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तारक मेहता का उल्टा चश्मा: क्या अब नहीं लौटेंगी दया बेन!

छोटे पर्दे का मशहूर सीरियल ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ में दया बेन यानी दिशा वकानी का दर्शकों को बेसब्री से इंतजार है. आए दिन दया बेन की इस शो में लौटने की खबर सुर्खियों में छायी रहती है. जी हां, एक बार फिर इसी वजह से दिशा वकानी सुर्खियों में है.

आपको बता दे पीछले 3 साल से दया बेन इस शो से गायब है. लेकिन इसके बावजूद भी ये चर्चा में रहती हैं. दरअसल दिशा वकानी मैटरनीटी लीव पर थी, पर ये लीव भी एक साल से ज्यादा का हो चुका है. खबरों के अनुसार, गरबा के दौरान यानी अक्टुबर में दया बेन की इस शो में वापसी करने वाली थी. लेकिन शो में वह नहीं दिखी.

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एक रिपोर्ट के मुताबिक दिशा वकानी नवरात्री के दौरान सीजन में वापसी करेंगी और आपकमिंग एपिसोड की शूटिंग भी हो चुकी है. हालांकि पहले भी ऐसी खबरें आई थी कि दिशा शो में वापसी करेंगी. ये भी खबर आई थी कि दया अपने पति जेठालाल से वीडियो काल पर बात करती दिखाई देंगी. लेकिन दिश इस शो में नहीं दिखाई दी.

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बता दें कि मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक दयाबेन जल्द शो में वापस नहीं करेंगी. जैसा कि पहले भी वह इस शो के मेकर्स को बता चुकी है कि वह दिन में 6 घंटे ही काम करेंगी क्योंकि वह अपने परिवार की ओर भी ध्यान देनी चाहती है. फिलहाल दया बेन के शो में आने की कोई पक्की खबर नहीं है.

नागरिकता संशोधन बिल के खिलाफ प्रोटेस्ट

9 दिसंबर की रात को कई घंटे चली बहस के बाद सीएबी, नागरिकता संशोधन बिल लोकसभा में पास हो गया जिसके पक्ष में 311 वोट पड़े थें और विरोध में 80 वोट. अब इस बिल को बुधवार को राज्यसभा में पास किया जा सकता हैं, लेकिन इससे पहले ही इस बिल को लेकर कई जगह पर लोगों ने विरोध शुरू कर दिया है. इस बिल को लेकर संसद में हंगामा होना आम बात है लेकिन इस बिल के पास होने के बाद जगह-जगह कई शहरों में प्रदर्शन हो रहे हैं. कुछ लोग जश्न मना रहें हैं तो कुछ लोग इसका विरोध कर रहे हैं.असम, भापाल,कोलकाता, बिहार कई जगहों पर नागरिकता बिल को लेकर आगजनी,तोड़फोड़,पथराव और विरोध प्रदर्शन कर रहें हैं. गुवाहाटी, अगरतला समेत कई जगहों पर विरोध हो रहा है. लोकसभा में नागरिकता बिल पास होते ही ये विरोध शुरू होने लगा. जैसा की सभी जानते हैं कि असम में सबसे ज्यादा घुसपैठ होती है. इसके बावजूद भी वहां पर नागरिकता बिल के खिलाफ प्रदर्शन हो रहा है. इसे लोग संविधान के खिलाफ बता रहे हैं .इसको लेकर जंतर-मंतर पर जेडीयू कार्यालय में भी विरोध व तोड़फोड़ किया गया है. मुंबई में भी इस बिल के खिलाफ लोग प्रदर्शन कर रहे हैं.

नागरिकता संशोधन बिल(CITIZEN AMENDMENT BILL) के पास हो जाने और कानून बनने के बाद पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश में जो भी व्यक्ति धर्म के कारण उत्पीड़न झेल रहा है और वहां से भागकर भारत आकर बसते हैं तो भारत उसको सीएबी(CAB) के तहत नागरिकता प्रदान करेगी,चाहे वो किसी भी धर्म के हों.लेकिन कुछ लोगों को लगता है कि ये संविधान के खिलाफ है और इससे खतरा पैदा हो सकता है. इसलिए नागरिकता संशोधन बिल के खिलाफ जगह-जगह पर विरोध प्रदर्शन हो रहा है. विपक्षी पार्टियों का कहना है कि ये धर्म के नाम पर देश को बांटने की कोशिश की जा रही है जो कि सही नहीं है. जयपुर में प्रदर्शन के दौरान बिल की कापियां भी फाड़ी गई और उन्हें जलाया गया. इतना ही नहीं संसद में बहस के दौरान असदुद्दीन ओवैसी ने भी अपनी बात रखते हुए बिल की कौपी फाड़ दी थी. दिल्ली में बीजेपी मुख्यालय और राउज एवेन्यू कोर्ट के पास भी कांग्रेस के लोगों ने नागरिकता संशोधन बिल को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया. इस बिल को लेकर सबसे ज्यादा विरोध असम में हो रहा है जबकि असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने इस बिल का स्वागत किया है. अब देखना होगा कि इतने विरोध के बाद राज्यसभा में क्या होता है ?

एक बार फिर इतिहास पर बनी कोई फिल्म बनी विरोध का कारण…

हाल ही में रिलीज हुई फिल्म पानीपत को लेकर कई शहरों में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. लोगों का कहना है कि हमारे इतिहास के साथ खिलवाड़ हुआ है. इस फिल्म को देखकर लोगों के अंदर का गुस्सा फूट पड़ा. जयपुर में कुछ लोगों ने आइनौक्स थियेटर के अंदर तोड़-फोड़ की और सिनेमाहाल में नुकसान किया,खिड़कियां तोड़ दी गईं.

इतना ही नहीं सिनेमाहाल के बाहर भी लोगों ने जमकर नारेबाजी और प्रदर्शन किया है. फिल्म पानीपत के पोस्टर जलाए. इतना ही नहीं प्रदर्शन में राजस्थान सरकार के मंत्री विश्वेंद्र सिंह भी शामिल हुए थे. आगरा में भी इस फिल्म का विरोध हो रहा है. वहां पर जाट समाज के विरोध के चलते सिनेमाघरों में फिल्म पानीपत नहीं दिखाई जा रही है. पोस्टर भी उतार लिए गए हैं. लोगों का कहना है कि इस फिल्म में राजा सूरजमल के चरित्र को गलत दिखाया है और इसलिए ये प्रदर्शन हो रहा है क्योंकि हमारे इतिहास के साथ छेड़छाड़ किया गया है. सूरजमल के वंशज का कहना है कि निर्देशक इतिहास का सही से शोध नहीं करते हैं और फिल्म बना लेते हैं जबकि उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए. इस फिल्म में संजय दत्त और अर्जुन कपूर ने लीड रोल निभाया है. इन दोनों ने पहली बार साथ काम किया है और फिल्म आते ही विवादों में घिर गई. ऐसा नहीं है कि ये कोई पहली बार हुआ है बल्कि इससे पहले भी जब कोई इतिहास पर फिल्म बनी है तो ऐसे विरोध प्रदर्शन हुए हैं और विवादों का कारण बने हैं.

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पद्मावत

संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘पद्मावत’ भी विरोध का कारण बनी थी. इस फिल्म को लेकर भी प्रदर्शन हुए थे.इस फिल्म का नाम पहले ‘पद्मावती’ था बाद में इसका नाम और ‘पद्मावत’ कर दिया गया और साथ ही इस फिल्म में कुछ सीन में रानी पद्मिनी का अपमान माना जा रहा था.इस फिल्म की तो रिलीज डेट भी टाल दी गई थी.करणी सेना समेत कई राजपूत संगठनों ने इस फिल्म का विरोध किया था.

बाजीराव मस्तानी

साल 2015 में जब ‘बाजीराव मस्तानी’ फिल्म आई थी तब वो भी विवादों में घिर गई थी.उसमें भी इतिहास से छेड़छाड़ करने औऱ लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचाने के आरोप लगाया गया था.बाजीराव मस्तानी की रिलीज से पहले पुणे में जमकर इसका विरोध प्रदर्शन हुआ था.इस फिल्म में ‘पिंगा’ नृत्य को भी गलत बताया गया. कहा गया कि ये नृत्य मराठों की एक संस्कृति है औऱ इसे फिल्म में एक आइटम सॉन्ग की तरह पेश किया है.ये सभी कारण थें जो ये फिल्म विवादों में घिरी.

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जोधा-अकबर

जब फिल्म जोधा-अकबर आई थी तो ये फिल्म भी विवादों का हिस्सा रही.लोगों का तब भी यही कहना था कि इसमें इतिहास के साथ छेड़छाड़ हुई है.इस फिल्म में अकबर की शादी अजमेर की राजकुमारी से दिखाई गई थी,जिनका नाम हरकन बाई था इसलिए जोधा बाई से अकबर का विवाह नहीं हुआ था.ऐसी ही कुछ दलीलों के साथ इस फिल्म के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की गई थी.

मंगल पांडे

कुछ साल पहले एक फिल्म आई थी मंगल पांडे.सन् 1857 में मंगल पांडे ने स्वतंत्रता के लिए जो क्रांति की,उस पर आधारित फिल्म आई ‘मंगले पांडे’.जिसमें मंगल पांडे के जीवन को दिखाया गया लेकिन ये फिल्म भी विवादों के घेरे में आ गई थी और मंगल पांडे के कथित वंशजों ने जमकर विरोध प्रदर्शन किया था.

ऐसी कई फिल्मे इतिहास पर बनी हैं जिन्हें लेकर विरोध हुए हैं. आने वाले कुछ समय में अक्षय कुमार की फिल्म पृथ्वीराज आने वाली है जो कि इतिहास पर ही आधारित है. इसमें अजमेर के राजा पृथ्वीराज का जीवन दिखाया जाएगा.अब देखना ये होगा कि ये फिल्म भी सही-सलामत चलती है या फिर इसको लेकर भी कोई विवाद खड़ा होता है.

कश्मीर से आर्टिकल 370 हटने के बाद भी जारी है घुसपैठ, खुद सरकार ने माना

केंद्र सरकार ने कुछ महीनों पहले ही जम्मू कश्मीर को स्पेशल दर्जा देने वाले आर्टिकल 370 को खत्म कर दिया. तमाम राजनीतिक दलों के विरोध को दरकिनार करते हुए सरकार ने इस फैसले को ले लिया. सरकार के पास तर्क था कि इससे घाटी की स्थितियां सुधरेगी लेकिन अब सरकार को खुद लग गया कि इसको हटाने के बाद भी घाटी के हालात पर कोई फर्क नहीं पड़ा है. हालांकि तब से लेकर अभी तक घाटी में कई बार आतंकी वहां के आम लोगों को निशाना जरूर बना चुके हैं. कश्मीर के व्यवसाय की बात करें तो उसमें भी खासा फर्क पड़ा है. उसका कारण है कि आतंकी उन लोगों को निशाना बना रहे हैं जोकि वहां पर कारोबार करता है. आतंकी कई सेब व्यापारियों को भी जान से मार चुके हैं.

केंद्र सरकार ने स्वीकार किया है कि अनुच्छेद 370 हटने के बाद भी सीमा पार से आतंकी घुसपैठ की कोशिशें जारी हैं. अगस्त, 2019 में अनुच्छेद 370 हटने के बाद से अब तक घुसपैठ के 84 प्रयास हुए हैं, इस दौरान 59 आतंकियों के सीमा में घुसने की खबर है. लोकसभा में मंगलवार को हुए एक सवाल के जवाब में गृह मंत्रालय ने यह जानकारी दी है. दरअसल, आंध्र प्रदेश की इलुरु सीट से वाईएसआर कांग्रेस सांसद श्रीधर कोटागिरी ने पूछा था कि अनुच्छेद 370 हटने के बाद नियंत्रण रेखा पार कर भारत में घुसपैठ करने वाले आतंकवादियों की संख्या कितनी है. उन्होंने यह भी पूछा था कि भारतीय सुरक्षा बलों द्वारा मारे गए एवं पकड़े गए आतंकवादियों की संख्या कितनी है?

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लिखित जवाब में गृह मंत्रालय ने मंगलवार को बताया कि वर्ष 1990 से लेकर एक दिसंबर 2019 तक सुरक्षा बलों ने आतंकवादी हिंसा की घटनाओं में संलिप्त 22,527 आतंकवादियों को मार गिराया है. सुरक्षा बलों की प्रभावी निगरानी के कारण वर्ष 2005 से लेकर 31 अक्टूबर, 2019 तक सीमापार से घुसपैठ के प्रयासों के दौरान 1011 आतंकी मारे गए, वहीं 42 आतंकी गिरफ्तार किए गए, जबकि 2253 आतंकवादी खदेड़े गए.

गृह मंत्रालय ने बताया कि घुसपैठ के प्रयासों को विफल करने के लिए निरंतर डोमिनेशन औपरेशन (निरंतर प्रभुत्व कायम रखने) की कार्रवाई की जा रही है. सीमा पर घुसपैठ रोधी मजबूत ग्रिड भी उपलब्ध है.

अगस्त महीने के पहले सप्ताह में जम्‍मू-कश्‍मीर से धारा 370 को खत्‍म करने की घोषणा की गई है. राष्‍ट्रपति रामनाथ कोविंद के आदेश के बाद भारत के गृह मंत्री अमित शाह ने राज्‍यसभा में इसकी घोषणा की. गृह मंत्री ने सदन में कहा कि जम्‍मू-कश्‍मीर से अनुच्‍छेद 370 के खंड एक को छोड़कर सभी प्रावधानों को खत्‍म किया जा रहा है. साथ ही लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश के रूप में जम्‍मू-कश्‍मीर से अलग किया जा रहा है.

Exclusive: 25 साल की हुई ‘मेहर’, जानें कैसे बनीं TV की ‘छोटी सरदारनी’?

कलर्स के पौपुलर शो छोटी सरदारनी की मेहर यानी निमरत कौर अहलूवालिया 11 दिसंबर को अपना 25वां बर्थडे मना रही हैं. इस खास मौके पर हमने उनसे एक एक्सक्लूसिव बातचीत की. तो आइए जानते है निमरत की लाइफ और उनके शो से जुड़ी कुछ अनदेखी पर दिलचस्प बातें.

1. निमरत, ज्यादातर न्यू एक्ट्रेसेस, लव स्टोरी बेस्ड शो से करियर शुरू करती हैं, लेकिन आपने ऐसा नहीं किया और लीग से हटकर रोल चुना. ऐसा क्यों?

सच कहूं तो मैं हमेशा से ऐसा रोल करना चाहती थी जिसमें एक आर्टिस्ट के तौर पर मुझे खुद को एक्सप्लोर करने का मौका मिले. इस शो की स्क्रिप्ट बहुत ही खूबसूरत है. ये सही है कि ज्यादातर न्यू एक्ट्रेस गर्ल नेक्सट डोर जैसे शोज से अपना करियर शुरू करती है लेकिन मुझे इस एक रोल में ही कई अलग-अलग किरदार निभाने का मौका मिला. एक बेटी से लेकर एक प्रेमिका, एक प्रेग्नेंट लड़की, सौतेली मां और दूसरी बीवी तक का सफर मैंने बहुत जल्दी तय कर लिया है. मैं बहुत खुशनसीब हूं जो मुझे मेहर का रोल करने का मौका मिला.

सच्चाई तो ये है कि एक एक्टर की ग्रोथ इन्हीं चीजों से होती है. अगर आपका फोकस बस नेम और फेम जैसी चीजों पर होता है तो आप भूल जाते हो कि एक आर्टिस्ट की सबसे बड़ी खासियत उसकी ईमानदारी है और उसका खुद को एक्सपोलर करने का तरीका है. इसी वजह से मैंने ये रोल चुना.

2. निमरत, 24 साल की उम्र में आप एक मां का रोल प्ले कर रही है और ये आपका पहला शो है. तो कितना चैलेंजिंग था ये रोल करना?

बहुत चैलेंजिंग था, हर एक्टर के मन में ये डर होता है कि आप कही टाइप कास्ट न हो जाए. लेकिन आज के दौर में सिनेमा इतना बदल गया है कि आप जब अपने कैरेक्टर को पूरी ईमानदारी से निभाते है तो सब ठीक हो जाता है.

जहां तक एक मां का रोल करने की बात है तो मैं आपको बता दूं कि प्यार एक ऐसा इमोशन है जो हम कभी न कभी एक्सपीरियंस कर चुके होते हैं इसलिए वो करना चैलेंजिंग नहीं था, लेकिन जब शो में मेहर की प्रेग्नेंसी वाला फेज शुरू हुआ, तब खुद को प्रेग्नेंट समझना और फील करना बिल्कुल अलग था.

मैंने ये मान लिया था कि मैं सच में प्रेग्नेट हूं. मुझे याद है कि एक बार रात को 12.30 बजे मैं एक केमिस्ट की शॉप पर थी. वहां मुझे दूध की एक बॉटल दिखी जो मैंने खरीद ली. मैं अपने कैरेक्टर में इतना घुस गई थी कि अगले 15-20 दिन तक मैं उस बॉटल को रोज अपने हाथ में रख कर सोती थी. कुलमिलाकर आप जब किसी किरदार के लिए खुद को इतना पुश करते हैं तो उसकी झलक अपने आप उस किरदार में दिखने लगती है.

3. क्या असल जिंदगी में भी आपने मेहर जैसा कोई कैरेक्टर देखा है? जिससे आपको ये रोल करने की प्रेरणा मिली हो.

सच कहूं तो मैंने मेहर के जैसे मुश्किल हालात कभी नहीं देखे और भगवान करे कि कभी देखूं भी ना. लेकिन मुझे इस कैरेक्टर की कुछ चीजों ने अट्रैक्ट किया और कुछ बातें मेरी रियल लाइफ से मिलती-जुलती है. जैसे मेरे पापा भी आर्मी से थे और सरदारनी होने के नाते मेरा फैमिली बैकग्राउंड भी मेहर से मिलता जुलता है. मेहर की तरह मैं भी 4-5 भाइयों के बीच इकलौती बहन हूं. इसके अलावा मैं पढ़ाई के लिए 5 साल चंडीगढ़ में भी रह चुकी हूं तो कल्चर वाइस जो चीजे उस वक्त एक्सपीरियंस और एक्सपोलर की थी वो मुझे इस शो के दौरान काम आई.

आजकल लोग बहुत ग्रे होते हैं, लेकिन मेहर का किरदार बहुत ब्लैक एंड व्हाइट है. वो सही को सही कहती है और गलत को गलत. मेहर बहुत समझदार लड़की है, जिसकी अपनी सोच और समझ है.

ये सभी चीज़ें मुझे कनेक्ट कर गई और आपको ये सब बताकर मुझे अहसास हो रहा है कि मैं इस रोल से कितनी जुड़ी हुई हूं. शायद इसलिए जब मैं छोटी सरदारनी के लिए ऑडिशन और लुक टेस्ट दे रही थी तब मेरे मन में बस यही बात थी कि ये रोल मुझे मिल जाए.

 

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Wishing you all the happiness, always. Happy Children’s Day cutie ❤️?

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4. मेहर का रोल करने के लिए आपने क्याक्या तैयारियां की थी?

शो के शुरू होने से करीब एक-डेढ़ महीने पहले मैंने मशहूर थिएटर आर्टिस्ट विभा छिब्बर मैम के साथ एक महीने की वर्कशॉप की थी मेरे कैरेक्टर को समझने के लिए. अगर आज मुझे अपनी एक्टिंग का 10 परसेंट भी अच्छा और सच्चा लगता है तो वो सिर्फ उनकी वजह से है.

5. रियल लाइफ में आप कैसी है और आपको क्या-क्या करना पसंद है?

असल जिंदगी में मैं बहुत ही सिंपल हूं. मैं एक आम लड़की हूं जिसे अपनी फैमिली से बेहद प्यार है. मैं बहुत ही ज्यादा आत्मनिर्भर हूं. मुंबई में अकेले रहती हूं और खाली टाइम में फ्रेंड्स के साथ समय बिताती हूं. असल जिंदगी में थोड़ी टॉम बौय हूं. फैशन और फोटोज को लेकर क्रेजी हूं. कुल मिलाकर एक टिपिकल लड़की हूं. सच कहूं तो मुझे लगता है कि मेरे अंदर अभी भी एक बच्चा है और मैं हमेशा ऐसी ही रहना चाहती हूं.

6. मेहर आप स्क्रीन पर तो अच्छी दिखती ही हैं, ऑफ स्क्रीन भी काफी खूबसूरत है तो आपकी ब्यूटी और फिटनेस का सीक्रेट क्या है?

सच तो ये है कि मैं कुछ भी नहीं करती. मुझे इस बात के लिए अपनी मां की डांट भी खानी पड़ती है कि मैं अपना ज्यादा ध्यान नहीं रखती हूं. लेकिन एक बात मैं जरूर कहूंगी कि जब आप एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में आ जाते हैं और आपको ये एहसास होता हैं कि आप ऐसी पोजीशन पर है जहां आप न सिर्फ अपने काम से बल्कि अपने लुक्स से भी लोगों को इंस्पायर कर सकते हैं.

मैं शुक्रगुजार हूं कि मिस इंडिया कॉन्टेस्ट और फौजी लाइफ स्टाइल ने मेरी पर्सनल ग्रूमिंग पर काफी असर डाला. मैं कैसे उठती-बैठती हूं, मेरा रहन-सहन और तौर-तरीके ये सब बातें मुझमें बचपन से थीं और वक्त के साथ और ग्रूम होती गई. मिस इंडिया कॉन्टेस्ट का हिस्सा बनने के बाद आप हेयर केयर और मेकअप करना भी सीख जाते हैं.

स्किन केयर के लिए मैं यही कहूंगी कि नेचुरल रहें, पूरी नींद लें और खूब सारा पानी पिए.

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7. मेहर के लिए फैमिली सबसे अहम है और निमरत के लिए?

जी बिल्कुल, मेरे लिए भी फैमिली सबसे अहम है. मुझे लगता है कि मेरी फैमिली का जो सहयोग रहा है उसी की वजह से मै आज इस मुकाम पर हूं. मेरी जो पूरी जर्नी रही है, वकालत से लेकर एक्टिंग में आने के फैसले तक उन्होंने हमेशा पूरा सपोर्ट किया. मेरी लाइफ के बारे मे ऐसा कुछ भी नहीं है जो उन्हें पता नहीं है. इसके अलावा मुझे पेट्स बहुत पसंद है, खासकर कुत्ते. मैं नेचर से जुड़ी हुई हूं. ये कुछ ऐसी चीजे हैं जो मेरे दिल के करीब हैं.

8. निमरत, अपने बर्थडे को लेकर आपका क्या प्लान है, इस खास दिन को आप किस तरह से सेलिब्रेट करने वाली हैं?

पिछले साल जब मैं मिस इंडिया का हिस्सा बनी थी, तब मैंने Ketto India के साथ एक टायअप किया था, जिसके लिए मैंने पिछले साल करीब डेढ़ लाख रूपए का फंड रेज किया था. इस साल भी मैं कुछ ऐसा ही करने वाली हूं, क्योंकि छोटी सरदारनी काफी पौपुलर हो चुका है और मेहर को लोग काफी पसंद करते हैं इसलिए मैं कुछ ऐसा करना चाहती हूं, जिससे समाज का भला हो.

हमने निमरत बर्थडे फंड रेज शुरू किया है जिसकी लिंक आप मेरे इंस्टाग्राम पर देख सकते हैं. ये सारा फंड एक एनजीओ को जाएगा जो गरीब बच्चों की पढ़ाई के लिए काम करते हैं.

मैं ये सब दर्शकों के प्यार की वजह से ही कर पा रही हूं जिसके लिए मैं सभी की शुक्रगुजार हूं. और इसी वजह से मेरा बर्थडे काफी अलग और स्पेशल होगा.

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9. छोटी सरदारनी और मेहर के फैंस को कोई मैसेज देना चाहेंगी?

मैं हमेशा से एक ऐसी पोजीशन पर पहुंचना चाहती थी, जहां मैं लड़कियों को प्रेरित कर पाऊं या उनके लिए कुछ कर सकूं. मैं बराबरी के कॉन्सेप्ट पर भरोसा करती हूं. ये शो भी मैंने इसलिए चुना था क्योंकि मुझे लगा कि ये शो वुमन एंपावरमेंट की बात करता है. इस शो के जरिए मैं लड़कों को मैसेज देना चाहती हूं कि अपनी मां, बहन, बेटी या पत्नी को कैसे ट्रीट नहीं करना चाहिए और लड़कियों से ये कहना चाहती हूं कि किसी से भी दबने की या कोई गलत बात सहने की कोई जरूरत नहीं है.

अगर छोटी सरदारनी के जरिए हम अपने दर्शकों की सोच को 10 परसेंट भी बदल पाए और समानता की तरफ बढ़ पाए तो ये हम सबके लिए बहुत बड़ी उपलब्धि होगी. इसलिए जो ये शो देखते है और जो नहीं भी देखते हैं, मैं उन सभी से ये रिक्वेस्ट करती हूं कि प्लीज ये शो देखिए क्योंकि वाकई में इसमें कुछ अलग है और इसकी कहानी आपके दिलों को छू लेगी.

निमरत आपके इस जज्बे को हमारा सलाम और हमारी तरफ से आपको जन्मदिन की ढेर सारी बधाइयां.

मेहर की कहानी जानने के लिए देखते रहिए छोटी सरदारनी, हर सोमवार से शनिवार शाम 7.30 बजे सिर्फ कलर्स पर.

घर पर बनाएं गार्लिक चिली प्रौन्स

प्रौन्स को गार्लिक और चिली के साथ बनाया जाता है. इसे बनाना काफी आसान है. इसे आप घर पर होने वाली डिनर पार्टी में भी सर्व कर सकते हैं.

सामग्री

प्रौन्स (4)

एक्ट्रा वर्जिन औलिव औयल (3 टेबल स्पून)

7-8 लहसुन की कलियां ( टुकड़ों में कटा हुआ)

3-4 साबुत लाल मिर्च  (टुकड़ों में कटा हुआ)

नमक (स्वादानुसार)

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बनाने की वि​धि

प्रौन्स को साफ करने उसके शेल्स को अलग कर लें.

एक पैन में तेल को गर्म करें, इसे लहसुन और अदरक डालें,  इसे एक मिनट पकाएं.

अब इसमें प्रौन्स डालें और इसमें अब 30 मिनट तक इसे भूनें.

इसमें अब नमक डालें.

इसे एक मिनट ​और पकने दें और इसे आधा ढककर पकाएं.

जब इसका रंग पिंक दिखाई देने लगे तो गैस बंद करके इसे गर्मागर्म सर्व करें.

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प्रैगनैंसी रोकने में क्या कंडोम वास्तव में कारगर उपाय है ?

सवाल

मैं 27 वर्षीय अविवाहित युवती हूं और रिलेशनशिप में हूं. फिलहाल शादी की कोई इच्छा नहीं है. सैक्स के दौरान बौयफ्रैंड कंडोम का प्रयोग करता है. मैं जानना चाहती हूं कि प्रैगनैंसी रोकने में क्या कंडोम वास्तव में कारगर उपाय है? क्या 2 कंडोम एकसाथ इस्तेमाल किए जा सकते हैं ताकि सैक्स पूरी तरह सुरक्षित हो?

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जवाब

कंडोम गर्भनिरोध का आसान व बेहतर विकल्प माना जाता है. यह बाजार में सहजता से उपलब्ध भी है. इस का प्रयोग न सिर्फ प्रैगनैंसी बल्कि एसटीडी जैसी समस्याओं से भी शरीर को सुरक्षित रखता है.

सैक्स के दौरान कंडोम का प्रयोग करते हुए गर्भ तभी ठहर सकता है जब कंडोम फट जाए. अमूमन घटिया क्वालिटी के कंडोम के ही फटने का डर रहता है. अत:आप अपने बौयफ्रैंड से इस बारे में खुल कर बात करें. उस से कहें कि वह ब्रैंडेड कंडोम का ही इस्तेमाल करे. ब्रैंडेड कंडोम्स लौंगलास्टिंग होते हैं और जल्द नहीं फटते. अब तो बाजार में कई फ्लेवर्स में कंडोम उपलब्ध हैं, जो सैक्स को और अधिक रोमांचक बनाते हैं.

रही बात 2 कंडोम का एकसाथ प्रयोग करने की, तो इसे उचित नहीं माना जा सकता, क्योंकि सैक्स के दौरान एकदूसरे से रगड़ खाने पर ये फट सकते हैं. यही नहीं कंडोम का फटना एकदूसरे को चरमसुख से भी वंचित कर सकता है.

कंडोम हालांकि गर्भनिरोध का बेहतर साधन है, बावजूद इस के आप चाहें तो सैक्स के दौरान वूमन वैजाइनल कौंट्रासैप्टिव पिल्स का भी प्रयोग कर सकती हैं. इस से आप सैक्स का बिना किसी भय पूरापूरा आनंद ले सकती हैं. मगर बौयफ्रैंड को कंडोम लगाने को जरूर कहें.

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आसरा : भाग 2

उस दिन मां के डांटने के बाद जया समझ गई कि अब उस का घर से निकल पाना किसी कीमत पर संभव नहीं है. बस, यही एक गनीमत थी कि उसे स्कूल जाने से नहीं रोका गया था और स्कूल के रास्ते में उसे करन से मुलाकात के दोचार मिनट मिल जाते थे. आशा ने बेटी के गुमराह होते पैरों को रोकने का भरसक प्रयास किया, लेकिन जया ने उन की एक नहीं मानी.

एक दिन आशा को अचानक किसी रिश्तेदारी में जाना पड़ा. जाना भी बहुत जरूरी था, क्योंकि वहां किसी की मृत्यु हो गई थी. जल्दबाजी में आशा छोटे बेटे सोमू को साथ ले कर चली गई. जया पर प्यार का नशा ऐसा चढ़ा था कि ऐसे अवसर का लाभ उठाने से भी वह नहीं चूकी. उस ने छोटी बहन अनुपमा को चाकलेट का लालच दिया और करन से मिलने चली गई.

जया ने फोन कर के करन को बुलाया और उस के सामने अपनी मजबूरी जाहिर की. जब करन कोई रास्ता नहीं निकाल पाया तो जया ने बेबाक हो कर कहा, ‘अब मैं तुम्हारे बिना नहीं जी सकती, करन. हमारे सामने मिलने का कोई रास्ता नहीं बचा है.’

जया की बात सुनने के बाद करन ने उस से पूछा, ‘मेरे साथ चल सकती हो जया?’

‘कहां?’ जया ने रोंआसी आवाज में कहा, तो करन बेताबी से बोला, ‘कहीं भी. इतनी बड़ी दुनिया है, कहीं तो पनाह मिलेगी.’

…और उसी पल जया ने एक ऐसा निर्णय कर डाला जिस ने उस के जीवन की दिशा ही पलट कर रख दी.

इस के ठीक 5-6 दिन बाद जया ने सब अपनों को अलविदा कह कर एक अपरिचित राह पर कदम रख दिया. उस वक्त उस ने कुछ नहीं सोचा. अपने इस विद्रोही कदम पर वह खूब खुश थी क्योंकि करन उस के साथ था. करन जया को ले कर नैनीताल चला गया और वहां गेस्टहाउस में एक कमरा ले कर ठहर गया.

करन का दिनरात का संगसाथ पा कर जया इतनी खुश थी कि उस ने एक बार भी यह नहीं सोचा कि उस के इस तरह बिना बताए घर से चले जाने पर उस के मातापिता पर क्या गुजर रही होगी. काश, उसे इस बात का तनिक भी आभास हो पाता.

जया दोपहर को उस वक्त घर से निकली थी जब आशा रसोई में काम कर रही थीं. काम कर के बाहर आने के बाद जब उन्हें जया दिखाई नहीं दी तो उन्होंने अनुपमा से उस के बारे में पूछा. उस ने बताया कि दीदी बाहर गई हैं. यह जान कर आशा को जया पर बहुत गुस्सा आया. वह बेताबी से उस के लौटने की प्रतीक्षा करती रहीं. जब शाम ढलने तक जया घर नहीं लौटी तो उन का गुस्सा चिंता और परेशानी में बदल गया.

8 बजतेबजते किशन भी घर आ गए थे, लेकिन जया का कुछ पता नहीं था. बात हद से गुजरती देख आशा ने किशन को जया के बारे में बताया तो वह भी घबरा गए. उन दोनों ने जया को लगभग 3-4 घंटे पागलों की तरह ढूंढ़ा और फिर थकहार कर बैठ गए. वह पूरी रात उन्होंने जागते और रोते ही गुजारी. सुबह होने तक भी जया घर नहीं लौटी तो मजबूरी में किशन ने थाने जा कर उस की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करा दी.

बेटी के इस तरह गायब हो जाने से किशन का दुख और चिंता से बुरा हाल था. उधर आशा की स्थिति तो और भी दयनीय थी. उन्हें रहरह कर इस बात का पछतावा हो रहा था कि उन्होंने जया के घर से बाहर जाने वाले मामले की खोजबीन उतनी गहराई से नहीं की, जितनी उन्हें करनी चाहिए थी. इस की वजह यही थी कि उन्हें अपनी बेटी पर पूरा भरोसा था.

किशन और आशा बेटी को ले कर एक तो वैसे ही परेशान थे, दूसरे जया के गायब होने की बात फैलने के साथ ही रिश्तेदारों और परिचितों द्वारा प्रश्न दर प्रश्न की जाने वाली पूछताछ उन्हें मानसिक तौर पर व्यथित कर रही थी. मिलनेजुलने वाले की बातों और परामर्शों से परेशान हो कर किशन और आशा ने घर से बाहर निकलना ही बंद कर दिया था.

उधर जया मातापिता पर गुजर रही कयामत से बेखबर नैनीताल की वादियों का आनंद उठा रही थी. करन के प्यार का नशा उस पर इस तरह से चढ़ा हुआ था कि उसे अपने भविष्य के बारे में सोचने का भी  होश नहीं था. उसे यह भी चिंता नहीं थी कि जब उस के घर से लाए पैसे खत्म हो जाएंगे, तब क्या होगा? और यह सब उस की उस नासमझ उम्र का तकाजा था जिस में भावनाएं, कल्पनाएं तथा आकर्षण तो होता है, लेकिन गंभीरता या परिपक्वता नहीं होती.

किशन की रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने काररवाई शुरू की तो शीघ्र ही जया की गुमशुदगी का रहस्य खुल कर सामने आ गया. पुलिस द्वारा जया की फोटो दिखा कर की गई पूछताछ के दौरान पता चला कि वह लड़की नैनीताल जाने वाली बस में चढ़ते देखी गई थी. बताने वाले दुकानदार ने पुलिस को यह जानकारी भी दी कि उस के साथ एक लड़का भी था, इतना पता चलते ही पुलिस उसी दिन नैनीताल के लिए रवाना हो गई. नैनीताल पहुंचने के बाद पुलिस ने जया की खोज गेस्टहाउसों से ही शुरू की, क्योंकि दिनरात के अनुभवों के आधार पर पुलिस वालों का नजरिया था कि घर से भागे किशोरवय प्रेमीप्रेमिका पैसा कम होने की वजह से होटल के बजाय छोटेमोटे गेस्टहाउसों को ही अपना ठिकाना बनाते हैं. पुलिस का अनुमान ठीक निकला. एक गेस्टहाउस के केयरटेकर ने पुलिस वालों को बताया कि कम उम्र का एक प्रेमीयुगल 4 दिन पहले उस के यहां आ कर ठहरा था. पुलिस ने एंट्री रजिस्टर में उन का नाम और पता देखा, तो दोनों ही गलत दर्ज थे.

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इस बीच पुलिस द्वारा गेस्टहाउस में की जाने वाली जांचपड़ताल का पता सब को चल चुका था. पुलिस का नाम सुनते ही करन के होश उड़ गए. उस ने बचे हुए पैसे अपनी जेब में डाले और जया से बोला, ‘‘तुम डरना नहीं जया. मैं 10-15 मिनट में लौट आऊंगा.’’

जया ने करन को रोकने की कोशिश भी की, लेकिन वह एक झटके से कमरे के बाहर हो गया. पुलिस जब तक जया के कमरे पर पहुंची, तब तक करन उस की पहुंच से बाहर निकल चुका था. मजबूरी में पुलिस जया को ले कर लौट आई.

जया के बरामद होने की सूचना पुलिस ने उस के घर भेज दी थी. किशन को जब इस बात का पता चला कि जया किसी लड़के के साथ भागी थी तो अपनी बेटी की इस करतूत से उन का सिर हमेशा के लिए झुक गया था. उन की समझ में नहीं आ रहा था कि वह लोगों का सामना कैसे कर पाएंगे. जया ने उन्हें कहीं मुंह दिखाने लायक नहीं छोड़ा था. किशन में अब इतनी हिम्मत नहीं बची थी कि वह पुलिस थाने जा कर जया को ले आते. वह यह भी जानते थे कि जया के मिलने की खबर पाते ही रिश्तेदारों और परिचितों का जो तूफान उठेगा, वह उस का सामना नहीं कर पाएंगे.

जया की बरामदगी के बाद पुलिस द्वारा किशन को लगातार संदेश दिया जा रहा था कि वह अपनी बेटी को ले जाएं. जब पुलिस का दबाव बढ़ा तो किशन आपा खो बैठे और थाने जा कर पुलिस वालों से दोटूक कह दिया कि वह बेटी से अपने सारे संबंध खत्म कर चुके हैं. अब उस से उन का कोई रिश्ता नहीं है. वह अपनी रिपोर्ट भी वापस लेने को तैयार हैं.

एक झटके में बेटी से सारे नाते तोड़ कर किशन वहां से चले गए. तब मजबूरी में पुलिस ने जया को हवालात से निकाल कर नारीनिकेतन भेज दिया. जब जया ने वहां लाने की वजह जाननी चाही, तो एक पुलिसकर्मी ने व्यंग्य करते हुए उसे बताया, ‘घर से भागी थी, अपने यार के साथ, अब नतीजा भुगत. तेरे घर वाले तुझे ले जाने को तैयार नहीं हैं. उन्होंने तुझ से रिश्ता खत्म कर लिया है. अब नारीनिकेतन तेरा ‘आसरा’ है.’

अतीत की लडि़यां बिखरीं तो जया यथार्थ में लौटी. अब उस की जिंदगी का सच यही था जो उस के सामने था. उस ने रोरो कर सूज चुकी आंखों से खिड़की के पार देखना चाहा तो उसे दूरदूर तक फैले अंधेरे के अलावा कुछ नजर नहीं आया. धूप का वह टुकड़ा भी न जाने कब, कहां विलीन हो गया था. जया के मन में, जीवन में और बाहर चारों ओर अंधेरा ही अंधेरा था. इस अंधेरे में अकेले भटकतेभटकते उस का मन घबराया तो उसे मां का आंचल याद आया. वह बचपन में अकसर अंधेरे से डर कर मां के आंचल में जा छिपती थी, लेकिन अब वहां न तो मां थी और न मां का आंचल ही था.

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जिंदगी के इस मोड़ पर आ कर जया को अपनों की अहमियत का पता चला. उसे इस बात का एहसास भी अब हुआ कि मांबाप बच्चों की भलाई और उन के सुरक्षित भविष्य के लिए ही उन पर पाबंदियां लगाते हैं. मातापिता के सख्ती बरतने के पीछे भी उन का प्यार और बच्चों के प्रति लगाव ही होता है. उसे इस बात का बेहद पछतावा था कि उस ने समय रहते मम्मी और पापा की भावनाओं की कद्र की होती तो उस का उज्ज्वल भविष्य नारीनिकेतन के उस गंदे से कमरे में दम न तोड़ रहा होता और जिस करन के प्यार के खुमार में उस ने अपनों को ठुकराया, वही करन उसे बीच मझधार में छोड़ कर भाग खड़ा हुआ. उस ने एक बार भी पलट कर यह देखने की कोशिश नहीं की कि जया पर क्या बीत रही होगी. करन की याद आते ही जया का मन वितृष्णा से भर उठा. उसे अपने आप पर ग्लानि भी हुई कि एक ऐसे कृतघ्न के चक्कर में पड़ कर उस ने अपनी जिंदगी तो बर्बाद की ही, अपने परिवार वालों का सम्मान भी धूल में मिला दिया.

अपनी भूल पर पछताती जया न जाने कब तक रोती रही. जब बैठेबैठे वह थक गई तो सीलन भरे नंगे फर्श पर ही लेट गई. आंखों से आंसू बहतेबहते कब नींद ने उसे अपने आगोश में समेट लिया, जया को पता ही न चला. अपनी बदरंग जिंदगी बिताने के लिए उसे आखिर एक ‘आसरा’ मिल ही गया था. नारीनिकेतन के सीलन भरे अंधेरे कमरे का वह कोना, जहां जिंदगी से थकीहारी जया नंगे फर्श पर बेसुध सो रही थी

ड्राइंग रूम सजाने के ये हैं 5 बेहतरीन तरीके

घर के ड्राइंग रुम का सेंटर टेबल एक बेहद जरुरी हिस्सा होता है. सजा हुआ सेंटर टेबल न केवल खाली जगहों को भरता है बल्कि सोफा सेट को नया लुक प्रदान करने में मदद करता है. घरों में सेंटर टेबल का उपयोग समाचार पत्र, टीवी रिमोट, किताबें और रखने के लिए ही होता है, पर अगर आप इसे खूबसूरती के साथ सजाएगें तो यह आपके  ड्राइंग रुम को नया लुक देगा.

ड्राइंग रूम सजाने के टिप्‍स

  • खूबसूरत फूल, बोंसाई, मोमबत्तियां, मूर्तियां और क्रिस्‍टल आदि आपकी टेबल का रुप रंग दोनों ही निखार सकती हैं। इनका प्रयोग जरुर करना चाहिए।
  • ड्राइंगरूम की सजावट और थीम को ध्‍यान में रखते हुए सेंटर टेबल को सजाना चाहिए। जब भी कोई त्‍योहार हो, तब ही टेबल का लुक बदलें वरना सिंपल तरह से सजाया हुआ सेंटर टेबल ही सही लगता है.
  • 4 सेंटर टेबल केवल देखने भर के लिए ही नहीं होता पर आप चाहें तो उसको महका भी सकती हैं. आप केवल खूब सारी सुगंधित मोमबत्तियों को एक साथ बांध कर रख दें और जब शाम हो तो उन्‍हें जला दें.
  • अगर आप सेंटर टेबल को सजाने के लिए ज्‍यादा कुछ नहीं कर सकतीं तो उसपर फूलों के पत्‍तों से भरा हुआ एक बड़ा सा कटोरा पानी डाल कर रख दें. साथ ही बीच में तैरती हुई मोमबत्‍तियां डालना न भूलें.
  • कई लोग अपनी टेबल को सजाने के लिए उसे खूब सारी चीजों से भर देते हैं, जो कि उन्‍हें बिल्‍कुल भी नहीं करना चाहिए. अपनी टेबल को साफ सुथरा और सिंपल ही रखना चाहिए।

आप चाहें तो अपने मेहमानों के लिए टेबल के अंदर स्‍टैंड पर कुछ नई मैगजीन, किताब या फिर समाचार पत्र भी रख सकते हैं.

ऐसे डालें बच्चों में हैंडवाश की आदत

बच्चों के नन्हेंनन्हें हाथ जहां प्यारेप्यारे से लगते हैं, वहीं वे जर्म से भी भरे होते हैं, क्योंकि वे अकसर मिट्टी में खेलते हैं. उन का दिमाग हर समय शरारतों में लगा रहता है. ऐसे में उन्हें मस्ती की इस उम्र में शरारतें करने से तो नहीं रोक सकते लेकिन उन्हें हैंडवाश का महत्त्व जरूर बता सकते हैं.

अकसर संक्रामक रोग का कारण गंदगी व हाथ नहीं धोना ही होता है और इस कारण कई बच्चे बीमार व मृत्यु के शिकार हो जाते हैं. ऐसे में हैंडवाश की हैबिट इस अनुपात को आधा करने में सहायक हो सकती है.

हाथों में सब से ज्यादा जर्म

हाथों में 2 तरह के रोगाणु होते हैं, जिन्हें सूक्ष्मजीव भी कहा जाता है. एक रैजिडैंट और दूसरे ट्रैजेंट सूक्ष्मजीव. जो रैजिडैंट सूक्ष्मजीव होते है, वे स्वस्थ लोगों में बीमारियों का कारण नहीं बनते हैं, क्योंकि वे हमेशा हाथों में रहते हैं और हैंडवाश से भी नहीं हटते, जबकि ट्रैजेंट सूक्ष्मजीव आतेजाते रहते हैं. ये खांसने, छींकने, दूषित भोजन को छूने से हाथों पर स्थानांतरित हो जाते हैं. फिर जब एक बार कीटाणु हाथों को दूषित कर देते हैं तो संक्रमण का कारण बनते हैं. इसलिए हाथों को साबुन से धोना बहुत जरूरी है.

न्यूजीलैंड में हुई एक रिसर्च के अनुसार, टौयलेट के बाद 92% महिलाएं व 81% पुरुष ही साबुन का इस्तेमाल करते हैं, जबकि यूएस की रिसर्च के अनुसार सिर्फ 63% लोग ही टौयलेट के बाद हाथ धोते हैं. उन में भी सिर्फ 2% ही साबुन का इस्तेमाल करते हैं. ऐसे में जरूरी है कि आप पानी व साबुन से हैंडवाश की आदत डालें ताकि आप के बच्चे भी आप को देख कर यह सीखें.

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क्या हैं ट्रिक्स, जो बच्चों में हैंडवाश की आदत डालेंगे:

फन विद लर्न: आप अपने बच्चों को सिखाएं कि जब भी बाहर से आएं, टौयलेट यूज करें. जब भी किसी ऐनिमल को टच करें, छींकें, खांसें तब हैंडवाश जरूर करें वरना कीटाणु बीमार कर देंगे. आप भी उन के इस रूटीन में भागीदार बनें. उन से कहें कि जो जल्दी हैंडवाश करेगा वही विनर बनेगा. अब देखते हैं तुम या मैं, यह फन विद लर्न गेम उन में हैंडवाश की हैबिट को डैवलप करने का काम करेगा.

स्मार्ट स्टूल्स: कई घरों में हैंडवाश करने की जगह बहुत ऊंची होती है, जिस कारण बच्चे बारबार उस जगह जाना पसंद नहीं करते. ऐसे में आप उन के लिए स्मार्ट सा स्टूल रखें, जिस पर चढ़ना उन्हें अच्छा लगे और वे उस पर चढ़ कर हैंडवाश करें. साथ ही टैप्स में स्मार्ट किड्स फौसिट ऐक्सटैंड, जो बर्ड्स की शेप के आते हैं लगाएं. ये सब चीजें बच्चों को अट्रैक्ट करने के साथसाथ उन में हैंडवौश की आदत डालने का काम करती हैं.

जर्म फ्री हैंड्स: ‘जर्म मेक मी सिक’ क्या तुम चाहते हो कि तुम्हें जर्म बीमार कर दें और तुम उस कारण न तो स्कूल जा पाओ और न ही दोस्तों के साथ खेल पाओ? नहीं न, तो फिर जब भी हैंडवाश करो तो सिर्फ पानी से ही नहीं, बल्कि साबुन से रगड़रगड़ कर अपनी उंगलियों, हथेलियों व अंगूठों को अच्छी तरह साफ करो. इस से तुम्हें जर्म फ्री हैंड्स मिलेंगे.

टीच बाई ग्लिटर मैथड: अगर आप के बच्चे अच्छी तरह हैंडवाश नहीं करते हैं तो आप उन्हें ग्लिटर के माध्यम से जर्म के बारे में समझाएं. इस के लिए आप उन के हाथों पर ग्लिटर डालें, फिर थोड़े से पानी से हैंडवाश कर के टौवेल से पोंछने को कहें. इस के बाद भी उन के हाथों में ग्लिटर रह जाएगा, तब आप उन्हें समझाएं कि अगर आप अच्छी तरह हैंडवाश नहीं करेंगे तो जर्म आप के हाथों में रह कर के आप को बीमार कर देंगे.

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फन सौंग्स से डालें आदत: अपने बच्चों में फन सौंग्स गा कर हैंडवाश की हैबिट डालें. जैसे जब भी वे खाना खाने बैठें या फिर टौयलेट से आएं तो उन्हें हैंडवाश कराते हुए कहें,

वाश योर हैंड्स, वाश योर हैंड्स

बिफोर यू ईट, बिफोर यू ईट,

वाश विद सोप ऐंड वाटर, वाश विद सोप ऐंड वाटर,

योर हैंड्स आर क्लीन, यू आर रैडी टू ईट,

वाश योर हैंड्स, वाश योर हैंड्स,

आफ्टर टौयलेट यूज, वाश योर हैंड्स विद सोप ऐंड वाटर,

टू कीप डिजीज अवे.

यकीन मानिए ये ट्रिक आप के बहुत

काम आएंगे.

अट्रैक्टिव सोप डिस्पैंसर: बच्चे अट्रैक्टिव चीजें देख कर खुश होते हैं. ऐसे में आप उन के लिए अट्रैक्टिव हैंडवाश डिस्पैंसर लाएं, जिसे देख कर उन का बारबार हैंडवाश करने को मन करेगा.

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