धारावाहिक कहानी: फरिश्ता- भाग1

धारावाहिक कहानी: फरिश्ता– भाग 2

धारावाहिक कहानी: फरिश्ता– भाग 3

धारावाहिक कहानी: फरिश्ता- भाग 4

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वार्डन सिरिल ने जबसे पूनम को अंकुर की तस्वीर दिखायी थी, उसकी हालत अजीब सी हो रही थी. उसको समझ में नहीं आ रहा था कि उसके दिल में जो भावनाओं का जो ज्वार उठ रहा है, उसे किसके साथ बांटे. किससे कहे अपने दिल की पीर. डौक्टर सूर्यकांत को वह अपने मन-मन्दिर का देवता मान चुकी थी. उनके अलावा किसी अन्य पुरुष की तो उसने कभी कल्पना भी नहीं की थी. वह जानती थी कि वह उनके काबिल नहीं है. ये तो उनका अहसान था कि एक गरीब बेसहारा लड़की को उन्होंने इतना अपनापन दिया. उसकी इतनी मदद की. उनका अहसान तो वह सात जनम लेकर भी नहीं उतार सकती थी. वो तो अपने देवता के चरणों में खुद को मिटा देना चाहती थी. उसके दिल में तो बस डौक्टर सूर्यकांत की छवि बसी थी और उनके अलावा वह किसी दूसरे की ओर देख भी नहीं सकती थी. किसी अन्य को बर्दाश्त ही नहीं कर सकती थी. उसकी हालत बड़ी विक्षिप्त सी हो रही थी. वो रात भर रोती रही और अपनी डायरी के पन्ने काले करती रही. उसके मनोभाव, उसके जज़्बात, उसकी हर भावना डायरी के पन्नों में सिमटती जा रही थी.

सुबह बड़ी देर तक दरवाजा खटखटाने के बाद भी जब वह न खुला तो चपरासियों की मदद से वार्डन सिरिल को दरवाजा तुड़वाना पड़ा. वह घबरायी हुई अन्दर पहुंची तो पूनम बिस्तर पर पड़ी उल्टी सांसें ले रही थी. आननफानन में उन्होंने एम्बुलेंस बुलवायी, डॉक्टर सूर्यकांत को फोन किया और अस्पताल में पूरे वक्त वह खुदा से पूनम की सलामती की दुआएं मांगती बेचैनी से इधर से उधर घूमती रहीं.

पूनम ने चूहेमार दवा खाकर खुदकुशी करने की कोशिश की थी. डॉक्टर सूर्यकांत को जब ये बात पता चली तो उसे बड़ा धक्का लगा.

‘आखिर क्यों…?’ वह समझ नहीं पा रहा था. यह तो अच्छा हुआ कि समय से दरवाजा टूट गया वरना वह मास्टर जी को क्या मुंह दिखाता? आखिर क्या वजह थी कि पूनम को जहर खाना पड़ा…? उसका दिमाग यह सोच-सोच कर घूम रहा था. पूनम अभी तक पूरी तरह होश में नहीं आयी थी. अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में डौक्टरों ने उसे कई उल्टियां करवायी थीं, जिससे उसके पेट से सारा जहर निकल जाए, मगर जब तक वह पूरी तरह होश में नहीं आ जाती, उसके जीवन को खतरे से बाहर नहीं कहा जा सकता था. डॉक्टर सूर्यकांत बेहद परेशान था. वह सिस्टर सिरिल के सामने बच्चों के समान फफक कर रो पड़ा… सिस्टर ने अपने बेटे की तरह उसे अपनी बाहों में समेट लिया और बोलीं…

‘हम लोग पूनम को समझ नहीं सके डॉक्टर… हम उसकी शादी के लिए वर ढूंढते रहे और उससे एक बार भी नहीं पूछा…’

डौक्टर ने अचम्भित होकर सिस्टर की तरफ देखा. उसकी आंखों में सवाल था.

सिस्टर सिरिल ने अपने गाउन की जेब से एक लाल रंग की छोटी सी डायरी निकाल कर डॉक्टर की ओर बढ़ा दी.

‘ये डायरी पूनम के हाथ में मिली थी… इसे पढ़ो… सबकुछ स्पष्ट हो जाएगा… तुम पूनम के अभिभावक होने का कर्तव्य निभाते रहे और वो नादान मन ही मन तुम्हारी पूजा करती रही…’ सिस्टर का स्वर भर्रा गया.

डौक्टर सूर्यकांत आश्चर्य से वार्डन की शक्ल देखता रहा. कंपकपाते हाथों से उसने डायरी खोली. वह जैसे-जैसे उसे पढ़ता जा रहा था, उसमें लिखा एक-एक शब्द अश्रु बन कर उसकी आंखों से फूट रहा था. उसकी डायरी में लिखी आखिरी लाइन पढ़कर वो बिलख उठा. कितना दर्द छुपा था उसमें….

‘मेरे देवता मुझे माफ कर देना… मैं जीना चाहती थी मगर सिर्फ तुम्हारी बाहों में… मैं इस काबिल तो नहीं कि तुम्हारी दुल्हन बन सकूं मगर अपने आपको तुम्हारे चरणों में समर्पित तो कर सकती हूं न…?’

डौक्टर सूर्यकांत बुरी तरह रो उठा, ‘सिस्टर, उसने मुझसे पहले क्यों नहीं कहा…?’ उसकी हिचकियां बंध गयीं.

‘अभी भी वक्त है बेटा… जाओ उसे वापस बुला लो… शायद अब तुम्हारी आवाज ही उसे वापस ला सकती है… जाओ बेटा…’ सिस्टर सिरिल रोते हुए बोलीं.

डौक्टर सूर्यकांत इमरजेंसी रूम की तरह दौड़ पड़ा. शायद उसकी पूनम को उसी का इंतजार है. वो पागलों की तरह उस पर झुक गया. झर-झर बहते उसके आंसुओं ने पूनम का चेहरा तर कर दिया.

‘पूनम… आंखें खोलो पूनम… देखो मैं तुम्हारा सूर्य… प्लीज पूनम होश में आओ… मेरी जान… मेरी जिन्दगी आंखें खोलो… पूनम… प्लीज…’ वह लगातार रोये जा रहा था.

पूनम के अचेत शरीर में अचानक एक सिहरन सी उठी और उसने कराहते हुए आंखें खोल दीं…

‘मेरे देवता…’

डौक्टर सूर्यकांत ने उसे चूमते हुए कस कर अपनी बाहों में भींच लिया जैसे वह उसे अपने सीने में समो लेना चाहता हो. दो दिल एक दूसरे के करीब आ गये, हमेशा-हमेशा के लिए.

दरवाजे पर खड़ी सिस्टर सिरिल अपने आंसू पोछते हुए मुस्कुरा उठीं और सीने पर क्रास बनाती वापस लौट पड़ीं.

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