक है. सुनील बताते हैं कि एमपी नगर से घर चूनाभट्टी तक जाने में कोई 3 जगहों शिवाजी नगर, टीटी नगर और शाहपुरा पर आवारा कुत्ते समूह बना कर बैठे रहते हैं. जैसे ही वे बाइक की आवाज सुनते हैं, सामूहिक रूप से भूंकना और पीछा करना शुरू कर देते हैं.

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