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फरिश्ता : भाग 2

‘अरे आप बेकार परेशान हो रहे हैं… मैं तो विधायक बाबू के घर से खाना खाकर ही चला था.’ डौक्टर सूर्यकांत ने पूनम को रसोई की तरफ जाते देखा, तो वृद्ध से बोला.

‘बेटा, हम गरीबों के पास सूखी रोटी से ज्यादा तो कुछ…’ वृद्ध कांपती आवाज में बोला.

‘अरे…अरे… आप फिर ऐसी बातें करने लगे… चलिए, अब आप आराम से लेटिये और सोने की कोशिश करिये.’ उसने उन्हें थपकी दी और बैग बंद करके बाहर वाले कमरे की ओर आ गया. थोड़ी ही देर में पूनम गिलास में गुड़ की चाय और थाली में रोटी लिए सामने खड़ी थी.

‘आपने बेकार परेशानी उठायी….’ उसने उसके हाथ से दोनों चीजें ले लीं.

‘आपने पढ़ाई-लिखाई की है…?’ वह समय गुजारने के लिए पूनम से बतियाने लगा.

‘जी… विधायक बाबू के स्कूल से हाईस्कूल तक पढ़ाई की है… फिर बाबा की नौकरी छूट गयी… और अब तो….’ वह बताते-बताते रुक गयी.

‘आगे पढ़ने की इच्छा नहीं होती…?’ डौक्टर ने सवाल दागा.

‘विधायक बाबू की तरफ से बाबा को पांच सौ रुपये पेंशन मिलती है… उसमें रोटी जुटाना ही मुश्किल पड़ता है… और फिर गांव में आगे पढ़ने के लिए स्कूल भी तो नहीं है….’ उसने सिर झुकाए धीरे से जवाब दिया. फिर चिन्तित सी होकर पूछ बैठी, ‘बाबा ठीक तो हो जाएंगे न, डौक्टर साहब?’

‘हां-हां, क्यों नहीं? बस उन्हें खुश रखने की कोशिश करो… मरीज की आधी बीमारी तो उसका दु:ख होता है….’ डौक्टर ने खाली गिलास और प्लेट उसको वापस पकड़ायी.

‘आप चाहें तो इसी तख्त पर लेट जाइये….’ पूनम ने सामने पड़े तख्त की ओर इशारा करके कहा.

‘नहीं, नहीं… मैं ठीक हूं… अब तो बारिश भी कम हो गयी है….’

‘मगर सवारी तो आपको सुबह ही मिल पाएगी….’ वह चिन्तित सी होती हुई बोली.

‘हां, तब तक तो समय बिताना ही है… तुम जाओ लेटो, मैं ठीक हूं….’ कहते हुए वह तख्त की ओर बढ़ गया.

‘हूं…’ छोटा सा जवाब देकर पूनम अपने बाबा के कमरे में चली गयी.

सुबह होते ही डौक्टर सूर्यकांत उन दोनों से विदा लेकर सरजू की बैलगाड़ी पर सवार होकर चल दिया. पूनम बड़ी दूर तक उसको जाते देखती रही. उसको यकीन ही नहीं हो रहा था कि कल की तूफानी रात में इस प्रकार एक फरिश्ता उसके घर में प्रकट हुआ और उसके बाबा को अच्छा कर देने की बात कही. एक गरीब बेसहारा के लिए ये सांत्वना के शब्द ही बहुत थे. उसकी आंखों में आंसू छलक पड़े. लौटकर भीतर आयी तो तख्त पर बिछी दरी पर उसे दो-दो हजार रुपये के तीन नोट रखे दिखे और उसके साथ एक पत्र…

उसने कांपते हाथों से पत्र खोला, लिखा था –

‘तुम्हारे बाबूजी को ताजे फल और दूध की सख्त आवश्यकता है. इस पैसों को कोई एहसान मत समझना, ये एक डौक्टर की हिदायत है कि उसके मरीज का पूरा ख्याल रखा जाए और मुझे उम्मीद है कि मेरे मरीज को अच्छा करने में तुम मेरी मदद करोगी. इस तूफानी रात में एक अजनबी को शरण देने के लिए बहुत-बहुत शुक्रिया. मैं जल्दी ही तुम्हारे बाबूजी को देखने आऊंगा…. डौक्टर सूर्यकांत.’

अपनत्व से भरे इस पत्र को पढ़कर पूनम फूट-फूट कर रो पड़ी. दो-दो हजार के नोट उसके हाथों में कंपकंपा रहे थे. उसको यकीन नहीं हो रहा था कि इस दुनिया में ऐसे देवता स्वरूप लोग भी बसते हैं. उसने तो जब से होश संभाला, गांव के भूखे भेड़ियों को अपने जिस्म की ओर ललचायी नजरों से घूरते हुए ही पाया था. जब तक बाबा मास्टरी करते थे, गांव के लड़कों को उसकी तरफ देखने की हिम्मत नहीं पड़ती थी, मगर जब से बाबा बिस्तर से लगे और गरीबी की मार पड़ी तो नये उम्र के छोकरों की तो बात ही छोड़ो, भैरो बनिया और जुम्मन चाचा तक की निगाहों में उसने एक वहशी चमक देखी थी, जैसे ये सब उसकी बोटी-बोटी नोंच लेना चाहते हों. रामभरोसे काका ने तो उस रोज हद ही पार कर दी थी. उस रोज वह उसकी दुकान पर बाबा की खिचड़ी के लिए दो मुट्ठी मूंग की दाल उधार मांगने चली गयी थी. शायद पूनम से बड़ी तो उसकी अपनी बेटी होगी, मगर बेशर्म इतना कि उसकी कलाई पकड़ कर उसे रात घर आने का न्योता दे बैठा.

घबरायी हुई पूनम दाल-वाल वहीं छोड़कर घर भाग आयी थी. अपने बाबा से लिपट कर वह कितना रोई थी. तभी से बाबा को उसकी चिन्ता खाए जा रही थी. जवान लड़की और वो भी खूबसूरत, आखिर चिन्ता की तो बात ही थी.

पूनम के घर के बगल में रहने वाली बस लक्ष्मी मौसी थीं, जिनके साथ वह अपना दुखड़ा बांट लिया करती थी. वो भी बेचारी बेसहारा गरीब, विधवा थीं. आगे-पीछे कोई रोने वाला भी न था. पूनम अक्सर उनके कामों में हाथ बंटा दिया करती थी और खाली वक्त में उनकी गोद में सिर रखकर ममता का सुख पाती थी. कुछ क्षणों के लिए ही सही, दोनों अपना-अपना दुख-दर्द भूल जाते थे.

अचानक भीतर से बाबा के खांसने की आवाज ने पूनम को चौंका दिया. वो तो न जाने कब से अपने ख्यालों में गुम थी. हाथ में पकड़े हुए नोट उसने साड़ी के पल्लू में बांध लिये और अन्दर वाले कमरे की ओर मुड़ गयी.

डौक्टर सूर्यकांत ग्यारह बजते-बजते अपनी क्लीनिक पहुंच गया. अपने कंपाउंडर को बुलाकर उसने एक बड़े से पैकेट में कुछ दवाएं और पैसे उसे थमा दिये और बोला,  ‘ये दवाएं मगहर गांव के मास्टर काशीनाथ के घर दे आना और साथ में कुछ फल भी लेते जाना… और देखो, वहां नहर के किनारे वाले कच्चे रास्ते पर मेरी कार फंसी पड़ी है… किसी मकैनिक को साथ लिए जाओ, वापसी में कार लेते आना… ठीक है?’

‘जी साहब….’ कंपाउंडर बाहर निकल गया.

क्लीनिक के बाहर मरीजों की भीड़ जुटनी शुरू हो गयी थी. इन्हें निपटा कर उसे सरकारी अस्पताल भी जाना था. वहां एक जरूरी औपरेशन था. डौक्टर सूर्यकांत शहर के माने हुए डौक्टरों में गिना जाता था. इतनी कम उम्र में उसने जो रुतबा हासिल कर लिया था, वह काबिले-तारीफ था. होनहार, सरल और सुसंस्कृत… अपनी मां का इकलौता बेटा था डौक्टर सूर्यकांत. मात्र बत्तीस वर्ष की उम्र में उसने जो नाम और दौलत कमायी थी, उसके लिए इस शहर के दूसरे डौक्टर तरसते थे. मां ने संस्कार इतने अच्छे दिये थे कि मानवता और दया का सागर उसकी आंखों से छलकता था. अपनत्व से भरी उसकी मुस्कान उसके मरीजों का आधा दु:ख-दर्द तो यों ही दूर कर देती थी. बहुत गरीब मरीजों से तो वह फीस भी नहीं लेता था, मगर अमीरों की जेब हल्की करने में वह कभी नहीं चूकता था.

मां तो उसकी अब यह चाहती थीं कि वह शादी कर ले और घर में एक बहू आ जाए, मगर डौक्टर सूर्यकांत… उसे तो इस मसले पर बात करने तक की फुर्सत नहीं थी. उसने तो जैसे अपना जीवन मानवता की सेवा में ही अर्पण कर दिया था. सुबह दस बजे से रात दस बजे तक वह मरीजों से ही घिरा रहता था.

एक हफ्ता बीत चुका था. पूनम आंगन में बैठी अपने ख्यालों में गुम थी… ‘कहीं डौक्टर साहब भूल तो नहीं गये…? दवाएं भी खत्म होने को हैं… ऐसा तो नहीं कि एक रात शरण देने के बदले उन्होंने हफ्ते भर की दवाएं भिजवा दीं हों…’

न जाने कैसे-कैसे विचार उसके जेहन में उभर रहे थे. डौक्टर साहब की दवाएं और फल-दूध आदि मिलने से बाबा की सेहत में काफी सुधार हो रहा था. अब तो वह पीठ के पीछे तकिया लगाकर बैठने भी लगे थे. उल्टियां भी थम गयी थीं. बहुत दिनों के बाद उसने बाबा के चेहरे पर पहले जैसी मुस्कान देखी थी. वह नहीं चाहती थी कि यह मुस्कान फिर गरीबी के अंधेरे में गुम हो जाए. उसे यही चिन्ता सता रही थी कि डौक्टर साहब दोबारा उसके घर आएंगे भी या नहीं…

(धारावाहिक के अगले भाग में पढ़िये कि मास्टर काशीनाथ के इलाज के साथ-साथ डौक्टर सूर्यकांत ने पूनम के लिए ऐसा क्या प्लान किया कि उसे अपने जीवन में दु:ख के बादल छंटते नजर आने लगे)

प्यार करना है आसान पर निभाना मुश्किल!

प्यार एक ऐसा शब्द है, जिस में कुदरत की कोमल भावनाएं छिपी हैं. एकदूसरे की भावनाओं का एहसास कराता है प्यार. साहित्यकारों का मानना है कि प्यार किया नहीं जाता, हो जाता है. प्यार में कोई जोरजबरदस्ती नहीं चलती. प्यार में हिंसा के लिए कोई जगह नहीं. प्यार में मासूमियत होती है, छल का कहीं कोई नामोनिशान नहीं होता. इसलिए प्यार करना है तो दिल से कीजिए, पूरे विश्वास और समर्पण से कीजिए, क्योंकि विश्वास ही प्रेम की धुरी है. कोमल भावनाओं के साथ खिलवाड़ करने का अर्थ प्रेम को चूरचूर करना है.

प्यार करना आसान है, लेकिन उसे निभाना मुश्किल. अगर आप चाहते हैं कि आप का प्यार बना रहे, तो इस के लिए साथी को खुशी का एहसास कराएं, जिस से वह आप के और भी करीब आने को मजबूर हो जाए. फिर देखें कैसे आप का प्यार प्रेमसागर में गोते लगाता है. सीमा और अनुज की एक ही कंपनी में नईनई नौकरी लगी थी. दोनों काम के मामले में भी एकदूसरे का सहयोग करते थे. धीरेधीरे उन में गहरी दोस्ती हो गई. दोस्ती के साथसाथ दोनों की चाहत भी बढ़ने लगी, पर सीमा जहां प्यार को ले कर गंभीर थी, वहीं अनुज दोस्ती तक ही सीमित था. सीमा का एकतरफा प्यार उसे तनाव देने लगा. नतीजा, सीमा कंपनी के काम को ढंग से नहीं कर पाती थी. उस का अंधा प्यार उसे नाकामी की ओर धकेल रहा था. कहते हैं, प्यार अंधा होता है. जब आप किसी से प्यार करने लगते हैं, तो उस में इतना खो जाते हैं कि आप को उस के सिवा कुछ नहीं सूझता. आप किसी भी कीमत पर अपना प्यार खोना नहीं चाहते, लेकिन यदि आप चाहते हैं कि आप के साथी को भी आप के प्यार का एहसास हो, तो इस के लिए आप को अपने साथी को परखना होगा.

रश्मि और रजनीश एकदूसरे को दिलोजान से चाहते हैं. दोनों में काफी अच्छी मित्रता है. दोनों एकदूसरे को बेहद प्यार करते हैं. एकदूसरे पर मरमिटने का दंभ भरने वाला यह प्रेमी युगल आज सफल दंपती है. आज भी दोनों अपने प्यार को ले कर एकरस बने हुए हैं. अगर आप चाहते हैं कि आप का प्यार हमेशा बना रहे, तो यहां दिए टिप्स पर गौर फरमाइए:

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भावनाओं की कद्र करें

किसी भी रिश्ते को निभाने के लिए उस की भावनाओं की कद्र करना जरूरी है, क्योंकि कोमल भावनाएं प्यार को न केवल ज्यादा मजबूती देती हैं बल्कि संतुष्टि और खुशी भी देती हैं. अपने साथी को ठेस पहुंचाने वाली बात न कहें, तो अच्छा है. जो बातें आप के साथी को पसंद न हों उन्हें न करना ही उचित है. साथी की भावनाओं का सम्मान करें. उस के जज्बातों को समझें. वह आप को ले कर कितना गंभीर है, यह जानें. प्यार में गंभीरता का होना बहुत जरूरी है.

प्यार कब करें

वैसे तो प्यार के लिए कोई समय, मौसम नहीं होता, फिर भी आपसी तालमेल से चला जाए, तो प्यार के इजहार के लिए किसी दिन या समय की जरूरत नहीं पड़ती. यह कभी भी, किसी भी समय हो जाता है. आज के युवा तो प्यार के मामले में काफी बोल्ड हैं. वे प्यार में खुलापन चाहते हैं. प्यार कब किया जाए, इस की आवश्यकता वे नहीं समझते. यह सच है कि हमारी सोच में खुलापन आया है, पर फिर भी अगर सोच के साथसाथ एक सीमा में रह कर रोमांस किया जाए, तो इस के परिणाम सुखद ही रहते हैं. हमें इस तथ्य को भी नहीं नकारना चाहिए कि प्यार बिन इस जहां में कुछ मुमकिन नहीं है. प्यार का इजहार करने के साथ अपने साथी को इस बात का एहसास कराना भी बहुत जरूरी है कि वह ही आप की चाहत है. थोड़ेथोड़े समय बाद अपने साथी को यह भी जताते रहें कि वह ही आप के लिए दुनिया की सब से अनमोल वस्तु है. कभी मैसेज के जरिए तो कभी ग्रीटिंग कार्ड के जरिए उसे अपनी भावनाओं से अवगत कराते रहें.

ऐडजैस्टमैंट करें

प्यार में ऐडजैस्टमैंट की सख्त जरूरत होती है. किसी भी रिश्ते को ताउम्र बनाए रखने के लिए जहां आपसी तालमेल, सूझबूझ व विश्वास की जरूरत होती है, वहीं ऐडजैस्टमैंट भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है. एकदूसरे की छोटीबड़ी बातों में ऐडजैस्ट करें. अगर बौयफ्रैंड खुले विचारों का है तो उस पर गंभीर विचार वाला बनने के लिए दबाव न डालें.

प्यार को पहचानें

प्यार जिंदगी का खूबसूरत एहसास है. कब, कौन किसे पसंद आ जाए, कहा नहीं जा सकता. प्यार की राह में आगे बढ़ने से पहले साथी को पहचानना बहुत जरूरी है. आप का साथी ऐसा होना चाहिए जो जज्बातों के साथसाथ आप की कोमल भावनाओं की भी कद्र करे. यदि आप को अपने प्यार को पहचानना है तो उस के बारे में बारीकी से जांचपरख करें. आप का प्यार आप को तहेदिल से चाहता है कि नहीं, इसे अवश्य नोट करें. उसे एहसास दिलाएं कि  जरा सा भी बदलाव आप की नजरों से बच नहीं सकता. प्यार के मामले में साथी का उदार और स्पष्टवादी होना नितांत आवश्यक है. प्यार में साथी का निस्वार्थवादी होना प्यार को अटूट बनाता है. स्वार्थी प्रेमी का प्रेम में कोई स्थान नहीं होता.

गलती मानें

जब 2 युवा दिल प्यार में धड़कते हैं, तो उन से कहीं न कहीं गलती हो ही जाती है या यों कहें कि जब 2 लोग रिलेशनशिप में होते हैं, तो उन में प्यार के साथ तकरार का होना भी लाजिमी है. ऐसे में ईगो को आगे न आने दें. सही बात के लिए गलती स्वीकार लेना, आपसी उलझन को धैर्य से सुलझा लेना, रिश्तों में नई जान डाल देता है.

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सीरियल ‘बेहद-2’ से जेनिफर विंगेट की टीवी पर वापसी

टीवी अभिनेत्री जेनिफर विंगेट, कुशाल टंडन और अनेरी वजानी स्टारर सोनी टीवी के बहुचर्चित शो ‘बेहद’ छोटे पर्दे के मशहूर शो में से एक था. हालांकि यह शो अक्टूबर 2017 में औफ एयर कर दिया गया था, तब से दर्शक बेसब्री से इस शो के सीजन 2 का इंतजार कर रहे हैं.

खबरों के अनुसार पहले बताया गया था, ‘बेहद’ जल्द ही टीवी पर एक दूसरे सीज़न के साथ वापसी करेगा और जेनिफर विंगेट की भी ‘माया’ के रूप में वापसी की जाने उम्मीद है. ऐसी भी चर्चा थी कि सुरभि ज्योति जेनिफर की जगह ‘बेहद 2’ में ले सकती हैं. हालांकि, जेनिफर ने आखिरकार पुष्टि कर दी है कि वह बहुप्रतीक्षित शो में मुख्य भूमिका निभाएंगे.

‘बेहद 2’ में अपनी मौजूदगी की पुष्टि करते हुए, जेनिफर विंगेट ने सोशल मीडिया पर शो के निर्माता प्रतीक शर्मा के साथ एक तस्वीर पोस्ट की. इस पोस्ट में उन्होंने इस बारे में खुलासा किया कि वह शो के नए सीजन में नजर आने वाली हैं.

‘बेहद 2’ में ‘नामकरण’ के अभिनेता विराफ पटेल शो में जेनिफर विंगेट के साथ मुख्य भूमिका निभा सकते हैं. इसके अलावा, अनेरी वजानी भी इसका हिस्सा हो सकती हैं. हालांकि, जेनिफर के अपोजिट उनके सह-कलाकारों की आधिकारिक घोषणा अभी नहीं हुई है.

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कैसे बनें स्मार्ट ट्रैवलर

अगर  आप  यात्रा करने जा रहे हैं तो इन टिप्स को अपना कर पैकिंग करें. इन्हें अपनाने से आप का सारा जरूरी सामान ऐडजस्ट हो जाएगा.

–       बैल्ट्स को सूटकेस के घेरे के मुताबिक रखें. ऐसे रखने से ये रोल की तुलना में कम कम स्पेस लेते हैं.

–       आप अपने जूतों में छोटीछोटी चीजों को रख सकते हैं.

–       सफर में पजामे या शौर्ट्स आरामदायक होते हैं.  और आप का सामान भी थोड़ा हलका होगा.

–       अगर बाहर जाने के दौरान आप कपड़े धो सकते हैं, तो हर टाइप की बस 2 चीजें कैरी करें, जैसे 2 टी शर्ट्स, शौर्ट्स के 2 पेयर.

–       छोटी चीजों को सूटकेस के जिप कंपार्टमैंट में रख सकते हैं.

–       ज्यादा कपड़ों के लिए आप ‘इंटरवीविंग मेथड’ यूज करें. सूटकेस में पहले पैंट्स और लंबे ड्रैसेज रखें. फिर उन में जैकेट, शर्ट्स वगैरा रखें. कपड़ों की हर लेयर में टिशू पेपर रखने से रिंकल्स नहीं पड़ेंगे.

–       पासपोर्ट, बर्थ सर्टिफिकेट वगैरा को जिपलौक बैग में रखें. इस से सारे डौक्युमैंट्स एकजगह रहेंगे.

–       अगर यात्रा के दौरान आप अपने साथ लैपटौप, आईपौड, हेयरड्रायर, इलैक्ट्रिक रेजर वगैरा साथ ले रहे हैं, तो यूनिवर्सल अडौप्टर रखें.

–       चाबियां, सनग्लासेज, घड़ी वगैरा जींस या जैकेट की पौकेट में रख कर जगह बचा सकते हैं.

–       कौस्मैटिक्स ट्रैवल साइज में खरीदें.

–       मिक्स ऐंड मैच पैटर्न की ड्रैसेज रखें.

–       बैग पैक कर रहे हैं, तो हलकी चीजों को नीचे और भारी आइटम्स को ऊपर रखें. इस तरह सामान पूरा आ जाएगा और बैग उठाने में भारी भी नहीं लगेगा.

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नातिन को लेकर बोलीं आशा भोंसले, ‘घर आते ही मेरी दादी बन जाती है’

महान गायिका पद्मविभूषण आशा भोसले और उनकी नातिन जनाई भोसले एवं गीतकार रजिता कुलकर्णी के साथ उनके नए गीतों की घोषणा अंधेरी पश्चिम के प्रख्यात पंचम स्टूडियो में की गयी. आध्यात्मिक और मानवतावादी गुरु श्री श्री रविशंकर के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए इनकी रचना की गयी है. इस दौरान दो गानों की घोषणा की गयी, जिनमें से एक गाना आशा भोसले ने और दूसरा गाना जनाई ने गाया है.

श्री श्री रविशंकर को गानों के बारे में पता है ? यह प्रश्न पूछे जाने पर आशा भोसले ने कहा, “मैंने गुरुदेव से गानों के बारे में अभी तक बात नहीं की है, लेकिन मैं उनसे कई बार मिल चुकी हूं. उनके अन्य सभी अनुयायियों की तरह मैं भी उनकी प्रिय हूं. आशा भोसले ने दोनों गानों को संगीतबद्ध भी किया है.

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यह पहली बार नहीं है जहां जनाई भोसले ने अपनी दादी का गाने में साथ दिया है बल्कि इससे पहले भी कई देशों में उनके साथ कौन्सर्ट कर चुकी है. जनाई भोसले ने इस गाने के बारे में और अपनी दादी के प्रति प्यार व्यक्त करते हुए कहा, “यह गीत मेरे दिल के बहुत करीब है. हम देशभर में प्रोफेशनली परफौर्म करते हैं, लेकिन जब हम घर वापस आते हैं, तो मेरी वही दादी बन जाती है जो मेरे लिए मेरे पसंदीदा पकवान बनाती है… कुछ भी नहीं बदलता है”,  युवा प्रतिभावान गायिका ने भी श्री श्री रविशंकर के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हुए कहा कि मैं खुद को “सौभाग्यशाली” मानती हूं कि मुझे उनके लिए गाने का मौका मिला.

अध्यात्म के लिए उनके मिलते-जुलते विचार के अलावा, दादी-पोती की जोड़ी ने एक स्नेहपूर्ण बंधन को भी साझा किया हैं. “जनाई  मुझे बिल्कुल परेशान नहीं करती है. वो बहुत स्वादिष्ट खाना बनाती है और मुझे बहुत प्यार से खिलाती भी है. वह हमारी सभ्यता से बड़ी अच्छी तरह से वाकिफ है. हमारे पूरे परिवार को एक साथ बांधती है. सात साल की कोमल आयु से ही जनाई भारतीय शास्त्रीय नृत्य और शास्त्रीय संगीत का प्रशिक्षण लेती आयी हैं और अब वह पश्चिमी ओपेरा भी गाती है. अभी वास्तव में वो केवल १७ वर्ष की है और अपनी पढ़ाई के साथ संगीत प्रशिक्षण भी ले रही है. ”

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योगी मंत्रिमंडल: छवि बदलने में ‘ठाकुर’ दरकिनार

भारतीय जनता पार्टी बारबार यह दावा करती है कि वह जाति की राजनीति नहीं करती. इसके बाद भी उत्तर प्रदेश की योगी सरकार के मंत्रिमंडल के विस्तार में जाति का असर साफ देखा जा सकता है. मंत्रिमंडल विस्तार में 23 मंत्रियों को शपथ दिलाई गई. उनमें सबसे अधिक 6 मंत्री ब्राहमण समाज से लिये गये. भाजपा ने अपने सवर्ण वोट बैंक में दूसरा स्थान वैश्य वर्ग को दिया वैश्य बिरादरी से 3 को मंत्री बनाया गया. ठाकुर वर्ग से केवल 2 लोगों को मंत्रिमंडल में जगह दी गई. पिछड़ी जातियों में एक गंर्जर, एक पाल, दो कर्मी, दो जाट, एक राजभर, एक कश्यप और एक लोध के अलावा अनुसूचित जाति के 3 लोगों को मंत्रिमंडल में षामिल किया गया. मंत्रिमंडल विस्तार के साथ योगी मंत्रिमंडल की संख्या बढ़कर 56 हो गई है.

56 मंत्रियों में सवर्ण वर्ग से 27 मंत्रियों में सबसे अधिक ब्राहमण वर्ग से है. इसके अलावा 21 मंत्री पिछडे वर्ग से और 7 अनुसूचित जाति से है. मुख्यमंत्री ठाकुर बिरादरी से है. जातिय संतुलन के लिये ब्राहमण वर्ग और पिछड़ा वर्ग से एकएक उप मुख्यमंत्री है. 2017 में सरकार बनाने के बाद मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठने के बाद योगी आदित्यनाथ पर ठाकुर बिरादरी के संरक्षण देने के आरोप तेजी से मुखर हुये. प्रशासनिक स्तर से लेकर शुरू हुआ यह प्रचार इतना तेजी से आगे बढा कि मंत्रिमंडल विस्तार में ठाकुर बिरादरी को दरकिनार कर केवल 2 लोगों को मंत्रिमंडल में शामिल किया.

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अगर देखा जाए तो खुद योगी आदित्यनाथ को ठाकुर बिरादरी से होने के कारण मुख्यमंत्री नहीं बनाया गया. योगी आदित्यनाथ को उनकी कट्टर हिन्दुत्व वाली छवि के कारण मुख्यमंत्री बनाया गया. जिससे भाजपा धर्म की राजनीति को हवा दे सके. मुख्यमंत्री बनने के बाद उनके खिलाफ जाति का अस्त्र प्रयोग होने लगा. ज्यादातर प्रदेशवासियों को इसके बाद ही पता चला कि योगी आदित्यनाथ ठाकुर जाति के है. जाति के दुष्प्रचार से दबाव में आये मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंत्रिमंडल विस्तार के जरीये अपनी छवि बदलने की कोशिश की है. 2019 के लोकसभा चुनाव जीतने के बाद भारतीय जनता पार्टी ने आत्मविश्वास के साथ काम करने की बात जरूर करती है पर वह जाति के गणित को छोड़ना नहीं चाहती है.

इस जातिय गणित की सबसे बड़ी वजह उत्तर प्रदेश में विधानसभा की 13 सीटों पर उपचुनाव होने वाले है. भाजपा इन सभी सीटों को जीतना चाहती है. इस वजह से उसने जातिय समीकरण में पिछड़ा वर्ग की विभिन्न जातियों और दलितों को सबसे अधिक महत्व दिया है. यह बात और है कि पिछड़ी जातियों की संख्या भले ही ज्यादा दिख रही हो पर उनको महत्वपूर्ण पदों पर नहीं रखा गया है.

यही नहीं भाजपा ने अपनी सहयोगी अपना दल को भी दरकिनार कर दिया है. 2014 के केन्द्रीय सरकार के मंत्रिमंडल में अपना दल की अनुप्रिया पटेल को शामिल किया गया था. 2019 के लोकसभा चुनाव में जीत के बाद भी उनको मंत्रिमंडल में जगह नहीं दी गई. समझा जा रहा था कि उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार में अपना दल के आशीश सिंह को जगह दी जा सकती है पर उनको मंत्रिमंडल में शामिल ना करके यह जता दिया गया कि अपना दल के साथ की भाजपा को दरकार नहीं रह गई है.

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होना चाहते हैं सफल तो आज ही अपनाएं ये टिप्स

भागदौड़ भरी जिंदगी मे हर कोई सफलता के पीछे भाग रहा है. सभी यह सोचते हैं कि हमें जल्दी से जल्दी सफलता हासिल हो, चाहे उसके लिये कितना भी शार्ट कट अपनाना पड़े. लेकिन हमें हमेशा सफलता की मिठास उसी में सुकून भरी मिलती है. जब हम सच्चाई से अपना मुकाम हासिल करते हैं. सफलता पाने के लिये जरूरी है कि हमारे अंदर ये गुण अवश्य हों.

लक्ष्य : अपना एक लक्ष्य तैयार करें और उसे पाने को ही अपनी जिंदगी का महत्व बना लें. अपना लक्ष्य तय करने के  लिये रोजाना खुद को  प्रेरित करें. आप कल्पना करें कि आप मे अपने लक्ष्य को पाने की जन्मजात योग्यता है. फिर देखिये आप अपने लक्ष्य को पाने मे कितनी जल्दी  सफल होते हैं. एक सफल व्यक्ति अपने लक्ष्य से मिलने वाले अच्छे परिणाम के लिये सोचता है और एक असफल व्यक्ति उसमे  लगने  वाले वक्त के बारे में.

वर्तमान को सुधारो तो भविष्य होगा सुन्दर

हमें यही सिखाया जाता है कि हमें अपने आने वाले कल की चिंता करनी चाहिये. यह बात सही भी है, लेकिन अगर हम अपने वर्तमान को तवज्जो नहीं देंगे तो हम अपना भविष्य भी नहीं सुधार सकते .अतः हमें  अपने वर्तमान मे ही निश्चय कर लेना चाहिये की हमें करना क्या है तभी सफलता हमारे कदम चूमेगी.

नकारात्मक नहीं सकारात्मक रहें

सदैव अपने अंदर सकारात्मक ऊर्जा को उतपन्न करें नकारात्मक ऊर्जा को कतई अपने पास भी न भटकने दें. अपने ऐसे दोस्तों से बातचीत करे जो आपको प्यार करते हों और आपके अंदर सकारात्मक सोच की उतपप्ति करने मे आपकी मद्दद कर सकें. आप ऐसा करते है तो आपको सफल होने से कोई नहीं रोक सकता.

आसाधरण बने

आसाधरण व्यक्ति कुछ न कुछ ऐसा काम कर गुजरता है जिस कारण दुनिया उसे याद रखती है जब भी कुछ करना चाहे दुसरो से हट कर सोचे  और हमेशा याद रखे  की हमें दूसरे के काम से इर्षा नहीं होनी चाहिये बल्कि उसके काम की खूबियां देख कर उससे भी बहतर करने की इच्छा होनी चाहिये.सफल बनने के लिये बहुत मेहनत करनी पड़ती है अपनी क्षमता से अधिक करने को माद्दा रहे. कुछ करने की चाह आपको आपकी मंज़िल तक पहुंचा कर ही रहती है

असफलताओं से ले सिख

हमें अपने लक्ष्य को पाने मे  जितनी भी असफलताए  मिले उनसे डर कर भागना नहीं चाहिये बल्कि उनसे सिख लेनी चाहिये और आगे बढ़ते वक़्त सावधानी बरतनी चाहिये की हमारे सामने वो असफलता रोड़ा बन कर न खड़ी हों .

आज ही शुरू करे :

आप जो भी कुछ करना चाहते हैं वो आज ही करें. कल के ऊपर न टाले क्योंकि हो सकता है कि आप से भी अच्छा आईडिया लेकर कोई और सामने खड़ा हो जाये. इसीलिये हर काम मे फर्स्ट आने की सोचे  और पूरी लगन से अपने लक्ष्य को हासिल करे .

संघर्ष से न डरें

हम कुछ करने की चाह रखते है तो उस काम मे आने वाली बाधाओं से कतई न डरे बल्किउसका डट कर सामना करे अगर आपने संघर्ष पर विजय पा ली तो आपकी सफलता पर भी जीत पक्की होगी.

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इस गांव में आने के लिए पुलिस से लेनी पड़ती है इजाजत

भारत गांवों का देश है और यहां  ऐसे कई गांव है जो अपनी किसी न किसी खूबी के लिए जाने जाते हैं. तो आइए आज आपको एक ऐसे गांव के बारे में बताते हैं, जहां जाने के लिए पुलिस की इजाजत लेनी पड़ती है. इसके लिए पुलिस ने गांव के बाहर ही एक नोटिस बोर्ड लगा दिया है.

इस गांव में आने वाले हर व्यक्ति को पुलिस सचेत करती है और किसी को भी इस गांव में जाने की अनुमति नहीं है. अगर कोई जाना भी चाहता है तो सबसे पहले उसको पुलिस की इजाजत लेनी होती है.

आपको बता दें, यह गांव उत्तर प्रदेश के मथुरा में स्थित है. इस गांव का नाम “हाथिया” है. यहां पर पुलिस ने चेतावनी देते हुए बोर्ड पर लिखवा रखा है कि अगर कोई भी सस्ती सोने की ईट खरीदने स सस्ता लोहा का स्क्रैप खरीदने सस्ते आरओ प्लांट, लिफ्ट, सीसीटीवी, जनरेटर और जमीन खरीदने हाथिया गांव जा रहे हों तो सावधान हो जाएं, क्योंकि आपके साथ धोखाधड़ी हो सकती है. मथुरा पुलिस के मुताबिक ये ठगों का गांव है.

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ये 7 टिप्स बनाएंगे स्किन को चमकदार

त्वचा की देखभाल के उपाय हम हर मौसम में तलाशते हैं. जबकि मौसम के अलावा अगर हम बेसिक तरीके से त्वचा की देखभाल के लिए हम ये जान लें की हमें अपनी स्किन के लिए क्या करना और क्या नहीं करना चाहिए तो हम पा सकेंगे मखमली त्वचा. वो कैसे ? आइये जानें.

त्वचा की खूबसूरती को बनाए रखने के लिए महिलाएं क्या-क्या नहीं करती . महंगे प्रौडक्ट्स खरीदते हैं, घरेलू उपाय अपनाते हैं और डायट का भी खास ख्याल रखती हैं. पर वो ये भूल जाती हैं कि त्वचा के प्रति की गई कुछ गलतियां इस पूरी मेहनत पर पानी फेर सकती हैं. ब्यूटी एक्सपर्ट मेहरीन बता रहीं हैं स्किन केयर के 7 डूज एंड डोनट्स ताकि आपकी स्किन रहे हमेशा जवां.

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  1. बहुत सारा पानी पियें: आपकी त्वचा आपके शरीर का सबसे हैं और सबसे बड़ा हिस्सा है जो आपके पुरे शरीर को ढ़ककर रखता है. इसका मतलब यह है कि अगर आपका शरीर डिहाइड्रेटेड होगा तो आपकी त्वचा भी डिहाइड्रेटेड रहेगी. इसीलिए हर व्यक्ति के लिए यह बहुत ज़रूरी होता है की वो रोज़ कम से कम 8 गिलास पानी पियें. इससे आपकी त्वचा बहुत स्वस्थ रहेगी और और आपके शरीर में से सारे टॉक्सिक पदार्थ भी निकल जायेंगे.
  2. चेहरे को बार बार टच ना करें: यह करना थोड़ा कठिन होता है और खासकर तब जब आपके चेहरे पर धब्बे हो. यह सुनने में बहुत डरावना लगता है लेकिन यह सच है की आप जितना ज़्यादा अपने चेहरे को छुयेंगे उतना ही ज़्यादा यह परेशानी बढ़ेगी. आपके चेहरे पर धब्बे फुंसियाँ तब भी होती है जब आपके हाथ साफ नहीं होते और उनपर लगे बैक्टीरिया से चेहरा और भी खराब हो जाता है. यह बैक्टीरिया धब्बों को और भी बढ़ा देता है. आप जितना मुमकिन हो सके उतना अपने चेहरे पर से अपने हाथों को दूर रखें.
  3. चेहरे को एक्सफोलिएट करें: अगर आप बहुत सुंदर और चमकदार त्वचा चाहते हैं तो आपको अपनी त्वचा को ज़रूर एक्सफोलिएट करना चाहिये. यह आपकी त्वचा पर से सभी डेड सेल्स को हटा देगा और आपके सभी पोर्स को काले और सफेद मुहासों से भी मुक्त कर देगा. चाहे आपकी त्वचा कैसी भी हो हफ्ते में एक बार अपनी त्वचा को एक्सफोलिएट करने से आपको बहुत फर्क नज़र आने लगेगा. लेकिन कभी एक्सफोलिएटर का इस्तेमाल ना करें क्योकि यह बहुत रुखा होता है और इससे आपकी त्वचा भी रूखी पड़ जाएगी और आपको बहुत जलन भी महसूस होगी.

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4. गर्म पानी से ना नहायें : हालांकि गर्म पानी के शावर हमे बहुत बहुत रिलैक्स करता है लेकिन यह हमारी त्वचा के लिए उतना अच्छा नहीं होता. यह ना केवल आपकी त्वचा में से प्राकृतिक मॉइस्चर के संतुलन को तो बिगाड़ता ही है साथ ही यह त्वचा में से सारे प्राकृतिक ऑयल्स और प्रोटीन्स को भी खत्म करता है तो हमारी त्वचा के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है. इससे आपकी त्वचा लाल, रूखी पड़ जाएगी, आपको बहुत खुजली और जलन भी होने लगेगी. अगर आप अपनी त्वचा को बचाना चाहते हैं तो आपको हलकर गर्म पानी से ही शावर लेना चाहिय और दिन में से दो बार से ज़्यादा शावर ना लें.

5. स्वस्थ खाना खायें: अच्छी त्वचा की शुरुआत सबसे पहले पहले आपके खाने से ही होती है. अगर आपको जंक फ़ूड खाना पसंद है, शराब पीना, धूम्रपान करना भी बहुत पसंद है तो अच्छी त्वचा पाने का आपका सपना कभी पूरा नहीं हो सकता और यह सपना एक सपना ही बनकर रह जायेगा. ऐसा इसलिए होता है क्योकि इस तरह की चीज़ें खाने पीने से हमारी त्वचा हमेशा डिहाइड्रेटेड रहती है जिससे हमे जलन महसूस होती है, त्वचा पर धब्बे और दाने हो जाते हैं और कोल्लेगन का भी खत्म होने लगता है. तो आपको ऐसा खाना चाहिय जिसमे बहुत से एंटीऑक्सीडेंट्स, विटामिन ऐ, सी, ई और बेटा कैरोटिन हो.

6. सनस्क्रीन लगायें: एसपीएफ का इस्तेमाल करना आपके लिए कभी ऑप्शन नहीं बल्कि ज़रूरी होना चाहिए, खासकर सर्दियों में. सनस्क्रीन आपको युवीऐ और यूवीबी किरणों के असर से आपको बचाकर रखता है. इसके इस्तेमाल से आपकी त्वचा पर समय से पहले एजिंग और झुर्रियाँ नहीं पड़ती और कैंसर का भी खतरा कम होता है. अगर आप अपनी त्वचा पर होने वाले खतरे को कम करना चाहते हैं तो आपको ज़्यादा से ज़्यादा प्राकृतिक उत्पादों का इस्तेमाल करना चाहिए. सनस्क्रीन के लिए आपको या तो ऐसा कोई मॉइस्चराइज़र चुनना चाहिय जिसमे एसपीएफ हो या अपनी पसंद की मॉइस्चराइज़िंग क्रीम में आपको एसपीएफ मिलाना चाहिय.

7. 7-8 घंटों तक सोयें: अब वैज्ञानिकों द्वारा भी यह साबित किया जा चुका है कि हमारे स्वास्थ के लिए अच्छी नींद बहुत ज़रूरी होती है. आपके शरीर में हर एक एक सेल और आपके स्किन सेल्स के लिए भी नींद बहुत ज़रूरी होती है. रात का समय हमारे फ्रेश और स्वस्थ सेल्स त्वचा के ऊपर आकर हमारी त्वचा पर किसी भी तरह की क्षति को ठीक करते हैं. लेकिन अगर हमे पूरी नींद ना मिले तो हमारी त्वचा अच्छे से ठीक नहीं हो पाती और तभी हमे त्वचा संबंधित समस्यायें नज़र आने लगती हैं. तो आपको अपनी नींद के साथ कभी समझौता नहीं करना चाहिए.

आपको जल्द से जल्द यह डूज एंड डोनट्स फौलो करने चाहिए और अपनी त्वचा में वह सभी बदलाव महसूस करने चाहिए जिन्हे आप हमेशा देखना चाहते थे.

हेपेटाइटिस बचाव ही इलाज

23 वर्षीया रीना एक न्यायालय में कार्यरत है. उस की शादी पिछले वर्ष हुई थी. शादी के 2 महीने बाद रीना को पता चला कि उस का पति हेपेटाइटिस बी से संक्रमित है. इस धोखे और विश्वासघात ने रीना को अंदर तक तोड़ दिया. रीना के परिवार को यह डर है कि कहीं ऐसा न हो कि वह भी हेपेटाइटिस से संक्रमित हो जाए. अब रीना अपने पति से अलग होना चाहती है. उस का कहना है कि यदि उसे शादी से पहले ही इस बारे में बता दिया गया होता तो शायद वह वैक्सिनेशन लेती और सही प्रोटैक्शन का इस्तेमाल करती. उस का पति अब कुछ भी कहने की स्थिति में नहीं है.

मिनी 25 वर्ष की है. वह चेन्नई से नर्सिंग की पढ़ाई कर चुकी है. कुछ दिनों पहले मिनी को दिल्ली के एक कौर्पोरेट अस्पताल में नर्स की नौकरी के लिए बुलाया गया. मिनी आर्थिक रूप से पिछड़े परिवार से है जो नर्स बनने की राह में उस की सब से बड़ी चुनौती थी. अस्पताल में अपौइंटमैंट से पहले मिनी को हैल्थ चैकअप कराना अनिवार्य था. मिनी की हैल्थ रिपोर्ट में वह हेपेटाइटिस बी वायरस पौजिटिव निकली. जब यह रिपोर्ट अस्पताल के एचआर डिपार्टमैंट में पहुंची तो उस ने मिनी की जौब अपौइंटमैंट को बिना किसी स्पष्ट कारण के होल्ड पर रख दिया.

मिनी बताती है, ‘‘अचानक से ही मैं नौकरी के लिए बेकार हो गई. जो भी मैं ने अब तक सीखा था उस का कोई मतलब नहीं रह गया, केवल इसलिए कि मुझे हेपेटाइटिस है. कई रातों तक मैं बस यही सोचती रही कि आखिर मुझे यह बीमारी क्यों हुई. मुझे पेट में कई बार दर्द रहता था. पर मैं ने गौर नहीं किया. उस का नतीजा मुझे अब दिख रहा है. मेरे मैडिकल प्रोफैशन में होने के बावजूद जब अस्पताल मेरे साथ ऐसा रवैया अपना रहा है तो उन आम लोगों को किन परेशानियों से गुजरना पड़ता होगा जो मेरी ही तरह हेपेटाइटिस से पीडि़त हैं.’’

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दरअसल, हेपेटाइटिस का संक्रमण शरीर के सब से जरूरी हिस्से यानी लिवर को पूरी तरह से डैमेज कर देता है. एचआईवी के खतरे के ही समान हेपेटाइटिस वायरस लगातार लोगों को अपनी चपेट में ले

रहा है. वर्ल्ड हैल्थ और्गेनाइजेशन अर्थात डब्लूएचओ के अनुसार, केवल भारत में ही 4 करोड़ लोगों की मौत हेपेटाइटिस बी से होती है और तकरीबन 1.2 करोड़ लोग हेपेटाइटिस सी से पीडि़त हैं. यह गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या है.

हेपेटाइटिस ए, बी, सी, डी और ई वायरस हेपेटाइटिस के प्रकार हैं. इन में हेपेटाइटिस ए वायरस और हेपेटाइटिस बी वायरस प्रमुख हैं. हेपेटाइटिस का बढ़ता संक्रमण और लोगों के बीच जागरूकता की कमी एक चेतावनी है कि इस को रोकने के लिए विशेष कदम उठाए जाएं. लोगों को हेपेटाइटिस से संक्रमित होने का पता किसी अन्य टैस्ट के कारण चलता है और तब तक यह व्यक्ति के शरीर में हमेशा के लिए घर कर जाता है.

आईएलबीएस यानी इंस्टिट्यूट औफ लिवर ऐंड बाइलेरी साइंसेज के डायरैक्टर डा. (प्रो.) एस के सरीन बताते हैं, ‘‘हेपेटाइटिस से मुकाबला करना इसलिए कठिन होता है क्योंकि हेपेटाइटिस बी और सी दोनों ही क्रौनिक संक्रमण हैं और अकसर ये मरीज के शरीर में वर्षों तक दबे रहते हैं और लिवर को डैमेज करते रहते हैं. इन क्रौनिक संक्रमणों का सब से आम परिणाम जो सामने आता है, वह है लिवर सिरोसिस यानी लिवर कैंसर.

‘‘समस्याएं एक नहीं बल्कि कई स्तरों पर हैं. सब से बड़ी बात है कि संक्रमित लोगों को इस बीमारी के बारे में पता ही नहीं है. सिर्फ हाई रिस्क श्रेणी में आने वाले लोगों की बचाव संबंधी स्क्रीनिंग से ही समय पर इलाज संभव है, जैसे कि ब्लड ट्रांसफ्यूजन और डायलिसिस करवाने वाले लोगों के मामले में.

‘‘दूसरी बड़ी दिक्कत यह है कि इस बीमारी को ले कर भ्रांतियां और भेदभाव बहुत हैं. पीडि़त लोगों के साथ समाज ठीक से व्यवहार नहीं करता और उन्हें अलगथलग कर दिया जाता है.

‘‘हेपेटाइटिस के इलाज में आने वाली सब से बड़ी चुनौती हेपेटाइटिस बी व सी से संक्रमित लोगों की पहचान करना है. हम कह तो देते हैं कि देश में 5 करोड़ लोग इस से संक्रमित हैं, पर वे हैं कहां? इसलिए हाई रिस्क लोगों की पहचान जरूरी है. यदि परिवार में किसी को हेपेटाइटिस बी है तो दूसरे भाईबहन को संक्रमण होने का खतरा 5 से 7 गुना अधिक होगा.

‘‘आईएलबीएस ने हेपेटाइटिस के प्रति जागरूकता लाने के लिए एम्पैथी कौन्क्लेव यानी एम्पौवरिंग पीपल अगेंस्ट हेपेटाइटिस अभियान की शुरुआत की है. इस अभियान का पूरा फोकस हेपेटाइटिस बी और सी के बारे में समाज में जागरूकता लाने पर है. इस अभियान में विशेषज्ञों ने बताया कि इसे जनआंदोलन बनाना होगा. यह पब्लिक हैल्थ समस्या है. यह बीमारी कम, कलंक ज्यादा है. चिंता की बात यह है कि पूरी दुनिया में एचआईवी से ज्यादा मौतें हेपेटाइटिस से होती हैं.’’

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हेपेटाइटिस वायरस से संक्रमण

हेपेटाइटिस बी और सी को केवल भारत में ही नहीं, बल्कि विश्वभर में जानलेवा बीमारी के रूप में देखा जा रहा है. वायरल हेपेटाइटिस से होने वाली अधिकतर मौतों के लिए हेपेटाइटिस बी और सी का संक्रमण जिम्मेदार होता है जिसे साइलैंट किलर कहते हैं. हेपेटाइटिस बी और सी के संक्रमण में कई बार वर्षों तक कोई लक्षण सामने नहीं आते और धीरेधीरे यह लिवर को डैमेज कर देता है. इन दोनों के चलते लाखों लोग मृत्यु के मुंह में जा चुके हैं. हेपेटाइटिस ए और ई अधिकतर अस्वच्छ या दूषित भोजन व जल के सेवन से होता है. हेपेटाइटिस बी, सी और डी संक्रमित व्यक्ति व उस के रक्त या अन्य शरीर द्रवों के संपर्क में आने से होता है.

हेपेटाइटिस संक्रमण के पीछे मुख्य कारण दूषित या संक्रमित रक्त के संपर्क में आना, ठीक तरीके से न किए जाने वाले मैडिकल प्रोसीजर, असुरक्षित सैक्स और इन्फैक्टेड सीरिंज के संपर्क में आना है. हेपेटाइटिस बी मां से बच्चे को भी होता है, इसलिए यदि किसी व्यक्ति के शरीर में हेपेटाइटिस बी वायरस की उपस्थिति का पता चलता है तो इस का मतलब है कि उस के शरीर में यह वायरस जन्मजात है.

हेपेटाइटिस का तीव्र संक्रमण सीमित या बिना लक्षणों के हो सकता है. इसलिए संक्रमण के शुरुआती दिनों में इस का पता लगाना मुश्किल होता है. इस के कुछ लक्षण पीलिया होना, पेशाब का गहरा रंग, जी मिचलाना, उलटी और पेट में दर्द होना हैं.

हेपेटाइटिस से पीडि़त व्यक्ति का जीवन इस बीमारी से अधिक इस बीमारी के पता चलने के बाद बदल जाता है. इस बीमारी का लोगों के जीवन पर इतना असर होता है कि मरीज हेपेटाइटिस के साथसाथ आत्मग्लानि, डिप्रैशन, भय, स्वाभिमान में कमी और तटस्थता से घिर जाते हैं. खुद को लोगों की नजरों से बचाने के लिए वे इस बीमारी को छिपाते हैं जिस से अनजाने में अन्य लोग भी हेपेटाइटिस वायरस से संक्रमित हो इस की चपेट में आ जाते हैं.

जागरूकता जरूरी

पीडि़तों का सामने आना बेहद जरूरी है. अपनी बीमारी छिपाने के चलते आत्मग्लानि से घिर जाना उन की तकलीफ को केवल बढ़ाता ही है, कम नहीं करता. टीबी, पोलियो और एचआईवी से जितनी मौतें होती हैं उस से कहीं ज्यादा मौतें हेपेटाइटिस से होती हैं. फिर भी लोग इस के प्रति जागरूक नहीं हैं. यदि पोलियो का नामोनिशान भारत से मिट सकता है तो हेपेटाइटिस भी खत्म किया जा सकता है. जरूरत है तो सिर्फ सामने आने की.

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