हद है भाई भतीजावाद की. बेचारे द्रोणाचार्य, धनुर्विद्या में पारंगत, उन्हें शकुनी, जिस की उन के आगे कोई औकात नहीं, के चलते अपने रूल बदलने पड़े. अब आप ही बताएं, आज के शिक्षातंत्र में शकुनी जैसे तथाकथित धुरंधर बैठे हैं. किस में दम है सुधार करने का...

द्रोणाचार्य ने अपने 105 शिष्यों की निशानेबाजी की परीक्षा ली थी जिस में उन को पंछी की आंख को निशाना बनाना था. केवल अर्जुन पास हुआ, बाकी फेल हो गए. महाभारतकार अर्थात व्यास ने आगे की कथा द्रोण के प्रति अपनी मैत्री के कारण नहीं बताई. हुआ यह कि कौरवों के फेल होने की खबर द्रोणाचार्य के किसी स्टाफ ने महाराज धृतराष्ट्र को दे दी. उन्होंने शकुनी साहब के साथ विचारविमर्श किया और द्रोणाचार्य को तलब किया. गुप्तकक्ष में मंत्रणा की गई.

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