ये स्क्रीन शौट एक व्हाट्स एप पोस्ट के हैं जो नरेंद्र मोदी के दोबारा प्रधानमंत्री बनने के बाद तेजी से वायरल हुई थी और अभी भी हर कभी होती रहती है. इसमें जो कहा गया है उसकी मंशा एकदम साफ है कि मुसलमान अगर इसी रफ्तार से अपनी आबादी बढ़ाते गए तो एक दिन फिर से देश में मुगलों की हुकूमत कायम हो जाएगी और हिंदुओं का नामोनिशान मिट जाएगा. इसलिए जनसंख्या नियंत्रण कानून बनना चाहिए.

यही बात बेहद सधे हुये और आभिजात्य ढंग से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लालकिले से अपने भाषण में बिना मुसलमानों का नाम लिए कही कि जनसंख्या विस्फोट से बचने लोग 2 से कम बच्चे पैदा करें और बच्चे को दुनिया में लाने से पहले देख लें कि वे उसकी परवरिश बगैरह के लिए तैयार हैं या नहीं. भाजपा की नजर में देश भक्त वही है जो 2 से कम बच्चे पैदा करे. यानि जो 2 से ज्यादा बच्चे पैदा करते हैं वे देशद्रोही और गद्दार हैं.

जानते सब हैं और समझ भी सभी रहे हैं कि 3 तलाक कानून खत्म करने और जम्मू कश्मीर से  धारा 370 हटाने के बाद भाजपा का यह तीसरा बड़ा मुस्लिम और इस्लाम विरोधी कदम है जो जल्द ही कानून की शक्ल में सामने आए तो बात कतई हैरानी की नहीं होगी. सीधे कोई यह मानने तैयार नहीं होगा कि उक्त पोस्ट भगवा एजेंडे की अगली तैयारी है. कहा यही जा रहा है कि भाजपा तो देश के भले की बात कर रही हैं इसमें भी मुसलमानों का विरोध ढूंढना पूर्वाग्रह वाली बात है.

ये है वो स्क्रीनशौट जो वायरल हो रहा है….

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जबकि हकीकत में पूर्वाग्रह वाली बात तो यह होगी कि ऐसी पोस्टों को मुसलमान और इस्लाम विरोधी न माना जाये. सीधे सीधे भाजपा मुसलमानों को धौंस दे दी है कि वे मजहब और अल्लाह की नियामत के नाम पर 2 से ज्यादा बच्चे पैदा करना बंद करें नहीं तो सरकार इसके लिए भी कानून लाने से हिचकेगी नहीं क्योंकि भाजपा को 303 सीटें कबड्डी खेलने नहीं मतदाता ने दी हैं.

हर कोई जानता है कि आमतौर पर मुसलमान परिवार नियोजन नहीं अपनाते हैं लेकिन हिन्दू अपनाते हैं. हालत तो यह है कि नए हिन्दू कपल 2 तो क्या एक बच्चा पैदा करने से पहले भी हजार बार सोचते हैं और महानगरों के हिन्दू कपल तो इस एक में भी यकीन नहीं करते.

यह हिंदूवादी संगठनों की बड़ी चिंताओं में से एक है इसलिए वे हर कभी हिंदुओं से ज्यादा से ज्यादा बच्चे पैदा करने कहा करते हैं. उलट इसके इस्लामिक संगठन कभी मुसलमानों से यह नहीं कहते कि कम बच्चे पैदा करो. मुसलमानों की बढ़ती आबादी को एक बड़े खतरे के रूप में दिखा कर डराया जाता है. उक्त पोस्ट को बारीकी से पढ़ने के बाद इस मसले पर ज्यादा सोचने समझने की जरूरत नहीं रह जाती.

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यह सच है कि अब सौ में से छह हिन्दू दंपत्ति भी ऐसे नहीं मिलेगे जो 2 से ज्यादा बच्चे पैदा कर रहे हों. इतना ही सच यह भी है कि सौ में से छह मुस्लिम दंपत्ति भी ऐसे नहीं मिलेगे जो 2 से कम बच्चे पैदा कर रहे हों. यानि आनुपातिक रूप से मुसलमानों की आबादी बढ़ रही है और हिंदुओं की घट रही है. लाख टके का सवाल यह कि क्या देश हित के नाम पर मुसलमानों से या किसी और से कानून बनाकर यह हक छीना जाना चाहिए.

इस बाबत चीन का उदाहरण दिया जाता है कि वहां ज्यादा बच्चे पैदा करना कानूनन जुर्म है लेकिन यह दलील देने बाले शायद ही यह बता पाएं कि क्या चीन में भारत के मुक़ाबले रत्ती भर भी धार्मिक उन्माद या कट्टरवाद है. वहां तो 50 फीसदी से भी ज्यादा लोग अपना धर्म नास्तिक बताने लगे हैं. वहां के शासकों को कभी यह इशारा करने की जरूरत महसूस नहीं हुई कि वे किसी धर्म या समुदाय विशेष को निशाने पर लेते कम बच्चे पैदा करने की बात करें या कहें.

भाजपा की यह खूबी है कि वह पहले मीडिया और सोशल मीडिया के जरिये अपनी मंशा के मुताबिक माहौल बनाती और बनवाती है और फिर भले और देश हित की दुहाई देते बहुमत यानि हिंदुओं को खुश करने के लिए कानून ले आती है. 3 तलाक के मुद्दे पर मुस्लिम महिलाओं और बहनों के भले की बात की गई तो 370 पर आतंकवाद खत्म करने और देश की अखंडता का राग अलापा गया. यह जनसंघ का नारा था कि कौन करेगा देश अखंड–जनसंघ जनसंघ.

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ऐसी वायरल होती पोस्टों में कहीं बढ़ती बेरोजगारी और विकराल होती महंगाई का जिक्र नहीं  होता उल्टे यह जताने की कोशिश की जाती है कि ये फसाद बढ़ती आबादी की वजह से हैं. सरकार, उत्पादन और रोजगार के मौके बढ़ाने क्या कुछ कर रही है इस पर भाजपा कुछ नहीं गिना पाती तो मंशा साफ है कि उसके न्यू इंडिया का मतलब हिन्दू राष्ट्र निर्माण यानि  मुसलमानों की आबादी रोकना है और इसके लिए भी उसने माहौल बनाना शुरू कर दिया है.

देशी विदेशी मीडिया यह जानने बेहद उत्सुक था कि 3 तलाक और 370 के बाद मोदी सरकार की प्राथमिकता क्या होगी. अधिकांश का अंदाजा था कि अब राम मंदिर निर्माण की बारी है, लेकिन भाजपा ने नया शिगूफ़ा छेड़ और छोड़ दिया है कि 2 से ज्यादा बच्चे पैदा करने वाले देश भक्त नहीं हैं. देश भक्ति का यह नया पैमाना उन गद्दारों के लिए है जो दो से ज्यादा बच्चे पैदा करते हैं. यानि अधिकतर बहुसंख्यक हिन्दू देश भक्त हैं और अधिकतर अल्पसंख्यक मुसलमान देश भक्त नहीं हैं.

फिर आएगी आरक्षण की बारी

देश भक्ति के नए मापदण्डों का सर्टिफिकेट पाकर हिन्दू हमेशा की तरह भाजपा से खुश हैं और मानने लगे हैं कि जनसंख्या नियंत्रण कानून बनना चाहिए. भाजपा के लिए अब कोई भी कानून बनाना मुश्किल काम नहीं रह गया है. वह राष्ट्र हित के नाम पर कुछ भी कर गुजरने का माद्दा रखती हैं शेर और शंकर कहे जाने वाले नरेंद्र मोदी तो उसका प्यादा भर हैं.

अब कभी भी यह सुनने हर किसी को तैयार रहना चाहिए कि जातिगत आरक्षण रिजर्व कोटे के लोगों का बड़ा दुश्मन है जिसके चलते उनकी काबिलियत पर अंगुली उठाई जाती है उन्हें मारा पीटा और प्रताड़ित किया जाता है. हमारे दलित भाई किसी से उन्नीस नहीं हैं वे बिना आरक्षण के भी अपनी योग्यता साबित कर सकते हैं इसलिए उनके हित में आरक्षण खत्म किया जा रहा है. (उसकी अहमियत तो खत्म की ही जा रही है)

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सवर्ण इस पहल का भी स्वागत करेंगे क्योंकि वे भी नहीं चाहते कि नाकाबिलियत के चलते उनके दलित भाई बेइज्जत हों बल्कि वे तो चाहते हैं कि दलित प्रतिस्पर्धा में बराबरी से आकर खुद को साबित करें. रही बात धर्म की तो दलित प्रताड्ना का उससे कोई लेना देना नहीं. धर्म एक अलग विषय है और सभी को बराबरी की नजर से देखता है इसलिए सवर्णों से भेदभाव करता और मौके छीनता संवैधानिक आरक्षण खत्म होना चाहिए. दलितों में अगर प्रतिभा होगी तो वे डौक्टर, इंजीनियर और कलेक्टर वगैरह बन ही जाएंगे.

जिस तरह आबादी और देश भक्ति को एक तराजू पर तौलते हाट लूटी जा रही है वैसे ही  आरक्षण के मुद्दे पर भी वाहवाही बटोरी जा सकती हैं और संभव है कुछ मुसलमानों की तरह कुछ दलित भी उनकी हां में हां मिलाते नजर आयें क्योंकि भगवान न तो कभी झूठ बोलता और न ही मानव मात्र में भेदभाव करता. रही बात लोकतन्त्र और तानाशाही में फर्क की तो मान लेने में हर्ज नहीं कि वे भी मानसिक अवस्थाएं हैं.

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