धीरे धीरे ही सही पर भारतीय जनता पार्टी की केन्द्र सरकार की तानाशाही के खिलाफ अब नेताओं में विरोध के स्वर उभरने लगे है. विरोधी नेताओं की मुश्किल यह है कि इनको मीडिया या दूसरे प्रचारतंत्र से सहयोग नहीं मिलता. विरोधी नेताओं के भाजपा पर आरोप से अधिक जगह भाजपा नेताओं की सफाई और आरोप प्रत्यारोप को दे दिया जाता है. विरोधी दलों के पास अपना खुद का भी मजबूत संगठन नहीं है जिसके जरीये यह अपनी बात को जनता तक पहुंचा सके.

Tags:
COMMENT