Download App

काजू बनी बेल और फंदे पर लटक गए किसान

रामकिशोर दयाराम पंवार

मध्य प्रदेश में आदिवासी बहुल बैतूल के यों तो अलगअलग नाम हैं, लेकिन ज्यादातर नाम उस के भौगोलिक पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए दिए गए हैं. बैतूल का मतलब कपासरहित इलाका, लेकिन अंगरेजी वर्णमाला के 5 अक्षरों से बने बैतूल शब्द यानी नाम को एक अलग ही पहचान दी गई है.

बैतूल की यही पहचान जिले में कौफी के बाद काजू के उत्पादन के नाम पर करोड़ों रुपए की हेराफेरी करने का केंद्र बन गई. बी से बैस्ट यानी सर्वश्रेष्ठ, ई से ऐनवायरमैंट यानी पर्यावरण, टी से टैंपरेचर मतलब तापमान, यू से यूनिक यानी बेजोड़, एल से लैंड यानी जमीन, इसलिए यहां पर राष्ट्रीय कृषि योजना के तहत बड़े पैमाने पर साल 2015 से काजू की खेतीबारी की बातें होने लगीं.

जब सरकारी पै्रस नोट में गांव निशाना के किसानों के अच्छे दिन के आने की खबरें सुर्खियों में छपीं तो लोग काजू कतली का स्वाद लेने के लिए इस गांव की ओर निकल पड़े.

ये भी पढ़ें- पराली से प्रदूषण : जमीनी स्तर पर हो काम तभी फायदे में होगा किसान

निशाने पर तरकश से सामने आया सच

आदिवासी बहुल शाहपुर ब्लौक के कुछ गांवों में बीते साल बाड़ी परियोजना के तहत काजू के पौधों को लगाया गया था. जिला उद्यानिकी विभाग ने अपने लक्ष्य को पूरा करने के लिए कामयाबी की एक अलग ही कहानी बना ली.

सरकारी प्रैस विज्ञप्ति के जरीए काजू के किसानों के लखपति बनने की एक दर्जन कहानियां परोस दीं. इस में हितग्राही वे किसान बताए गए, जो दूसरी परियोजनाओं के लाभार्थी हैं. नागपुरभोपाल फोर लेन से निशाना डैम से लगे गांवों में एक गांव निशाना भी है, जो नैशनल हाईवे के सामने बसा है.

इस गांव के किसान मोती उईके के नाती सेम सिंह और परसराम ने बताया कि उन के पास पानी का कोई पुख्ता बंदोबस्त न होने की वजह से वे खुद ही अपने परिवार की पानी की आपूर्ति करें या फिर काजू के पेड़ों की. पानी की कमी में ज्यादातर पौधे पेड़ भी नहीं बन पाए और असमय दम तोड़ गए.

निशाना गांव के एक किसान का तो यह कहना था कि उन के खेतों में बड़े पैमाने पर लगाए गए पौधों के लिए उन के घर वालों द्वारा खोदे गए गड्ढे तक का भुगतान नहीं किया गया.

अधिकारियों के अलावा मुलाजिमों ने भी सब्जबाग दिखाने में अच्छेअच्छों को पछाड़ दिया है. किसान के खेत में लगे सरकारी रिकौर्ड में 200 में से 163 पौधे जिंदा बताए गए, पर जब पेड़ की गिनती करते हुए किसान बताता है तो वह गरीब 60 के ऊपर जा नहीं पाता है. 200 में से महज 60 पौधे जिंदा हैं, जिन में से ज्यादातर बाां हो चुके हैं.

बैंक से कर्ज ले कर हितग्राही ने किया खेल

काजू के पौधों से काजू नहीं उगते, पर काजू के पौधों से काजू उगा कर घोड़ा डोंगरी गांव के एक धन्ना सेठ को काजू के बीजों से काजू निकालने की यूनिट डालने की सलाह दे दी. तकरीबन 70 से 80 फीसदी की सब्सिडी वाले इस यूनिट प्लांट के लिए खादी एवं ग्रामोद्योग से एक प्लांट घोड़ा डोंगरी गांव में डाला गया और उस के लिए कच्चे माल की पैदावार का जरीया बना निशाना गांव. यहां बाड़ी परियोजना के तहत काजू के तकरीबन 57 हजार, 410 पौधों को पेड़ बनाया जा चुका था. इन पौधों को शाहपुर, प्रभात पट्टन, भीमपुर, चिचोली, आठनेर जनपद पंचायत के तकरीबन 183 किसानों को लाभार्थी बताया गया.

मजेदार बात यह सामने आई कि काजू के उत्पादन के पीछे कामयाबी की जिस कहानी को सरकारी प्रचार तंत्र ने परोसा था, उस के मुताबिक काजू उत्पादक किसानों की सालाना आमदनी 18 लाख रुपए बताई गई. तकरीबन सवा लाख से डेढ़ लाख रुपए काजू से कमाने वाला किसान अगर चारपहिया की जगह दोपहिया में घूमता तो समा में आता कि अच्छे दिन आ गए, लेकिन काजू को उगाने वाला किसान काजू के पौधों और काजू यूनिट की आड़ में ठगा जा चुका था.

ये भी पढ़ें-  काला तिल : खेती से कायम की मिसाल

बेमौसम लगे पौधे नहीं बन पाए पेड़

जानकारों का ऐसा मानना है कि बेमौसम लगे पेड़ों से भला कभी फल लगे हैं? मध्य प्रदेश में काजू की खेती की योजना ने बैतूल,छिंदवाड़ा, बालाघाट, सिवनी समेत प्रदेश के तकरीबन 29 जिलों को उपयोगी मान कर  कुछ चिंह्नित किसानों को कभी लीची, तो  कभी काजू को ले कर फल लगाने के लिए  बड़े पैमाने पर खरीदफरोख्त के खेल की गूंज प्रदेश की विधानसभा के शीतकालीन सत्र में सुनाई पड़ी है.

राष्ट्रीय काजू कोको विकास निदेशालय, कोच्चि, केरल द्वारा बड़े पैमाने पर प्रदेश में काजू के पौधों की सप्लाई की गई. काजू की खेती के लिए अचानक मध्य प्रदेश के इन चिंह्नित जिलों की जमीन भौगोलिक नजरिए से काजू के लिए उपयुक्त बता कर इन जिलों में गोवा व कोच्चि से बड़े पैमाने पर काजू के पौधे भेजे गए. प्रति हेक्टेयर 200 पौधों को रोपा जाना था.

मध्य प्रदेश के इन 4 जिले में से बैतूल जिले में 1,000, छिंदवाड़ा में 30, सिवनी में 200, बालाघाट में 32 किसानों द्वारा औनलाइन पंजीयन किया गया. अब तक 1 लाख,  60 हजार पौधे रोपे जा चुके हैं और 1लाख,  26 हजार पौधों का आना बाकी है. ऐसे में 1,430 हेक्टेयर चिंह्नित भूमि प्रति हेक्टेयर 200 पौधों का रोपित किया जाना तय है.

इस समय जिला उद्यानिकी विभाग, बैतूल, छिंदवाड़ा, सिवनी, बालघाट अपने यहां मौजूद पहले ही अमीर होने वाले किसानों को काजू और लीची की खेतीबारी का गुरुमंत्र दे कर उन्हें मुंगेरीलाल के हसीन सपने को सच बनाने वाली कहानी का हीरो बता कर उसे एक बार फिर बरगलाने में लगा है.

काजू की पकड़ से आम आदमी कोसों दूर

यों तो बैतूल जिला मुख्यालय ने डागाकोठी में अपने द्वारा तैयार की गई नर्सरी से महंगे दामों पर काजू और लीची के पौधों को बेचने में महारत हासिल की है. अब तक इस जिले में जिला लैवल पर काम कर रहे उद्यानिकी विभाग का कोई धुर्वे, परते अपने विभाग को जब दोनों हाथों से लूटने लगेगा तो उन्हें कोई तीसरा शख्स कैसे रोक पाएगा.

लोगों के सवाल अपनेआप में बेमिसाल हैं, तब जब आप को पता चले कि जिले में कोई काजू और लीची के बाजार और प्रोसैसिंग यूनिट लगाने को तैयार नहीं है. लेकिन जो शख्स यह यूनिट लगाने जा रहा है, वह सरकारी अनुदान पाने की एक तिकड़मी चाल का हिस्सा बन चुका है.

मध्य प्रदेश की ज्यादातर सरकारी नर्सरियां बंद होने की कगार पर हैं. इधर, बैतूल जिले की ज्यादातर नर्सरियों के हालात ठीक नहीं हैं. वहां आम के पौधे सूख रहे हैं. नर्सरी में बैठे मुलाजिम या मैडम का मोबाइल नंबर तक नहीं बताते हैं. मामला साफ है कि वे दहशत में नौकरी कर रहे हैं.

एक तरफ जिला प्रशासन पौधे लगाने की कवायद कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ लापरवाह बन कर किसानों को काजू और लीची के सब्जबाग दिखा कर अपनी पीठ थपथपा रहा है. कभी फलोद्यान में शेखावत और बोबड़े की तूती बोलती थी और पेड़ के बजाय आम की डालियां तक लगा कर खूब वाहवाही लूटी थी, अब काजू, लीची और अनार लगा कर चर्चा में आए इस विभाग का आंवला लेने वाला कारोबारी तक किसानों को नहीं मिल रहा है. ऐसे में काजू और लीची की फसल के लिए घोड़ा डोंगरी के किसी अग्रवाल के एक कमरे में लगी काजू यूनिट अपनी स्थापना के बनने से ही रोज नए गुल खिलाना शुरू कर दिया है.

साल 2017 में बैतूल जिले में फलोद्यान विभाग ने नर्मदा बेसिन के नाम पर किसानों के खेतों में बड़ी तादाद में फलदार पौधे रोपे. किसानों को इन पौधों के साथ मुंगेरीलाल के सपने बेचे और उन्हें फलदार पौधे लगाने के बाद ड्रिप सिस्टम देने को कहा गया. साथ ही, कीटनाशक दवाओं और स्प्रे पंप भी देने को कहा गया. किसानों ने अपने खेतों में फलदार पौधे लगाए भी, पर विभाग ने कोई मदद नहीं की. इस के चलते सारे पौधे नर्मदा की बाढ़ में बह गए.

ये भी पढ़ें- सीड ट्रे : जड़ साधक में  तैयार होते पौधे

आखिर कहां से आए पौधे

बैतूल जिले के किसानों के लिए 2 लाख से ज्यादा पौधे बालाघाट की नर्सरी से लाए गए और वह भी बिना निविदा मंगाए खरीदे गए.

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, जिले में विभाग की 8 नर्सरियां हैं, पर दूसरे जिले से पौधे खरीदना भी गड़बड़ाले की ओर इशारा कर रहा है. आखिर नर्मदा बेसिन के नाम पर किसानों के खेतों में लगाए गए कितने फलदार पौधे जिंदा हैं? विभाग के पास इस की कोई सटीक जानकारी नहीं है. उद्यानिकी विभाग के मुताबिक, काजू के पौधे पेड़ बन गए और फल भी लग गए.

किसानों को अच्छे दिन के सपने बेचने में लगा बैतूल जिले का उद्यानिकी विभाग जिला प्रशासन के आला अफसरों को नवाज कर सरकारी सूचना एवं प्रचार तंत्र के जरीए काजू के पौधों को फलदार पेड़ बता कर वाहवाही लूटने में देरसवेर सब से आगे निकल गया.

दरअसल, एक सचाई यह भी है कि मध्य प्रदेश के होशंगाबाद संभाग के बैतूल जिले में ऐसा लगता है कि जिले के आला अधिकारी पहली बार काजू के पेड़ देख कर खुश हो रहे हैं, लेकिन सच यही है कि जिले का एक और सरकारी विभाग, जो अपने जंगल कानून को ले कर सुर्खियों में रहता है, उस ने कोटमी में काजू के पौधों को पेड़ बना कर यह कारनामा कर डाला है.

पश्चिम वन मंडल की चिचोलीमहुपानी रैंज से लगे गांव कोटमी में वन विभाग ने 2 दशक पहले काजू की कहानी लिख दी.

चिचोली ब्लौक के देवपुर कोटमी में काजू के पौधों का रोपण न कर वृक्षारोपण कर के खूब वाहवाही लूटी थी और प्रदेशभर के वन विभाग के आला अधिकारी भी काजू का बगीचा देखने के बहाने आतेजाते रहे. वर्तमान समय में देवपुर कोटमी के इस बहुचर्चित काजू के सब्जबाग में फल ही नहीं लगे और गांव वाले अब इसे बाां बगीचा कहने लगे हैं.

बाां हो गई काजू की बगिया देख रो रहे माली

उद्यानिकी विभाग ने शाहपुर ब्लौक में 20 गांवों में बाड़ी परियोजना के तहत गांव वालों के घर काजू, आम, नीबू और केले रोपे थे. कुछ जगह काजू के अब पेड़ तो बन गए हैं, पर ये पेड़ फल नहीं दे रहे, पर छांव जरूर दे रहे हैं.

खेल तो यह है कि बाड़ी परियोजना के कारनामे को अपने नाम करने में बैतूल जिले का उद्यानिकी विभाग सब से आगे आ गया. गांव निशाना की उस उपलब्धि को अपनी बता कर खुद ही पीठ थपथपा रहा है.

उद्यानिकी विभाग में लगाए जा रहे काजू के पौधे विभाग में अधिसूचित हैं भी या नहीं, इस बात का जवाब विभाग के आला अधिकारियों के पास नहीं है, वहीं जो फलदार पौधे विभाग रोप रहा है, उस में तोतापरी आम भी अधिसूचित नहीं है, फिर भी बड़े पैमाने पर खरीदी कर किसानों को दिए जा रहे हैं.

जब वन विभाग के जिला मुख्यालय के वन विद्यालय में लगे काजू के पेड़ फल नहीं दे रहे हैं, वहीं देवपुर कोटमी के वन विभाग के प्लांटेशन में आज तक काजू के पेड़ फल नहीं दे रहे हैं तो उद्यानिकी विभाग के काजू के पौधे फल देंगे या नहीं, यह तो आने वाला समय ही बताएगा. आखिर मुनाफे का धंधा समा

कर किसान भी अच्छे दिन के सपने मुफ्त में खरीद कर अपनी बेबसी पर खून के आंसू बहा रहा है.

ऐसे करें मल्टी पर्पस मेकअप प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल

अगर आप यह सोच कर कि किसी भी प्रोडक्ट को उपयोग करने का सिर्फ एक ही तरीका होता है तो एक बार फिर विचार कर लीजिए, आपको यह जानकर हैरानी होगी कि आप किसी भी मेकअप प्रोडक्ट का इस्तेमाल कई तरह से कर सकती हैं. इससे पैसे और समय दोनों की बचत होगी. इस प्रकार मेकअप का बजट बनाना आसान है, लेकिन इसका मतलब यह बिलकुल भी नहीं है कि इससे आपकी खूबसूरती में कोई कमी आ जाए. जी हां , तो जानते हैं इसके कुछ टिप्स जो आपके बजट में ही रहकर आपकी खूबसूरती में चारचांद लगाएंगे.
फेस मेकअप प्रोडक्ट 
बी बी क्रीम का उपयोग फाउंडेशन, प्राइमर की तरह 
इस क्रीम को आप फाउंडेशन के तौर पर भी उपयोग कर सकती हैं. इससे आपको फ्लॉलेस लुक प्राप्त होगा. यदि आपके चेहरे पर हलके दागधब्बे हो तो इससे बड़ी आसानी से छुपाया जा सकता है. बस चेहरा धोने के बाद मौइस्चराइजर अप्लाई करके इसे लगाएं एवं अच्छे से मिक्स करें.
– मेकअप को लम्बे समय तक ख़राब होने से बचाने के लिए प्राइमर का उपयोग बहुत जरूरी होता है. यह मेकअप हेतु स्मूद बेस तैयार करता है, लेकिन यदि आप इस पर पैसे खर्च नहीं करना चाहतीं तो बी बी क्रीम को प्राइमर की तरह भी इस्तेमाल कर सकती हैं.

– बी बी क्रीम को आप अपना ब्लश बनाकर पैसे बचा सकती हैं. इसके लिए बस थोड़ी सी बी बी क्रीम लेकर उसमें हलकी लिपस्टिक मिलाएं और फिर इसे पूरे गालों पर लगाकर ब्लेंड करें. इसे एक बार ट्राई करके तो देखें.

ये भी पढ़ें- हल्दी फेशियल पैक से पाएं पार्लर जैसा निखार

 ब्लश का उपयोग आई शैडो या लिपस्टिक की तरह 
वैसे तो हम क्रीम ब्लश का इस्तेमाल गालों के लिए करते हैं लेकिन यदि आपके पास आपके मनपसंद रंग की लिपस्टिक या आई शैडो नहीं है तो क्रीम ब्लश को अपने काम में ले सकती हैं. इसके लिए आप लिपबाम में क्रीम ब्लश को मिक्स करें और ब्रश की मदद से अप्लाई कर पाएं मनचाहा लुक.
फाउंडेशन का उपयोग आई शैडो की तरह 
किसी मेकअप का बेस फाउंडेशन होता है. इससे मेकअप लम्बे समय तक टिका रहता है. आप चाहे तो फाउंडेशन का इस्तेमाल आई शैडो की जगह भी कर सकती हैं. अलग अलग रंगों के फाउंडेशन में लिपस्टिक मिला लें. अगर आपकी स्किन ड्राई है तो आप इसमें थोड़ा सा मॉइस्चराइजर मिला लें. आप हलके और गहरे दोनों रंगों के शेड्स काम में लें.
मौइस्चराइजर का उपयोग मेकअप रिमूवर की तरह 
आपको बता दें कि मौइस्चराइजर से आप अपनी स्किन को सिर्फ सॉफ्ट और स्मूद ही नहीं बना सकती , बल्कि आप इसका इस्तेमाल मेकअप रिमूवर  की तरह भी कर सकती हैं. ये स्किन को हाइड्रेट करने का काम भी करता है.
आई मेकअप प्रोडक्ट 
जेल बेस्ड कोल का उपयोग मस्कारा, आई लाइनर की तरह

जेल बेस्ड कोल को अपनी आँखों पर समज़ करके उससे स्मोकी लुक क्रिएट कर सकती हैं , तो वही मस्कारा लगाकर आप अपनी पलकों को लम्बा व घना दिखा सकती हैं. वाटर लाइन पर काजल के अलावा आप इससे अपनी आँखों की शेप को भी डिफाइन कर सकती हैं.

ये भी पढ़ें- NEW YEAR RESOLUTION : इन 7 कामों से बनाएं नये साल को खास

आई लाइनर का उपयोग काजल, मस्कारा व टेम्पेररी टैटू की तरह 
आँखों की शेप डिफाइन करने और उन्हें आकर्षण बनाने में आई लाइनर को भी आप कई मेकअप प्रोडक्ट्स के तौर पर इस्तेमाल कर सकती हैं. रूप रंग को नज़र से बचाने वाले काजल के खत्म हो जाने के बाद आप आई लाइनर का इस्तेमाल आँखों में काजल लगाने के लिए भी कर सकती है. वैसे तो आजकल मार्केट में ऐसी कई तरह की आई पेंसिल उपलब्ध हैं जिन्हें आप काजल और आई लाइनर दोनों की तरह इस्तेमाल कर सकती हैं.
आई शैडो का उपयोग आई लाइनर, आई पेंसिल और नेल पेंट की तरह 
आप आई शैडो को आई लाइनर की तरह और आई ब्रोज़ को भरने के लिए एंजेल ब्रश का इस्तेमाल कर सकती हैं. यदि आप आई शैडो ब्रश का इस्तेमाल बारीकी से शेप देते हुए करती हैं तो इससे आपकी आंखें बड़ी और सुंदर दिखेंगी. आई शैडो में रंगों की वैरायटी उपलब्ध होती है, जिससे आप विभिन प्रकार के शेड्स को आई लाइनर की तरह इस्तेमाल कर सकती हैं.
आप अपने आई शैडो को कपड़े में रखकर किसी भारी चीज़ से मसल कर उसका पाउडर तैयार करें. अब बराबर मात्रा में पाउडर आई शैडो और ट्रंपेरेंट नेल पेंट को मिलाए. आपका नया नेल पेंट तैयार है.
इस तरह आप खुद को खूबसूरत दिखा सकती हैं.

छोटी सरदारनी: देखिए पर्दे के पीछे कैसा है मेहर और कुलवंत का रिश्ता

कलर्स के शो ‘छोटी सरदारनी’ में मां-बेटी यानी मेहर और कुलवंत कौर के बीच तकरार और दूरियां देखने को मिलती है. लेकिन पर्दे के पीछे मेहर और कुलवंत कौर का रिश्ता बहुत अलग है. दोनों सेट पर मस्ती कम नहीं होने देती. आइए आपको बताते हैं कैसे पर्दे के पीछे मस्ती करती नजर आती है मां-बेटी की ये जोड़ी…

 मजबूत है मेहर और कुलवंत का रिश्ता

जैसा कि हम शो में देखते हैं कि कुलवंत कौर के लिए मेहर के दिल में अपने प्यार मानव को मारने की वजह से खटास है. वहीं पर्दे के पीछे दोनों एक दूसरे के साथ एकदम अलग हैं. कुलवंत और मेहर के बीच का पर्दे के पीछे रिश्ता काफी मजबूत है.

एक साथ लंच करती हैं मेहर और कुलवंत

meher

अलग-अलग सेट पर शूटिंग करने के बावजूद मेहर और कुलवंत कोशिश करते हैं कि जब भी मिले वह एक साथ लंच करें.

मेहर के डौगी से मिलने सेट पर जाती हैं कुलवंत

हाल ही में मेहर ने अपने साथ सेट पर कम्पनी देने के लिए एक छोटा सा डौगी लिया है, जो सेट पर सभी स्टार्स का लाडला है. वहीं कुलवंत कौर को जब भी वक्त मिलता है तो वह मौका निकालते ही उससे मिलने के बहाने मेहर के सेट पर पहुंच जाती हैं.

बेहद खास है सीनियर और जूनियर का ये रिश्ता 

meher-with-doggi

सेट पर कुलवंत कौर सीनियर एक्टर होते हुए भी सभी को-एक्टर का ख्याल रखती हैं और बाकी एक्टर्स भी उनका सम्मान करते हैं. वहीं मेहर भी कुलवंत कौर का ख्याल रखती हैं और उनके साथ क्वालिटी टाइम बिताने के लिए वक्त निकाल लेती हैं.

अब देखना है कि शो में इस मां-बेटी की दूरी कब खत्म होती है? जानने के लिए देखते रहिए ‘छोटी सरदारनी’, सोमवार से शनिवार, रात 7:30 बजे, सिर्फ कलर्स पर.

घर पर ऐसे बनाएं फ्राइड मशरूम

फ्राइड मशरूम आप पार्टी स्नैक के लिए बना सकते हैं. ये काफी टेस्टी होती है. और इसे बनाना भी बेहद आसान है. इस रेसिपी की खासियत ये है कि आप इसे किचन में मौजूद चीजों के साथ आसानी से बना सकती हैं तो आइए जानते है इसे बनाने की रेसिपी.

सामग्री

सफेद तिल 2 चम्मच

मैदा ढाई कप

सफेद मिर्च पाउडर 2 चम्मच

मशरूम 6 कप

नमक आधा चम्मच

कौर्न फ्लार आधा कप

रिफाइंड औइल 1 कप

ये भी पढ़ें- स्नैक रेसिपी: मसाला पूरी

बनाने की वि​धि

सबसे पहले मशरूम्स को अच्छी तरह से में धोएं और जब तक जरूरत न हो मशरूम को अलग रखें.

अब एक बड़े बाउल में मैदा लें और उसमें सफेद मिर्च पाउडर, कौर्न फ्लार, नमक और तिल डालें और पानी डालकर अच्छी तरह से मिक्स कर लें.

इस मिश्रण को तब तक मिक्स करें जब तक मिश्रण की कंसिस्टेंसी गाढ़ी न हो जाए.

अब मध्यम आंच पर एक पैन रखें और उसमें 1 कप तेल गर्म करें.

अब मशरूम को मैदा वाले मिक्सचर में डिप करें और सीधे पैन में गर्म तेल में डालकर फ्राई करें.

जब तक मशरूम का टेक्सचर क्रिस्पी और गोल्डन कलर का न हो जाए तब तक उसे फ्राई करें.

अपने पसंद की डिप या सौस के साथ सर्व करें.

ये भी पढ़ें- ऐसे बनाएं अमृतसरी तंदूरी चिकन

शुभारंभ: राजा-रानी की खुशियों में आ रही अड़चनों को कैसे दूर करेगी राजा की माँ?

कलर्स के शो ‘शुभारंभ’ में राजा-रानी की शादी में कई रुकावटें आ रही हैं. कीर्तिदा अपनी साजिशें चलकर शादी रोकने की कोशिश करने में जुटी हुई है. पर क्या ये साजिशें राजा-रानी की शादी को रोकने में कामयाब हो जाएंगी. आइए आपको बताते हैं क्या होगा शो में आगे…

रानी के परिवार को बचाती है राजा की माँ

पिछले एपिसोड में आपने देखा कि कीर्तिदा रानी के परिवार पर खानदानी ज्वैलरी चोरी करने का इल्जाम लगाती है, जिससे रानी टूट जाती है. वहीं राजा की माँ, आशा कीर्तिदा की चालें समझकर पूरा इल्जाम अपने ऊपर ले लेती है और कहती है कि चोरी होने के डर से उसने पोछी बदल दी थी.

shubh

रानी को भरोसा दिलाएगा राजा

raja

आज के एपिसोड में आप देखेंगे कि रानी, राजा से मिलकर दोनों के परिवार के बीच आर्थिक स्थिति में अंतर होने के अपने डर के बारे में बताएगी, लेकिन राजा रानी को भरोसा दिलाएगा कि ये अंतर उनकी शादी और आने वाली जिंदगी में नही पड़ेगा.

आशा और कीर्तिदा में लगेगी शर्त

kirtida

राजा की माँ आशा और कीर्तिदा के बीच बहस होगी, जिसमें आशा कहेगी कि ये उसका दावा है कि वह घर और दुकान पर अपना अधिकार हासिल करके रहेगी, जबकि कीर्तिदा आशा को चुनौती देगी कि राजा खुद ही शादी को रोक देगा.

शादी को रोकने के लिए कहेगी रानी

rani

आज के एपिसोड में आप देखेंगे कि रानी को अपनी माँ, वृंदा के 2 लाख रुपए के लोन के बारे में पता चल जाएगा और गुस्से में राजा को मैसेज करेगी कि वह शादी को रोकना चाहती है. तभी, उत्सव 2 लाख रुपए लेकर आएगा और रानी से वादा करेगा कि वह पोपट के पैसे चुका देगा और उसे अब चिंता करने की ज़रूरत नहीं है.

आशा करेगी कीर्तिदा की चालों को नाकामियाब करने की कोशिश

आने वाले एपिसोड में आप देखेंगे कि शादी के दिन राजा-रानी अपनी शादी में खुशियों के पल साथ बिताते हैं. अब देखना ये है कि कीर्तिदा की चालों का क्या कोई समाधान निकाल पाएगी आशा? या फिर राजा-रानी की शादी में फिर आएगी कोई रुकावट? जानने के लिए देखते रहिए शुभारंभ, सोमवार से शुक्रवार रात 9 बजे, सिर्फ कलर्स पर.

सुष्मिता सेन ने बेटियों के साथ किया धमाकेदार डांस,  देखें ये वीडियो

मिस यूनिवर्ष सुष्मिता सेन सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं. आए दिन सुष्मिता अपनी फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर करती रहती है.  हाल ही में सुष्मिता सेन ने दोनों बेटियों के साथ डांस करते हुए वीडियो शेयर की है. जी हां, उन्होंने इंस्टाग्राम पर अपने परिवार के साथ फोटोज भी शेयर की हैं.

आपको बता दें, वीडियो में सुष्मिता सेन अपनी बेटियों के साथ डांस प्रैक्टिस कर रही हैं. इस वीडियो के कैप्शन में  सुष्मिता ने लिखा है कि ‘’डांस इस तरह करो जैसे कोई आपको देख नहीं रहा हो.’ यह वीडियो सोशल मीडिया पर खुब वायरल हो रही है. सुष्मिता की इस डांस वीडियो को  उनके फैंस खुब पसंद कर रहे हैं. 9 लाख से भी ज्यादा लोग इसे देख चुके हैं.

ये भी पढ़ें- मलाइका अरोड़ा का नए साल का स्वागत करने का हौट अंदाज

 

बता दें कि सुष्मित सेन आखिरी बार अमीज बाजमी की फिल्म ‘नो प्रौब्लम’ में नजर आई थी. उन्होने अपनी एक फोटो शेयर करते हुए लिखा था. मैं हमेशा प्यार के साथ धैर्य को जानती हूं. यह अकेला ही मुझे मेरे प्रशंसकों का प्रशंसक बनाता है.

ये भी पढ़ें- ‘सब कुशल मंगल’ : अच्छे विषय पर कमजोर फिल्म

‘सब कुशल मंगल’ : अच्छे विषय पर कमजोर फिल्म

रेटिंगः दो स्टार

निर्माताः प्राची नितिन मनमोहन

निर्देशकः करण विश्वनाथ कश्यप

कलाकारः अक्षय खन्ना, रीना किशन, प्रियांक शर्मा, सतीश कौशिक, सुप्रिया पाठक, राकेश बेदी, श्रिया शरण व अन्य.

अवधिः दो घंटे 14 मिनट

बिहार व झारखंड के प्रचलित पकड़वा विवाह पर गत वर्ष फिल्म ‘‘जबरिया जोड़ी’’ आयी थी, जिसे दर्शकों ने सिरे से नकार दिया था. इस फिल्म में सिद्धार्थ मल्होत्रा व परिणीति चोपड़ा की जोड़ी थी.‘पकड़वा विवाह’ में शादी योग्य लड़के का अपहरण कर जबरन अपने घर ले जाकर लड़की से उस अपह्रत लड़के की शादी कर दी जाती है. और अब उसी विषय पर प्राची नितिन मनमोहन और करण विश्वनाथ कश्यप फिल्म‘‘सब कुशल मंगल है’’ लेकर आए हैं.

कहानीः

झारखंड के कर्नलगंज इलाके में  बाबा भंडारी (अक्षय खन्ना) राजनीति और अपराध में एक बड़ा नाम हैं. वह शादी योग्य लड़कों को जबरन पकड़कर या यूं कहें अपहरण कर उनका विवाह उन लड़कियों से करवाते हैं, जिनके माता पिता दहेज देने में असमर्थ हैं. इसके लिए वह खुद को परोपकारी मानते हैं. बाबा भंडारी के इस काम को गलत बताते हुए पत्रकार और एक टीवी रियालिटी शो ‘‘मुसीबत ओढ़ ली मैंने’’ के संचालक पप्पू मिश्रा (प्रियांक शर्मा) पूरा प्रकरण दिखा देते हैं. पप्पू मिश्रा जो कुछ अपने रियालिटी शो में दिखाते हैं, उससे बाबा भंडारी नाराज हो जाते हैं. तो वहीं इससे पप्पू मिश्रा के पिता मिश्रा (सतीश कौशिक) और मां इमरती देवी (सुप्रिया पाठक) परेशान हो जाती हैं. क्योकि संयोग से दोनों कर्नलगंज के ही निवासी हैं.

अब बाबा भंडारी, पप्पू मिश्रा को सबक सिखाने के बारे में सोचने लगते हैं. उधर तेज तर्रार मंदिरा शुक्ला उर्फ मंदा के पिता (राकेश बेदी) और भाई विष्णु, मंदा की शादी के लिए परेशान हैं. हारकर मंदा के पिता व भाई बाबा भंडारी के पास मदद मांगने जाते हैं. बाबा भंडारी हामी भर देते हैं. और जब पप्पू अपने माता पिता के साथ दिवाली मनाने दिल्ली से अपने घर आते हैं, तो भंडारी उसका अपहरण कर लेते हैं. मंदा के घर शादी की तैयारी शुरू हो जाती है. मगर मंदिरा ( रीवा किशन) खुद ही पप्पू को नाटकीय तरीके से भगा देती हैं. अपनी हार कबूल करने बाबा भंडारी मंदिरा के माता पिता से मिलने उनके घर जाते हैं और मंदिरा को देखते पहली ही नजर में प्यार कर बैठते हैं. अब वह मंदिरा से खुद ही विवाह करना चाहते हैं. तो वहीं वापस दिल्ली जाते समय मंदिरा व पप्पू मिलते हैं ओर दोनों प्यार का इजहार कर देते हैं. इसके बाद पप्पू दिल्ली जाने की बजाय वापस कर्नलगंज पहुंच जाते हैं. फिर कहानी कई मोड़ो से होकर गुजरती है.

ये भी पढ़ें- मलाइका अरोड़ा का नए साल का स्वागत करने का हौट अंदाज

लेखन व निर्देशनः

ब्रजेंद्र काला द्वारा लिखित और करण विश्वनाथ कश्यप निर्देशित इस रोमांटिक कौमेडी फिल्म में रोमांस तो कहीं है ही नही. कौमेडी के नाम पर जो कुछ परोसा गया है,  उससे दर्शकों को हंसी नही आती. लेखक कौमेडी के पंचेस ठीक से बैठा ही नहीं पाए. सतीश कौशिक और सुप्रिया पाठक जैसे अनुभवी कलाकारों को उबाउ संवाद दिए गए हैं. इतना ही नही लेखक व फिल्मकार पकड़वा विवाह को लेकर भी सही ढंग से बात नहीं कह पाए. मंदिरा के भाई विष्णु का चरित्र तो बेपेंदा लोटा की तरह दिखया गया है, पर इसकी वजह भी नहीं बतायी गयी. इंटरवल के बाद फिल्म काफी गड़बड़ हो गयी है. पटकथा व चरित्र चित्रण में काफी कमियां हैं. कुल मिलाकर एक अच्छे विषय पर कमजोर फिल्म है.

एडीटिंग भी गड़बड़ है.फिल्म को कसने की जरुरत थी. फिल्म किसी भी स्तर पर दर्शकों को बांधकर नहीं रखती.

ये भी पढ़ें- अजीबोगरीब ड्रेस के कारण दीपिका पादुकोण सोशल मीडिया पर हो रही है ट्रोल

अभिनयः

पप्पू मिश्रा के किरदार में अपने समय की चर्चित अदाकारा पद्मिनी कोल्हापुरे के बेटे प्रियांक शर्मा और मंदिरा शुक्ला के किरदार में अभिनेता व सांसद रवि किशन की बेटी रीवा किशन भी निराश ही करती हैं. दोनों के बीच परदे पर कोई केमेस्ट्री नजर ही नहीं आती. दबंग गुंडे के चरित्र में अक्षय खन्ना जमते नहीं है. सतीश कौशिक और सुप्रिया पाठक भी लेखक की कमजोरी के चलते अपनी प्रतिभा नहीं दिखा पाए.

फिल्म का गीत संगीत औसत दर्जे का है और जब भी गाने आते हैं,तो वह फिल्म की कहानी में व्यवधान ही पहुंचाते हैं.

उत्तर प्रदेश : अपराध का अधर्म राज

सतयुग से ले कर कलयुग तक नारी को छलने का काम पुरुषों ने किया. शारीरिक शोषण के लिए गंधर्व विवाह और फर्जी कोर्ट मैरिज तक धोखे में रख कर की. हर युग में महिला को ही दोषी ठहराया गया. कानून से ले कर समाज तक पुरुष की जगह नारी को ही दोषी माना गया. उन्नाव कांड में भी इस की झलक देखने को मिल रही है.

पूरे देश में उत्तर प्रदेश ही ऐसा प्रदेश है जहां धर्म का राज है. राज्य के  मुखिया के तौर पर गोरखनाथ रक्षा पीठ के महंत योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री की कुरसी पर आसीन हैं. मुख्यमंत्री के रूप में अपनी कुरसी पर बैठने से पहले मुख्यमंत्री के सरकारी आवास को पवित्र गंगाजल से शुद्ध भी किया गया था. 2017 से 2019 के बीच गंगा में बहुत सारा पानी बह गया है. पूरे प्रदेश में गाय और गंगा की पूजा हो रही है.

एक तरह से पूरे प्रदेश में रामराज्य की अवधारणा को जमीन पर उतार दिया गया है. उस युग का जाति और वर्ग आज फिर सत्ता वाले का बड़ा पैतरा बन गया है. धर्म के इस राज में अपराध का अधर्म छाया हुआ है. प्रदेश की राजधानी लखनऊ से महज 60 किलोमीटर दूर उन्नाव जिले में पिछड़ी विश्वकर्मा जाति की लड़की से प्रेमविवाह, उत्पीड़न और विरोध करने पर जिंदा जला देने की घटना घट जाती है. समाज और प्रशासन से खिन्न परिवार ने हिंदू रीतिरिवाज के बजाय लड़की को दफनाने का रास्ता अपनाया.

यह वही उन्नाव है जहां एक और संत सच्चिदानंद हरि साक्षी महाराज सांसद हैं. ऐसा नहीं है कि उन्नाव में महिला हिंसा की यह पहली घटना है. इस के पहले भाजपा के ही विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को लड़की से बलात्कार, उस के पिता की हत्या की साजिश और लड़की पर जानलेवा हमले के आरोप में अदालत ने दोषी करार दिया है.

इन 2 बड़ी घटनाओं को छोड़ दें तो उन्नाव में ऐसी तमाम और घटनाएं भी रहीं जिन में महिलाओं के साथ हिंसा हुई. देखा जाए तो यह हाल पूरे उत्तर प्रदेश का है. आंकड़ों को देखें तो महिलाओं के साथ हिंसा की सब से अधिक घटनाएं उत्तर प्रदेश में हो रही हैं. उन्नाव में रेप के बाद जलाने की घटना में भले ही प्रशासन ने तेजी दिखाई हो पर अधिकतर घटनाओं को पुलिस दबाने का प्रयास करती है.

ये भी पढ़ें- मन भाया मंगेतर : भाग 2

रसूखदारों का दबाव

उत्तर प्रदेश में अपराध का ग्राफ भी तेजी से बढ़ा है. 2015 में यह आंकड़ा 35,908 था जो 2016 में 11 फीसदी से भी अधिक बढ़ा और अपराध की संख्या बढ़ कर 49,262 पर पहुंची. 2017 में महिलाओं के खिलाफ बढ़ती हिंसा ने सारे रिकौर्ड तोड़ दिए और आंकड़ा 56 हजार पर पहुंच गया है. पूरे देश में महिलाओं के साथ हो रही हिंसा में अकेले उत्तर प्रदेश का 15.6 प्रतिशत का योगदान रहा है. 2017 के एनसीआरबी के आंकड़ों से पता चलता है कि उत्तर प्रदेश में बलात्कार के बाद महिलाओं के मर्डर की संख्या सब से ज्यादा सामने आई है.

2017 में ऐसे 67 मामले सामने आए थे. दहेज उत्पीड़न मामले में भी महिलाओं को प्रताडि़त करने के मामलों में भी उत्तर प्रदेश सब से आगे है.

सभी 29 राज्यों के आंकड़ों पर ध्यान दें तो 2017 में महिलाओं के साथ हुई हिंसा के 34,5989 मामले सामने आए हैं. यह 2016 के 33,8954 मामलों के मुकाबले काफी ज्यादा हैं. उत्तर प्रदेश में अपराध इसलिए बढ़े हुए हैं क्योंकि यहां पुलिस पीडि़त की मदद करने से पहले यह देखती है कि मामला किस के खिलाफ है. रसूखदार मामलों में पीडि़त के बजाय पुलिस आरोपित के साथ खड़ी नजर आती है.

कुलदीप सेंगर ही नहीं, शाहजहांपुर में भाजपा के ही पूर्व केंद्रीय मंत्री और राममंदिर आंदोलन के सारथी संत स्वामी चिन्मयानंद के मामले में भी ऐसा हुआ. ला कालेज में कानून की पढ़ाई कर रही लड़की ने जब स्वामी चिन्मयानंद के खिलाफ शारीरिक शोषण का मुकदमा लिखाया तो लड़की के खिलाफ ब्लैकमेलिंग का मुकदमा लिख कर उसे भी जेल भेज दिया.

गैरबिरादरी में प्रेम का हश्र

उन्नाव में हिंदूपुर गांव में लड़की को जलाने की घटना बताती है कि उत्तर प्रदेश जाति और धर्म की बेडि़यों में जकड़ा हुआ है. 20 साल की पिछड़ी जाति की लड़की के साथ ब्राह्मण जाति के लड़के का प्रेम होता है. लड़की पिछड़ी जाति के गरीब परिवार से थी और लड़का गांव के प्रभावशाली परिवार का था. गंवई प्रेमसंबंधों के बाद लड़की के शादी पर जोर दिए जाने के बाद 19 जनवरी, 2018 को नोटरी शपथपत्र के जरिए शिवम त्रिवेदी ने उस से शादी कर ली. दोनों अपने गांव से दूर रायबरेली शहर के साकेत नगर में रहने लगे.

घरवालों का दबाव पड़ा तो शिवम शादी से मुकरने लगा. दोनों के बीच सुलह कराने के लिए लड़की को मंदिर में ले जा कर गैंगरेप किया गया. 12 दिसंबर, 2018 को लड़की लालगंज कोतवाली मुकदमा दर्ज कराने पहुंची. वहां पुलिस ने मुकदमा दर्ज नहीं किया. 20 दिसंबर को लड़की ने एसपी रायबरेली को रजिस्टर्ड डाक से अपना शिकायती पत्र भेजा. इस की भी कोई सुनवाई नहीं हुई.

ये भी पढ़ें- मन भाया मंगेतर : भाग 1

पुलिस से निराश हो कर पीडि़त लड़की ने रायबरेली में अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की कोर्ट में मुकदमा दर्ज कराने के लिए पत्र दिया. 10 जनवरी, 2019 को मजिस्ट्रेट ने एफआईआर दर्ज कराने का आदेश दिया. इस के बाद भी पुलिस ने कोई कदम नहीं उठाया. 26 फरवरी को कोर्ट की अवमानना का नोटिस दिया गया. तब पुलिस ने दबाव में आ कर 5 मार्च को मुकदमा दर्ज किया. उस के बाद पीडि़ता मुख्यमंत्री से शिकायत करने पहुंची तो

22 सितंबर को आरोपियों ने कोर्ट में सरैंडर कर दिया. पुलिस के देर से मुकदमा दर्ज करने और लचर जांच के चलते ही आरोपियों को जल्दी जमानत मिल गई.

लड़की को इस बात की हैरानी थी कि इतनी जल्दी शिवम जमानत पर कैसे जेल से बाहर आ गया. लड़की ने अपने परिवार को यह बात बताई और कहा कि कल वह रायबरेली जा कर अपने वकील से मिल कर पता करेगी कि यह कैसे हो गया. रायबरेली जाने के लिए लड़की को कानपुर से रायबरेली जाने वाली ट्रेन सुबह 5 बजे मिलनी थी.

जलने के बाद चरित्र हनन

3 दिसंबर, 2019 की सुबह पीडि़त लड़की ट्रेन पकड़ने के लिए अपने घर से निकली. घर से बिहार स्टेशन करीब 2 किलोमीटर दूर था. पीडि़त लड़की सुबह 4 बजे घर से निकली. जाड़े का समय था. रास्ते में अंधेरा भी था. लड़की के पिता ने उसे स्टेशन छोड़ने के लिए कहा तो उस ने बूढ़े पिता की परेशानी को देखते हुए उन्हें मना कर दिया. खुद ही घर से निकल गई.

गांव से स्टेशन के रास्ते में कुछ रास्ते ऐसे थे जहां कोई नहीं रहता था. इसी जगह पर लड़की पर मिट्टी का तेल छिड़क कर आग लगा दी गई. लड़की खुद को बचाने के लिए मदद की तलाश में दौड़ रही थी. जली हालत में लड़की खुद को बचाने के लिए दौड़ी तो आग और भड़क गई और उस के कपड़े जल कर जिस्म से चिपक गए.

रास्ते में एक जगह कुछ लोग दिखे तो लड़की वहीं गिर पड़ी. लड़की के कहने पर रास्ते पर रहने वालों ने 112 नंबर पर जानकारी दी. शिकायत पर पहुंची पुलिस को लड़की ने जली हालत में पुलिस और प्रशासन को अपने ऊपर मिट्टी का तेल डाल कर जलाने वालों के नाम बताए. 90 फीसदी जली हालत में लड़की को पहले उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ और फिर देश की राजधानी दिल्ली इलाज के लिए ले जाया गया. पीडि़त लड़की ने जिंदगी और मौत के बीच 3 दिन संघर्ष करने के बाद दम तोड़ दिया. लड़की के पिता को दुख है कि घटना के दिन वह उसे छोड़ने स्टेशन तक क्यों नहीं गए. लड़की खुद अपनी लड़ाई लड़ रही थी. इस कारण वह विश्वास में थे. इस के पहले वह उसे छोड़ने स्टेशन तक जाते थे.

शिवम त्रिवेदी और दूसरे आरोपियों के परिवार के लोग घटना का तर्क देते कहते हैं कि गुनाह उन के घरवालों ने नहीं किया, उन को साजिश के तहत फंसाया जा रहा है. वे कहते हैं कि लड़की को जलाने की घटना जिस समय की है उस समय उन के लड़के घरों में सो रहे थे. पुलिस ने उन को सोते समय घर से पकड़ा है. अगर उन्होंने अपराध किया होता तो आराम से घर में सो नहीं रहे होते.

इन के समर्थक बताते हैं कि जेल से शिवम के छूटने के बाद लड़की ने उस को फिर से जेल भिजवाने की धमकी दी. इस के बाद खुद पर मिट्टी का तेल डाल कर खुद को जलाने का काम किया. ये लोग सोशल मीडिया पर इस बात का प्रचार भी कर रहे हैं कि शिवम को फंसाने और जेल भिजवाने के नाम पर 15 लाख रुपए की फिरौती लड़की मांग रही थी. इस में से 7 लाख रुपए शिवम के परिवार वाले दे भी चुके थे.

ये भी पढ़ें- क रोटी के लिए हत्या

दबाव में जागी सरकार

उन्नाव की घटना पर सरकार तब जागी जब कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने सोशल मीडिया से ले कर उन्नाव पहुंचने तक विरोध दर्ज किया. समाजवादी पार्टी नेता पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश की विधानसभा के बाहर धरनाप्रदर्शन किया और बहुजन समाज पार्टी की नेता मायावती ने प्रदेश के राज्यपाल से मिल कर उत्तर प्रदेश में महिला अपराध पर अपनी शिकायत दर्ज कराई. राजनीतिक दलों के साथ समाज के लोग भी सड़कों पर उतरे और सरकार के खिलाफ विरोधप्रदर्शन किया. इस के बाद भी भाजपा सरकार में मंत्री धन्नी सिंह ने कहा, ‘‘समाज अपराधशून्य तो रामराज में भी नहीं रहा.’’

उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले को हलका करने के लिए लड़की के घरवालों को मुआवजा देने का काम किया. लड़की के घरपरिवार वालों को 25 लाख रुपए की आर्थिक मदद, गांव में 2 मकान और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने का ऐलान किया गया. उन्नाव के मामले के बाद तमाम ऐसी घटनाएं प्रकाश में आने लगीं. इन घटनाओं से समाज की हकीकत का पता चलता है. इस बार रेप कांड सामाजिक है. समाज उन्नाव जिले की घटना को प्रेमप्रसंग मान कर दरकिनार कर रहा है.

उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार है, जहां प्रेम को रोकने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के द्वारा शपथ ग्रहण करते ही ‘एंटी रोमियो दल’ का गठन किया गया था. मामला एक ही धर्म के लोगों का था. ऐसे में ‘एंटी रोमियो दल’ और पुलिस के लिए यह कोई बड़ी बात नहीं थी.

धर्म आधारित सत्ता तो रामायण और महाभारत काल से ही छले जाने पर औरत को ही दोषी मानती थी. अहल्या को पत्थर बना दिया जाना, सीता को घर से निकाला जाना और कुंती का पुत्र को त्याग करने जैसी बहुत सी घटनाएं उदाहरण हैं. ऐसे में उन्नाव के हिंदूपुर गांव की पिछड़ी जाति की लड़की के जलने के बाद भी समाज सच नहीं मान रहा तो कोई बड़े आश्चर्य वाली बात नहीं है.

ये भी पढ़ें- एक थप्पड़ के बदले 2 हत्याएं : भाग 2

फिर वही शून्य : भाग 1

सौम्या अनिरुद्ध से विवाह कर पत्नी का कर्तव्य पूरी तरह निभा रही थी लेकिन मन से वह अभी भी समर की थी. ऐसे में फिर से समर को अपने सामने पा कर उस का दर्द आंखों से बह निकला. लेकिन अब परिस्थितियां कितनी बदल चुकी थीं.

सुनहरी सीपियों वाली लाल साड़ी पहन कर जब मैं कमरे से बाहर निकली तो मुझे देख कर अनिरुद्ध की आंखें चमक उठीं. आगे बढ़ कर मुझे अपने आगोश में ले कर वह बोले, ‘‘छोड़ो, सौम्या, क्या करना है शादीवादी में जा कर? तुम आज इतनी प्यारी लग रही हो कि बस, तुम्हें बांहों में ले कर प्यार करने का जी चाह रहा है.’’

‘‘क्या आप भी?’’ मैं ने स्वयं को धीरे से छुड़ाते हुए कहा, ‘‘विशाल आप का सब से करीबी दोस्त है. उस की शादी में नहीं जाएंगे तो वह बुरा मान जाएगा. वैसे भी इस परदेस में आप के मित्र ही तो हमारा परिवार हैं. चलिए, अब देर मत कीजिए.’’

‘‘अच्छा, लेकिन पहले कहो कि तुम मुझे प्यार करती हो.’’

‘‘हां बाबा, मैं आप से प्यार करती हूं,’’ मेरा लहजा एकदम सपाट था.

अनिरुद्ध कुछ देर गौर से मेरी आंखों में झांकते रहे, फिर बोले, ‘‘तुम सचमुच बहुत अच्छी हो, तुम्हारे आने से मेरी जिंदगी संवर गई है. अपने आप को बहुत खुशनसीब समझने लगा हूं मैं. फिर भी न जाने क्यों ऐसा लगता है जैसे तुम दिल से मेरे साथ नहीं हो, कि जैसे कोई समझौता कर रही हो. सौम्या, सच बताओ, तुम मेरे साथ खुश तो हो न?’’

मैं सिहर उठी. क्या अनिरुद्ध ने मेरे मन में झांक कर सब देख लिया था? नहीं, ऐसा नहीं हो सकता. खुद को संयत कर मैं ने इतना ही कहा, ‘‘आप भी कैसी बातें करते हैं? मेरे खुश न होने का क्या कारण हो सकता है? इस वक्त मुझे बस, समय से पहुंचने की चिंता है और कोई बात नहीं है.’’

शादी से वापस आतेआते काफी देर हो गई थी. अनिरुद्ध तो बिस्तर पर लेटते ही सो गए, लेकिन मेरे मन में उथलपुथल मची हुई थी. पुरानी यादें दस्तक दे कर मुझे बेचैन कर रही थीं, ऐसे में नींद कहां से आती?

कितने खुशनुमा दिन थे वे…स्कूल के बाद कालिज में प्रवेश. बेफिक्र यौवन, आंखों में सपने और उमंगों के उस दौर में वीरांगना का साथ.

वीरांगना राणा…प्यार से सब उसे वीरां बुलाते थे. दूध में घुले केसर सी उजली रंगत, लंबीघनी केशराशि, उज्ज्वल दंतपंक्ति…अत्यंत मासूम लावण्य था उस का. जीवन को भरपूर जीने की चाह, समस्याओं का साहस से सामना करने का माद्दा, हर परिस्थिति में हंसते रहने की अद्भुत क्षमता…मैं उस की जीवंतता से प्रभावित हुए बिना न रह सकी. हम दोनों कब एकदूसरे के निकट आ गईं, खुद हमें भी न पता चला.

फिर तो कभी वह मेरे घर, कभी मैं उस के घर में होती. साथ नोट्स बनाते और खूब गप लड़ाते. मां मजाक में कहतीं, ‘जिस की शादी पहले होगी वह दूसरी को दहेज में ले जाएगी,’ और हम खिलखिला कर हंस पड़ते.

ये भी पढ़ें- औरत एक पहेली

एक दिन वीरां ने मुझ से कहा, ‘आज भाई घर आने वाला है, इसलिए मैं कालिज नहीं चलूंगी. तू शाम को आना, तब मिलवाऊंगी अपने भाई से.’

वीरां का बड़ा भाई फौज में कैप्टन था और छुट्टी ले कर काफी दिन के बाद घर आ रहा था. इसी वजह से वह बहुत उत्साहित थी.

शाम को वीरां के घर पहुंच कर मैं ने डोरबेल बजाई और दरवाजे से थोड़ा टिक कर खड़ी हो गई, लेकिन अपनी बेखयाली में मैं ने देखा ही नहीं कि दरवाजा सिर्फ भिड़ा हुआ था, अंदर से बंद नहीं था. मेरा वजन पड़ने से वह एक झटके से खुल गया, मगर इस से पहले कि मैं गिरती, 2 हाथों ने मुझे मजबूती से थाम लिया.

मैं ने जब सिर उठा कर देखा तो देखती ही रह गई. वीरां जैसा ही उजला रंग, चौड़ा सीना, ऊंचा कद…तो यह था कैप्टन समर राणा. उस की नजरें भी मुझ पर टिकी हुई थीं जिन की तपिश से मेरा चेहरा सुर्ख हो गया और मेरी पलकें स्वत: ही झुक गईं.

‘लो, तुम तो मेरे मिलवाने से पहले ही भाई से मिल लीं. तो कैसा लगा मेरा भाई?’ वीरां की खनकती आवाज से मेरा ध्यान बंटा. उस के बाद मैं ज्यादा देर वहां न रह पाई, जल्दी ही बहाना बना कर घर लौट आई.

उस पूरी रात जागती रही मैं. उन बलिष्ठ बांहों का घेरा रहरह कर मुझे बेचैन करता रहा. एक पुरुष के प्रति ऐसी अनुभूति मुझे पहले कभी नहीं हुई थी. सारी रात अपनी भावनाओं का विश्लेषण करते ही बीती.

समर से अकसर ही सामना हो जाता. वह बहन को रोज घुमाता और वीरां मुझे भी साथ पकड़ कर ले जाती. दोनों भाईबहन एक से थे, ऊपर से सताने के लिए मैं थी ही. रास्ते भर मुझे ले कर हंसीठिठोली करते रहते, मुझे चिढ़ाने का एक भी मौका न छोड़ते. मगर मेरा उन की बातों में ध्यान कहां होता?

मैं तो समर की मौजूदगी से ही रोमांचित हो जाती, दिल जोरों से धड़कने लगता. उस का मुझे कनखियों से देखना, मुझे छेड़ना, मेरे शर्माने पर धीरे से हंस देना, यह सब मुझे बहुत अच्छा लगने लगा था. कभीकभी डर भी लगता कि कहीं यह खुशी छिन न जाए. मन में यह सवाल भी उठता कि मेरा प्यार एकतरफा तो नहीं? आखिर समर ने तो मुझे कोई उम्मीद नहीं दी थी, वह तो मेरी ही कल्पनाएं उड़ान भरने लगी थीं.

अपने प्रश्न का मुझे जल्दी ही उत्तर मिल गया था. एक शाम मैं, समर और वीरां उन के घर के बरामदे में कुरसी डाले बैठे थे तभी आंटी पोहे बना कर ले आईं, ‘मैं सोच रही हूं कि इस राजपूत के लिए कोई राजपूतनी ले आऊं,’ आंटी ने समर को छेड़ने के लहजे में कहा.

‘मम्मा, भाई को राजपूतनी नहीं, गुजरातिन चाहिए,’ वीरां मेरी ओर देख कर बडे़ अर्थपूर्ण ढंग से मुसकराई.

आंटी मेरी और समर की ओर हैरानी से देखने लगीं, पर समर खीज उठा, ‘क्या वीरां, तुम भी? हर बात की जल्दी होती है तुम्हें…मुझे तो कह लेने देतीं पहले…’

समर ने आगे क्या कहा, यह सुनने के लिए मैं वहां नहीं रुकी. थोड़ी देर बाद ही मेरे मोबाइल पर उस का फोन आया. अपनी शैली के विपरीत आज उस का स्वर गंभीर था, ‘सारी सौम्या, मैं खुद तुम से बात करना चाहता था, लेकिन वीरां ने मुझे मौका ही नहीं दिया. खैर, मेरे दिल में क्या है, यह तो सामने आ चुका है. अब अगर तुम्हारी इजाजत हो तो मैं मम्मीपापा से बात करूं. वैसे एक फौजी की जिंदगी तमाम खतरों से भरी होती है. अपने प्यार के अलावा तुम्हें और कुछ नहीं दे सकता. अच्छी तरह से सोच कर मुझे अपना जवाब देना…’

ये भी पढ़ें- ज्योति से ज्योति जले

‘सोचना क्या है? मैं मन से तुम्हारी हो चुकी हूं. अब जैसा भी है, मेरा नसीब तुम्हारे साथ है.’

हमारे प्यार को परिवार वालों की सहमति मिल गई और तय हुआ कि मेरी पढ़ाई पूरी होने के बाद हमारा विवाह किया जाएगा.

फिर वही शून्य : भाग 2

समर की छुट्टियां खत्म होने को थीं. उस के वापस जाने से पहले जो लम्हे मैं ने उस के साथ गुजारे वे मेरे जीवन की अमूल्य निधि हैं. उस का शालीन व्यवहार, मेरे प्रति उस की संवेदनशीलता और प्रेम के वे कोमल क्षण मुझे भावविह्वल कर देते. उस के साथ अपने भविष्य की कल्पनाएं एक सुखद अनुभूति देतीं.

मगर इनसान जैसा सोचता है वैसा हो कहां पाता है? पड़ोसी देश के अचानक आक्रमण करने की वजह से सीमा पर युद्ध के हालात उत्पन्न हो गए. एक फौजी के परिवार को किन परिस्थितियों से गुजरना पड़ता है, इस का अंदाजा मुझे उस वक्त ही हुआ. टीवी पर युद्ध के हृदयविदारक दृश्य और फौजियों की निर्जीव देहें, उन के परिजनों का करुण रुदन देख कर मैं विचलित हो जाती. मन तरहतरह की आशंकाआें से घिरा रहता. सारा वक्त समर की कुशलता की प्रार्थना करते ही बीतता.

ऐसे में मैं एक दिन वीरां के साथ बैठी थी कि समर की बटालियन से फोन आया. समर को लापता कर दिया गया था. माना जा रहा था कि उसे दुश्मन देश के सैनिकों ने बंदी बना लिया था.

कुछ देर के लिए तो हम सब जड़ रह गए. फिर मन की पीड़ा आंखों के रास्ते आंसू बन कर बह निकली. वहां समर न जाने कितनी यातनाएं झेल रहा था और यहां…खुद को कितना बेबस और लाचार महसूस कर रहे थे हम.

युद्ध की समाप्ति पर दुश्मन देश ने अपने पास युद्धबंदी होने की बात पर साफ इनकार कर दिया. हमारी कोई कोशिश काम न आई. हम जहां भी मदद की गुहार लगाते, हमें आश्वासनों के अलावा कुछ न मिलता. उम्मीद की कोई किरण नजर नहीं आ रही थी.

वक्त गुजरता गया. इतना सब होने के बाद भी जिंदगी रुकी नहीं. वाकई यह बड़ी निर्मोही होती है. जीवन तो पुराने ढर्रे पर लौट आया लेकिन मेरा मन मर चुका था. वीरां और मैं अब भी साथ ही कालिज जाते, मगर समर अपने साथ हमारी हंसीखुशी सब ले गया. बस जीना था…तो सांस ले रहे थे, ऐसे ही…निरुद्देश्य. जीवन बस, एक शून्य भर रह गया था.

फिर हम दोनों ने साथ ही बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन का कोर्स भी कर लिया. तब एक दिन मम्मी ने मुझे अनिरुद्ध की तसवीर दिखाई.

बच्चों की भावना

‘मैं जानती हूं कि तुम समर को भुला नहीं पाई हो, लेकिन बेटा, ऐसे कब तक चलेगा? तुम्हें आगे के बारे में सोचना ही पडे़गा. इसे देखो, मातापिता सूरत में रहते हैं और खुद अमेरिका में साफ्टवेयर इंजीनियर है. इतना अच्छा रिश्ता बारबार नहीं मिलता. अगर तुम कहो तो बात आगे बढ़ाएं,’  वह मुझे समझाने के स्वर में बोलीं.

उन की बात सुन कर मैं तड़प उठी, ‘आप कैसी बातें कर रही हैं, मम्मी? मैं समर के अलावा किसी और के बारे में सोच भी नहीं सकती. आप एक औरत हैं, कम से कम आप तो मेरी मनोदशा समझें.’

‘तो क्या जिंदगी भर कुंआरी  रहोगी?’

‘हां,’ अब मेरा स्वर तल्ख होने लगा था, ‘और आप क्यों परेशान होती हैं? आप लोगों को मेरा बोझ नहीं उठाना पडे़गा. जल्दी ही मैं कोई नौकरी ढूंढ़ लूंगी. फिर तो आप निश्ंिचत रहेंगी न…’

‘पागल हो गई हो क्या? हम ने कब तुम्हें बोझ कहा, लेकिन हम कब तक रहेंगे? इस समाज में आज के दौर में एक अकेली औरत का जीना आसान नहीं है. उसे न जाने कितने कटाक्षों और दूषित निगाहों का सामना करना पड़ता है. कैसे जी पाओगी तुम? समझ क्यों नहीं रही हो तुम?’ मम्मी परेशान हो उठीं.

मगर मैं भी अपनी जिद पर अड़ी रही, ‘मैं कुछ समझना नहीं चाहती. मैं बस, इतना जानती हूं कि मैं सिर्फ समर से प्यार करती हूं.’

‘और समर का कुछ पता नहीं. वह जिंदा भी है या…कुछ पता नहीं,’ वीरां की धीमी आवाज सुन कर हम दोनों चौंक पड़ीं. वह न जाने कब से खड़ी हमारी बातें सुन रही थी, लेकिन हमें पता ही न चला था. मम्मी कुछ झेंप कर रह गईं लेकिन उस ने उन्हें ‘मैं बात करती हूं’ कह कर दिलासा दिया और वह हम दोनों को अकेला छोड़ कर वहां से चली गईं.

‘वीरां, तू कुछ तो सोचसमझ कर बोला कर. तू भूल रही है कि जिस के बारे में तू यह सब बातें कर रही है, वह तेरा ही भाई है.’

‘जानती हूं, लेकिन हकीकत से भी तो मुंह नहीं मोड़ा जा सकता. हमारी जो जिम्मेदारियां हैं, उन्हें भी तो पूरा करना हमारा ही फर्ज है. तुम्हें शायद भाई के लौटने की आस है, लेकिन जब 1971 के युद्धबंदी अब तक नहीं लौटे, तो हम किस आधार पर उम्मीद लगाएं.’

‘लेकिन…’

ये भी पढ़ें- दिल की दहलीज पर

‘लेकिन के लिए कोई गुंजाइश नहीं है, सौम्या. तुम अपने मातापिता की इकलौती संतान हो. तुम चाहती हो कि वे जीवनभर तुम्हारे दुख में घुलते रहें? क्या तुम्हारा उन के प्रति कोई फर्ज नहीं है?’

‘लेकिन मेरा भी तो सोचो, समर के अलावा मैं किसी और से कैसे शादी कर सकती हूं?’

‘अपनी जिम्मेदारियों को सामने रखोगी तो फैसला लेना आसान हो जाएगा,’ उस दिन हम दोनों सहेलियां आपस में लिपट कर खूब रोईं.

फिर मैं अनिरुद्ध से विवाह कर के न्यू जर्सी आ गई, मगर मैं समर को एक दिन के लिए भी नहीं भूल पाई. हालांकि मैं ने अनिरुद्ध को कभी भी शिकायत का मौका नहीं दिया, अपने हर कर्तव्य का निर्वहन भली प्रकार से किया, पर मेरे मन में उस के लिए प्रेम पनप न सका. मेरे मनमंदिर में तो समर बसा था, अनिरुद्ध को कहां जगह देती.

यही बात मुश्किल भी खड़ी करती. मैं कभी मन से अनिरुद्ध की पत्नी न बन पाई. उस के सामने जब अपना तन समर्पित करती, तब मन समर की कल्पना करता. खुद पर ग्लानि होती मुझे. लगता अनिरुद्ध को धोखा दे रही हूं. आखिर उस की तो कोेई गलती नहीं थी. फिर क्यों उसे अपने हिस्से के प्यार से वंचित रहना पडे़़? अब वही तो मेरे जीवन का सच था. मगर खुद को लाख समझाने पर भी मैं समर को दिल से नहीं निकाल पाई. शायद एक औरत जब प्यार करती है तो बहुत शिद्दत से करती है.

अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिएसब्सक्राइब करें