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औरों से आगे : भाग 2

औरों से आगे : भाग 1

अब आगे पढ़ें

सभी को लगा कि लड़का लाखों में एक है. अम्मां ने कहा, ‘‘हिंदी तो ऐसे बोलता है, जैसे हमारे बीच ही रहता आया हो.’’ अम्मां का अनुकूल रुख देख कर बड़े भैया भी बदले थे. भाभी तो ऐसे अवसरों पर सदा तटस्थ रहती थीं. फिर भी बेटी को मनचाहा घरवर मिल रहा था, इस बात की अनुभूति उन के तटस्थ चेहरे को निखार गई थी. वह मन की प्रसन्नता मन तक ही रख कर अम्मां और भैया के सामने कुछ कहने का दुस्साहस नहीं कर पा रही थीं. बस, दबी जबान से इतना ही कहा, ‘‘आजकल तो वैश्यों में कितने ही अंतर्जातीय विवाह हो रहे हैं और सभी सहर्ष स्वीकार किए जा रहे हैं. जाति की संकुचित भावना का अब उतना महत्त्व नहीं है, जितना 15-20 वर्ष पहले था.’’ इतना सुनते ही अम्मां और भैया साथसाथ बोल उठे थे, ‘‘तुम्हारी ही शह है.’’ उस के बाद जब तक विवाह नहीं हुआ, भाभी मौन ही रहीं. वैसे यह सच था कि भाभी के बढ़ावे से ही कनु ने जाति से बाहर जाने की जिद की थी. सम्मिलित परिवार में रहीं भाभी नहीं चाहती थीं कि उन की बेटी सिर्फ आदर्श बहू बन कर रह जाए.

वह चाहती थीं कि वह स्वतंत्र व्यक्तित्व की स्वामिनी बने. कनु और राघवन विवाह के अवसर पर फुजूलखर्ची के खिलाफ थे. इसलिए बहुत सादी रीति से ब्याह हो गया, जो बाद में सब को अच्छा लगा. जैसेजैसे समय बीतता गया, राघवन का सभ्य व्यवहार, दहेज विरोधी सुलझे विचार और स्वाभिमानी व्यक्तित्व की ठंडी फुहार तले भीगता सब का मन शांत व सहज हो गया था. दोनों परिवारों में आपसी सद्भाव, प्रेम व स्नेह के आदानप्रदान ने प्रांतीयता व भाषा रूपी भेदभावों को पीछे छोड़, कब स्वयं को व्यक्त करने के लिए नई भाषा अपना ली, पता ही नहीं लगा. वह थी, हिंदी, अंगरेजी, तमिल मिश्रित भाषा. हमारे परिवार में भी तमिल समझने- सीखने की होड़ लग गई थी. यह जरूरी भी था. एक भाषाभाषी होने पर जो आत्मीयता व अपनेपन के स्पर्श की अनुभूति होती है, वह भिन्नभिन्न भाषाभाषी व्यक्तियों के साथ नहीं हो पाती. संभवत: यही कारण है कि अंतर्जातीय विवाहों में दूरी का अनुभव होता है. भाषा भेद हमारी एकता में बाधक है. नहीं तो भारत के हर प्रांत की सभ्यता व संस्कृति एक ही है.

प्रांतों की भाषा की अनेकता में भी एकता गहरी है या शायद विशाल एकता की भावना ने रंगबिरंगी हो भिन्नभिन्न भाषाओं के रूप में प्रांतों में विविधता सजा दी है. कनु के ब्याह के बाद स्मिता का ब्याह गुजराती परिवार में हुआ. मझली भाभी व भैया के लाख न चाहने पर भी वह ब्याह हुआ. सब से आश्चर्यजनक बात यह थी कि किसी को उस विवाह पर आपत्ति नहीं हुई. जैसे वह रोज की सामान्य सी बात थी. साथ ही रिंकू के लिए वर खोजने की आवश्यकता नहीं है, यह भी सोच लिया गया. अनिल व स्मिता को जैसे एकदूसरे के लिए ही बनाया गया था. दोनों की जोड़ी बारबार देखने को मन करता था. अम्मां इस बार पहले से कुछ अधिक शांत थीं. अनिल डाक्टर था, इसलिए आते ही अम्मां की कमजोर नब्ज पहचान गया था. जितनी देर रहता, ‘अम्मांअम्मां’ कह कर उन्हें निहाल करता रहता. एक बार जब अम्मां बीमार पड़ीं, तब ज्यादा तबीयत बिगड़ जाने पर अनिल सारी रात वहीं कुरसी डाले बैठा रहा. सवेरे आंख खुलने पर अम्मां ने आशीर्वादों की झड़ी लगा दी थी.

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बेटी से ज्यादा दामाद जिगर का टुकड़ा बन चला था. अम्मां ने अनिल के पिता से बारबार कहा था, ‘‘हमारी स्मिता के दिन फिर गए, जो आप के घर की बहू बनी. हमें गर्व है कि हमें ऐसा हीरा सा दामाद मिला.’’ अनिल के मातापिता ने अम्मां का हाथ पकड़ कर गद्गद कंठ से सिर्फ इतना ही कहा, ‘‘आप घर की बड़ी हैं. बस, सब को आप का आशीर्वाद मिलता रहे.’’ सुखदुख में जाति भेद व भाषा भेद न जाने कैसे लुप्त हो जाता है. सिर्फ भावना ही प्रमुख रह जाती है, जिस की न जाति होती है, न भाषा. और भावना हमें कितना करीब ला सकती है, देख कर आश्चर्य होता था. अब रिंकू का ब्याह था. घर के कोनेकोने में उत्साह व आनंद बिखरा पड़ा था.

जातीयविजातीय अपनेअपने तरीके से, अपनीअपनी जिज्ञासा लिए अनेक दृष्टिकोणों से हमारे परिवार को समझने का प्रयास कर रहे थे. रिंकू बंगाली परिवार में ब्याही जा रही थी. कहां शुद्ध शाकाहारी वैश्य परिवार की कन्या रिंकू और कहां माछेर झोल का दीवाना मलय. पर किसी को चिंता नहीं थी, अम्मां उत्साह से भरी थीं. उन की बातों से लगता था कि उन्हें अपने विजातीय दामादों पर नाज है. अम्मां का उत्साह व रवैया देख कर जातीय भाईबंधु, जो कल तक अम्मां को ‘इन बेचारी की कोई सुनता नहीं’ कह कर सहानुभूति दर्शा रहे थे, अब चकित हो पसोपेश में पड़े क्या सोच रहे थे, कह पाना मुश्किल था. रिंकू का विवाह सानंद संपन्न हो गया. वह विदा हो ससुराल चली गई. दूसरे दिन मन का कुतूहल जब प्रश्न बन कर अम्मां के आगे आया तो पहले तो अम्मां ने टालना चाहा, लेकिन राकेश, विवेक, कनु, राघवन, स्मिता, अनिल सभी उन के पीछे पड़ गए, ‘‘अम्मां, सचसच बताइएगा, अंतर्जातीय विवाहों को आप सच ही उचित नहीं समझतीं या…’’ प्रश्न पूरा होने से पहले ही अम्मां सकुचाती सी बोल उठीं, ‘‘मेरे अपने विचार में इन विवाहों में कुछ भी अनुचित नहीं. पर हम जिस समाज में रहते हैं, उस के साथ ही चलना चाहिए.’’ ‘‘पर अम्मां, समाज तो हम से बनता है. यदि हम किसी बात को सही समझते हैं तो उसे दूसरों को समझा कर उन्हें भी उस के औचित्य का विश्वास दिलाना चाहिए न कि डर कर स्वयं भी चुप रह जाना चाहिए.’’ अब स्मिता को बोलने का अवसर भी मिल गया था, ‘‘अम्मां, जातिभेद प्रकृति की देन नहीं है.

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यह वर्गीकरण तो हमारे शास्त्रों की जबरदस्ती की देन है. लेकिन अब तो हर जाति का व्यक्ति शास्त्र के विरुद्ध व्यवसाय अपना रहा है. अंतर्मन सब का एक जैसा ही तो है. फिर यह भेद क्यों?’’ राकेश ने अम्मां को एक और दृष्टिकोण से समझाना चाहा, ‘‘अम्मां, हम लोगों में शिक्षा की प्रधानता है. और शिक्षित व्यक्ति ही आगे बढ़ सकता है, ऐसा करने से हम आगे बढ़ते हैं. हमें जाति से जरा भी नफरत नहीं है. आप ऐसा क्यों सोचती हैं?’’ सब बातों में इतने मशगूल थे कि पता ही नहीं लगा, कब भैयाभाभी इत्यादि आ कर खड़े हो गए थे. अम्मां कुछ देर चुप रहीं, फिर बोलीं, ‘‘सच है, यदि हमारे परिवार की तरह ही हर परिवार अंतर्जातीय विवाहों को स्वीकार करे तो किसी हद तक तलाक व दहेज की समस्या सुलझ सकती है और बेमानी वैवाहिक जिंदगी जीने वालों की जिंदगी खुशहाल हो सकती है.’’ अम्मां के पोतेपोतियों ने उन्हें झट चूम लिया. एक बार फिर हमें गर्व की अनुभूति ने सहलाया, ‘हमारी अम्मां औरों से आगे हैं.’

बेदाग त्वचा के लिए ऐसे करें एलोवोरा का इस्तेमाल

अगर आप अपने चेहरे को सुंदर और बोदाग बनाए रखना चाहती हैं, तो आप बजार में मिलने वाले ब्यूटी प्रोडक्ट को छोड़ एलोवेरा जेल अपनाइये, क्योंकि त्वचा की समस्या के लिए एलोवेरा जेल सबसे अच्छा होता है. इसकी ठंडक से मुंहासे और दाग ठीक होने लगते हैं. आज हम आपको एलो वेरा का ऐसा मास्‍क बनाना सिखाएंगे जो हर तरह की स्‍किन प्रौब्‍लम के लिये प्रयोग किया जा सकता है.

चेहरे के लिये स्‍क्रब बनाएं

चेहरे को स्‍क्रब करना काफी जरुरी होता है नहीं तो आपके चेहरे पर बिल्‍कुल भी ग्‍लो नहीं दिखेगा. आप चाहें तो स्‍किन के लिये स्‍क्रब खुद घर पर ही तैयार कर सकती हैं. यह स्‍क्रब हर तरह की स्‍किन टाइप को सूट करता है. इसके लिये आपको एलो वेरा जेल, दही और थोड़ा ब्राउन या फिर वाइट शुगर की आवश्‍यकता होगी. इन सभी चीजों को मिक्‍स कर के चेहरे पर लगा कर गोलाई में रगड़ें. एलो वेरा स्‍किन को नमी पहुंचाता है और गंदगी से निजात दिलाता है. वहीं दही से स्‍किन में चमक आती है क्‍योंकि इसमें लैक्‍टिक एसिड पाया जाता है. और शुगर से डेड स्‍किन हटती है. इस स्‍क्रब को हफ्ते में एक बार लगाएं.

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मुंहासों के लिये

मुंहासो की सबसे बुरी बात यह होती है कि इनके दाग चेहरे पर लंबे समय तक टिके रहते हैं. मुंहासों को दूर करने के एलो वेरा जेल, थोड़ा सा जायफल पावडर और कुछ बूंद नींबू के रस की लें. इन सभी को मिला कर पेस्‍ट बनाएं और चेहरे पर लगा कर 10 मिनट रूक कर ठंडे पानी से धो लें. एलो वेरा जेल चेहरे पर पड़े मुंहासों को दूर कर उनके दाग को मिटाएगा.

रूखी त्‍वचा के लिये

त्‍वचा को नमी पहुंचाने के लिये एलो वेरा जेल काफी अच्‍छा होता है. आपको सिर्फ एलो वेरा जेल को औलिव औइल, शहद और बादाम तेल के साथ मिक्‍स करें. इसे चेहरे पर लगाएं और फिर आधे घंटे के बाद धो लें. यह आपके चेहरे को काफी लंबे समय तक मौइस्‍चराइज रखेगा और उम्र से पहले पड़ने वाली झुर्रियों को हटाएगा.

औइली स्‍किन के लिये

दही के साथ थोड़ा एलो वेरा जेल और टमाटर का रस मिलाइये और इस पेस्‍ट को चेहरे पर लगा कर हल्‍के हल्‍के मसाज कीजिये. इससे चेहरे का औइल निकलेगा और मुंहासों के निशान भी मिट जाएंगे. इस पेस्‍ट को चहरे पर 20 मिनट के लिये लगा छोड़ दें और फिर चेहरा धो लें.

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संवेदनशील त्‍वचा के लिये

जिनकी स्‍किन संवेदनशील होती है, उनके चेहरे पर मुंहासे काफी जल्‍दी आते हैं और उनकी उम्र का भी जल्‍दी ही पता चलने लगता है. अगर आपकी त्वचा भी संवेदनशील है तो एलो वेरा और पपीते का पेस्‍ट बना कर लगाये, इसमें आपको काफी मदद मिलेगी. यह स्‍किन को हाइड्रेट करती है और एक्‍ने से बचाती है. इसके अलावा इससे चेहरे पर तुरंत ही ग्‍लो भी आता है.

बिहाइंड द बार्स : भाग 5

नोरा तब इस जेल में नयी-नयी आयी थी. वह लगातार गुमसुम सी बनी हुई थी. बैरक के एक कोने में सिमटी बैठी रहती थी. उसकी आंखें आंसुओं से तर रहती थीं और भय उसके चेहरे से टपकता था. मृणालिनी अपने बिस्तर पर बैठी उसे घूरती रहती थी. कुसुम ने एकाध बार उससे बात करने की कोशिश की, मगर ज्यादा नहीं.

मृणालिनी ने पहले दिन जोर से आवाज देकर पूछा था, ‘ऐ छोकरी… किस जुर्म में आयी खाला के घर? के नाम है? अरे बोल न… चुप काहे को लगी है?’

नोरा ने तब बड़ी मुश्किल से मृणालिनी को अपना नाम बताया था. फिर काफी कुरेदने पर बताया था कि उसे ड्रग्स ले जाते पकड़ा गया है. लेकिन साथ ही उसने यह भी कहा कि उसने कुछ नहीं किया है. वह निर्दोष है.

मृणालिनी उसकी बात सुन कर जोर से हंसी. लेकिन वह लगातार यही कहती रही कि वह निर्दोष है. मृणालिनी ने उसको झटका, ‘चल हट, सारे यही कहते हैं कि हम निर्दोष हैं. थोड़े दिन में खुद ही अपने करनी सुनाने लगते हैं. बड़े-बड़े टेढ़े यहां सीधे हो जाते हैं. ये जेल है मैडम, आपकी अम्मा का घर नहीं… कि सब आपकी बात पर भरोसा कर लेंगे.’

उस दिन मृणालिनी बुरी तरह नोरा को लताड़ कर बैरक से बाहर चली गयी. नोरा उससे बहुत डर गयी थी. डर के मारे उसने न तो शाम को चाय पी और न ही रात का खाना खाया. कुसुम ने कई बार कहा कि जाकर खाने की थाली ले आ, मगर वह बैरक से बाहर ही नहीं निकली. दूसरे दिन भी वह डरी-सहमी अपने कोने में दुबकी रही. तब कुसुम ने उससे कुछ हमदर्दी जतायी और खाना लाकर खिलाया. धीरे-धीरे नोरा सहज होने लगी. थोड़े दिन बाद मृणालिनी भी उसकी दशा देखकर उस पर तरस खाने लगी. उसकी शक्ल देखकर मृणालिनी के विचार बदले और उसे भी लगने लगा कि वह बेगुनाह है. एक दिन उसने नोरा के पास बैठ कर उसकी पूरी कहानी सुनी.

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उस रात जब मृणालिनी की आंख खुली तो नोरा बैरक के कोने में अपने बिस्तर पर बैठी सिसक रही थी. उसकी सिसकियों से ही मृणालिनी की नींद खुली थी. वह अपने बिस्तर से उठ कर उसके पास गयी. उसने धीरे से नोरा के सिर पर अपना हाथ रखा तो नोरा सिसकते हुए बोली – मैं निर्दोष हूं.

मृणालिनी उसके बिस्तर पर उसके पास बैठ गयी. बोली, ‘लगता मुझे कि तू निर्दोष…. पर सिद्ध कैसे करेगी….? कोई है तेरा इस जेल से बाहर जो मदद करे?

नोरा ने ‘न’ में सिर हिलाया.

मृणालिनी झुंझलायी, बोली, ‘न पैसा, न आदमी, न जानपहचान… कैसे सिद्ध करेगी? बैग भर के कोकीन निकला तेरे पास से… तू मानी कि बैग तेरा… तू ही लेकर जा रही थी… फिर कैसे खुद को निर्दोष साबित करेगी?’

नोरा उससे लिपट कर रोने लगी. बोली, ‘फ्रेडरिक का पता चल जाए तो…’ वह बिलखने लगी. मृणालिनी ने जैसे-तैसे उसे संभाला. दिलासा दिया. वह जानती थी नोरा की कोख में एक नन्हा जीव पल रहा है. ऐसी हालत में हर वक्त उसका उदास रहना ठीक नहीं था. उस दिन के बाद से मृणालिनी धीरे-धीरे उसका दर्द बांटने लगी. उसे दिलासा देने लगी कि वह कोई न कोई जुगाड़ लगा कर उसके पति फ्रेडरिक का पता लगवाएगी. नोरा को मृणालिनी की बातों पर भरोसा होने लगा था कि किसी न किसी तरह वह उसके फ्रेडरिक का पता लगवा लेगी, लेकिन धीरे-धीरे सात महीने बीत गये, नोरा का गर्भ अपनी पूर्णत: की ओर बढ़ रहा था और मृणालिनी को कोई रास्ता नहीं सूझ रहा था कि वह जेल की सख्त और ऊंची दीवारों के पार कैसे फ्रेडरिक का पता करवाए. नौ महीने पूरे होते ही एडबर्ड इस दुनिया में आ गया है. निर्दोष मां का निर्दोष बच्चा. यह सलाखें इन दोनों के लिए नहीं हैं. इन्हें यहां से बाहर निकालना ही होगा. मृणालिनी हर दिन खुद से यह वादा करती कि किसी न किसी तरह इन दोनों को यहां से निकालेगी.

नोरा ने मृणालिनी को बताया था कि वह हिन्दुस्तानी मां एलिना और अंग्रेज पिता आन्द्रे की इकलौती संतान है. वह अपने माता-पिता के साथ न्यूयॉर्क में रहती थी. नोरा सात साल की थी जब उसके माता-पिता का तलाक हो गया. नोरा की मां सात साल की नोरा को  साथ लेकर भारत आ गयी और हैदराबाद में अपनी एक आंटी के साथ रहने लगी. नोरा ने हैदराबाद में रह कर अपनी पढ़ाई पूरी की. वह बचपन से ही दुबली-पतली और डरपोक लड़की थी. उसकी मां अपनी दुर्दशा के लिए हर वक्त उसे दोषी ठहराती थी. हर वक्त उसे डांटती-फटकारती रहती थी. कहती कि अगर वह उसके जीवन में न आती तो वह आन्द्रे को तलाक देने के बाद किसी और अमीर आदमी से शादी कर लेती और एक सुखी और खुशहाल जीवन बिताती, मगर नोरा की वजह से वह ऐसा नहीं कर पायी.

हैदराबाद आने के बाद एलिना अपने अकेलेपन और हताशा को शराब में डुबाने लगी थी और अपना सारा फ्रस्टेशन नोरा पर उतारने लगी थी. नोरा जैसे-जैसे बड़ी हो रही थी, उसकी मां बूढ़ी और बीमार होती जा रही थी. कभी-कभी उसे नोरा की चिन्ता भी होती थी कि उसके बाद नोरा का क्या होगा. कॉलेज की पढ़ाई खत्म होने के बाद उसने नोरा की शादी अपनी आंटी की बहन के दूर के रिश्तेदार फ्रेडरिक से करवा दी.

शादी के बाद नोरा की जिन्दगी में थोड़ा परिवर्तन आया. फ्रेडरिक इंपोर्ट-एक्सपोर्ट का बिजनेस करता था. वह भले उससे उम्र में दस साल बड़ा था, लेकिन नोरा का काफी ख्याल रखता था. उसकी हर जरूरत पूरी करता था. वीक-एंड पर उसे लेकर घूमने भी जाता था. नोरा उसके साथ काफी खुश रहने लगी थी. फ्रेडरिक के घर आने के बाद नोरा को अपनी मां की डांट-फटकार, चीखने-चिल्लाने से निजात मिल गयी थी. यह उसकी नयी जिन्दगी थी. फ्रेडरिक का परिवार छोटा सा था. हैदराबाद में वह अपने छोटे भाई और पिता के साथ रहता था. चार लोगों का यह परिवार बहुत खुशहाल था. नोरा के दिन काफी अच्छे बीतने लगे. बीते जीवन की कड़ुवाहट अब खत्म होती जा रही थी.

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नोरा की शादी के कुछ साल बाद उसकी मां एलिना की डेथ हो गयी और इधर फ्रेडरिक का छोटा भाई उसके पिता को लेकर कनाडा चला गया. घर में सिर्फ नोरा और फ्रेडरिक ही बचे. नोरा प्रेग्नेंट हुई तो फ्रेडरिक की खुशी का ठिकाना न रहा. उसने बकायदा पार्टी करके इस खुशी को सेलिब्रेट किया. उसके कारोबार के साथियों ने उस शाम नोरा के घर काफी रौनक लगायी. खूब खाना-पीना, नाचना-गाना हुआ. उस दिन नोरा को महसूस हुआ कि औरत को सबसे बड़ी खुशी और सम्मान मां बनने पर ही मिलता है. फ्रेडरिक और नोरा ने अपने होने वाले बच्चे के लिए खरीदारियां शुरू कर दी थीं. फ्रेडरिक हर शाम जब घर आता तो उसके बैग में कोई न कोई खिलौना या बेबी सूट जरूर होता था.

उन दिनों नोरा भविष्य के सुनहरे सपनों में खोयी हुई थी जब अचानक फ्रेडरिक ने उससे कहा कि उसने मेरठ में एक बड़ा मकान देखा है और अब वह दोनों मेरठ जाकर रहेंगे. मेरठ का नाम नोरा ने पहली बार सुना था. नोरा को समझ में नहीं आया कि फ्रेडरिक ने अचानक किसी दूसरे राज्य में शिफ्ट होने का फैसला क्यों किया? फ्रेडरिक से पूछने पर उसने सिर्फ इतना ही कहा कि उसके कारोबार से जुड़े ज्यादातर फ्रेंड्स मेरठ में हैं. वहां उसको काम करने में आसानी होगी. एक दिन फे्रडरिक ने नोरा से कहा कि वह मेरठ जाकर वह मकान देख आये जिसे उसके फ्रेंड हेनरी ने उन दोनों के लिए देखा है. काम की व्यस्तता के कारण फ्रेडरिक मेरठ नहीं जा सकता था और मकान का मालिक चाहता था कि वह जल्दी से जल्दी मकान देखकर हां कर दें, ताकि पेशगी मिलने पर वह दूसरे कस्टमर्स को मना कर सके.

फ्रेडरिक के कहने पर नोरा को मकान देखने मेरठ जाना पड़ा. हैदराबाद से फ्रेडरिक ने खुद उसे ट्रेन में बिठाया था. मकान का पता और हेनरी का मोबाइल नम्बर भी दिया था. स्टेशन पर हेनरी नोरा को रिसीव करने वाला था. लेकिन मेरठ स्टेशन पर नोरा को पुलिस ने रिसीव किया. उसके सामान की तलाशी ली गयी. उसके सामान के साथ कोकीन का बैग मिला. करोड़ों रुपये मूल्य की कोकीन. पुलिस ने नोरा को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया. उससे लम्बी पूछताछ हुई. जो बैग पुलिस को मिला था वह नोरा का ही था. उसने स्वीकार किया कि वह उसका बैग है, लेकिन उसमें जो चीज पुलिस को मिली थी, उसकी कोई जानकारी नोरा को नहीं थी. दूसरे सामान के साथ वह कब और कैसे इस बैग में आयी यह भी वह नहीं जानती थी. उसने अपने पति फ्रेडरिक को फोन मिलाया, मगर उसका फोन स्विच औफ था. उसने हेनरी का नम्बर मिलाया, वह भी स्विच औफ निकला.

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पुलिस ने नोरा को गिरफ्तार कर लिया. ड्रग तस्करी के आरोप में उसे अदालत के समक्ष पेश किया गया. पुलिस कस्टडी में उससे रात-दिन सवाल-जवाब किये गये. लेडी कौन्स्टेबल ने सच उगलवाने के लिए उसके गालों पर खूब थप्पड़ बरसाये. उसके जानने वालों के नाम-पते पूछे गये. नोरा ने सबकुछ बता दिया, जो वह जानती थी. फ्रेडरिक के बारे में, उसके परिवार के बारे में, अपने घर के बारे में, अपनी शादी और प्रेग्नेंसी के बारे में, अपने मेरठ के नये घर के बारे में उसने पुलिस से कुछ भी तो नहीं छिपाया. उसके डॉक्टरी परीक्षण में पता चला कि वह दो महीने की गर्भवती है. उसके पति को तलाशने की कोशिश की गयी, मगर फ्रेडरिक का कुछ पता नहीं चला. हैदराबाद के जिस घर में वह दोनों रह रहे थे, उसमें ताला पड़ा हुआ था. नोरा के पड़ोसियों को भी नहीं पता कि फ्रेडरिक अचानक कहां चला गया? उसे धरती निगल गयी कि आसमान खा गया? अदालत में नोरा रोती रही, बार-बार यही कहती रही कि वह बैग उसका है मगर जो चीज उसमें मिली है वह उसकी नहीं है, मगर अदालत ने कोई नरमी नहीं दिखायी. नोरा को पुलिस कस्टडी से जेल भेज दिया गया.

शुभारंभ : क्या अनगिनत अड़चनों के बावजूद हो पाएगी राजा रानी की शादी?

कलर्स के शो ‘शुभारंभ’ में राजा-रानी के बीच गलतफैमियाँ धीरे-धीरे खत्म हो रही हैं. वहीं दोनों की शादी की तैयारियां भी आगे बढ़ रही हैं. पर राजा-रानी की शादी क्या बिना किसी परेशानी के हो पाएगी? आइए आपको बताते हैं क्या होगा शो में आगे…

राजा-रानी के बीच बढ़ता कनेक्शन

गुनवंत, राजा और रानी की शादी के लिए तैयार हो जाता है. राजा, रानी को बताता है कि वो वही शख्स है जिसने दुकान में उसकी मदद की थी, जब वो पुतला बनकर खड़ी थी. रानी इस बात से हैरान हो जाती है और ये बात उसके दिल को छू जाती है कि वो दोनों इतने लंबे समय से एक-दूसरे को जानते हैं. दोनों एक-दूसरे के साथ प्यार भरा  वक्त बिताते हैं, जहां राजा, रानी से कहता है कि वो सारी जिंदगी उसकी खुशी का ख्याल रखेगा.

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क्या प्री वेडिंग फोटोशूट के लिए रानी होगी तैयार

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राजा, रानी को प्री-वेडिंग फोटोशूट के लिए कहता है, लेकिन रानी कहती है कि वो अपना काम नहीं छोड़ सकती क्योंकि इससे उसकी कमाई पर असर पड़ेगा लेकिन राजा उसे राजी करने की कोशिश करेगा.

आने वाले एपिसोड में आप देखेंगे कि कीर्तिदा और गुनवंत रानी के परिवार की आर्थिक स्थिति जानने की कोशिश करते दिखेंगे. जहां कीर्तिदा को पता चलता है कि उत्सव कोई राज़ छुपा रहा है.

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अब देखना ये है कि क्या बिना किसी रुकावट के राजा और रानी की शादी हो पाएगी? जानने के लिए देखते रहिए ‘शुभारंभ’, हर सोमवार से शुक्रवार रात 9 बजे सिर्फ कलर्स पर.

लोगों में NRC और CAA की अनभिज्ञता है विरोध का कारण

एक बार एक मधुमक्खी-पालक था जिसने मधुमक्खियों के लिए बहुत अच्छा स्थान बनाया था. वह मधुमक्खियों की अच्छी देखभाल करता था और मधुमक्खियां पित्ती में बहुत सारा शहद इकट्ठा करती थी.

एक बार मधुमक्खी-पालक किसी जरूरी काम के लिए बाजार गया और गलती से मधुमक्खियों के घर को बिना सुरक्षा के छोड़ दिया . मधुमक्खियां शहद इकट्ठा करने के लिए गई थीं .

दुर्भाग्यवश, एक चोर वहां आया और वहां पर किसी को न देखकर उसने सारा शहद चुरा लिया और अपने घर को भाग गया.

जब मधुमक्खी- पालक वापस आया, तो वह सभी मधुमक्खी के छत्ते को खाली देखकर परेशान हो गया. तभी मधुमक्खियां अपने मुंह में अधिक शहद लेकर लौटीं. अपने पित्ती को पलटा हुआ देख उनको लगा की मधुमक्खी पालक चोर है और उन्होंने बिना कुछ सोचे समझे उस पर हमला कर दिया.

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मधुमक्खी पालने वाले ने रोते हुए कहा, “मुझे दंड देने से पहले आपको चोर को देखना चाहिए था.”

दोस्तों ये तो एक कहानी है पर हकीकत इससे कहीं ज्यादा बड़ी है.हम एक ऐसे देश में रह रहे है जहां हमें अपनी बात पूर्ण स्वतंत्रता से कहने का अधिकार है.पर फिर भी न जाने क्यों हम बिना कुछ सोचे समझे एक भेड़ चाल में चलते रहते है. हमारी इसी बात का बड़े-बड़े राजनेता फायदा उठाते है.

आज CAA और NRC के विरोध में देश में हर तरफ दंगे भड़क रहे है .लोग सड़कों पर उतर आये है .देश में एक अजीब सा माहौल बन गया है और हमारें नेताओं ने इसे प्रोटेस्ट का नाम दिया है.

पर क्या आप जानते हैं कि अनुच्छेद 11 के अंतर्गत AUTHORITIES ने हमें शांतिपूर्ण ढंग से विरोध करने, ट्रेड यूनियनों में शामिल होने और अपने विचारों को शातिपूर्ण ढंग से व्यक्त करने का अधिकार दिया है.हमें अपने अधिकारों का प्रयोग तो करना ही चाहिए पर सोच समझ कर-

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क्या है गलतफहमी

CAB (नागरिकता संशोधन बिल , 2019) को भारतीय संसद में 11 दिसंबर, 2019 को पारित किया गया, जिसमें 125 मत पक्ष में थे और 105 मत इसके विरोध में थे . संसद में पास होने और राष्ट्रपति की महुर लगने के बाद नागरिक संशोधन कानून ( CAA – Citizenship Amendment Act ) बन गया.

CAA के पारित होने से उत्तर-पूर्व, पश्चिम बंगाल और नई दिल्ली सहित पूरे देश में हिंसक विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया. हमारी राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की जामिया यूनिवर्सिटी में भी जबरदस्त प्रदर्शन हुए .जामिया मिलिया इस्लामिया के छात्रों द्वारा विरोध मार्च का आयोजन किया गया और इसने हिंसक रुख अपना लिया.छात्रों और पुलिस में बहुत झड़पें हुईं और सार्वजनिक बसों में आग तक लगाई गई.

इसमें एक खास बात ये है कि इन सभी जगहों के विरोध एक जैसे नहीं हैं. हर कोई अलग-अलग सोच के साथ विरोध करने सड़क पर उतरा है.असम में लोगों को डर है कि बाहर के लोग वहां बसकर उनका हक छीन लेंगे, तो जामिया, एएमयू और नदवा कॉलेज के छात्रों द्वारा इस बात को लेकर प्रदर्शन हो रहा है कि मुस्लिमों की नागरकिता खतरे में है.

विरोधी इसे गैर-संवैधानिक बता रहे हैं जबकि सरकार का कहना है कि इसका एक भी प्रावधान संविधान के किसी भी हिस्से की किसी भी तरह से अवहेलना नहीं करता है. वहीं, इस कानून के जरिए धर्म के आधार पर भेदभाव के आरोपों पर सरकार का कहना है कि इसका किसी भी धर्म के भारतीय नागरिक से कोई लेना-देना नहीं है. सरकार ने कई बार साफ किया है कि यह कानून नागरिकता देने के लिए है, न कि नागरिकता छीनने के लिए.यानी एक बात तो साफ है कि लोगों को नागरिकता संशोधन कानून और नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन (National Register of Citizens) सही से समझ नहीं आया है, जिसकी वजह से तमाम तरह के भ्रम फैल रहे हैं. कई प्रदर्शनकारियों को लगता है कि इस कानून से उनकी भारतीय नागरिकता छिन जाएगी जबकि एक बड़ी आबादी को CAA और NRC के बारें में पता ही नहीं है.कुछ तो ऐसे है कि जिन्हें ये पता ही नहीं है की वो किस कारण विरोध कर रहे है. सब भेड़-चाल में शामिल है.

ऐसे में ये समझना बहुत जरूरी है कि CAA क्या है और NRC क्या है?

क्या है CAA ?

इस नागरिकता संशोधन कानून के तहत पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश से प्रताड़ित होकर आए हिंदू, सिख, ईसाई, पारसी, जैन और बुद्ध धर्मावलंबियों को भारत की नागरिकता दी जाएगी. इन अल्पसंख्यक लोगों को नागरिकता उसी सूरत में मिलेगी, अगर इन तीनों देशों में किसी अल्पसंख्यक का धार्मिक आधार पर उत्पीड़न हो रहा हो. अगर आधार धार्मिक नहीं है, तो वह इस नागरिकता कानून के दायरे में नहीं आएगा.

मुस्लिम धर्म के लोगों को इस कानून के तहत नागरिकता नहीं दी जाएगी. मुस्लिमों को इसमें शामिल ना करने के पीछे मोदी सरकार का ये तर्क है कि इन तीनों ही देशों में मुस्लिमों की बहुलता के कारण वहां धार्मिक आधार पर किसी मुस्लिम का उत्पीड़न नहीं हो सकता.

ऐसे अवैध प्रवासियों को जिन्होंने 31 दिसंबर 2014 की निर्णायक तारीख तक भारत में प्रवेश कर लिया है, वे भारतीय नागरिकता के लिए सरकार के पास आवेदन कर सकेंगे.

अभी तक भारतीय नागरिकता लेने के लिए 11 साल भारत में रहना अनिवार्य था. नए कानून CAA में प्रावधान है कि पड़ोसी देशों के अल्पसंख्यक अगर पांच साल भी भारत में रहे हों तो उन्हें नागरिकता दे दी जाएगी.

CAA में यह भी व्यवस्था की गयी है कि उनके विस्थापन या देश में अवैध निवास को लेकर उन पर पहले से चल रही कोई भी कानूनी कार्रवाई स्थायी नागरिकता के लिए उनकी पात्रता को प्रभावित नहीं करेगी.

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क्या है NRC

NRC नागरिकों का राष्ट्रीय रजिस्टर है, जो भारत से अवैध घुसपैठियों को निकालने के उद्देश्य से बनाया गया है. NRC से यह पता चलता है कि कौन भारत का नागरिक है और कौन नहीं. जो इसमें शामिल नहीं हैं और देश में रह रहे हैं उन्हें अवैध नागरिक माना जाता है.
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद एनआरसी प्रक्रिया हाल ही में असम में पूरी हुई. असम NRC के तहत उन लोगों को भारत का नागरिक माना जाता है जो 25 मार्च 1971 से पहले से असम में रह रहे हैं. जो लोग उसके बाद से असम में रह रहे हैं या फिर जिनके पास 25 मार्च 1971 से पहले से असम में रहने के सबूत नहीं हैं, उन्हें NRC लिस्ट से बाहर कर दिया गया है. NRC लागू करने का मुख्य उद्देश्य ही यही है कि अवैध नागरिकों की पहचान कर के या तो उन्हें वापस भेजा जाए, या फिर जिन्हें मुमकिन हो उन्हें भारत की नागरिकता देकर वैध बनाया जाए.

NRC की जरूरत इसलिए पड़ी क्योंकि 1971 के दौरान बांग्लादेश से बहुत सारे लोग भारतीय सीमा में घुस गए थे. ये लोग अधिकतर असम और पश्चिम बंगाल में घुसे थे. ऐसे में ये जरूरी हो जाता है कि जो घुसपैठिए हैं, उनकी पहचान कर के उन्हें बाहर निकाला जाए.

हालांकि, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नवंबर में संसद में घोषणा की थी कि NRC पूरे भारत में लागू किया जाएगा.

मै अपने इस लेख में ये नहीं कहती कि आप अपने अधिकारों को भूल जाएँ ,मै सिर्फ ये कहना चाहती हूं कि अपने अधिकारों के साथ -साथ अपने कर्तव्यों को भी याद रखे .

“लोग अपने कर्तव्यों को भूल जाते हैं पर अधिकारों को याद रखते है “

बिग बौस 13 : सिद्धार्थ शुक्ला के खिलाफ रश्मि देसाई ने घरवालों के भरे कान

कलर्स का पौपुलर शो ‘ बिग बौस’ के इस सीजन में कंटेस्टेंटस के बीच लड़ाइयां खत्म होने का नाम नहीं ले रही है, जी हां, सिद्धार्थ शुक्ला और रश्मि देसाई के बीच आए दिन लड़ाईयां होती रहती है.

लास्ट विक से रश्मि देसाई  और सिद्धार्थ शुक्ला की लड़ाई ने एक अलग मोड़ ले लिया है. इस हफ्ते वीकेंड का वार के दौरान  सलमान खान के सामने दोनों ने अपनी बात रखी.

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https://twitter.com/TheKhbri/status/1209179460873928704

आपको बता दें, कल के एपिसोड में आपने देखा कि सिद्धार्थ घर में अरहान खान की हरकत को लेकर भड़के हुए नजर आए वहीं रश्मि देशाई ने उनके खिलाफ साजिश करती दिखी.

दरअसल पहले रश्मि ने अरहान और असीम रियाज से कहा  कि सिद्धार्थ को भड़काने का सिर्फ एक ही तरीका है कि उसे ट्रिगर करो. वहीं रश्मि की बातों की सुनकर असीम उनकी हां में हां मिलाते नजर आए. इसके अलावा रश्मि विशाल आदित्य सिंह के भी कान भरती है और उन्हें सिद्धार्थ शुक्ला से लड़ाई करने के लिए भड़काती है.

https://twitter.com/tellynation/status/1209177428276367361

इस दौरान रश्मि और विशाल के बीच कहासुनी भी हो जाती है लेकिन अपनी बात सामने रखते हुए रश्मि कहती है कि इस बार मेन टू मेन फाइट होगी. अपकमिंग नौमिनेशन टास्क में शहनाज की टीम रश्मि को नौमिनेट करने की कोशिश करेंगी लेकिन वह अरहान और विशाल के दम पर खेल को जीतने की कोशिश में जुटी नजर आएंगी.

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अगर आपकी भी त्वचा रूखी है तो अपनाएं ये खास फेसपैक

रूखी त्वचा को तेलिय त्वचा से ज्यादा देख भाल की जरुरत होती है. खुश्क होने की वजह से रूखी त्वचा पर झाइयां, बारीक लाइने और रेशेज जल्दी होते हैं. रूखी त्वचा में अपना कोई तेल नहीं होता है, इसलिए उसे बाहरी पोषण की जरुरत पड़ती है. अगर आप भी रूखी और खुश्क त्वचा से परेशान हैं तो आप इन फेस पैक का इस्तेमाल कर सकती हैं.

ड्राई स्‍किन को नम बनाने के लिये खाएं.

रूखी त्वचा से निजात पाने के लिए लोग बाजार में उपलब्ध कई तरह के प्रोडक्ट का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन स्वस्थ और निखरी त्वचा पाने के लिए घर के बने फेस पैक सबसे अच्छे रहते हैं. चलिए जानते हैं घर पर बनने वाले फेसपैक जो दिलाएंगे निजात रूखी और बेजान त्वचा से.

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अंडे, सूरजमुखी तेल और हनी फेस पैक

एक कटोरी में अंडे की सफेदी, दो चम्मच शहद, एक चम्मच सूरजमुखी का तेल मिला लें, इसका पेस्ट बना लें. फिर इसे अपने चहरे पर लगाये और 20 मिनट के लिए छोड़ दें. सूख जाने पर गर्म पानी से धो दें.

केला, दही और शहद का फेस पैक

एक पका हुआ केला, दही और थोड़ा शहद लें, इसका अच्छे से पेस्ट बना लें. इसे चहरे पर लगाये और 15 मिनट के लिए छोड़ दें. फिर गुनगुने पानी से धोए. इसे लगाने से आपकी त्वचा में नमी आएगी.

खीरे और एलोवेरा का फेस पैक

रूखी त्वचा के लिए सबसे अच्छा उपाए है एलोवेरा. खीरे को अच्छे से पीस लें और उसमें एलोवेरा जेल मिलाएं. इसे अपने चहेरे पर लगाये और 25 मिनट के लिए छोड़ दें. सूख जाने के बाद इसे ठंडे पानी से धो दें. इससे आपकी त्वचा की नमी बनी रहेगी.

ओट्मील, दही और ओलिव आयल का फेस पैक

दो चम्मच ओट्मील, दो चम्मच दही और एक चम्मच जैतून का तेल और थोड़ा शहद को मिला कर पेस्ट बना लें. इस पेस्ट को अपने चहरे पर लगाएं और 15 मिनट के लिए छोड़ दें. यह आपकी त्वचा को नमी देगी और रूखी त्वचा से निज़ात दिला देंगी.

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केला, शहद और ओट्मील का फेस पैक

पके हुए केले में थोड़ा शहद, और एक चम्मच ओट्मील मिला कर पेस्ट बना लें . फिर इसे अपने चहरे पर लगाएं और 15 मिनट के लिए छोड़ दें. फिर अपने हाथों से हल्के-हल्के रगड़ कर साफ़ करें, फिर पानी से धो दें.

चीनी और जैतून के तेल का फेस स्क्रब

एक चम्मच चीनी को, एक चम्मच जैतून के तेल में मिलाएं. अपने हाथों से धीरे रगड़ें फिर 15 मिनट के लिए छोड़ दें, फिर पानी से धो दें.

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कच्चा दूध, शहद और एलोवेरा का फेस पैक

थोड़ा शहद कुछ बूंदें एलोवेरा जेल की और दो चम्मच मिल्क पाउडर इन सब का पेस्ट बना लें. अब इसे अपने चहरे पर लगाएं और 15 मिनट के लिए छोड़ दें. इससे आपकी त्वचा को नमी मिलेगी साथी ही त्वचा चमकदार हो जायेगी.

आयुर्वेदिक सुझाव : अस्थमा के मरीजों के बेहतर सांस लेने के लिए गए कुछ खास बदलाव

भारी आहार, सूखा भोजन, ठण्डे पानी का सेवन, नमक की अधिकता, ठण्डे में रहना, ठण्डे पानी से नहाना, धूल में रहना, धुंआ, ठण्डी हवा आदि सभी कारक अस्थमा की समस्या को बढ़ाने वाले माने जाते हैं. अगर आप इस समस्या से छुटकारा पाना चाहते हैं तो आपको अपने जीवनशैली में कुछ बदलाव लाने की आवश्यकता है.

कफ को सन्तुलित करने वाले आहार का सेवन करें

ऐसा आहार जिसमें कि कफ को बढाने वाले तत्व मौजूद होते हैं वो शरीर मे म्यूकस के बनने में मदद करते हैं जो कि अस्थमा के अटैक को बढ़ावा देने के साथ ही इसकी स्थिति को और गम्भीर बना सकते हैं. कफ दोष को सन्तुलित करने के लिए दूध तथा इससे बने पदार्थों जिस की दही, पनीर, चीज़ आदि का सेवन ना करें. प्राकृतिक मसलों जैसे कि काली मिर्च, अदरख, सरसो के तेल आदि का भोजन पकाते समय उपयोग करें. वहीं मीठे पदार्थों जैसे कि शहद आदि का भी भोजन में प्रयोग करें. वहीं फलों में सेब तथा नाशपाती जैसे हल्के फलों का सेवन करें तथा केला, अनन्नास तथा तरबूज़ आदि फ़लों का सेवन ना करें.

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ऐसे भोजन से बचें जो कि अस्थमा के अटैक को बढ़ावा देते हैं

अस्थमा के मरीजों को खट्टे खाद्द पदार्थों के सेवन से बचना चाहिए. अत्यधिक तले हुए तथा पैक किये हुए खाद्द पदार्थों के सेवन से भी बचना चाहिए क्योंकि ये आपके शरीर को भारीपन का अनुभव कराते है जिससे सांस लेने की तकलीफ़ बढ़ जाती है. इसके साथ ही आप अधिक भोजन ना लें. रात के समय मे हल्का भोजन लेना अस्थमा की समस्या को ख़त्म करने का प्रभावी नुस्खा माना गया है.

खाने के बाद तुरन्त ही ना सोयें

आपके रात के खाने और सोने के बीच मे कम से कम 2-3 घण्टे का अन्तर होना चाहिए. ये आपके शरीर को खाना पचाने के लिए पर्याप्त समय देता है जिससे कि आपको रात में भारी पेट नहीं सोना पड़ता है. यदि किसी कारणवश आप खाने के बाद 2-3 घण्टे नहीं रुक सकते तो कम से कम 1 घण्टे का अन्तराल जरूर रखें.

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अस्थमा को सन्तुलित करना वाक़ई में एक चालाकी वाला काम है. आप ये कभी नहीं जान पाएंगे कि कौन सी गलती इसके अटैक को बढ़ावा दे सकती है. जहाँ दवाईयाँ अस्थमा से लड़ने में मदद करती हैं वहीं जीवनशैली में बदलाव लाकर भी आप इसके अटैक से काफ़ी हद तक बचे रह सकते हैं. यहाँ पर बताये गए बदलाव को अगर आप एक बार अपना लेते हैं तो आप खुद इस बात का अनुभव करेंगे कि आपके जीवन मे काफ़ी बदलाव आया है.

डायरेक्टर जीवा आयुर्वेद, डौक्टर प्रताप चौहान

हिमानी का याराना : भाग 2

हिमानी का याराना : भाग 1

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आखिरकार उस ने स्वीकार कर लिया कि उस के और सागर उर्फ बलवा के बीच जिस्मानी रिश्ते हैं और उस ने सागर के साथ मिल कर 7-8 सितंबर के तड़के पति की हत्या की थी.

जुर्म स्वीकार कर लेने के बाद हिमानी को गिरफ्तार कर लिया गया. उसी शाम सागर के घर पर दबिश दे कर उसे भी दबोच लिया गया. पूछताछ के दौरान जब उसे बताया गया कि उस की माशूका हिमानी को गिरफ्तार कर लिया गया है, तो वह बुरी तरह चौंका. जब उसे उस की काल डिटेल्स दिखाई गई तो उस ने भी अपना जुर्म स्वीकार कर लिया. बाद में दोनों की निशानदेही पर सोनू की हत्या में प्रयुक्त वह रस्सी भी बरामद कर ली, जिस से सोनू का गला घोंटा गया था. सोनू हत्याकांड के पीछे की जो कहानी उभर कर सामने आई, वह इस तरह है.

बाहरी दिल्ली जिले में एक गांव है बादली. माधव सिंह अपने परिवार के साथ यहीं रहते हैं. उन के परिवार में पत्नी अंजू (काल्पनिक नाम), 24 साल का बेटा सोनू, बेटी पिंकी थे. माधव सिंह की माली हालत बहुत अच्छी नहीं थी. वह एक होटल में काम करते थे. सोनू पेशे से ड्राइवर था, जबकि पिंकी एक बड़े अस्पताल में काम करती थी.

सोनू की शादी करीब 3 साल पहले हिमानी के साथ हुई थी. हिमानी गोरे रंग, आकर्षक नैननक्श की खूबसूरत युवती थी. हंसमुख और मिलनसार स्वभाव की हिमानी को पत्नी के रूप में पा कर सोनू बहुत खुश था. हिमानी भी इस घर में आ कर खुश थी. पिंकी भाभी का पूरा खयाल रखती थी.

सोनू और हिमानी अपनी दुनिया में खुश रहते थे. सोनू का काम ऐसा था कि वह सुबह घर से निकलता था. इस के बाद उसे खुद भी पता नहीं रहता था कि वह घर कब लौटेगा.

हिमानी अपनी सास के साथ घर का कामकाज निबटाती और दिन का बाकी समय टीवी देखती या सो कर गुजारती थी. जब कभी उसे सोनू की याद सताती तो वह उस के मोबाइल पर फोन कर के उस का हालचाल पूछ लिया करती थी. सोनू भी खाली वक्त में फोन करता था. बेटी के जन्म से घर में सभी खुश थे.

हिमानी का कमरा घर की पहली मंजिल पर था. जब कभी उसे बोरियत महसूस होती तो वह अपना मन बहलाने के लिए बालकनी में आ कर खड़ी हो जाती थी. इसी दौरान एक दिन उस की निगाहें पड़ोस में रहने वाले युवक सागर की निगाहों से टकराईं तो उस के तनबदन में सिहरन सी दौड़ गई.

पहले भी उस ने गौर किया था कि वह किसी न किसी बहाने उस के घर के सामने आ कर उसे एकटक निहारता है. उस दिन तो उसे सागर का यूं अपनी ओर बेशरमी से देखना अच्छा नहीं लगा, लेकिन बाद में उसे लगा कि पति के अलावा पड़ोस के लड़के भी उसे पसंद करते हैं तो उस के चेहरे पर मुसकराहट तैरने लगी.

हौलेहौले चाहत भरी नजरों के इस खेल में उसे भी मजा आने लगा. उस ने भी सागर की नजरों से नजरें मिलानी शुरू कर दीं. बात बढ़ती गई और मामला बातचीत से शुरू हो कर मोबाइल नंबर के आदानप्रदान तक पहुंच गया.

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सागर हिमानी को फोन कर के उस से मिलने की जिद करने लगा तो एक दिन जब वह घर में अकेली थी तो उस ने मौका देख कर सागर को अपने कमरे में बुला लिया. सागर बहुत बातूनी युवक था. उस ने हिमानी को अपनी मीठीमीठी बातों में ऐसा फंसाया कि वह उस की बांहों में अपनी सुधबुध खो बैठी.

हिमानी के बदन से खेलने के बाद सागर वहां से चला गया, लेकिन उस दिन के बाद जब कभी हिमानी को मौका मिलता, वह सागर को मिलने के लिए अपने घर में बुला लेती थी. कभीकभी वह खुद भी किसी काम के बहाने घर से निकल कर सागर की बताई हुई जगह पर पहुंच जाती थी.

शुरुआत में हिमानी और सागर के अवैध रिश्तों की जानकारी किसी को नहीं हुई, लेकिन यह बात ज्यादा दिनों तक छिपी नहीं रह सकी. एक दिन सोनू को उस के किसी दोस्त ने उस की बीवी की बेवफाई की दास्तान बताई तो उसे उस की बातों पर विश्वास नहीं हुआ. लेकिन जब लोगों ने सागर के साथ हिमानी का नाम जोड़ कर छेड़ना शुरू कर दिया तो उसे उन की बात पर विश्वास करना पड़ा.

सागर मोहल्ले का दबंग युवक था. लोग उस के सामने आने में कतराते थे. फिर भी सोनू ने उस से कहा कि वह हिमानी से मिलना छोड़ दे. सागर ने उस समय तो उस की बात मान ली लेकिन उस ने अपनी हरकतें जारी रखीं.

घटना के 4 दिन पहले सोनू और सागर के बीच बच्चों को ले कर जोरदार झगड़ा हुआ. इस दौरान सागर ने सोनू को 8 दिनों के अंदर जान से मारने की धमकी दी. हिमानी का दिल अपने पति सोनू से भर चुका था. उसे सोनू से सागर ज्यादा प्यारा था, इसलिए जब सागर ने सोनू की हत्या करने की बात उसे बताई तो वह उस का साथ देने के लिए तैयार हो गई.

योजना के अनुसार 8 सितंबर की रात हिमानी ने सोनू के खाने में नींद की गोलियां मिला दीं. आधी रात को जब वह हिमानी के साथ अपने बैडरूम में पहुंचा तो लेटते ही नींद की आगोश में चला गया. रात के करीब ढाईतीन बजे के बीच जब सारा मोहल्ला चैन की नींद सो रहा था, तभी हिमानी ने फोन कर सागर को अपने कमरे में आने के लिए कहा.

सागर को पहले से ही हिमानी के फोन का इंतजार था. जैसे ही हिमानी ने बुलाया, वह दबे पांव छत के रास्ते हिमानी के कमरे में पहुंचा और एक रस्सी से सोनू का गला घोंट दिया.

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रात भर हिमानी अपने पति की लाश के साथ सोई रही. सुबह 7 बजे उठ कर उस ने अपने ससुर माधव सिंह तथा सास अंजू को पति की हत्या होने की जानकारी दी. 12 सितंबर, 2019 को थानाप्रभारी अक्षय कुमार ने सोनू हत्याकांड के दोनों आरोपियों हिमानी और सागर उर्फ बलवा को रोहिणी कोर्ट में पेश किया, जहां से दोनों को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया.

इस हत्याकांड में दूसरे नामजद आरोपी राहुल का कोई हाथ न होने के कारण उस के खिलाफ काररवाई नहीं की गई. मामले की जांच थानाप्रभारी अक्षय कुमार कर रहे थे.

   —कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

रात्रि में ही विवाह क्यों ?

आदित्य और प्रियंका की मंगनी हो गई थी. विवाह की तैयारी चल रही थी. आदित्य पंडित के कहेनुसार रात में धूमधाम से विवाह करना चाहता था, जबकि प्रियंका को यह फुजूलखर्ची लगती थी. पर आदित्य के अनुसार, जब तक जगमग न हो, तो विवाह में मजा ही नहीं आता है.

वहीं दूसरी ओर रोसा और जय दोनों ही विवाह के बाद अपना फ्लैट खरीदना चाहते थे. दोनों ने सम झदारी का परिचय देते हुए अपना विवाह दिन में करना निश्चित किया. दोनों के मातापिता उन के इस निर्णय से सहमत नहीं थे. पर जब उन्होंने अपने मातापिता को यह सम झाया कि वे जो रुपए उन के विवाह में खर्च करना चाहते हैं, उसी रुपए से वे बहुत धूमधाम से विवाह भी कर लेंगे और जो धन बचेगा उस से डाउन पेमैंट कर के अपना घर लेने का सपना भी पूरा कर सकते हैं, तो उन लोगों को उन की बात सही लगी.

चारु के पापा ने चारु की शादी दिन में आयोजित करनी चाही पर चारु को दिन में विवाह करना बहुत आउटडेटेड लगा और फिर रात्रि में विवाह का आयोजन हुआ. लाइट, आतिशबाजी, मेहमानों को ठहराने के लिए होटल का इंतजाम, रात्रि के हिसाब से दुलहन की पोशाक, मेकअप और बैंडबाजा, कुल मिला कर चारु के पापा की जेब पर रात्रि का विवाह बहुत भारी पड़ा. इतना कुछ करने के बावजूद रिश्तेदारों के मुंह फूले ही रहे, इंतजाम उन के मनमाफिक न थे.

Ratri-mein-Vivah

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धन और वैभव का दिखावा

आजकल अधिकतर विवाहों का आयोजन रात में ही होता है क्योंकि विवाह महज अपने धन और वैभव का दिखावा बन कर रह गए हैं. प्राचीनकाल में विवाह एक रस्म, एक परंपरा थी मानव समाज को सभ्य बनाने के लिए, घरपरिवार को आगे बढ़ाने के लिए. पर जैसेजैसे समाज का आधुनिकीकरण हुआ और नएनए इलैक्ट्रौनिक उपकरणों का बाजार में आगमन हुआ वैसेवैसे लोगों में दिखावे की होड़ लगती गई. सो, रात्रि में विवाह की परंपरा कब और कैसे आरंभ हुई थी, एक नजर डालते हैं.

हिंदू धर्म में विवाह संस्कार की गोधूलि बेला में करने का महत्त्व बताया गया है. सीता और द्रौपदी के विवाह का भी उल्लेख दिन के समय को ले कर ही किया गया है. पर मुगलों के आगमन के बाद विवाह का आयोजन रात्रि में होना आरंभ हो गया था. इस के पीछे मुख्य उद्देश्य सुरक्षा थी. पर अगर हम ध्यान करें, आज से 50 वर्षों पहले तक अधिकतर विवाह दिन में ही होते थे.

दरअसल, जैसेजैसे समाज का आधुनिकीकरण हुआ है, धन के आधार पर समाज का वर्गीकरण हुआ है, उसी तरह शादी अब महज एक डिजाइनर रस्म सी बन कर रह गईर् है. एक अनकहा प्रैशर दोनों पक्षों पर बना रहता है. विवाह का अब पूरा बाजारीकरण हो चुका है और रात्रि में विवाह इसी बाजारीकरण का नतीजा है.

किसी भी धार्मिक ग्रंथ में कहीं भी रात्रि में विवाह का उल्लेख नहीं किया गया है. यह तो महज नए जमाने का नया चोंचला है. अन्य सभी धर्मों में विवाह दिन में होते हैं. रजिस्टर्ड विवाह भी दिन में ही होते हैं.

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समय का बहाना

आप उन लोगों से बात करें जो रात में विवाह करने के पक्षधर हैं, तो लोग बड़ी मासूमियत से जवाब देते हैं कि आजकल की भागदौड़भरी जिंदगी में किसी के पास इतना समय नहीं है कि वह दिन के समय विवाह में सम्मिलित हो सके. इसलिए रात्रि में विवाह करना न केवल उन की इच्छा है बल्कि उन की मजबूरी भी है.

अगर गहन विचार करें, तो हम इस समस्या को बड़े आराम से सुल झा सकते हैं. रविवार या सरकारी छुट्टी वाले दिन हम लोग आराम से दिन में विवाह आयोजित कर सकते हैं. पर शुभ विवाह मुहूर्त आड़े आ जाता है. लेकिन, क्या हम ने कभी गौर किया है, विवाह की तिथि पर तो केवल जयमाला ही हो पाती है, पाणिग्रहण संस्कार तो रात्रि में 12 बजे के बाद ही होता है. तो रात्रि में होने वाले 95 प्रतिशत विवाह अगली तिथि में ही होते हैं, न कि शुभ मुहूर्त के ढकोसले और पाखंड में.

रात्रि में विवाह सुरक्षा की दृष्टि से भी ठीक नहीं है. महिलाएं विवाह में भारीभारी गहने पहनना पसंद करती हैं और रात में गहनों की इस तरह की प्रदर्शनी सुरक्षा के लिए खतरा बन सकती है.

आर्थिक दृष्टि से भी अगर आप सोचें, तो रात्रि के विवाह जेब पर भारी पड़ते हैं. पूरे पंडाल को रोशनी से नहलाना, आने वाले मेहमानों का रात में अच्छे होटल में ठहराने का इंतजाम करना जैसी बहुत सारी चीजें हैं जिन पर खर्चा अधिक आता है.

रात्रि में विवाह करने से समय की बचत नहीं, बल्कि बरबादी होती है. जिस दिन विवाह होता है, वह पूरा दिन और रात और रात्रिजागरण के बाद अगले दिन की भी बरबादी होती है. पूरी रात जागने के बाद अगले दिन के कार्यक्रमों के लिए मेहमानों में न कोई रोमांच रहता है और न ही ऊर्जा बचती है. विवाह हमारे जीवन में एक नए अध्याय की शुरुआत है, तो क्यों न इस का आरंभ हम दिखावे के बजाय रिश्तों और रस्मों की गरमाहट से करें.

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