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बिग बौस कंटेस्टेंट जसलीन मथारू इस शो में करेंगी एक्टिंग

टीवी का चर्चित शो बिग बौस 12 में जसलीन मथारू कंटेस्टेंट रह चुकी हैं. इस शो में आम कंटेस्टेंट्स भी हिस्सा ले चुके हैं. इस शो में जसलीन मथारू काफी चर्चित थीं. आपको बता दें, जसलीन मथारू  कलर्स  चैनल के शो ‘विश’ से अपने एक्टिंग की शुरुआत करने जा रही हैं. इस शो में देबिना बनर्जी, विशाल वशिष्ठ और सना मकबूल प्रमुख भूमिकाओं में हैं.

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार  जसलीन मथारू ‘विश’ में एक ‘जलपरी’ की भूमिका निभाएंगी. ‘विश’ के साथ अपने फिक्शन टीवी डेब्यू की पुष्टि करते हुए, जसलीन मथारू ने मीडिया से कहा है कि, “हां, मैं शो कर रही हूं और जल्द ही इसकी शूटिंग शुरू करूंगी. हालांकि, मैं अभी तक अपने किरदार के बारे में नहीं जानती हूं. मैं केवल इतना कह सकती हूं कि यह है बहुत खास और दिलचस्प किरदार है.”

जसलीन मथारू ‘बिग बौस 12’ में भाग लेने के बाद लोगों के बीच काफी मशहूर हुईं. वह ‘बिग बौस’ के घर में रहने के दौरान लगातार लाइमलाइट में थीं क्योंकि उन्होंने दावा किया था कि वह अपने पार्टनर अनूप जलोटा को डेट कर रही हैं.

अन्य ‘बिग बौस 12’ के कंटेस्टेंट्स के बारे में बात करें तो रोमिल चौधरी ने स्टार प्लस के साथ ‘कहां हम कहां तुम’  से अपनी एक्टिंग करियर की शुरुआत की. रोश्मी बनिक ज़ी 5 की वेब-सीरीज ‘इश्क आज कल’ का हिस्सा हैं. जबकि, ‘खान’ बहनों में सबा और सोमी के हाथ में एक्टिंग के प्रोजेक्ट्स हैं.

सुहाना खान की ये फोटो हुई वायरल, यूजर्स ने किया ट्रोल

बौलीवुड की फेमस स्टार किड सुहाना खान सोशल मीडिया पर काफी मशहूर हैं. आए दिन सुहाना के डेब्यू की खबरें चर्चा में रहती हैं. इसी बीच सुहाना की एक और नई फोटो इंस्टाग्राम पर वायरल हो रही है. सुहाना इस फोटो में अपने बाल संवारती नजर आ रही हैं.

इंस्टाग्राम के एक फैनपेज पर इस फोटो को शेयर किया गया है. बता दें कि सुहाना ने हाल ही में लंदन के आर्डिगली कौलेज से अपने ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की और अब वह अंग्रेजी शौर्ट फिल्म ‘द ग्रे पार्ट औफ ब्लू’ से एक्टिंग में डेब्यू करने के लिए बिल्कुल तैयार हैं.

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बता दें कि सुहाना अंग्रेजी शौर्ट फिल्म ‘द ग्रे पार्ट औफ ब्लू’ में  एक्टिंग करती नजर आएंगी. इस फिल्म के निर्देशक सुहाना के सहपाठी थियो जिमेनो हैं. जिमेनो ने फिल्म के पोस्टर को इंस्टाग्राम पर साझा किया है जिसमें सुहाना नजर आ रही हैं. फिल्म में सुहाना के अलावा रौबिन गोनेला भी हैं. इससे पहले सुहाना रंगमंच के एक नाटक में मुख्य भूमिका में अपने अभिनय का प्रदर्शन कर चुकी हैं और अब सभी को उनके इस औन स्क्रिन डेब्यू का इंतजार है.

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साध्वी प्रज्ञा की नजर में तंत्र मंत्र से हो रहीं भाजपा नेताओं की मौतें

इस मूर्ख आतंकवादी का हर बयान भोपाल के वोटरों का मजाक उड़ा रहा है.  अगर लोग पार्टी के बजाय अच्छे लोगों को वोट करें तो सदन में सब अच्छे व्यक्ति आएंगे तो जनता के हित के काम कर पाएंगे. इसलिए भाजपा या कांग्रेस को न चुनकर हम किसी अच्छे व्यक्ति को चुनते  तो आज भोपाल का ऐसा मजाक नहीं बन रहा होता. पर दिक्कत ये है कि अच्छे व्यक्ति के पास प्रचार प्रसार के लिए इतना पैसा नहीं होता.

भोपाल में व्हाट्सएप पर वायरल हो रही उक्त पोस्ट सांसद प्रज्ञा भारती के उस बयान पर एक सटीक प्रतिक्रिया है जिसमें उन्होंने कहा था कि विपक्ष के पास मारक शक्ति है जिसका प्रयोग वह वह भाजपा नेताओं को मारने के लिए कर रहा है. भोपाल स्थित भाजपा के प्रदेश कार्यालय में पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली और पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर को श्रद्धांजलि देने आयोजित सभा में प्रज्ञा भारती ने यह भी कहा कि यह बात चुनाव प्रचार के दौरान उन्हें एक महाराज ने बताते आगाह किया था कि आप सावधान रहें. ऐसा यानि मारक शक्ति का प्रयोग भाजपा और उसके नेताओं को नुकसान पहुंचाने के लिए किया जा रहा है.

बकौल प्रज्ञा के गुमनाम और काल्पनिक बाबा, यह मारक शक्ति भाजपा के उन कर्मठ काबिल और ऐसे नेताओं पर असर करेगी जो पार्टी को संभालते हैं और बकौल प्रज्ञा भारती, आज मैं देखती हूं कि वास्तव में हमारा शीर्ष नेतृत्व सुषमा जी, गौर जी और जेटली जी पीड़ा सहते हुए जा रहे हैं. यह देखकर मन में आया कि कहीं ये सच तो नहीं है, सच यह है कि हमारे बीच से हमारा नेतृत्व लगातार जा रहा है. भले ही आप विश्वास करें या न करें पर सच यही है और ये ही हो रहा है.

साध्वी प्रज्ञा भारती के इस बेहूदे, अतार्तिक और अंधविश्वास से लबरेज बयान पर जिस किसी ने भी उक्त पोस्ट बनाकर वायरल की. उसने या उन जैसे व्यथित बुद्दिजीवियों ने जाने क्यों यह नहीं सोचा कि प्रज्ञा भारती ने दरअसल में वह बात कह ही डाली. जिसे दर्जनों भाजपा नेता हंसी उड़ने के डर से नहीं कह पा रहे कि वाकई लगातार हुई दिग्गज नेताओं की मौत कोई इत्तफाक नहीं हैं बल्कि इसके पीछे जरूर कुछ न कुछ गड़बड़ यानि तंत्र मंत्र, ऊपरी हवा और जादू टोने का असर तो है.

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प्रज्ञा भारती ने कहने की हिम्मत दिखाई तो भगवा खेमे में सकते में है और इसे उनकी व्यक्तिगत राय बताते मामले से पिंड छुड़ाने की कोशिश कर रहा है. लेकिन इस कोशिश में खिसियाहट और आंशिक सहमति बताती है कि भाजपाई गोदाम के कुछ दानों में ही अंधविश्वास का घुन नहीं लगा है बल्कि इसकी बुनियाद ही घुन लगी यानि खोखली है. जिस पर जैसे तैसे सत्ता की इमारत तो खड़ी हो गई है लेकिन वास्तविक सच अंधविश्वासों के आदी भाजपा नेताओं को ही नहीं पच रहा है.

प्रज्ञा भारती के इस मारक बयान पर किसने क्या प्रतिक्रिया दी. उन्हें जानने से पहले इस कल्पना जीवी सांसद को यह समझा देना जरूरी है कि विपक्ष के पास अगर ऐसी कोई शक्ति होती तो वह विपक्ष में होता ही क्यों और यह प्रयोग उसने नरेंद्र मोदी और अमित शाह जैसे जमीनी  नेताओं पर क्यों नहीं किया जिनकी मेहनत की वजह से भाजपा आज सत्ता में है. क्या वे तंत्र मंत्र प्रूफ हैं और अगर है तो कैसे है. और हाल ही में दिवंगत नेताओं को क्यों तंत्र मंत्र प्रूफ सुविधा नहीं दी गई .

बेहूदी और बेवकूफी की बातों पर तय है. चर्चा में बेहूदगी और बेबकूफी रहेगी ही इसलिए वह है भी कि क्यों प्रज्ञा भारती तंत्र मंत्र का प्रचार कर रहीं हैं. वे गांधी नेहरू को कोसें तो एकदफा इसे राजनैतिक द्वेष या कुंठा या फिर एक खतरनाक विचारधारा मानकर नजरंदाज किया जा सकता है लेकिन उससे सहमत नहीं हुआ जा सकता. बात अब हदें पार कर तंत्र मंत्र और जादू टोने जैसी बकवास बातों पर आ गई है तो यकीन माने भोपाल या देश के कोई दस–पंद्रह फीसदी लोग ही इसका विरोध करेंगे लेकिन बाकी डर कर सोचेंगे कि कहीं यह सच तो नहीं क्योंकि तमाम धर्म ग्रंथ ऐसी ही बातों से भरे पड़े हैं इसलिए प्रज्ञा भारती की बात में दम तो है .

गली गली में बाबा

देश प्रज्ञा भारती जैसे लोगों का ही है जिसका छोटा सा प्रमाण वे बाबा और तांत्रिक हैं जो इफरात से हर शहर के गली मोहल्ले में दरबार लगाए पाये जाते हैं. इनके यहां गंडा ताबीज लेने आए मूर्खों की भीड़ बताती है कि प्रज्ञा भारती जैसे पेराशूट नेता किस तरह की भीड़ द्वारा चुने जाते हैं. अकेले भोपाल में कोई एक हजार तांत्रिक हैं जो उल्लुओं को उल्लू बनाकर अपना उल्लू सीधा किया करते हैं. इनमें से कई तो बाकायदा चैनल और अखबारों में इश्तहार भी देते हैं कि जो काम या समस्याएं बुद्धि, विवेक, शिक्षा, जागरूकता और विज्ञान से नहीं हो सकते. वे तंत्र मंत्र से ग्यारह से लेकर ग्यारह हजार रुपए तक में चुटकी बजाते ही हो जाते हैं .

कुकुरमुत्ते से गली गली उग रहे ये बाबा हर मर्ज की दवा रखते हैं. ये बेऔलादों को औलाद सुख दिलाने का दावा करते हैं, पति पत्नी और प्रेमी प्रेमिकाओं को वश में कराते हैं, मुकदमों में शर्तिया जीत दिलाते हैं, लाइलाज बीमारियों को भगाते हैं, सेक्स पावर बढ़ाते हैं, परीक्षा में पास कराते हैं, दफ्तर में अधिकारियों और बौस को यजमान अर्थात ग्राहक के अनुकूल बनाते हैं, व्यापार में मुनाफा दिलवाते हैं और तो और यही बाबा दुश्मन को मूठ करनी से मारने का दम भी भरते हैं. जिसका जिक्र प्रज्ञा भारती ने किया. सरकार अगर इन महारथियों की इस अनूठी विद्या का इस्तेमाल सरहदों पर आतंकवादियों के सफाये के लिए करे तो देश के खरबों रुपए बचा सकती है जिन्हें वह सेना की तैनाती पर खर्च कर रही है .

तो प्रज्ञा भारती ने गलत या मिथ्या कुछ नहीं कहा उन्होंने वही कहा जो आम भोपाली या हिंदुस्तानी समझौता करता या करवाता है. दुश्मन को तंत्र मंत्र के जरिये मरवा देने के प्रिय काम के विज्ञापन जिस देश में एफएमसीजी के प्रोडक्ट की बिक्री जैसे आम हों और कई कानूनों के वजूद में होने के बाद भी उन पर कोई कार्रवाई न होती हो बल्कि कार्रवाई करने के जिम्मेदार लोग ही इन मठों और ठियों पर अपने काम करवाने जाते हो वहां प्रज्ञा भारती जैसी सांसद को ही दोष देना उनके साथ ज्यादती वाली बात है .

हमलावर हुई कांग्रेस  

इसी वजह के चलते लोगों ने उनकी यह बकवास हाजमे के चूरन की तरह फांक ली लेकिन कांग्रेसियों ने सुनहरी मौका हाथ से नहीं जाने दिया क्योंकि वे जानते हैं और सोच भी रहे होंगे कि काश कोई ऐसी शक्ति होती तो राहुल गांधी प्रधानमंत्री होते और नरेंद्र मोदी किसी रेलवे स्टेशन के बाहर मोदी टी स्टाल खोलकर बैठे होते और अमित शाह झूठे कप प्लेट धो रहे होते .

बहरहाल इन ख्बाबों ख्यालों से परे प्रदेश सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने कहा कि इसका जवाब तो पीएम साहब को देना चाहिए कि कैसे-कैसे लोगों को सांसद बना दिया प्रज्ञा भारती को तो किसी मंदिर की जबाबदारी दे देना चाहिए .  इसी में भगवान और जनता दोनों की  भलाई है. सज्जन सिंह वर्मा से एक कदम आगे बढ़ते कांग्रेस की मीडिया प्रभारी शोभा ओझा ने साध्वी के बयान को मूर्खतापूर्ण और आपत्तिजनक करार देते उनके मानसिक संतुलन बिगड़ने की बात कही. बकौल शोभा ओझा प्रज्ञा भारती को भाजपा के शीर्ष नेतृत्व का समर्थन व संरक्षण प्राप्त है . उनके लिए पागलखाना सटीक जगह है .  

कांग्रेस मीडिया विभाग के ही उपाध्यक्ष नरेंद्र सलूजा के मुताबिक प्रज्ञा भारती का बयान निंदनीय है और अंधविश्वास और काला जादू आदि कुरीतियों को बढ़ावा देने बाला और भारत के संविधान की अवहेलना करने बाला भी है . उच्च शिक्षा मंत्री जीतू पटवारी की नजर में आज के युग में इस तरह की अंधविशासी बातें करना ठीक नहीं है .  प्रज्ञा भारती की सोच दुखद है.

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पर ये हैं कि मानते नहीं

भाजपा में अंधविश्वासी नेताओं और मानसिकता की कोई कमी नहीं है इसलिए किसी नेता ने उनके इस मारक शक्ति बाले बयान को गलत या अंधविश्वासी नहीं बताया उल्टे जो नेता मीडिया के सामने पड़ गए उन्होने अपने अलग अंदाज में प्रज्ञा भारती से इत्तफाक रखते जता दिया कि पार्टी पूजा पाठ और यज्ञ हवन बगैरह के साथ साथ तंत्र मंत्र में भी भरोसा करती है .

नेता प्रतिपक्ष पंडित गोपाल भार्गव ने ज्ञान की बात यह कही कि यह प्रज्ञा भारती के ज्ञान की बात है इसके बारे में वही बता सकती हैं कि कौन सी मारक शक्ति होती है. लेकिन मैं उनके बयान से सहमत नहीं हूं, ये साध्वी के निजी विचार हैं. मैंने सृजन शक्ति के बारे में सुना है . राज्यसभा सदस्य और दिग्गज भाजपा नेता प्रभात झा की मानें तो अगस्त का महीना पार्टी नेताओं के लिए ठीक नहीं, यह मनहूस है. अटल जी से लेकर जेटली जी तक ने अगस्त के महीने में ही साथ छोड़ा.

कोई तीसरा नेता इस बयान पर कुछ नहीं बोला. प्रभात झा भी जब मनहूस शब्द पर घिरने लगे तो उन्होंने खिसियाहट मिटाने की गरज से कहा कि मनहूस से उनका आशय ग्रहण शब्द से था जो कि वैज्ञानिक शब्द है.

सहज समझा जा सकता है कि प्रज्ञा भारती का यह मारक बयान भाजपा के गले की हड्डी बन गया है जिस पर भाजपा नेता असहमत होने की भी हिम्मत नहीं जुटा पा रहे. ऐसे में बिहार की बेगूसराय लोकसभा सीट से भाजपा के एक और भगवान टाइप के दिग्गज नेता गिरिराज सिंह  के हाथों पराजित हुए युवा वामपंथी नेता कन्हैया कुमार का यह बयान याद हो आना स्वभाविक है कि अब देश में तर्क और विज्ञान की बात करना बेकार है. हैरानी वाली बात यह है कि कन्हैया कुमार ने यह बयान मतदान के बाद और नतीजे आने से पहले ही दे दिया था यानि उन्हें एहसास था कि भाजपा के धर्म कर्म का जादू जनता के सर चढ़कर बोल रहा है .

अब भी नहीं आ रही अक्ल

जनता को कोई अक्ल प्रज्ञा भारती के इस बयान से आ रही हो ऐसा लग नहीं रहा. मोदी भक्त और भाजपाई जो आए दिन हिन्दुत्व को लेकर शब्दों और विचारों की आग उगला करते हैं वे इस मुद्दे पर खामोश हैं क्योंकि तार्किक और वैज्ञानिक सोच बाले उन पर भारी पड़ रहे हैं . भक्तों की कोशिश यह है कि यह विवाद तूल न पकड़े और जितने जल्दी थम जाये उतना ही अच्छा है .

लाख टके का और चिंतनीय सवाल यह है कि सच जानते और समझते हुये भी लोग क्यों तंत्र मंत्र और झाड़ा फूंकी को गलत और बकबास कहने से बच रहे हैं. इस अहम सवाल का जबाब यह है कि आज वे अगर इस बकबास से असहमति जताएँगे तो कल को पूजा पाठ की प्रासंगिकता और औचित्य पर भी सवाल उठने लगेगे जिनका कोई सटीक जबाब उनके पास नहीं है और न पहले कभी था .

प्रज्ञा भारती से असहमत लोगों को उनका आभारी भी होना चाहिए कि उनके बयान के बाद कई नहीं तो कुछ लोग तो खुलकर सामने आए और उन्हें कुछ इस तरह कोसा .

ट्रोल भी खूब हुईं –

सोशल मीडिया पर यूजर्स बड़े व्यंगात्मक और दिलचस्प तरीके से प्रज्ञा भारती को ट्रोल कर रहे हैं जिससे लगता है कि पूरे कुए में भंग नहीं पड़ी है और सभी दूसरों की तरह अंधविश्वासी और मूर्ख नहीं . एक यूजर डाक्टर शुभम मिश्रा ने ताना मारा कि भोपाल की जनता की जय हो क्या नायाब हीरा चुना है … ये जेटली की श्रद्धांजलि सभा नहीं , भाजपा नेताओं को सचेत करने की सभा है …. साधना बढ़ाओ वरना विपक्ष की मारक शक्ति से बच नहीं पाओगे .

एक और यूजर ने भोपाल के वोटरों पर तंज़ कसा है कि आपने बबूल का पेड़ बोया है तो नीम कहाँ से मिलेगा . भोपाल बालों ने जाने क्या सोचकर इन्हें नुमाइंदगी थमाई है . किसी ने प्रज्ञा भारती के दिमाग में केमिकल लोंचा बताया तो किसी ने उन्हें मशवरा भी दिया है कि आप मारक शक्ति इस्तेमाल करने बालों को श्राप क्यों नहीं दे देतीं . कइयों ने भाजपा पर सवाल भी दागा है कि वह किस मजबूरी के चलते प्रज्ञा भारती को बाहर का रास्ता नहीं दिखा रही .

यह है मजबूरी –

इन यूजर्स को शायद ही समझ आए कि एक अकेली प्रज्ञा भारती ही नहीं बल्कि सभी साधु संत और साध्वियाँ भाजपा की बड़ी मजबूरी हैं और शुरू से ही हैं इन्हीं के भड़काऊ धार्मिक भाषणों से उसे वोट मिलते रहे हैं . उसे सत्ता के शिखर तक पहुंचाने में इन भगवा वस्त्र धारियों का बड़ा योगदान है . यही वो लोग हैं जो देश में पूजा पाठ और तंत्र मंत्र का माहौल बनाए रखते हैं . इस देश में वोट विकास के नहीं बल्कि धर्म और हिन्दुत्व के नाम पर पड़ते ही नहीं बल्कि इफ़रात से आँधी के आमों की तरह झड़ते हैं .

अब अगर पूरी जनता जागरूक हो जाएगी तो भाजपा सुस्त पड़ जाएगी इसलिए इनकी बेहूदगियां वह खुशी खुशी न केवल झेलती है बल्कि उन्हें इस बाबत उकसाती भी रहती है. केमिकल लोंचा जनता के दिमाग में भी है कि देश धार्मिक तौर तरीकों से चले तो आज नहीं तो कल राम राज आ ही जाएगा . और राम राज के सीधे माने ये हैं कि वर्ण व्यवस्था बहाल हो , दलितों ,आदिवासियों , पिछड़ों, मुसलमानो और औरतों को दबाकर रखा जाये. खूब पूजा पाठ हो मंदिर भक्तों से ठसाठस भरे रहें दक्षिणा चढ़ती रहे और पंडे पुजारियों को मेहनत कर पेट पालने जैसा निकृष्ट काम न करना पड़े और इसके लिए एक प्रज्ञा भारती नहीं बल्कि सौ पचास संत साध्वियों को भी संसद लाना पड़े तो सौदा घाटे का नहीं क्योंकि जनता ने  303 सीटें कबड्डी खेलने नही है.

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‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’: नायरा और कार्तिक को अलग करने के लिए वेदिका रचेगी कई साजिशें

सीरियल “ये रिश्ता क्या कहलाता है” में हर हफ्ते धमाकेदार ट्विस्ट ना आए, ऐसा भला कैसे हो सकता है. बीते दिनों ही इस सीरियल में दिखाया गया है कि भले ही गोयनका खानदान के किसी भी शख्स ने नायरा को माफ ना किया हो लेकिन उसके भाई नक्क्ष ने उससे रक्षाबंधन वाले दिन ही उसके साथ सारे गिले शिकवे दूर कर लिए.

वहीं दूसरी ओर कार्तिक की दादी ने तो कसम खा रखी है कि अस्पताल से डिस्चार्ज होते ही वह कैरव को सीधा अपने घर वापस लेकर आएंगी. अब सभी फैंस ये जानने के लिए उत्सुक है कि आखिर इस सीरियल में आगे क्या-क्या होने वाला है? हाल ही में इस सीरियल का नया प्रोमो भी सामने आया है, जिसमें नायरा कार्तिक पर इसलिए भड़की हुई नजर आ रही है क्योंकि कार्तिक बिना उसकी इजाजत के बगैर ही कैरव को गोयनका विला लेकर आ जाता है.

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अब आप ये जानने के लिए तो काफी उत्सुक होंगे कि आखिर अब इस सीरियल में आगे क्या-क्या होने वाला है? सामने आ रही मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार जहां नायरा कैरव को सिंघानिया सदन ले जाने की जिद करेगी वहीं दादी भी अपना चौंकाने वाला फरमान सुना देंगी. जी हां दादी भरी महफिल में कहेंगी कि कैरव इस घर से कहीं भी नहीं जाएगा.

इस सिरियल के अपकमिंग एपिसोड में आप देखेंगे कि वेदिका को एहसास हो जाएगा कि अलग होकर भी नायरा और कार्तिक एक दूसरे से दूर नहीं जा पा रहे है. ऐसे में वेदिका के दिलों दिमाग पर अपनी जिंदगी बर्बाद ना होने का नशा सवार हो जाएगा और वह नायरा और कैरव को गोयनका विला से बाहर निकालने के लिए कई तरह की साजिशें रचेगी. ऐसे में देखना होगा कि नायरा उसका सामना कैसे करेगी.

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इन गिफ्ट से खुश करें पार्टनर को

कहा जाता है कि तोहफे की कीमत नहीं बल्कि देने वाले की नीयत देखी जाती है. वैसे, ज्यादातर लोग गिफ्ट लेने और देने को ले कर काफी सतर्क रहते हैं. किसी पैक्ड गिफ्ट को खोल कर देखने का अपना ही अनोखा आनंद होता है. अकसर लोग गिफ्ट लेने और देने को ले कर परेशान रहते हैं. किसी को किसी मैरिज फंक्शन में जाना है तो वह यह सोच कर परेशान हो जाता है कि क्या गिफ्ट दिया जाए. गिफ्ट के मामले में हर किसी की यही चाहत होती है कि वह कोई ऐसा गिफ्ट दे जो सस्ता, अच्छा व सब से अलग भी हो.

कई हस्बैंड इस बात को ले कर माथापच्ची करते रहते हैं कि बीवी के  बर्थडे या मैरिज एनिवर्सरी के मौके पर उसे कैसा गिफ्ट दिया जाए. गिफ्ट ऐसा हो कि जिसे देखते ही बीवी खुशी से उछल पड़े. रिश्तेदारों और दोस्तों की शादी की सालगिरह, जन्मदिन, गृहप्रवेश, प्रमोशन, नई नौकरी मिलने, सगाई आदि के मौके पर किस तरह का गिफ्ट दिया जाए? हर कोई कम पैसे में बेहतरीन गिफ्ट देने के बारे में सोचता रहता है. गिफ्ट लेनेदेने वाले मौकेबेमौके गिफ्ट लेतेदेते रहते हैं. अगर इस चलन पर गौर फरमाया जाए तो गिफ्ट के कई रूपों के साथसाथ उन्हें देने वालों की नीयत का भी पता चलता है.

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जज्बाती गिफ्ट

ये गिफ्ट रुपएपैसों से नहीं खरीदे जा सकते हैं, अनमोल होते हैं. ऐसे गिफ्ट सीधे दिल पर छाप छोड़े जाते हैं. मसलन, कोई पति अपनी बीवी को, बेटा अपनी मां को या भाई अपनी बहन से कहे कि उस के कहने पर वह शराब, गुटखा, तंबाकू आदि खाना छोड़ देगा. रश्मि अपने पति द्वारा दिए गए एक गिफ्ट को आज तक नहीं भूल पाई है और वह उसे जिंदगीभर याद रखेगी. वह बताती है, ‘‘एक बार मैरिज एनिवर्सरी के पहले पति ने मुझ से कहा कि इस बार काफी अच्छा गिफ्ट दूंगा. जब वह दिन आया तो उन्होंने कहा कि देखो न, तुम्हारे लिए सोने की अंगूठी बनवाई थी, पर पता नहीं वह कहां गुम हो गई.

‘‘मैं जानती थी कि वे झूठ बोल रहे हैं क्योंकि उन के शराब पीने की आदत से मैं वाकिफ थी. वे कहने लगे, ‘सौरी, अगली बार कोई बढि़या गिफ्ट जरूर दूंगा.’ मैं ने कहा कि मुझे सोना या हीरा नहीं चाहिए. आप चाहें तो अभी के अभी मुझे मेरे जीवन का सब से बड़ा गिफ्ट दे सकते हैं.

‘‘पति ने तुरंत पूछा, ‘बोलो, क्या चाहिए? अगर मैं दे सकूंगा तो जरूर दूंगा.’ मैं ने कहा कि आप मुझ से वादा करें कि शराब पीना छोड़ देंगे. उस समय तो वे कुछ नहीं बोले पर मैं ने देखा कि उन्होंने उसी दिन से शराब को छोड़ दिया.

‘‘उस के बाद से 13 साल गुजर गए. उन्होंने शराब को हाथ नहीं लगाया. मेरे लिए इस से बड़ा व यादगार गिफ्ट और क्या हो सकता है. मैं ने उसी समय जान लिया कि मुझे मेरी इच्छाओं का सम्मान करने वाला पति मिला है. यही मेरे जीवन का सब से बड़ा उपहार है.’’

जरूरत के गिफ्ट

किसी स्टूडैंट के लिए लैपटौप, कंप्यूटर सैट, मोबाइल फोन, घड़ी टैबलेट, स्कूटी आदि उस की जरूरत के गिफ्ट हैं. किसी महिला के लिए फ्रिज, सोफा, डिनर सैट, एलसीडी, जेवरात आदि उस के लिए जरूरत के गिफ्ट हैं. इस तरह के गिफ्ट को लोग गर्व के साथ इस्तेमाल करते हैं और उसे सहेज कर रखने की कोशिश करते हैं. जरूरत के मुताबिक दिया गया गिफ्ट काफी यादगार होता है.

किसी का मनपसंद या जिस चीज की किसी को चाहत हो, ऐसा गिफ्ट देने से लेने और देने वाले को बराबर खुशी होती है. मधुबनी पेंटिंग आर्टिस्ट रीमा कहती हैं कि किसी को ऐसा गिफ्ट दिया जाना चाहिए जो उस की जरूरत का हो. उस के काम में आ सके. किसी को गिफ्ट देने से पहले यह पता करने की कोशिश करें कि उसे किसी चीज की जरूरत तो नहीं है. अगर किसी बच्चे को गिफ्ट देना हो तो पता करें कि उसे पढ़ने के लिए टेबल, घड़ी, लैपटौप, टेबललैंप, वीडियो गेम, टैबलेट आदि की जरूरत तो नहीं है?

जो चीज किसी के पास नहीं हो या जिस चीज को खरीदने की चाहत हो, वह गिफ्ट के रूप में उसे दे दिया जाए तो वह खुशी से फूला नहीं समाता है. ऐसे में गिफ्ट देने वाले को भी खुशी होती है कि उस का गिफ्ट पसंद किया गया.

सरप्राइज गिफ्ट

इस तरह के गिफ्ट से लेने और देने वाले दोनों को काफी खुशी मिलती है. जिस चीज को पाने की इच्छा हो, वह अचानक से किसी अपने के हाथों गिफ्ट के रूप में मिल जाए तो खुशी दोगुनी हो जाती है. पटना के कंकड़बाग इलाके में रहने वाले अर्चना राज कहती हैं कि उन के पति उन्हें जब भी गिफ्ट देते हैं तो उन्हें पहले ही बता देते हैं कि इस बार मैरिज एनिवर्सरी या बर्थडे पर फलां गिफ्ट दूंगा. कभी वे उन से पूछ लेते हैं कि इस बार क्या गिफ्ट लोगी? पति की यह आदत उन्हें बिलकुल भी अच्छी नहीं लगती. उन्हें सरप्राइज गिफ्ट काफी अच्छा लगता है. वे हमेशा अपने पति से कहती थीं कि वे उन्हें बता कर या पूछ कर गिफ्ट नहीं दिया करें. पिछले साल उन की शादी की सालगिरह के 4-5 दिन बचे थे और उन के पति गिफ्ट लेने के बारे में कुछ पूछ ही नहीं रहे थे.

अर्चना कहती हैं, ‘‘मेरे मन में खलबली मची हुई थी, पर मैं ने पति से कुछ नहीं पूछा. न पति ने ही कुछ बताया. एनिवर्सरी के एक दिन पहले तक उन्होंने गिफ्ट की कोई चर्र्चा नहीं की. रात को वह उदास हो कर यह सोच कर सो गई कि पति को एनिवर्सरी की याद नहीं है.

सुबह हुई तो लगा कि पति गिफ्ट देंगे पर मुसकरा कर हैप्पी मैरिज एनीवर्सरी बोला और शाम की पार्टी के बारे में और्डर दे कर औफिस चले गए. शाम को सारे गेस्ट आए और पति भी औफिस से लौटे व खाना टैस्ट करने लगे. गिफ्ट की कोई चर्चा नहीं होने से मेरा मन उदास होता जा रहा था. केक काटने के लिए टेबल के पास पहुंची तो देखा कि एक छोटा पर खूबसूरत गिफ्टपैक टेबल पर रखा है.

पति ने कहा, ‘‘पैक खोल कर देखो तो उस में क्या है?’’ मैं ने पैक खोला तो देखा उस में डायमंड रिंग थी. मेरी खुशी का ठिकाना नहीं रहा. मैं इसलिए नहीं खुश हुई कि मुझे डायमंड रिंग मिली बल्कि मुझे इस बात को ले कर खुशी मिली कि शादी के 12 सालों में पहली बार पति ने सरप्राइज गिफ्ट दिया.

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मनमाफिक गिफ्ट

रांची के अशोक नगर महल्ले में रहने वाली अर्चना भटनागर बताती हैं, ‘‘शादी के बाद हनीमून पर जाने की तैयारी हो रही थी. शादी के 2 दिनों बाद पति जब दफ्तर से लौटे तो मेरे हाथ पर ट्रेन रिजर्वेशन टिकट रख दिया और बोले कि हम मसूरी चल रहे हैं. सारी तैयारी कर लो. मैं उदास हो गई क्योंकि मुझे जम्मूकश्मीर जाने की काफी इच्छा थी.

‘‘मुझे उदास देख कर उन्होंने पूछा कि क्या हुआ? मैं ने उन्हें अपनी इच्छा बताई तो वे बोले, ‘अब तो कुछ नहीं हो सकता, इतनी जल्दी जम्मू का टिकट भी नहीं सकेगा. बाद में कभी जम्मू चलेंगे.’ मैं चुपचाप पैकिंग में लग गई. तय तारीख पर अनमने ढंग से ट्रेन पर सवार हुई. कई स्टेशनों को पार करती हुई एक स्टेशन पर गाड़ी रुकी तो पति ने कहा, ‘चलो उतरो, मसूरी आ गई.’ मैं ट्रेन से नीचे उतरी तो देखा कि जम्मू स्टेशन है, मेरी खुशी का ठिकाना नहीं रहा. मुझे खुश देख कर वे भी काफी खुश हुए.’’

नकदी गिफ्ट

किसी खास मौके पर लिफाफे में नकद रुपए डाल कर गिफ्ट के रूप में दिया जाता है. गिफ्ट चैक भी देने का चलन है. इस तरह का गिफ्ट सब से अच्छा होता है क्योंकि जिसे नकद गिफ्ट मिलता है वह अपनी जरूरत के हिसाब से उस रकम का इस्तेमाल कर सकता है.

झारखंड हैल्थ डिपार्टमैंट के डा. राजीव कुमार पांडे कहते हैं कि वे किसी भी बर्थडे, मैरिज एनिवर्सरी, जन्मोत्सव, विवाह आदि के जलसों में जाते हैं तो गिफ्ट के रूप में नकदी ही देते हैं. इस से लोग नकद में मिले रुपयों से अपनी पसंद का बेहतरीन आइटम खरीद सकते हैं.

आमतौर पर गिफ्ट में फालतू की कामचलाऊ चीजें ही रंगीन और चमकीले कागजों में लपेट कर दे दी जाती हैं. ऐसे गिफ्ट को देने वाला अपने पैसे और इज्जत दोनों की ही फजीहत करा डालता है.

कीमती गिफ्ट

फ्लैट, जमीन, कार, फिक्स्ड डिपौजिट आदि कीमती गिफ्ट हैं. ऐसा गिफ्ट ऊंचे तबके के लोगों के बीच ही चलता है. मध्यवर्ग में इस तरह के गिफ्ट देनेलेने की क्षमता नहीं होती है. रईस परिवारों में महंगी गाड़ी, फ्लैट, मकान, जमीन, जेवरात आदि गिफ्ट दिया और लिया जाता है. लाखोंकरोड़ों रुपए के गिफ्ट मिडिल क्लास के लोगों के बूते के बाहर की बात है और वे लोग इस तरह के गिफ्ट देने के बारे में सोचते भी नहीं है.

मतलब का गिफ्ट

इस तरह के गिफ्ट अफसरानों, मंत्रियों और किसी कंपनी के आला अफसरों को काम निकालने के लिए दिया जाता है. कोई टैंडर पास कराने, बकाया रकम के भुगतान की फाइल को पास कराने, प्रमोशन लेने, मानमाफिक जगह पर ट्रांसफर कराने आदि के लिए इस तरह के गिफ्ट दिए जाते हैं. किसी को अपने बच्चों को बेहतर कालेज में दाखिला दिलाना हो या किसी को बच्चे की नौकरी के लिए पैरवी करानी हो तो इस के लिए भी साहब को खुश करने के लिए महंगे गिफ्ट दिए जाते हैं. ऐसे गिफ्ट में नोट से भरे मोटे लिफाफे के अलावा बड़े झूमर, रंगीन रोशनी वाले डिजाइनर लैंप, कलात्मक मूर्तियां या पेंटिंग आदि फैंसी या सजावटी चीजें होती हैं.

घुमंतू गिफ्ट

इस कैटेगरी के गिफ्ट कभी इस्तेमाल में नहीं लाए जाते हैं. इस तरह का गिफ्ट हमेशा गिफ्ट बन कर एक घर से दूसरे घर में घूमता रहता है. वह किसी के काम में नहीं आता है, न ही लोग उस का इस्तेमाल करना चाहते हैं. 200-300 रुपए के सजावटी लैंप, फ्लावर पौट, दीवारघड़ी, अलबम, फोटोफ्रेम, कप सैट, शरबत सैट जैसे गिफ्ट ज्यादातर लोगों के काम में नहीं आते हैं.

प्रोफैसर रेखा कहती हैं कि गिफ्ट ऐसा होना चाहिए जो यादगार बन जाए. गिफ्ट के कीमत की अहमियत नहीं होती है. इस के बाद भी कई ऐसे लोग हैं जो गिफ्ट मिलने पर उस में लिखी हुई कीमत देखते हैं, कम दाम का गिफ्ट होने पर नौकभौं सिकोड़ते हैं. उस के बाद उन की यही प्रतिक्रिया होती है कि ऐसा गिफ्ट तो वे नौकरों व चपरासियों को भी नहीं देते हैं. कई गिफ्ट देने वाले ऐसे भी हैं जो कम कीमत का गिफ्ट देने से पहले उस में लगे कीमत के स्टीकर को खुरच देते हैं, ताकि जिसे गिफ्ट मिले उसे उस की कीमत का अंदाजा न लग पाए. दरअसल, गिफ्ट देना किसी की खुशियों में शामिल होने के मजे को कई गुना बढ़ा देता है, इसलिए गिफ्ट वैसा ही दिया जाना चाहिए, पाने वाला जिस का बेहतरीन इस्तेमाल कर सके.

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मेरी अंडरआर्म्स काली हैं, जिसकी वजह से मैं स्लीवलैस ड्रैसेज नहीं पहन पाती, मैं क्या करूं?

सवाल

मैं 18 वर्षीय युवती हूं. पिछले कई दिनों से मुझे अंडरआर्म्स में खुजली की समस्या हो रही है. साथ ही मेरी अंडरआर्म्स काली भी हो गई हैं, जिस की वजह से मैं स्लीवलैस ड्रैसेज कौन्फिडैंस के साथ नहीं पहन पाती. कृपया कोई घरेलू उपाय बताएं?

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जवाब

दरअसल, जब पसीने की दुर्गंध दूर करने के लिए डियोड्रैंट यूज किया जाता है, तो उस में मौजूद ऐल्यूमिनियम, जिंक और जिरकोनियम जोकि ऐस्ट्रिंजैंट साल्ट होते हैं, कई बार त्वचा में खुजली पैदा करने का कारण बनते हैं. कई बार इन की वजह से सूजन व त्वचा में जलन तक हो जाती है. ईचिंग से बचने का सब से बेहतर उपाय यह है कि आप अंडरआर्म्स में रेजर का यूज करने के बजाय वैक्सिंग ही कराएं और वह भी प्रोफैशनल सैलून से ही. इस के अलावा वैक्सिंग से पहले प्रीवैक्सिंग लोशन और वैक्सिंग के बाद पोस्ट वैक्सिंग लोशन लगाएं. अगर त्वचा सैंसिटिव हो तो सैंसिटिव स्किन औयल भी लगा सकती हैं.

अंडर आर्म्स में खुजली के अलावा कालापन भी एक आम समस्या है. इस समस्या से नजात पाने के लिए आप प्रभावित जगह पर आलू का स्लाइस रगड़ें. आलू में मौजूद ब्लीचिंग एजेंट कालेपन को दूर करने में मदद करेंगे. इस के अलावा नीबू का रस या उस का स्लाइस भी अंडरआर्म्स के कालेपन को दूर करने का प्रभावी उपाय है. कई बार डैड सैल्स की वजह से भी अंडरआर्म्स काली दिखती हैं. इस से बचने के लिए अंडरआर्म्स में कभी शेव न करें. हमेशा वैक्सिंग ही कराएं.

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दो जून की रोटी

लेखक: वी.के. माहेश्वरी

एक पुराना प्रचलित चुटकुला है जिसे अकसर लोग आपस में  कहतेसुनते रहते हैं : 2 गधे चरागाह में चर रहे थे. चरतेचरते 1 गधे ने दूसरे को एक चुटकुला सुनाया, पर दूसरा गधा चुटकुला सुन कर भी शांत रहा, उस ने कोई प्रतिक्रिया नहीं जाहिर की. तब चुटकुला सुनाने वाले गधे को झेंपने के अलावा कोई चारा नहीं रहा और सांझ होने पर दोनों गधे अपनेअपने निवास को चले गए.

अगले दिन दोनों गधे चरने के लिए फिर उसी चरागाह में आए तो चुटकुला सुनने वाला गधा बहुत जोर से हंसने लगा. उसे इस तरह हंसता देख कर दूसरे गधे ने हंसने का कारण जानना चाहा, तो उत्तर मिला कि कल जो चुटकुला उस ने सुना था, उसी पर हंस रहा है.

पहले गधे ने आश्चर्य से कहा कि चुटकुला तो कल सुनाया था, आज क्यों हंस रहे हो. इस पर दूसरे गधे से उत्तर मिला कि उस का अर्थ आज समझ में आया है.

अब हंसने की बारी चुटकुला सुनाने वाले की थी. उस ने जोर का ठहाका लगाते हुए कहा, ‘‘वाह, चुटकुला कल सुना था, हंस अब रहे हो. वास्तव में तुम रहोगे गधे के गधे ही. कल की बात आज समझ में आई है.’’

मेरे विचार से यह कथा मात्र एक चुटकुला नहीं है. इस में तो गहन रहस्य और ज्ञान छिपा है. वास्तविकता यह है कि बहुत सारी बातें ऐसी होती हैं जिन का अर्थ तब समझ में नहीं आता जब कही जाती हैं. बहुत सी घटनाओं का अर्थ घटना के घटित होते समय जाहिर नहीं होता. बहुत सी बातों का अर्थ बाद में समझ में आता है. कभीकभी तो ऐसी बातों एवं घटनाओं का अर्थ समझने में वर्षों का वक्त लग जाता है. पर किसी भी बात के अर्थ को समझने में व्यक्ति विशेष की बुद्धि का भी अत्यंत महत्त्वपूर्ण योगदान होता है. यदि व्यक्ति बुद्धिमान है तो बात का अर्थ समझने में विलंब नहीं होता, परंतु यदि व्यक्ति की बुद्धि कुछ मंद है तो अर्थ समझने में देर होती ही है. अल्पबुद्धि होने के कारण ही शायद यह चुटकुला गधों के बारे में प्रचलित है.

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बचपन में घटित एक घटना को समझने में मुझे भी वर्षों का समय लग गया था. शायद बालमन में तब इतनी समझ नहीं थी कि इस बात का अर्थ पल्ले पड़ सके या गधों की तरह बुद्धि अल्प होने के कारण अर्थ समझ में नहीं आया था. जो भी कहें पर यह घटना लगभग 40 साल पुरानी है.

मेरे श्रद्धेय पिताजी का मुख्य व्यवसाय खेती था, लेकिन जमीन पर्याप्त न होने के कारण वह खेती मजदूरों से कराते थे और खुद सिंचाई विभाग में छोटीमोटी ठेकेदारी का कार्य करते थे. यह कहना अधिक उपयुक्त और तर्कसंगत होगा कि खेती तो मजदूरों के भरोसे थी और पिताजी का अधिक ध्यान ठेकेदारी पर रहता था.

गांव में खेल व मनोरंजन का कोई साधन नहीं था, अत: कक्षा 8 पास करने के बाद मेरा ध्यान खेती की ओर आकर्षित हुआ और मैं कभीकभी अपने खेतों पर मजदूरों का काम देखने के लिए जाने लगा. तब हमारे खेतों पर 3 मजदूर भाई, जिन के नाम ज्योति, मोल्हू व राजपाल थे, कार्य करते थे. वे मुंह अंधेरे, बिना कुछ खाएपीए हलबैल ले कर खेत पर चले जाते थे. वह खेत पर काम करते और दोपहर को उन की मां भोजन ले कर खेत पर जाती. तब काम से कुछ समय निकाल कर वे दोपहर का भोजन पेड़ की छांव में बैठ कर करते थे.

संयोगवश कभीकभी उन के खाने के समय पर मैं भी खेत पर होता था व उन का खाना देखने का अवसर मिलता था. मैं ने उन के खाने में कभी दाल या सब्जी नहीं देखी. उन के खाने में अकसर नमक मिली हुई मोटे अनाज की रोटी होती थी व उस के साथ अचार और प्याज. उन की मां कुल मिला कर 6 रोटी लाती थी व तीनों भाइयों को 2-2 रोटी दे देती थी, जिन्हें खा कर वे पानी पीते और फिर अपने काम में लग जाते.

खाने के बीच अकसर उन की मां बातें करती रहती कि आज तो घर में सेर भर ही अनाज था, उसी को पीस कर रोटी बनाई है. जिन में से घर पर औरतें व बच्चे भी खाते थे. उन्हीं में से वह तीनों भाइयों के लिए भी लाती थीं. तब मैं उन की बातें सुनता अवश्य था पर अर्थ कुछ नहीं निकाल पाता था. मुझे यह बात सामान्य लगती थी. मुझे लगता था कि उन्होंने भरपेट भोजन कर लिया है. बालपन में इस का कुछ और अर्थ निकालना संभव भी नहीं था.

उन दिनों एक परंपरा और थी कि त्योहार यानी होलीदीवाली पर मजदूरों को किसान अपने घर पर भोजन कराते थे. उसी परंपरा के तहत ज्योति, मोल्हू व राजपाल भी त्योहार के अवसर पर हमारे घर भोजन करते थे.

चूंकि मेरा उन तीनों से ही बहुत अच्छा संवाद था इसलिए उन को अकसर मैं ही भोजन कराता था. मुझे उन को भोजन कराने में बहुत आनंद आता था. उस भोजन में रोटी, चावल, दाल, सब्जी, कुछ मीठा होता था तो वह तीनों भाई भरपेट भोजन करते थे व कुछ बचा कर अपने घर भी ले जाते थे ताकि परिवार की महिलाएं व बच्चे भी उसे चख सकें.

उन को कईकई रोटी व चावल खाता देख कर कभीकभी मेरी मां कह उठतीं कि अपने घर में तो ये केवल 2 रोटी खाते हैं और हमारे घर आते ही ये इतना खाना खाते हैं. तब मुझे अपनी मां की बात सच लगती थी क्योंकि मैं उन को खेत पर केवल 2 रोटी ही खाते देखता था. मैं यह समझने में सफल नहीं रहता कि ऐसा क्यों है, यह अपने घर केवल 2 रोटी खा कर पेट भर लेते हैं व हमारे घर पर इतना खाना क्यों खाते हैं.

इन्हीं सब को देखतेभुगतते मैं खुद यौवन की दहलीज पर आ गया. पढ़ाई पूरी करने के बाद शहर में वकालत करने लगा. कुछ समय उपरांत न्यायिक सेवा में प्रवेश कर के शहरशहर तबादले की मार झेलता घूमता रहा व जीवन का चक्र गांव से शहर की तरफ परिवर्तित हो गया. खेती व खेतिहर मजदूर ज्योति, मोल्हू, राजपाल व अन्य कई मजदूर, जो कभी न कभी हमारी खेती में सहायक रहे थे, काफी पीछे छूट गए. मैं एक नई दुनिया में मस्त हो गया, जो बहुत सम्मानजनक व चमकीली थी. पर यदाकदा मुझे बचपन की बातें याद आती रहती थीं. गांव में जाने पर कभीकभार उन से भेंट भी हो जाती थी, पुरानी यादें ताजा हो जाती थीं.

कुछ ही दिन पहले न जाने क्या सोचतेसोचते मुझे उपरोक्त घटनाक्रम याद आ गया और जब मैं ने अपने वयस्क एवं परिपक्व मन से उन सब कडि़यों को जोड़ा तो वास्तविकता यह प्रकट हुई कि ज्योति, मोल्हू और राजपाल, ये 3 ही मजदूर गांव में नहीं थे बल्कि गांव में और भी बहुत मजदूर थे जिन का यही हाल था. शायद यही कारण था कि हमारे घर पर भोजन के समय उन्हें पेट भरने का अवसर मिलता था. अत: वह अपने घर की अपेक्षा हमारे घर पर अधिक भोजन करते थे. उस समय मुझे उन के अधिक खाने का कारण समझ में नहीं आया था. मुझे इस बात को समझने में लगभग 4 दशक का समय लग गया कि अनाज की कमी के कारण वे मजदूर रोज ही आधे पेट रहते थे और मुझे खेतिहर मजदूरों की उस समय की स्थिति का आभास हुआ कि तब ज्योति, मोल्हू व राजपाल जैसे श्रमिक दो जून की रोटी के लिए कितना काम करते थे व तब भी आधा पेट भोजन ही कर पाते थे.

इतने के लिए भी रूखासूखा खा कर उलटासीधा फटेपुराने कपड़ों से तन ढक कर हर मौसम में उन्हें खेती का कार्य करना पड़ता था. उन के लिए काम का कोई समय नहीं था, वह मुंहअंधेरे काम पर आते थे व देर रात को काम से लौटते थे.

मुझे जब भी अवकाश मिलता, मैं गांव जाता और उन तीनों श्रमिकों से अकसर भेंट होती, पर उन की हालत जस की तस रही. वे आधा पेट भोजन कर के ही जीवन व्यतीत करते रहे और इस दुनिया से विदा हो गए.

जीवन में उन्हें कभी दो जून की भरपेट रोटी मयस्सर नहीं हो पाई. ऐसे वे अकेले श्रमिक नहीं थे, न जाने कितने श्रमिक आधा पेट भोजन करतेकरते इस दुनिया से चले गए. अब भी, जब मैं सोचता हूं कि कितना कठिन होता है जीवन भर आधापेट भोजन कर के जीवन व्यतीत करना, तो मेरे रोंगटे खड़े हो जाते हैं. मैं ऊपर से नीचे तक सिहर जाता हूं.

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गांव से मेरा नाता समाप्त नहीं हुआ है. वही खेत हैं, वही खेती, पर वक्त ने सबकुछ बदल दिया है. अब तो खेतीहर श्रमिकों की स्थिति में आश्चर्य रूप से परिवर्तन हुआ है. ज्योति, मोल्हू व राजपाल के बच्चों के घर पक्के हो गए हैं. बच्चों को नए कामधंधे मिल गए हैं. अब गांव में आधा बदन ढके अर्थात शरीर पर मात्र लंगोटी डाले श्रमिक बिरले ही मिलते हैं.

समाज में समानता की ध्वनि सुनाई पड़ती है, जो प्रगति का परिचायक है पर साथ ही साथ किसानों के समक्ष समस्या भी हो गई है. अब खेती कार्य के लिए मजदूरों का मिलना लगभग असंभव हो गया है. पर वक्त कभी एक जैसा नहीं रहता, वह तो हर पल करवट बदलता रहता है. मैं तो पूर्ण आशान्वित हूं कि भविष्य वास्तविक रूप से उज्ज्वल होगा.

अब घरेलू महिलाएं बने कामकाजी 

रोज-रोज वही एक रूटीन से घरेलू महिलाएं ऊब जाती हैं. घर परिवार में वो इतना व्यस्त हो जाती हैं कि वो अपनी इच्छाओं को दबा लेती हैं और अपने लिये तो जैसे जीना ही भूल जाती हैं.न तो वो अपने लिये ही वक्त निकाल पाती हैं और न ही अपना करियर बना पाती हैं. जिसके लिये उन्हें बेहद मलाल रहता है.

विशेषज्ञों के अनुसार, महिलाओं में खास किस्म की इच्छा शक्ति होती है, उन में एक साथ कई काम करने की शक्ति होती हैं. जिसके चलते वे किसी भी काम को पूरा करके ही सांस लेती हैं. वो परिवार के सभी सदस्यों की पसंद नापसंद का ख्याल रखती हैं लेकिन पुरुषों में ये खूबियां नहीं होती. महिलाओं के लिए कोई काम नामुमकिन नहीं है. जरूरत है तो उस काम को मन लगाकर करने की.

लेकिन अब परेशान होने की जरूरत नहीं, बस अपना हौसला बुलंद रखिये और घर बैठे ही अपना करियर बनाइये.

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योगा कोच

जो महिलाएं फिटनेस या योगा के प्रति अपना शौक रखती हैं वो महिलाएं इसे अपने करियर के रूप में अपनाकर अपने करियर को नई चमक दे सकती हैं. इससे आप अपने स्वस्थ का भी ध्यान रख सकती हैं व घर बैठे अच्छी कमाई भी कर सकती हैं.

फ्रीलांसर राइटर

अगर आपको लिखने की शौकीन हैं.तो आप अख़बारों ,मैगज़ीन,या वेबसाइट मे फ्रीलांसर लेखक के रूप मे काम कर सकती हैं .इसमे सैलेरी भी काफी अच्छी होती है और आपको एक नई पहचान मिलती है.

सिलाई

अगर आप सिलाई करना जानती है. तो आप अपना घर में ही बुटीक खोल सकती हैं. जो महिलाऐं कम पढ़ी लिखी हैं. वो भी इस काम को अपना सकती है और अपनी एक नई पहचान बना सकती हैं. इस काम मे कमाई भी बहुत अच्छी हैं. बस आप मे नये डिजाइन की कल्पना का हुनर होना जरूरी है .

होम ट्यूशन

अगर आप अच्छी पढ़ी लिखी महिला हैं. तो आप बच्चो को ट्यूशन भी पढ़ा सकती हैं. इससे अगर आप शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने की चाह रखती हैं तो आपका वो सपना भी साकार हो सकता है .ये औनलाइन का जमाना है तो अब आप औनलाइन ट्यूटर भी बन सकती हैं. यही नहीं अगर आप भाषाओँ का ज्ञान रखती हैं. तो घर बैठे देश- विदेश के विद्यार्थियों को औनलाइन पढ़ा सकती हैं.

ब्यूटीशियन

इस कार्य में महिलाओं को महारत हासिल है. आज कल कई किस्म के मेकअप होते हैं. आप अपना एक पार्लर शुरू कर सकती हैं, ज्यादा बड़ा भी नहीं तो घर मे ही खोल सकती हैं. और धीरे धीरे अपने काम मे बड़े स्केल तक ले जा सकती हैं.

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कैसे करें सपना साकार

अगर आप अपनी पहचान बनाना चाहती हैं तो इसके लिए आपको संघर्ष तो करना पड़ेगा ही साथ में अपने घर परिवार का भी ख्याल रखना होगा जिसके लिये जरूरी हैं कि आप ये टिप्स अपनाये.

*सुबह जल्दी उठकर घर के काम निपटायें और फिर अपने काम को समय दें.

*अपना एक टाइम टेबल बनाये क्युकी हर काम  के लिये समय प्रबंधक होना अति आवश्यक है. इससे आप अपने परिवार को और अपने काम  को सही ढंग से समय दे सकेंगी.

*अपनी सेहत का पूरा ध्यान रखें क्युकी जब आप स्वस्थ होंगी तभी सही तरीके से काम कर सकेंगी.

*घर के कुछ कामो की ज़िम्मेवारी अपनी सास -ससुर  को दें, जैसे बाज़र से सब्जी लाना या बच्चो को स्कूल, टूशन से लाना.

*आपके पति का सहयोग होना अति आवश्यक है इसलिये आप जो भी करना चाहती है उसमे उनकी रजामंदी व सहयोग बहुत जरूरी है.

*रोजाना स्पेशल डिश न बनाकर हफ्ते में एक या दो दिन ही स्पेशल डिश बनाये.

*आप सुपर वूमेन बनने की कोशिश गलती से भी न करें. क्युकी हर इंसान की एक काम करने की क्षमता होती है और अगर आप उससे  ज्यादा काम करती हैं तो आपका शरीर अस्वस्थ हो सकता है.

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कौस्मेटिक सर्जरी से बने जवान

अमूमन सभी महिलाओं की ख्वाहिश होती है कि वो अपनी उम्र से कम दिखे, और उनकी इसी तमन्ना को पूरा करता है कौस्मेटिक सर्जरी. झुर्रियों से लेकर लकीरों और पेट से लेकर नाक तक सभी में करेक्शन का काम इस सर्जरी से किया जाता है. इस बारे में क्या कहना है आईएलएएमडी के संस्थापक और निदेशक डा. अजय राणा का आइये जानें –

खूबसूरत दिखना भला कौन नहीं चाहता. हर कोई अपने सौंदर्य को बढ़ाने के लिए सौंदर्य प्रसाधनों के अलावा तरह तरह के ट्रीटमेंट लेता रहता है और इन सबमें कौस्मेटिक सर्जरी लोगों को मनचाही खूबसूरती भेंट देता है. जी हां, आज कौस्मेटिक सर्जरी खूबसूरती का बेजोड़ विकल्प बन गया है. लोग कॉस्मेटिक सर्जरी के जरिए अपने चेहरे और नैन-नक्श दुरुस्त कराकर आकर्षक नज़र आ रहे हैं. ऐसा  नहीं है  कि सुंदरता की चाहत सिर्फ महिलाओं में ही है , बल्कि पुरुषों में भी यह शौक तेजी से  बढ़ गया है.सिर्फ आम जनता ही नहीं  हिंदी फिल्मों के कलाकार तो अपनी खूबसूरती निखारने के लिए इस तकनीक का इस्तेमाल पहले से करते आ रहे हैं.अभिनेत्री कंगना रनौत, ऐश्वर्य राय बच्चन,  जैसी अभिनेत्रियों के नाम शामिल जगजाहिर हैं.

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सर्जरी के प्रकार

राइनोप्लास्टी सर्जरी– यदि आप अधिक लंबी या छोटी, फैली हुई, टेढ़ी नाक के आकार को लेकर परेशान  हैं, तो कौस्मेटिक नोज रीशेपिंग (राइनोप्लास्टी) से आप  अपने नाक को रीशेप करा सकते हैं.

लिप औग्मेंटेशन सर्जरी – इस सर्जरी को कई जाने माने मशहूर हस्तियों ने अपनाया है और अपने होठों को खूबसूरत बनाया है. यह सर्जरी फुलर और प्लम्पर लिप्स देती है. इन दिनों इंजेक्टेबल डरमिनल फिलर्स सबसे आम लिप ऑग्मेंटेशन विधि हैं.

हेयर ट्रांसप्लांट– हेयर ट्रांसप्लांट  ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें सर्जन सर्जिकल तरीके से गंजेपन  की समस्या को दूर करते है. इसमें सर्जन आमतौर पर बालों को पीछे या सिर के पीछे की ओर से घुमा कर उन्हें सिर के अगले या ऊपरी हिस्से (गंजे क्षेत्रों) में लगाते हैं .

ब्रो लिफ्ट- अगर आपक़ी आईब्रोज मोटी हैं, छोटी हैं, चोट का निशान या झुकी हुई है. आप ब्रो लिफ्ट सर्जरी करवा सकती हैं.  ये माथे पर साथ ही साथ नोज़ ब्रिज पर मौजूद शिकन की रेखाओं को काम करती हैं और यह ऊपरी पलकों को हुड करने वाली सैगिंग ब्रो को उठाने मे मदद करती हैं.

ब्रो लिफ्ट सर्जरी– अगर आपक़ी आईब्रोज मोटी हैं, छोटी हैं, चोट का निशान या झुकी हुई है . आप ब्रो लिफ्ट सर्जरी करवा सकती हैं. ये माथे पर साथ ही साथ नोज़ ब्रिज पर मौजूद शिकन की रेखाओं को काम करती हैं और यह ऊपरी पलकों को हुड करने वाली सैगिंग ब्रो को उठाने मे मदद करती हैं.

रिटिडेक्टमी सर्जरी– इसे आमतौर पर फेसलिफ्ट के रूप में जाना जाता है, यह जॉलाइन के आस पास ढीली त्वचा को कसती है. यह मुंह और नाक के आस-पास के गहरे क्रेज़ को भी दूर करती है और ठुड्डी और गर्दन पर अतिरिक्त फैट और मास को भी हटाती है.

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बोटौक्स औग्मेंटेशन – चेहरे की त्वचा को झुर्रियों रहित और कसा हुआ दिखाने के लिए बोटौक्स का इंजेक्शन लिया जाता है.बोटौक्स सर्जरी त्वचा पर आने वाली झुर्रियों को दूर करती है, इसके अलावा नितंबों के आकार और आकृति को बढ़ने के लिए किया जाता है . यह आपके फिगर के संतुलन को बेहतर बनाता है.

ब्रेस्ट आगूमेंटशन– ब्रेस्ट इंप्लांट सर्जरी को ब्रेस्ट ऑग्मेंटेशन/ ऑग्मेंटेशन मैमोप्लास्टी के नामों से भी जाना जाता है और इसके अलावा इसे अंग्रेजी में जिसे कभी-कभी बौब जौब भी कहा जाता है, ब्रेस्ट इंप्लांट सर्जरी से  सर्जरी से है, जिसके माध्यम से ब्रेस्ट के आकारों को बढ़ाया जाता है.

लिपोसक्शन सर्जरी – एक कौस्मेटिक प्रक्रिया है जो वसाको हटाती है जिसे आहार और व्यायाम के माध्यम से कम नहीं किया जा सकता है. इसमें शरीर के विशिष्ट क्षेत्रों, जैसे कि पेट, कूल्हों, नितंबों, जांघों, गर्दन या बाहों से वसा को हटाने के लिए सक्शन तकनीक का उपयोग किया जाता है.

एब्डोमिनोप्लास्टी सर्जरी –  यदि आप स्लिम ट्रिम दिखने की चाहती हैं तो एब्डोमिनोप्लास्टी सर्जरी करवा सकती हैं . एब्डोमिनोप्लास्टी को टमी टक सर्जरी भी कहते हैं. सर्जरी के बाद पेट एकदम पतला और खूबसूरत नजर आता है.

इंजेक्शन और फिल्लरः उम्र बढ़ने के कारण होने वाली रेखाओं और झुर्रियों को दूर करने के लिए सबसे अधिक इस्तेमाल किया जाने वाला गैर-सर्जिकल तरीका. ह्यलुरौनिक एसिड फिल्लर इस श्रेणी में सबसे लोक प्रिय उत्पाद हैं.

केमिकल पीलिंगः इस ट्रीटमेंट को विशेषतौर पर त्वचा की रंगत निखारने और खूबसूरत बनाने के लिए किया जाता है. इसमें मृत कोशिकाओं को साफ करने के लिए केमिकल सौल्यूशन का प्रयोग किया जाता है. केमिकल सौल्यूशन त्वचा की ऊपरी परत से मृत कोशिकाओं को साफ कर देता है.

लेज़र हेयर रिमूवलः एक ऐसी प्रक्रिया है जो प्रकाश की एक संकेंद्रित किरण (लेजर) का उपयोग करती है जो अन चाहे बालोंको हटाती है क्योंकि यह त्वचा के नीचे के रोम छिद्रों को नष्ट कर देता है जिससे बाल पैदा होते हैं. एल एच आर सौंदर्य चिकित्सा लेजर प्रक्रियाओं की दुनिया का गोल्डन गेटवे है.

डा. अजय राणा कहते हैं कि किसी व्यक्ति को किसी भी सर्जिकल और गैर-सर्जिकल प्रक्रिया ओं से जुड़े सभी तथ्यों की अच्छी तरह से समीक्षा करनी चाहिए. कौस्मेटिक सर्जरी का विकल्प चुनने के लिए इच्छुक व्यक्ति को किसी विशेष डौक्टर से परामर्श करना चाहिए.

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फरिश्ता : भाग 5

वार्डन सिरिल ने जबसे पूनम को अंकुर की तस्वीर दिखायी थी, उसकी हालत अजीब सी हो रही थी. उसको समझ में नहीं आ रहा था कि उसके दिल में जो भावनाओं का जो ज्वार उठ रहा है, उसे किसके साथ बांटे. किससे कहे अपने दिल की पीर. डौक्टर सूर्यकांत को वह अपने मन-मन्दिर का देवता मान चुकी थी. उनके अलावा किसी अन्य पुरुष की तो उसने कभी कल्पना भी नहीं की थी. वह जानती थी कि वह उनके काबिल नहीं है. ये तो उनका अहसान था कि एक गरीब बेसहारा लड़की को उन्होंने इतना अपनापन दिया. उसकी इतनी मदद की. उनका अहसान तो वह सात जनम लेकर भी नहीं उतार सकती थी. वो तो अपने देवता के चरणों में खुद को मिटा देना चाहती थी. उसके दिल में तो बस डौक्टर सूर्यकांत की छवि बसी थी और उनके अलावा वह किसी दूसरे की ओर देख भी नहीं सकती थी. किसी अन्य को बर्दाश्त ही नहीं कर सकती थी. उसकी हालत बड़ी विक्षिप्त सी हो रही थी. वो रात भर रोती रही और अपनी डायरी के पन्ने काले करती रही. उसके मनोभाव, उसके जज़्बात, उसकी हर भावना डायरी के पन्नों में सिमटती जा रही थी.

सुबह बड़ी देर तक दरवाजा खटखटाने के बाद भी जब वह न खुला तो चपरासियों की मदद से वार्डन सिरिल को दरवाजा तुड़वाना पड़ा. वह घबरायी हुई अन्दर पहुंची तो पूनम बिस्तर पर पड़ी उल्टी सांसें ले रही थी. आननफानन में उन्होंने एम्बुलेंस बुलवायी, डॉक्टर सूर्यकांत को फोन किया और अस्पताल में पूरे वक्त वह खुदा से पूनम की सलामती की दुआएं मांगती बेचैनी से इधर से उधर घूमती रहीं.

पूनम ने चूहेमार दवा खाकर खुदकुशी करने की कोशिश की थी. डॉक्टर सूर्यकांत को जब ये बात पता चली तो उसे बड़ा धक्का लगा.

‘आखिर क्यों…?’ वह समझ नहीं पा रहा था. यह तो अच्छा हुआ कि समय से दरवाजा टूट गया वरना वह मास्टर जी को क्या मुंह दिखाता? आखिर क्या वजह थी कि पूनम को जहर खाना पड़ा…? उसका दिमाग यह सोच-सोच कर घूम रहा था. पूनम अभी तक पूरी तरह होश में नहीं आयी थी. अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में डौक्टरों ने उसे कई उल्टियां करवायी थीं, जिससे उसके पेट से सारा जहर निकल जाए, मगर जब तक वह पूरी तरह होश में नहीं आ जाती, उसके जीवन को खतरे से बाहर नहीं कहा जा सकता था. डॉक्टर सूर्यकांत बेहद परेशान था. वह सिस्टर सिरिल के सामने बच्चों के समान फफक कर रो पड़ा… सिस्टर ने अपने बेटे की तरह उसे अपनी बाहों में समेट लिया और बोलीं…

‘हम लोग पूनम को समझ नहीं सके डॉक्टर… हम उसकी शादी के लिए वर ढूंढते रहे और उससे एक बार भी नहीं पूछा…’

डौक्टर ने अचम्भित होकर सिस्टर की तरफ देखा. उसकी आंखों में सवाल था.

सिस्टर सिरिल ने अपने गाउन की जेब से एक लाल रंग की छोटी सी डायरी निकाल कर डॉक्टर की ओर बढ़ा दी.

‘ये डायरी पूनम के हाथ में मिली थी… इसे पढ़ो… सबकुछ स्पष्ट हो जाएगा… तुम पूनम के अभिभावक होने का कर्तव्य निभाते रहे और वो नादान मन ही मन तुम्हारी पूजा करती रही…’ सिस्टर का स्वर भर्रा गया.

डौक्टर सूर्यकांत आश्चर्य से वार्डन की शक्ल देखता रहा. कंपकपाते हाथों से उसने डायरी खोली. वह जैसे-जैसे उसे पढ़ता जा रहा था, उसमें लिखा एक-एक शब्द अश्रु बन कर उसकी आंखों से फूट रहा था. उसकी डायरी में लिखी आखिरी लाइन पढ़कर वो बिलख उठा. कितना दर्द छुपा था उसमें….

‘मेरे देवता मुझे माफ कर देना… मैं जीना चाहती थी मगर सिर्फ तुम्हारी बाहों में… मैं इस काबिल तो नहीं कि तुम्हारी दुल्हन बन सकूं मगर अपने आपको तुम्हारे चरणों में समर्पित तो कर सकती हूं न…?’

डौक्टर सूर्यकांत बुरी तरह रो उठा, ‘सिस्टर, उसने मुझसे पहले क्यों नहीं कहा…?’ उसकी हिचकियां बंध गयीं.

‘अभी भी वक्त है बेटा… जाओ उसे वापस बुला लो… शायद अब तुम्हारी आवाज ही उसे वापस ला सकती है… जाओ बेटा…’ सिस्टर सिरिल रोते हुए बोलीं.

डौक्टर सूर्यकांत इमरजेंसी रूम की तरह दौड़ पड़ा. शायद उसकी पूनम को उसी का इंतजार है. वो पागलों की तरह उस पर झुक गया. झर-झर बहते उसके आंसुओं ने पूनम का चेहरा तर कर दिया.

‘पूनम… आंखें खोलो पूनम… देखो मैं तुम्हारा सूर्य… प्लीज पूनम होश में आओ… मेरी जान… मेरी जिन्दगी आंखें खोलो… पूनम… प्लीज…’ वह लगातार रोये जा रहा था.

पूनम के अचेत शरीर में अचानक एक सिहरन सी उठी और उसने कराहते हुए आंखें खोल दीं…

‘मेरे देवता…’

डौक्टर सूर्यकांत ने उसे चूमते हुए कस कर अपनी बाहों में भींच लिया जैसे वह उसे अपने सीने में समो लेना चाहता हो. दो दिल एक दूसरे के करीब आ गये, हमेशा-हमेशा के लिए.

दरवाजे पर खड़ी सिस्टर सिरिल अपने आंसू पोछते हुए मुस्कुरा उठीं और सीने पर क्रास बनाती वापस लौट पड़ीं.

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