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हिमानी का याराना : भाग 1

सोनू पेशे से ड्राइवर था. उस की पत्नी हिमानी चाहती तो उस से तलाक भी ले सकती थी और यूं छोड़ कर जा सकती थी. इस के लिए अपने यार को हथियार बना कर सोनू को बकरे की तरह हलाल करना जरूरी नहीं था. सच तो यह कि यारों को पालने वाली…

24वर्षीय सोनू अपनी पत्नी हिमानी के साथ बाहरी दिल्ली स्थित बादली गांव के सिसोदिया मोहल्ले में रहता था. वह और हिमानी घर की ऊपरी मंजिल पर रहते थे, जबकि उस के पिता माधव सिंह और बहन पिंकी ग्राउंड फ्लोर पर रहते थे.

सोनू पेशे से ड्राइवर था और एक टूरिस्ट कंपनी की कार चला कर पूरे परिवार की जीविका चलाता था. 7 सितंबर, 2019 की रात 11 बजे तक परिवार के सभी सदस्य खाना खा चुके थे. सोनू को नींद आ रही थी, इसलिए वह हिमानी और डेढ़ साल के बच्चे के साथ पहली मंजिल पर अपने बैडरूम की ओर बढ़ गया. बेटे और बहू के जाने के बाद घर के बाकी सदस्य भी सोने चले गए.

सुबह करीब 7 बजे भाभी हिमानी के चीखनेचिल्लाने की आवाजें सुन कर पिंकी उस के कमरे में गई तो हिमानी ने रोते हुए बताया कि रात को किसी बदमाश ने इन की हत्या कर दी है. अभी थोड़ी देर पहले जब नींद खुली तो देखा तो ये मरे पड़े थे.

बैड पर भाई सोनू की लाश देख कर पिंकी ने बदहवास हो कर रोना शुरू कर दिया. बेटी और बहू के रोने की आवाज सुन कर सोनू के मातापिता भी भागते हुए वहां पहुंच गए. सोनू की लाश देख कर चीखपुकार मच गई.

तभी पिंकी ने अपने मोबाइल से 100 नंबर पर पुलिस को फोन कर अपने भाई की हत्या की सूचना दे दी. थोड़ी देर बाद बादली थाने से एसआई मनीष कुमार वहां पहुंच गए. लाश को देखने के बाद उन्होंने पाया कि सोनू के गले पर एक स्याह निशान बना हुआ था. चूंकि मामला हत्या का था, इसलिए उन्होंने इस मामले की सूचना थानाप्रभारी अक्षय कुमार को दे दी.

थोड़ी देर में थानाप्रभारी अक्षय कुमार थाने में मौजूद पुलिस स्टाफ के साथ सिसोदिया मोहल्ला स्थित माधव सिंह के घर जा पहुंचे. घर की पहली मंजिल पर पहुंच कर उन्होंने लाश का मुआयना किया तो मृतक के गले पर गहरा स्याह निशान मिला.

ऐसा लग रहा था मानो किसी ने रस्सी या चुन्नी से उस का गला घोंटा हो. कमरे का बारीकी से निरीक्षण करने पर उन्होंने पाया कि सभी सामान अपनी जगह पर था. घर से कोई सामान गायब नहीं था. मतलब हत्यारा जो भी रहा हो, उस की मंशा सिर्फ सोनू की हत्या करने की रही थी.

थानाप्रभारी ने फोरैंसिक टीम को बुला लिया. मृतक के पिता माधव सिंह से पूछताछ की गई तो उन्होंने बताया कि रात के 12 बजे सोनू अपनी पत्नी हिमानी के साथ ग्राउंड फ्लोर से पहली मंजिल स्थित इस कमरे में आ गया था. इस के बाद सुबह 7 बजे हिमानी ने नीचे आ कर बताया कि सोनू की हत्या कर दी है.

यह सुन कर थानाप्रभारी अक्षय कुमार ने मृतक की पत्नी हिमानी से पूछताछ की. पति की मौत से बुरी तरह आहत हिमानी की स्थिति बहुत खराब थी. वह छाती पीटपीट कर लगातार रोए जा रही थी. उस ने बस इतना बताया कि वह डेढ़ साल की बेटी के साथ पति की बगल में सो रही थी. गरमी ज्यादा होने के कारण ये कमरे का दरवाजा खुला छोड़ कर सोते थे. पता नहीं रात में वहां कौन आया और इन की हत्या करने के बाद फरार हो गया.

थानाप्रभारी अक्षय कुमार ने उस वक्त हिमानी से ज्यादा पूछताछ करना उचित नहीं समझा. क्योंकि घर में सभी रोपीट रहे थे और माहौल गमगीन था. अलबत्ता उन्हें हिमानी पर शक हुआ.

फोरैंसिक एक्सपर्ट का काम निपट जाने के बाद उन्होंने एसआई मनीष कुमार तथा अन्य स्टाफ के साथ घर का मुआयना करना शुरू किया तो देखा बगल की छत उन की छत से मिली हुई थी. यह देख कर उन्होंने अनुमान लगाया कि हत्यारा संभवत: इसी रास्ते सोनू के कमरे तक पहुंचा होगा और वारदात को अंजाम देने के बाद चुपचाप इसी रास्ते फरार हो गया होगा. एसआई मनीष की भी यही सोच थी.

मौकामुआयना करने के बाद पुलिस टीम ने सोनू की लाश पोस्टमार्टम के लिए बाबू जगजीवन राम अस्पताल, जहांगीरपुरी भेज दी. वहां की सारी काररवाई पूरी करने के बाद पुलिस टीम थाने लौट गई.

10 सितंबर को मृतक की बहन पिंकी की शिकायत पर थाने में सोनू की हत्या का मामला सागर उर्फ बलवा और राहुल के खिलाफ आईपीसी की धारा 302 के तहत दर्ज कर लिया गया.

मामले की जांच खुद थानाप्रभारी अक्षय कुमार कर रहे थे. उन्होंने एसआई मनीष को कुछ निर्देश दे कर दोबारा मृतक के परिजनों को टटोलने के लिए उन के घर भेजा. वहां सभी ने सोनू की हत्या में पड़ोस में रहने वाले बदमाश सागर उर्फ बलवा पर शक जताया. एफआईआर में भी सागर को ही नामजद किया गया था.

पूछताछ के दौरान एसआई मनीष ने मृतक की पत्नी हिमानी को बुला कर उस से एक बार फिर पूछताछ की तो उन्हें ऐसा लगा जैसे वह जानबूझ कर इस केस का रुख दूसरी दिशा में मोड़ना चाह रही हो. यह देख कर उन्होंने उस का मोबाइल नंबर नोट कर लिया.

थाने लौट कर उन्होंने हिमानी के मोबाइल फोन की काल डिटेल्स निकलवाई और उस का बारीकी से निरीक्षण करने लगे.

काल डिटेल्स की जांच के दौरान वह यह देख कर चौंके कि हिमानी लगातार एक मोबाइल नंबर के संपर्क में थी. वारदात वाली रात में भी हिमानी ने इस नंबर पर काफी देर बात की थी. मनीष कुमार ने यह बात थानाप्रभारी को बताई तो उन्होंने उस नंबर की काल डिटेल्स निकालने के आदेश दिए. मोबाइल नंबर की जांच की गई तो नंबर उसी सागर उर्फ बलवा का निकला, जिस पर मृतक के पिता एवं परिवार के अन्य लोगों ने सोनू की हत्या का आरोप लगाया था.

यह देख कर थानाप्रभारी और एसआई मनीष के चेहरों पर मुसकराहट दौड़ गई. उन्हें लगा कि हत्यारा अब उन की पकड़ से ज्यादा दूर नहीं है.

11 सितंबर, 2019 की शाम को थानाप्रभारी अक्षय कुमार ने हिमानी को पूछताछ के लिए थाने बुलाया. पूछताछ के दौरान हिमानी मासूम बन कर चालाकी से पुलिस की जांच की दिशा भटकाने की कोशिश करती रही लेकिन जब उस के सामने उस की काल डिटेल्स दिखा कर उस के और सागर के रिश्तों के बारे में पूछा गया तो उस का हलक सूख गया.

कश्‍मीरी दम आलू की रेसिपी

कश्‍मीरी दम आलू खाने में बहुट स्वादिष्ट होता है और सभी को बहुत पसंद आता है. आप इस कश्‍मीरी दम आलू की रेसिपी खाने में जरूर बनाएं. आप सब को बहुत पसंद आएगा. तो चलिए जानते हैं कश्‍मीरी दम आलू की रेसिपी.

सामग्री :

आलू (7 मीडियम आकार के)

प्याज ( 01 नग)

लहसुन (06 कली)

अदरक ( 01 टुकड़ा)

हरी मिर्च ( 03 नग)

टमाटर ( 03 नग)

मलाई ( 02 बड़े चम्मच)

दही ( 01 बड़ा चम्मच)

जीरा (1/2 छोटा चम्मच)

हींग (01 चुटकी)

हल्दी पाउडर ( 01 छोटा चम्मच)

लाल मिर्च पाउडर (1/2 छोटा चम्मच)

कश्मीरी मिर्च पाउडर ( 1/2 छोटा चम्मच)

धनिया पाउडर (01 छोटा चम्मच)

गरम मसाला ( 1/2 छोटा चम्मच)

हरा धनिया  02 छोटे चम्मच (बारीक कटा हुआ),

नमक (स्वादानुसार)

तेल ( 06 बड़े चम्मच)

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बनाने की  विधि 

सबसे पहले आलुओं को छीलकर अच्छी तरह से धो लें और अब कांटे की सहायता से साबूत आलुओं में गहरे छेद करके उन्हें गोद लें.

आलुओँ को गोदने के बाद कढ़ाई में चार बड़े चम्मच तेल डालकर गर्म करें.

तेल गरम होने पर उसमें आलुओं को डालें और हल्का ब्राउन होने तक तल लें.

अब प्याज, हरी मिर्च, अदरक, लहसुन को मिक्सी में डाल कर बारीक पीस कर पेस्ट बना लें.

उसके बाद टमाटर को भी पीस कर उसका पेस्ट बना लें.

अब कढ़ाई में बचे हुए तेल में और तेल डाल कर गरम करें और तेल गरम होने पर उसमें हींग, जीरा डालकर एक मिनट तक भून लें.

इसके बाद प्याज, लहसुन, टमाटर का पेस्ट डालकर सुनहरा होने तक भूनें.

इसके बाद इसमें लाल मिर्च पाउडर, हल्दी पाउडर, धनिया पाउडर डालकर एक मिनट तक भूनें.

इसके बाद टमाटर का पेस्ट और मलाई को डालें और भूनें और जब मसाले तेल छोड़ने लगे, इसमें दही डाल दें और एक मिनट तक चलाएं.

उसके बाद तले हुए आलूओं को भी मसाले में डाल दें और अच्छी तरह से चला लें.

इसके बाद आप ग्रेवी को जितना पतला/गाढ़ा रखना चाहें, उसके हिसाब से पानी डालें और मध्यम आंच पर सात-आठ मिनट तक ढककर पकाएं.

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लव-सेक्स और धोखे के दलदल में फंसता यंगिस्तान

युवा पीढ़ी का नया जोश कब जग जाएगा यह कोई नहीं जानता, प्यार मुहब्बत के दौरान अगर इसी तरह का नयापन कों युवाओ उतेजित करे तों प्यार में थोडा सा इमोशन का तड़का लगा कर आप से शुरू होने वाला प्यार का अंत तू पर होता है.  सरल भाषा में कहे तो लव, सेक्स और धोखा का सिलसिला यंगिस्तान में खूब पनप रहा है. यह समस्या केवल युवाओ में ही नहीं पनप रही है, बल्कि  नवविवाहित जोड़ियां भी इस दलदल में धसते जा रहे हैं.

रिया शर्मा बहुत खुश थी अपनी जिन्दगी से, वह एक इंटीरियर डिजाईनर है और उनकी शादी कों 3 साल हो गये है. नेहा के पति (राकेश) एक विजनेस मैन है.  इन दोनों का जीवन मस्ती से कट रही थी कि अचानक एक दिन इनके घर में भूचाल आ गया . हुआ यूं  कि एक रात राकेश घर आते ही रिया से बोला  ‘मै  तुम्हारी दोस्त (शिल्पा) से प्यार करता हूं और ये सब पिछले एक साल से चल  रहा है.  ‘ राकेश की आंखे लाल हो रही थी और  उसके सामने खाड़ी रिया कुछ बोलने का हिम्मत नहीं कर पा रही थी, उसने आगे बोला  ‘मुझे इसके लिए कोई शर्मिंदगी नही है.’ यह सुनकर रिया की आंखे भर आई और उस वक्त तो वह कुछ नहीं बोली , लेकिन हर पल इस रिश्ते में दूरी बनती चली गयी. इस पुरे वाकये पर रिया बताती है कि यह सब सुनने के बाद उसका मन  उदास हो गया और अजीब सा दर्द महसूस होने लगा. छह महीनों तक हम साथ रहे लेकिन फिर तलाक के रास्ते को मैंने सही मानते हुए राकेश से दूर जाने का फैसला किया .

रिया की तरह कई महिलाओ कों यही समस्या है कि शादी के बाद उनके पति प्यार के इस रिश्ते मे धोखा देते है . कई महिलाओ का मानना  है कि  शादी के बाद अगर एक बार भी आपसी खिंचातानी होती है, तो इसका फायदा उनके पति उठाते हैं और शादीशुदा होने के बाद भी गर्लफ्रेंड बनाने से नहीं चुकते है. संबंधो के बीच दूरियां और लव, सेक्स, धोखा के इस खेल कों समझना थोडा मुश्किल जरुर है, लेकिन नामुमकिन नहीं.

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डौक्टर प्रीति रावत एक विशेषज्ञ (विवाह सलाहकार ) है,  इन मामलों के बारे में वह कहती है कि यह इन्सान के व्यवहार पर निर्भर करता है कि शादी के बाद अपनी पत्नी के साथ उचित संबंध बरकरार रखे. इससे किसी को पाबन्दी नहीं है कि वह एक ही शादी करे, अगर पहली पत्नी विवाह के लिए हामी भर्ती है तों आपकी जोड़ी में एक नया चेहरा जुड़ जाएगा .

विवाह की नीव सच्चाई और वादों पर रखी जाती है . अगर इस बींच थोड़े से भी शक की आशंका पनपती है तों समझो आपका रिश्ता अस्थिर हो रहा है . मुंबई में रहनेवाली मधुगुप्ता (समाजसेविका) का मानना है कि अगर कोई आपने साथी के साथ धोखा करता है तों सबसे पहले यह जानना जरुरी है कि किस जरुरतो के लिए उसने आपने साथी कों धोखा दिया.

विशेषज्ञों  ओर डौक्टरों का मानना  है कि आपसी रिश्ते में दूरियां और धोखे का खेल बिना किसी कारण के नहीं होता भावुकता, नास्तिकता और कुछ खास बाते जिन पर विचार  कर इन्हें दूर किया जा सकता है . अगर आप सभी कारणों को जानने और पूरी तरह समझने के बाद संयम से अपने साथी से बात करते है , तो एक हद तक आपके बीच बनी दूरियां समाप्त होती है.

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बहुत से मामलों में कोशिश ही नहीं किया जाता है कि युवा अपने बहके पार्टनर को समझा-बुझा कर पहले की तरह बना सके. लेकिन जो लोग इस तरह के मामलों में कोशिश करते  है,  उन्हें इसमें जरुर सफल मिलाती है .

 छोटे-छोटे पत्तें बड़े काम के …

प्रकृति के पेड़-पौधों की पत्तियों में कई पत्तियों का हमारे सेहत के लिए में ऐसे गुण समाहित हैं जो अनेक बीमारियों को जादू की तरह दूर करने में सक्षम होते हैं. अगर हम प्रकृति प्रदत्त उपहारों का सहयोग लें तो अनेक बीमारियों को जड़ से उखाड़कर फेंका जा सकता है तथा अनेक बीमारियों से सुरक्षित भी रहा जा सकता है. हम अनेक पेड़ों की पत्तियों को अपने औषधीय प्रयोगों में किस प्रकार ला सकते हैं, आईये जानते हैं.

नीम की पत्तियां : नीम की पत्तियों में अनेक औषधीय गुण होते हैं. कड़वी नीम की पत्तियों को ही औषधीय कार्य में प्रयोग किया जाता है. नीम के पत्तों को आटे के साथ पलटिस बनाकर फोड़े पर बांधा जाये तो फोड़ा बैठ जाता है. इसके पत्तों को पीसकर घाव में लगाने से घाव जल्दी भर जात है. पत्ते के रस को एक चम्मच की मात्रा में एक सप्ताह तक बासी मुंह पीते रहने से पेट के कीड़ मर जाते हैं. इसके सेवन से प्राय: सभी प्रकार के चर्म रोग नष्ट हो जाते हैं. रक्तशोधक के रूप में नीम प्रख्यात है.

चुकन्दर के पत्ते :  कान की पीड़ा बंद न हो रही हो तो चुकन्दर के पत्तों का रस गुनगुना करके दो-दो बूंदें दोनों कानों में डालिये. तीन-तीन घंटों में डालते रहने से कर्णशूल निश्चित ही दूर हो जाता है. चुकंदर के पत्तों को लेकर साबुत हल्दी के साथ पानी का छींटा देकर बारीक पीस लीजिए. सिर पर इसका लेप करते रहने से सिर का गंजापन मिट जाता है. इसे प्रात: सायं नियमित लगाइए. सर्दी लगकर अगर मासिक स्राव रूक गया हो तो दो चम्मच की मात्रा में चुकंदर के पत्तों का रस जरा-सा नमक डालकर दिन में तीन बार पीने से मासिक स्राव प्रारंभ हो जाता है. गर्भावस्था में इसका सेवन न करें.

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बबूल के पत्ते : अगर पुरानी खांसी हो या खांसने पर सीने में दर्द होता है या खांसने पर मुंह से खून का अंश आता हो तो बबूल के कोमल पत्तों को पानी में खौला कर दिन में तीन बार तक पीने से उक्त सभी परेशानियों दूर हो जाती हैं. इसी शीतोष्ण जल में प्रतिदिन सुबह-शाम उत्थित लिंग को दस मिनट तक डुबोये रखने से शीघ्रपतन की बीमारी नष्ट हो जाती है.

केले का पत्ता :  केले के पत्ते में अनेक चर्म रोगों को दूर करने की शक्ति होती है. केले के पत्तों को जलाकर उसकी बारीक राख में नारियल तेल को मिलाकर चर्म रोग वाले स्थान पर लगाते रहने से अविश्वसनीय लाभ मिलता है. इस प्रयोग से पुराने से पुराने घाव, दाद, एक्जिमा, खुजली, अपरस आदि में लाभ होता है. केले के पत्तों के रस में मेंहदी के पत्तों के रस को मिलाकर एक कप गर्म पानी में मिला दें. जब पानी सहने योग्य हो जाये तो इससे योनि के भीतरी भाग को धोने से योनिगत अनेक विकार ठीक होते हैं, साथ ही कमाशीलता की व्याधि भी नष्ट होती है.

बिल्वपत्र :  बेल का औषधि रूप में प्रयोग अति प्राचीन काल से ही किया जा रहा है. बेल के फल और पत्तों में अनेक रोगों की सफल चिकित्सा छिपी रहती है. गर्भवती स्त्री की उल्टियों में चार बिल्वपत्र लेकर उसका रस निकालकर उसे एक कप मांड के साथ मिलाकर उसमें जरा सी मिश्री मिलाकर दिन में तीन बार पिला देने से भयंकर उल्टियां आनी बंद हो जाती हैं. बिल्वपत्र रस के एक चम्मच में नागकेसर और रसौंत की एक-एक चुटकी मिलाकर दिन में दो-तीन बार पिलाते रहने से ल्यूकोरिया के साथ ही रक्त प्रदर की शिकायतों में भी अप्रत्याशित लाभ होता है.

खजूर के पत्ते : खजूर के पत्तों को जलाकर बासी पानी के साथ खाली पेट सुबह पीने से सभी प्रकार की बवासीर (खूनी-वादी) से छुटकारा मिल जाता है. कुछ सप्ताह तक निरंतर प्रयोग करना चाहिये. खजूर के पत्तों को भस्म, मेहंदी के पत्तों की भस्म व अमरूद के पत्तों के भस्मो को समान भाग में बारीक लेकर जैतून के तेल में मिलाकर (छानने से पूर्व कुछ गरम कर लें) रख लें. इस तेल से स्तनों पर नित्य 15-20 मिनट तक मालिश करने से स्तन पुष्ट व विकसित होते हैं. इसी तेल से लिंग पर नित्य मालिश करने से उसकी मोटाई व स्तनम्भन की शक्ति में वृध्दि होती है.

बेर के पत्ते : बेर तथा नीम के पत्तों को समान-मात्रा में लेकर पानी में डालकर उबाल लें. इस पानी से बालों को धोने से बाल झड़ना निश्चित रूप से रुक जाता है. जब तक बालों का झड़ना न रुके, तब तक साबुन या शैम्पू का इस्तेमाल नहीं करना चाहिये. बाल झड़ने की बीमारी यदि नयी है तो एक-डेढ़ सप्ताहों में ही बाल झड़ने बंद हो जाते हैं.

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संतरे का पत्ते :  संतरे के पत्ते के रस को मंद-मंद गर्म करके दो-दो चम्मच करके प्रतिदिन पिलाने से उल्टी, अपच, पेट व छाती की जलन दूर हो जाती है. इस रस के साथ कंधारी अनार के पत्तों का दो चम्मच रस नित्य पीते रहने से पुरानी खांसी, पायरिया, अपच, दुर्बलता, लिंग के उत्थान में बाधा, जिगर की गर्मी आदि कई बीमारियां दूर होती हैं.

पुलिस या अदालत में जब बयान देने जाएं!

वंदना राजकीय विद्यालय में अध्यापिका थी. जब उस के घर पर पुलिसकर्मी ने दस्तक दी तो वह चौंक गई. सहमते हुए उस ने कमरे की खिड़की से  झांक कर पूछा कि क्या चाहिए, तो जवाब मिला- ‘अदालत का समन है.’ पहले तो वरदीधारी रोबीला पुलिसकर्मी, फिर अदालत का समन उस के नाम? उस की सम झ में नहीं आया कि आखिर माजरा क्या है.

बाहर जा कर मूंछों वाले पुलिसकर्मी से डरते हुए समन ले कर पढ़ा तो मालूम हुआ कि अदालत ने उसे अगले महीने की 20 तारीख को बयान देने के लिए तलब किया है. समन 2 प्रतियों में था. पुलिसकर्मी ने मूल समन पर वंदना से समन प्राप्ति के हस्ताक्षर करवा कर समन की कार्बन प्रति उसे सौंप दी.

वंदना ने स्कूल की पिं्रसिपल से पूछा कि उसे अब क्या करना होगा. परंतु पिं्रसिपल कोई मार्गदर्शन नहीं दे पाईं. फिर वह समन की प्रति ले कर परिचित वकील के घर गई तो उसे बताया गया कि 2 साल पहले स्कूल की परीक्षा के दौरान निरीक्षण दल ने एक छात्र को नकल करते हुए पकड़ा और पुलिस केस बना दिया था. उसी केस में उसे अदालत में बयान देने हेतु तलब किया गया है. वकील ने उसे यह भी बता दिया कि उसे अदालत में 10 बजे पहुंच कर सरकारी वकील से संपर्क करना चाहिए.

अगले महीने की 20 तारीख को अदालत पहुंच कर वंदना ने सरकारी वकील को समन दिखाया तो उस ने अपनी फाइल देख कर कहा कि आप को अदालत में बयान देना है कि नकल करने वाले विद्यार्थी की उत्तरपुस्तिका आप के सामने पुलिस ने जब्त की थी.

उस ने वैसा ही किया. जब अदालत के अर्दली ने उस का नाम पुकारा तो वह गवाहों के लिए बनाए गए कठघरे में जा कर खड़ी हो गई. जो बातें सरकारी वकील ने उसे सम झाईर् थीं उस ने वे सब बातें अदालत को बता दीं. जिन दस्तावेजों पर उस के दस्तखत थे, उन दस्तखतों की भी वंदना से पहचान कराई गई. फिर उस नकलची विद्यार्थी के वकील ने उस से जिरह करते हुए 2-3 सवाल पूछे. इस तरह वंदना की गवाही पूरी हुई. उस ने राहत की सांस ली.

जब वह अदालत से निकलने लगी तो उस के परिचित वकील मिल गए. उन के कहने पर उस ने अदालत से ड्यूटी प्रमाणपत्र भी हासिल कर लिया. अब उसे स्कूल से छुट्टी लेने की जरूरत नहीं है. उसे ‘ड्यूटी’ पर माना जाएगा.

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बयान न्याय की बुनियाद

यह जगजाहिर है कि अदालत के फैसले गवाहों के बयानों और सुबूतों के आधार पर होते हैं. गवाहों को अदालत सम्मान की दृष्टि से देखती है. गवाहों के बयान ही न्याय की बुनियाद होते हैं. यदि कोई व्यक्ति किसी सरकारी केस में गवाही देने अदालत जाता है तो अदालत तक आनेजाने तथा खानेपीने का खर्च भी सरकार द्वारा वहन किया जाता है. इस की वजह यह है कि वह न्याय करने में अदालत का सहयोग करता है.

प्रत्येक आपराधिक मामला राज्य के खिलाफ माना जाता है. सो, पीडि़त पक्ष की ओर से सरकारी वकील द्वारा पैरवी की जाती है. सरकारी केस में गवाहों के बयान करवाना सरकारी वकील की जिम्मेदारी है. सो, जब कभी किसी व्यक्ति के पास गवाही के लिए समन आए तो उसे निश्चित तारीख को अदालत जा कर सरकारी वकील से संपर्क करना चाहिए. घटना या दुर्घटना के कई दिनों बाद अदालत में पीडि़त व्यक्ति को बयान देने के लिए बुलाया जाता है.

इतने लंबे अंतराल की वजह से घटना की कई बातें व्यक्ति के दिमाग से निकल जाती हैं. याददाश्त को ताजा करने के लिए सरकारी वकील की केस फाइल देख कर भूली बातें याद आ जाती हैं. अदालत में वारदात को तफसील से बयान करना पीडि़त पक्ष के केस को मजबूत बनाता है.

जिस व्यक्ति को अदालत गवाही के लिए समन भेजे, उस व्यक्ति पर कानूनी बाध्यता है कि वह तारीख पेशी पर अदालत पहुंचे. फरीद समन मिलने के बाद भी तारीख पेशी पर नहीं पहुंच पाया. अदालत ने उस के खिलाफ जमानती वारंट जारी कर दिया. एक पुलिसवाला, फरीद के औफिस में जमानती वारंट ले कर पहुंचा तो फरीद को एक साथी से यह लिखवा कर देना पड़ा कि यदि फरीद गवाही देने तारीख पेशी पर हाजिर होने से चूक गया तो वह एक हजार रुपए अदालत में जमा करा देगा. इस प्रकार फरीद के साथी की जमानत पर उसे पाबंद किया गया. वह तो अच्छा रहा कि फरीद दूसरी तारीख पेशी पर अदालत पहुंच कर गवाही दे आया, वरना उस की जमानत की रकम जब्त हो जाती और उस के खिलाफ गैरजमानती वारंट जारी कर दिया जाता.

जमीनजायदाद के मामले निजी प्रकृति के होते हैं. इसलिए पक्षकारों को अपनी पैरवी करने हेतु वकील की नियुक्ति भी स्वयं करनी पड़ती है. सिविल प्रक्रिया संहिता में हुए संशोधन के बाद गवाहों को अपने बयान शपथपत्र पर लिख कर अदालत में पेश करने होते हैं. विरोधी पक्ष का वकील इसी शपथपत्र में लिखे बयानों के आधार पर ही अपनी जिरह में सवाल पूछता है, जिन का जवाब गवाह को देना होता है. सिविल मामलों में गवाही देने वाले गवाह को गवाही से पहले अपने शपथपत्र को अच्छी तरह पढ़ लेना चाहिए ताकि जिरह के सवालों का वह माकूल जवाब दे सके.

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दस्तावेज की अहमियत

शिवचरन एक बैंक में मैनेजर थे. उन के बैंक ने एक?ऋणी के खिलाफ ऋण वसूली का मुकदमा कर रखा था. वे गवाही देने अदालत पहुंचे. जब उन के बयान शुरू हुए तो मालूम हुआ कि ऋण का मूल एग्रीमैंट तो वह साथ ले कर ही नहीं आए. अदालत में बयानों के समय मूल दस्तावेज पर मार्क लगवाना अनिवार्य है. बिना मूल दस्तावेज के शिवचरन के बयान पूरे नहीं हो पाए. अदालत ने अगली तारीख पेशी पर ऋण के सभी दस्तावेज ले कर आने की हिदायत दी.

अगली तारीख पेशियों पर बैंक का औडिट होने के कारण शिवचरन अदालत नहीं आ सके. इस तरह कई मौके देने के बाद अदालत ने बैंक की गवाही का अवसर समाप्त करते हुए बैंक का दावा खारिज कर दिया. बैंक अब ऋण की रकम वसूल नहीं कर सकेगा. यदि उस दिन शिवचरन?ऋण के मूल दस्तावेज ले कर अदालत चले जाते तो उन के बयान हो जाते और दावे का फैसला बैंक के पक्ष में होता.

जमीनजायदाद के मुकदमों में दावे के साथ ही दस्तावेजों की प्रामाणिक प्रतिलिपियां पेश करनी होती हैं. गवाही के समय उन दस्तावेजों पर अदालत का मार्क डाला जाता है. मार्क डालने के लिए मूल दस्तावेज का पेश किया जाना अनिवार्य है. यदि मूल दस्तावेज न होगा तो अदालत मार्क नहीं डालेगी. जब किसी दस्तावेज पर मार्क नहीं डाला जाता तो उस दस्तावेज को साबित नहीं माना जा सकता. दस्तावेज के साबित न होने पर खिलाफ फैसला हो जाता है. सो, यह जरूरी है कि मुकदमे में कामयाबी के लिए महत्त्वपूर्ण मूल दस्तावेज गवाही के समय अदालत ले जाना चाहिए.

व्यवहार में यह भी देखने में आया है कि मुकदमे को संगीन रूप देने के मकसद से बयानों में ऐसी बातें लिखा दी जाती हैं जो गवाह के पुलिस को दिए बयानों में लिखी हुई नहीं होती हैं. पुलिस बयान तफतीश के दौरान लिखे जाते हैं. लेकिन इस पर बयानकर्ता के हस्ताक्षर नहीं होते हैं. जब कोई गवाह ऐसी बात अदालत के बयानों में बताता है जो उस के पुलिस बयानों में न हो या फिर ऐसी बात कहता है जो उस के पुलिस बयानों को गलत साबित करती है, तब अदालत के सामने यह सवाल उठता है कि वह गवाह के पुलिस बयानों को सही माने या अदालत के बयानों को.

अदालतों के विभिन्न फैसलों में कहा गया है कि पुलिस बयानों और अदालती बयानों में यदि गंभीर विरोधाभास हो तो मामले की सत्यता और विश्वसनीयता दोनों ही संदेह के घेरे में आ जाती है. सो, अदालत में बयान देते समय पुलिस को दिए गए बयानों को ध्यान में रखना अच्छा माना जाता है.   द्य

गवाहों के बयान ही न्याय की बुनियाद होते हैं क्योंकि अदालत के फैसले गवाहों के बयानों और सुबूतों के आधार पर होते हैं. सो, पुलिस थाने या अदालत में जब बयान देने जाएं तो कुछ बातें ध्यान में रखें.

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 कानूनी प्रावधान

पुलिस के बुलाने पर संबंधित अधिकारी को घटना की विस्तृत जानकारी देनी चाहिए.

अदालत के समन पर नियत तिथि और समय पर न पहुंचना दंडनीय अपराध है.

अदालत में  झूठी गवाही देने पर सजा हो सकती है.

सरकारी गवाह को अदालत द्वारा ड्यूटी प्रमाणपत्र और परिवहन का खर्चा दिया जाता है.

घटना की सत्यता का वर्णन करने पर ही न्याय संभव है.

यदि आप के पास मुकदमे से संबंधित दस्तावेज है, तो उसे बयान देते समय अदालत में पेश करना आवश्यक है.

CHRISTMAS 2019 : ऐसे पाएं दमकती त्वचा

इस क्रिसमस अगर आप भी खूबसूरत दिखने के साथ दमकती त्वचा पाना चाहती हैं तो कपड़ो और ज्‍वेलरी के साथ अपनी त्‍वचा पर खास ध्यान दें. अब इसका मतलब ये नहीं कि अपने चेहरे पर खूब सारा मेकअप लगा लें, क्योंकि त्‍वचा पर चमक मेकअप से नहीं बल्कि अंदर से आना चाहिये. अंदर से चमक लाने के लिये आपको कुछ टिप्‍स का प्रयोग करना चाहिये जिससे क्रिसमस की रात हर कोई केवल आपको ही देखता रहे.

आजमाइये यह टिप्‍स

इन दिनों आप अपने चेहरे पर फ्रूट फेस पैक भी लगा सकती हैं. सेब और पपीते को एक साथ पीस लीजिये और उसमें एक दो पिस केला भी मिला लीजिये. इस मिश्रण में नींबू का रस और दही भी मिलाया जा सकता है. इसे अपने चेहरे पर लगाइये और आधे घंटे छोड़ कर पानी से धो लीजिये. इससे स्‍किन पर ग्‍लो आएगा और टैनिंग भी हटेगी.

अगर आपकी स्किन औयली या ड्राई है तो आप फ्रूट फेस पैक के अलावा नीचे दिए गए फेस पैक का इस्तेमाल कर दमकती त्वचा पा सकती हैं.

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औयली स्‍किन के लिए फेस पैक

फेस पैक से आप चमकदार त्‍वचा पा सकती हैं. यदि आपकी स्‍किन औयली है तो उसपर टमाटर का मास्‍क लगाएं. एक पका हुआ टमाटर लें और पीस कर अपने चेहरे पर 15 से 20 मिनट के लिये लगाएं और जब वह सूख जाए तब हल्‍के गरम पानी से धो लें.

ड्राई स्‍किन के लिए फेस पैक

यदि स्‍किन रूखी है तो उस पर केले का मास्‍क लगाइये. केले को मैश कीजिये और उसमें कुछ बूंदे शहद की मिलाइये और चेहरे तथा गदर्न पर 15 मिनट के लिये लगाइये और सूखने के बाद हल्‍के गरम पानी से धो लीजिये.

– त्‍वचा को नम बनाने के लिये मौइस्‍चराइजर लगाइये. कोशिश कीजिये कि मौइस्‍चराइजर तेल वाला हो. इसी के साथ ज्‍यादा तला-भुना खाना और फास्टफूड खाने से परहेज करें नहीं तो पिंपल की समस्‍या आपको झेलनी पड़ सकती है.

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– क्रिसमस पार्टी में जाते समय वाटरप्रूफ मस्‍कारा, आईलाइनर और ट्रांसफर रेजिस्‍टेंट लिपस्‍टिक लगाइये जिससे मेकअप मुंह पर फैले नहीं.

– इन सभी ब्यूटी टिप्स के अलावा आप खूब सारा पानी पीजिये. आपको दिनभर में करीबन 8 से 10 गिलास पानी पीना ही चाहिये. इससे स्‍किन साफ होगी और चमकदार भी बनेगी.

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महाराष्ट्र में शिवसेना राज

शिवसेना और भारतीय जनता पार्टी दोनों अलग दल थे पर  बयानबाजी के बावजूद उन दोनों को कभी अलग दल नहीं माना गया. पर फिर भी शिवसेना को कहीं कोई चीज लगातार खलती रही कि उस के साथ कुछ भेदभाव हो रहा है, उसे उस की मेहनत का पूरा फल नहीं मिल पा रहा या नहीं दिया जा रहा.

यह कोई नई बात नहीं है. शिवाजी के मराठा सम्राट बनने के समय से ही सहायता और सलाह देने के नाम पर ब्राह्मणों ने मराठा राजाओं पर वैसा ही कब्जा कर लिया था जैसा कृष्ण ने पांडवों पर कर रखा था. महाभारत चाहे कथा ही हो पर इस की कहानी इतनी बार दोहराई जाती है कि भारतीय जनमानस में यह गहरे बैठ गई है कि राज तो सलाहकार चलाते हैं, राजा नहीं. दशरथ के राज में भी चलती ब्राह्मण सलाहकारों की थी. यह सच है कि जब भी हिंदू राजाओं ने राज किया है, कोईर् न कोई चाणक्य उन के पीछे लग गया.

यह परंपरा आज तक चल रही है. और शिवसेना इसी की शिकार हो रही थी. शिवसेना को चाहे पिछले कई चुनावों में सीटें कम मिलती रही हों पर यह पक्का है कि शिवसेना के बिना भारतीय जनता पार्टी का महाराष्ट्र में टिकना असंभव है.

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महाराष्ट्र में मेहनतकश पिछड़ों को बाल ठाकरे ने कांग्रेस और कम्युनिस्टों से अलग कर ‘जय मराठा’ के नाम पर अपने  झंडे तले ला खड़ा किया था. भारतीय जनता पार्टी की महाराष्ट्र में ही नहीं, हर जगह उस की जीत का कारण किसानों, कारीगरों, पूर्व व वर्तमान सैनिकों का समूह है जो भगवाई सीढ़ी चढ़ने को इतने उतावले हैं कि वे अपनी मेहनत की कमाई का बड़ा हिस्सा पूजापाठ के पाखंड में भी उडे़लते हैं और राजनीति में सवर्णों के चरणों में भी डाल लेते हैं. लेकिन इस बार शिवसेना के मुखिया उद्धव ठाकरे अड़ गए कि वे पालकी ढोएंगे ही नहीं, पालकी में बैठेंगे भी चाहे भाजपा की 105 सीटों के मुकाबले उन की 56 सीटें ही क्यों न हों.

यह जातीय दंश है कि ऊंचे देवेंद्र फडणवीस और उन के आकाओं का ढाई साल के लिए भी उद्धव ठाकरे को गद्दी देने का मन न हुआ. ‘साहूजी महाराज को कोल्हापुर भेज दो, पूना से तो पेशवा ही राज करेंगे’ वाली मनोवृत्ति से भाजपा निकल नहीं पाई. नतीजा यह हुआ कि महाराष्ट्र में अब एक ऐसी सरकार बनी है जिस में मराठों का वर्चस्व है जबकि ऊंचे गिनती में थोड़े से हैं.

शिवसेना को अब अपनी घोषित नीतियों में परिवर्तन करने होंगे. पर यह भी साफ है कि  शिवसेना के आम कार्यकर्ता या समर्थक ऊंचे, नीचे व विधर्मी लोगों के साथ ही घुलमिल कर रहते हैं. उन का जीवन आपस में एकदूसरे के साथ बीतता है, न कि राममंदिर या गणपति पूजन पर. वे कट्टरपंती अपने आकाओं को खुश करने के लिए दिखाते रहे हैं. उन्हें अपना चोला बदलने में कठिनाई नहीं होगी क्योंकि अब उन्हें सलाह लेने के लिए शिक्षित ऊंचों के पास नहीं जाना पड़ेगा. मराठों में आज पूरी तरह शिक्षित, विचारकों और प्रशासनिक अफसरों की कमी नहीं है कि वे लिखनेपढ़ने के लिए जातिविशेष पर निर्भर रहें, जैसे कभी उत्तर प्रदेश में मायावती या हरियाणा में देवीलाल निर्भर रहे थे.

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कोई राज्य मूर्तियों या पूजाओं से नहीं समृद्ध बनता. राज्य को तो मेहनतियों की जरूरत होती है. लेकिन जहां मेहनतकश किसान सब से ज्यादा आत्महत्याएं कर रहे हैं, वहां का प्रबंध कुछ खराब है, यह स्पष्ट है. शिवसेना का मुख्यमंत्री यदि कुछ साल रहा, तो महाराष्ट्र की तसवीर बदल सकती है और इस में योगदान नेताओं का इतना ही होगा कि वे अपना काम करें और आम जनता को अपना काम करने दें, जनता को धार्मिक या क्षेत्रीय विवादों में न उल झाएं.

सोशल मीडिया पर वायरल हुई ‘नागिन’ की अदाएं

कलर्स टीवी पर प्रसारित होने वाला मशहूर शो ‘नागिन’ 4  में ‘निया शर्मा’  इन दिनों काफी धमाल मचा रही हैं.  जी हां, इस शो में ‘निया शर्मा’  फ्रेंचाइजी नागिन का किरदार निभा रही है. दर्शक उनके इस किरदार को खुब पसंद कर रहे हैं.

इस सीरियल के अलावा  ‘निया शर्मा’ अपने बाकी प्रोजेक्टस को पूरा करने में लगी हुई है. हाल ही में निया ने सोशल मीडिया पर काफी तस्वीरों को शेयर किया है.

निया ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर अपने डांस वीडियो की तस्वीरें और वीडियो शेयर किए है, जो कि सोशल मीडिया पर खुब वायरल हुए.

इन तस्वीरों और वीडियो में निया लाल रंग की खूबसूरत सी ड्रेस में नजर आ रही है. तस्वीरों और वीडियो में निया का अंदाज तो देखते ही बन रहा है. आपको बता दें, सीरियल नागिन 4 में निया शर्मा  लीड रोल अदा कर रही है और इस शो के लिए उन्हें वाहवाही मिल रही है.

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दो साल पहले एशिया की सेक्सिएट वूमेन की लिस्ट में निया का दूसरा दूसरे स्थान पर थी. निया ने इस खिताब को पाने के बाद कभी भी पीछे मुड़कर नहीं देखा और अब उनके हाथ में एक से बढ़कर एक प्रोजेक्ट है.

छोटी सरदारनी : हम सबमें बसती है एक ‘मेहर’

छोटी सरदारनी की मेहर इन दिनों काफी चर्चा में है. दरअसल, मेहर का किरदार ही कुछ ऐसा है कि हर आम लड़की खुद को उससे जुड़ा हुआ महसूस कर सकती है. शायद यही वजह है कि ये शो कम समय में काफी मशहूर हो गया है और टीआरपी चार्ट्स की टॉप 5 की लिस्ट में भी पहुंच गया है. तो चलिए आपको बताते हैं मेहर की वो खूबियां जो आपको अपने अंदर भी देखने को मिलेगी.

1. जड़ों से जुड़ी हुई

एक कॉलेज गर्ल से लेकर एक बच्चे की सौतेली मां बनने तक का सफर मेहर ने बहुत जल्दी तय कर लिया. लेकिन फिर भी वो अपनी जड़ों से जुड़ी है. भले ही उसकी मां ने उससे उसका प्यार छीन लिया हो, लेकिन फिर भी वो अपने परिवार के बारे में सोचती है और उनकी हर मुश्किल में उनके साथ होती है. वो अपने आदर्शों से कभी समझौता नहीं करती. भले ही सरबजीत और वो पति-पत्नी का रिश्ता कायम न कर पाए हो, लेकिन वो एक आदर्श बहू और मां के सारे फर्ज पूरे करती है.

2. निडर

 

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Beware of the brother-sister duo ?

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हालात चाहे कितने ही मुश्किल क्यों न हो मेहर हमेशा अपने दिल की सुनती है और वही फैसला लेती है जो उसे सही लगता है. फिर चाहे इसके लिए उसे कितनी ही तकलीफ क्यों न उठानी पड़े. आज की दौर की महिलाएं भी ऐसी ही तो हैं.

3. बच्चों की फेवरेट

 

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Wishing you all the happiness, always. Happy Children’s Day cutie ❤️?

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कहने को तो परम, मेहर का सौतेला बेटा है, लेकिन मेहर की जान परम में बसती है और परम भी उसे बेहद प्यार करता है. मेहर न सिर्फ परम की फेवरेट है बल्कि अपने भतीजे युवी के भी काफी करीब है. इसका मतलब ये है कि वो बच्चों के बेहद करीब है. असल जिंदगी में भी महिलाओं को बच्चों से काफी लगाव होता है.

4. भगवान पर भरोसा

 

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Wishing everyone a very happy and blessed gurupurab. Satnam Waheguru ?

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मेहर को अपने बाबा जी पर पूरा भरोसा है. वो एक सच्ची सरदारनी है. भले ही उसने जिंदगी में मुश्किल हालत देखे हो, लेकिन अपने भगवान से उसका भरोसा कभी नहीं डगमगाया. अगर आप गौर करें तो रियल लाइफ में आपके साथ भी तो ऐसा होता है कि भले ही आपके मुताबिक चीजें न हो रही हो, लेकिन भगवान से आपका भरोसा टूटता नहीं है.

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5. मॉर्डन

 

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my fam away from fam gave me the best surprise ever. forever grateful. ♥️

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मेहर जितनी संस्कारी है उतनी ही मॉर्डन भी है. वो जीप चलाती है, महिलाओं के हक के लिए बात करती है और अपने परिवार की हर मुश्किल में बराबरी से खड़ी होती है. जैसा कि हम सब करते हैं. नए जमाने में हम मर्दों से कंधे से कंधा मिलाकर चल रहे हैं, लेकिन अपने परिवार का भी पूरा ख्याल रखते हैं.

मेहर की ये जर्नी देखकर हम कह सकते हैं कि हम सबके अंदर भी एक मेहर है और हमारी कहानी भी बिल्कुल मेहर की तरह है जिसमें प्यार से बिछड़ने का दर्द है तो परिवार के लिए कुछ कर गुजरने का जज्बा भी है. मतलब आपकी और हमारी जैसी ही तो है मेहर की कहानी.

नाइट फिवर के माया जाल : डूबता युवा संसार

महानगरों में जैसे-जैसे रात ढलती है, शहर के कई ठिकानों पर मिलना मिलवाना के साथ-साथ ड्रग्स और वाइन की आगोस में कई पार्टियों का आयोजन होता है. इन पार्टियों को नाइट फिवर के नाम से भी जाना जाता है. लेट नाइट पार्टी यानी खूब हल्ला-गुल्ला, पीना-पीलाना और मदमस्त हो कर डीजे के रिदम पर थिरकना. छोटे-बड़े नगरों एवं महानगरों में इस तरह के पर्टियों का चलन तेजी से बढ़ रहा है. रात के दस बजे नहीं कि शहर के सभी पबों और क्लबों पर नवयुवक नवयुवतियों की टोली का जमावड़ा लगना शुरू हो जाता है. मस्ती के नाम पर रात के अंतिम पहर तक चलने वाली यह पार्टी प्यार जताने, सब कुछ भुलाने और एक नई दुनिया में मस्त होने का पैगाम लिए नवयुवकों का स्वागत करती है. इस पार्टी में अगर बात नये वर्ष के स्वागत पार्टी की बात हो तों माजरा  और कुछ बदला होता है, मस्ती और मनोरंजन का अनोखा यह आयोजन सारे सीमाओ कों तोड़ते हुए नवयुवको कों एक नये युग में ले जाती है.

दो घुट पीला दे साकिया….  जैसे गीतों के साथ जाम से जाम टकराती है और शुरूआत होती है, एक मदमस्त पार्टी की, जहा हर शीला जवान, मुन्नी बदनाम होती है और पप्पू पास होता है. मस्ती के लिए कुछ भी करेगा रे, इस पार्टी का मूल मंत्र होता है. शराब के अनेकों प्रकार- बियर, वोडका और कई प्रकार के नशीले पदार्थ (ड्रग्स, दवा) हर पल इस पार्टी में जान डालने की कोशिश करते है . जैसे-जैसे रात ढलती है पार्टी और जवां होती है. शराब के नशे में धूत नव युवक इस पार्टी में इतने रम जाते है. जैसे-जैसे समय गुजरता है उनका अपने आप से नियत्रण खोने लगता है, शराब के नशे का असर दिल और दिमाग पर पड़ता जाता है. और शराब के साथ शबाब का नशा भी हर किसी के सर चढ कर बोलता है.

तोड़ी सी जो पी ली है चोरी तो नहीं की है… इस पार्टी में ऐसी फिल्मी लाइन हर किसी के जुबान से अनयास ही निकलते रहती है, तो कोई हमका पीनी है पीनी है.. हां हमें और पीनी है की बात करता है, तो कोई बिन जाम को छलकाए गाता है, छलक-छलक जाए रे मेरा ज़ाम, एक तरफ फिल्मी गानों के रंगों में ढलने की पुरी कोशिश जहा नवयुवक करते हैं, वही दुसरे तरफ नवयुवकों की एक टोली पश्चिमी सभ्यता की अगुवाई करते हुए आमोद-प्रमोद एवं आलिंगन का ऐसा दृश्य प्रकट करते हैं, जिसे बयां करने के लिए जहा एक तरफ हिन्दी के शब्द तैयार नहीं है. वहीं दुसरे तरफ भारतीय सभ्यता इसे मंजुरी नही देती.

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भारतीय सभ्यता के विपरीत और पश्चिमी सभ्यता के अनुकुल इस पार्टी में मौज मस्ती के लिए कुछ भी करने के लिए तैयार दिवाने और दिवानियों की टोली मस्ती में भी कोई कसर नहीं छोडऩा चाहती. इस लिए हर प्रकार के टेंशन से मुक्त हो कर, काम-काज और किताबों से काफी दुर आकर नवयुवकों का एक बड़ा समुह सुरा-सुुंदरी और नशे के रंग में हर पल गोते लगाने को तैयार रहते हैं.

 क्या है लेट नाइट पार्टी – लेट नाइट पार्टी का अर्थ नाम से ही स्पष्ट होता है, रात्री के अंतिम पहर तक चलने वाली पार्टी. यु कहे तो लेट नाइट पार्टी यानी खूब हल्ला-गुल्ला, पीना-पीलाना और मदमस्त हो कर डीजे के रिदम पर थिरकना. इस तरह की पार्टियों में सुरा-सुुंदरी और नशा का माया जाल नित्य कई नये युवाओं को अपने आगोश में ले रहा है.

शुरूआत कब और कहा हुआ- लेट नाइट पार्टियों की शुरूआत कुछ साल (15 – 20   साल) पहले गोवा से हुई. फिर धीरे – धीरे दिल्ली, मुम्बई, बैंगलुरू, पुणे, कोलकाता और चेन्नई सहित हर बड़े शहर में फैलती चली गई. आज के समय में भारत के कई शहर इस नाइट फिवर के आगोश में आ गये हैं. पंजाब के कई शहर पटियाला, चंडीगढ़, लुधियाना एवं अंबाला, राजस्थान का जयपुर, महाराष्ट्र का पुणे, नासिक, मुम्बई और औरंगाबाद, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में नोएडा, फरीदाबाद, गाजिय़ाबाद, गुडगांव एवं दिल्ली के कई ठिकानों के साथ-साथ उश्रर प्रदेश के लखनऊ के फौर्महाउस और देश के कई गुप्त ठिकानों पर क्लबों और डिस्कों में इस प्रकार की पार्टी रात होते ही जवां हो जाती हैं. नव वर्ष के स्वागत  पर इस तरह के पार्टियों का आयोजन हर बड़े शहर और महानगर के मोल,डिस्को और फार्म हॉउस में होता है .

लेट नाइट पार्टी का खर्च 

समान्यत: हर नाइट फिवर का अपना अलग-अलग हिसाब होता है लेकिन एक बात तो साफ है कि ऐसी पार्टियां बड़ी खर्चिली होती हैं. क्लब और डिस्को के नाइट फिवर मे मस्त होने के लिए आप के पास कम से कम 5 से 10 हजार प्रति व्यक्ति होना चाहिए. जबकी फौर्म हाउस और शहर के बाहर आयोजित होने वाली पार्टियों में 50 हजार से 1 लाख का ब्यय नवयुवकों के समुहों को करना पड़ता है. इस समुह में 5 से 10 युवक-युवतियां हो सकती हैं. स्र्टड (शनिवार) को आयोजित स्र्टर्ड नाइट फिवर, न्यू इयर पर आयोजित पार्टी एवं अन्य विशेष आयोजन पर आयोजित पार्टी का खर्च समान्य दिन से थोड़ा अधिक होता है. नव वर्ष के स्वागत पार्टी का खर्च अन्य सभी नाईट पार्टियों से अधिक होता है .

नवयुवकों मे पार्टी का क्रेज

नवयुवकों का एक बड़ा समुह इस तरह के पार्टी के पक्ष में खड़ा देखा जा सकता है. हर छोटे से बड़े शहर के नवयुवक कम से कम एक बार इस नाइट फिवर का हिस्सा बनना चाहते हैं. महानगरों में जैसे ही रात के 10 बजते हैं, क्लब डिस्कों और फौर्म हाउस पर सजने वाली नाइट फिवर के लिए नवयुवकों का भीड़ इकट्ठा होने लगती है.

किसी के लिए सजा बन जाती है यह पार्टिया

नाइट पर्टियों में ड्रग्स और नशीले दवाओं का काला साया पड़ चुका है, पार्टी के आड़ में इनका व्यापार धड़ल्ले से बढ़ रहा है. वैसे नवयुवक जो पार्टी में पहली बार जाते है, इनके चपेट में आते ही बर्बादी के दुनिया में न चाहते हुए भी प्रवेश कर जाते है. इस तरह के पार्टी में सामुहिक दुष्कर्म की घटना भी कई युवतियों के साथ घटती रहती हैं, लेकिन समाजिक लोक-लज्जा और शर्म के कारण पीड़ीत इन घटनाओं के बारे में खुल कर कुछ बता नही पाती. इस तरह अंदर ही अंदर पीड़ीत युवक और युवती मानसिक तनाव के शिकार हो जाते है.

नवयुवकों की टोली क्यों जाती हैं इन पार्टियों में इसे जानने के लिए हमनेे कुछ ऐसे नवयुवकों से बात की जो कई बार इस तरह के पार्टियों में जाकर मस्त हो चुके हैं और कुछ ऐसे नवयुवक जो इस तरह के पार्टियो में शिरकत करना चाहते हैं.

`अभिजीत का मानना है कि इस तरह की पार्टियां नवयुवकों के मस्ती के लिए जायज़ है, साफ्टवेयर व्यवसायी के रूप में अभिजीत मानते हैं, कि आज के नवयुवक क्या चाहते हैं. उनका कहना है कि यह आप पर निर्भर करता है कि आप इस तरह के पार्टियों में अपने आप को कितना नियंत्रित रख सकते है. पार्टिया मौज-मस्ती के लिए होती हैं ना की अश्लिलता के लिए, जिन लोगों को लगता है कि अश्लिलता ही इन पार्टियों का मूल उदेश्य है, वो गलत है. यह बात प्रदीप नाइट पार्टियों के अनुभव के आधार पर बताते हैं.

कोलकता  में दस साल से रहने  वाले रंजन कई बार इन पार्टियों में जा चुके हैं, और इनका मानना है कि नाइट फिवर के नाम से आयोजित होने वाली ये रंगीन पार्टी अपने शुरूआती दौर में नवयुवकों के लिए मस्ती से भरी हुई सागर की तरह थी, लेकिन समय के साथ-साथ इन पार्टियों का स्वरूप भी बदला है. रंजन यह खुलकर नहीं बोलते कि ड्रग्स और अश्लिलता ने इन पार्टियों का रूप ही बदल दिया है. लेकिन रंजन0 के इशारे और चंद प्रश्नों पर खामोशी आज के समय में इन पार्टियों की सच्चाई को बयां करने के लिए काफी है.

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जो पेशे से मौडल हैं, लेटनाइट पार्टियों के बारे में सकारात्मक बात करते हुए कहते हैं कि इस आधुनिक युग के भाग दौड़ की जिदंगी के लिए कुछ मौज-मस्ती के वास्ते इस तरह की पार्टियां बिल्कुल सही हैं. अगर पार्टियों में आने वाले नवयुवक अपने आप पर नियत्रण कर पार्टी का मजा ले तो मस्ती दोगुनी हो जाती है.

कोलकता विश्वविद्यलय की छात्रा सरिता बताती  है कि अगर इस प्रकार के पार्टी में कोई सेलिब्रिटी आपका साथ दे तो पार्टी की मस्ती दोगुनी हो जाती है. म्युजिक की मस्ती, खाने-पीने का पुरा व्यवस्था, और अपने साथी के साथ ढेरों मौज-मस्ती के नाम से इस तरह के पार्टियों में आने वाले नवयुवक आखिर क्यों नहीं सोचते कि छडिक़ मस्ती के लिए इतना कुछ क्यो?

पार्टी के नाम पर सब कुछ परोसती नाइट फिवर जहा भारतीय समाज के लिए बेहद दुखद और हानिकारक है. वही समाज का एक बड़ा तबका दबी आवाज़ में इन पार्टियों को किसी को भी मदमस्त करने वाला बताते है. इस तरह की पार्टी में अक्सर कुछ न कुछ घटना घटती है, कभी लड़कियों से छेडख़ानी होती है तो कभी नशे में धूत बालाएं नि:वस्त्र हो कर समाज में उपहास का पात्र बनती हैं, तो कभी किसी की जान ही ले लेती है ये पार्टी.

सज को नजदीक से जानने वाले समाज शास्त्री इस तरह के पार्टियों को समाज के लिए आतंकवाद से भी खतरनाक बताते हैं, क्योकि यह पार्टियां अंदर ही अंदर भारतीय युवाओं को खोखली कर रही हैं. वही विशेषज्ञों के अनुसार इस तरह की पार्टी भारतीय सभ्यता संस्कृति के लिए बेहद घातक है. सोचने वाली बात तो यह है कि इस तरह की पार्टियों को कोसने वाले भी लुक-छिप कर इन्ही पर्टियों का मजा ले रहे है. इन परिस्थितियों को देखते हुए यह कहना मुश्किल है, कि आखिर कब थमेगी यह समाजिक बर्बादी का कारण बनने वाली पार्टियां ?

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