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धारा 370 के खात्मे पर विपक्ष ने सरकार को घेरा

जम्मू कश्मीर में धारा 144 लागू करके और महबूबा मुफ्ती व उमर अब्दुल्ला समेत विपक्ष के कई बड़े नेताओं को नजरबंद करने के बाद नरेंद्र मोदी सरकार ने आखिरकार कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले आर्टिकल 370 को खत्म करने का प्रस्ताव राज्यसभा में पेश कर दिया है, जिस पर सदन में भारी हंगामा व्याप्त है. कई नेता अपने कुर्ते फाड़ कर धरने पर बैठ गए हैं.

धारा 370 के खात्मे पर विपक्ष के नेता सरकार पर पिले पड़े हैं. कांग्रेस, टीएमसी और पीडीपी राज्यससभा में इसका जम कर  विरोध कर रही हैं. प्रदेश को विशेषाधिकार देने वाले इस अनुच्छेद के विभिन्न खंडों को खत्म करने का प्रस्ताव संसद में पेश होने के बाद पीडीपी चीफ महबूबा मुफ्ती ने इस फैसले को असंवैधानिक बताते हुए इसे भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का एक काला दिन बताया है. महबूबा मुफ्ती ने अमित शाह द्वारा संसद में प्रस्ताव पेश करने के तुरंत बाद ट्वीट करते हुए कहा, ‘आज का दिन भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का सबसे काला दिन है. आज 1947 की तत्कालीन जम्मू-कश्मीर सरकार द्वारा ‘टू नेशन थ्योरी’ को रिजेक्ट करने का फैसला गलत साबित हुआ है. सरकार द्वारा अनुच्छेद 370 को खत्म करने का फैसला पूरी तरह से अवैध और असंवैधानिक है.’

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वहीं कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने बड़ा विरोध दर्ज कराते हुए कहा कि जिस आर्टिकल 370 के द्वारा हमने हिंदुस्तान को जम्मू-कश्मीर दिया, आज उसी संविधान की मोदी सरकार ने धज्जियां उड़ा दीं. उन्होंने कहा कि धारा 370 ऐतिहासिक है. महाराजा हरि सिंह द्वारा 27 अक्टूबर, 1947 को इंस्ट्रूमेंट औफ एक्सेशन औफ जम्मू एंड कश्मीर साइन किया गया जबकि धारा 370 सन 1949 में आई. जम्मू-कश्मीर के भारत से जुड़ने के दो साल बाद. यह सत्य नहीं है कि जम्मू-कश्मीर को भारत के साथ धारा 370 ने जोड़ा है. जिस आर्टिकल 370 के द्वारा हमने हिंदुस्तान को जम्मू-कश्मीर दिया, आज उसी संविधान की मोदी सरकार ने धज्जियां उड़ा दीं.

जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कौन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने भी बयान जारी कर केंद्र सरकार के इस कदम की आलोचना की है. उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने अनुच्छेद 370 को ख़त्म जम्मू-कश्मीर की जनता के साथ विश्वासघात किया है जबकि स्वायतत्ता के आधार पर ही जम्मू-कश्मीर भारत के साथ आया था. इस फैसले के नतीजे खतरनाक होंगे.

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विपक्ष के विरोध और हंगामे पर ग्रहमंत्री अमित शाह ने कहा कि मैं सदन को विश्वास दिलाना चाहता हूं कि अगर गुलाम नबी आजाद साहब कहते हैं कि यह गैर-संवैधानिक तरीका है तो इस पर वाद-विवाद करें, शोर-शराबा नहीं करें. संविधान की जिस भी धारा के तहत चाहें, हम चर्चा करने के लिए तैयार हैं. हकीकत यह है कि धारा 370 ने जम्मू-कश्मीर को भारत के साथ एकजुट नहीं होने दिया. संविधान जब से बना तब से धारा 370 को अस्थाई माना गया. क्यों अस्थाई माना गया? इसलिए माना गया क्योंकि कभी न कभी इसको हटना था. बहुत पहले हटना था, लेकिन किसी में राजनीतिक इच्छाशक्ति नहीं थी. वोट बैंक की पौलिटिक्स करनी थी. हममें न राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी है, न हमें वोट बैंक बनानी है. नरेंद्र मोदीजी दृढ़ इच्छाशक्ति के धनी हैं, इसलिए आज कैबिनेट ने इस प्रस्ताव को पारित किया है. मैं विपक्ष से कहना चाहता हूं कि इस पर चर्चा कीजिए. देश जानना चाहता है कि इतने समय तक धारा 370 लागू कैसे रहा? देश जानना चाहता है कि इतने समय तक कश्मीर में भ्रष्टाचार क्यों होता रहा? देश जानना चाहता है कि कश्मीर के दलितों को रिजर्वेशन का फायदा क्यों नहीं मिला? कश्मीर के ट्राइबल को पौलिटिकल रिजर्वेशन क्यों नहीं मिला? देश जानना चाहता है कि कश्मीर की माताओं-बहनों को अपने बच्चों के कश्मीरी कहलाने का हक क्यों नहीं मिला? देश जानना चाहता है कि कश्मीर को सबसे ज्यादा पैसा जाने के बाद भी वहां के लोग आज गरीब क्यों हैं? हम चाहते हैं कि आप चर्चा कीजिए, आपके एक-एक सवाल का जवाब दूंगा. धारा 370 को हटाने में एक सेकंड की भी देरी नहीं करनी चाहिए.

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कई विपक्षी पार्टियों ने मोदी सरकार के इस प्रस्ताव का सदन में खुल कर समर्थन किया है. एआईडीएमके बिल के समर्थन में उतरी.इसके नेता ए. नवनीतकृष्णन ने कहा, ‘हम इस फैसले का स्वागत करते हैं. आर्टिकल 370 अस्थाई है और इसे हटाने का प्रावधान गलत नहीं है. हम केन्द्र सरकार के इस फैसले का स्वागत करते हैं. ‘दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी ट्वीट कर सरकार के फ़ैसले का समर्थन किया है. केजरीवाल ने ट्वीट कर कहा, ”जम्मू-कश्मीर पर हम सरकार के फ़ैसले के साथ हैं. हमें उम्मीद है कि इससे राज्य में शांति और प्रगति की राह प्रशस्त होगी.”

वहीं  बसपा नेता सतीश चंद्र मिश्रा ने भी कहा, “हमारी पार्टी केंद्र सरकार को पूरा समर्थन देती है. हम चाहते हैं बिल पास हो. समाजवादी पार्टी भी इस प्रस्ताव पर सरकार का समर्थन कर रही है.

धारा 370 के खात्मे पर जम्मू-कश्मीर में होगा ये बदलाव

  • जम्मू-कश्मीर अब अलग राज्य नहीं बल्कि केंद्रशासित प्रदेश होगा.
  • कश्मीर विधानसभा वाला केंद्रशासित प्रदेश होगा.
  • विधानसभा का कार्यकाल 6 साल की जगह 5 साल होगा.
  • जम्मू-कश्मीर का राष्ट्रध्वज तिरंगा होगा.
  • देश का कोई भी नागरिक जम्मू-कश्मीर में संपत्ति खरीद सकेगा.
  • जम्मू-कश्मीर में अब दोहरी नागरिकता नहीं होगी. आर्टिकल 370 के कारण जम्मू-कश्मीर में वोट का अधिकार सिर्फ वहां के स्थायी नागरिकों को ही था. दूसरे राज्य के लोग यहां वोट नहीं दे सकते थे और न ही चुनाव में उम्मीदवार बन सकते थे. अब भारत का कोई भी नागरिक वहां का वोटर और प्रत्याशी बन सकता है.
  • अनुच्छेद 370 के हटाने के बाद जम्मू-कश्मीर को मिले विशेष अधिकार पूरी तरह से खत्म हो गए हैं. केंद्र सरकार के इस फैसले के बाद जम्मू-कश्मीर में भारतीय संविधान पूरी तरह से लागू होगा. इस फैसले के बाद जम्मू-कश्मीर का अपना अलग से कोई संविधान नहीं होगा. बता दें कि कश्मीर में 17 नवंबर 1956 को अपना संविधान लागू किया था. अब कश्मीर में आर्टिकल 356 का भी इस्तेमाल हो सकता है. यानी राष्ट्रपति शासन लगाया जा सकता है.
  • लद्दाख को अलग केंद्रशासित प्रदेश घोषित किया गया. यहां विधानसभा नहीं होगी और इसका प्रशासन चंंडीगढ़ की तरह चलाया जाएगा.
  • आरटीआई और सीएजी जैसे कानून भी यहां लागू होंगे.
  • जम्मू-कश्मीर में देश का कोई भी नागरिक अब नौकरी पा सकता है.

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क्या अमिताभ बच्चन की पूजा करते हैं राजीव खंडेलवाल ?

एक्टर राजीव खंडेलवाल फिल्म प्रणाम के साथ वापसी करने वाले हैं. इस फिल्म के बारे में उनका कहना है, 80 के दशक के हिंदी सिनेमा के प्रति आभार जताने का यह एक छोटा सा प्रयास है.राजीव ने कहा कि वे उस दौर के सभी कलाकारों का आदर करते हैं और अमिताभ बच्चन की तो वे पूजा करते हैं.

अमिताभ बच्चन के प्रशंसक होने के नाते राजीव का कहना है कि इस तरह की फिल्म में काम करने का मौका पाकर वह खुश हैं. राजीव ने बताया, यह फिल्म 80 के दशक के हिंदी सिनेमा का एहसान मानने का एक छोटा सा प्रयास है.

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यह उस तरह की फिल्मों के प्रति आभार प्रकट करना है, जहां एक हीरो और उसका सफर होता था, जब कहानियों को बेहद ही सरल तरीके से बताया जाता था और लोग इस तरह की फिल्मों को देखने के लिए अपने परिवार संग थिएटर में जाते थे.

 

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राजीव ने यह भी कहा, मैंने यह फिल्म इसलिए की, क्योंकि मैंने अपनी पसंद की फिल्मों के साथ हमेशा एक्सपेरिमेंट किया है. मुझे यह फिल्म करने में मजा आया, क्योंकि मैं अमिताभ बच्चन की पूजा करता हूं और उस दौर के सभी कलाकारों का आदर करता हूं. यह फिल्म 9 अगस्त को रिलीज होगी.

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राखी सावंत ने अपनी शादी छुपाने की ये वजह बताई

हमेशा विवादित बयान से चर्चा में रहने वाली मशहूर आदाकारा राखी सावंत ने शादी कर ली हैं. उन्होंने अपने फैन के साथ शादी रचाई हैं. उनके पति का नाम रितेश है. रितेश यूरोप के रहने वाले हैं. ये एक एनआरआई बिजनेस मैन हैं.

आपको बता दें, इनकी शादी 28 जुलाई के मुंबई के अंधेरी स्थित एक फाइव स्टार होटल में हुई. इसके अलावा उन्होंने कोर्ट मैरिज भी की है. मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक राखी ने बताया,  मैं और रितेश एक-दूसरे को पिछले एक-डेढ़ साल से जानते हैं. रितेश लंबे समय से मेरे फैन रहे हैं. एक दिन मैं बहुत उदास थी और तभी एक अंजाने नंबर से मेरे फोन पर एक मैसेज आया,  मैसेज में लिखा था कि आखिर मैं इतनी उदास क्यों हूं?

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मैंने जवाब में उनसे पूछा कि जब मैं उन्हें जानती तक नहीं हूं तो आखिर उन्हें कैसे पता चला कि इस वक्त मैं उदास हूं? फिर उन्होंने बताया कि वो मेरे बहुत बड़े फैन हैं और मेरी हर खबर रखते हैं. तब से हमारी दोस्ती हो गई और हम एक-दूसरे से लगातार टच में रहने लगे.

 

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राखी ने शादी को इतने दिनों तक छुपाने की कारण बताई. उन्होंने कहा कि चूड़ा और सिंदूर की वजह से मुझे अपनी शादी को छुपाने में दिक्कत आ रही थी. इसके साथ उन्होंने ये भी कहा कि बौलीवुड में शादीशुदा लड़कियों को जल्दी काम नहीं मिलता. ऐसे में मुझे भी लग रहा था कि मुझे आगे से कोई आइटम नंबर अथवा कोई और काम मिलेगा भी या नहीं.

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दोस्तों के साथ करें ताज का दीदार

रोनित और उस के दोस्त इस वीकैंड स्कूल की छुट्टियां कुछ खास अंदाज में बिताना चाहते थे. सब के अपनेअपने सजैशन थे. कोई वाटर पार्क में जम कर मस्ती करना चाहता था तो कोई फिल्म ‘द जंगल बुक’ को 3डी में ऐंजौय करना चाहता था. लेकिन रोनित ने पहले से ही शर्त रखी थी कि इस बार की छुट्टियां हम लोग अपनी पौकेट मनी से प्लान करेंगे सो वाटर पार्क और मूवी का परहैड खर्च 500 से 1000 के बीच आने के चलते सब को पौकेट मनी कम लगने लगी. सब इसी उलझन में थे कि 100 रुपए प्रतिदिन में कोई अच्छी जगह भला कैसे घूम सकते हैं.

तभी निरपेक्ष जो काफी देर से चुप बैठा था, ने चुटकी बजाते हुए आइडिया दिया कि क्यों न हम आगरा जा कर दुनिया के सातवें अजूबे ताजमहल को देखें. आइडिया तो जबरदस्त था, लेकिन सब को लगा कि दिल्ली से आगरा जाना महंगा पड़ेगा.    तब निरपेक्ष ने बताया कि ताजमहल की ऐंट्री फीस सिर्फ 40 रुपए है और रही बात आगरा तक पहुंचने की, तो मेरे दोस्त के पापा का डिस्ट्रीब्यूशन का बिजनैस है, उन का सामान मिनी ट्रक से रोज दिल्ली से आगरा जाता है. अगर उन से रिक्वैस्ट की जाए तो वे हमें आगरा तक लिफ्ट दे देंगे और वापसी में लौटते हुए घर छोड़ देंगे. इस तरह हम लोगों का आनेजाने का किराया बचेगा और रही बात खाने की, तो हम सब अपने लंच बौक्स की तरह अपनी पसंद के स्नैक्स घर से ही पैक कर के ले चलेंगे. घर का खाना न सिर्फ हैल्दी होगा बल्कि हमारा पैसा भी बचाएगा, इस तरह ताजमहल की ऐंट्री और लोकल रिकशा आदि मिला कर हम लोग 100 से भी कम में ताजमहल का दीदार कर सकते हैं.

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निरपेक्ष का यह आइडिया सब को भा गया और सब ने ताजमहल के यादगार ट्रिप का मजा लिया. अगर आप भी इसी तरह अपने दोस्तों के साथ ताजमहल का दीदार सस्ते में करना चाहते हैं तो यही तरीका अपनाते हुए कैसे बनाएं अपनी छुट्टियों को यादगार आप को बताते हैं. ताजमहल (निर्माण 1632 से 1653) मुगल वास्तुकला का उत्कृष्ट नमूना है. 1983 में ताजमहल को यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया. दुनिया की सब से ख़ूबसूरत इमारत प्रेम की अमर निशानी तथा दुनिया के 7 आश्चर्यों में शुमार ताजमहल को देखने के लिए दुनिया भर से लोग आते हैं. ताजमहल का सब से मनमोहक और सुंदर दृश्य पूर्णिमा की रात को दिखाई देता है.

यहां जाने के लिए आप भी निरपेक्ष की तरह आनेजाने का जुगाड़ कर लें. जैसे कोई ट्रांसपोर्ट का काम करने वाला जिस की गाडि़यां रोज आगरा आतीजाती हों तो उस से लिफ्ट ले सकते हैं. इस के अलावा फ्रैंड सर्कल में किसी के पास गाड़ी हो तो कार पूल कर सकते हैं और आपस में खर्च शेयर कर के सस्ते में आगरा पहुंच सकते हैं. अगर ये सब जुगाड़ न हों तो दिल्ली से रोज हजारों लोग आगरा आतेजाते हैं, आप किसी से विनम्रता से लिफ्ट भी ले सकते हैं. इन सब के अलावा अगर आप ट्रेन से आगरा जाना चाहते हैं तो देश के हर कोने से आगरा के लिए ट्रेनें मिल जाती हैं लेकिन अगर आप राजधानी से जा रहे हैं तो दिल्ली से आगरा जाने के लिए कई ट्रेनें हैं जो 3-4 घंटे में ही आगरा पहुंचा देती हैं.

अंदर प्रवेश करते ही आप ताज के दीदार के लिए आजाद हैं. यहां स्थित मुमताजमहल का मकबरा ताजमहल का मुख्य आकर्षण है. सफेद संगमरमर से बना यह मकबरा वर्गाकार है. यह मेहराबरूपी गुंबद के नीचे है और यहां एक वक्राकार गेट के जरिए पहुंचा जा सकता है. ताजमहल को 40 मीटर ऊंची मीनारों से सजाया गया है. हर मीनार 3 भागों में बंटी है और हर मीनार में 2 बालकनियां हैं. चारबाग भी ताजमहल की खूबसूरती बढ़ाता है. इस में कई उठे हुए रास्ते हैं, जो बाग को 16 फूलों की क्यारियों में बांटते हैं. ताज में प्रवेश करते ही ताजमहल तक पहुंचने के लिए लगभग आधा किलोमीटर लंबा पार्क भी पार करना होता है. इस पार्क की सुंदरता देखते हुए पर्यटक ताजमहल को भी निहारते हुए चलते हैं. ताजमहल परिसर में घुसने से पहले जूते या तो उतारने होते हैं या जूते पर कवर चढ़ा कर जाना होता है. ताजमहल में कुछ भी ले जाना मना है और सुरक्षा जांच में काफी समय लग जाता है सो 3-4 घंटे का समय निकाल कर ही जाना बेहतर रहता है. हां, याद रहे कि शुक्रवार को ताजमहल बंद रहता है इस दिन जाने की भूल न करें.

दोचार घंटे में ताज का दीदार आसानी से किया जा सकता है. उस के बाद अगर समय और पैसे बचते हैं तो आप आगरा का लालकिला भी देख सकते हैं. लालकिला जाने के लिए तांगे, बैलगाड़ी या ऊंटगाड़ी का भी मजा लिया जा सकता है. ताजमहल से लगभग 2 किलोमीटर दूर स्थित आगरा के लालकिले में 20 रुपए का टिकट लगता है. यह 16वीं शताब्दी में बना महत्त्वपूर्ण मुगल स्मारक है. यह किला लाल सैंड स्टोन से बना तथा ढाई किलोमीटर लंबी दीवार से घिरा हुआ है. इसे मुगल शासकों का शाही शहर कहा जाता है. आगरा के किले का निर्माण 1656 के लगभग शुरू हुआ था. इस की संरचना मुगल बादशाह अकबर ने करवाई थी. इस के बाद का निर्माण उन के पोते शाहजहां ने करवाया. शाहजहां ने किले में सब से अधिक संगमरमर लगवाया. लालकिले में घुसते ही सीधे हाथ की तरफ एक शानदार पार्क दिखाई देता है. लालकिले के कई महल देखने लायक हैं. कहते हैं कि शाहजहां को ताजमहल बनने के बाद बुढ़ापे में उस के बेटे ने कैद कर यहीं के एक महल में बंद कर दिया था. शाहजहां मरने तक लालकिले में ही कैद रहा. जहां वह कैद था वहां से ताजमहल एकदम साफ दिखाई देता था. यहां शाहजहां की वह खिड़की भी दिखती है जहां से वह ताज का दीदार किया करता होगा.

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एक और किस्सा गाइडों के बीच प्रचलित है कि एक बार जहांगीर या कोई अन्य बादशाह यहां बैठा अपनी सभा कर रहा था कि तभी यमुना की ओर से तोप का एक गोला उसे मारने के लिए चलाया गया था जो उस से कुछ फुट ऊपर जा कर महल की दीवार से टकराया था. उस गोले से बना निशान आज भी देख सकते हैं. किले का भीतरी मीना बाजार भी ऐतिहासिक है. अब वहां पार्क बना हुआ है. आगरा के ताजमहल के अलावा नजदीकी स्थलों में फतेहपुर सीकरी और दयालबाग भी घूमने के लिए आकर्षक स्थान हैं. अगर आप के पास समय है तो आप यहां जा सकते हैं अन्यथा ताजमहल का ही दीदार एक दिन के लिए काफी है.

कैसे जाएं

रेल मार्ग : आगरा रेलवे स्टेशन दिल्लीमुंबई और दिल्लीचेन्नई मेन लाइन पर पड़ता है. दक्षिण और मुंबई से दिल्ली आने वाली सभी ट्रेनें आगरा हो कर ही जाती हैं. इस के अलावा देशभर से आगरा के लिए ट्रेन सेवा है. दिल्ली से आगरा रेल द्वारा 2-3 घंटे में पहुंचा जा सकता है.

सड़क मार्ग : आगरा के लिए बसें दिल्ली, जयपुर, भोपाल तथा उत्तर प्रदेश के लगभग सभी शहरों से मिल जाती हैं. इस के अलावा आप अपने साधन से दिल्ली और जयपुर से सड़क मार्ग से पहुंच सकते हैं.

कब जाएं : आगरा जाने का सब से सही समय अक्तूबर से मार्च माना जाता है.

रक्षाबंधन स्पेशल डिश: जानें कैसे बनाएं गुलाब जामुन

रक्षाबंधन के त्यौहार पर फेवरेट मिठाई को आसानी से घर पर बनाकर अपने परिवार और फ्रेंड्स के साथ एंजौय कर सकते हैं. तो आइए जानते हैं गुलाब जामुन बनाने की विधि.

 सामग्री

100 ग्राम खोया

मैदा या सूजी (1 टेबल स्पून)

बेकिंग सोडा (1/4 टी स्पून)

चीनी (2 कप)

पानी (2 कप)

मिल्क (2 टेबल स्पून)

हरी इलाइची (4)

घी

ब्रेड

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बनाने की वि​धि

एक बाउल में खोए को अच्छे से मैश कर लें.

इसमें मैदा और बेकिंग सोडा मिलाकर डो तैयार कर लें.

इसके लिए आप चाहे तो फूड प्रोसेसर का भी इस्तेमाल कर सकते हैं.

डो नरम और लचीला होना चाहिए ड्राई नही.

अगर आपको यह ड्राई लगे तो अपने हाथ गीले करके इस पर दोबारा काम करें.

डो को छोटी बौल्स का आकार दें.

इनका आकार गोल या फिर अंडाकार में भी हो सकती है.

कड़ाही में घी डाले और इसमें घी का एक छोटा पीस डालकर देखें की वो एक बार में उपर आ जाए.

आंच कम करें और इसमें ब्रेड क्यूब डालकर लाइट ब्राउन होने दें.

ब्रेड को निकाल लें और इसमें जितने जामुन आ सके उतने डालें, यह एक दूसरे को टच न करें.

आंच को कम कर दें, इन सभी जामुन को गोल्डन ब्राउन होने तक फ्राई करें.

जामुन को घी से बाहर निकाल लें और बाकी बचे जामुन को फ्राई कर लें, आंच को कुछ देर के लिए बढ़ा लें और जामुन डालने से पहले फिर कम कर दें.

गुलाब जामुन को एक तरफ रख दें जब तक बनकर चाशनी तैयार होती है.

पानी में चीनी को मिलाकर धीमी आंच पर पकने के लिए रख दें, इसे लगातार चलाते रहें जब तक चीनी पूरी तरह न घुल जाए। इस बात का ध्यान रखें की इसमें उबाल न आए.

आंच को बढ़ा दें जब चीनी घुल जाए और तक इसे उबाल भी सकते हैं.

इसे तब तक पकाएं जब यह थोड़ा गाढ़ा न हो जाए.

जब चाशनी ठंडी हो जाए तो इसमें उंगली डालकर देखें कुछ देर वह पूरी तरह कोट होकर निकलेगी.

चाशनी को गैस से हटा लें और इसे आधा घंटा ठंडा होने दें.

इसे छलनी और मलमल के कपड़े से छान लें.

इसे इलाइची डालकर दोबारा उबालें.

इसमें गुलाब जामुन डालें और आंच को बंद कर दें.

सर्व करने से पहले गुलाब जामुन को इसमें आधे घंट के लिए भीगे रहने दें.

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पति को चुनें या प्रेमी को

कभी कभी जिंदगी हमें ऐसे दोराहे पर लाकर खड़ा कर देती है कि हम स्वयं तय नहीं कर पाते कि हमें क्या करना चाहिए. मान लीजिए कि आप शादीशुदा है और आप को किसी दूसरे शख्स से बहुत गहरा प्रेम हो जाता है. ऐसे में यह फैसला करना बहुत कठिन होगा कि जिस से शादी हुई है पर प्यार नहीं है, उसे चुने या फिर जिस से प्यार है पर शादी नहीं हुई, उसे.

कभी भी हो सकता है प्यार

माना आप किसी के कौंटेक्ट में आती हैं. हो सकता है वह औफिस में आप के साथ हो, पड़ोसी हो, किसी इवेंट में मिला हो या पति/पत्नी का फ्रेंड हो. यानी आप की अक्सर उस से मुलाकात हो जाती है. धीरे धीरे आप को महसूस होता है कि आप उस के साथ वे बातें भी शेयर कर सकती है जिन्हें दूसरों से नहीं कर पाती. आप दोनों एकदूसरे की कंपनी पसंद करने लगते हैं. घंटों बिना थके एकदूसरे से बातें करते हैं और फिर वह आप को आकर्षक लगने लगता है. धीरे धीरे आप उस से अपने दिल के राज शेयर करने लगती है. अपना डर ,अपनी ख्वाहिशें और विचार बांटने लगती है. आप को ऐसा लगने लगता है जैसे उस की तरह से किसी ने आप को नहीं समझा हो या उस के साथ आप बेहद सुरक्षित महसूस करती हैं. आप दोनों के बीच की अंडरस्टैंडिंग मजबूत होती जाती है. आप उस के साथ इमोशनली जुड़ने लगती है. उस के लिए एहसास जागने लगते हैं. आप को लगता है काश यह शख्स विवाह से पहले मिल गया होता.

यह कनेक्शन इतना गहरा हो जाता है कि आप उसे किसी भी हाल में खोना नहीं चाहती. आप दो शरीर और एक प्राण बन जाते हैं. मगर आप को अपने अंदर गिल्टी भी फील होती है कि आप विवाहिता है और अपने पति का विश्वास तोड़ रही हैं. पर आप उस के आकर्षण के आगे मजबूर हैं.

जमाने के डर से आप दोनों ऐसी जगहों पर मिलना शुरू कर देते हैं जहां कोई भी आप को देख न सके. आप एकदूसरे से ऐसी बातें भी शेयर करनी शुरू कर देते हैं जैसी बातें विवाहित व्यक्ति को अपने जीवनसाथी के अलावा किसी और से नहीं करनी चाहिए. आप को एकदूसरे का हाथ पकड़ना ,हग करना, किस करना वगैरह बहुत अच्छा लगने लगता है. एक समय आता है जब सारी सीमाएं तोड़ कर आप एक दूसरे में खो जाते हैं. समय के साथ आप दोनों को एकदूसरे की इतनी जरूरत महसूस होने लगती है कि आप जीवनसाथी से झूठ बोल कर रेस्टुरेंटस, होटल्स या दूसरे शहर जा कर भी उस से मिलने लगते है.

अब आप आजाद हो कर हमेशा उस शख्स के साथ जीना चाहती हैं. खुले तौर पर उस से मिलना चाहती हैं और चीख चीख कर सबों से कहना चाहती है कि आप को उन से प्यार है. आप अपने प्रेमी के साथ भविष्य के खूबसूरत सपने देखने लगती हैं. आप उस के नाराज होने या दूर जाने के ख्याल से भी घबराने लगते हैं.

इस रिश्ते की वजह से आप के मन में तरह तरह के सवाल उठने लगते हैं मसलन, क्या मुझे अपने प्रेमी के साथ भाग जाना चाहिए या फिर बच्चों की खातिर पति के साथ ही रहना चाहिए?  पति ने कभी मेरा बुरा नहीं किया तो क्या उन को अकेला छोड़ना ठीक होगा? पति के बारे में सोचते सोचते आप फिर से प्रेमी के ख्यालों में खो जाती हैं. आप को वह इंसान दुनिया का सब से खूबसूरत तोहफा नजर आने लगता है. जब आप उस के साथ नहीं होती तो उसे बहुत मिस करती है और जब आप अपने पति या बच्चों की तरफ देखती है तो एक गिल्ट महसूस करती हैं.

आप को इस बात का भी मलाल होता है कि बचपन से आप के मन में जो विश्वास और मान्यताएं बिठाई गई हैं आप उस से उलटा व्यवहार कर रही है. इसलिए आप के मन में कंफ्यूजन की स्थिति बनी रहती है. आप अपनेआप को यह समझाने का प्रयास करती हैं कि आप जो कर रही हैं वही उचित है पर मन का कोई कोना इस का प्रतिकार भी कर रहा होता है.

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सोच समझ कर लें फैसला

आप अपने जीवनसाथी से अपने प्रेमी की तुलना करने लगती हैं और हमेशा प्रेमी का पलड़ा ही भारी होता है. ऐसी परिस्थिति में किसी भी स्त्री के लिए कोई फैसला लेना बहुत कठिन होता है. बेहतर है की भावनाओ में बह कर अचानक कोई फैसला न ले. बिना सोचेसमझे आवेश में लिए गए फैसले हमेशा कष्टकारी होते हैं.

सबसे पहले सोचे कि आप का फैसला किसे प्रभावित करेगा. यदि आप विवाहित हैं और आप का पति आप से प्रेम करते हैं. हमेशा आप के साथ रहना चाहते हैं. पर आप किसी और के लिए उन्हें छोड़ देती है तो जाहिर है कि आप अपने पति को चोट पहुंचा रही हैं. यदि आप उस व्यक्ति को छोड़ने का फैसला लेती है जिस के साथ आप रिलेशनशिप में है और वह आप से बेपनाह मोहब्बत करता है तो कोई शक नहीं कि आप अपने प्रेमी को दुख पहुंचाएंगी. आप इन दोनों में से किसी भी एक को छोड़ने का फैसला क्यों न ले आप खुद को चोट पहुंचाने से रोक नहीं सकती. प्यार करने वाले पति को छोड़े या प्रेमी को, दर्द तो आप को ही होगा.

इस लिए कोई भी फैसला लेने से पहले हर पहलुओं पर विचार करें और कोशिश करें कि आप के फैसले से दूसरों को कम से कम तकलीफ पहुंचे.

बच्चों पर नकारात्मक प्रभाव

यदि आप के इस विवाह से बच्चे हैं तो जाहिर है पति को छोड़ने का फैसला आप के बच्चों की खुशी पर भारी पड़ेगा. भले ही उन की उम्र कुछ भी क्यों न हो उन्हें तकलीफ तो होगी ही. मांबाप के तलाक से जहाँ छोटे बच्चों की पढ़ाईलिखाई और परवरिश प्रभावित होती है वहीं बड़े बच्चे भी साइकोलॉजिकली बहुत ज्यादा डिस्टर्ब हो जाते हैं. ऐसा नहीं है कि उन की जिंदगी हमेशा के लिए बर्बाद हो जाएगी. ऐसा नहीं है कि उन की जिंदगी हमेशा के लिए बर्बाद हो जाएगी पर इस दर्द का असर ताउम्र उन के व्यक्तित्व पर जरूर रहेगा.

याद रखे हो सकता है कि अपने प्रेमी के लिए जो गहरे और सकारात्मक भाव आप अभी महसूस कर रही हैं वह हमेशा न रहे. समय के साथ एहसास बदलते हैं. इसलिए ठीक से विचार कीजिए कि आप के इस कदम का क्या प्रभाव पड़ेगा. आप को क्या मिलेगा और क्या खो देंगी. अच्छी तरह समझ कर ही कोई फैसला ले.

माना आप जीवनसाथी को तलाक दे कर प्रेमी के साथ चली जाती है और शादी कर लेती है. मगर क्या पता आप जीवनसाथी से पूरी तरह अलग न हो सके या फिर आप की दूसरी शादी भी लंबे समय तक नहीं टिक सके. क्यों कि जब आप प्रेमी के लिए पति और बच्चों को छोड़ कर आती है तो अपने प्रेमी से आप की अपेक्षाएं बहुत ज्यादा होती है. उन के पूरा न होने पर आप नॉर्मल मैरिड लाइफ नहीं जी पातीं.

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यदि आप ने अपने प्रेमी को छोड़ने का फैसला लिया है तो संभव है कि आप अंदर से बहुत दुखी हो जाए. यह दुख 10 मिनट 10 माह 10 साल तक कायम रह सकता है. यदि आप को लगता है कि 10 साल बाद आप अपने इस फैसले से खुश हो सकती हैं तो आप प्रेमी को छोड़ने का फैसला ले सकती है.

अच्छी तरह विचार कर लें कि क्या आप अपने विश्वास और मान्यताओं के विरुद्ध चल कर खुशी महसूस कर सकेंगी ?

मगर यदि आप ऐसी वैवाहिक जिंदगी जी रही हैं जहां आप के जीवन में पति का प्यार नहीं जब कि प्रेमी के पहलू में आ कर आप का हर अधूरा सपना पूरा हो सकता है तो जीवन के इस मुकाम को छोड़ना भी उचित नहीं होगा.

स्टडी: कर्मचारियों से करवाना हो क्रिएटिव काम तो दीजिए ‘पिज्जा’ ट्रीट

आमतौर पर जौब करते करते एक वक्त ऐसा आता है जब आपको लगता है कि आपकी जिंदगी केवल घर से औफिस और औफिस से घर तक ही सीमित हो गयी है. इसके साथ ही आपको अपनी जौब से बोरियत होने लगती है और आपका काम करने में मन भी नहीं लगता है. ऐसे में अगर आप स्वादिष्ट खाना खाए तो आपकी काम की क्षमता बढ़ सकती है और आपका काम करने में मन अधिक लगेगा. जी हां, इसके लिए एक स्टडी सामने आया है.

दरअसल, अमेरिकी साइकोलौजिस्ट ने कर्मचारियों की काम करने की क्षमता जानना चाहते थे. इसके लिए उन्होंने एक फैक्ट्री के कर्मचारियों पर अध्ययन किया. उन्होंने कर्मचारियों को बेहतर काम करने पर तीन तरीके के इनसेंटिव देने का औफर दिया. पहला औफर था पिज्जा, दूसरा बोनस और तीसरा बौस से तारीफ. इस दौरान कुछ कर्मचारियों ने पिज्जा खाने का औफर लिया कुछ ने तारीफ और कुछ ने बोनस का औफर लिया.

1 हफ्ते बाद एम्प्लौईज के काम की तुलना की गई और पाया गया कि जिन कर्मचारियों ने पिज्जा खाने का औफर स्वीकार किया था उन लोगों के काम करने की क्षमता में 6.7% की बढ़ोत्तरी हुई.

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पानी से कमाई कर रही हैं स्वयंसेवी संस्थाएं

बचपन से पढ़ते और सुनते आए हैं कि ‘जल ही जीवन है’ और बीते एकडेढ़ दशक के दौरान जिस तेजी से जल यानी पानी का कारोबार करने वाली कंपनियों की संख्या में इजाफा हुआ है, लगभग उतनी ही तेजी से लोगों में बोतलबंद पानी की मांग भी बढ़ी है. उपभोक्ता बेहिचक 15 से 30 रुपए दे कर विभिन्न कंपनियों की एक लिटर की पानी की बोतल खरीद रहा है.

जहां तक कंपनियों के पानी बेचने और मुनाफा कमाने की बात है तो व्यापारिक नजरिए से इसे गलत नहीं ठहराया जा सकता, लेकिन समाजसेवा और मानवसेवा के लिए गठित स्वयंसेवी संस्थाएं अगर ऐसा करें यानी पानी बेचें तो इसे आप क्या कहेंगे? शायद यही कि स्वयंसेवी संस्थाओं के लिए जल जीवन नहीं, बल्कि धन है.

देश की सांस्कृतिक राजधानी कहे जाने वाले शहर कोलकाता में श्री काशी विश्वनाथ सेवा समिति, संजीवनी सेवा ट्रस्ट, भारत रिलीफ सोसाइटी, नागरिक स्वास्थ्य संघ, कुम्हारटोली सेवा समिति, बीबीडी बाग नागरिक फाउंडेशन, साल्टलेक संस्कृति संसद, विधाननगर नागरिक विकास मंच, ईस्ट कोलकाता नागरिक फाउंडेशन और हावड़ा वैलफेयर ट्रस्ट समेत महानगर कोलकाता और हावड़ा व विधाननगर इलाके में दर्जनों ऐसी स्वयंसेवी संस्थाएं हैं जो सेवा के नाम पर खुलेआम पानी बेचने का व्यापार कर रही हैं.

गरमी के दिनों में पेयजल की किल्लत बढ़ने के साथ ही ऐसी संस्थाओं की कमाई भी बढ़ जाती है. एक टैंकर (6 हजार से 12 हजार लिटर)पानी के एवज में संस्थाएं 700 से 7,000 रुपए लेती हैं और इस राशि की रसीद तो संस्थाएं जरूर देती हैं, लेकिन कानूनी झंझट से बचने के लिए उस में पानी बेचने का नहीं, बल्कि डोनेशन का जिक्र रहता है.

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इस के अलावा टैंकरचालक और खलासी को चायपानी के नाम पर एक सौ से दो सौ रुपए देने पड़ते हैं. सेवा के नाम पर पानी बेचने का यह गोरखधंधा यों तो बारहों महीने चलता है, लेकिन गरमी और लगन के दिनों में इस की रफ्तार कुछ अधिक तेज हो जाती है.

इस के अलावा पांचसितारा होटलों, निर्माणकार्यों और फिल्मों की शूटिंग के दौरान भी संस्थाओं द्वारा भरभर टैंकर पानी भेजा और बेचा जा रहा है.

सेवा के नाम पर स्वार्थसिद्धि

सेवा के नाम पर स्थापित की गई दर्जनों संस्थाएं इन दिनों पानी बेच कर खासी कमाई कर रही हैं. गरमी के मौसम में संस्थाएं एक दिन में 12 से 15 टैंकर तक पानी बेच देती हैं. इस गणित से रोजाना वे हजारों रुपए कमा रही हैं. इस बाबत कई संस्थाओं के पदाधिकारियों का तर्क है कि एक टैंकर पानी के एवज में हम जनता से जो राशि लेते हैं, उस की बाकायदा दान (डोनेशन) की रसीद देते हैं.

दान तो आदमी अपनी इच्छा और हैसियत के मुताबिक देता है, लेकिन संस्थाओं ने तो एक दर (रेट) तय कर रखी है और बिना तयराशि के संस्था वाले जलापूर्ति नहीं करते. इस आरोप पर सफाई देते हुए एक प्राचीनतम संस्था के पदाधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर कहा, ‘‘धार्मिक आयोजन के लिए जलापूर्ति करने पर हम कोई पैसा नहीं लेते. हां, वाणिज्यिक लाभ के लिए जो लोग पानी लेते हैं, उन से हम पैसे लेते हैं और रसीद देते हैं.’’

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रसीद में दान का जिक्र होता है. रसीद देख कर ऐसा नहीं लगता कि यह एक टैंकर पानी के एवज में दी गई राशि की रसीद है. पैसे पानी के लेते हैं, तो रसीद में दान के स्थान पर पानी क्यों नहीं लिखते? इस का जवाब देने में संस्थाओं ने असमर्थता जाहिर की. उन्होंने इतना भर कहा कि वे पानी के एवज में लोगों से जितने रुपए लेते हैं उतने की रसीद दे देते हैं. अब रसीद में दान लिखा हो या पानी, क्या फर्क पड़ता है.

दान के रूप में मिली लाखों रुपए वाली जलवाहिनी गाड़ी (टैंकर) के जरिए और स्वयंसेवी संस्थाओं के बैनर तले पानी बेचना क्या उचित है? पानी बेचने को आप सही माने में सेवा मानते हैं? क्या दानदाताओं से यह कह कर टैंकर लेते हैं कि पानी बेचेंगे? इन सवालों का सटीक और संतोषजनक उत्तर किसी संस्था का कोई भी पदाधिकारी नहीं दे पाया.

काफी जोर देने पर एक संस्था संजीवनी सेवा ट्रस्ट से जुडे़ प्रदीप कुमार ने हिसाब गिनाते हुए कहा, ‘‘लोगों से जो राशि लेते हैं उस में से कोलकाता नगर निगम को 200 रुपए देने होते हैं. इस के अलावा टैंकर के चालक व खलासी का वेतन. साथ ही, ईंधन और गाड़ी की टूटफूट का खर्च है. इन खर्चों को जोड़ा जाए तो हम कुछ ज्यादा नहीं लेते.’’ तो फिर इसे सेवा के बदले व्यापार क्यों नहीं कहते? इस सवाल पर वे चुप्पी साध गए.

इस बाबत कोलकाता नगरनिगम के जलापूर्ति विभाग के अधिकारियों ने बताया कि 17-18 वर्ष पहले तक सोसाइटी एक्ट में पंजीकृत स्वयंसेवी संस्थाओं के टैंकरों को मुफ्त में पानी दिया जाता था, लेकिन शिकायत आने लगी कि नगरनिगम से मुफ्त में पानी ले कर संस्थाएं उसे बेचती हैं. इस के बाद सुब्रत मुखर्जी के मेयर रहते नगरनिगम ने प्रति टैंकर 200 रुपए लेना तय किया. अब संस्था वाले आम लोगों से कितनी राशि लेते हैं, यह देखना नगरनिगम का काम नहीं है.

बहुत पुरानी कहावत है- सेवा करने से मेवा मिलता है. लेकिन संस्थाओं ने इस कहावत में कुछ बदलाव करते हुए इसे अपनाया है. आजकल संस्था वाले सेवा तो नहीं कर रहे, लेकिन मेवा खूब लूट रहे हैं.

बात एक राज की

रक्ताभ, रुधिर, लालिमा और सिंदूरी चारों कालेज के कैंपस में बैठ कर गपशप कर रहे थे, तभी शिरा ने आ कर सूचना दी.

‘‘फ्रैंड्स, खुश हो जाओ. कालेज हम लोगों का एनुअल टूर अरेंज कर रहा है

अगले महीने.’’

‘‘अरे वाह, किस ने बताया तुझे?’’  लालिमा ने पूछा, ‘‘कहां जा रहा है?’’

‘‘नोटिस बोर्ड पर नोटिस लगा है. नौर्थ इंडिया का टूर है. शिमला, कुल्लूमनाली, डलहौजी, धर्मशाला और भी कई जगहें हैं. पूरे 15 दिनों का टूर है,’’ शिरा ने बताया.

‘‘कितने पैसे लगेंगे?’’ सिंदूरी ने पूछा.

‘‘40 हजार रुपए पर हैड,’’ शिरा ने बताया और बाय कर के चली गई.

‘‘यार, हमारा तो फाइनल ईयर है. हमें तो जाना ही चाहिए. भविष्य में हमें साथ जाने का मौका शायद न मिले,’’ रक्ताभ खुश होता हुआ बोला.

‘‘मैं तो जाऊंगी,’’ लालिमा चहकते हुए बोली.

‘‘मैं भी,’’ सिंदूरी भी उसी लय में बोली.

‘‘मैं नहीं जा पाऊंगा. मेरा कंजूस बाप फीस के लिए तो बड़ी मुश्किल से पैसे देता है. टूर के लिए तो बिलकुल नहीं देगा,’’ रुधिर कुछ गंभीर किंतु निराश स्वर में बोला.

‘‘ऐसा नहीं है, यार. तेरे पापा का इतना अच्छा बिजनैस है. करोड़ों की फर्म है. कई ट्रस्ट और पार्कों में उन के द्वारा दान में दी गई वस्तुएं लगी हैं. एक बार रिक्वैस्ट कर के तो देख. बेटे की खुशी से बढ़ कर एक पिता के लिए और कुछ नहीं होता,’’ रक्ताभ रुधिर को समझाते हुआ बोला.

‘‘अगर रुधिर नहीं जाएगा तो मैं भी नहीं जाऊंगी,’’ रुधिर की क्लोज फ्रैंड सिंदूरी बोली.

‘‘सिंदूरी नहीं गई तो मेरे घर वाले मुझे भी नहीं जाने देंगे. क्योंकि मेरे घर वाले किसी और पर विश्वास नहीं करते,’’ लालिमा बोली.

‘‘लो, यह लो. यह तो पूरा प्लान ही खत्म हो गया,’’ रक्ताभ निराशाभरे स्वर में बोला.

‘‘क्या रुधिर के लिए चंदा इकट्ठा नहीं कर सकते?’’ सिंदूरी ने प्रश्न किया.

‘‘हम सब साधारण घरों से हैं. 40 हजार रुपए के अलावा 10 हजार रुपए खर्चे के लिए चाहिए. मतलब 50 हजार रुपए. इतना पैसा भी निकालना हमारे घर वालों के लिए मुश्किल होगा,’’ रक्ताभ बोला.

‘‘हां, यह बात तो सही है,’’ लालिमा ने सहमति व्यक्त की.

‘‘टूर अगले महीने की 25 तारीख को जाएगा. आज तो 3 ही तारीख है. अभी डेढ़ महीने से ज्यादा समय है. कल मिल कर सोचते हैं क्या करना है,’’ रक्ताभ बोला.

‘‘नहीं, जो सोचना है आज ही सोचना है. बैठो और बैठ कर सोचो,’’ रुधिर बोला, ‘‘मेरे पापा से पैसे कैसे निकलवाए जाएं.’’

‘‘उन्होंने शायद बहुत मुश्किलों से यह पैसा कमाया है और शायद यह चाहते हों कि तुझे पैसों की सही कीमत पता चले. इसलिए तुझे पैसे देने की आनाकानी करते हों,’’ रक्ताभ ने अपने विचार रखे.

‘‘कारण कुछ भी हो, अभी टूर के लिए पैसे कैसे जमा किए जाएं, यह सोचो,’’ रुधिर सामान्य होता हुआ बोला.

‘‘क्या सोचूं? किसी का मर्डर करूं? किसी का किडनैप कर फिरौती मांगूं?’’ रक्ताभ झुंझलाता हुआ बोला.

‘‘किडनैप? वाह, क्या बढि़या आइडिया है. हम किडनैप ही करेंगे,’’ रुधिर खुशी से उछलते हुए बोला.

‘‘किडनैप? अरे बाप रे,’’ लालिमा डर कर आश्चर्य से बोली.

‘‘किस का किडनैप करोगे, रुधिर? देखो, कोई गलत कदम मत उठाना वरना सारी उम्र पछताना पड़ेगा,’’ सिंदूरी भी विरोध करते हुए बोली.

‘‘अरे, किसी दूसरे का नहीं, मेरा किडनैप, तुम सब मिल कर मेरा किडनैप करोगे और मेरे बाप से फिरौती मांगोगे. कम से कम लोकलाज की खातिर वे फिरौती तो देंगे ही,’’ रुधिर अपनी योजना बताते हुए बोला.

‘‘और अगर पुलिस को बता दिया तो हम सब अंदर जाएंगे,’’ रक्ताभ बोला.

‘‘मेरी मां ऐसा नहीं करने देंगी,’’ रुधिर ने कहा.

‘‘लेकिन पुलिस को सूचना दे दी तो? तब क्या होगा?’’ रक्ताभ ने संशय जाहिर किया.

‘‘चलो, हम सब बैठते हैं और एक फूलप्रूफ प्लान बनाते हैं,’’ रुधिर सभी को बैठाते हुए बोला.

‘‘नहीं रुधिर, यह गलत है,’’ सिंदूरी ने एक बार फिर विरोध किया.

‘‘क्या सही क्या गलत? एक फिल्म के गाने की लाइन है ‘जहां सच न चले वहां झूठ सही, जहां हक न मिले वहां लूट सही… मैं अपना हक ही तो ले रहा हूं,’’ रुधिर बोला.

‘‘चल ठीक है. अपना प्लान बता,’’ रक्ताभ बात को समाप्त करने के दृष्टिकोण से बोला, ‘‘हमारी योजना में सब से बड़ी बाधा पुलिस ही रहेगी.’’

‘‘वह कैसे?’’ रुधिर ने पूछा.

‘‘वह ऐसे कि कालेज में हम चारों का ही ग्रुप है. यदि किसी एक को अचानक कुछ होता है तो बाकी के 3 शक के दायरे में आएंगे ही न,’’ रक्ताभ बोला.

‘‘इस का समाधान खोज लिया है मैं ने. प्लान शुरू होने के 3-4 दिनों से पहले से मैं घर से कालेज के लिए निकलूंगा जरूर, मगर मैं कालेज में आऊंगा नहीं. कालेज रिकौर्ड से यह साफ हो जाएगा कि मैं कालेज आ ही नहीं रहा हूं, बल्कि यह भी साबित होगा कि मैं किसी तीसरे के साथ हूं,’’ रुधिर ने अपनी योजना बतानी प्रारंभ की.

‘‘तो तू रहेगा कहां? किसी को तो दिखाई देगा न?’’ लालिमा ने पूछा.

‘‘नहीं, मैं किसी को भी दिखाई नहीं दूंगा क्योंकि मैं घर से निकल कर पास के प्लौट पर बने गैराज में छिप जाऊंगा. जब से पापा ने नई कार ली है तब से गैराज में पुरानी गाड़ी ही खड़ी रहती है. मेरी साइकिल भी वहां पर आसानी से घुस जाएगी. कालेज छूटने के समय मैं वापस घर पहुंच जाऊंगा. मां अकसर घर के अंदर ही रहती हैं, इसलिए उन्हें कुछ मालूम नहीं पड़ेगा और तुम लोग भी शक के दायरे से बाहर ही रहोगे,’’ रुधिर ने अपनी योजना का पहला दृश्य सामने रखा.

‘‘चलो, यहां तक तो ठीक है पर किडनैपिंग होगी कैसे? और किडनैपिंग के बाद तुझे रखेंगे कहां?’’ सिंदूरी ने उत्सुकता से प्रश्न किया.

‘‘जो भी दिन किडनैपिंग के लिए निश्चित किया जाएगा उस दिन मैं कालेज के नाम पर निकल कर शहर के दूसरे छोर पर बने रैस्टोरैंट में पहुंच जाऊंगा. वहां पर मैं अपनी साइकिल रख कर लगभग आधा किलोमीटर पैदल जाऊंगा. इतने बड़े शहर में मुझे कोई पहचानेगा, इस बात की संभावना कम ही है. वहां से रक्ताभ मुझे अपनी बाइक से 20 किलोमीटर दूर मेरे फार्महाउस पर छोड़ आएगा. पुलिस सब जगह ढूंढे़गी मगर मुझे मेरे ही घर में नहीं ढूंढे़गी.’’ रुधिर ने आगे कहा.

‘‘पर वहां तो तुम्हारे बरसों पुराने चौकीदार रामू अंकल हैं न?’’ रक्ताभ ने कहा.

‘‘हां, हैं तो सही. वे बहुत ही सीधे और अनपढ़ हैं. उन्हें तो लैंडलाइन से डायल करना भी नहीं आता. मैं जाते ही फोन को डेड कर दूंगा. मेरा विचार है एक या ज्यादा से ज्यादा 2 दिनों में ही अपना प्लान कंपलीट हो जाएगा,’’ रुधिर ने आशा जताई.

‘‘वह सब तो ठीक है. फिरौती की रकम कब, कहां और कितनी मांगनी है?’’ रक्ताभ ने पूछा.

‘‘हमारी आवश्यकता तो सिर्फ 40 हजार रुपए ही है,’’ लालिमा बोली.

‘‘अरे, नाक कटवाओगे क्या? इतनी रकम तो लोग कुत्तेबिल्ली का किडनैप करने के भी नहीं मांगते हैं. तुम ऐसा करना 5 लाख रुपए मांग लेना,’’ रुधिर रक्ताभ को निर्देश देता हुआ बोला.

‘‘5 लाख रुपए? यह तो बहुत अधिक हो जाएगा. क्या करेंगे हम इतने रुपयों का?’’ रक्ताभ का मुंह आश्चर्य से खुल गया.

‘‘देखो, जैसी कि रीत है, मांगने वाले को उतने पैसे तो मिलते नहीं हैं जितने वह चाहता है. कुछ मोलभाव अवश्य होता है. ऐसी स्थिति में तुम 2 लाख रुपए पर डील पक्की कर लेना,’’ रुधिर ने समझाया.

‘‘2 लाख रुपए भी ज्यादा हैं. क्या करेंगे हम इतने पैसों का?’’ लालिमा कुछ चिंतित स्वर में बोली.

‘‘तुम लोगों के टूर के पैसे भी मैं दे दूंगा.

बचेंगे 40 हजार रुपए तो तुम लोग भी अपने घर से 40 हजार रुपए जमा करने वाले ही थे. वे पैसे रास्ते के खर्च के लिए रख लेना. सभी के पास बराबर पैसा होगा,’’ रुधिर मुसकराता हुआ बोला.

‘‘और संपर्क करने के लिए फोन कौन सा इस्तेमाल करेंगे?’’ रक्ताभ ने पूछा.

‘‘कोई एक फोन यूज नहीं करेंगे. कल मैं पापा की फर्म का गुमाश्ता और्डर की फोटोकौपी, लैटरपैड, सील और बाकी डौक्युमैंट्स ले कर आ जाऊंगा. इतने डौक्युमैंट्स से कौर्पोरेट के नाम पर जितनी चाहे उतनी सिम ले सकते हैं. मैं 5 पोस्टपेड सिम निकलवा दूंगा. अगर कभी पुलिस कंप्लैंट हुई भी, तो शौपकीपर मेरा ही हुलिया बताएगा. इस से यह स्पष्ट होगा कि पापा की फर्म का ही कोई प्रतिद्वंद्वी यह काम मुझ से दबाव डलवा कर करवा रहा है. तुम लोगों पर कोई शक नहीं जाएगा,’’ रुधिर ने योजना का पूरा खुलासा किया.

‘‘फिरौती की रकम किस जगह ली जाएगी?’’ रक्ताभ ने अगली परेशानी प्रस्तुत की.

‘‘हमारे फार्महाउस के बिलकुल विपरीत शहर के दूसरे छोर पर. रुपए किसी शौपिंग बैग में ही लेना ताकि किसी को शक न हो. रुपए लेने के बाद बताना कि तुम ने मुझे फार्महाउस के नजदीक छोड़ दिया है. यहां पर तो मैं पहले से रहूंगा ही,’’ रुधिर ने स्पष्ट किया.

‘‘हम लोगों का तो कोई काम नहीं रहेगा न? इतना काम तो तुम निबटा ही लोगे?’’ लालिमा ने पूछा.

‘‘अरे मैडम, मेन रोल तो आप लोगों का ही रहेगा. रक्ताभ के धमकीभरे फोन करने के बाद फौलोअप करने का काम बारीबारी से तुम दोनों करोगे. इस से ऐसा लगेगा कि गु्रप बहुत बड़ा व खतरनाक है. यदि वौयस चेंजिंग ऐप से कौल करोगे तो बेहतर रहेगा. कोई तुम्हारी आवाज को ट्रैस नहीं कर सकेगा. दूसरा, पैसे लेने भी तुम लोग ही जाओगे, क्योंकि रक्ताभ अगर अपना मुंह कवर करेगा तो लोगों के शक के घेरे में आ जाएगा और तुम लोग स्टौल से कवर कर के आसानी से जा सकती हो,’’ रुधिर ने दोनों लड़कियों को समझाया.

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‘‘तुम्हारी योजना तो बहुत आकर्षक लग रही है. मुझे विश्वास है जरूर सफल होगी.’’ रक्ताभ ने आशा प्रकट की.

‘‘फार्महाउस पर रामू अंकल रहेंगे. वे अनाथ हैं, दादाजी उन्हें किसी अनाथालय से उठा कर लाए थे. इस कारण वे हमेशा हमारे एहसानमंद रहते हैं. मुझे बहुत अधिक चाहते हैं. इस कारण वहां खानेपीने, रहने की कोई समस्या नहीं होगी. हां, तुम लोग अपनी तरफ से कोई गलती मत करना,’’ रुधिर समझाते हुआ बोला.

‘‘बिलकुल ठीक,’’ रक्ताभ ने समर्थन किया.

‘‘ठीक है, तो अपनी योजना पक्की रही. कल मैं घर से निकलूंगा मगर कालेज नहीं आऊंगा. मैं कल ही सिमों का इंतजाम कर के पहुंचा दूंगा. आज से ठीक 6 दिनों बाद मेरा किडनैप कर के मेरे घर पर फोन कर देना. मेरे मम्मी व पापा का नंबर अभी से नोट कर लो,’’ रुधिर नंबर लिख कर देता हुआ बोला.

‘‘ठीक है, औल द बैस्ट,’’ रक्ताभ बोला.

‘‘औल द बैस्ट,’’ चारों एक स्वर में मगर धीमे से बुदबुदा कर बोले.

अगले 5 दिनों तक सभीकुछ तय योजना के मुताबिक चलता रहा. छठे दिन रुधिर तय समय पर निकल कर निश्चित किए गए रैस्टोरैंट के सामने साइकिल रख कर पैदल चल पड़ा. लगभग आधा किलोमीटर चलने के बाद रक्ताभ अपनी बाइक पर इंतजार करता हुआ मिल गया. वह उसे फार्महाउस पर छोड़ आया.

कालेज समाप्त होने के लगभग आधा घंटा बाद रक्ताभ ने रुधिर के पापा को फोन किया.

‘‘हैलो, शांतिलाल बोल रहे हैं?’’ रक्ताभ ने आवाज बदल कर पूछा.

‘‘हां, मैं शांतिलाल बोल रहा हूं. आप कौन?’’ उधर से आवाज आई.

‘‘मेरी बात ध्यान से सुनो और किसी दूसरे को बताने की कोशिश मत करना. हम ने तुम्हारे लड़के रुधिर का अपहरण कर लिया है. अगर उस की सलामती चाहते हो तो आज शाम 5 लाख रुपयों का इंतजाम कर लो. रुपया कहां लाना हैं, इस के बारे में हम शाम को बताएंगे. पुलिस को बताने पर अपने लड़के की लाश ही पाओगे,’’ रक्ताभ ने भरपूर पेशेवर रवैया अपनाते हुए कहा.

‘‘अपहरण? मेरे लड़के का? बहुत अच्छा किया. मेरी तरफ से जान ले लो उस की. रुपया छोड़ो, मैं एक पैसा भी नहीं देने वाला,’’ उधर से रुधिर के पापा ने कहा.

यह सुन कर रक्ताभ घबरा गया और उस ने फोन काट दिया. साथ में खड़ी हुई लालिमा और सिंदूरी से पूरी बात बताते हुए वह बोला, ‘‘कहीं हमारा दांव उलटा तो नहीं पड़ गया?’’

‘‘अब क्या होगा?’’ लालिमा घबराते हुए बोली.

‘‘अरे, इस समय तक तो रुधिर घर पहुंचता ही नहीं है. हम ने फोन में जल्दबाजी कर दी है. इसी कारण अतिआत्मविश्वास के साथ वे ऐसी बातें कर रहे हैं. 2 घंटे बाद उन्हें जब मालूम पड़ेगा की रुधिर सचमुच घर नहीं पहुंचा, तब वे घबराएंगे और हमारी बात मान लेंगे,’’ सिंदूरी ने अनुमान लगाया.

‘‘हां, हां, शायद ऐसा हो. ऐसा करते हैं हम शाम को 6 बजे पार्क में मिल कर फोन लगाते हैं,’’ रक्ताभ ने सहमति जताई.

‘‘सिंदूरी इस बार तुम फोन लगाओ. अब तो 6 घंटे गुजर चुके हैं. शायद अब तक रुधिर के घर वाले घबरा गए हों,’’ रक्ताभ ने पार्क में मिलते ही कहा.

‘‘हां, यह ठीक रहेगा,’’ लालिमा ने समर्थन किया.

‘‘ठीक है, मैं फोन लगाती हूं,’’ सिंदूरी ने कहा और फोन लगाने लगी, ‘‘हैलो, शांतिलालजी…’’

‘‘हां, मैं शांतिलाल ही बोल रहा हूं.’’ वे बीच में ही सिंदूरी की बात काटते हुए बोले, ‘‘तुम किडनैपर्स गैंग से बोल रही हो न? मेरा जवाब अभी भी वही है जो पहले था. आप लोग मेरा व अपना समय बरबाद न करें,’’ कहते हुए शांतिलाल ने गुस्से में फोन काट दिया.

‘‘अब क्या करें? इन पर तो कोई असर नहीं हो रहा,’’ लालिमा बोली.

‘‘अब तो हमें रुधिर से संपर्क करना ही पड़ेगा. वह ही बता सकता है आगे क्या करना है, ‘‘सिंदूरी ने कहा.

‘‘शायद रुधिर लैंडलाइन फोन बंद न कर पाया हो और शांतिलालजी का फोन आने पर रामू अंकल ने रुधिर की उपस्थिति के बारे में बता दिया हो,’’ लालिमा ने आशंका व्यक्त की.

‘‘हां, हो सकता है. अगर ऐसा है तो हमें रुधिर से संपर्क स्थापित करना चाहिए,’’ सिंदूरी बोली.

‘‘ठीक है मैं रुधिर का मोबाइल लगाता हूं,’’ रक्ताभ रुधिर को फोन डायल करते हुए बोला, ‘‘अरे, इस का फोन तो स्विच औफ है.’’

‘‘मतलब, रुधिर को इस बारे में कुछ नहीं मालूम. हमें उसे बताना चाहिए,’’ सिंदूरी बोली.

‘‘मगर बताएं कैसे?’’ रक्ताभ बोला.

‘‘चलो, अभी तुम्हारी बाइक से चलते हैं,’’ सिंदूरी बोली.

‘‘नहीं, अभी नहीं जा सकते क्योंकि वह इलाका सुनसान है और अकसर वहां लूटडकैती की वारदातें होती रहती हैं,’’ रक्ताभ ने बताया.

‘‘फिर क्या करें?’’ सिंदूरी नर्वस होती हुई बोली.

‘‘देखो, कल संडे है. मैं 9 साढ़े 9 बजे जा कर उस से मिल लूंगा. वहीं पर अगली रूपरेखा बना लेंगे,’’ रक्ताभ बोला.

‘‘हां, यह ठीक रहेगा,’’ लालिमा ने समर्थन किया.

‘‘हैलो लालिमा. तुरंत सिंदूरी को कौन्फ्रैंस कौल पर लो,’’ सुबह साढ़े 9 बजे रक्ताभ की घबराई हुई आवाज में फोन आया.

‘‘क्यों, क्या हुआ?’’ लालिमा सिंदूरी को कौन्फ्रैंस कौल पर लेती हुए बोली. ‘‘यह लो रक्ताभ, सिंदूरी भी आ गई.’’

‘‘क्या हुआ रक्ताभ? तुम्हारी आवाज घबराई हुई सी क्यों हैं?’’ सिंदूरी फोन पर जौइन करते हुए बोली.

‘‘अरे, मैं अभी रुधिर के फार्महाउस गया था. वहां पर सीन बहुत चौंकाने वाला था? रुधिर ने सुसाइड कर लिया है,’’ रक्ताभ घबराता हुआ बोला.

‘‘क्या? कैसे??’’ दोनों ने एकसाथ घबराई आवाज में पूछा.

‘‘ उस के एक हाथ में रिवौल्वर है और छाती पर गोली लगी है. शायद रिवौल्वर से खुद को बिस्तर पर लेटेलेटे गोली मार ली है,’’ रक्ताभ की आवाज अभी भी लड़खड़ा रही थी.

रुधिर की मौत की खबर सुन कर लालिमा और सिंदूरी दोनों रोने लगीं. रक्ताभ की आंखें भी भर आईं.

‘‘देखो, संभालो अपनेआप को. रुधिर के पापा को जब यह बात मालूम पड़ेगी तो वे पुलिस में अवश्य जाएंगे. तब आज नहीं तो कल, पुलिस हम तक पहुंचेगी जरूर. हमें अपने बचाव के लिए कुछ करना चाहिए,’’ रक्ताभ ने भर्राई आवाज में कहा.

‘‘क्या करें?’’ लालिमा ने पूछा.

‘‘तुम लोग पार्क में आओ. वहीं बैठ कर सोचते हैं कि हमें आगे क्या करना है. हम पर किडनैप करने का आरोप लगा तो हमारा कैरियर शुरू होने से पहले ही खत्म हो जाएगा. हम पर किडनैपर होने का ठप्पा लग जाएगा वह अलग,’’ रक्ताभ बोला.

‘‘ठीक है, एक घंटे बाद पार्क में मिलते हैं,’’ सिंदूरी रोते हुए बोली.

लगभग एक घंटे बाद तीनों पार्क में इकट्ठे हुए. सिंदूरी बहुत गंभीर व उदास लग रही थी. लालिमा की आंखों में भी रोने के कारण लाल डोरे पड़े हुए थे.

‘‘कैसे हुआ रक्ताभ?’’ सिंदूरी ने पूछा.

‘‘पता नहीं,’’ रक्ताभ ने जवाब दिया.

‘‘कहीं ऐसा तो नहीं कि फोन आने पर रामू अंकल ने रुधिर के पापा को रुधिर के वहां होने की खबर दे दी हो और राज खुलने के डर से घरवालों की नजरों में गिरने से बचने के लिए फार्महाउस पर रखी हुई रिवौल्वर से खुद को शूट कर लिया हो,’’ रक्ताभ चिंतित होते हुए बोला.

‘‘एक बार पुलिस के हत्थे चढ़ना मतलब आगे की जिंदगी को परेशानियों में डालना,’’ लालिमा भी उसी तरह चिंतित होते हुए बोली.

‘‘अब क्या करें?’’ सिंदूरी ने पूछा.

‘‘मेरे विचार से हमें आगे हो कर पुलिस को सूचना देनी चाहिए. इस से पुलिस हमारी बात सुनेगी भी और विश्वास करेगी भी. हमारी बातों की सचाई जानने के लिए वह सिम बेचने वाले शौपकीपर के पास भी जा सकती है जो हमारी बा?तों को सच साबित करेगा. बाद में तो हमारी बात कोई ठीक से सुनेगा भी नहीं,’’ रक्ताभ ने कहा.

‘‘हां, यह ठीक रहेगा,’’ लालिमा ने भी समर्थन किया.

‘‘जैसा तुम को उचित लगे,’’ सिंदूरी घबराए हुए निराश स्वर में बोली.

‘‘रुधिर के पिताजी के जाने के बाद अंदर चलेंगे ताकि हम अपनी बात अच्छे से रख सकें,’’ रक्ताभ ने सुझाया.

‘‘हां, यह ठीक रहेगा. अभी उन्हें अपने बेटे की मौत का गम और गुस्सा दोनों होगा. पता नहीं हमारे साथ क्या कर बैठें,’’ लालिमा बोली.

‘‘ठीक है, हम उन के जाने के बाद अंदर चलेंगे,’’ रक्ताभ ने समर्थन किया. लगभग 15 मिनट के बाद रुधिर के पिताजी बाहर आ गए.

‘‘सर, हम एक घटना की सूचना देने आए हैं,’’ रक्ताभ, लालिमा और सिंदूरी थाना इंचार्ज के सामने खड़े हो कर कह रहे थे.

‘‘पहले आराम से बैठो. घबराओ मत और बताओ किस घटना की सूचना देना चाहते हो,’’ थाना इंचार्ज ने तीनों को बैठने का इशारा करते हुए कहा.

‘‘सर, हमारे मित्र रुधिर ने आत्महत्या कर ली है,’’ रक्ताभ ने साहस बटोर कर कहा.

‘‘क्या कहा रुधिर? सेठ शांतिलाल का बेटा?’’ थाना इंचार्ज ने प्रश्न किया.

‘‘जी हां, वही,’’ सिंदूरी ने कहा.

‘‘परंतु सेठ शांतिलाल ने तो रिपोर्ट लिखवाई है कि उन का बेटा रुधिर आज सुबह से उन की रिवौल्वर के साथ गायब है,’’ थाना इंचार्ज ने कहा.

‘‘नहीं सर, आज सुबह से नहीं, रुधिर तो कल से ही गायब है,’’ कहते हुए रक्ताभ ने रुधिर के अपहरण की पूरी कहानी बयान कर दी.

‘‘ओह, तो ऐसा है,’’ थाना इंचार्ज ने कहा. ‘‘तुम्हारे अलावा इस योजना के बारे में और कौनकौन जानता था.’’

‘‘कोई भी नहीं. अगर फार्महाउस जाने के बाद रुधिर ने रामू अंकल को यह बात बताई हो, तो पता नहीं,’’ रक्ताभ बोला.

‘‘एक बात और समझ में नहीं आई. तुम्हारे हिसाब से अपहरण कल सुबह ही हो गया था. और तुम ने इस विषय में शांतिलाल को फोन भी कर दिया था. लेकिन उस ने तुम्हारे फोन को तवज्जुह नहीं दी?’’ पुलिस अफसर ने रक्ताभ से पूछा.

‘‘यस सर,’’ रक्ताभ ने सहमति दी.

‘‘इस का मतलब तो एक ही निकलता है कि जिस समय तुम ने फोन किया उस समय तक रुधिर वापस घर पहुंच चुका था. तुम्हारा प्लान फेल हो चुका था. शायद इसी शर्मिंदगी में रुधिर ने सुबह वापस फार्महाउस जा कर आत्महत्या कर ली,’’ पुलिस अफसर ने अनुमान लगाया.

‘‘हो सकता है. परंतु रुधिर को कम से कम हमें सूचित तो करना चाहिए था,’’ रक्ताभ कुछ सहमते हुए बोला.

‘‘नहीं, ऐसा नहीं हो सकता. मुझे पूरा विश्वास है रुधिर के साथ कुछ गलत जरूर हुआ है.’’ सिंदूरी रुधिर पर विश्वास जताते हुए बोली.

‘‘पहले घटनास्थल पर जा कर मौके का मुआयना करते हैं. शायद कुछ निकल कर आए. आप तीनों को भी साथ चलना पड़ेगा,’’ थाना इंचार्ज ने कहा.

तीनों पुलिस वालों के साथ फार्महाउस पहुंच गए.

‘‘आप डेडबौडी की स्टडी कीजिए और अपने थौट्स के बारे में मुझे बताइए,’’ पुलिस अफसर ने फोरैंसिक ऐक्सपर्ट को निर्देश दिए.

‘‘सर, यह सुसाइड का केस है ही नहीं, यह तो सीधेसीधे मर्डर का केस है,’’ अपनी प्रारंभिक जांच के बाद ऐक्सपर्ट ने कहा.

‘‘क्या?’’ सभी आश्चर्य से बोल पड़े.

‘‘आप कैसे कह सकते हैं कि यह मर्डर है?’’ इंस्पैक्टर ने पूछा.

‘‘क्योंकि रिवौल्वर पर जिस प्रैशर से फिंगरप्रिंट बनने चाहिए थे उतने प्रैशर से फिंगरप्रिंट बने नहीं हैं. दूसरा, रिवौल्वर चलने के बाद गन पाउडर का कुछ अंश चलाने वाले की कलाइयों पर आ जाता है जो नहीं है. ऐसा लगता है गहरी नींद में सोते हुए रुधिर पर किसी ने बहुत पास से दिल पर गोली मारी है और आत्महत्या दर्शाने के लिए रिवौल्वर हाथ में पकड़ा दी है. इसी कारण रिवौल्वर पर फिंगर एक्सप्रैशन प्रौपर नहीं आ पाए हैं,’’ एक्सपर्ट ने अपनी राय दी.

‘‘ओह, यह तो केस का डायरैक्शन ही चेंज हो गया. मतलब इस केस के बारे में और किसी को भी मालूम था. और उस ने फिरौती न मिलने की दशा में रुधिर को मार डाला. दूसरा एंगल यह है कि चौकीदार रामू ही रुधिर का कातिल हो सकता है. क्योंकि कायदे से तो सब से पहले सूचना उसी को देनी चाहिए थी मगर वह घटना के बाद से ही फरार है,’’ इंस्पैक्टर ने अपना शक जाहिर करते हुए कहा.

‘‘किंतु सर, रामू अंकल तो अनपढ़ हैं उन्हें तो लैंडलाइन से फोन करना तक नहीं आता. वे गोली इतनी सही नहीं चला सकते,’’ सिंदूरी ने कहा क्योंकि वह 2-3 बार रुधिर के साथ फार्महाउस आ चुकी थी.

‘‘तीसरा एंगल यह बनता है कि तुम तीनों में से ही किसी ने उस की हत्या की हो और पुलिस की जांच को भटकाने के लिए खुद पहले आ कर शिकायत कर दी ताकि तुम पर शक न हो,’’ इंस्पैक्टर तीनों पर पैनी नजर डालता हुआ बोला, ‘‘पुलिस तुम तीनों को अरैस्ट करती है.’’

‘‘सर, हम ने तो कुछ किया ही नहीं. हमें घर जाने दीजिए, प्लीज सर,’’ घबराते हुए लालिमा बोली.

‘‘जांच पूरी होने तक थाने का लौकअप ही तुम्हारा घर रहेगा. कौंस्टेबल, सेठ शांतिलाल को फोन कर के यही बुलवा लो. बता दो उन की रिवौल्वर मिल गई है,’’ इंस्पैक्टर ने आदेश दिया.

‘‘यस सर,’’ कौंस्टेबल बोला.

कुछ ही देर में सेठ शांतिलाल अपनी कार से वहां पहुंच गए.

‘‘कहां है रिवौल्वर और कहां है रुधिर? फार्महाउस में घुसते ही शांतिलाल ने प्रश्न किया.

‘‘बैडरूम में हैं दोनों. आप के लड़के ने उस रिवौल्वर से खुद को गोली मार ली है,’’ पुलिस अफसर ने बताया.

‘‘ओह,’’ शांतिलाल ने अफसोस वाले स्वर में कहा.

‘‘एक बात समझ में नहीं आ रही है शांतिलालजी. इन तीनों बच्चों का कहना है कि इन्होंने रुधिर के साथ मिल कर उस के अपहरण की साजिश रची और जब इन्होंने फिरौती के लिए आप को फोन किया तो आप ने ऐसा कुछ रिस्पौंस नहीं दिया जिस से लगे कि आप को कोई शौक लगा है,’’ इंस्पैक्टर ने पूछा.

‘‘क्योंकि मैं इन के अपहरण प्लान के बारे में पहले से ही जानता था,’’ सेठ शांतिलाल ने रहस्योद्घाटन किया, ‘‘इन लोगों की योजना के अनुसार जब रुधिर पहले दिन गैराज में छिपा, उस समय मैं बंगले की छत पर ही था और मैं ने उसे गैराज में जाते हुए देख लिया था. मैं ने सोचा, शायद कुछ सामान लेने के लिए गया है. परंतु जब वह लंबे समय तक बाहर नहीं आया तो मैं ने अपने ड्राइवर को उस की निगरानी के लिए रख दिया. मैं यह भी जानता था कि रुधिर ने मेरे फर्म के नाम पर कुछ सिमें निकलवाई हैं. मुझे यह भी पता था कि रुधिर फार्महाउस पर ही छिपा हुआ है. बच्चे हैं, गलतियां कर रहे हैं, आज नहीं तो कल इन लोगों की समझ में आ जाएगी. यही सोच कर मैं ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी. अगर मैं पुलिस में रिपोर्ट करूंगा तो इन का भविष्य बरबाद हो जाएगा. यही सब सोच कर मैं ने शिकायत नहीं की.’’

‘‘मतलब कल रात को रुधिर घर पर आ गया था?’’ इंस्पैक्टर ने प्रश्न किया.

‘‘जी नहीं, उसे तो पता ही नहीं कि उस का प्लान लीक हो गया था,’’ शांतिलाल ने उसी धारा प्रवाह में उत्तर दिया.

‘‘तो फिर रिवौल्वर आज सुबह बंगले से कैसे गायब हुई? उसे तो कल ही रुधिर के साथ गायब हो जाना चाहिए था,’’ अफसर ने कहा.

‘‘जी, जी वो शायद मैं ने कल ध्यान से कबर्ड देखा नहीं था. शायद वह कल ही अपने साथ ले आया हो,’’ शांतिलाल ने भरपूर आत्मविश्वास के बीच अपनी घबराहट छिपाते हुए कहा.

‘‘आश्चर्य है इतनी बड़ी गलती आप कैसे कर सकते हैं. ऐसी गलती करने पर सरकार आप का लाइसैंस रद्द तक कर सकती है,’’ इंस्पैक्टर ने चेताया.

‘‘मैं ने रिवौल्वर रख कर ही गलती कर दी, साहब. अगर यह रिवौल्वर नहीं होती तो रुधिर आत्महत्या नहीं करता,’’ शांतिलाल अफसोस जाहिर करते हुए बोले.

‘‘सरकार, माईबाप, यह आत्महत्या नहीं हत्या है और सेठजी ने ही रुधिर बाबा की…’’ एक अजनबी घटनास्थल पर प्रवेश करता हुआ बोला.

‘‘तुम कौन हो?’’ इंस्पैक्टर ने कड़क आवाज में पूछा.

‘‘सर, यही हैं यहां के चौकीदार रामू अंकल,’’ रक्ताभ ने बताया.

‘‘कैसे चौकीदार हो तुम? यहां पर इतनी बड़ी घटना हो गई और तुम्हारे पतेठिकाने ही नहीं हैं. जानते हो, इस घटना की सब से पहली सूचना तुम्हें ही पुलिस को देनी चाहिए थी,’’ इंस्पैक्टर रामू को डपटते हुए बोला. ‘‘तुम इतनी आसानी से कैसे कह सकते हो कि खून सेठ शांतिलाल ने ही किया है?’’

‘‘सरकार, मैं ठहरा अनपढ़गंवार. मुझे नहीं पता किसे सूचना देनी चाहिए,’’ रामू मिमियाता हुआ बोला, ‘‘पर आप एक बार मेरी बात ध्यान से सुन लीजिए.’’

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‘‘अच्छा, बताओ क्या जानते हो इस घटना के बारे में?’’ इंस्पैक्टर कुछ नरम पड़ कर बोला.

‘‘सरकार, कल सुबह रुधिर बाबा अचानक आ गए. आते ही उन्होंने मुझे चाय बनाने को कहा. मैं किचन में चाय बनाने चला गया. जब मैं वापस लौटा तो उन्होंने मुझे बताया कि वे सेठजी से नाराज हो कर यहां आ गए हैं. लेकिन मैं सेठजी को यह बात किसी कीमत पर न बताऊं कि वे यहां पर हैं. उन्होंने मुझे यह भी बताया कि बाहर से कोई फोन न आ सके, इसलिए उन्होंने फोन खराब कर दिया है. एकदो दिनों में जब सेठजी का गुस्सा शांत होगा तब वे घर वापस चले जाएंगे. शाम को सेठजी का ड्राइवर आया और बोला कि सुबह साढ़े 6 बजे तक आवश्यक सफाई के लिए बंगले पर बुलवाया है. मैं अकसर तीजत्योहार पर बंगले की सफाई करने जाता ही हूं.

‘‘शाम को खाने में रुधिर बाबा ने चिकन बनाने की फरमाइश रखी. इसी कारण खाना बनाने और सफाई करने में काफी देर हो गई. देर से सोने के कारण नींद भी सुबह देर से खुली. जागा, तब तक साढ़े 7 बज चुके थे. रुधिर बाबा अभी सो ही रहे थे. मैं ने सोचा दिशामैदान कर आता हूं, उस के बाद बाबा को चायनाश्ता करवा कर चला जाऊंगा.

‘‘मैं कुछ दूर झाडि़यों में बैठा ही था कि मैं ने देखा सेठजी खुद कार चला कर फार्महाउस आ गए हैं. मैं ने सोचा शायद मुझे लेने आए हैं. लगभग 5 मिनट के बाद मैं ने देखा कि सेठजी वापस जा रहे हैं. मुझे फार्महाउस में न पा कर शायद सेठजी ने सोचा होगा कि मैं सफाई के लिए पहले ही निकल चुका हूं. मैं जल्दी से फार्महाउस पहुंचा तो देखा कि रुधिर बाबा के सीने में गोली लगी है और हाथ में पिस्तौल है.

‘‘मुझे कुछ समझ में नहीं आया और मैं साइकिल उठा कर सेठजी के घर निकल पड़ा. मैं तकरीबन 11 बजे सेठजी के घर पहुंच गया. लेकिन तब तक सेठजी वहां से निकल पड़े थे. मेरे पूछने पर सेठानीजी ने बताया कि उन की पिस्तौल चोरी हो गई

है और वे इस की सूचना देने के लिए थाने गए हैं.

‘‘तब मैं ने सेठानीजी को फार्महाउस की पूरी घटना की जानकारी दे दी. रुधिर बाबा की मौत की खबर सुन कर वे बेहोश हो गईं. पानी के छींटे डालने और होश में आने पर काफी समझाने के बाद वे सामान्य हुईं. उन्होंने ही मुझे पुलिस को सूचित करने को बोला.

‘‘थाने पहुंचने पर पता चला कि आप लोग फार्महाउस पहुंच चुके हैं. साइकिल से लगभग 2 घंटे बाद यहां पहुंच सका हूं,’’ रामू ने अपने बयान में बताया.

‘‘क्यों शांतिलालजी, रामू ठीक कह रहा है?’’ इस के बयानों की तसदीक आप के ड्राइवर से करवाई जाए?’’ इंस्पैक्टर ने पूछा.

‘‘नहीं, रामू सही कह रहा है. मैं ने ही रुधिर की हत्या की है,’’ सेठ शांतिलाल ने अपने जुर्म का इकबाल किया.

वहां खड़े रक्ताभ, लालिमा और सिंदूरी को अपने कानों पर विश्वास नहीं हुआ कि जो उन्होंने चुना वह ठीक था या नहीं, वे चुपचाप हैरानी से सब देखते रहे.

‘‘तुम ने अपने बेटे का खून क्यों किया?’’ इंस्पैक्टर ने हैरत से पूछा.

‘‘क्योंकि रुधिर मेरा बेटा है ही नहीं,’’ शांतिलाल ने खुलासा किया.

‘‘आप का बेटा नहीं है रुधिर, तो फिर किस का बेटा है?’’ आप को कैसे पता चला रुधिर आप का अपना बेटा नहीं है?’’ इंस्पैक्टर ने पूछा.

‘‘पता नहीं रुधिर किस का बेटा है. सौभाग्यवती से शादी से पूर्व ही मैं जानता था कि मैं सौभाग्यवती को दुनिया का हर सुख दे सकता हूं सिवा मातृत्व सुख के. मैं ने सोचा था अगर सौभाग्यवती अनुरोध करेगी तो किसी वैज्ञानिक पद्धति से या अनाथालय से बच्चा गोद ले कर वह कमी पूरी कर लेंगे. किंतु सौभाग्यवती ने मुझे बताए बिना यह गलत कदम उठा लिया.

‘‘मैं  ने रुधिर को कभी भी अपना खून नहीं समझा, सिर्फ सौभाग्यवती की खुशी की खातिर उसे मैं अपने साथ रखे हुए था. मुझे उस पर कभी भी विश्वास नहीं था. इसी कारण मैं उसे सिर्फ जरूरत के अनुसार ही आवश्यक सुविधाएं दिया करता था. मेरी धारणा थी कि मेरी दौलत पाने के लिए रुधिर किसी भी स्तर पर गिर सकता है. खुद के अपहरण की इस साजिश ने मेरी इस धारणा को और पक्का कर दिया. इसी कारण अपनेआप को भविष्य में सुरक्षित रखने के दृष्टिकोण से मैं ने यह योजना बनाई. काश, मुझे पता चल पाता कि रुधिर का पिता कौन है,’’ सेठ शांतिलाल स्वीकारोक्ति करते हुए बोला.

‘‘मैं हूं उस का पिता,’’ नजरें झुका आगे आ कर रामू बोला. लगभग 20 साल पहले फार्महाउस पर आप की अनुपस्थिति में मैं सेठानीजी के आग्रह को ठुकरा न सका. वह पहला और आखिरी मिलाप था हमारा. आज जब सेठानीजी को फार्महाउस की घटना बतलाई तो उन्होंने यह राज की बात मुझे बताई. एक तरफ नमक का कर्ज था तो दूसरी तरफ पिता होने का फर्ज. आखिरकार पिता ने अपना आखिरी व एकमात्र कर्तव्य पूरा किया.’’

‘‘चलिए, सेठ शांतिलालजी, गुनाहगार का फैसला अदालत ही करेगी,’’ इंस्पैक्टर असली गुनाहगार को अपने साथ ले जाते हुए बोले.

रक्ताभ, लालिमा, सिंदूरी के होंठ जैसे किसी ने सी दिए हों. मन ही मन तीनों अपनी नादानी पर पछता रहे थे जिस की वजह से उन्होंने अपना प्यारा दोस्त हमेशा के लिए खो दिया था.

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इन घरेलू उपायों से दूर करें अनियमित पीरियड्स की समस्या

महिलाओं में असमय पीरियड्स की समस्या एक समान्य बात है. पीरियड्स में कभी कभी अनियमितता आम है पर जब ये परेशानी हमेशा होने लगे तो आपको सचेत हो जाना चाहिए. कई महिलाओं में पीरियड्स में 15 से 20 दिनों की देरी हो जाती है. अगर महिलाओं को इतने दिनों तक पीरियड्स ना आएं तो उन्हें कई तरह की समस्याएं होने लगती हैं. इसमें बदन दर्द,पीठ में दर्द,बालों का झड़ना, घबराहट प्रमुख परेशानियां हैं.

इस दौरान आपको बहुत परेशान होने की जरूरत नहीं है ये सब हार्मोन परिवर्तन होने की वजह से होता है. इस खबर में हम बताएंगे कि मासिक धर्म या पीरियड की होने वाली परेशानियों का घरेलू उपचार आप कैसे कर सकती हैं. इन नुस्खों से आपके पीरियड की समस्या दूर हो जाएगी.

कच्‍चा पपीता

पीरियड्स की परेशानी में कच्चा पपिता काफी कारगर होता है. इसमें ढेर सारा पोषण, एंटीऔक्‍सीडेंट और बीमारी को ठीक करने वाले गुण होते हैं. कच्‍चे पपीते का सेवन मासिक धर्म से जुड़ी हर समस्‍याएं ठीक हो सकती हैं.

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अदरक

पीरियड्स को नियमित करने के लिए अदरक बेहद लाभकारी है. इससे पीरियड्स में होने वाले दर्द में भी काफी आराम मिलता है. इसके लिए आप आधा चम्मच अदरक को पीस लें और 1 कप पानी में सात मिनट तक उबालें. अब इसमें थोड़ी शक्कर डालें और खाना खाने के बाद इसे दिन में 3 बार पिएं. ऐसा कम से कम 1 महीने तक करे.

जीरा

पीरियड्स से होने वाली परेशानियों में जीरा काफी कारगर होता है. इसके अलावा उस दौरान होने वाले दर्द में भी काफी राहत देता है. इससे आपको आयरन मिलता है जो महिलाओं में पीरियड्स के दौरान कम हो जाता है. एक चम्‍मच जीरे में साथ 1 चम्‍मच शहद का सेवन हर रोज करें.

बादाम

रात को 2 छुआरे और 4 बादाम को पानी में भिगो कर रख दें. सुबह इनके साथ थोड़ा सी मिश्री के साथ इन्हें पीस लें और मक्खन के साथ इसका सेवन करें. मासिक धर्म से जुडी समस्याएं दूर हो जाएंगी.

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