प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदर दास मोदी और उनकी मातृ संस्था राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के लिए 30 जुलाई 2019 का दिन नि:संदेह ऐतिहासिक रहा. जो काम कभी नहीं हुआ, वह भाजपा की नरेंद्र मोदी सरकार ने अंततः करके दिखा दिया है. तीन तलाक के नए कानून को लोकसभा के पश्चात राज्यसभा में भी पास कर दिया गया है.

मुस्लिम यह मानते हैं कि शरीयत उनके लिए खुदा का पैगाम है. और सैकड़ों सालों से मुस्लिम समाज शरीयत के मुताबिक अपना जीवन यापन करते चले आ रहे हैं . मुसलमान  दूसरा कोई कानून नहीं मानते. यही वजह है कि कुछ खूबियों, खामियों के साथ मुस्लिम जगत अपना आम परिवारिक, सामाजिक जीवन अपने प्राचीन विनियमों से संचालित करते रहे  हैं. भारत-पाक विभाजन के पश्चात आजाद हिंदुस्तान में मुस्लिमों को अपने कानूनों के साथ स्वच्छंद और शांति से जीने का माहौल भारत सरकार ने दिया . मगर अब गंगा जमुनी तहजीब का देश कहे जाने वाले भारत में नरेंद्र मोदी की सरकार है जो इतिहास बनाने में यकीन करती है और प्रधानमंत्री ने कहा भी तीन तलाक पास हो गया आज " ऐतिहासिक" दिन है. राज्यसभा में 84 मतों के मुकाबले 99 मतों से यह कानून पास हो गया.

तीन तलाक मोदी सरकार का एक बहुचर्चित और वृद विवादित मसला रहा है आज हम इस रिपोर्ट में कुछ नए तथ्यों पर प्रकाश डालने और मोदी सरकार से जवाब की अपेक्षा रखते हैं.

मुस्लिम थाट पर करारा प्रहार

भाजपा मूलतः हिंदुओं की पार्टी कहीं और मानी जाती है और है और है भी इसमें स्वयं भाजपा और उसके नेताओं को कोई गुरेज नहीं है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी 2014 में अपनी सरकार के शपथ के पश्चात आज तक अपने हिंदू समाज की कुरीतियों, खामियों, कमियों पर कौन सा कानून बनाया है ?

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