एक सिंगल मदर के लिए अकेले अपने दम पर बच्चे का पालनपोषण कर उसे काबिल बनाना आसान नहीं है, मगर वह हिम्मत से काम ले तो न केवल अपने मकसद में सफल होती है वरन दूसरों के लिए भी प्रेरणास्रोत बनती है कुछ इस तरह-

काम और बच्चे के साथ रिश्ते भी सहेजिए:  क्या आप भी औफिस के हैप्पी आवर्स, सहेली की बर्थडे पार्टी, बिना तैयारी की डेट जैसे मौकों को बच्चे या टूटे दिल के कारण बैकसीट पर छोड़ देती हैं? इसी तरह कभी डाक्टर की अपौइंटमैंट तो कभी ब्यूटी पार्लर जाना भी टाल जाती हैं? यह सही है कि सिंगल पेरैंट होने के नाते आप का फिजिकली और इमोशनली हमेशा अपने बच्चे के साथ रहना जरूरी है, मगर इस की वजह से समाज से कटना और जरूरतों को टालना उचित नहीं.

Tags:
COMMENT