तमाम न्यूज चैनल ने पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली के अंतिम संस्कार का सीधा प्रसारण जिस तरह श्मशान घाट से दिखाया वह संवेदनहीनता और फूहड़ता की हद थी. ऐसा लग रहा था मानो टीआरपी बढ़ाने के इस नए टोटके ने चैनल से सोचने समझने की बुद्धि और क्षमता छीन ली है. उन्हें खुद नहीं मालूम था कि वे ऐसा करके क्या मैसेज दर्शकों को देना चाह रहे हैं. हां इतना जरूर समझ आया हर किसी की प्रतिस्पर्धा में आगे निकलने की होड़ ने अरुण जेटली की जितनी किरकिरी उनके निधन के बाद करवाई उतनी उनके जिंदा रहते शायद ही कभी हुई हो.

Tags:
COMMENT