8 साल का अफ्रीकी बच्चा टानी ओलुवा आदेवुमो की कहानी भी ऐसी ही है. टानी को शतरंज सीखे अभी एक साल भी नहीं हुआ और वह अपने आयुवर्ग में न्यूयार्क का स्टेट चैंपियन बन गया.

2 साल पहले नाइजीरिया में ईसाइयों पर हमलों के बाद टानी का परिवार भाग कर अमेरिका आ गया था. दूसरे लोगों की तरह इस परिवार को भी मैनहट्टन के शरणार्थी शिविर में रखा गया. 2 साल पहले एक पास्टर की मदद से टानी ने स्कूल जाना शुरू किया.

वहां पर उस के एक टीचर रसेल माकोस्की ने क्लास को शतरंज खेलना सिखाया. टानी ने बहुत तेजी से शतरंज सीखा. यह देख रसेल ने स्कूल में चेस क्लब बना लिया. टानी क्लब की फीस देने में असमर्थ था, इसलिए रसेल ने उस की फीस माफ कर दी.

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जब टानी ने पहली बार एक टूर्नामेंट में हिस्सा लिया तो उस के सब से कम अंक आए. लेकिन इस के करीब एक साल बाद हुए टूर्नामेंट में उस ने 73 खिलाडि़यों को हरा कर स्टेट चैंपियनशिप जीत ली. पहली बार ही इस टूर्नामेंट को जीतने वाला वह पहला खिलाड़ी बन गया. रसेल का कहना है कि एक साल में इस स्तर तक पहुंचना किसी पर्वत को फतह करने से कम नहीं है.

अब टानी हर रात शिविर के फर्श पर बैठ कर मई में होने वाली राष्ट्रीय चैंपियनशिप की तैयारी कर रहा है. उस का इरादा लंबे समय तक फर्श पर खेलने का नहीं है. वह दुनिया का सब से छोटा ग्रैंड मास्टर बनना चाहता है. उस के टीचर द्वारा उस की मदद के लिए बनाए गए पेज पर अब तक मदद के रूप में 2 लाख डौलर यानी करीब एक करोड़ 40 लाख रुपए की मदद मिल चुकी है.

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