अरविंद केजरीवाल ने 5 साल तक राजसुख भोग लिया हैं, पर कहीं यह राजसुख छिन न जाए, इसीलिए अब वे छटपटा रहे हैं और ऐलान दर ऐलान किए जा रहे हैं. उन का नया ऐलान यही है कि मेॆट्रो के अलावा  डीटीसी व क्लस्टर बसों में महिलाओं को किराया नहीं देना पड़ेगा. वैसे फिलहाल 30 से 33 फीसदी ऐसी महिलाएं हैं जो मेट्रो और सरकारी बसों में सफर करती हैं.

भले ही इस व्यवस्था को लागू करने में कुछ महीने का समय लगे, पर कुछ लोग इसे चुनावी स्टंट मान रहे हैं तो कुछ लोग आम जनता के पैसों का दुरुपयोग. बहुत से तो इसे आम जनता से वसूला गया टैक्स इस तरह की योजनाओं पर भेंट चढ़ा हुआ मान रहे हैं.

मुफ्त सेवाएं दे कर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भले ही महिलाओं की वाहवाही और आने वाले विधानसभा चुनाव में उन के वोट बटोरने की तलाश में हों, पर यह जुमला भी कहीं उन की बदनामी की वजह न बन जाए.

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इस के अलावा और भी कई घोषणाएं हैं. मसलन सभी स्कूलों में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे. अस्पतालों व बसों में मार्शल तैनात किए जाएंगे और पोस्टर भी लगाए जाएंगे कि इस बस में मार्शल तैनात हैं. इस व्यवस्था को शुरू करने में जो भी खर्चा आएगा वह दिल्ली सरकार देगी. मोटेतौर पर इस में 700 से 800 करोड़ तक का खर्चा होगा.

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि आम परिवारों की बेटियां जब कालेज के लिए निकलती हैं, महिलाएं नौकरी के लिए निकलती हैं तो लोगों का दिल धकधक करता रहता है. उन की सुरक्षा की चिंता बनी रहती है. उस को ध्यान में रखते हुए दिल्ली सरकार ने फैसला किया है कि डीटीसी की बसों, मैट्रो और क्लस्टर बसों में महिलाओं को किराया नहीं देना होगा. सरकार का एक ही मकसद है कि महिलाएं ज्यादा से ज्यादा पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल कर सकें. पर साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जो महिलाएं किराया देने में सक्षम हैं, वह सब्सिडी का प्रयोग न करें.

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