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जानिए, नवंबर महीने में खेती संबंधी खास कामों का ब्योरा

हमारे देश के किसान नवंबर की शुरुआत से ही गेहूं की बोआई के लिए खेतों की तैयारी में जुट जाते हैं. इस के अलावा भी खेती में ढेरों काम होते हैं, उन्हें समय पर निबटाना भी जरूरी होता है. इसी क्रम में पेश है नवंबर के दौरान होने वाले खेती संबंधी खास कामों का ब्योरा.

* गेहूं की बोआई से पहले अपने खेत की मिट्टी की जांच जरूर कराएं, ताकि सही नतीजे मिल सकें.

* गेहूं बोने से पहले खेतों में अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद या कंपोस्ट जरूर डालें.

* बोआई के लिए अपने इलाके के हवापानी के मुताबिक ही गेहूं की किस्मों को चुनें. इस के लिए अपने इलाके के कृषि वैज्ञानिक से सलाह लें.

* गेहूं के बीज किसी नामी कंपनी या सरकारी संस्था से ही लें.

* कई बार छोटे किसान बड़े किसानों से ही बीज खरीद लेते हैं, क्योंकि ये बीज उन्हें काफी वाजिब दामों पर मिल जाते?हैं. ऐसा करने में कोई बुराई या खराबी नहीं है, मगर ऐसे में बीजों को अच्छी फफूंदीनाशक दवा से उपचारित कर लेना चाहिए. बीजों को उपचारित किए बगैर बोआई करने से पैदावार घट जाती है.

* छिटकवां तरीके से बोआई करने पर काफी बीज बेकार चले जाते?हैं, लिहाजा इस विधि से बचना चाहिए. मौजूदा दौर के कृषि वैज्ञानिक भी बोआई की छिटकवां विधि अपनाने की सलाह नहीं देते?हैं.

* वैज्ञानिकों के मुताबिक, सीड ड्रिल मशीन से गेहूं की बोआई करना मुनासिब रहता है. इस विधि के लिए प्रति हेक्टेयर महज 100 किलोग्राम बीजों की जरूरत होती है. इस विधि से बीजों की कतई बरबादी नहीं होती है.

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* हमेशा गेहूं की बोआई लाइनों में ही करें और पौधों के बीच 20 सैंटीमीटर का फासला रखें. 2 पौधों के बीच फासला रखने से पौधों की बढ़वार बेहतर ढंग से होती है और खेत की निराईगुड़ाई करने में आसानी होती?है.

* वैसे तो मिट्टी की जांच रिपोर्ट के मुताबिक ही खाद व उर्वरक वगैरह का इस्तेमाल करना चाहिए, मगर कई जगहों के किसानों के लिए मिट्टी की जांच करा पाना मुमकिन नहीं हो पाता. ऐसी हालत में प्रति  हेक्टेयर 120 किलोग्राम नाइट्रोजन, 60 किलोग्राम फास्फोरस और 40 किलोग्राम पोटाश का इस्तेमाल करना चाहिए.

* चने को गेहूं का जोड़ीदार अनाज माना जाता?है. गेहूं के साथसाथ नवंबर में चने की बोआई का आलम भी रहता?है. चने की बोआई 15 नवंबर तक कर लेने की सलाह दी जाती है.

* चने की खेती के मामले में भी अगर हो सके तो मिट्टी की जांच करा कर वैज्ञानिकों से खादों व उर्वरकों की मात्रा पूछ लें.

* चने के बीजों को राइजोबियम कल्चर और पीएसबी कल्चर से उपचारित कर के बोएं. ऐसा करने से पौधे अच्छे निकलते?हैं.

* अमूमन मटर व मसूर की बोआई का काम अक्तूबर महीने के दौरान ही निबटा लिया जाता है, लेकिन अगर किसी वजह से मटर व मसूर की बोआई बाकी रह गई हो, तो उसे 15 नवंबर तक जरूर निबटा लें.

* मटर की बोआई के लिए तकरीबन 100 किलोग्राम बीज प्रति हेक्टेयर के हिसाब से लगते हैं, जबकि मसूर की बोआई के लिए तकरीबन 40 किलोग्राम बीज प्रति हेक्टेयर की दर से लगते हैं.

* मसूर और मटर के बीजों को बोने से पहले राइजोबियम कल्चर से उपचारित करना जरूरी है. ऐसा न करने से पैदावार पर बुरा असर पड़ता?है.

* आमतौर पर नवंबर में ही जौ की बोआई भी की जाती है. अच्छी तरह तैयार किए गए खेत में 25 नवंबर तक जौ की बोआई का काम निबटा लेना चाहिए.

* वैसे तो जौ की पछेती फसल की बोआई दिसंबर माह के अंत तक की जाती है, पर समय से बोआई करना बेहतर रहता है. आमतौर पर देरी से बोई जाने वाली फसल से उपज कम मिलती है.

* जौ की बोआई में हमेशा सिंचित और असिंचित खेतों का फर्क पड़ता?है. उसी के हिसाब से कृषि वैज्ञानिक से बीजों की मात्रा पूछ लेनी चाहिए.

* नवंबर माह के दौरान अरहर की फलियां पकने लगती हैं, लिहाजा उन पर नजर रखनी चाहिए. जब 75 फीसदी फलियां पक कर तैयार हो जाएं, तो उन की कटाई करें.

* अरहर की देरी से पकने वाली किस्मों पर यदि फली छेदक कीट का प्रकोप नजर आए, तो मोनोक्रोटोफास 36 ईसी दवा की 600 मिलीलिटर मात्रा पर्याप्त पानी में मिला कर फसल पर छिड़काव करें.

* सरसों के खेत में अगर फालतू पौधे हों, तो उन की छंटाई करें. निकाले गए पौधों को मवेशियों को खिलाएं. फालतू पौधे निकालते वक्त खयाल रखें कि बचे पौधों के बीच तकरीबन 15 सैंटीमीटर का फासला रहे.

* सरसों की बोआई को अगर एक महीना हो चुका हो, तो नाइट्रोजन की बाकी बची मात्रा सिंचाई कर के छिटकवां तरीके से दें.

* सरसों के पौधों को आरा मक्खी व माहू कीट से बचाने के लिए इंडोसल्फान दवा की डेढ़ लिटर मात्रा 800 लिटर पानी में घोल कर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें.

* सरसों के पौधों को सफेद गेरुई और झुलसा रोग से बचाने के लिए जिंक मैंगनीज कार्बामेट 75 फीसदी दवा की 2 किलोग्राम मात्रा पर्याप्त पानी में?घोल कर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें.

* नवंबर महीने के दौरान तोरिया की फलियों में दाना भरता?है. इस के लिए खेत में भरपूर नमी होनी चाहिए. अगर नमी कम लगे तो फौरन खेत को सींचें ताकि फसल उम्दा हो.

* अपने आलू के खेतों का जायजा लें. अगर खेत सूखे दिखाई दें, तो फौरन सिंचाई करें ताकि आलुओं की बढ़वार पर असर न पड़े.

* अगर आलू की बोआई को 5-6 हफ्ते बीत चुके हों, तो 50 किलोग्राम यूरिया प्रति हेक्टेयर की दर से डालें और सिंचाई के बाद पौधों पर ठीक से मिट्टी चढ़ाएं.

* अक्तूबर के दौरान लगाई गई सब्जियों के खेतों का मुआयना करें और जरूरत के मुताबिक निराईगुड़ाई कर के खरपतवार निकालें. खेत सूखे नजर आएं, तो उन की सिंचाई करें.

* सब्जियों के पौधों व फलों पर अगर बीमारियों या कीड़ों का प्रकोप नजर आए, तो कृषि वैज्ञानिक से पूछ कर मुनासिब दवा का इस्तेमाल करें.

* अपने लहसुन के खेतों का मुआयना करें. अगर खेत सूखे लगें, तो उन की सिंचाई करें. इस के अलावा खेतों की तरीके से निराईगुड़ाई कर के खरपतवारों का सफाया करें.

* लहसुन के खेतों में 50 किलोग्राम यूरिया प्रति हेक्टेयर की दर से डालें. इस से फसल को काफी लाभ होगा.

* अगर लहसुन की पत्तियों पर पीले धब्बों का असर नजर आए, तो इंडोसल्फान एम 45 दवा के 0.75 फीसदी घोल का छिड़काव करें.

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* आम के पेड़ों के तनों व थालों में फौलीडाल पाउडर छिड़कें. इस के साथ ही पेड़ों की बीमारी के असर वाली डालियों व टहनियों को काट कर जला दें.

* नवंबर की शुरुआती सर्दी से अपने मुरगेमुरगियों को बचाने का बंदोबस्त करें.

* सर्दी के दिनों में अपने तमाम मवेशियों का पूरापूरा खयाल रखें, क्योंकि सर्दी उन के लिए भी घातक होती है.

पछतावा : भाग 1

सनोबर ने फर्स्ट डिविजन में बीएससी कर लिया. अख्तर एमबीए कर के एक मल्टीनैशनल कंपनी में जौब पर लग गया. सनोबर आगे पढ़ना चाहती थी पर उस की अम्मा आमना का खयाल था कि उस की शादी कर दी जाए. आमना ने पति सगीर से कहा, ‘‘अख्तर अब एमबीए कर के नौकरी पर लग गया है. अब आप उस के पिता जमाल से शादी की बात कर लीजिए. सनोबर को आगे पढ़ना है तो अख्तर आगे पढ़ाएगा. दोनों में अच्छी अंडरस्टैंडिंग है.’’ दूसरे दिन सगीर और आमना मिठाई ले कर अपने पड़ोसी जमाल के घर गए.

सगीर ने जमाल भाई से कहा, ‘‘अब सनोबर ने ग्रेजुएशन कर लिया है. अख्तर भी एमबीए कर के नौकरी पर लग गया है. यह शादी का सही वक्त है. देर करने से कोई फायदा नहीं.’’

जमाल खुश हो कर बोले, ‘‘सगीर, तुम बिलकुल ठीक कह रहे हो. बेगम, कैलेंडर ले कर आओ, सही समय देख कर हम अख्तर और सनोबर की शादी की तारीख तय कर देते हैं.’’

खुतेजा मुंह बना कर बोली, ‘‘इतनी जल्दी क्या है. मेरे भाई की बेटी की शादी तय हो रही है. पहले वह तय हो जाए. कहीं हमारी तारीख उन की तारीख से टकरा न जाए. हम अपनी तारीख बाद में तय करेंगे.’’ खुतेजा की बात पर सगीर चुप रहे. जमाल अपनी पत्नी से दबते थे. कुछ ज्यादा न कह सके.

उस दिन वे लोग नाकाम लौट आए. अख्तर, रिदा, फिजा घर में बैठे खुशखबरी का इंतजार कर रहे थे. आमना ने जब बताया कि चाची ने शादी की तारीख नहीं तय की, बाद में तय करने को कहा है, तो सभी के चेहरे लटक गए.

अम्माअब्बा की परेशानी जायज थी. सनोबर का रिश्ता बरसों से अख्तर से तय था. अख्तर के पिता जमाल रिश्ते में अब्बा के भाई थे. वे पड़ोस में ही रहते थे. जमाल का एक ही बेटा था अख्तर. अच्छी हाइट, खूबसूरत, भूरी आंखों वाला. सनोबर के पिता सगीर को अख्तर बहुत पसंद था.

सगीर नेक और सुलझे हुए इंसान थे. उन का प्लास्टिक का सामान बनाने का छोटा सा कारखाना था. गुजरबसर अच्छे से हो रही थी. कुछ बचत भी हो जाती थी. जमाल और सगीर का रिश्ते के अलावा दोस्ती का संबंध भी था.

जमाल की पत्नी खुतेजा यों तो अच्छी थी पर मिजाज की थोड़ी तेज और पुराने खयालात की थी. रस्मोंरिवाज और पुरानी कही हुई बातों पर बहुत यकीन रखती थी वह. सगीर की पत्नी आमना बहुत मिलनसार, नरमदिल व खुशमिजाज औरत थी. सब से मोहब्बत से पेश आती और मदद करने को तैयार रहती. जेठजेठानी से उस के बहुत अच्छे संबंध थे.

अख्तर जब 5 साल का था तब सनोबर पैदा हुई थी. बहुत ही खूबसूरत, नन्ही परी लगती थी वह. अख्तर पूरे वक्त उसे उठाए फिरता. उसे खूब प्यार करता. दोनों को साथ देख कर आमना और खुतेजा बहुत खुश होतीं. जब सनोबर थोड़ी बड़ी हुई तो उस का रिश्ता अख्तर से तय कर दिया गया. दोनों घरों में खूब खुशियां मनाई गईं.

सनोबर के बाद आमना के 2 बेटियां और हुईं. सगीर ने भी बड़ी मोहब्बत से तीनों लड़कियों की परवरिश की. उसे कोई मलाल न था कि उसे बेटा नहीं मिला. सनोबर भी दोनों बहनों से बहुत प्यार करती. बहनें उस से करीब 5 साल छोटी थीं. सनोबर को खेलने के लिए जैसे खिलौने मिल गए. दोनों जुड़वां बच्चियां थीं. उन के नाम रखे गए फिजा और रिदा.

दिन गुजर रहे थे. अख्तर के बाद खुतेजा के यहां एक लड़का और हुआ. आमना महसूस कर रही थी बेटा होने के बाद से खुतेजा के बरताव में फर्क आ गया. बच्चियों से भी पहले जैसी मोहब्बत और अपनापन नहीं रहा. सनोबर का भी वह पहले जैसा लाड़ नहीं करती. आमना ने कोई खास तवज्जुह नहीं दी, लड़कियों की परवरिश में मसरूफ रही. सनोबर पढ़ने में बहुत होशियार थी. क्लास में रैंक लाती. रिदा और फिजा भी दिल लगा कर पढ़तीं.

खुतेजा की बात सुन कर सब का मूड बिगड़ चुका था. सब सोच में डूबे थे कि ऐसा क्यों हुआ. अख्तर भी अपनी मां की बात सुन कर मायूस हो गया. उस की आंखों में उदासी आ गई. इतने सालों से दोनों की बात तय थी. मोहब्बत घर जमा चुकी थी. दोनों के दिल एकदूसरे के नाम से धड़कते थे. इस खबर से दोनों ही चुप हो गए. अभी शायद उन की मोहब्बत को और इंतजार करना था.

इंतजार में डेढ़दो माह निकल गए. एक बार फिर सगीर ने फोन पर बात की, पर खुतेजा ने टाल दिया. अब तो आमना, सगीर और सनोबर तीनों ही परेशान हो गए. आखिर में उन लोगों ने सोच लिया कि दोटूक बात कर ली जाए. एक बार फिर आमना और सगीर शादी की तारीख तय करने जमाल के यहां पहुंच गए.

आमना ने साफ कहा, ‘‘भाभी, अब आप इसी महीने की कोई तारीख दे दीजिए. बेवजह शादी में देर करने का कोई मतलब नहीं है. इस महीने की 21 तारीख अच्छी रहेगी. हम ने सबकुछ सोच कर तारीख तय की है. अब आप अपनी राय बताइए.’’

खुतेजा ने तीखे लहजे में कहा, ‘‘देखिए भाई साहब और भाभी, असल बात यह है कि मैं यह शादी नहीं करना चाहती. मुझे अपने अख्तर के लिए सनोबर पसंद नहीं आ रही है.’’

यह सुन कर सब सन्न रह गए. जमाल भी चुप से रह गए. सगीर ने पूछा, ‘‘भाभी, आखिर मंगनी तोड़ कर शादी न करने की कोई वजह तो होनी चाहिए. इतनी पुरानी मंगनी तोड़ने की कोई खास वजह होनी चाहिए.’’

खुतेजा ने फिर रूखे लहजे में कहा, ‘‘वजह है और बहुत खास वजह है.’’

सगीर जल्दी से बोल उठे, ‘‘फिर बताइए, क्या वजह है?’’

मैं राजनीतिक दल  हूं!

“आज तुम देश के एक प्रमुख राजनीतिक दल से साक्षात्कार ले कर आओ, आजकल पार्टियां  बड़ी चर्चा में है.” संपादक महोदय ने रोहरानंद को घूरते हुए देखा और कहा.

” मगर संपादक जी!… यह देश के लिए अच्छा नहीं होगा.”

रोहरानंद ने अपने विचार तत्क्षण प्रकट किए-” इससे अच्छा  तो चीफ इलेक्शन औफिसर अथवा किसी नेता, मुख्यमंत्री का इंटरव्यू ले आऊ.”

चश्मे के भीतर आंखों को गोल घुमाते हुए संपादक जी ने ठस स्वर में कहा,”- देखो ! हमारा आदेश मानना तुम्हारा परम कर्तव्य है, या फिर राय देना… जाओ आज हमें राजनीतिक दल का इंटरव्यू ही छापना है.”

रोहरानंद मन मसोस कर उठा और दफ्तर से भिनभिनाता हुआ देश की राजधानी स्थित 34 अकबर रोड पहुंच गया.

यहां एक बड़ा सा ग्लोसाइन बोर्ड टंगा था- अखिल भारतीय राष्ट्रीय सेवक कांग्रेस । रोहरानंद फुला नहीं समाया वह अपने गंतव्य तक पहुंच चुका था,उसने खादी के झोले से पेन और नोटबुक निकाली और इंटरव्यू की तैयारी करने लगा.

राष्ट्रीय सेवक कांग्रेस के विशाल बोर्ड के निकट पहुंच रोहरानंद ने विनम्र स्वर में कहा- “माननीय! मै एक पत्रकार हूं, आपका साक्षात्कार लेने आया हूं .यह सुनते ही मानो चमत्कार हुआ,  विशाल बोर्ड से राजनीतिक दल प्रकट हुआ. राजनीतिक दल मुस्कुराकर बोला – “अच्छा! आओ आओ, पत्रकारों का हम बड़ा  सम्मान करते हैं ,मगर…”

रोहरानंद- “जी ! मगर .”

राजनीतिक दल- “अच्छा होता आप हमारे किसी नेता, पदाधिकारी से बात कर लेते. उनके पास हर एक जानकारी मिल जाती, सेवा टहल भी हो जाती.”

रोहरानंद- “श्रीमान ! आज तो हमें सिर्फ आपसे ही बात करने का संपादक जी  का आदेश है. इसी बहाने देश की जनता आपसे रूबरू होगी .यह हमारे संपादक जी की एक अभिनव सोच है.”

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राजनीतिक दल-( प्रसन्न भाव से ) “चलो ठीक है, पूछो, क्या जानना चाहते हो.”

रोहरानंद-‘ सर ! देश की जनता को यह बताइए लोकतंत्र में आपकी क्या अहम भूमिका है.”

राजनीतिक दल से एक पत्रकार की बातचीत होते देख देश की जनता आकर एक हुजूम की शक्ल में खड़ी हो गई .और राजनीतिक दल और पत्रकार की बातचीत सुनने लगे. राजनीतिक दल ने गला खंखार कर साफ किया और कहने लगा- “जैसा की सर्वविदित है, लोकतांत्रिक व्यवस्था में मेरी भूमिका नींव और कंगूरे दोनों की है. मेरे ही सीने में चढ़कर आम आदमी नेता बन जाता है, मेरी अंगुली पकड़कर प्रधानमंत्री से लेकर आप राष्ट्रपति बन सकते हैं.”

रोहरानंद ने जिज्ञासा भरे स्वर में कहा- “सर ! क्या यह अनिवार्य है आपके बगैर वैतरणी पार नहीं हो सकती ? बिल्कुल यह आकाट्य सत्य है. देश और लोकतंत्र का यही सत्य है.” राजनीतिक दल ने गंभीरता स्वर में कहा.

“अच्छा कृपया यह बताइए, देश के नेताओं पर आपका कुछ अंकुश भी है या नहीं ?”

राजनीतिक दल ने कहा- “हम एक दूसरे के पूरक कहे जा सकते हैं, मेरे बिना उनका अस्तित्व नहीं उनके बिना मेरा अस्तित्व नहीं है .”

“देश की जनता आपको धृतराष्ट्र सरीका समझने लगी है .”

राजनीतिक दल- “यह मैंने तो कभी नही सुना.अगर ऐसा है तो मैं क्या कर सकता हूं.”

“आपका कुछ विशेषाधिकार तो होगा आखिर आप- आप हैं ?”

रोहनंद ने उसकी आंखों में आंखें डाल कर अधिकार पूर्वक कहा. -“मेरी सुनता ही कौन है ?” राजनीतिक दल की आंखों में अब पीड़ा उभर आई थी.

“अर्थात, आप पर जो गंभीर आरोप हैं वह सत्य हैं ?”

रोहरानंद ने सफल पत्रकार की तरह घेर लिया.

“कदापि नहीं, मैं विवश हूं, बंधन में हूं, मगर इसका तात्पर्य यह नहीं कि मैं कमजोर हूँ मेरी ऐसी ऐसी उपलब्धियां है जो आप पाठकों को बता सकते हैं .”राजनीतिक दल ने प्रभावोत्पादक भाव से कहा.

“ठीक है, सिक्के के दो पहलू होते हैं मगर अभी हम आपसे यह जानना चाहते हैं कि क्या देश के नेता आपके कंधे का इस्तेमाल अपनी स्वार्थ साधना के लिए नहीं कर रहे हैं ?”

राजनीतिक दल,- “हमें इस संदर्भ में कुछ नहीं कहना है. नेक्सट क्वेश्चन…”

“लेकिन आप देश की एक जिम्मेदार संस्था है, आप किसी प्रश्न को जो जनता आपसे जानना चाहती है, उसे कैसे नकार सकते हैं ?”

“लोकतंत्र की यही तो खूबी है. कुछ बातें जनता को नहीं बताई जा सकती .”

“अच्छा, कृपया यह बताएं रोहरानंद ने प्रश्न दागा-” नेता तो आपके सहयोग से देश की सत्ता का आनंद लेते हैं, क्या आपको रशक नहीं होता की काश ! हम भी इतिहास में अपना नाम लिखवाते.”

“देखो ! राष्ट्रीय सेवक कांग्रेस अर्थात हमारा नाम तो देश के इतिहास में अमर रहेगा ही.”

“वह कैसे ?”रोहरानंद ने पूछा.

“देश के सर्वाधिक प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, मुख्यमंत्री हमने दिए हैं.”

राजनीतिक दल ने कहा और गर्व से मुस्कुराते चारों तरफ देखने लगा.” यह सुन भीड़ ने ताली बजाकर आनंद लिया.

“सचमुच ?” रोहरानंद ने आश्चर्य प्रकट किया

” देश के योग्यतम नेता हमने ही तो दिए हैं, जिससे राष्ट्र दुनिया में सर उठा कर गर्व से खड़ा है.”

“सचमुच,मगर इसके साथ ही देश को भ्रष्टाचार के अंधेरे में आपने ही रोशन किया है.” रोहरानंद के होठों पर अब विदूप मुस्कान थी.

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“यह तो विपक्ष का आरोप है, विरोधी दल सत्ता हथियाने ऐसे प्रोपेगेंडा करता रहता है. दरअसल सत्य तो यह है कि भ्रष्टाचार विकास का सोपान है. यह भ्रष्टाचार ही है जिसने देश को अमेरिका , चीन, ब्रिटेन के समकक्ष लाकर खड़ा किया है.”

“धन्यवाद ! आपने साहस के साथ सत्य को स्वीकार किया हम और देश आपकी स्पष्ट बयानी का कायल हो गए हैं अब एक अंतिम प्रश्न और…। कृपया यह बताएं आप की छवि लगातार धूमिल क्यों होती जा रही है और इसे रोकने…”

“वह अपनी-अपनी दृष्टि है. हमें तो लगता है हम पूर्ण निष्ठा से देश की सेवा कर रहे हैं और ऐसे ही करते रहेंगे.”राजनीतिक दल ने कहा. इधर रोहरा नंद ने नोटबुक बंद कर दफ्तर की ओर रुख किया.

पति की प्रेमिका का खूनी प्यार

महानगर मुंबई से करीब 120 किलोमीटर की दूरी पर स्थित पुणे शहर में 21 नवंबर, 2018 को 2-2 जगहों पर हुई गोलीबारी ने शहर के लोगों के दिलों में डर पैदा कर दिया था. इस गोलीबारी में एक महिला की मौत हो गई थी और क्राइम ब्रांच का एक अधिकारी घायल हो गया था. उस अधिकारी की हालत गंभीर बनी हुई थी.

घटना चंदन नगर थाने के आनंद पार्क इंद्रायणी परिसर की सोसायटी स्थित धनदीप इमारत के अंदर घटी. सुबह के समय 3 गोलियां चलने की आवाज से वहां रहने वाले लोग चौंके. गोलियों की आवाज इमारत की पहली मंजिल और दूसरी मंजिल के बीच बनी सीढि़यों से आई थी.

आवाज सुनते ही पहली और दूसरी मंजिल पर रहने वाले लोग अपने फ्लैटों से बाहर निकल आए. वहां का दृश्य देख कर उन का कलेजा मुंह को आ गया. सीढि़यों पर एकता बृजेश भाटी नाम की युवती खून से लथपथ पड़ी थी. वह पहली और दूसरी मंजिल के 3 फ्लैटों में अपने परिवार के साथ किराए पर रहती थी. शोरशराबा सुन कर इमारत में रहने वाले अन्य लोग भी वहां आ गए.

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लोग घायल महिला को अस्पताल ले गए, लेकिन डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. अस्पताल द्वारा थाना चंदन नगर पुलिस को सूचना दे दी गई.

सुबहसुबह इलाके में घटी इस सनसनीखेज घटना की खबर पा कर थाना चंदन नगर के थानाप्रभारी राजेंद्र मुलिक अपनी टीम के साथ अस्पताल की तरफ रवाना हो गए. अस्पताल में राजेंद्र मुलिक को पता चला कि एकता भाटी को उस के फ्लैट पर ही गोलियां मारी गई थीं. डाक्टरों ने बताया कि एकता को 2 गोलियां लगी थीं. एक गोली उस के पेट में लगी थी और दूसरी सिर को भेदते हुए आरपार निकल गई थी. थानाप्रभारी अस्पताल में 2 कांस्टेबलों को छोड़ कर घटनास्थल पर पहुंच गए.

वहां जाने पर यह जानकारी मिली कि मृतका एकता भाटी सुबह अपने परिवार वालों के साथ चायनाश्ता के लिए अपनी पहली मंजिल वाले फ्लैट में दूसरी मंजिल से आ रही थी. उस का पति बृजेश भाटी 5 मिनट पहले ही नीचे आ चुका था. वह अपने पिता और बच्चों के साथ बैठा पत्नी के आने का इंतजार कर रहा था. उसी समय यह घटना घटी.

थानाप्रभारी ने मुआयना किया तो एक गोली का निशान सीढि़यों के पास दीवार पर मिला. इस का मतलब हमलावर की एक गोली दीवार पर लगी थी. बृजेश भाटी ने पुलिस को बताया कि उन्होंने 3 गोलियां चलने की आवाज सुनी थी.

मामला काफी संगीन था, अत: थानाप्रभारी राजेंद्र मुलिक ने मामले की जानकारी अपने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ पुलिस कंट्रोल रूम और फोरैंसिक टीम को भी दे दी. सूचना पाते ही शहर के डीसीपी घटनास्थल पर पहुंच गए. फोरैंसिक टीम ने मौके से सबूत जुटाए. पुलिस अधिकारियों ने भी घटनास्थल का निरीक्षण किया.

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पुलिस समझ नहीं पाई हत्या का कारण

मौके की काररवाई निपटाने के बाद थानाप्रभारी फिर से अस्पताल पहुंचे और एकता भाटी के शव को पोस्टमार्टम के लिए पुणे के ससून डाक अस्पताल भेज दिया.

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस के उच्च अधिकारियों ने आपातकालीन बैठक बुलाई, जिस में शहर के कई थानों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथसाथ क्राइम ब्रांच के डीसीपी शिरीष सरदेशपांडे भी शामिल हुए. मामले पर विचारविमर्श करने के बाद पुलिस ने अपनी जांच शुरू कर दी.

महानगर मुंबई हो या फिर पुणे, इन शहरों में छोटीबड़ी कोई भी घटना घटती है तो स्थानीय पुलिस के साथ क्राइम ब्रांच अपनी समानांतर जांच शुरू कर देती है. डीसीपी शिरीष सरदेशपांडे ने भी एकता भाटी की हत्या की गुत्थी सुलझाने के लिए 2 टीमें गठित कीं, जिस की कमान उन्होंने इंसपेक्टर रघुनाथ जाधव और क्राइम ब्रांच यूनिट-2 के इंसपेक्टर गजानंद पवार को सौंपी.

सीनियर अफसरों के निर्देशन में स्थानीय पुलिस और क्राइम ब्रांच ने तेजी से जांच शुरू कर दी. उन्होंने सब से पहले पूरे शहर की नाकेबंदी करवा कर अपने मुखबिरों को सजग कर दिया.

मृतक एकता भाटी का परिवार दिल्ली का रहने वाला था, इसलिए मामले के तार दिल्ली से भी जुड़े होने का संदेह था. इस के साथसाथ उन्होंने घटना की तह तक पहुंचने के लिए आसपास लगे सारे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज को खंगालना शुरू कर दिया.

पुलिस को इस से पता चला कि हत्यारे मोटरसाइकिल पर आए थे. वह मोटरसाइकिल पुणे वड़गांव शेरी के शिवाजी पार्क के सामने लावारिस हालत में खड़ी मिली. यह भी जानकारी मिली कि मोटरसाइकिल पुणे की मार्केट से चोरी की गई थी. मोटरसाइकिल वहां छोड़ कर वह सारस बाग की तरफ निकल गए थे. लिहाजा क्राइम ब्रांच की टीम हत्यारों की तलाश में जुट गई.

उसी दिन शाम करीब 4 बजे इंसपेक्टर गजानंद पवार की टीम को एक मुखबिर द्वारा खबर मिली कि चंदन नगर गोलीबारी के दोनों अभियुक्त पुणे रेलवे स्टेशन पर आने वाले हैं. वे प्लेटफार्म नंबर-3 से साढ़े 5 बजे छूटने वाली झेलम एक्सप्रैस से दिल्ली भागने वाले हैं.

धरे गए हत्यारे

यह खबर उन के लिए काफी महत्त्वपूर्ण थी. यह खबर अपने वरिष्ठ अधिकारियों को दे कर वह हत्या के आरोपियों की गिरफ्तारी की योजना तैयार करने में जुट गए. गाड़ी छूटने के पहले उन्हें अपना मोर्चा मजबूत करना था, इसलिए उन्होंने इस मामले की खबर चंदन नगर पुलिस के साथसाथ वड़गांव पुलिस और पुणे स्टेशन की जीआरपी को भी दे दी.

इंसपेक्टर गजानंद पवार अपनी टीम और क्राइम ब्रांच के इंसपेक्टर रघुनाथ जाधव की टीम ने पुणे रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर-3 पर खड़ी झेलम एक्सप्रेस पर शिकंजा कस दिया. स्थानीय पुलिस टीम भी रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर-3 पर नजर रखे हुए थी, जबकि इंसपेक्टर गजानंद पवार कांस्टेबल मोइद्दीन शेख के साथ स्टेशन के सीसीटीवी के कैमरों के कंट्रोल रूम में बैठ कर आनेजाने वाले मुसाफिरों को बड़े ध्यान से देख रहे थे.

जैसेजैसे गाड़ी के छूटने का समय नजदीक आ रहा था, वैसेवैसे उन की बेचैनी बढ़ती जा रही थी. एक बार तो उन्हें लगा कि शायद अभियुक्तों ने अपना इरादा बदल दिया होगा. लेकिन दूसरे ही क्षण उन की निगाहें चमक उठीं. गाड़ी छूटने में सिर्फ 10 मिनट बचे थे, तभी उन्होंने बदहवासी की हालत में 2 संदिग्ध लोगों को तेजी से बोगी नंबर-9 की तरफ बढ़ते हुए देखा.

यह समय पुलिस के लिए बहुत महत्त्वपूर्ण था. इंसपेक्टर गजानंद पवार ने पुलिस टीमों को सावधान कर दिया. वह खुद कोच नंबर 9 के पास पहुंच गए. उन्होंने आगे बढ़ कर उन दोनों को डिब्बे में चढ़ने से रोक लिया और उन से अपनी आईडी दिखाने को कहा. उन में से एक ने अपनी आईडी दिखाने के बहाने अपनी जेब से रिवौल्वर निकाला और इंसपेक्टर गजानंद पवार को अपना निशाना बना कर 3 गोलियां चला दीं.

अचानक चली गोली से इंसपेक्टर पवार ने खुद को बचाने की कोशिश की लेकिन एक गोली उन के जबड़े में लग गई. दूसरी गोली उन के कंधे को टच करती हुई निकली जो एक आदमी को जा कर लगी.

प्लेटफार्म पर चली गोलियों की आवाज से स्टेशन पर मौजूद मुसाफिरों में भगदड़ मच गई. इसी भगदड़ का लाभ उठा कर बदमाश अपनी रिवौल्वर लहराते हुए भागने लगे. लेकिन इस में सफल नहीं हो सके. कुछ दूरी पर मुस्तैद इंसपेक्टर रघुनाथ जाधव ने दौड़ कर इंसपेक्टर गजानंद पवार को संभाला.

अन्य पुलिस वाले हमलावरों के पीछे भागे. स्टेशन से निकल कर दोनों हमलावर सड़क पर भागने लगे. पुलिस भी उन के पीछे थी. सड़क पर चल रही भीड़ की वजह से पुलिस उन पर गोली भी नहीं चला सकती थी. तभी मालधक्का रेडलाइट पर तैनात बड़ गार्डन ट्रैफिक पुलिस के कांस्टेबल राजेंद्र शेलके ने एक हमलावर को दबोच लिया. दूसरे को जीआरपी ने पकड़ कर क्राइम ब्रांच के हवाले कर दिया.

हमलावरों की गोली से घायल इंसपेक्टर गजानंद पवार और घायल आदमी को पास के ही रूबी अस्पताल में भरती करवा दिया गया था, जहां घायल आदमी की मृत्यु हो गई थी, जबकि इंसपेक्टर गजानंद पवार की हालत नाजुक बनी हुई थी.

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सुपारी ले कर बापबेटे ने की हत्या

पकड़े गए हमलावरों से पूछताछ की गई तो उन में से एक ने अपना नाम शिवलाल उर्फ शिवा बाबूलाल राव बताया जबकि दूसरा उस का 19 वर्षीय बेटा मुकेश उर्फ मोंटी शिवलाल राव था. दोनों ही मूलरूप से राजस्थान के पाली जिले के रहने वाले थे, पर फिलहाल दिल्ली के उत्तम नगर में रहते थे. उन्होंने एकता भाटी की हत्या करने का अपराध स्वीकार किया.

क्राइम ब्रांच को दोनों हमलावरों से गहन पूछताछ करनी थी, इसलिए दूसरे दिन उन्हें पुणे के प्रथम मैट्रोपौलिटन मजिस्ट्रैट गजानंद नंदनवार के सामने पेश कर उन्हें 7 दिन के पुलिस रिमांड पर ले लिया.

रिमांड अवधि में उन से पूछताछ की गई तो पता चला कि मृतका एकता के पति बृजेश भाटी का दिल्ली की किसी महिला के साथ प्रेम प्रसंग चल रहा था. यानी एकता पति की प्रेमकहानी की भेंट चढ़ी थी. इस हत्याकांड के पीछे की जो कहानी निकल कर आई, वह बेहद दिलचस्प थी.

बात सन 2014 की थी. उस समय भाटी परिवार दिल्ली में रहता था. उन का अपना छोटा सा कारोबार था, जिस की देखरेख एकता भाटी और पति बृजेश भाटी करते थे. आमदनी कुछ खास नहीं थी, बस किसी तरह परिवार की गाड़ी चल रही थी. लेकिन ऐसा कितने दिनों तक चल सकता था. इसे ले कर दोनों पतिपत्नी अकसर परेशान रहते थे.

वे अच्छी आमदनी के लिए गूगल पर सर्च करते रहते थे. इसी खोज में बृजेश भाटी की संध्या पुरी से फेसबुक पर दोस्ती हो गई. दोनों की यह दोस्ती बहुत जल्द प्यार में बदल गई. संध्या पुरी खूबसूरत युवती थी. बृजेश भाटी ने अपने फेसबुक प्रोफाइल में खुद को अनमैरिड लिखा था, जबकि वह शादीशुदा और 2 बच्चों का बाप था.

पति का इश्क बना एकता की मौत का कारण

बृजेश भाटी को अनमैरिड जान कर ही संध्या पुरी ने उस की तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ाया था. संध्या पुरी बृजेश भाटी को ले कर खुशहाल जीवन के सुनहरे सपने देखने लगी थी. संध्या पुरी के इस अंधे प्यार का चतुरचालाक बृजेश भाटी ने भरपूर फायदा उठाया. उस ने संध्या पुरी से शादी का वादा कर उस से काफी पैसा ऐंठा. साथ ही उस ने संध्या की कार भी हथिया ली थी.

इस तरह बृजेश भाटी संध्या पुरी के पैसों पर मौज कर रहा था. जब संध्या पुरी ने बृजेश पर शादी का दबाव डालना शुरू किया तो वह योजनानुसार संध्या पुरी की कार बेच कर परिवार सहित पुणे चला गया.

पुणे जाने के बाद बृजेश और एकता ने कैटरिंग का काम शुरू किया. शुरूशुरू में उन के लिए यह काम कठिन था लेकिन धीरेधीरे सब ठीक हो गया. उन की और परिवार की मेहनत से थोड़े ही दिनों में उन का यह कारोबार चल निकला. उन्होंने पुणे की कई आईटी कंपनियों में अपनी एक खास जगह बना ली थी.

उन कंपनियों के खाने के डिब्बों की जिम्मेदारी उन के ऊपर आ गई थी. उन के खाने में जो टेस्ट था, वह किसी और के डिब्बों में नहीं था.

काम बढ़ा तो पैसा आया और पैसा आया तो उन के परिवार का रहनसहन बदल गया. उन्होंने पुणे के पौश इलाके की धनदीप बिल्डिंग में 3 फ्लैट किराए पर ले लिए. 2 फ्लैट बिल्डिंग की पहली मंजिल पर थे तो एक दूसरी मंजिल पर था. दूसरी मंजिल के फ्लैट को उन्होंने अपना बैडरूम बनाया. पहली मंजिल का एक फ्लैट उन्होंने अपने दोनों बच्चों और पिता के लिए रखा.

दूसरे फ्लैट को उन्होंने खाने का मेस बना लिया. मेस में काम करने के लिए नौकर और नौकरानी भी रख ली थी, जो खाना बनाने और टिफिन तैयार करने का काम किया करते थे. सुबह की चायनाश्ता पूरा परिवार साथसाथ नीचे वाले फ्लैट में करता था.

बृजेश के शादीशुदा होने की जानकारी जब संध्या पुरी को हुई तो उस के पैरों तले से जमीन खिसक गई. क्योंकि वह बृजेश को दिलोजान से चाहती थी. उस ने सपने में भी नहीं सोचा था कि जिस शख्स पर उस ने अपना तन, मन और धन सब कुछ न्यौछावर कर दिया, वह 2 बच्चों का बाप है.

संध्या को इस का बहुत दुख हुआ. वह ऐसे धोखेबाज को सबक सिखाना चाहती थी, लेकिन वह दिल्ली से फरार हो चुका था.

संध्या हार मानने वालों में से नहीं थी. उस ने निश्चय कर लिया कि वह बृजेश भाटी को ढूंढ कर ही रहेगी. इस के लिए भले ही उस के कितने भी पैसे खर्च हो जाएं. लिहाजा वह अपने स्तर से बृजेश को तलाशने लगी.

उस की कोशिश रंग लाई. उसे फरवरी 2017 में पता चल गया कि बृजेश इस समय पुणे में अपने परिवार के साथ रह रहा है. वह उस के पास पुणे चली गई. वहां वह उस के घर वालों से भी मिली. पहले तो बृजेश ने संध्या को पहचानने से इनकार कर दिया लेकिन जब उस ने अपने तेवर दिखाए तो वह लाइन पर आ गया.

संध्या ने जब शादी की बात कही तो उस ने शादी करने से इनकार कर दिया. उस समय बृजेश की पत्नी एकता ने संध्या को बुरी तरह बेइज्जत कर के घर से निकाल दिया था.

इस से नाराज और दुखी हो कर संध्या दिल्ली लौट आई. बृजेश को सबक सिखाने के लिए उस के खिलाफ उत्तम नगर थाने में बलात्कार और धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज करवा दी. रिपोर्ट दर्ज हो जाने के बाद दिल्ली पुलिस ने बृजेश भाटी को पुणे से गिरफ्तार कर तिहाड़ जेल भेज दिया. करीब डेढ़ महीने जेल में रहने के बाद वह जमानत पर बाहर आ गया तो संध्या पुरी ने उस से अपनी कार और पैसों की मांग शुरू कर दी.

इस पर बृजेश भाटी के परिवार वालों और संध्या पुरी में जम कर तकरार हुई थी. तब संध्या ने धमकी दी कि अगर उस की कार और पैसे वापस नहीं मिले तो पूरे परिवार को नहीं छोड़ेगी. भाटी परिवार ने इसे संध्या पुरी की एक कोरी धमकी समझा था.

बृजेश भाटी से छली जा चुकी संध्या पुरी ने भाटी परिवार को सबक सिखाने का फैसला कर लिया. वह उसे साकार करने में जुट गई थी. वह जिस तरह तड़प रही थी, उसी तरह धोखेबाज बृजेश को भी तड़पते देखना चाहती थी. इस काम में उस के एक जानपहचान वाले शख्स ने उस की मदद की. उस ने संध्या को आपराधिक प्रवृत्ति वाले शिवलाल उर्फ शिवा बाबूलाल राव से मिलवाया.

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पकड़ में आई हत्या कराने वाली प्रेमिका

संध्या पुरी बृजेश भाटी की पत्नी एकता भाटी की हत्या कराना चाहती थी. इस के लिए उस ने शिवलाल उर्फ शिवा को मोटी सुपारी दी. सुपारी लेने के बाद शिवा अपने बेटे मुकेश उर्फ मोंटी राव के साथ पुणे पहुंच गया.

पुणे आ कर दोनों ने पहले बृजेश भाटी के घर की पूरी रेकी की और घटना के दिन उन्होंने पुणे मार्केट से एक मोटरसाइकिल चुरा ली और सुबहसुबह आ कर एकता भाटी को अपना निशाना बना कर वहां से भाग निकले. वे शहर से बाहर निकल जाना चाहते थे. लेकिन पुलिस के सक्रिय होने से वह पुणे में ही रह गए थे.

उन्हें पता था कि पुणे से शाम साढ़े 5 बजे दिल्ली के लिए झेलम एक्सप्रैस जाती है. इसी ट्रेन से उन्होंने दिल्ली भाग जाना उचित समझा, इसलिए शाम 4 बजे तक उन्होंने सारसबाग के एक होटल में समय बिताया.

फिर वे प्लेटफार्म नंबर 3 पर खड़ी झेलम एक्सप्रैस में चढ़ने को हुए तो उन का सामना पुलिस से हो गया. शिवलाल ने शक होने पर गोली चला दी, जिस से इंसपेक्टर गजानंद पवार घायल हो गए.

शिवलाल उर्फ शिवा बाबूलाल राव और मुकेश उर्फ मोंटी राव से पूछताछ करने के बाद क्राइम ब्रांच की एक टीम संध्या पुरी को गिरफ्तार करने दिल्ली निकल गई. 26 नवंबर, 2018 को दिल्ली में उत्तम नगर पुलिस की सहायता से संध्या पुरी को भी गिरफ्तार कर लिया. पुलिस संध्या को पुणे ले गई.

पूछताछ के बाद संध्या पुरी ने पूरी कहानी बता दी.॒पुलिस ने संध्या पुरी, शिवलाल और उस के बेटे मुकेश उर्फ मोंटी को कोर्ट में पेश कर के यरवदा जेल भेज दिया. कथा लिखे जाने तक तीनों अभियुक्त जेल में बंद थे. आगे की जांच चंदन नगर थानाप्रभारी राजेंद्र मुलिक कर रहे थे.

कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

फैशन व पर्यावरण के हित का कोर्स

रोजमर्रा की हमारी लाइफ में फैशन का एक अपना स्थान है. जिसमें दिन प्रतिदिन बदलाव होना लाजमी है. मौडलिंग रैम्प हो या घर की वार्डरोब दोनों में इसकी अच्छी खासी पैठ है फैशन इंडस्ट्री ने हर जगत में अपनी एक छापछोड़ी हुई है. चाहे वो हौलीवुड हो या बौलीवुड इंडस्ट्री हो या आम लोगों की लाइफ का हिस्सा. यह जितना ज्यादा बड़ा होता जा रहा है उतना ही चिंता का सबब बनता जा रहा है इससे तकरीबन 5 करोड़ लोगों का रोजगार चल रहा है. अब जहां सरकार प्लास्टिक को लेकर चिंतित हैं वहीं  फैशन वैस्ट भी कगार में है जिससे निबटने के लिये कई कंपनियां आगे आ रही हैं.                                                                                                                                                                      अब सस्टेनेबल फैशन का दौर शुरू हो रहा है यह अपमार्केट होने के साथ ही टिकाऊ भी है. इसमें फैशन के लग्जरी होने के साथ साथ पर्यावरण की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाता है. फैशन जगत में पांव रखने वाले या मौजूदा लोगों को यह सीखना बहुत जरूरी है. इसके लिये औनलाइन कोर्स मौजूद है.

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कौन कर सकता है यह कोर्स

जो लोग फैशन इंडस्ट्री की और रुख कर रहे हैं या जो लोग इस प्रोफेशन में पहले से ही मौजूद है वो सभी इसे औनलाइन ज्वाइन कर सकते हैं. इस कोर्स से पर्यावरण की मदद करने के साथ सस्टेनेबल फैशन के बारे में जान पाएंगे. इससे आप फैशन की जटिल प्रकृति के बारे में भी जानकारी हासिल कर पाएंगे. यह कोर्स फैशन एंड सस्टेनेबिल्टी, अंडरस्टैंड लग्जरी फैशन इन ए चेंजिंग वर्ल्ड है.

यह छह हफ्ते  की अवधि का औनलाइन कोर्स है जो की निशुल्क है. यह कोर्स अब शुरू हो चूका जिसके लिये आप कभी भी एनरोल कर सकते हैं.

क्या जान पाएंगे

इस 6  हफ्ते के कोर्स में आप फैशन में टिकाऊ लग्जरी मेट्रिअल की समझ तो हासिल करेंगे ही साथ ही फैशन वेस्ट का पर्यावरण पर कैसे दुष्प्रभाव है वह भी जान पाएंगे. इसमें फैशन के लग्जरी डिजाइन, उत्पादन और खपत के बारे में भी जानकारी ले सकेंगे व फैशन के व्यपार की रणनीति की समझ भी हासिल कर सकेंगे.

कैसे करें कोर्स ज्वाइन

कोर्स के लिए वेबसाइट पर जाकर एनरोल कर सकते है एनरोलमेंट के बाद आपकी ई मेल पर कोर्स की जानकारी व सिलेबस सामग्री मिलती रहेगी कोर्स सिर्फ ६ सप्ताह का है वैसे तो यह नि:शुल्क है लेकिन अधिक लाभ पाने के लिये शुल्क अदा करना होगा.

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सिने डांसर्स एसोसिएशन की ब्रांड एंबेसडर सरोज खान सिने डांसर्स की बालिकाओं के लिए मुफ्त शिक्षा लागू करेंगी!

भारत की पहली महिला कोरियोग्राफर सरोज खान को सिने डांसर्स एसोसिएशन ने अपना ब्रांड एंबेसडर घोषित कर सम्मानित किया. इस दौरान सिने डांसर्स असोसिएशन के अध्यक्ष नीलेश पराड़कर, अध्यक्ष जाहिद शेख, महासचिव रवि कंवर, उपाध्यक्ष अल फहीम सुर्ने (राज) और एसोसिएशन की प्रबंध समिति के अन्य सदस्य भी उपस्थित थे. सिने डांसर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष ज़ाहिद शेख ने कहा, “उन्होंने (सरोज खान) ने अपने जीवन के ५० से अधिक वर्ष इस पेशे को दिए हैं. और अब हमारा वक़्त है उन्हें सम्मानित करने का और उनहे वह स्थान देना है जिसकी वह सबसे बड़ी हकदार है. ”

७० वर्षीय डांसर से कोरियोग्राफर बनी  सरोज खान अपनी किशोरावस्था में इस करियर में पदार्पण किया था, सीडीए के इस फैसले से अभिभूत होकर उन्होंने कहा, “मैं अभी भी एक ग्रुप डांसर हूं और मेरे पास अभी भी मेरा सीडीए कार्ड है और एक ब्रांड एंबेसडर के रूप में मैं चाहती हूं कि यह फिल्म उद्योग का सबसे बड़ा संघ बने. जब मैं १० साल की थी तब मैंने फिल्मों में नृत्य करना शुरू कर दिया था और अब मैं फिर से अपने घर वापस लौट आ गई हूं. इस समय, मैं उन सभी सुविधाओं को प्रदान कराना चाहती हूँ जो हमारे समय में उपलब्ध नहीं थीं. मैं अच्छे कार्य करने और उन्हें सही दिशा देने का वादा करती हूं. और फिल्म में, नर्तकियों को वह सम्मान मिलेगा, जिसके वे हकदार हैं. ”

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सरोज खान की राय यह भी है कि वरिष्ठों के लिए धन जुटाने के लिए स्टेज शो आयोजित किए जाने चाहिए ताकि धन का उपयोग उन लोगों के लिए पेंशन के रूप में किया जा सके जो सेवानिवृत्त जीवन जी रहे हैं और जीवित रहने के लिए धन की जरूरत है. ” वरिष्ठ कोरियोग्राफर का यह भी सुझाव है कि एक निश्चित राशि को डांसर्स से कटवाने की जरूरत है जो पेंशन फंड में जाना चाहिए. साथ ही, संघ सदस्यों की कन्या शिक्षा के लिए शुल्क की जिम्मेदारी लेने के लिए उत्सुक है.

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सरोज खान डांसर्स  बनने के इच्छुक लड़कियों और लड़कों को भी मंजूरी देंगी. उन्होंने कहा, “जो कोई भी भारतीय और पश्चिमी दोनों करने में सक्षम है, वह एक पेशेवर डांसर हो सकता है और संघ में उनका स्वागत किया जाएगा. मैं किसी विशेष डांस फौर्म को न जानने के किसी भी बहाने को बर्दाश्त नहीं करुंगी. ” ७० वर्ष की आयु में सरोज अभी भी छात्रों और न्यूकमर्स को नृत्य सिखा रही हैं, और उनके पास वरिष्ठों को सलाह है, बैठो नहीं, नृत्य करो और रिहर्सल करो, और अपने आप को फिट रखो; काम आपके पास जरूर आएगा. ”

सिने डांसर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष नीलेश पराड़कर ने कहा, “सीडीए एक कमजोर एसोसिएशन बन गया है. हम इसे एक मजबूत और बेहतर संघ बनाने के लिए एक साथ आ रहे हैं. हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि भुगतान उन्हें समय पर दिया जाए और उनके लिए योग्य राशि का भुगतान किया जाए. वरिष्ठ सदस्यों को वित्तीय मदद मिलती है और मैं चाहता हूं कि सीडीए बढ़े और हम जो भी आवश्यक हो वह करेंगे और उनका समर्थन करना जारी रखेंगे.”

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भाजपा को सबक

भारतीय जनता पार्टी के दंभ और उस की मनमानी का जो जवाब जनता ने इस बार हरियाणा, महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों व 51 विधानसभा सीटों के उपचुनावों में दिया वह अप्रत्याशित था. पूरा देश तो इस बात को मन में लिख चुका था कि केंद्र सरकार कश्मीर के फैसले के बदले में जनता के वोट दान में वसूलेगी और जजमानों को खाली कर देगी. लेकिन, जनता ने कह दिया कि बस, इतना ही. यदि हर जगह वोट बंटते नहीं और दलित, मुसलमान व पिछड़े वोट एक को जाते, तो भाजपा औंधेमुंह गिरती.

भाजपा ने जब से कामकाज संभाला है, अर्थव्यवस्था बुरी तरह लड़खड़ाने लगी है. इस बार दीवाली लोगों के लिए भी फीकी रही और व्यापार के लिए भी. हालांकि कृषि उपज में कमी नहीं हुई पर फिर भी गांवों में आय नहीं बढ़ी. इस से शहरी फैक्ट्रियों का सामान नहीं बिका. आज पूरा देश भयंकर मंदी का सामना कर रहा है.

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भाजपा सरकार के नोटबंदी और जीएसटी के तुगलकी फैसलों से कालाधन अगर कम भी हुआ तो अपने साथ वह सफेद धन भी ले डूबा है. व्यापारियों और आम आदमियों के पास पैसा ही नहीं बचा चाहे वह सफेद हो या काला. इस विधानसभा व उपचुनावों में ईवीएम मशीनों में यह साफ दिखा. जिस महाराष्ट्र में भाजपा 220 सीटों का आंकड़ा ले कर चल रही थी वहां 161 पर सिमट गई, पहले से 17 कम. वहीं, जिस हरियाणा में 75 पार करने का सपना पाल रही थी वहां 40 सीटों पर रह गई. दोनों राज्यों में सरकार तो बन गई पर बहुत लेनदेन के बाद. रामायण के नायक राम को सुग्रीव का साथ लेने के लिए वानर राजा बाली को मारना पड़ा था, वैसे ही कुछ पैतरे आज भाजपा को सत्ता की सीता हासिल करने के लिए लेने पड़े हैं.

भाजपा असल में इस गुमान में है कि वह मंदिर की अलख जगा कर, लोगों को तीर्थों, चारधामों, कांवड़ यात्राओं, देशभक्ति के नारों में उलझा कर सदा उन्हें बेवकूफ बनाती रहेगी. भाजपा गलत भी नहीं है क्योंकि यह देश हमेशा ही धर्म के इशारे पर चलता रहा है. अब तक देश का बड़ा कामगार वर्ग धर्म के भुलावे में ही सामाजिक स्तर कम मिलने पर भी सेवा कर खुश रहा. लेकिन, अब वह सक्षम व शिक्षित होने लगा है. वह सामाजिक स्तर पर अपनी पूरी बराबरी व पहचान चाहता है.

हरियाणा के खत्री मुख्यमंत्री और महाराष्ट्र के ब्राह्मण मुख्यमंत्री की मौजूदगी जनता को रास नहीं आई. मतदाता अब तक भ्रष्टाचार के नारों तक व देशभक्ति के भुलावों, संतोंमहंतों के चक्कर आदि में ही पड़े रहे. लेकिन, अब उन का इन सब से मोह भंग होने लगा है. भाजपा को अब सही फैसले लेने होंगे, जनता को बराबरी का एहसास कराना होगा. एकतरफा धार्मिक, जातीय धौंस से न ऊंचों का भला होगा, न औरों का.

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जानिए, कैसे हिना खान को वर्कआउट के दौरान लगी चोट

एक्ट्रेस हिना खान अपनी फिटनेस का काफी ख्याल रखती हैं. जी हां अक्सर जिम जाती है. हिना खान अपने फैंस के साथ सोशल मीडिया पर तस्वीरें भी शेयर करती रहती है. सोशल मीडिया पर हिना खान ने तस्वीर  शेयर की है. उन्हें वर्कआउट के दौरान ही चोटें लग गई हैं. इस बात की जानकारी हिना खान ने सोशल मीडिया पर तस्वीर के जरिए दी है.

हिना ने चोट के कारण अपने मसल्स पार्ट पर ज्यादा ध्यान दिया और उसके मुताबिक जमकर मेहनत की. इस दौरान हिना के फिटनेस ट्रेनर ने उनकी खूब वीडियोज भी बनाई.

हिना खान ने वर्कआउट का वीडियो भी शेयर किया है जिसमें वो काफी मेहनत करती और पसीना बहाती दिखाई दे रही हैं. हिना ने अपने हाथ की तस्वीर शेयर की है जिसमें उनकी चोट दिखाई दे रही है. इस तस्वीर को शेयर करते हुए हिना ने लिखा, “और भी हैं.” इसके साथ ही उन्होंने परेशान होने वाले इमोजी भी डाली है.

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वीडियो में आप देख सकते है कि चोट लगने  के बावजूद भी हिना जिम में पसीना बहाती दिखाई दे रही है. हिना बिल्कुल भी नहीं थकी है. कमेंट बौक्स में हिना के फैंस ने लिखा हैं कि आपको ऐसे में ऐसे में वर्कआउट की नहीं आराम की जरूरत है.

हिना के काम की बात करें तो इन दिनों वो अपने आने वाली फिल्मी प्रोजेक्टस पर काम कर रही हैं. फैंस हिना की फिल्मों का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं. बता दें कि हिना ने कई टीवी शो में काम किया है. उनके किरदार को फैंस ने खूब पसंद किया था.

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8 टिप्स : बच्चों को ऐसे बचाएं स्किन प्रौब्लम से

छोटे बच्चों के बारे में सोचते हैं तो सबसे पहले उनकी कोमल त्वचा का ही ख्याल आता है. उनकी त्वचा बहुत ही नाजुक और मुलायम होने की वजह से उनको त्वचा से जुडी परेशानियां भी अधिक होती है. हर मां यही चाहती है कि वह अपने बच्चे को अच्छी परवरिश  दे. आमतौर पर बच्चो में  त्वचा पर रेशेस, दाने या लाल होना,  परत का निकलना,  रूखी त्वचा और डाइपर रैशेज हो जाते हैं. बच्चों की स्किन बड़ों की त्वचा से ज्यादा नमी सोखती है अगर आप अपने बच्चे को त्वचा से जुड़ी परेशानियों से, खासतौर से रैशेज से बचाकर रखना चाहती हैं तो आपको उनकी त्वचा का खास खयाल रखना होगा.

बच्चो की त्वचा

जब शरीर में हिस्टामाइन नामक केमिकल बनने की वजह से त्वचा पर एलर्जी हो सकती है. एलर्जी कई प्रकार के रैशेज और चकत्ते के रूप में होने लगती हैं. संवेदनशील त्वचा वाले शिशुओं में एलर्जी होने का खतरा ज्यादा हो सकता है. यहां तक कि गंदे डायपर, भोजन, साबुन और डिटर्जेंट से भी एलर्जी का जोखिम बढ़ सकता है.

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 मिलिया

मिलिया (सफ़ेद दाने) बहुत छोटे-छोटे उभार होते हैं जो स्किन में किसी भी उम्र में हो सकते हैं, लेकिन आमतौर पर नवजात बच्चों में देखे जाते हैं. मिलिया से कोई नुकसान नहीं होता लेकिन इनकी वजह से सुन्दरता कम हो जाती है. अधिकतर केसेस में,  ये अपनेआप चले जाते हैं. इसके लिये जरूरी है की स्किन को साफ़ रखें .

रूखी त्वचा

रूखी त्वचा की समस्या बच्चों में आम है. रूखी त्वचा के कारण उन्हें खुजली आदि की समस्या भी हो सकती है. इससे बचने के लिए बच्चे को ज्यादा न नहलाएं और नहाने के लिए हमेशा गुनगने पानी का इस्तेमाल करें. हमेशा हल्के शैंपू और क्लींजर का इस्तेमाल करें.

एक्जिमा

यह स्किन रैशेज होता है, जो आमतौर पर शिशु के माथे, गाल या खोपड़ी पर दिखाई देता है. हालांकि, यह हाथ, पैर, छाती या शरीर के अन्य हिस्सों में भी फैल सकता है. यह सूखी, पपड़ीदार त्वचा होती है और किसी भी तरह की खरोंच लगने पर संक्रमित होकर छाले या फुंसी का रूप ले सकती है.

 पपड़ी (क्रैडल कैप)

इसमें शिशु के सिर पर पपड़ी जम जाती है. ये सूखी और लाल होती है और इस वजह से शिशु को खुजली की समस्या भी होने लगती है. यूं तो यह अपने आप ठीक हो जाता है, लेकिन कभी-कभी जन्म के तीन महीनों में यह फिर हो सकता है.  इसे क्रैडल कैप या सेबोरिएक डर्मेटाइटिस भी कहते हैं .

डाइपर रैश

डाइपर रैश के कारण पैरों के अंदरूनी हिस्से की त्वचा लाल और संवेदनशील हो जाती है. इस समस्या से बचने के लिए बच्चे के निजी अंगों की साफ-सफाई का ध्यान रखें. साथ ही इस बात का ध्यान रखें कि वो हिस्सा गीला न रहे.शिशु का डायपर हर कुछ देर में चेक करें और गीला होने पर तुरंत बदलें.

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अपनाएं ये इलाज

– 1. शिशु के कपड़ों को हमेशा एंटीसैप्टिक से धोएं और ज्यादा डिटर्जेंट या साबुन का उपयोग न करें. कभी-कभी साबुन या सर्फ की वजह से भी त्वचा पर एलर्जी हो सकती है.

2. बच्चे के नहाने के पानी में दो चम्मच ओटमील डालें और बच्चे को कुछ देर उस पानी में बिठाएं. यह ध्यान रखें कि त्वचा से जुड़े संक्रमण के दौरान ज्यादा नहाना ठीक नहीं होता.

3. शिशु को नर्म, ढीले-ढाले और कौटन के कपड़े पहनाएं.

4. बच्चे की त्वचा पर जहां रैशेज हैं,  वहां दिन भर में दो से तीन बार पेट्रोलियम जेली लगाएं.

5. रैशेज से निजात दिलवाने में एलोवेरा जेल प्रभावी होता है. एलोवेरा जेल त्वचा को ठंडक देकर खुजली और जलन से राहत देता है.

6. नारियल तेल,  या औलिव औयल का दिन में दो से तीन बार इस्तेमाल करने से त्वचा में  नमी बनी रहती है

7. शिशु को ज्यादा देर धूप में न रखें.

8. पूरे दिन में एक-दो बार शिशु को बिना डायपर के रहने दें.क्योंकि गुप्तांगों को हवा लगाना भी जरूरी होता है .

घातक निकली बीवी नंबर 2 : भाग 1

3 जुलाई, 2018 की बात है. शाम 6 बजे थाना सजेती का मुंशी अजय पाल रजिस्टर पर दस्तखत कराने थाना परिसर स्थित दरोगा पच्चालाल गौतम के आवास पर पहुंचा. दरोगाजी के कमरे का दरवाजा बंद था, लेकिन कूलर चल रहा था. अजय पाल ने सोचा कि दरोगाजी शायद सो रहे होंगे. यही सोचते हुए उस ने बाहर से ही आवाज लगाई, ‘‘दरोगाजी…दरोगाजी.’’

अंदर से कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई तो उस ने दरवाजे को अंदर की ओर धकेला. दरवाजा अंदर से बंद नहीं था, हलके दबाव से ही खुल गया. अजय पाल ने कमरे के अंदर पैर रखा तो उस के मुंह से चीख निकल गई. कमरे के अंदर दरोगा पच्चालाल की लाश पड़ी थी. किसी ने उन की हत्या कर दी थी.

बदहवास सा मुंशी अजय पाल थाना कार्यालय में आया और उस ने यह जानकारी अन्य पुलिसकर्मियों को दी. यह खबर सुनते ही थाना सजेती में हड़कंप मच गया. घबराए अजय पाल की सांसें दुरुस्त हुईं तो उस ने वायरलैस पर दरोगा पच्चालाल गौतम की थाना परिसर में हत्या किए जाने की जानकारी कंट्रोल रूम को और वरिष्ठ अधिकारियों को दे दी.

सूचना पाते ही एसपी (ग्रामीण) प्रद्युम्न सिंह, एसपी (क्राइम) राजेश कुमार यादव, सीओ आर.के. चतुर्वेदी, इंसपेक्टर दिलीप बिंद तथा देवेंद्र कुमार दुबे थाना सजेती पहुंच गए. पुलिस अधिकारी पच्चालाल के कमरे में पहुंचे तो वहां का दृश्य देख सिहर उठे.

कमरे के अंदर फर्श पर 58 वर्षीय दरोगा पच्चालाल गौतम की खून से सनी लाश पड़ी थी. अंडरवियर के अलावा उन के शरीर पर कोई कपड़ा नहीं था. खून से सना चाकू लाश के पास पड़ा था. खून से सना एक तौलिया बैड पर पड़ा था. हत्यारों ने दरोगा पच्चालाल का कत्ल बड़ी बेरहमी से किया था.

पच्चालाल की गरदन, सिर, छाती व पेट पर चाकू से ताबड़तोड़ वार किए गए थे. आंतों के टुकड़े कमरे में फैले थे और दीवारों पर खून के छींटे थे. दरोगा पच्चालाल के शरीर के घाव बता रहे थे कि हत्यारों के मन में उन के प्रति गहरी नफरत थी और वह दरोगा की मौत को ले कर आश्वस्त हो जाना चाहते थे. बैड से ले कर कमरे तक खून ही खून फैला था.

छींटों के अलावा दीवार पर खून से सने हाथों के पंजे के निशान भी थे. इन निशानों में अंगूठे का निशान नहीं था. घटनास्थल को देख कर ऐसा लग रहा था, जैसे दरोगा पच्चालाल गौतम ने हत्यारों से अंतिम सांस तक संघर्ष किया हो.

पुलिस अधिकारी घटनास्थल का निरीक्षण कर ही रहे थे कि आईजी आलोक सिंह तथा एसएसपी अखिलेश कुमार भी थाना सजेती आ गए. वह अपने साथ फोरैंसिक टीम और डौग स्क्वायड को लाए थे. दोनों पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण किया तो उन के माथे पर बल पड़ गए.

बेरहमी से किए गए इस कत्ल को अधिकारियों ने गंभीरता से लिया. फोरैंसिक टीम ने चाकू और कमरे की दीवार से फिंगरप्रिंट उठाए. डौग स्क्वायड ने घटनास्थल पर डौग को छोड़ा. डौग लाश व कमरे की कई जगहों को सूंघ कर हाइवे तक गया और वापस लौट आया. वह ऐसी कोई हेल्प नहीं कर सका, जिस से हत्यारे का कोई सूत्र मिलता.

कारण नहीं मिल रहा था बेरहमी से किए गए कत्ल का

मृतक पच्चालाल के आवास की तलाशी ली गई तो पता चला, हत्यारे उन का पर्स, घड़ी व मोबाइल साथ ले गए थे. किचन में रखे फ्रिज में अंडे व सब्जी रखी थी. कमरे में शराब व ग्लास आदि नहीं मिले, जिस से स्पष्ट हुआ कि हत्या से पहले कमरे में बैठ कर शराब नहीं पी गई थी.

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अनुमान लगाया गया कि हत्यारा दरोगा पच्चालाल का बेहद करीबी रहा होगा, जिस से वह आसानी से आवास में दाखिल हो गया और बाद में उस ने अपने साथियों को भी बुला लिया.

आईजी आलोक सिंह तथा एसएसपी अखिलेश कुमार यह सोच कर चकित थे कि थाना कार्यालय से महज 20 मीटर की दूरी पर दरोगा पच्चालाल का आवास था. कमरे में चाकू से गोद कर उन की निर्दयतापूर्वक हत्या कर दी गई और उन की चीखें थाने के किसी पुलिसकर्मी ने नहीं सुनीं, इस से पुलिसकर्मी भी संदेह के घेरे में थे.

लेकिन इस में यह बात भी शामिल थी कि दरोगा पच्चालाल गौतम के आवास में 2 दरवाजे थे. एक दरवाजा थाना परिसर की ओर खुलता था, जबकि दूसरा हाइवे के निकट के खेतों की ओर खुलता था. पता चला कि पच्चालाल के करीबी लोगों का आनाजाना हाइवे की तरफ खुलने वाले दरवाजे से ज्यादा होता था. हाइवे पर ट्रकों की धमाचौकड़ी मची रहती थी, जिस की तेज आवाज कमरे में भी गूंजती थी. संभव है, दरोगा की चीखें ट्रकों और कूलर की आवाज में दब कर रह गई हो और किसी पुलिसकर्मी को सुनाई न दी हो.

एसएसपी अखिलेश कुमार ने थाना सजेती के पुलिसकर्मियों से पूछताछ की तो पता चला कि दरोगा पच्चालाल गौतम मूलरूप से सीतापुर जिले के थाना मानपुरा क्षेत्र के रामकुंड के रहने वाले थे.

उन्होंने 2 शादियां की थीं. पहली पत्नी कुंती की मौत के बाद उन्होंने किरन नाम की युवती से प्रेम विवाह किया था. पहली पत्नी के बच्चे रामकुंड में रहते थे, जबकि दूसरी पत्नी किरन कानपुर शहर में सूर्यविहार (नवाबगंज) में अपने बच्चों के साथ रहती थी.

पारिवारिक जानकारी मिलते ही एसएसपी अखिलेश कुमार ने दरोगा पच्चालाल की हत्या की खबर उन के घर वालों को भिजवा दी. खबर मिलते ही दरोगा की पत्नी किरन थाना सजेती पहुंच गई. पति की क्षतविक्षत लाश देख कर वह दहाड़ मार कर रोने लगी. महिला पुलिसकर्मियों ने उसे सांत्वना दे कर शव से अलग किया.

कुछ देर बाद दरोगा के बेटे सत्येंद्र, महेंद्र, जितेंद्र व कमल भी आ गए. पिता का शव देख कर वे भी रोने लगे. पुलिसकर्मियों ने उन्हें धैर्य बंधाया और पंचनामा भर कर शव पोस्टमार्टम के लिए लाला लाजपतराय चिकित्सालय भेज दिया. आलाकत्ल चाकू को परीक्षण हेतु सील कर के रख लिया गया.

4 जुलाई, 2018 को मृतक पच्चालाल के शव का पोस्टमार्टम हुआ. पोस्टमार्टम के बाद शव को पुलिस लाइन लाया गया, जहां एसएसपी अखिलेश कुमार, एसपी (ग्रामीण) प्रद्युम्न सिह व अन्य पुलिस अधिकारियों ने उन्हें सलामी दे कर अंतिम विदाई दी.

इंसपेक्टर देवेंद्र कुमार, दिलीप बिंद व सजेती थाने के पुलिसकर्मियों ने पच्चालाल के शव को कंधा दिया. इस के बाद पच्चालाल के चारों बेटे शव को अपने पैतृक गांव  रामकुंड, सीतापुर ले गए, जहां बड़े बेटे सत्येंद्र ने पिता की चिता को मुखाग्नि दे कर अंतिम संस्कार किया. अंतिम संस्कार में किरन व उस के बच्चे शामिल नहीं हुए.

दरोगा पच्चालाल की हत्या की खबर कानपुर से लखनऊ तक फैल गई थी. यह बात एडीजे अविनाश चंद्र के संज्ञान में भी थी. इसी के मद्देनजर एसएसपी अखिलेश कुमार ने दरोगा हत्याकांड को बेहद गंभीरता से लिया और इस के खुलासे के लिए एक विशेष पुलिस टीम गठित की.

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जांच के लिए बनी स्पैशल टीम

इस टीम में उन्होंने क्राइम ब्रांच और सर्विलांस सेल तथा एसएसपी की स्वान टीम के तेजतर्रार व भरोसेमंद पुलिसकर्मियों को शामिल किया. क्राइम ब्रांच से सुनील लांबा तथा एसओजी से राजेश कुमार रावत, सर्विलांस सेल से शिवराम सिंह, राहुल पांडे, सिपाही बृजेश कुमार, मोहम्मद आरिफ, हरिशंकर और सीमा देवी तथा एसएसपी स्वान टीम से संदीप कुमार, राजेश रावत तथा प्रदीप कुमार को शामिल किया गया.

इस के अलावा वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के बेहतरीन जासूस कहे जाने वाले 3 इंसपेक्टरों देवेंद्र कुमार दुबे, दिलीप बिंद, मनोज रघुवंशी तथा सीओ (घाटमपुर) आर.के. चतुर्वेदी को शामिल किया गया.

पुलिस टीम ने सब से पहले घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया. साथ ही पोस्टमार्टम रिपोर्ट का भी अध्ययन किया. रिपोर्ट में पच्चालाल के शरीर पर 19 गहरे जख्म बताए गए थे जो सिर, गरदन, छाती, पेट व हाथों पर थे. इस टीम ने उन मामलों को भी खंगाला, जिन की जांच पच्चालाल ने की थी. लेकिन ऐसा कोई मामला नहीं मिला, जिस से इस हत्या को जोड़ा जा सकता. इस से साफ हो गया कि क्षेत्र के किसी अपराधी ने उन की हत्या नहीं की थी.

पुलिस टीम ने थाना सजेती में लगे सीसीटीवी फुटेज भी देखे, मगर उस में दरोगा के आवास में कोई भी आतेजाते नहीं दिखा. इस का मतलब हत्यारे पिछले दरवाजे से ही आए थे और हत्या को अंजाम दे कर उसी दरवाजे से चले गए.

टीम ने कुछ दुकानदारों से पूछताछ की तो शराब के ठेके के पास नमकीन बेचने वाले दुकानदार अवधेश ने बताया कि 2 जुलाई को देर शाम उस ने दरोगा पच्चालाल के साथ सांवले रंग के एक युवक को देखा था. उस युवक के साथ दरोगाजी ने ठेके से अंगरेजी शराब की बोतल खरीदी थी. साथ ही उस की दुकान से नमकीन का पैकेट भी लिया था.

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