कभी छुपम- छुपाई तो कभी पकड़म- पकड़ाई यही हुआ करता था बचपन. बच्चे  खेल- खेल में ही अपना शारारिक व्यायाम भी कर लिया करते थे. अब के मुकाबले पहले के बच्चे कम बीमार हुआ करते थे. लेकिन जमाना बदल गया है और सदी भी बदल गयी है. और बच्चो के खेलने  का अंदाज भी बदल गया है. अब बच्चों के खेल भी आधुनिक दुनिया की भेट चढ़ गये हैं. मोबाइल और टीवी ही बच्चों की दुनिया बन कर रह गये हैं.

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