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5 टिप्स: ऐसे पहचाने अपने परफेक्ट मैच को

लाइफ में परफेक्ट मैच को लेकर संशय हमेशा बना रहता है. हमारा परफेक्ट मैच कहां और कैसे मिलेगा और अगर मिल गया तो हम कैसे पहचानेंगे.हम अपने आसपास अपने जैसे लोगों को ढूंढने की कोशिश करते रहते हैं, जो हमारे जैसा महसूस करता हो या व्यवहार करता हो. ये तलाश रिलेशनशिप के लिए बहुत अहम बन जाती है.

एक परफेक्ट मैच हमे जिंदगी में बेहतर काम करने और खुश रहने का मौका देता है. लेकिन अक्सर हम किसी इंसान के हमारे परफेक्ट मैच बनने को लेकर दुविधा में रहते हैं. कुछ बातों का ध्यान रखते हुए आप अपने लिए एक परफेक्ट मैच का पता लगा सकते हैं. तो आइए जानते हैं.

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  1. जब भी आप किसी को परफेक्ट मैच समझने की कोशिश करते हैं तो इस बात का ध्यान जरुर रखें कि उस इंसान के लाइफ गोल्स(जिंदगी के लक्ष्य) क्या हैं. आप उन लक्ष्यों को पूरा करने में उसका साथ दे सकते हैं या नहीं. यदि उसके लाइफ गोल्स आपकी पसंद के उलट हैं, तो वह इंसान आपका परफेक्ट मैच नहीं बन सकता. कभी ना कभी लाइफ गोल्स को लेकर आपके बीच मतभेद आ सकते हैं.

2. अगर आप सामने वाले व्यक्ति और खुद में बहुत सी समानताएं देखते हैं. तो ऐसा व्यक्ति आपका परफेक्ट मैच बन सकता है. आपके बीच मिलने वाली समानताएं आपके रिश्ते को मजबूती से आगे बढ़ने में काफी मदद करेंगी.

3. इस बात का खासतौर से ध्यान रखें कि रिश्ते के भविष्य को लेकर आपका साथी गोलमोल बातें या इस विषय को टालने की कोशिश तो नहीं करता. अगर यह बात आप सामने वाले व्यक्ति में पाते हैं तो यह सतर्क होने का समय है.

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4. किसी इंसान के परफेक्ट मैच बनने में आपके परिवार और दोस्तों की पसंद भी बहुत मायने रखती है. यदि आपके साथी को आपके परिवार वाले और दोस्त भी आपके साथ पसंद करते हैं, तो मान लीजिए यह आपका परफेक्ट मैच बनने की पूरी काबिलियत रखता है.

5. अगर आपका साथी बार-बार आपसे अपने चले जाने के बाद की स्थिति को सोचने पर मजबूर करता है, तो भी वह आपका परफेक्ट मैच नहीं हो सकता. ऐसे वह आपको अकेले जिंदगी बिताने के लिए तैयार रहने को कहता है. अक्सर यह बात उसका आपकी जिंदगी से बहुत जल्द चले जाने की ओर इशारा करती है.

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फिल्म ‘‘खाली पीली’’ में ईशान खट्टर के साथ अन्नया पांडे करेंगी रोमांस

‘‘बियांड द क्लाउड्स’’ और ‘‘धड़क’’ फेम अभिनेता इशान खट्टर तथा ‘‘स्टूडेंट आफ द ईअर 2’’ फेम अभिनेत्री अनन्या पांडे को लेकर जब ‘‘सुल्तान’’, ‘‘टाइगर जिंदा है’’ और ‘‘भारत’’ जैसी सफलतम फिल्मों के निर्देशक अली अब्बास जफर ने जब से रोमांटिक फिल्म ‘‘खाली पीली’’ की घोषणा की थी, तभी से लोगों में उत्सुकता थी कि आखिर अनन्या व इशान की जोड़ी कैसी लगेगी. लोगों की इसी उत्सुकता को खत्म करने के लिए निर्माता अली अब्बास जफर ने अब अपनी फिल्म ‘‘खाली पीली’’ का फस्ट लुक जारी कर दिया. जबकि इस फिल्म की शूटिंग 11 सितंबर से शुरू होगी. ज्ञातब्य है कि अली अब्बास जफर स्वयं इस फिल्म का निर्देशन नहीं कर रहे हैं, वह जी स्टूडियो के साथ मिलकर सिर्फ इसका निर्माण कर रहे हैं. फिल्म का निर्देशन मकबूल खान कर रहे हैं. यह फिल्म 12 जून 2020 को प्रदर्शित होगी. फिल्म के संगीतकार विशाल शेखर हैं.

मुंबई की पृष्ठभूमि की कहानी वाली फिल्म ‘‘खाली पीली’’ युवा वर्ग के लिए रोलर कोस्टर की सवारी है. फिल्म की कहानी एक रात में शुरू होती है, जब एक लड़का, एक लड़की से मिलता है. उसके बाद इनके बीच जो कुछ होता है, उसे देखते हुए लोग अपनी हंसी नहीं रोक पाएंगे.

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फिल्म ‘‘खाली पीली’’ की चर्चा करते हुए अली अब्बास जफर कहते हैं- ‘‘मकबूल, हिमांशु और मैंने लगभग एक साल तक इस फिल्म की पटकथा पर काम किया है. हमें इस कहानी के लिए युवा मगर प्रतिभाशाली कलाकार चाहिए थे, इसलिए हमने ईशान खट्टर व अनन्या पांडे को जोड़ा. हमें खुशी है कि हमें ‘जी स्टूडियो’ का साथ मिला. ‘जी स्टूडियो’ के साथ हम बहुत जल्द एक बड़ी फिल्म भी शुरू करने वाले हैं.’’

‘‘जी स्टूडियो’’के शारिक पटेल इस फिल्म को लेकर कहते हैं-‘‘यह एक रोमांचक पटकथा वाली फिल्म है.’’

फिल्म ‘‘खाली पीली’’ का जो फस्ट लुक सामने आया है, उसमें अनन्या पांडे और इशान खट्टर की जोड़ी काफी हौट लग रही है. इसमें ईशान के एब्स देखकर लगता है कि ईशान ने अपनी बौडी पर काफी काम किया है.

‘‘स्टूडेंट आफ द ईअर 2’’ से अभिनय करियर शुरू करने वाली अनन्या पांडे की यह तीसरी फिल्म होगी. उनकी दूसरी फिल्म कार्तिक आर्यन के साथ ‘‘पति पत्नी और वह’’ है, जिसकी शूटिंग लगभग पूरी हो चुकी है. वहीं ईशान खट्टर की भी यह तीसरी फिल्म है.

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“बिग बौस 13”: मनचाही फीस न मिलने पर मेकर्स से नाराज हुई गोपी बहू

कलर्स टीवी पर प्रसारित होने वाला शो “बिग बौस 12” शुरू होने में काफी कम समय बचा है. पर अब तक मेकर्स पूरे कंटेस्टेंट्स को बिग बौस का हिस्सा बनाने में नाकामयाब रहे हैं. इसकी वजह बिग बौस में दी जाने वाली फीस है, जो कि इस बार मेकर्स के लिए मुसीबत बनते जा रही है.

हाल ही में खबर आई थीं कि जरीन खान,  राजपाल यादव, चंकी पांडे और माहिका शर्मा ने कम फीस के कारण “बिग बौस 13” में हिस्सा लेने से मना कर दिया हैं. इस बीच खबर आ रही है कि, एक और टीवी एक्ट्रेस देवोलीना भट्टाचार्जी जिनको आप गोपी बहू के नाम से जानते हैं. उनकी भी फीस की डिमांड पूरी नहीं हो पाई, जिसकी वजह से उन्होंने भी इस शो में हिस्सा लेने से मना कर दिया.

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खबरों के अनुसार देवोलीना एक हफ्ते के 80 हजार रुपए फीस के तौर पर मांग रही थी. वही शो के मेकर्स इतने पैसे देने को तैयार नहीं थे. मेकर्स हर हफ्ते  उन्हें केवल 30 हजार रुपए दे रहे थे. जिसके बाद मेकर्स की बात सुनकर देवोलीना भट्टाचार्जी नाजार हो गई और उन्होंने बिग बौस में हिस्सा लेने से मना कर दिया.

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भाजपा भय और नफरत फैलाकर देश को चलाना चाहती है: अखिलेश यादव

धीरे धीरे ही सही पर भारतीय जनता पार्टी की केन्द्र सरकार की तानाशाही के खिलाफ अब नेताओं में विरोध के स्वर उभरने लगे है. विरोधी नेताओं की मुश्किल यह है कि इनको मीडिया या दूसरे प्रचारतंत्र से सहयोग नहीं मिलता. विरोधी नेताओं के भाजपा पर आरोप से अधिक जगह भाजपा नेताओं की सफाई और आरोप प्रत्यारोप को दे दिया जाता है. विरोधी दलों के पास अपना खुद का भी मजबूत संगठन नहीं है जिसके जरीये यह अपनी बात को जनता तक पहुंचा सके.

सोशल मीडिया पर अभी भी विरोधी नेताओं को उनके बयानों को लेकर तोड़ मरोड़ कर ‘ट्रोल’ करने वाली हालत बनी हुई है. उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भाजपा के खिलाफ आवाज उठाई हैं. परेशानी की बात यह है कि अखिलेश यादव को लगता है कि जब प्रदेशवासी भाजपा से नाराज होकर वोट करेगे तो सपा की वैसे ही सरकार बन जायेगी. ऐसे में वह अपने संगठन पर ध्यान नहीं दे रहे. इस बात को लेकर बसपा नेता मायावती भी अखिलेश को सीख दे चुकी हैं.

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अखिलेश यादव ने लोकसभा चुनाव के बाद कहा कि भाजपा के लोग ईडी, सीबीआई और आयकर विभाग की मदद से भय का महौल बनाकर लोकतंत्र चलाना चाहते है. देश की संस्थाओं को नियंत्रित करना कोई भाजपा से सीख सकता है. भाजपा भय और नफरत फैलाकर देश को चलाना चाहती है. चुनाव को जीतने के लिये आपस में नफरत पैदा की. केन्द्र और प्रदेश सरकार दोनो ही भ्रष्टाचार, विकास, कानून व्यवस्था के मसले पर पूरी तरह से फेल हो चुकी है. अपराध की हालत इतनी बिगड गई है कि उत्तर प्रदेश हत्या प्रदेश बन गया है. बुलंन्दशहर हिंसा में इंसपेक्टर की जान लेने वालो की जमानत होने पर स्वागत और सम्मान किया जाता है. एटा में पति को मुठभेड में मारने का डर दिखाकर  महिला से बलात्कार किया गया.

उत्तर प्रदेश के किसानों की हालत पर चर्चा करते अखिलेश यादव ने कहा कि ‘देश और प्रदेश दोनो नाजुक दौर से गुजर रहा है. किसानों की हालत खराब है. महंगाई बढ़ने और खेती में नुकसान होने से किसान जान देने को मजबूर है. उत्तर प्रदेश इंवेस्टरर्स समिट में रोजगार के 70 लाख अवसर देने की बात हुई थी लेकिन सच्चाई यह है कि कोई निवेश करने नहीं आया. जब देश में ही निवेष नहीं हो रहा तो प्रदेश में निवेश कैसे होगा ? अर्थव्यवस्था चरमराने से रोजगार का संकट पैदा हो गया है. देश की मुद्रा की हालत यह है कि बंगलादेश की मुद्रा भारत की मुद्रा से मजबूत हो गई है. बिगड़ते हालत बता रहे है कि मेक इन इंडिया फ्लौप शो हो गया है.

अखिलेश यादव अपने पार्टी संगठन को नये सिरे से मजबूत करने की योजना में है. प्रदेश में होने वाले उपचुनाव के बाद वह नये तेवर में दिखेगे. जानकार लोग यह भी मानते है कि अखिलेश अभी भी भाजपा की सीधी और तीखी आलोचना से बचना चाहते हैं. केवल अखिलेश यादव ही नहीं देश के दूसरे विरोधी नेता चिदंबरम कांड के बाद सकते में हैं. ऐसे में वह विरोध करते हुये भी अपने स्वर को बेहद संतुलित रखना चाहते हैं. अखिलेश यादव के भय और नफरत की बात में भी चिदंबरम कांड की टीस दिखती है.

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‘कसौटी जिंदगी के 2’: आएगा ये महाट्विस्ट, मिस्टर बजाज और प्रेरणा के बीच बढ़ेंगी नजदीकियां

छोटे पर्दे का  सुपरहिट शो “कसौटी जिंदगी के 2” में इन दिनों काफी ड्रामा चल रहा है. आए दिन इस शो में आपको ट्विस्ट देेखने को मिलता है. इस दिनों शो में इन दिनों आप देख रहे होंगे कि मिस्टर बजाज पर हमले के इल्जाम में प्रेरणा की मां वीना शर्मा को  जेल में बंद कर दिया है. तो वहीं, अनुराग और प्रेरणा दोनों ही वीना शर्मा को जेल से बाहर निकालने की कोशिश कर रहे हैं.

लेकिन वहीं मिस्टर बजाज की मौसी शारदा चाहती है कि मिस्टर बजाज और प्रेरणा एक-दूसरे से दूर रहे. और शारदा उनके बीच दूरियां बढ़ाने की कोशिश कर रही हैं.  पर अपकमिंग  एपिसोड में जल्दी ही सारी गलतफहमियां दूर होती नजर आएंगी. इसके अलावा जल्दी ही मिस्टर बजाज और प्रेरणा करीब आएंगे. दरअसल, अपकमिंग एपिसोड में ये दिखाया जाएगा कि  मिस्टर बजाज को होश आ जाएगा और वो इसी के साथ वो वीना शर्मा के खिलाफ दायर किए हुए मुकदमे को वापस ले लेंगे.

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इतना ही नहीं, मिस्टर बजाज को  ये भी पता चलेगा  कि इन सारी घटनाओं के पीछे उनकी मौसी शारदा का हाथ है.  इसके बाद वो शारदा से भी अच्छी औरत के भेस में उन्हें नुकसान पहुंचाने के लिए बदला भी लेंगे. इन सारी घटनाओं के बीच  प्रेरणा  भी मिस्टर बजाज को  चाहने लगेगी.

तो वहीं, मिस्टर बजाज के करीब जाती प्रेरणा को देख अनुराग गुस्से से आग बबूला  हो जाएगा. प्रेरणा अपनी मां वीना शर्मा के जेल से बाहर आने के लिए मिस्टर बजाज को  धन्यवाद कहेगी. तो जल्द ही आपको इस शो में ये महाट्विस्ट देखने को मिलेगा.

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ऐसे बनाएं क्रिस्पी भुट्टे के पकौड़े

भुट्टे के पकौड़े काफी करारे और स्वादिष्ट होते हैं. भुट्टे को कद्दूकस कर के पकौड़े बनाएं जाते है. जब भी आपको कुछ अलग खाने का मन हो तो आप शाम के नाश्ते में भुट्टे के पकौड़े बना सकती हैं. तो आपको झटपट बताते हैं भुट्टे के पकौड़े की बनाने की विधि.

सामग्री

कौर्न फ्लोर (2-3 टेबल स्पून)

हरा धनिया (2-3 टेबल स्पून बारीक कटा हुआ)

अदरक  (1 चम्मच पेस्ट)

हरी मिर्च (2 बारीक कटी हुई)

धनिया पाउडर ( 1छोटी चम्मच)

नरम भुट्टे (4)

लाल मिर्च पाउडर (1 छोटी चम्मच)

नमक (स्वादानुसार)

तेल (तलने के लिए)

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बनाने की विधि

सबसे पहले भुट्टों को कद्दूकस कर लें और कद्दूकस करके पल्प निकाल लीजिए.

पल्प को प्याले में निकाल लें, इसमें कौर्न फ्लोर डालकर मिक्स कर दीजिए.

फिर, इसमें धनिया पाउडर, अदरक का पेस्ट, बारीक कटी हुई हरी मिर्च, लाल मिर्च, नमक और थोड़ा सा बारीक कटा हुआ हरा धनिया डाल दें.

सभी सामग्रियों को अच्छे से मिला लें.

कढा़ई में तेल डालकर गरम कीजिए और जब तेल गरम हो जाय तो उसमें से थोडा़-थोडा़ मिश्रण चम्मच से लेकर डाल दें.

जितने पकौड़े एक बार में कढा़ई में आ जाएं उतने पकौड़े डाल कर तल लीजिए.

पकौड़ों को पलट-पलट कर गोल्डन ब्राउन होने तक तल लें.

गोल्डन ब्राउन होने के बाद पकौड़ों को किसी प्लेट में बिछे नेपकिन पेपर पर निकाल लें, इसी तरह से बाकी पकौड़े भी तल लें.

इन पकौड़ों को आप हरे धनिये की चटनी के साथ परोसें.

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ऐसे चुनें अपनी स्किन के लिए स्क्रबर

हममें से ज्यादातर लोग अपनी त्वचा पर स्‍क्रब का इस्तेमाल करते हैं ताकि डेड स्‍किन निकल जाए और त्‍वचा साफ-सुथरी लगे. एक्‍सपर्ट्स का मानना है कि त्‍वचा को स्‍क्रब करना दोनों ही पुरुष और महिला के लिये अच्‍छा होता है. यदि आपको समझ में नहीं आ रहा है कि आपकी त्‍वचा के लिये कौन सा स्‍क्रब अच्‍छा रहेगा, तो नीचे दिये हुए लेख को जरुर पढें. इसको पढ़ने से आपको आपके सवाल का जवाब जरूर मिल जाएगा.

रूखी त्‍वचा

रूखी त्‍वचा को स्‍क्रब करने पर विशेष ध्‍यान देने की आवश्‍यकता होती है. यह भी संवेदनशील त्‍वचा की ही तरह काफी नाजुक होती है. आप इस त्‍वचा के लिये ओटमील का प्रयोग कर सकती हैं. ओटमील में यदि थोड़ा सा दूध मिला लिया जाए तो स्‍क्रब करने के बाद आपकी त्‍वचा छिलेगी नहीं और मुलायम भी हो जाएगी.

औइली स्‍किन

अगर आपकी स्‍किन औइली है तो आपको स्‍क्रब करने के लिये बेकिंग सोडा की आवश्‍यकता पड़ेगी. यह ऐसी सामग्री है जो शरीर से अत्‍यधिक तेल को बाहर निकाल कर त्‍वचा में ग्‍लो लाती है.

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संवेदनशील त्‍वचा

अगर आपकी त्‍वचा संवेदनशील है तो स्‍क्रब करने का काम थोड़ा ट्रिकी बन जाता है. स्‍क्रब करने के लिये उंगलियों की बजाए अपनी हथेलियों का प्रयोग करें. स्‍क्रब के लिये अच्‍छी सामग्री में नमक का प्रयोग करें.

साधारण त्‍वचा

साधारण त्‍वचा के लिये हर प्रकार का स्‍क्रब सही होता है, चाहे वह शुगर स्‍क्रब हो या फिर सौल्‍ट स्‍क्रब. इसके अलावा आप बादाम को कूंट कर भी उसका स्‍क्रब तैयार कर सकती हैं. यह बहुत ही लाभकारी होता है.

मिली जुली त्‍वचा

अगर आपकी त्‍वचा का कुछ हिस्‍सा औइली है और कुछ ड्राई है, तो आपके लिये शुगर स्‍क्रब बेस्‍ट रहेगा.

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खांसी को ना करें अनदेखा, हो सकती है ये गंभीर बीमारी

कैंसर आज भी एक गंभीर और जानलेवा बीमारी है. ज्यादातर मामलों में सही समय पर इसका पता नहीं चलता जिसके कारण सही समय पर इलाज ना मिलने के कारण यह कई लोगों को मौत का कारण बनती है. हालांकि कई बार इसके शुरुआती लक्षण से इसका पता नहीं लगता जिसके कारण इसका इलाज और मुश्किल होता है. पर हालिया स्टडी की रिपोर्ट में कैंसर की पहचान करने वाले लक्षण के बारे में बताया गया है, जिसकी मदद से आप समय रहते कैंसर की पहचान कर इलाज कर पाएंगे.

स्टडी की रिपोर्ट में ये बात सामने आई है कि हमेशा गले में खराश रहना या लगातार गले में परेशानी का रहना कैंसर का लक्षण है. रिपोर्ट के मुताबिक गले में में खराश के साथ कान का दर्द होना  और कुछ खाने यै सांस लेने में परेशानी होना लैरिंक्स कैंसर का लक्षण हो सकता है.

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इस रिपोर्ट के माध्यम कैंसर के शुरुआती समय में इलाज में काफी मदद मिलेगी. स्टडी में शामिल जानकारों की माने तो लैरिंक्स कैंसर के लक्षणों के बारे में जानकारी दी गई है.

शोधकर्ताओं की माने तो इस स्टडी के माध्यम से ये पता चला है कि गले का बैठना लैरिक्स कैंसर का एक अहम लक्षण है. इसके अलावा बार बार गले में खराश रहने से कैंसर का खतरा काफी अधिक हो जाता है.

इस स्टडी में लगभग 800 से ज्यादा लैरिंक्स कैंसर से पीड़ित मरीजों को शामिल किया गया है. स्टडी की रिपोर्ट में सामने आया कि 5 फीसदी से ज्यादा लोगों को कैंसर लगातार गले में खराश रहने के कारण हुआ.

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सावधान: जानलेवा बन रहा है मोबाइल

विशाल अपनी मोटरसाइकिल से फोरलेन हाईवे से गुजर रहा था. उस के मोबाइल की घंटी बजने पर वह फोन पर बात करने में लग गया. उस का पूरा ध्यान बात करने में था, कि अचानक एक चौराहे पर सामने से आ रहे ट्रक से उस की भिड़ंत हो गई. मोटरसाइकिल तो चकनाचूर हुई ही, मौके पर उस की मौत भी हो गई. टक्कर जबरदस्त थी, मोबाइल हाथ से छूट कर दूर जा गिरा था. रोहित अपनी कार से जा रहा था कि उस का मोबाइल बजा. यह देखने के लिए कि किस का है, उस ने अपना ध्यान सामने से हटाया. ध्यान हटते ही उस की कार डिवाइडर पर चढ़ती हुई दूसरी ओर चली गई. उधर से तेज गति से एक ट्रक आ रहा था जिस की चपेट में वह आ गई. रोहित के साथ उस की बीवी, बच्चे भी थे. चारों की दुर्घटनास्थल पर ही मौत हो गई.

अहमदाबाद से एक टूरिस्ट बस अपने गंतव्य के लिए निकली ही थी कि ड्राइवर का मोबाइल बज उठा. बात रात 11 बजे की है. मोबाइल पर वह सामने वाले से झगड़ रहा था. ऐसे में उस का ध्यान भटक गया और बस 40 फुट गहरी खाई में गिर गई. बस में सवार 40 लोगों में से केवल 3 ही बचे. जो बचे, उन्होंने पुलिस को सूचना दी. जरा सोचिए, जब बस का ड्राइवर मोबाइल पर किसी से बात करता है तो अपनेआप को कितने असुरक्षित मानते होंगे. कुछ जागरूक यात्री ड्राइवर को इस के लिए मना भी करते हैं, लेकिन वह मानता नहीं. नतीजा दुर्घटना के रूप में सामने आता है. एक ही लापरवाही या गलती का परिणाम सभी निर्दोष यात्रियों को भुगतना पड़ता है.

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कई प्रकरणों में यह भी देखने को आया है कि मोबाइल पर बात करने में ड्राइवर इस कदर खो गए कि अपने आगे चल रहे ट्रक में पीछे से घुस गए. उन की गाड़ी ट्रक के पिछले हिस्से में इस बुरी तरह फंस गई कि वे काफी दूर तक घसीटते रहे. टूव्हीलर या फोरव्हीलर वाहन चलाते समय मोबाइल पर बात करना एक फैशन बन गया है. यह प्रवृत्ति युवक तथा युवतियों दोनों में है. इस वजह से आएदिन उन की दुर्घटनाओं के समाचार पढ़ने को मिलते हैं. यद्यपि वे जानते हैं कि वाहन चलाते समय मोबाइल का इस्तेमाल घातक व जानलेवा हो सकता है, फिर भी वे अपनी जान को आफत में डालते हैं.

सेवलाइफ फाउंडेशन ने टीएनएस इंडिया सर्वे किया था जिस में देश से ड्राइविंग की बाधाओं में मोबाइल को सब से खतरनाक पाया गया. सर्वे में 1,749 लोगों की राय जानी गई. 47 प्रतिशत लोग ड्राइविंग के दौरान रिसीव करते हैं कौल. 34 प्रतिशत लोग मानते हैं कि ड्राइविंग करते समय फोन पर बात करना खतरनाक है. 96 प्रतिशत लोग असुरक्षित मानते हैं, जब ड्राइवर फोन पर बात करता है. 60 प्रतिशत लोग कौल का जवाब देने से संबंधित फोन पर बात करते हैं ड्राइविंग के दौरान. 68 प्रतिशत लोग चाहते हैं कि ड्राइविंग के दौरान मोबाइल यूज करने पर सख्त कानून बनाया जाए. यद्यपि मोटर व्हीकल एक्ट के अंतर्गत वाहन चलाते समय मोबाइल का इस्तेमाल करना कानूनन अपराध है लेकिन, इस के लिए सजा के बजाय अर्थदंड दिया जाता है, इसलिए यह अधिक प्रभावी नहीं हुआ.

मोबाइल आप की सुविधा के लिए है. उस का इस्तेमाल सावधानी से करना चाहिए ताकि आप सुरक्षित रहें और आप की वजह से दूसरों की जान भी जोखिम में न पड़े.

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बच्चों को किसी भी चीज का लालच देना हो सकता है खतरनाक

कभी छुपम- छुपाई तो कभी पकड़म- पकड़ाई यही हुआ करता था बचपन. बच्चे  खेल- खेल में ही अपना शारारिक व्यायाम भी कर लिया करते थे. अब के मुकाबले पहले के बच्चे कम बीमार हुआ करते थे. लेकिन जमाना बदल गया है और सदी भी बदल गयी है. और बच्चो के खेलने  का अंदाज भी बदल गया है. अब बच्चों के खेल भी आधुनिक दुनिया की भेट चढ़ गये हैं. मोबाइल और टीवी ही बच्चों की दुनिया बन कर रह गये हैं.

रंग बिरंगे चित्र, वीडियो, गेम्स इसी तरह की विशाल श्रृंखला ने बच्चों को अपनी उम्र से बड़ा कर दिया हैं और इसी को अपना मनोरंजक खेल बना लिया हैं. जब  कोई छोटा बच्चा मोबाइल में गेम या यूट्यूब खोल कर  देखने लगता हैं तो आप (माता पिता )सोचते  हैं, बच्चा बहुत ही टेक्निकल गुरु हैं लेकिन यह आंकलन सरासर गलत हैं बच्चे  की गुणवता  मोबाइल ,रिमोट से नहीं आंकनी चाहिये.

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ऐसे में क्या करें

पहले खुद को रोकें

बच्चे वहीं सीखते हैं जो अपने आस पास देखते हैं .सब से पहले आप (माता पिता) खुद को रोकें. अगर हम बच्चों के सामने ज्यादा मोबाइल का प्रयोग करते हैं तो बच्चो को भी उसका देखने का मन करता है और हमारे मना करने पर बच्चों में हमारे प्रति नकारत्मक सोच पैदा होने लगती है, जिस काम के लिये बच्चों को ज्यादा मना किया जाता है. बच्चों की लालसा उसके लिये बढ़ती जाती है. हमें अपने बच्चो के लिये आदर्श बनना चाहिये.

बच्चों को पार्क लेकर जाएं

बच्चों को शाम के वक्त पार्क लेकर जाएं.जिससे बच्चे का मन खेल में लगे और वहां उसके नये दोस्त बने पार्क की हरियाली देख बच्चा प्रकृति से जुड़ता हैं. नई नई चीजें सीखता है.

दादा दादी से जोड़ें

जिस तरह बचपन होता हैं उसी तरह बुढ़ापा जब इन दोनों का मिलन होता हैं तो खूब मस्ती होती है. बच्चे उनके साथ मे पुरानी संस्कृति के बारे मे जान पाते हैं. उनसे कहानियां सुनते हैं .इस तरह उनका भी मन लगा रहता है.

बच्चों को व्यस्त रखें

बच्चों को नई नई चीज़ो से जोड़े और उस काम में  आप अपनी भी रूचि दिखाए. उन्हें  पेंटिंग, स्केटिंग सिंगिंग, डांसिंग के लिये प्रोत्साहित करें. जिस काम मे बच्चे की रूचि हो उसकी उस कला को निखारे.

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क्या न करें

बच्चों को किसी भी बात का लालच न दें. जैसे पढ़ाई कर लो फिर तुम्हे मोबाइल  देखने को मिलेगा ,ऐसा लालच देने से बच्चे का ध्यान उसी चीज में पड़ा रहेगा और उसको ऐसे ही लालच की आदत पड़ जाएगी .
अगर आप किसी काम मे व्यस्त हैं तो उसे खेलने के लिये फोन न दे बल्कि उसी के खिलौनों मे व्यस्त रखें.

अगर आप बच्चे  को हिस्ट्री या जियोग्रफी चौनल दिखाना चाहते हैं तो उसके साथ बैठ कर उसमे अपनी भी रूचि दिखाए न की वहां से उठ कर चले जाए.

फोन के लिये बच्चे को मारे नहीं बल्कि उसे उसके नुकसान बताएं, पिटाई करने से बच्चे में आपके प्रति गलत सोच पैदा होती हैं.

बीमारियों के हो रहे शिकार

बच्चे  डिप्रेशन, अनिद्रा, चिड़चिड़ापन जैसी मानसिक समस्याओं से ग्रसित हो रहे हैं.इस के आलावा शारीरक बीमारिया जैसे सर दर्द, भूख ना लगना, आंखों की रौशनी कम हो जाना ,आंखों में दर्द रहना,और गर्दन मे दर्द होना.

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