पूजा अपनी 6 साल की बेटी मीठी से बहुत परेशान रहती क्योंकि वह घर हो या बाहर ऐसी हरकतें कर देती जिससे पूजा को सब के सामने शर्मिंदा होना पड़ता. फिर उसके पास कहने को यही होता कि ये तो मेरा कहना ही नही मानती क्या करूं? क्या आपको भी अपने बच्चों की हरकतों के लिए शर्मिंदा होना पड़ता है? अगर ऐसा है तो इसमें गलती आपके बच्चे की नहीं बल्कि आपकी है. क्योंकि की एक पेरेंट्स के तौर पर उसे बचपन से ही हर काम में परफेक्ट बनाना आपका ही काम है. सभी पैरेंट्स चाहतें है कि उनका बच्चा और्गनाइज्ड रहे बड़ो का कहना माने उनकी इज्जत करें लेकिन इसे साकार कुछ ही पेरेंट्स कर पाते हैं. आज की बिजी लाइफ में  हर पेरेंट्स के लिए अपने बच्चे को अच्छे संस्कार देने के लिए बहुत कड़ी मेहनत करनी पड़ती है पर समय न होने के कारण ऐसा मुश्किल हो जाता हैं.

परवरिश का दायरा सीमित न हो- बच्चों की देखभाल करना बहुत मुश्किल है इसे किसी सीमित दायरे में नही बांधा जा सकता.  जहां पेरेंट्स के प्यार और समय की कमी उनमे उपेक्षा का अहसास भर देती है वहीं जरूरत से ज्यादा प्रोटेक्शन, प्यार उन्हें जिद्दी भी बना सकता है ऐसे में यह तय करना बहुत मुश्किल होता है कि बच्चों को कितने छूट दी जाए और कहां कड़ा रुख अपनाया जाए क्योंकि पेरेंट्स की थोड़ी सी चूक  बच्चे का रवैया बदल देती है. ऐसे में बच्चे को कैसे और्गेनाइज्ड बनाये ये बात रही है  साथी आल फौर पार्टनर शिप की साइकोलौजिस्ट प्रांजलि मल्होत्रा.

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