रेटिंग:ढाई स्टार

किसी कहानी या नाटक को सिनेमा के परदे पर उतरना आसान नही होता. दिग्गज फिल्मकार भी इस तरह की फिल्म बनाते समय असफल हो जाते हैं. ऐसे में एक पन्ने की कहानी ‘‘नमक स्वाद अनुसार’’ पर नवोदित फिल्मकार अभिनव ठाकुर से बहुत ज्यादा उम्मीद लगाना जायज नही है. फिर भी अभिनव ठाकुर कुछ कमियों के बावजूद फिल्म की विषय वस्तु को ‘सुहागरात’ तक सीमित रखते हुए कुछ मुद्दों को उकेरने के साथ ही कुछ संदेश देने की भी कोशिश की हैं.

Tags:
COMMENT