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रितिक रोशन क्यों ठुकरा रहे हैं फिल्म

बौलीवुड में कलाकार की सफलता उसकी फिल्म के बौक्स आफिस की सफलता पर ही निर्भर करती है. इसी के चलते अपनी फिल्म के सफल होते ही कलाकार धड़ाधड़ कई फिल्में अपनी झोली में डाल लेने के लिए आतुर नजर आता है. मगर पटना (बिहार) के गणितज्ञ आनंद कुमार की बायोपिक फिल्म ‘‘सुपर 30’’ को बौक्स आफिस पर मिली सफलता के बाद रितिक रोशन जिस तरह फिल्में हथियाने की बजाय फिल्में ठुकराते जा रहे हैं, उससे बौलीवुड से जुड़े लोगों की समझ में नहीं आ रहा है कि रितिक रोशन के दिमाग में चल क्या रहा है.

सूत्रों के अनुसार फिल्म‘‘सुपर 30’’ को बौक्स आफिस पर सफलता मिलते ही रितिक रोशन को अभिनेता वरूण धवन के भाई व फिल्मकार ने डेविड धवन के बेटे व फिल्म निर्देशक रोहित धवन ने एक एडवेंचरस फिल्म का आफर दिया था, मगर रितिक रोशन ने यह कह कर इस फिल्म को करने से मना कर दिया था कि इस फिल्म के किरदार में वह खुद को फिट नहीं पाते हैं.

अब बौलीवुड में चर्चा है कि रितिक रोशन ने फिल्मकार राज कुमार गुप्ता की स्पाई व पाकिस्तान आर्मी में भारतीय जासूस यानी कि ‘रा’ के एजेंट के रूप में कार्य कर चुके रवींद्र कौशिक की बायोपिक फिल्म ‘‘ब्लैक टाइगर’’ को भी करने से मना कर दिया है.

रितिक रोशन ने ‘‘ब्लैक टाइगर’’ करने से क्यों मना किया, इस पर कुछ भी स्पष्ट जानकारी नही मिल रही हैं. मगर बौलीवुड के गलियारों में कई तरह की कहानियां कही जा रही है. एक अंग्रेजी की वेब साइट की माने तो रितिक रोशन ने यह फिल्म महज इसलिए करने से मना कर दी, क्योंकि वह दूसरी बायोपिक फिल्म नहीं करना चाहते. इसके अलावा कुछ समय पहले जौन अब्राहम ने गैरी ग्रेवाल की इसी तरह की एक स्पाई फिल्म ‘‘रोमियो अकबर वौल्टर’’ की थी और इस फिल्म को दर्शकों ने पसंद नहीं किया था. यानी कि रितिक रोशन को ‘‘ब्लैक टाइगर’’ करने में रिस्क ज्यादा नजर आ रही है.

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जबकि कुछ दूसरे सूत्र दावा कर रहे हैं कि रितिक रोशन फिलहाल एक पूर्णरूपेण व्यावसायिक फिल्म करने को इच्छुक हैं. कुछ लोगों का दावा है कि रितिक रोशन इन दिनों फरहा खान से फिल्म ‘‘सत्ता पे सत्ता’’ की रीमेक फिल्म को लेकर बातचीत कर रहे हैं और हो सकता है कि वह इस फिल्म के लिए हामी भर दें. पर अभी तक इस फिल्म के लिए भी रितिक रोशन ने हां नहीं कहा है.

जबकि रितिक रोशन के अति नजदीकी सूत्र का दावा है कि फिलहाल रितिक रोशन घर पर एक नई फिल्म की पटकथा पढ़ने में व्यस्त हैं, जिसमें डांस और एकशन की बहुतायत है.

जबकि एक सूत्र का दावा है कि रितिक रोशन को टाइगर श्राफ के साथ वाली अपनी एकशन व रोमांचक फिल्म ‘‘वार’’ के प्रदर्शन का इंतजार है. यह फिल्म दो अक्टूबर को प्रदर्शित होगी, उसके बाद ही वह आगे की योजना बनाएंगे. फिलहाल इस फिल्म को लेकर काफी सावधानी बरती जा रही है.सूत्र बताते हैं कि रितिक रोशन की ही सलाह पर फिल्म ‘‘वार’’ का ट्रेलर लौंच करने का कार्यक्रम भी नहीं रखा जा रहा है.

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अब प्रियंका के पीछे पड़ा इमरान खान, जानिए क्या है मामला

मशहूर बौलीवुड व हौलीवुड एक्ट्रेस प्रियंका चोपड़ा यूनिसेफ की गुडविल ऐंबेसडर भी हैं. बेहतरीन कामों की बदौलत प्रियंका ने यहां भी परचम लहराया है मगर पाकिस्तान की मानव अधिकार मंत्री शिरीन माजरी को प्रियंका अब फूटी आंख भी नहीं सुहातीं.

शिरीन ने यूनीसेफ को पत्र लिख कर प्रियंका चोपड़ा की शिकायत की है और मांग की है कि उन्हें यानी प्रियंका को पद से हटाया जाए.

यह पत्र यूनिसेफ के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर को लिखा गया है.

 

क्या है पत्र में

शिरीन ने जो पत्र अधिकारियों को लिखा हैं वह आजकल सोशल मीडिया में खूब वायरल है. इस में  लिखा है,”प्रियंका खुल कर कश्मीर को ले कर भारत सरकार की नीतियों का समर्थन करती हैं. इन्होंने भारत के रक्षा मंत्री द्वारा पाकिस्तान को दी गई परमाणु हमले की धमकी का भी समर्थन किया है, जो यूएन गुडविल ऐंबेसडर के शांति और मानवता के खिलाफ है. लिहाजा उन्हें पद से हटा देना चाहिए.”

बेइज्जती का बदला

शिरीन ने यह पत्र दरअसल बदले की भावना से भी लिखा है क्योंकि हाल ही में एक कार्यक्रम में प्रियंका ने भाग लिया था. इस बीच पाकिस्तान की एक कार्यकर्ता आयशा मलिक प्रियंका द्वारा की गई एक ट्वीट से भङक गई थीं जिस में प्रियंका ने बालाकोट हमले के बाद भारतीय सैनिकों की तारीफ की थी. बस, इसी मुद्दे को ले कर पाकिस्तान की मंत्री ने प्रियंका के खिलाफ मोर्चा खोल दिया और उन्हें पद से हटाने की मांग कर डाली.

साथ आया बौलीवुड

इस मसले पर प्रियंका चोपड़ा का खुल कर समर्थन किया जा रहा है. हिंदी फिल्मों के निर्देशक अनिल शर्मा ने कहा,”पाकिस्तान के लोगों से मेरा सुझाव है कि भारत के आंतरिक मसलों पर हस्तक्षेप न करें. हमारे कलाकारों को निशाना बनाने से बेहतर है कि वे अपने लोगों की जिंदगी बेहतर बनाएं.”

निर्माता निर्देशक मधुर भंडारकर ने कहा,”धारा 370 हटाए जाने के बाद से ही कई लोगों में व्यग्रता है. ऐसे लोग तिल का ताड़ बनाने की कोशिश कर रहे हैं. कुछ समझ नहीं आ रहा तो कलाकारों को ही निशाना बना रहे हैं.”

जब से कश्मीर में धारा 370 लगाया गया है तब से पाकिस्तान बौखला गया है और इस बौखलाहट में भारत पर प्रतिबंध लगाते हुए अपना ही नुकसान कर रहा है.

पिछले दिनों अपने आयात निर्यात नीतियों में परिवर्तन करते हुए पाकिस्तान भारत से आयातित कई चीजों पर प्रतिबंध लगा कर खुद ही चारों ओर से घिर चुका है.

एक खबर के मुताबिक इसका नतीजा यह हुआ कि अब वहां 1 किलो टमाटर 300 रूपए के पार और दूध 150 रूपए प्रति किलो से अधिक में मिल रहा है. इतना ही नहीं खाद्यान्न और डेयरी से बनी चीजों की कीमतें भी अब वहां आसमान छू रही हैं और गलत व्यापार नीतियों की वजह से पाकिस्तान में पेट्रोलडीजल के दामों में भी जबरदस्त वृद्धि हुई है.

वैसे, प्रियंका चोपड़ा की भी तारीफ करनी होगी क्योंकि शादी के बाद आमतौर पर गुमनामी के अंधेरों में गुम हो जाने वाली अभिनेत्रियों की तुलना में प्रियंका किसी न किसी वजह से लाइमलाइट में रहती ही हैं और अब तो अदाकारी के अलावे तारीफ करने की हुनर की वजह से चर्चा में हैं.

मैडम प्रियंका, अब तो यहां भी प्रमोशन तय है क्योंकि सरकार खुश तो कलाकार भी खुश.

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लाइब्रेरी थीम पर बना है ये होटल

हर किसी की तमन्ना होती है कि जब वह खुद को रिलैक्स फील कराने के लिए कहीं बाहर आउटिंग पर जाए तो वहां वह जिस होटल में ठहरे वहां उस की खातिरदारी में लोग लगे रहें और ऐसा होता भी है कि होटल में ठहरते ही वेटर हमारी सेवा में लग जाते हैं, एक रिंग देते ही हमारे सामने चाय कौफी हाजिर हो जाती है. जैसा होटल होता है उसी हिसाब से हमें वहां सुख सुविधाएं मिलती रहती हैं. लेकिन क्या कभी आप ने ऐसे होटल के बारे में सोचा है जो लाइब्रेरी थीम पर बना हुआ हो और न सिर्फ बुक लवर्स को बल्कि हर किसी को अपनी ओर खींचता हो.

भले ही आप ने ऐसे होटल की कलपना अपने सपने में की होगी, लेकिन अब आप इसे वास्तविक धरातल पर पुर्तगाल के ओबिडोस में देख सकते हैं, क्योंकि वहां लाइब्रेरी थीम पर लिटररी मैन होटल बनाया गया है जिस देख ने वाले कभी भूल न पाएं.

ड्रीम कम ट्रू

ओबिडोस इलाका आज का नहीं बल्कि 700 साल पुराना इलाका है, जहां कुछ किताबों के साथ लिटररी मैन जैसे शानदार होटल की शुरुआत की गई थी, जिस में आज किताबों की संख्या 45,000 को पार कर चुकी है और उम्मीद है कि जल्द ही यहां किताबों की संख्या 1 लाख के आंकड़े को भी पार कर जाएगी. जब इस होटल का सफर शुरू हुआ था, तब उम्मीद भी नहीं थी कि इस थीम पर बने होटल को इतना पसंद किया जाएगा. लेकिन कहते हैं न कि जब किसी काम को पूरे दिल व मन से किया जाए तो वह अवश्य पूरा होता है.

हर रूम में बुक शैल्फ

इस होटल में 30 कमरे हैं और हर कमरे में बुक शैल्फ हैं, जो हर किसी को किताबें पढ़ने के लिए प्रोत्साहित करते हैं. रूम्स की डिजाइनिंग ही ऐसी है जो साहित्यिक माहौल बनाती है. साथ ही आप को अपने रूम में वाईफाई की सुविधा भी दी गई है, जिस से आप रूम में बैठे बैठे ही चैटिंग शैटिंग व नैट पर सर्चिंग वगैरा का काम भी कर सकते हैं.

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लाइव बुक ऐंड कुक किचन

आप ने अभी तक ऐसे होटल देखे होंगे जहां किचन सैक्शन रूम्स से दूर होता है लेकिन इस होटल में किचन सैक्शन लाइव है यानी सामने बैठकर मेहमान अपनी पसंदीदा किताबें पढ़ने का लुत्फ उठाते रहेंगे, वहीं उन्हें सामने शैफ द्वारा बनाई जा रही डिशेज भी साफ दिखती रहेंगी. अगर आप चाहते हैं वहीं बैठकर खाना खाना तो इस की भी वहां व्यवस्था है.

किताबें भी कर सकते हैं डोनेट

साहित्यिक थीम बैस्ड लिटररी मैन होटल में हर तरह की किताबें रखने की कोशिश की गई हैं, ताकि हर तरह के पाठक को अपने टैस्ट की सामग्री मिल सके. और जो कमी अभी रह गई है, उसे जल्द से जल्द पूरा करने की कोशिश की जा रही है. खास बात यह है कि इस होटल में मेहमान किताबें डोनेट भी कर सकते हैं और कोई किताब पसंद आने पर ले भी जा सकते हैं.

पुस्तकें कैरी करने के बोझ से भी छुटकारा

कुछ लोगों को किताबें पढ़ने का इतना अधिक शौक होता है कि वे जब भी फ्री होते हैं नौवल्स वगैरा पढ़ना शुरू कर देते हैं. ऐसे में जब वे अधिक दिनों के लिए कहीं घूमने जाते हैं तो भारी भरकम किताबें भी अपने साथ लादकर ले जाते हैं ताकि अनजान शहर में किताबें हमेशा उन का एंटरटेनमैंट करती रहे. इस से भले ही वे बोर न हों, लेकिन ऐक्स्ट्रा पैकिंग होने के कारण उसे उठाने में दिक्कत आती है. ऐसे में बुक थीम्स पर बने होटल्स व बार्स बुक लवर्स के लिए वरदान है.

बार, सैलून और रैस्टोरैंट की भी सुविधा

अगर आप होटल का खाना खातेखाते ऊब गए हैं तो आप होटल में बने रैस्टोरैंट में जा कर अपनी पसंद की डिश और्डर कर सकते हैं. यहां आप को ढेरों वैराइटी मिलेगी. साथ ही आप बार में जहां कौकटेल्स के नाम भी साहित्यिक दिग्गजों के नाम पर रखे गए हैं का मजा उठा सकते हैं. सैलून भी ऐसे डिजाइन किया गया है जहां आप को इतना रिलैक्स मिलेगा कि आप का वहां से बाहर जाने का मन ही नहीं करेगा.

और भी कई लाइब्रेरी थीम पर बने होटल्स और बार

1. ‘द साल्विया बीच’ होटल जो ओरिजोन की समुद्री किनारे पर स्थित है में प्रत्येक रूम का निर्माण पढऩे वाले को ध्यान में रखकर बनाया गया है.

2. न्यूयौर्क सिटी के ‘नोमेड होटल’ में बना लाइब्ररी बार लोगों को अपनी ओर आकॢषत करता है. यहां पर आप को न्यूयौर्क के इतिहास के बारे में विभिन्न किताबों में ढेरों जानकारी मिल जाएंगी.

3. इंगलैंड के ब्राइटन में ‘द वंदरलैंड हाउस’ में रूम्स में बने चित्रों के माध्यम से मेहमान अंदाज लगाते हैं कि किस बुक के बारे में बात की जा रही है.

4 न्यूयौर्क सिटी में बने ‘द लाइब्रेरी होटल’ में दस फ्लोर्स हैं. इस में हर फ्लोर पर आप को अलगअलग चीजें पढ़ने को मिलेंगी. जैसे नौवे फ्लोर पर एशियन हिस्ट्री के बारे में बताया गया है तो अन्य फ्लोर पर बीसवीं सैंचुरी के इतिहास आदि के बारे में.

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5 डालास के ‘द लाइब्रेरी ऐट द वारविक होटल’ में आप किताबें पढऩे या कौक्टेल के मजे के साथ प्यानो बजाने का भी लुत्फ उठा सकते हैं.

जानें, हिना खान ने अपने ब्वौयफ्रेंड के लिए क्या लिखा ?

टीवी एक्ट्रेस हिना खान इन दिनों न्यूयौर्क में अपने ब्वौयफ्रेंड से साथ वेकेशन मना रही हैं. हिना खान को आखिरी बार  हिना को स्टार प्लस के मशहूर शो ‘कसौटी ज़िंदगी की’ में ‘कोमोलिका’ के किरदार में देखा गया था. आपको बता दें, कई सालों से हिना खान और रौकी जायसवाल रिलेशनशिप में हैं.

हिना ने  एक पोस्ट शेयर किया हैं, जिसमें उन्होंने अपने प्यार रौकी के लिए प्यारा स्पेशल मैसेज लिखा हैं. आप भी देखें हिना ने अपने ब्वौयफ्रेंड  के लिए क्या लिखा हैं.

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अक्सर हर इवेंट में हिना और रौकी एक साथ दिखते हैं. न्यूयौर्क में हिना को इंडिया-डे परेड के लिए आमंत्रित किया गया था. जहां रौकी भी उनके साथ नजर आए थे. इवेंट से पहले उन्होंने शौपिंग मौल जाकर अपना टाइम स्पेन्ड किया.  बता दें, अब वे जल्द ही विक्रम भट्ट की फिल्म ‘हैक्ड’ में नजर आएंगी. इस फिल्म को इस साल ही रिलीज होना था, पर किसी कारणवश ये फिल्म होल्ड पर रह गई. और इस फिल्म में डिजिटल प्लेटफौर्म पर धमाल मचाने वाले रोहन शाह इस फिल्म में दमदार भूमिका अदा करने वाले है.

सीरियल ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ के जरिए हिना  खान ने टीवी इंडस्ट्री में एंट्री की थी. और इस सीरियल से वे अक्षरा के किरदार में काफी मशहूर हुई. ‘बिग बौस’ और ‘खतरों के खिलाड़ी’, कसौटी जिंदगी की’ सहित कई लोकप्रिय टेलीविजन शो का हिस्सा रही हैं.

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Janmashtami Special: ऐसे बनाएं नारियल की बर्फी

नारियल की बर्फी को लोग अक्सर किसी न किसी फेस्टिवल पर बनाते हैं. तो आप भी जन्माष्टमी पर इस बर्फी को बना सकते हैं और इसे बनाना बहुत ही आसान है. यह खाने में भी बहुत ही टेस्टी लगती हैं. तो चलिए जानते हैं इसकी रेसिपी.

सामग्री

कप नारियल, कद्दूकस

कप चाश्नी

टेबल स्पून खोया

टेबल स्पून बादाम, टुकड़ों में कटा हुआ

टेबल स्पून पिस्ता, टुकड़ों में कटा हुआ

टी स्पून घी

बनाने की वि​धि

चाश्नी बनाने के लिए

पानी और चीनी को एक साथ मिला लें.

मिक्सचर को लगातार चलाते रहे.

जब चीनी पूर तरह घुल जाए, तो इसे आंच से उतार लें.

नारियल की बर्फी के लिए

एक भारी कढ़ाही में नारियल और चाश्नी मिलाएं। लगातार चलाते रहे।

जब ये मिक्सचर गाढ़ा होकर हल्वे जैसा न बन जाए, तब तक इसे भूनते रहे।

फिर इसमें पिस्ता और बादाम मिक्स करें.

एक ट्रे में घी लगाकर नारियल का बैटर डालें.

बैटर को स्मूथ करके अपनी पसंदीदा शेप में बर्फी काटें.

जब ये ठंडी हो जाए, तो सर्व करें.

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सहारा : भाग 1

मोहित को घर जाने के लिए सिर्फ 1 सप्ताह की छुट्टी मिली थी. समय बचाने के लिए उस ने अपनी पत्नी अलका व बेटे राहुल के साथ मुंबई से दिल्ली तक की यात्रा हवाईजहाज से करने का फैसला किया.

अलका ने घर से निकलने से पहले ही साफसाफ कहा था, ‘‘देखो, मैं पूरे 5 महीने के बाद अपने मम्मीपापा से मिलूंगी. भैयाभाभी के घर से अलग होने के बाद वे दोनों बहुत अकेले हो गए हैं. इसलिए मुझे उन के साथ ज्यादा समय रहना है. अगर आप ने अपने घर पर 2 दिनों से ज्यादा रुकने के लिए मुझ पर दबाव बनाया तो झगड़ा हो जाएगा.’’

‘अपने मम्मीपापा के अकेलेपन से आज तुम इतनी दुखी और परेशान हो रही हो पर शादी होते ही तुम ने रातदिन कलह कर के क्या मुझे घर से अलग होने को मजबूर नहीं किया था? जब तुम ने कभी मेरे मनोभावों को समझने की कोशिश नहीं की तो मुझ से ऐसी उम्मीद क्यों रखती हो?’ मोहित उस से ऐसा सवाल पूछना चाहता था पर झगड़ा और कलह हो जाने के डर से चुप रहा.

‘‘तुम जितने दिन जहां रहना चाहो, वहां रहना पर राहुल अपने दादादादी के साथ ज्यादा समय बिताएगा. वे तड़प रहे हैं अपने पोते के साथ हंसनेखेलने के लिए,’’ मोहित ने रूखे से लहजे में अपनी बात कही और अलका के साथ किसी तरह की बहस में उलझने से बचने के लिए टैक्सी की खिड़की से बाहर देखने लगा था.

मोहित को अपनी सास मीना कभी अच्छी नहीं लगी थी. उन की शह पर ही अलका ने शादी के कुछ महीने बाद से किराए के मकान में जाने की जिद पकड़ ली थी. उस का दिल बहुत दुखा था पर शादी के 6 महीने बाद ही अलका ने उसे किराए के घर में रहने को मजबूर कर दिया था.

वह करीब 4 साल तक किराए के मकान में रहा था. फिर नई कंपनी में नौकरी मिलने से वह 5 महीने पहले मुंबई आ गया था. अब सप्ताह भर की छुट्टियां ले कर वह सपरिवार पहली बार दिल्ली जा रहा था.

करीब 2 महीने पहले मोहित का साला नीरज अपनी पत्नी अंजु और सासससुर के बहकावे में आ कर घर से अलग हो गया था. उस के ससुर ने उसे नया काम शुरू कराया था जिस में उस की अच्छी कमाई हो रही थी. ससुराल में ज्यादा मन लगने से उस का ज्यादा समय वहीं गुजरता था.

उस के अलग होने के फैसले को सुन अलका बहुत तड़पी थी. खूब झगड़ी थी वह फोन पर अपने भैयाभाभी के साथ पर उन दोनों ने घर से अलग होने का फैसला नहीं बदला था.

‘‘इनसान को अपने किए की सजा जरूर मिलती है. दूसरे की राह में कांटे बोने वाले के अपने पैर कभी न कभी जरूर लहूलुहान होते हैं,’’ मोहित की इस कड़वी बात को सुन कर अलका कई दिनों तक उस के साथ सीधे मुंह नहीं बोली थी.

मोहित अपने मातापिता को मुंबई में साथ रखना चाहता था पर अलका ने इस प्रस्ताव का जबरदस्त विरोध किया.

‘‘मां की कमर का दर्द और पिताजी का ब्लडप्रेशर बढ़ता जा रहा है. अगर अब हम ने उन दोनों की उचित देखभाल नहीं की तो उन दोनों के लिए औलाद को पालनेपोसने की इतनी झंझटें उठाने का फायदा ही क्या हुआ?’’

अलका के पास मोहित के इस सवाल का कोई माकूल जवाब तो नहीं था पर उस ने अपने सासससुर को साथ न रखने की अपनी जिद नहीं बदली थी.

सुबह की फ्लाइट पकड़ कर वे सब 12 बजे के करीब अपने घर पहुंच गए. पूरे सफर के दौरान अलका नाराजगी भरे अंदाज में खामोश रही थी.

अपनी ससुराल के साथ अलका की बहुत सारी खराब यादें जुड़ी हुई थीं. सास के कमरदर्द के कारण उसे पहुंचते ही रसोई में किसी नौकरानी की तरह मजबूरन घुसना पड़ेगा, यह बात भी उसे बहुत अखर रही थी. उस का मन अपने मम्मीपापा के पास जल्दी से जल्दी पहुंचने को बहुत ज्यादा आतुर हो रहा था.

घंटी बजाने पर दरवाजा मोहित के पिता महेशजी ने खोला. उन सब पर नजर पड़ते ही वे फूल से खिल उठे. अपने बेटे को गले लगाने के बाद उन्होंने राहुल को गोद में उठा कर खूब प्यार किया. अलका ने अपने ससुरजी के पैर छू कर उन का आशीर्वाद पाया.

महेशजी तो राहुल से ढेर सारी बातें करने के मूड में आ गए. अपने दादा से रिमोट कंट्रोल से चलने वाली कार का उपहार पा राहुल खुशी से फूला नहीं समा रहा था.

अलका और मोहित घर में नजर आ रहे बदलाव को बड़ी हैरानी से देखने लगे.

जिस ड्राइंगरूम में हमेशा चीजें इधरउधर फैली दिखती थीं वहां हर चीज करीने से रखी हुई थी. धूलमिट्टी का निशान कहीं नहीं दिख रहा था. खिड़कियों पर नए परदे लगे हुए थे. पूरा कमरा साफसुथरा और खिलाखिला सा नजर आ रहा था.

‘‘मां घर में नहीं हैं क्या?’’ मोहित ने अपने पिता से पूछा.

‘‘वे डाक्टर के यहां गई हुई हैं,’’ प्यार से राहुल का माथा चूमने के बाद महेशजी ने जवाब दिया.

‘‘अकेली?’’

‘‘नहीं, उन की एक सहेली साथ गई हैं.’’

‘‘कौन? शारदा मौसी?’’

‘‘नहीं, उन्होंने एक नई सहेली बनाई है. दोनों लौटने वाली ही होंगी. तुम दोनों क्या पिओगे? चाय, कौफी या कोल्डडिं्रक? अरे, बाप रे,’’ महेशजी ने अचानक माथे पर हाथ मारा और राहुल को गोद से उतार झटके से सीधे खड़े हो गए.

‘‘क्या हुआ?’’ मोहित ने चिंतित स्वर में पूछा.

‘‘गैस पर भिंडी की सब्जी रखी हुई है. इस शैतान से बतियाने के चक्कर में मैं उसे भूल ही गया था,’’ वह झेंपे से अंदाज में मुसकराए और फिर तेजी से रसोई की तरफ चल पड़े.

राहुल कार के साथ खेलने में मग्न हो गया. अलका और मोहित महेशजी के पास रसोई में आ गए.

‘‘घर की साफसफाई के लिए कोई नई कामवाली रखी है क्या, पापा?’’ साफसुथरी रसोई को देख अलका यह सवाल पूछने से खुद को रोक नहीं पाई.

‘‘कामवाली तो हम ने लगा ही नहीं रखी है, बहू. घर के सारे कामों में तुम्हारी सास का हाथ अब मैं बंटाता हूं. तुम यह कह सकती हो कि उस ने नया कामवाला रख लिया है,’’ अपने मजाक पर महेशजी सब से ज्यादा खुल कर हंसे.

मोहित ने एक भगौने पर ढकी तश्तरी को हटाया और बोला, ‘‘वाह, मटरपनीर की सब्जी बनी है. लगता है मां सारा लंच तैयार कर के गई हैं.’’

‘‘डाक्टर के यहां बहुत भीड़ होती है, इसलिए वे तो 3 घंटे पहले घर से चली गई थीं. आज लंच में तुम दोनों को मेरे हाथ की बनी सब्जियां खाने को मिलेंगी,’’ किसी छोटे बच्चे की तरह गर्व से छाती फुलाते हुए महेशजी ने उन दोनों को बताया.

‘‘आप ने खाना बनाना कब से सीख लिया, पापा?’’ मोहित हैरान हो उठा.

‘‘घर के सारे काम करने का हुनर हम आदमियों को भी आना चाहिए. तुम बहू से टे्रनिंग लिया करो. अब मैं तुम्हें इलायची वाली चाय बना कर पिलाता हूं.’’

‘‘चाय मुझे बनाने दीजिए, पापा,’’ अलका आगे बढ़ आई.

‘‘अगली बार तुम बनाना. तुम्हारे हाथ की बनी चाय पिए तो एक अरसा हो गया,’’ महेशजी ने प्यार से उस के सिर पर हाथ फेरा तो अजीब सी भावुकता का शिकार हो उठी अलका को अपनी पलकें नम होती प्रतीत हुई थीं.

तभी किसी ने बाहर से घंटी बजाई तो मोहित दरवाजा खोलने के लिए चला गया.

‘‘अलका, तुम्हारे पापा आए हैं,’’ कुछ देर बाद मोहित की ऊंची आवाज अलका के कानों तक पहुंची तो वह भागती सी ड्राइंगरूम में पहुंच गई.

‘‘आप, यहां कैसे?’’ अलका अपने पिता उमाकांत को देख खुशी से खिल उठी.

‘‘तुम लोगों के आने की खुशी में रसमलाई ले कर आया हूं,’’ राहुल को गोद से उतारने के बाद उमाकांत ने अपनी बेटी को छाती से लगा लिया.

‘‘उमाकांत, रसमलाई का मजा खाने के बाद लिया जाएगा. अभी चाय बन कर तैयार है,’’ महेशजी रसोई में से ही चिल्ला कर बोले.

‘‘ठीक है, भाईसाहब,’’ उन्हें ऊंची आवाज में जवाब देने के बाद उमाकांत ने हैरान नजर आ रहे अपने बेटीदामाद को बताया, ‘‘हम दोनों एकदूसरे के बहुत पक्के दोस्त बन गए हैं. रोज मिले बिना हमें चैन नहीं पड़ता है.’’

‘‘यह चमत्कार हुआ कैसे?’’ इस सवाल को पूछने से मोहित खुद को रोक नहीं सका.

‘‘यह सचमुच चमत्कार ही है कि इस घर में हमारा स्वागत अब दोस्तों की तरह होता है, मोहित,’’ सस्पेंस बढ़ाने वाले अंदाज में मुसकराते हुए उमाकांत उस के सवाल का जवाब देना टाल गए थे.

तभी करीब 2 महीने पहले घटी एक घटना की याद उन के मन में बिजली की तरह कौंध गई थी.

अपने बेटेबहू के अलग हो जाने से मीना बहुत ज्यादा दुखी और परेशान थीं. बेखयाली में घर की सीढि़यां उतरते हुए उन का पैर फिसला और दाएं टखने में मोच आ गई.

डाक्टर की क्लिनिक में उन की मुलाकात महेश और आरती से हुई. आरती की कमर का इलाज वही डाक्टर कर रहा था.

तेज दर्द के कारण तड़प रही मीना का आरती ने बहुत हौसला बढ़ाया था. उस वक्त उन्होंने मीना के खिलाफ अपने मन में बसे सारे गिलेशिकवे भुला कर उन्हें सहारा दिया था.

अपने बेटे से बहुत ज्यादा नाराज मीना ने उसे अपनी चोट की खबर नहीं दी थी. डाक्टर को दिखाने के बाद कुछ देर आराम करवाने के लिए महेशजी व आरती उन दोनों को अपने घर ले आए थे.

मीना का सिर भी दीवार के साथ जोर से टकराया था. वहां कोई जख्म तो नहीं हुआ पर सिर को हिलाते ही उन्हें जोर से चक्कर आ रहे थे.

इस स्थिति के चलते मीना को आरती के घर में उस रात मजबूरन रुकना पड़ा. उन की किसी भी जरूरत को पूरा करने के लिए आरती रात को मीना के साथ ही सोई थीं.

नींद आने से पहले बहुत दिनों से परेशान चल रहीं मीना के मन में कोई अवरोध टूटा और वह आरती से लिपट कर खूब रोई थीं.

कला का समलैंगिक ग्लोब

लेखक: सुमन कुमार सिंह

सोदबी की नीलामी में भारतीय समकालीन कलाकार भूपेन खाखर की कृति ‘टू मेन इन बनारस’ को 25.4 लाख पाउंड यानी लगभग 32 लाख डौलर या कहें

24 करोड़ रुपए से ज्यादा मिले हैं. नीलामी की शुरुआत में यह अनुमान लगाया गया था कि इस कृति को लगभग 45 से 60 हजार पाउंड मिल सकते हैं, जिसे बड़ी रकम माना जा रहा था. इस लिहाज से देखें तो जो रकम आखिरकार मिली वह छप्पर फाड़ अंदाज में मिली.

इस रकम ने कला की दुनिया को चौंका दिया है. वर्ष 1986 में मुंबई में आयोजित अपनी प्रदर्शनी में जब पहली बार भूपेन ने अपनी इस कृति को दर्शकों व कलाप्रेमियों के सामने पेश किया था, तब उन के समलैंगिक होने की बात भी सामने आई थी. देखा जाए तो इस तरह से भूपेन पहले और इकलौते भारतीय कलाकार रहे जिन्होंने अपने यौन रुझान को सार्वजनिक किया.

सोदबी ने बताया कि कलाकार की श्रेष्ठ कृतियों में शुमार इस पेंटिंग को टेट मौडर्न द्वारा आयोजित ‘यू कैन नौट प्लीज औल’ नामक प्रदर्शनी में वर्ष 2016 में प्रदर्शित किया गया था.

विदित हो कि इस संस्थान में आयोजित इस कलाकार की यह पहली पुनरावलोकन यानी रेट्रोस्पेक्टिव प्रदर्शनी थी. अपने समलैंगिक होने के खुलासे के बाद भूपेन को किस तरह की आलोचनाओं का सामना करना पड़ा होगा, इस की एक बानगी हमें मिलती है.

वरिष्ठ कला समीक्षक विनोद भारद्वाज के इन शब्दों में, ‘उस साल ज्यूरी में फिल्मकार अरुण खोपकर और इन पंक्तियों के लेखक ने जब भूपेन खाखर का नाम कालिदास सम्मान के लिए प्रस्तावित किया तो एक सदस्य ने कहा कि भूपेन समलिंगी हैं. उन्हें यह सम्मान देने से विवाद खड़ा हो जाएगा.’

काफी बहस के बाद भूपेन को यह सम्मान दिया जा सका. भूपेन यह स्वीकार कर चुके हैं कि अपने समलिंगी होने को वे लंबे समय तक मित्रों से भी छिपाते रहे. उन की कलाकृतियों में भी एक बड़ा बदलाव आया. समलिंगी अभिव्यक्ति ने पेंटिंग को एक नई भाषा दी और फैंटेसी को जन्म दिया. एक ऐसा दरवाजा खुला जिसे भारतीय जीवन में आज भी बंद कमरे में ही रखा जाता है. जाहिर है कि कुछ कलाप्रेमियों के लिए यह अनुभव शौकिंग था. वैसे, अपने यहां कला में समलिंगी संबंधों की अभिव्यक्ति की जब हम बात करते हैं तो सामान्य प्रतिक्रिया तो यही आती है कि यह सब पश्चिमी सभ्यता की देन है.

देखा जाए तो एक हद तक यह सही भी मान सकते हैं, किंतु हमें यहां यह भी जानना होगा कि कब, कहां इस तरह की अभिव्यक्ति हमारे यहां यानी भारतीय व एशियाई कला में भी रही है. ग्रीक सभ्यता की बात करें तो वहां किसी उम्रदराज पुरुष द्वारा कम उम्र के युवा के साथ इस तरह के संबंधों का जिक्र आता है. यहां तक कि सिकंदर महान के भी इस तरह के संबंध की बात इतिहास में दर्ज है. वहीं, देवताओं की बात करें तो जीसस द्वारा एक युवा लड़के गनीमेडे का पीछा किए जाने का जिक्र आता है, जबकि अपोलो के हयसिंथ के साथ समलिंगी संबंध की बात आती है. यहां तक कि पौराणिक मूर्तिशिल्पों और पौटरी में इसे अंकित भी किया गया है. रोमन सभ्यता भी इस अंकन से अछूती नहीं है.

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प्रेम संबंधों का दृश्य

महान योद्धा हरक्यूलिस और इओलोस के प्रेम संबंधों को दर्शाते दृश्यों का अंकन भी यहां के मूर्तिशिल्प और पौटरी में मिलता है. माया सभ्यता के चित्रांकनों में भी इस विषय पर केंद्रित रूपायन मिलता है. अपने एशियाई जगत की बात करें तो चीन में तो समलिंगी विषयों पर आधारित चित्रों का लगभग 2,000 साल पुराना प्रमाण मिलता है. समझा जाता है कि यह परंपरा 14वीं सदी तक न केवल जारी रही, बल्कि इन चित्रों पर कलाकार ने अपने हस्ताक्षर भी किए हैं. इस से यह सहज अनुमान लगाया जा सकता है कि इस तरह के चित्रों को बनाने और उस के साथ अपना परिचय भी जाहिर करने का रिवाज रहा होगा यानी इस के लिए किसी तरह की सामाजिक वर्जना नहीं थी.

जापान के समुराई योद्धाओं की परंपरा से हम सभी भलीभांति वाकिफ हैं. इन समुराई योद्धाओं में भी बुजुर्गों का युवाओं के साथ समलिंगी संबंधों का होना सामान्य बात समझी जाती थी. इन भावनात्मक संबंधों को केंद्र में रख कर न केवल चित्रों की रचनाएं की गई हैं, बल्कि कविताएं भी लिखी गई हैं.

दक्षिण अफ्रीका की बात करें तो इस समाज में तो समलिंगी संबंधों को दर्शाने वाले चित्र बड़ी संख्या में पाए जाते थे. जहां तक कि औपनिवेशिक दौर में जब यूरोप का प्रभुत्व यहां कायम हुआ, तब खोजखोज कर इस तरह के चित्रों को नष्ट करने का अभियान तक चलाया गया. विदित हो कि एड्स जैसी जानलेवा बीमारियों के इस क्षेत्र में फैलाव के लिए भी इसी समलैंगिकता को जिम्मेदार माना जा रहा है. यह अलग बात है कि इस के बाद से यहां का समाज इस से अपने को मुक्त करने में जीजान से जुटा हुआ है.

यह भी एक सच है कि किसी समय में इसे एक तरह की सामाजिक स्वीकार्यता प्राप्त थी. वैसे, कला की दुनिया की बात करें तो यूरोपीय कला के पुनर्जागरण काल के महत्त्वपूर्ण कलाकार माइकल एंजेलो द्वारा चित्रित सिस्टीन चैपल के भित्ति चित्रों में भी नग्न पुरुष आकृतियों का अंकन मिला है. यही नहीं, अपने समलिंगी संबंधों के कारण उन्हें समाज के बड़े वर्ग की आलोचना भी झेलनी पड़ी थी.

माना तो यहां तक जाता है कि मौडल के तौर पर भी माइकल एंजेलो अधिकतर पुरुषों को ही चुनते थे. जब उन्हें महिला मौडल की आवश्यकता होती थी तब भी उन की प्राथमिकता पुरुष ही रहते थे.

अमेरिकी आधुनिक कला जगत की बात करें तो पहलेपहल 1960 के दौर में उन साहित्यिक पत्रिकाओं और पुस्तकों में समलिंगी चित्रों को जगह मिली जिसे हम पल्प फिक्शन या रद्दी साहित्य कहते हैं. महिलाओं के लिए तो लंबे समय तक समलैंगिकता के बारे में जानकारी के लिए यह एकमात्र जरिया समझा जाता था. कहना न होगा कि शुरुआती दौर में इसे ही पौप कल्चर के नाम से चिह्नित किया गया और कला में पौप आर्ट जैसे शब्द भी यहीं से आए.

कला में आज हम जिस न्यू मीडिया की बात करते हैं उस के जनक के तौर पर माने जाने वाले एंडी वारहोल जहां पुरुषों के नग्न और कामुक छायाचित्रों के लिए जाने जाते रहे, वहीं उन्हें समलैंगिकों की दुनिया का छिपा रुस्तम भी माना जाता रहा.

अब बात अगर भारतीय संदर्भ की करें तो मुगलकालीन लघुचित्र शैली के चित्रों में भी इस विषय का अंकन देखने को मिलता है. वहीं मध्यकाल की सूफी परंपरा में भी अपने आराध्य को प्रेमी के तौर पर देखने और स्वयं को बतौर प्रेमिका प्रस्तुत करने का भाव देखा जाता रहा है. यही नहीं, पुरुषों के सामूहिक स्नानघरों में सेवक के तौर पर कमसिन लड़कों द्वारा अपने ग्राहकों को खास तरह की संतुष्टि प्रदान करने वाली सेवा का जिक्र भी मिलता है.

ऐसे में यह भले ही बहस का विषय आगे भी बना रहे कि समलैंगिकता की प्रवृत्ति मानव समाज के लिए स्वीकार्य रहे या नहीं, किंतु चूंकि समाज में इस का चलन रहा है या कहा जाए कि मानव में यह प्रवृत्ति रही है तो कला में उस का

अंकन या अभिव्यक्ति को एक बहुत ही स्वाभाविक और सामान्य बात समझा जाना चाहिए.  आखिरकार कला और साहित्य समाज का आईना ही तो होते हैं और आईने में अगर हमारा अक्स हमें दिखे तो हमें चाहेअनचाहे उसे स्वीकारना ही होगा.

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(लेखक पटना कला महाविद्यालय के पूर्व छात्र तथा कला समीक्षक हैं)    

आज टिफिन में क्या है ममा ?

‘‘सीमा, तू क्या देती है संजू को टिफिन में. विशू ने तो मुझे परेशान कर रखा है. रोज स्कूल से जैसा टिफिन देती हूं वैसा ही वापस ले आता है. तू ही बता, रोजरोज तो उसे फ्रैंच फ्राइज, नूडल्स, बर्गर तो दे नहीं सकती न.

‘‘बच्चे को सब्जी, रोटी भी जरूर खानी चाहिए.’’

‘‘कविता, तू भी कैसी बातें करती है.’’

‘‘क्यों?’’

‘‘कविता, ऐसी बात नहीं है कि बच्चे रोटीसब्जी पसंद नहीं करते. बस, उन्हें यह सब खिलाने का थोड़ा स्टाइल अलग होना चाहिए. यानी माल वही, रैपिंग अलग. संजू के साथ मैं ऐसा ही करती हूं. रोज टिफिन खाली कर के आता है.’’

जी हां, बच्चों के खानेपीने में नखरे मां को उठाने ही पड़ते हैं. कुछ मांएं कविता की तरह परेशान रहती हैं तो कुछ सीमा की तरह समझदारी से काम लेती हैं. तो लीजिए, आप की परेशानी हम कुछ कम कर देते हैं. आप को बताते हैं कुछ ऐसी रैसिपीज जिन्हें आप अपने बच्चे के टिफिन में देंगी तो ऐसा हो ही नहीं सकता कि टिफिन खाली न आए. तो आइए, थोड़ा सा ट्विस्ट दे कर स्पैशल 5 डिशेज बच्चे के लंचबौक्स के लिए ट्राई कीजिए, ताकि बच्चा आप से पूछे, ‘ममा, आज टिफिन में क्या है?’

ह्ल पनीरी आटा मोमौज

पैन में एक चम्मच तेल डाल कर उस में थोड़ा जीरा भून कर प्याज, हरी मटर, गाजर, बींस, पनीर सब साथ मिला कर स्टफिंग तैयार करें. अब आटे की छोटी लोई ले कर उसे बेलें और उस में यह स्टफिंग मिला कर मोमौज की शेप दें. सारे मोमौज को तैयार कर स्टीम कर लें. डिप या घर में तैयार की गई धनिया की चटनी के साथ परोसें.

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ह्ल मैकरौनी विद वैजिटेबल

मैकरौनी तो आप बच्चों को देती हैं, उस में बारीक कटी सब्जियां डाल कर उसे और दिलचस्प बना दें. ढेर सारी सब्जियां और थिक टोमैटो ग्रेवी वाली मैकरौनी बनेगी ज्यादा पौष्टिक और लजीज.

ह्ल वेज औमलेट

रात ही में चावल और चने की दाल समान मात्रा में भिगो, सुबह पीस कर उस में कटा प्याज, टमाटर, धनिया, हरीमिर्च डालें. ईनो सौल्ट डाल कर अच्छी तरह मिक्स करें. नौनस्टिक तवा गरम करें. मिश्रण को तवे पर फैलाएं. गोल्डन ब्राउन होने तक दोनों तरफ से सेंकें.

ह्ल मल्टीग्रेन ब्रैड कटलेट

मल्टीग्रेन ब्रैड के किनारे काट कर मिक्सी में पीस लें. उस में प्याज, हरीमिर्च, करीपत्ता, हलदी पाउडर, उबला आलू, अमचूर पाउडर, नमक, कद्दूकस किया अदरक डाल कर थोड़ा सख्त मिश्रण बना लें. मिश्रण नरम हो तो थोड़ा बेसन मिलाया जा सकता है. अब कटलेट की शेप दे कर नौनस्टिक पैन में सेंक लें.

ह्ल यमयम पनीर

पनीर को किसी भी शेप में काटें. अदरक, हरीमिर्च, करीपत्ते, हरा धनिया मिक्सी में पीस लें. एक बाउल में दही, चावल का आटा, नमक, मिर्च, नीबू रस और पिसा मिश्रण अच्छी तरह मिलाएं. पनीर के टुकड़ों को इस घोल में अच्छी तरह लपेट कर नौनस्टिक तवे पर गोल्डन ब्राउन सेंकें. यह यमयम पनीर लंचबौक्स में रखें, क्योंकि बहुत देर तक रखने के बाद भी इस का करारापन बना रहता है.

ऐसे व्यंजनों से बच्चे की टिफिन में रुचि बनी रहती है.

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होमकेयर टिप्स: रखें इन 5 बातों का ख्याल

आप अपने घर को सजाते समय में अक्सर कुछ-न-कुछ बदलाव करती रहती हैं. पर अगर आप आर्थराइटिस की रोगी हैं तो आपके लिए घर सजाने का काम किसी झंझट से कम नही होता. गठिया की स्थिति में रोगी के लिए चलना, झुकना, भार उठाना, जोड़ों को बार-बार मोड़ना  बहुत मुश्किल होता है. ऐसे में किचन, स्टोररूम, बाथरूम आदि की सेटिंग अगर ध्यान में रखकर की जाए, तो घर के काम को सरल बनाया जा सकता है. बता दें, ऐसे में  आप घर के काम को कैसे आसान बना सकती हैं.

  1. घर के हैंगर में कुछ खास वजन नहीं होता, लेकिन पुराने तार के भारी हैंगर को पकड़ना और उन पर कपड़े सुखाना रोगी के लिए मुश्किल हो जाता है, क्योंकि तार के हैंगर पर कपड़े आसानी से टिकते नहीं और ग्रिप बनाने के लिए जोड़ों पर दबाव डालना पड़ता है.

2. गठिया के दर्द में रोगी के लिए जोड़ों पर दबाव डालना पीड़ादायी होता है. इसलिए जरूरत की जो भी दवाइयां हों, उन्हें एक ऐसे बौक्स में रखें, जो आसानी से खुल जाता हो.

3. घर में किए गए छोटे-छोटे बदलाव, रोगी के दर्द पर बड़ा असर डालते हैं. मसलन, घर में लगे दरवाजों की गोल लौक को बार-बार घुमाना रोगी के लिए मुश्किल होता है, क्योंकि इससे रोगी के हाथों के जोड़ों पर दबाव पड़ता है. ऐसे में आप घर में प्लास्टिक और लकड़ी के हैंगर रख सकती है, क्योंकि इन पर कपड़े आसानी से रुक जाते हैं.

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4. आपके रोजमर्रा में काम आने वाली चीजें, जैसे कपड़े, जूते, एक्सेसरीज को अलमारी के ऊपर वाली शेल्फ में ही रखना चाहिए, ताकि बार-बार सामान निकालने के लिए झुकना न पड़े. थोड़ी-थोड़ी मात्रा में घर का सामान इस्तेमाल करें. जैसे किचन में एक किलो दाल के डिब्बे को रोज उठाने और रखने से अच्छा है कि आप हफ्ते भर की दाल एक छोटे से डिब्बे में निकाल लें. टाइट ढक्कन वाले जार यूज करने के बजाय पुश करने वाले डिब्बे प्रयोग में लाएं.

5. बर्तन धोने वाले डिटर्जेंट निकालने के लिए बार-बार सिंक के नीचे झुकने की जगह, आसानी से खुलने वाले जार में डाल कर सिंक के पास ही रख लें. रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले जरूरी सामान को अपनी पहुंच में ही रखें, ताकि उन्हें रोज उठाने और रखने में किसी तरह की दिक्कत न आए.साथ ही, किचन में इस्तेमाल होने वाले डिब्बों पर लेबल लगा लें, ताकि उन्हें ढूंढने के लिए आपको जोड़ों पर जोर न डालना पड़े.

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ये है दुनिया की सबसे बड़ी मधुमक्खी

आमतौर पर कई बार आपने मधुमक्खी देखी होगी. इनमें कुछ छोटी और कुछ बड़ी होती है. पर क्या आप जानते हैं दुनिया में एक सबसे बड़ी मधुमक्खी भी है. जी हां, आज आपको दुनिया की सबसे बड़ी मधुमक्खी के बारे में बताते हैं.

हाल ही में शोधकर्ताओं के एक दल ने इंडोनेशिया में 1981 के बाद सबसे बड़ी मधु मक्खी देखी. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इसका आकार एक व्यक्ति के अंगूठे के बराबर है.

रिपोर्ट के अनुसार, नेचुरल हिस्ट्री के फोटोग्राफर क्ले बोल्ट, कीटवैज्ञानिक एली वीमैन, व्यावहारिक पारिस्थितिक विज्ञानी सिमोन रौबसन और पक्षी विज्ञानी ग्लेन शिल्टन की टीम ने इस विचित्र जीव को दोबारा 25 जनवरी को खोज निकाला और वैलेस के इस विशालकाय जीव की पहली तस्वीरें और वीडियो ले लिए.

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