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दिल टूटने के बाद मैं खुद को नुकसान पहुंचाना चाहता था: शाहिद कपूर

बौलिवुड एक्टर शाहिद कपूर ने कहा हैं, वें भी भी उस दौर से गुजर चुके हैं जब दिल टूटने के बाद वें गहरे सदमे में थे और खुद को नुकसान पहुंचान’ चाहते थे. लेकिन उन्होंने ये भी कहा हैं कि इन नकारात्मक भावनाओं से उबरने का एक यही तरीका यह था कि वह अपने काम में पूरी तरह समर्पित हो जाएं.

हाल ही में फिल्म ‘कबीर सिंह’ में शाहिद ने एक सर्जन की भूमिका निभायी हैं जो दिल टूटने के बाद खुद को नुकसान पहुंचाता है. शाहिद ने ये भी बताया कि मैं खुद इस दर्द से गुजर चुका हूं. मैं हर समय चिंता में डूबा रहता था. जब मेरा दिल टूटा था, मैं खुद को नुकसान पहुंचाना चाहता था.

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शाहिद ने कहा कि अगर आपका प्यार सच्चा होता है तो वहां नाराजगी भी उतना ही हो सकती है. ‘कबीर सिंह’ एक ऐसा किरदार है, जो हर किसी के जीवन में आता है और इसी वजह से मैं इस किरदार से जुड़ पाया. शाहिद ने कहा कि उन्होंने अपनी नकारात्मक भावनाओं को कहीं और लगाया.

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उन्होंने कहा, अगर आप किसी नकारात्मक भावना से गुजर रहे हैं तो इसे सकारात्मकता में बदलें, इसे एक नई दिशा दें…. नहीं तो ये आपको गर्त में ले जायेंगी. दिल टूटना भी इन्हीं नकरात्मक भावनाओं में से एक है. आप इसे कहीं और इस्तेमाल करें. अगर आप ऐसा नहीं कर सकते तो आप कबीर सिंह बन जाएंगे. आपको बता दें, यह फिल्म 21 जून को रिलीज होगी.

मैं डबल मीनिंग वाली कौमेडी नहीं करता: देवेन भोजानी

देवेन भोजानी: अभिनेता,निर्माता, निर्दशक

गुजराती नाटक से अपने अभिनय कैरियर की शुरूआत करने वाले अभिनेता देवेन भोजानी प्रसिद्ध टीवी शो ‘मालगुडी डेज’ से डेब्यू किया. फिल्म ‘जो जीता वही सिकंदर’ उनके जीवन की टर्निंग पौइंट थी. वे कौमिक रोल के लिए खास तौर पर जाने जाते हैं. उन्होंने केवल अभिनय ही नहीं बल्कि निर्माता और निर्देशन का भी काम किया है. हर भूमिका में अभिनय करना उन्हें पसंद है और इस माध्यम के द्वारा वे दर्शको खुशी देने में विश्वास रखते है. कौमेडी में उन्होंने कभी कोई मजाक ‘बिलो द बेल्ट’ नहीं किया और द्विअर्थी वाले कौमेडी को वे कभी पसंद नहीं करते. अभी उनकी सब टीवी पर धारावाहिक ‘भाखरवाड़ी’ काफी पोपुलर हो चुकी है. जिसमें वे बालकृष्ण गोखले यानि अन्ना की भूमिका निभा रहे हैं. उनसे उनकी इस सफलतापूर्वक जर्नी के बारें में बात हुई. पेश है कुछ अंश.

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इस धारावाहिक में आपको सबसे अच्छी क्या लगती है?

मैं अपने दर्शकों का बहुत आभारी हूं, क्योंकि इतने सालों में मैंने अलग-अलग भूमिका निभाई और दर्शकों ने मेरी अधिकतर भूमिका को पसंद किया है. मैं हमेशा उस चरित्र को करता हूं जिसे करने में मज़ा आयें और दर्शकों को भी अच्छा लगे. इसके अलावा मेरी शो ऐसी होनी चाहिए जिसे पूरा परिवार साथ मिलकर देख सकें. यही वजह है कि बच्चे से लेकर वयस्क सभी मुझे देखना पसंद करते हैं. लेकिन पिछले 3-4 साल से मैंने अभिनय अधिक नहीं किये ,क्योंकि मैं निर्देशन से जुड़ा रहा. मैंने साराभाई वर्सेज साराभाई टीवी शो और कमांडो 2 फिल्म बनायीं. इसके अलावा तब मुझे अच्छे चरित्र भी अभिनय के लिए नहीं मिल रहे थे. इस शो में मुझे मेरी भूमिका बहुत पसंद आई, क्योंकि ये शुद्ध पारिवारिक शो है. दो अलग-अलग समुदाय के होते हुए भी वे आपस में जुड़कर रहते हैं और ये बात मुझे अच्छी लगी.

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शो में आप परंपरा और संस्कार को फौलो करते हुए दिखाई पड़ते हैं, रियल लाइफ में इन सबमें आप कितना विश्वास रखते हैं?

रियल लाइफ में बैलेंस करना पसंद करता हूं. ख़ास वैल्यूज मेरे परिवार का मुझे बहुत पसंद है, मसलन एक दूसरे से प्यार, एक दूसरे के लिए चाहत, साथ मिलकर काम करना आदि सब मुझे अच्छा लगता है, लेकिन मैं यह भी मानता हूं कि परिवर्तन जरुरी है. हमारी कुछ पुरानी परम्पराएं जो सही नहीं है, उसे जमाने के साथ-साथ बदल देने में कोई हर्ज नहीं.

इतने सालों के लंबे सफर में कहानियों और किरदार में किस तरह के बदलाव को आप महसूस करते हैं?

बदलाव काफी है और ये तो होता ही रहेगा. मैंने हमेश किसी भी चरित्र के बदलाव को रिसर्च करके फिर उसे पर्दे पर उतारा है. ये पहले और आज हमेशा से कर रहा हूं. अभी नए-नए निर्देशक आये है और वे नयी-नयी चीजो को अपने शो में दिखाना चाहते हैं. ये अच्छा दौर है. अनुभव और नयापन जब साथ मिलते है, तो अच्छी चीज बनकर सामने आती है.

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परिवार का सहयोग यहां तक पहुंचने में कितना रहा ?

मेरे यहां तक पहुंचने में परिवार का बहुत सहयोग रहा है. मैं माता-पिता का इकलौता बेटा हूं, पर उन्होंने मेरे काम की हमेशा सराहना की है. अभी पत्नी भी है, जो मेरे इस हंसते-खेलते परिवार से जुड़ चुकी है. हम साथ में मिलकर बहुत खुश रहते हैं.

किस अभिनय ने आपकी जिंदगी बदल दी?

फिल्म ‘जो जीता वही सिकंदर’ ने मेरी जिंदगी बदल दी थी.पहले मैं चार्टेड एकाउंटेंट बनना चाहता था, पर इस फिल्म ने मेरी जिंदगी बदल दी. चार्टेड एकाउंटेंट पीछे रह गया और मैं अभिनय के क्षेत्र में आगे बढ़ गया.

आपने अभिनय के अलावा निर्माता, निर्देशक भी बने हैं, किसे अधिक एन्जौय करते हैं और क्यों?

मैंने हर तरह के अभिनय को एन्जौय किया है. जिस प्रोजेक्ट के साथ मैं जुड़ता हूं, उससे मेरा लगाव हो जाता है. मुझे आसपास की दुनिया तब दिखाई नहीं पड़ती. उसे ही करना अच्छा लगता है. इसलिए मैंने हमेशा किसी स्क्रिप्ट या काम को करने से पहले ये जरूर देख लेता हूं कि इसे करने में मजा आयेगा या नहीं. मैं दर्शकों को सौ प्रतिशत शुद्ध मनोरंजन देना चाहता हूं.

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आजकल द्विअर्थी कौमेडी का प्रचलन है, आप कौमेडी में किस बात का ध्यान रखते हैं?

जो लोग ऐसे कौमेडी दिखाते है,ये उनका स्टाइल है. मैं ऐसे कौमेडी में असहजता महसूस करता हूं. डबल मीनिंग वाले कौमेडी मैं पर्सनली कभी करना नहीं चाहता, क्योंकि टीवी घर पर सबके साथ देखी जाती है.

किसी भी चरित्र से निकलने में आपको कितना वक्त लगता है?

मैं बाहर से जींस और टी-शर्ट में सेट पर आता हूं और मेकअप रूम में चला जाता हूं. मेकअप के  दौरान मैं अपने चरित्र में घुसता चला जाता हूं और स्क्रिप्ट पढ़ने के बाद उसका रंग मेरे उपर चढ़ जाता है. रात को मेकअप उतारने के बाद गाड़ी तक जाते-जाते फिर से देवेन भोजानी बन जाता हूं.

आप हमारे पाठकों को खुश रहने के लिए क्या संदेश देना चाहते हैं?

अपने आप से प्यार करना सीखें, अपने अंदर ईमानदारी रखें, आसपास के लोगों में खुशियां बांटें. इससे खुशी हमेशा मिलती है.

एबी डीविलियर्स नहीं बन पाए इमरान खान

एबी डीविलियर्स के संन्यास लेने के बाद दक्षिण अफ्रीकी टीम उतनी मजबूत नहीं दिख रही है, जितनी उन के समय में थी. यह बात एबी डीविलियर्स को भी समझ आ गई थी और इसी के मद्देनजर उन्होंने दक्षिण अफ्रीका क्रिकेट बोर्ड को अपनी टीम की तरफ से इस वर्ल्ड कप में खेलने का प्रस्ताव दिया था, जिसे अफ्रीकी बोर्ड ने नकार दिया. ‘क्रिकइंफो’ नाम की एक वैबसाइट की एक रिपोर्ट पर गौर करें तो एबी डीविलियर्स ने मई महीने में दक्षिण अफ्रीका क्रिकेट बोर्ड के सामने यह प्रस्ताव रखा था कि वे अपने देश के लिए इस वर्ल्ड में खेलना चाहते हैं. उन्होंने अपने देश की वर्ल्ड कप टीम की घोषणा करने से ठीक एक दिन पहले अफ्रीकी बोर्ड को यह प्रस्ताव दिया था, लेकिन बोर्ड ने उन के प्रस्ताव को इसलिए खारिज कर दिया क्योंकि उन्हें संन्यास से वापस बुलाने से टीम की कई और चीजों पर असर पड़ सकता है. बोर्ड ने यह भी विचार किया कि यह फैसला टीम के उन खिलाड़ियों के हित में नहीं होगा, जो एबी डीविलियर्स के क्रिकेट को अलविदा कहने के बाद पिछले तकरीबन एक साल से एकसाथ खेल रहे हैं.

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एबी डीविलियर्स की यह मांग भले ही दक्षिण अफ्रीकी बोर्ड ने नकार दी है लेकिन ऐसा पहले भी हो चुका है जब किसी खिलाड़ी ने संन्यास ले कर दोबारा क्रिकेट के मैदान पर अपने कदम रखे थे. भारतीय तेज गेंदबाज जवागल श्रीनाथ ने साल 2002 में ही क्रिकेट को अलविदा कह दिया था लेकिन साल 2003 में खेले गए क्रिकेट वर्ल्ड कप में सौरव गांगुली के कहने पर वे संन्यास तोड़ कर एक बार फिर से मैदान पर लौटे थे.

इंगलैंड के कप्तान रह चुके केविन पीटरसन ने भी अपने बोर्ड के साथ हुई अनबन के चलते साल 2011 में वनडे क्रिकेट से संन्यास ले लिया था, पर कुछ महीनों बाद उन्होंने क्रिकेट के सभी फॉर्मेट में खेलने के ऐलान के साथ वापसी की थी.

पाकिस्तान के उम्दा बल्लेबाज जावेद मियांदाद ने अपने संन्यास के 10 दिनों के बाद ही पाकिस्तान की तब की  प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो के कहने पर संन्यास वापस ले लिया था.

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वेस्टइंडीज के आलराउंडर कार्ल हूपर ने साल 1999 वर्ल्ड कप के शुरू होने से महज 3 हफ्ते पहले संन्यास की घोषणा कर दी थी लेकिन वे साल 2001 में फिर से मैदान पर वापस आए थे और उन्होंने साल 2003 में दक्षिण अफ्रीका में खेले गए क्रिकेट वर्ल्ड कप में अपनी टीम के लिए कप्तानी की थी.

आज के पाकिस्तानी प्रधानमंत्री और पुराने क्रिकेटर इमरान खान ने साल 1987 के वर्ल्ड कप के बाद क्रिकेट से संन्यास ले लिया था लेकिन साल 1992 के वर्ल्ड कप से पहले पाकिस्तान के तब के राष्ट्रपति जिया उल हक ने उन्हें दोबारा पाक टीम की कमान संभालने को कहा था. वे पूरे जोरशोर के साथ मैदान पर लौटे थे और पाकिस्तान को उस वर्ल्ड कप में जिताया था.

Edited By- Neelesh Singh Sisodia 

5 टिप्स: अंडे के इन फेस पैक से पाएं स्किन प्रौब्लम्स से छुटकारा

गरमी में पसीने के कारण सबसे ज्यादा स्किन प्रौब्लम होती है, जिसके लिए हम मार्केट के प्रौडक्टस का इस्तेमाल करते हैं, जो स्किन को नुकसान पहुंचाते हैं. लेकिन कुछ प्रौडक्टस ऐसे भी हैं, जो समर स्किन प्रौब्लम से छुटकारा पा सकते हैं. जिनमें अंडा एक अच्छा होममेड प्रौडक्टस में से एक है. अंडे में पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन पाए जाने के कारण यह बालों की सेहत के साथ-साथ स्किन के लिए भी काफी फायदेमंद है और अघर अंडे के फेस पैक लगाते हैं तो यह कई स्किन प्रौब्लम्स को भी दूर करता है. इसके इस्तेमाल से कई स्किन प्रौबल्म से भी छुटकारा पाया जा सकता है और वह भी बिना किसी साइट इफैक्ट के.

औयली स्किन के लिए इस्तेमाल करें अंडे का फेस पैक

औयली स्किन के कारण हो रहे मुंहासों को दूर करने के लिए अंडे के सफेद हिस्से में ओटमील मिलाएं और इसे फेस और नैक पर लगाएं. यह औयली स्किन के लिए हैल्दी पैक है.

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अंडे के योक व औलिव औयल का फेस पैक है बेस्ट

ड्राई स्किन से जहां चेहरा अधिक उम्र का लगता है वहीं चेहरे की कोमलता भी खत्म सी हो जाती है. इस से छुटकारा पाने के लिए अंडे के योक को नीबू के रस व औलिव औयल के साथ मिक्स कर चेहरे व नैक पर लगाएं. कुछ ही दिनों में चेहरे का रूखापन जाता रहेगा.

अंडे व हनी का पैक से पाएं टैनिंग से छुटकारा

टैन स्किन से छुटकारा पाने के लिए तथा स्किन को टोन करने के लिए अंडे में हनी मिला कर फेस पर लगाएं. 10 मिनट बाद पानी से धो लें. यह पैक टैन के कारण हुए डल कौंप्लैक्शन को इंपू्रव करने में काफी हैल्प करता है.

शाइनी स्किन के लिए बेस्ट है अंडे व योगर्ट का फेस पैक

चमकदार चेहरे के लिए अंडे के योक को योगर्ट के साथ मिलाएं. इस में कुछ बूंदें हनी भी डाल दें. इसे चेहरे पर लगा कर सूखने दें. फिर हलके हाथों से पानी से धो लें. इस से चेहरे में ग्लो आ जाएगा.

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स्मूद कौंप्लैक्शन पाने के लिए ट्राई करें अंडे, हनी व रोजवाटर का फेस पैक

स्मूद कौंप्लैक्शन पाने के लिए 1 चम्मच हनी में अंडा मिक्स करें. इस में कुछ बूंदें औलिव औयल और रोजवाटर डाल दें. अच्छी तरह मिक्स कर के 20 मिनट तक चेहरे पर लगा रहने दें. इस से चेहरे की रंगत तो साफ होगी ही, साथ ही चेहरे के दागधब्बे व झांइयां भी खत्म हो जाएंगी.

तीसरे पति की चाहत में

वह अपनी सांसों को दुरुस्त करते हुए बोला, ‘‘सर, जल्दी चलिए, हमारे मकान में एक महिला की हत्या कर दी गई है.’’

हत्या शब्द सुनते ही एसओ चौंके. उन्होंने उस व्यक्ति से पूछा, ‘‘महिला की हत्या किस ने की, पूरी बात बताओ.’’

‘‘सर, मेरा नाम अमित राजपूत है और मैं मतैयापुरवा में रहता हूं. मेरे मकान में राजू नाम का युवक किराए पर रहता था. उसी ने अपनी पत्नी आरती की हत्या कर दी और फरार हो गया.’’

एसओ राजीव सिंह जिस काम के लिए निकलने वाले थे, वहां जाने के बजाय वह अमित राजपूत को साथ ले कर उस के गांव मतैयापुरवा के लिए निकल गए. मौके पर निकलने से पहले उन्होंने हत्या की जानकारी अपने उच्चाधिकारियों को दे दी थी.

जब वह अमित को ले कर उस के घर पहुंचे तो वहां गांव वालों की भीड़ जुटी हुई थी. जिस कमरे में महिला की लाश पड़ी थी, उस के दरवाजे पर ताला पड़ा था. खिड़की से देखा तो महिला की लाश फर्श पर पड़ी दिखाई दी. उस के कपड़े अस्तव्यस्त थे. अमित ने बताया कि इस कमरे में राजू अपनी पत्नी आरती के साथ रहता था, अब राजू लापता है.

पुलिस ने वहां मौजूद लोगों की मौजूदगी में दरवाजे का ताला तोड़ा और कमरे का निरीक्षण किया तो वहां टूटी हुई चूडि़यां मिलीं. इस से पता चला कि मृतका ने अपनी जान बचाने के लिए विरोध किया था.

मृतका की उम्र यही कोई 35 साल थी. लाश के पास ही 3 पेज का एक नोट मिला. यह मृतका आरती के पति राजू की तरफ से लिखा गया था. उस नोट में राजू ने पत्नी की बेवफाई का जिक्र किया था. इस नोट को पुलिस ने सुरक्षित रख लिया.

एसओ राजीव सिंह अभी निरीक्षण कर ही रहे थे कि उसी समय एसपी (वेस्ट) संजीव सुमन तथा सीओ (स्वरूपनगर) अजीत सिंह चौहान भी वहां पहुंच गए. पुलिस अधिकारियों ने मौके पर फोरैंसिक टीम को भी बुलवा लिया था. टीम ने मौके से जरूरी सबूत जुटाए.

उसी दौरान सीओ अजीत सिंह ने मकान मालिक अमित राजपूत से पूछताछ की तो उस ने बताया कि आरती की हत्या उस के पति राजू ने ही की है. यह बात उसे राजू के दोस्त निर्मल ने बताई थी. उन्होंने एसओ राजीव सिंह को निर्देश दिए कि वह निर्मल श्रीवास्तव को हिरासत में ले कर पूछताछ करें.

इस के बाद एसओ ने मौके की काररवाई पूरी कर लाश पोस्टमार्टम के लिए लाला लाजपतराय चिकित्सालय भेज दी. निर्मल श्रीवास्तव भी घटनास्थल पर आ गया था. एसओ राजीव सिंह ने उसे हिरासत में ले लिया और पूछताछ के लिए थाने ले आए.

पूछताछ करने पर निर्मल ने बताया कि वह राजू का दोस्त है. दोनों साथ काम करते हैं. राजू के घर उस का आनाजाना था. आतेजाते ही राजू की पत्नी से उस के प्रेम संबंध हो गए. कुछ दिनों पहले वह राजू को छोड़ कर उस के साथ रहने लगी थी. बाद में दोनों ने प्रेम विवाह कर लिया था. राजू ने आज आरती को किसी बहाने से बुलाया और उसे मार डाला.

निर्मल के बयानों से स्पष्ट था कि आरती की हत्या नाजायज रिश्तों के चलते राजू ने ही की थी. अत: एसओ राजीव सिंह ने मकान मालिक अमित राजपूत को वादी बना कर राजू के खिलाफ धारा 302 आईपीसी के तहत रिपोर्ट दर्ज कर ली.

चूंकि वह फरार था, इसलिए पुलिस ने उसे ढूंढना शुरू कर दिया. पता चला कि राजू मूलरूप से गोंडा के कटरी बाजार का रहने वाला था. एसपी (वेस्ट) संजीव सुमन ने एक विशेष टीम गोंडा भेजी. टीम ने गोंडा के कटरी बाजार स्थित राजू के घर पर छापा मारा. लेकिन वह घर पर नहीं मिला. इस के बाद पुलिस टीम ने अनेक संभावित स्थानों पर उसे तलाशा, लेकिन राजू हाथ नहीं लगा.

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4 मार्च, 2019 की सुबह 10 बजे एसओ राजीव सिंह को उन के खास मुखबिर से सूचना मिली कि हत्यारोपी राजू इस समय रावतपुर रेलवे स्टेशन पर है. सूचना मिलते ही एसओ पुलिस टीम के साथ रावतपुर स्टेशन पहुंच गए. राजू स्टेशन पर मिल गया. वह कहीं जाने के लिए वहां ट्रेन का इंतजार कर रहा था. उसे हिरासत में ले कर राजीव सिंह थाना काकादेव लौट आए.

थाने में जब उस से आरती की हत्या के संबंध में पूछा गया तो उस ने बड़ी आसानी से आरती की हत्या का जुर्म स्वीकार कर लिया. यही नहीं, उस ने घर में छिपा कर रखा गया वह दुपट्टा भी बरामद करा दिया, जिस से उस ने आरती का गला घोंटा था.

राजू से की गई पूछताछ के आधार पर एक ऐसी औरत की कहानी सामने आई, जिस ने तीसरे पति की चाहत में अपनी जान गंवा दी.

उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले के संडीला कस्बे से 7 किलोमीटर दूर एक छोटा सा गांव है नैपुरवा. इसी गांव में जयशंकर अपने परिवार के साथ रहता था. उस के परिवार में 3 बेटियां आरती, पार्वती, शांति तथा एक बेटा गौरव था.

जयशंकर के पास 3 बीघा खेती की जमीन थी. जमीन उपजाऊ थी, इसलिए किसी तरह से उस के घर का गुजारा चल रहा था. जयशंकर की आर्थिक स्थिति तो मजबूत नहीं थी, लेकिन वह व्यवहारकुशल था.

जयशंकर की बड़ी बेटी आरती ने गांव के ही जूनियर स्कूल से 8वीं की परीक्षा पास की. वह आगे पढ़ाई करना चाहती थी, लेकिन गांव के माहौल को देखते हुए मां ने उसे गांव से बाहर पढ़ाने को मना कर दिया. इस के बाद वह मां के साथ घरेलू काम में हाथ बंटाने लगी. समय बीतते आरती सयानी हुई तो वह उस के लिए लड़का देखना शुरू किया. जयशंकर को अपने एक रिश्तेदार के माध्यम से रमेश नाम के युवक के बारे में जानकारी मिली.

रमेश मूलरूप से गोंडा जिले के गांव रसूलपुर का रहने वाला था. उस के मातापिता की मौत हो चुकी थी. उस का बड़ा भाई उमेश गांव में रहता था, जबकि रमेश लखनऊ शहर में रहता था. वह राजमिस्त्री था.

रमेश सांवले रंग का जरूर था, लेकिन उस का व्यवहार अच्छा था. जयशंकर ने रमेश को देख कर उसे अपनी बेटी आरती के लिए पसंद कर लिया. हालांकि रमेश की उम्र आरती से काफी ज्यादा थी, लेकिन अपनी कमजोर आर्थिक स्थिति के कारण जयशंकर ने इन बातों पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया. बहरहाल, आरती का विवाह रमेश से कर दिया.

शादी से पहले आरती रमेश से नहीं मिली थी. उस ने रमेश को पहले फोटो में ही देखा था. शादी के समय जब उस ने पहली बार रमेश को देखा तो उस के अरमानों पर पानी फिर गया.

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विदा हो कर वह ससुराल चली तो गई लेकिन वहां बेमन से रही. आरती कुछ माह ससुराल में रही फिर रमेश उसे लखनऊ ले आया. वहां गोमतीनगर में उस ने किराए पर कमरा ले रखा था. लखनऊ में वह रमेश के साथ रहने लगी. आरती को शराब से नफरत थी, जबकि रमेश शराब का आदी था. शराब पीने को ले कर दोनों में अकसर तकरार होती रहती थी.

बढ़ते समय के साथ आरती 2 बच्चों की मां बन गई. 2 बच्चों की मां बनने के बावजूद उस के शरीर की कसावट बनी हुई थी. वह बनसंवर कर रहती थी, जिस से वह पहले से अधिक सुंदर दिखने लगी थी.

रमेश राजमिस्त्री था. दिन भर धूपछांव में काम कर के जब वह शाम को घर आता तो इतना थका होता कि खाना खा कर निढाल हो कर सो जाता. आरती उसे झिंझोड़ती तो कभी वह बेमन से उस की इच्छा पूरी करता.

पति की उपेक्षा से आरती परेशान थी. यूं तो आरती का दांपत्य सामान्य नहीं था. भले ही रास रंग में अब रमेश की पहले जैसी रुचि नहीं रह गई थी, मगर आरती की ख्वाहिशों का जलजला कम नहीं हुआ था. तभी अचानक उस के जीवन में राजू नाम का युवक आया.

राजू मूलरूप से गोंडा के ही कटरा बाजार का निवासी था. लखनऊ में रह कर वह मजदूरी करता था. गोमतीनगर स्थित जिस बहुमंजिला इमारत के निर्माण में रमेश राजमिस्त्री का काम करता था, उसी में राजू मजदूरी करता था.

रमेश और राजू दोनों ही गोंडा के रहने वाले थे, इसलिए दोनों में खूब पटती थी. काम खत्म करने के बाद दोनों शराब के ठेके पर साथ बैठ कर शराब पीते थे. शराब के लिए पैसे राजू ही देता था.

एक शाम दोनों के कदम शराब ठेके पर जा कर रुके तो रमेश बोला, ‘‘यार राजू, तुम अकसर अपने पैसों से मुझे शराब पिलाते हो, लेकिन आज मैं तुम्हें शराब की दावत दूंगा. शराब के साथ आज का खाना तुम मेरे घर पर ही खाओगे.’’

राजू इस के लिए राजी हो गया. रमेश यह सोच कर खुश था कि दोस्ती में उस ने यह नेक काम किया है. लेकिन यही उस की सब से बड़ी गलती थी.

उसी शाम राजू रमेश के घर पहुंचा तो पहली बार आरती से सामना हुआ. नजरें मिलीं तो मानो उलझ कर रह गई. राजू के मन में विचार आया कि आरती कहां रमेश के पल्ले पड़ गई.

रमेश अधेड़ उम्र का कालाकलूटा और आरती खूबसूरत. इसे तो मेरे नसीब में होना चाहिए था. दूसरी तरफ आरती के दिल में भी राजू को देख कर हलचल मच गई थी. आरती की नजरों में राजू सच में ऐसा पुरुष था, जैसी उस ने कल्पना की थी.

उस रोज राजू ने आरती के हाथ का बना खाना खाया तो उस ने उस की जम कर तारीफ की. खानेपीने के दौरान कई बार राजू और आरती की आंखें चार हुईं. इस अल्प अवधि में ही राजू और आरती में आंखों के जरिए नजदीकियां बन गईं.

दोनों के अंदर आग एक जैसी थी, इसलिए संपर्क बनाए रखने के लिए उन्होंने एकदूसरे के मोबाइल नंबर ले लिए. इस के बाद वे आपस में बातचीत करने लगे. कुछ दिनों तक औपचारिक बातचीत हुई, फिर यही बातचीत प्यारमोहब्बत तक पहुंच गई.

एक दिन दोपहर को राजू मौका निकाल कर रमेश के घर जा पहुंचा. उस समय रमेश साइट पर था और बच्चे स्कूल गए थे. घर में आरती अकेली थी. आरती के सौंदर्य को देख कर राजू खुद को रोक न सका और उस ने आगे बढ़ कर आरती को अपनी बांहों में भर लिया. आरती ने दिखावे के लिए छूटने का प्रयास किया, लेकिन छूट न सकी.

राजू की बांहों में आरती जो सुख महसूस कर रही थी, वह उस सुख से काफी समय से वंचित थी. उस की तमन्नाएं अंगड़ाई लेने लगीं. फिर वह भी अमरबेल की तरह राजू से लिपट गई. इस के बाद दोनों ने मर्यादाएं लांघ कर अपनी हसरतें पूरी कीं.

उस दिन के बाद आरती राजू के प्यार में इतनी ज्यादा दीवानी हो गई कि वह पति से ज्यादा प्रेमी राजू का खयाल रखने लगी. राजू भी अपनी कमाई आरती पर खर्च करने लगा. रमेश शराब का लती था. उस की इस कमजोरी का राजू ने भरपूर फायदा उठाया. वह हर शाम शराब की बोतल ले कर उस के घर पहुंच जाता. वह खुद कम पीता और रमेश को अधिक पिला कर नशे में चूर कर देता. जब रमेश सो जाता, तब आरती और राजू वासना का खेल खेलते.

एक रात रमेश की नींद खुल गई. उस ने आरती व राजू को आपत्तिजनक स्थिति में देखा तो क्रोध से पगला गया. गालीगलौज कर के उस ने राजू को भगा दिया. इस के बाद उस ने आरती की खूब पिटाई की. मौके की नजाकत भांप कर आरती ने रमेश से वादा किया कि आइंदा वह राजू से किसी तरह का संबंध नहीं रखेगी.

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आरती ने पति से यह वादा कर तो लिया लेकिन 2-4 दिन बाद ही उसे राजू की याद सताने लगी. वहीं राजू को भी चैन नहीं था. लिहाजा मौका देख कर आरती राजू को फोन लगा देती और दोनों बात कर लेते.

एक दिन रमेश साइट पर गया, लेकिन किसी कारणवश काम बंद था. अत: वह वापस घर पहुंच गया. कमरा अंदर से बंद था. तभी उसे कमरे के अंदर से पत्नी के हंसने की आवाज सुनाई दी. उस ने दरवाजा खुलवाने के बजाए दरवाजे की झिर्री से अंदर झांका तो अंदर का दृश्य देख कर सन्न रह गया. कमरे में आरती राजू के साथ मौजमस्ती कर रही थी.

दोस्त के साथ पत्नी को एक बार फिर देख कर रमेश का खून खौल उठा. लेकिन वह बोला कुछ नहीं. कुछ देर वह जड़वत खड़ा रहा. उस के बाद दरवाजा खुलवाया तो अपराधबोध से आरती व राजू कांपने लगे. दोनों ने रमेश से माफी मांगी. पर उस ने माफ नहीं किया. रमेश ने राजू को फटकार लगाई, ‘‘आस्तीन के सांप, भाग जा घर से वरना मैं तेरा गला घोंट दूंगा.’’

राजू बिना कुछ बोले वहां से चला गया.

इस के बाद रमेश ने सारा गुस्सा आरती पर उतारा. वह आरती को तब तक पीटता रहा, जब तक वह थक नहीं गया. आरती कई दिन तक चारपाई पर पड़ी रही. लेकिन आरती की इस पिटाई ने आग में घी का काम किया. वह पति से नफरत करने लगी. उस ने घर में कलह भी शुरू कर दी. आरती जान गई थी कि अब उस का ऐसे जुल्मी पति के साथ गुजारा संभव नहीं है.

अत: उस ने एक दिन राजू से मुलाकात की और उसे बताया कि यदि वह उसे सच्चा प्यार करता है तो उसे अपने साथ ले चले, वरना वह अपनी जान दे देगी. राजू भी यही चाहता था. अत: उस ने आरती को समझाया कि वह धैर्य रखे. शीघ्र ही वह उसे अपना जीवनसाथी बना लेगा. आश्वासन पा कर आरती खुश हो गई.

आरती अब घर में खुश रहने लगी थी. पति की बात भी मानने लगी थी. इतना ही नहीं, उस ने घर में लड़ना भी बंद कर दिया था. घर का सारा काम भी वह समय पर करने लगी थी. पत्नी में आए इस बदलाव से रमेश हैरान था. वह यही सोच रहा था कि आरती को अपनी गलती का अहसास हो गया है, जिस से वह सुधर गई है.

लेकिन एक दिन जब शाम को रमेश घर आया तो बच्चे भूख से बिलबिला रहे थे. पूछने पर बच्चों ने बताया कि वे जब स्कूल से घर वापस आए तो मम्मी घर में नहीं थीं. उन्होंने पासपड़ोस में खोजा, लेकिन वह नहीं मिली.

बच्चों की बात सुन कर रमेश का माथा ठनका. उस ने घर में नजर दौड़ाई तो संदूक का ताला खुला था. संदूक में रखे पैसे गायब थे. संदूक में रखे आरती के कपड़े भी गायब थे. उस ने सोचा कि आरती कहीं बच्चों को छोड़ कर भाग तो नहीं गई. लेकिन उसे लगा कि आरती बच्चों को छोड़ कर नहीं जा सकती.

रमेश के मन में तरहतरह के विचार आ ही रहे थे कि तभी उस की निगाह अलमारी में रखे एक कागज पर पड़ी. उस कागज को खोल कर रमेश ने पढ़ा तो उस के होश उड़ गए. कागज में लिखा था, ‘मैं तुम जैसे राक्षस के साथ जिंदगी नहीं बिता सकती. इसलिए राजू के साथ जा रही हूं. मुझे खोजने की कोशिश मत करना. बच्चे तुम ने पैदा किए हैं, इसलिए उन्हें तुम्हारे पास ही छोड़ रही हूं.’

इधर राजू आरती को साथ ले कर लखनऊ से कानपुर आ गया. वहां उस ने विजय नगर कच्ची बस्ती में एक मकान किराए पर ले लिया और आरती के साथ रहने लगा. एक महीने बाद दोनों ने शास्त्रीनगर स्थित काली मंदिर में एकदूसरे को जयमाला पहना कर प्रेम विवाह कर लिया. प्रेम विवाह करने के बाद दोनों सुखमय जीवन व्यतीत करने लगे. राजू और आरती दोनों एकदूसरे को टूट कर चाहते थे. राजू आरती को हर तरह से खुश रखने में लगा रहता था. आरती भी अपने दूसरे पति का भरपूर खयाल रखती थी.

हंसीखुशी 3 साल बीत गए. उस के बाद आरती का मन राजू से भर गया. अब वह राजू से दूरियां बनाने लगी. दरअसल, राजू की आर्थिक स्थिति अब कमजोर हो गई थी. उस की कमाई का आधा हिस्सा आरती अपने शृंगार व कपड़ों पर ही खर्च कर देती थी. फिर मकान का किराया और गृहस्थी के अन्य खर्चों की वजह से पैसे का अभाव हो जाता था. इसे ले कर आरती और राजू में झगड़ा होने लगा था.

राजू का एक दोस्त निर्मल श्रीवास्तव था. वह भी राजू के साथ मजदूरी करता था. दोनों में खूब पटती थी. कभीकभी शाम को राजू के घर दोनों की महफिल भी जम जाती थी. वह राजू की आर्थिक मदद भी करता रहता था. इसलिए राजू निर्मल के अहसानों तले दबा रहता था. निर्मल आरती को मन ही मन चाहता था, लेकिन आरती से अपनी बात कह नहीं पाता था.

कहते हैं औरत की निगाह पारखी होती है. आरती जानती थी कि निर्मल उसे मन ही मन चाहता है. अत: आरती ने अपने कदम निर्मल की तरफ बढ़ा दिए. आरती निर्मल के साथ होने वाली हंसीमजाक की सीमाएं भी लांघने लगी.

निर्मल श्रीवास्तव कमाता तो था लेकिन तनहा जिंदगी व्यतीत कर रहा था. उसे औरत की कमी खलती थी. आरती ने जब उसे भाव देना शुरू किया तो वह आरती के प्रेम में डूबता चला गया. निर्मल ने अब राजू की गैरमौजूदगी में भी उस के घर आना शुरू कर दिया. निर्मल जब भी आता, आरती के लिए कुछ न कुछ उपहार जरूर लाता.

एक दोपहर निर्मल घर आया तो उस ने आते ही आरती को अपनी बांहों में भर लिया और प्रणय निवेदन करने लगा. आरती उस की बांहों में कसमसाते हुए बोली, ‘‘बाहर का दरवाजा खुला है. कोई देख लेगा तो बिना मतलब फजीहत होगी.’’

निर्मल ने आरती को बाहुपाश से मुक्त किया और बाहर का दरवाजा बंद कर फिर उसे बांहों में जकड़ लिया. आरती भी निर्मल का साथ देने लगी. इस के बाद दोनों ने अपनी हसरतें पूरी कीं.

इस के बाद निर्मल और आरती का मिलन अकसर होने लगा. आरती निर्मल की ऐसी दीवानी बन गई कि उस ने उसे तीसरे पति के रूप में चुन लिया. यही नहीं, उस ने राजू को बिना बताए कामेश्वर मंदिर, विजय नगर में निर्मल से प्रेम विवाह भी कर लिया. अब आरती और निर्मल गुपचुप तरीके से पतिपत्नी की तरह रहने लगे.

राजू को जब निर्मल और आरती के संबंधों की बात पता चली तो उस का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया और उस ने आरती की जम कर पिटाई की तथा निर्मल को भी भलाबुरा कहा. इस के बाद राजू ने विजय नगर वाला मकान छोड़ दिया और काकादेव थानांतर्गत मतैयापुरवा में अमित राजपूत के मकान में किराए पर रहने लगा. यह बात अगस्त 2018 की है.

आरती, राजू के साथ मतैयापुरवा वाले मकान में रहने जरूर लगी, लेकिन उस ने निर्मल का साथ नहीं छोड़ा. राजू घर से काम पर चला जाता तो आरती सजसंवर कर निर्मल के पास पहुंचा जाती. फिर मौजमस्ती कर वापस आ जाती. राजू को आरती पर शक रहने लगा था, इसलिए निर्मल को ले कर दोनों में अकसर झगड़ा होने लगा था. झगड़े के दौरान ही एक दिन आरती ने बता दिया कि उस ने निर्मल से ब्याह रचा लिया है और अब वह निर्मल की पत्नी बन कर उस के साथ ही रहेगी.

आरती की बात सुन कर राजू सन्न रह गया. उस ने आरती को बहुत समझाया लेकिन वह नहीं मानी. इस के बाद वह राजू का साथ छोड़ कर निर्मल के साथ विजय नगर में रहने लगी.

पत्नी की बेवफाई से राजू टूट गया. वह परेशान रहने लगा तथा शराब भी ज्यादा पीने लगा. पत्नी की बेवफाई में उस ने कई पत्र लिखे. आखिर में राजू ने आरती को बेवफाई की सजा देने का निश्चय कर लिया.

26 फरवरी, 2019 की दोपहर राजू ने आरती से मोबाइल पर बात की और उस से घर आने का आग्रह किया. आरती ने पहले तो मना कर दिया लेकिन राजू के बारबार आग्रह से वह पिघल गई.

लगभग 2 बजे आरती राजू के मतैयापुरवा वाले कमरे पर पहुंची. राजू ने आरती को मना कर फिर से उस की जिंदगी में लौट आने की मिन्नत की. लेकिन आरती ने दो टूक जवाब दे दिया. इस के बाद बेवफाई को ले कर आरती और राजू में तीखी बहस शुरू हो गई.

इसी बहस के दौरान राजू अचानक ही दुपट्टे से आरती का गला कसने लगा. बचाव में आरती की चूडि़यां भी टूट गईं और कपड़े भी अस्तव्यस्त हो गए. आरती ने जान बचाने की पूरी कोशिश की लेकिन सफल नहीं हो सकी. राजू के हाथ तभी ढीले पड़े, जब उस ने आरती का काम तमाम कर दिया.

आरती की हत्या के बाद राजू ने निर्मल को फोन के जरिए जानकारी दी कि उस ने आरती को मार दिया है, उस की लाश उस के कमरे में पड़ी है, आ कर लाश ले जाए. इस के बाद राजू कमरे में ताला लगा कर फरार हो गया.

इधर निर्मल बदहवास हालत में राजू के कमरे पर पहुंचा तो कमरे में ताला लगा था. उस ने खिड़की से झांक कर देखा तो आरती की लाश पड़ी थी. निर्मल ने शोर मचाया तो मकान मालिक अमित कुमार आ गया. इस के बाद अमित कुमार थाना काकादेव पहुंचा और आरती की हत्या की सूचना दी. सूचना पाते ही थानाप्रभारी राजीव सिंह घटनास्थल पर पहुंचे और शव को कब्जे में ले कर जांच शुरू की.

3 मार्व, 2019 को थाना काकादेव पुलिस ने अभियुक्त राजू को कानपुर कोर्ट में रिमांड मजिस्ट्रैट के समक्ष पेश किया, जहां से उसे जिला कारागार भेज दिया गया. मृतका आरती के प्रेमी (पति) निर्मल श्रीवास्तव का हत्या में कोई हाथ नहीं था इसलिए पुलिस ने उसे छोड़ दिया.

   —कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

(कहानी सौजन्य- मनोहर कहानियां)

 

कैसे बनाएं न्यू बोर्न बेबी का ग्रोथ चार्ट

नवजात के ग्रोथ चार्ट की इस सरल परिभाषा के अपने अलग माने हैं, जिस से यह भी पता चलता है कि नवजात की दूसरी बालसुलभ या उम्रजनित क्रियाएं भी स्वाभाविक और ठीकठाक हैं या नहीं. मसलन, पाचन, रंगों और वस्तुओं को पहचानना, उलटनापुलटना और प्रतिक्रियाएं देना इत्यादि.

इस में कोई शक नहीं कि अपने बच्चे को रोज बढ़ते देखने का अपना एक अलग सुख और आनंद है, जिसे सभी मांबाप ऐंजौय करते हैं. जिंदगी के इस अद्भुत सुख का सटीक वर्णन शायद ही कोई मांबाप कर पाए, क्योंकि जैसेजैसे बच्चा बड़ा होता जाता है वैसेवैसे वे गुजरे दिनों को भूलते जाते हैं.

इस में भी कोई शक नहीं कि नए दौर के मांबाप जागरूक हो रहे हैं और उन की अधिकतम कोशिश यह होती है कि वे नवजात की ग्रोथ के बारे में सबकुछ जानें. लेकिन दिक्कत अभी भी यह है कि ज्यादातर पेरैंट्स यह मानते हैं कि अगर बच्चा मोटा, गोलमटोल और वजनदार है तो इस का मतलब उस की ग्रोथ ठीक हो रही है और अगर बच्चा दुबलापतला हो तो वे चिंतित हो उठते हैं कि उस की ग्रोथ दूसरे बच्चों के मुकाबले कम हो रही है, जबकि ऐसा नहीं है.

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वर्ल्ड हैल्थ और्गेनाइजेशन यानी डब्ल्यूएचओ नवजातों की ग्रोथ को पर्सेंटाइल में दर्शाता है, जिस के माने अकसर भारतीय मांबाप को समझ नहीं आते. भोपाल के एक वरिष्ठ बालरोग चिकित्सक ए. एस. चावला की मानें तो डब्ल्यूएचओ के ग्रोथ चार्ट के अपने अलग माने

हैं और उस का ग्रोथ चार्ट दुनियाभर के लगभग 100 देशों में प्रयोग किया जाता है जबकि भारत

में अधिकांश बालरोग विशेषज्ञ अपने बनाए चार्ट का इस्तेमाल करते हैं.

चार्ट से समझें ग्रोथ

दरअसल हमारे देश में इस्तेमाल किया जाने वाला चार्ट देश के प्रमुख बड़े शहरों में संपन्न परिवारों के नवजातों के विकास स्वरूप पर अध्ययन के आधार पर तैयार किया जाता है. चूंकि इस ग्रोथ चार्ट के आंकड़ों में केवल भारतीय नवजातों पर किए गए अध्ययनों को ही शामिल किया जाता है, इसलिए अधिकतर विशेषज्ञ इसे ही इस्तेमाल करना पसंद करते हैं.

मगर इन को ले कर शक या भ्रम की जरूरत नहीं. डाक्टर ए. एस. चावला बताते हैं कि दोनों ही अपनी जगह ठीक हैं और उन में कोई खास फर्क नहीं है. उन के मुताबिक अगर नवजात की ग्रोथ चार्ट के मुताबिक हो रही हो तो अभिभावकों को चिंता नहीं करनी चाहिए. चिंता की बात इस स्थिति में भी नहीं जब चार्ट के मुताबिक बच्चे की ग्रोथ में थोड़ाबहुत या मामूली अंतर आ रहा हो. चिंता तब करनी चाहिए जब यह अंतर ज्यादा हो.

उदाहरण के लिए चार्ट के मुताबिक 10 महीने की उम्र की लड़की का वजन 8.8 किलोग्राम और लंबाई 71.6 सैंमी. होनी चाहिए. ऐसे में अगर बच्ची का वजन 7 किलोग्राम से कम और लंबाई भी 65 सैंमी. से कम है तो विशेषज्ञ डाक्टर से सलाह लेनी चाहिए.

डब्ल्यूएचओ इस स्थिति को पर्सेंटाइल में दर्शाता है. मसलन उस के चार्ट के मानकों के मुताबिक आप के बच्चे का वजन 30वीं पर्सेंटाइल पर है तो उस का मतलब होता है कि आप के बच्चे की उम्र और लिंग के 29% बच्चों का वजन आप के बच्चे से कम है और 70% बच्चों का वजन उस से ज्यादा है.

पर्सेंटाइल के मामले में जरूरी नहीं कि वह वजन और लंबाई के मामले में हर बार बराबर ही हो. मिसाल के तौर पर वही बच्चा जो वजन के मामले में 30वीं पर्सेंटाइल पर है. लंबाई के मामले में 40वीं पर्सेंटाइल पर भी हो सकता है, जिस का मतलब यह निकलता है कि लंबाई के मामले में आप के बच्चे की उम्र और लिंग के 39% बच्चे उस से छोटे और 60% उस से लंबे हैं.

चूंकि यह स्थिति डब्ल्यूएचओ ग्राफ के जरीए प्रदर्शित करता है, इसलिए मांबाप का गड़बड़ा जाना स्वाभाविक है. ऐसे में भारतीय डाक्टरों का चार्ट इस भ्रम को दूर करता है. इसे अपनाने में हरज नहीं.

चार्ट के हिसाब से उम्र के आधार पर बच्चे के वजन और लंबाई में मामूली अंतर है तो यह चिंता व्यर्थ है, इसलिए घबराना नहीं चाहिए. लेकिन अंतर ज्यादा है तो खुद डाक्टर पहल कर इन कमियों को चिकित्सकीय पैमाने पर परखते हुए इलाज करते हैं.

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इसे यों समझा जा सकता है

अगर 12 महीने यानी 1 साल के लड़के का वजन 8 किलोग्राम से कम है जो चार्ट के मुताबिक 9.6 किलोग्राम होना चाहिए तो डाक्टर बच्चे की डाइट में बदलाव करने की सलाह दे सकते हैं. वे कहेंगे कि बच्चे को ज्यादा पौष्टिक भोजन दिया जाए. नवजात की फीडिंग पर भी वे गौर करेंगे जो अगर गलत तरीके से हो रही है तो उसे सुधारने को कहेंगे. यही बात लंबाई की कमी के मामले में लागू होती है.

यहां यह बात और भी अहम है कि ग्रोथ चार्ट से किसी समस्या या बीमारी का पता नहीं चलता. डा. चावला यह सलाह भी देते हैं कि अगर चार्ट या पर्सेंटाइल के मुताबिक अभिभावक कमी पाते हैं तो नवजात को दी जाने वाली डाइट में अपने मन से बदलाव न करें, बल्कि डाक्टर से सलाह लें.

अगर बच्चा प्रीमैच्योर है तो जाहिर है उस की ग्रोथ इन ग्रोथ चार्टों और पर्सेंटाइल से मेल नहीं खाएगी, क्योंकि जन्म के पहले से ही उस की ग्रोथ कम है. ऐसे बच्चों के लिए डाक्टर अलग से कई एहतियात बताते हैं और डाइट के बारे में भी सलाह देते हैं. निष्कर्ष यह है कि प्रीमैच्योर बच्चों की तुलना औसत वजन और लंबाई वाले बच्चों से ग्रोथ के मामले में नहीं की जानी चाहिए. नवजात पर आनुवंशिक कारक भी प्रभाव डालते हैं.

नवजात की ग्रोथ में वक्तवक्त पर फर्क आता है और वह पूरी तरह 3 साल की उम्र के वक्त समझ आता है. ग्रोथ चार्ट की अहमियत इतनी भर है कि उस के अनुसार बच्चे की लंबाई और वजन को नाप कर फर्क देखा जाता है. अगर कोई बड़ी असामान्यता नजर आए तभी डाक्टर के पास जाएं.

edited by- Neelesh

5 टिप्स: फेसपैक लगाते समय रखें इन बातों का ध्यान

चेहरे को कोमल और चमकदार बनाएं रखने के लिए आप अक्‍सर फेसपैक का इस्तेमाल करती हैं. फेसपैक चेहरे की त्‍वचा को स्‍वस्‍थ बनाएं रखने में मदद करता है. लेकिन फेसपैक लगाते समय कई बातों का ध्‍यान रखना बेहद जरूरी होता है ताकि त्‍वचा को इससे कोई नुकसान न हो.

तो चलिए जानते हैं, फेसपैक लगाते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए, जिससे आपके चेहरे की खूबसूरती बनी रहे,

फेसपैक लगाते समय रखें इन बातों का ध्यान

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  1. फेसपैक को सीधे ब्रश से लगाने की बजाय इसे मसाज करते हुए लगाएं. ऐसा करने से फेसपैक चेहरे की अंदरूनी सतह तक पहुंचकर काम करता है. 10 मिनट की मसाज देते हुए पैक को 15 मिनट के लिए चेहरे पर लगा छोड़ दें. इसके बाद पानी से चेहरा साफ कर लें.

2. फेसपैक को बिल्कुल सूख जाने के बाद हटाने से बचें. इससे त्‍वचा रूखी हो जाती है और उसमें झुर्रियां जल्‍दी आती हैं. फेसपैक जैसे ही हल्‍का सूखने लगे, उसी वक्त चेहरे को गुनगुने पानी या फिर ताजे पानी से धो लें.

3. फेसपैक हमेशा नहाने के बाद लगाएं. अधिकतर लोग नहाने से पहले ही फेसपैक लगाते हैं लेकिन ऐसा करने से बचें. नहाने से पहले फेसपैक लगाने से चेहरे की नमी कम होने लगती है.

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4. फेसपैक लगाने के बाद आंखें बंद करके थोड़ी देर रिलैक्‍स होकर बैठें. ऐसा करने से चेहरे की त्‍वचा को आराम पहुंचता है. फेसपैक लगाने के बाद बोलने से बचें क्‍योंकि इस तरह चेहरा सिकुड़ता है. सिकुड़न से आपके चेहरे की त्‍वचा ढीला होता है.

5. फेसपैक लगाने के बाद साफ चेहरे पर टोनर या गुलाबजल कौटन से अच्‍छी तरह लगाएं. इससे त्‍वचा में ग्‍लो आएगा.

बच्चों पर रखें नजर

किशोरावस्था में लड़के व लड़की अपने आसपास मौजूद किसी भी अपोजिट सैक्स के प्रति आकर्षित हो जाते हैं और उसे वे प्यार समझ बैठते हैं. ऐसे समय में सब से ज्यादा परेशानी मातापिता को होती है क्योंकि उन्हें समझ नहीं आता कि वे बच्चों को किस तरह समझाएं.

प्यार होना कोई बड़ी बात नहीं है, किशोरावस्था में आमतौर पर लड़केलड़कियां हकीकत से ज्यादा कल्पनाओं में जी रहे होते हैं. लड़केलड़कियों को एकदूसरे के साथ समय बिताना अच्छा लगता है. वे अच्छे से अच्छा दिखने की कोशिश करते हैं, और एकदूसरे को आकर्षित करने व खुश करने का हर प्रयास करते हैं. यह तो हो जाता है. लेकिन जिसे किशोर प्यार समझ बैठते हैं वह प्यार नहीं बल्कि आकर्षण होता है, यह बात समझनी होगी. जब प्यार में धोखा मिलता है तब मातापिता को अपने बच्चों को संभालना मुश्किल हो जाता है. ये सब बातें इसलिए लिख रही हूं, क्योंकि एक वक्त मुझे भी इन सब से गुजरना पड़ा था. सोचती हूं अगर उस समय मेरे पेरैंट्स ने मेरा साथ न दिया होता, तो मेरा क्या होता. अपनी गलतियों से मैं ने छोटी उम्र में ही बहुत कुछ सीख लिया. वह कहते हैं न, इंसान ठोकर खा कर ही संभलता है, सो, अब मैं संभल चुकी हूं और चाहती हूं मेरी तरह की गलती करने वाले बच्चे भी इस बात को समझें.

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किशोर बच्चों में उम्र के साथ काफी बदलाव आते हैं जिन्हें वे स्वीकार नहीं कर पाते. किसी से कुछ कहने में हिचक होती है, लगता है सामने वाला क्या सोचेगा. मातापिता का किसी बात को ले कर रोकनाटोकना, उन्हें अपनी आजादी छीनने जैसा लगने लगता है, कारण है शारीरिक बदलाव.

यही वह उम्र होती है जब किशोर मानसिक, भावनात्मक और बौद्धिक विकास की प्रक्रिया की गति पकड़ते हैं. मन किसी एक बात पर नहीं ठहर पाता. दिमाग में सवालों का अंबार लगता चला जाता है. कब, कहां, क्यों जैसे सवाल जन्म लेने लगते हैं. अपनी आजादी पर उन्हें थोड़ा सा भी प्रतिबंध बाधक लगने लगता है. मातापिता का आदेश चुनौती सा लगने लगता है. दोस्तों के साथ घंटों समय बिताना, फोन पर बातें करना, चैटिंग करना, अपने पेरैंट्स से बातें छिपाना इसी उम्र की देन हैं. और यह सब होता है उन के हार्मोनल बदलाव के कारण.

टीनएज में लड़कों के ब्रेन से सैक्स हार्मोन टैस्टोस्टेरौन और लड़कियों के मस्तिष्क से प्रोजेस्टेरौन और एस्ट्रोजेन हार्मोन का सिक्रीशन होता है. यही हार्मोंस उन में विपरीत सैक्स के प्रति आकर्षण के लिए जिम्मेदार होते हैं. साथ ही, फिल्मी परदे पर रोमांस को देखते हुए बड़े होने वाले बच्चों के कोमल मन पर इन का गहरा असर पड़ता है. इसी वजह से आजकल किशोरों के लिए गर्लफ्रैंड या बौयफ्रैंड होना स्टेटस सिंबल बनता जा रहा है.

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इस कोमल उम्र में लड़केलड़कियों को किसी प्रकार का आघात न लगे, इस के लिए मातापिता और शिक्षकों को भी समझदारी से काम लेना चाहिए और शांत मन से कैरियर व अच्छे भविष्य की अहमियत को समझाना चाहिए.

इस उम्र में बच्चों को जिस कार्य के लिए मना करो, वे वही करना चाहते हैं, इसलिए उन्हें कभी भी लड़कों या लड़कियों से दोस्ती करने से न रोकें. पर उन्हें समयसमय पर समझाते रहें कि वास्तविकता और फिल्मी दुनिया में बहुत फर्क होता है, इसलिए ऐसी बातों में समय  बरबाद करने के बजाय अपनी पढ़ाई पर ध्यान दें. यह वक्त दोबारा लौट कर नहीं आएगा.

चंडी पूजा एक ड्रामा

गरीब, मजदूर और रिकशा खींच कर पेट पालने वालों से ले कर देश के अरबखरबपति भी जब तक दिन में दोचार बार अंधविश्वासों और पाखंडों का पालन न कर लें तब तक उन का खाना हजम नहीं होता. देश की सब से रईस महिला नीता अंबानी के अंधविश्वास उन की तरह ही हाईप्रोफाइल होते हैं जिन्हें देख उन पर तरस ही आता है. आईपीएल में अपनी टीम मुंबई इंडियन की जीत के बाद अंबानी परिवार के एक फैमिली पंडित चंद्रशेखर शर्मा ने खुलासा किया कि उन की यजमान की टीम बेहतर खेल से नहीं, बल्कि चंडी पूजा नाम के एक पाखंड के चलते जीती थी.

कोई चंडी पूजा के माहात्म्य पर शक न करे, इसलिए नीता ट्रौफी ले कर मुंबई के सिद्धि विनायक मंदिर भी गईं और राधाकृष्ण मंदिर में तो उन्होंने मूर्तियों के साथसाथ ट्रौफी को भी पुजवा डाला. कइयों की आदर्श नीता इस ड्रामे से यही साबित करना चाह रही थीं कि सफलता मेहनत और लगन से नहीं, बल्कि तरहतरह के ढोंगधतूरों से मिलती है.

अय्यर की ऊंच-नीच

वरिष्ठ कांग्रेसी नेता मणिशंकर अय्यर बोलने के मामले में भाजपा या दूसरी पार्टी के नेताओं से उन्नीस नहीं हैं. चुनावप्रचार के दौरान एक बार फिर उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को नीच कहा तो बरबस ही वैदिक युग याद हो आया जिस में ऊंची जाति वालों को श्रेष्ठ और नीची जाति वालों को नीच कहा जाता था. लोकतंत्र में भी यह सामाजिक वर्गीकरण बरकरार है.

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2019 का लोकसभा चुनाव इस बात के लिए ज्यादा याद किया जाएगा कि इस के प्रचार के दौरान मुद्दे की बातें कम हुईं और लगभग तमाम नेता होली का त्योहार सा मनाते एकदूसरे पर कीचड़ उछालते लोकतंत्र का यह महापर्व मनाते रहे, जिस की शुरुआत भाजपा की तरफ से ही हुई थी. समाज सभ्य और शिक्षित हो गया है, ऐसा कहने की कोई वजह नहीं, लेकिन यह आभास जरूर हो गया कि हम विश्वगुरु बनने के मार्ग पर अग्रसर हैं.

गुमनाम क्यों हुईं इरोम

मणिपुर में सशस्त्र बल विशेषाधिकार अधिनियम यानी आफस्पा को ले कर कभी रिकौर्ड 16 वर्षों तक भूख हड़ताल पर बैठीं नागरिक अधिकार कार्यकर्ता इरोम शर्मिला बेंगलुरु में ठीक मदर्स डे के दिन जुड़वां बेटियों की मां बनीं तो किसी ने इस जुझारू महिला पर नोटिस नहीं लिया. इरोम शर्मिला का अनशन हिंसा और ज्यादती वाले एक कानून के खिलाफ था जो पूर्वोत्तर के बेकुसूर लोगों पर कहर बरपा रहा था. कभी इस साहसी महिला को लोग सनकी तक कहने लगे थे क्योंकि उन का अनशन अहिंसक था.

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सामाजिक कार्यकर्ता इरोम शर्मिला की जिंदगी इस लिहाज से भी मिसाल है कि वे चुपचाप सामान्य महिला की तरह गृहस्थ जीवन में लौट आईं. हालांकि, राजनीति में भी उन्होंने हाथ आजमाया था. वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में उन्हें महज 90 वोट मिले थे. कभी मणिपुर और केंद्र सरकार के लिए खासा सिरदर्द साबित हो चुकीं इरोम की तरफ से अब नेता निश्ंिचत हो सकते हैं कि बाकी जिंदगी में वे कोई अनशन नहीं करेंगी, बल्कि अपनी बच्चियों की परवरिश में मशगूल रहेंगी.

अन्ना की व्यथा

कहावत पुरानी है कि गुरु गुड़ रह गए और चेला शक्कर हो गए. यह कहावत समाजसेवी अन्ना हजारे और उन के शिष्य दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर पूरी तरह लागू होती है, जिन के संबंधों में स्थायी कड़वाहट घुल चुकी है. बकौल अन्ना, जिस कांग्रेस के खिलाफ उन्होंने जंग लड़ी उसी कांग्रेस से दोस्ती कर अरविंद जनता को धोखा दे रहे हैं. यह बयान ऐसे वक्त में आया था जब आम आदमी पार्टी और कांग्रेस दिल्ली की जंग में आमनेसामने आ चुकी थीं. फिर किस दोस्ती की बात कह कर अन्ना हजारे एक बार फिर भाजपा का समर्थन कर रहे थे, यह तो वही जानें जिन पर 2012 में आरएसएस का एजेंट होने का भी आरोप लगा था.

अन्ना अपने अरविंद को ले कर बेवजह दुखी नहीं हैं. असल में अरविंद केजरीवाल ने उन्हें भाव देना बंद कर दिया है क्योंकि अन्ना बेपेंदी के लोटे की तरह हैं. अच्छा तो यह है कि गुस्से और भड़ास में खुद उन्होंने ही, 6 वर्षों बाद ही सही, यह सच उजागर कर दिया कि उन का भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन कांग्रेस को हटाने और भाजपा को लाने के लिए था.

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साड़ी में प्रियंका का बैकलेस अवतार, वायरल हुई तस्वीरें

प्रियंका चोपड़ा अपने हौटनेस एंड बोल्ड अवतार को लेकर ज्यादा सुर्खियों में रहती हैं.  आपको बता दें, हाल ही में प्रियंका चोपड़ा ने एक बेहद हौट फोटोशूट करवाया है. इस शूट में वें देसी अवतार में नजर आ रही है, लेकिन उनका ये अंदाज काफी बोल्ड है. प्रियंका चोपड़ा ने इनस्टाइल मैगजीन के लिए ये फोटोशूट करवाया है.

 

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इस फोटोशूट में प्रियंका यूं तो साड़ी में नजर आ रही हैं. लेकिन उन्होंने इस साड़ी को बैकलेस पहना हैं. मैगजीन के कवर पेज की तस्वीर शेयर करते हुए प्रियंका ने लिखा, फैशन ग्लोबल कल्चर का बेहद महत्वपूर्ण भाग है. ये फैशन सदियों से चला आ रहा है और सीजन के साथ बदलता नहीं है. मेरे लिए कपड़े की खूबसूरती सिर्फ उसकी फैब्रिक नहीं है बल्कि उसको किस तरह बनाया गया है ये भी मायने रखता है.

 

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प्रियंका चोपड़ा ने इस फोटो शूट की दो तस्वीरें और शेयर की हैं. इनमें एक तस्वीर में वो साड़ी पहने नजर आ रही हैं और एक में शर्ट और लौन्ग स्कर्ट. इन दोनों ही तस्वीरों में प्रियंका बेहद खूबसूरत लग रही हैं.

 

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इस फोटोशूट के दौरान प्रियंका मस्ती करती भी नजर आई. शूट के दौरान का ये वीडियो सोशल मीडिया पर लगातार वायरल हो रहा है.

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