‘सत्य के साथ मेरे प्रयोग’ महात्मा गांधी की गैरमामूली किताब इस लिहाज से भी है कि इसमें उन्होंने वाकई खुद को उद्घाटित कर के रख दिया है. अपनी निजता सार्वजनिक करने पर गांधी कहीं हिचके या लड़खड़ाए नहीं हैं. यहां तक कि पत्नी के साथ अपने यौन व्यवहार,  किशोरावस्था में छुपकर धूम्रपान और हस्तमैथुन के साथ साथ मांसाहार करने का जिक्र भी उन्होंने बिना किसी संकोच या पूर्वाग्रह के किया हैं. अपने बारे में इस स्तर तक सच बोलने का दुसाहस हर कोई नहीं कर सकता. लोग बहुत कुछ छिपा जाते हैं इस दोहरेपन से गांधी ने खुद को बचाए रखा शायद इसीलिए उन्हें महात्मा की उपाधि मिली और राष्ट्रपिता के खिताब से भी वें नवाजे गए.

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