वह अपनी सांसों को दुरुस्त करते हुए बोला, ‘‘सर, जल्दी चलिए, हमारे मकान में एक महिला की हत्या कर दी गई है.’’

हत्या शब्द सुनते ही एसओ चौंके. उन्होंने उस व्यक्ति से पूछा, ‘‘महिला की हत्या किस ने की, पूरी बात बताओ.’’

‘‘सर, मेरा नाम अमित राजपूत है और मैं मतैयापुरवा में रहता हूं. मेरे मकान में राजू नाम का युवक किराए पर रहता था. उसी ने अपनी पत्नी आरती की हत्या कर दी और फरार हो गया.’’

एसओ राजीव सिंह जिस काम के लिए निकलने वाले थे, वहां जाने के बजाय वह अमित राजपूत को साथ ले कर उस के गांव मतैयापुरवा के लिए निकल गए. मौके पर निकलने से पहले उन्होंने हत्या की जानकारी अपने उच्चाधिकारियों को दे दी थी.

जब वह अमित को ले कर उस के घर पहुंचे तो वहां गांव वालों की भीड़ जुटी हुई थी. जिस कमरे में महिला की लाश पड़ी थी, उस के दरवाजे पर ताला पड़ा था. खिड़की से देखा तो महिला की लाश फर्श पर पड़ी दिखाई दी. उस के कपड़े अस्तव्यस्त थे. अमित ने बताया कि इस कमरे में राजू अपनी पत्नी आरती के साथ रहता था, अब राजू लापता है.

पुलिस ने वहां मौजूद लोगों की मौजूदगी में दरवाजे का ताला तोड़ा और कमरे का निरीक्षण किया तो वहां टूटी हुई चूडि़यां मिलीं. इस से पता चला कि मृतका ने अपनी जान बचाने के लिए विरोध किया था.

मृतका की उम्र यही कोई 35 साल थी. लाश के पास ही 3 पेज का एक नोट मिला. यह मृतका आरती के पति राजू की तरफ से लिखा गया था. उस नोट में राजू ने पत्नी की बेवफाई का जिक्र किया था. इस नोट को पुलिस ने सुरक्षित रख लिया.

एसओ राजीव सिंह अभी निरीक्षण कर ही रहे थे कि उसी समय एसपी (वेस्ट) संजीव सुमन तथा सीओ (स्वरूपनगर) अजीत सिंह चौहान भी वहां पहुंच गए. पुलिस अधिकारियों ने मौके पर फोरैंसिक टीम को भी बुलवा लिया था. टीम ने मौके से जरूरी सबूत जुटाए.

उसी दौरान सीओ अजीत सिंह ने मकान मालिक अमित राजपूत से पूछताछ की तो उस ने बताया कि आरती की हत्या उस के पति राजू ने ही की है. यह बात उसे राजू के दोस्त निर्मल ने बताई थी. उन्होंने एसओ राजीव सिंह को निर्देश दिए कि वह निर्मल श्रीवास्तव को हिरासत में ले कर पूछताछ करें.

इस के बाद एसओ ने मौके की काररवाई पूरी कर लाश पोस्टमार्टम के लिए लाला लाजपतराय चिकित्सालय भेज दी. निर्मल श्रीवास्तव भी घटनास्थल पर आ गया था. एसओ राजीव सिंह ने उसे हिरासत में ले लिया और पूछताछ के लिए थाने ले आए.

पूछताछ करने पर निर्मल ने बताया कि वह राजू का दोस्त है. दोनों साथ काम करते हैं. राजू के घर उस का आनाजाना था. आतेजाते ही राजू की पत्नी से उस के प्रेम संबंध हो गए. कुछ दिनों पहले वह राजू को छोड़ कर उस के साथ रहने लगी थी. बाद में दोनों ने प्रेम विवाह कर लिया था. राजू ने आज आरती को किसी बहाने से बुलाया और उसे मार डाला.

निर्मल के बयानों से स्पष्ट था कि आरती की हत्या नाजायज रिश्तों के चलते राजू ने ही की थी. अत: एसओ राजीव सिंह ने मकान मालिक अमित राजपूत को वादी बना कर राजू के खिलाफ धारा 302 आईपीसी के तहत रिपोर्ट दर्ज कर ली.

चूंकि वह फरार था, इसलिए पुलिस ने उसे ढूंढना शुरू कर दिया. पता चला कि राजू मूलरूप से गोंडा के कटरी बाजार का रहने वाला था. एसपी (वेस्ट) संजीव सुमन ने एक विशेष टीम गोंडा भेजी. टीम ने गोंडा के कटरी बाजार स्थित राजू के घर पर छापा मारा. लेकिन वह घर पर नहीं मिला. इस के बाद पुलिस टीम ने अनेक संभावित स्थानों पर उसे तलाशा, लेकिन राजू हाथ नहीं लगा.

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4 मार्च, 2019 की सुबह 10 बजे एसओ राजीव सिंह को उन के खास मुखबिर से सूचना मिली कि हत्यारोपी राजू इस समय रावतपुर रेलवे स्टेशन पर है. सूचना मिलते ही एसओ पुलिस टीम के साथ रावतपुर स्टेशन पहुंच गए. राजू स्टेशन पर मिल गया. वह कहीं जाने के लिए वहां ट्रेन का इंतजार कर रहा था. उसे हिरासत में ले कर राजीव सिंह थाना काकादेव लौट आए.

थाने में जब उस से आरती की हत्या के संबंध में पूछा गया तो उस ने बड़ी आसानी से आरती की हत्या का जुर्म स्वीकार कर लिया. यही नहीं, उस ने घर में छिपा कर रखा गया वह दुपट्टा भी बरामद करा दिया, जिस से उस ने आरती का गला घोंटा था.

राजू से की गई पूछताछ के आधार पर एक ऐसी औरत की कहानी सामने आई, जिस ने तीसरे पति की चाहत में अपनी जान गंवा दी.

उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले के संडीला कस्बे से 7 किलोमीटर दूर एक छोटा सा गांव है नैपुरवा. इसी गांव में जयशंकर अपने परिवार के साथ रहता था. उस के परिवार में 3 बेटियां आरती, पार्वती, शांति तथा एक बेटा गौरव था.

जयशंकर के पास 3 बीघा खेती की जमीन थी. जमीन उपजाऊ थी, इसलिए किसी तरह से उस के घर का गुजारा चल रहा था. जयशंकर की आर्थिक स्थिति तो मजबूत नहीं थी, लेकिन वह व्यवहारकुशल था.

जयशंकर की बड़ी बेटी आरती ने गांव के ही जूनियर स्कूल से 8वीं की परीक्षा पास की. वह आगे पढ़ाई करना चाहती थी, लेकिन गांव के माहौल को देखते हुए मां ने उसे गांव से बाहर पढ़ाने को मना कर दिया. इस के बाद वह मां के साथ घरेलू काम में हाथ बंटाने लगी. समय बीतते आरती सयानी हुई तो वह उस के लिए लड़का देखना शुरू किया. जयशंकर को अपने एक रिश्तेदार के माध्यम से रमेश नाम के युवक के बारे में जानकारी मिली.

रमेश मूलरूप से गोंडा जिले के गांव रसूलपुर का रहने वाला था. उस के मातापिता की मौत हो चुकी थी. उस का बड़ा भाई उमेश गांव में रहता था, जबकि रमेश लखनऊ शहर में रहता था. वह राजमिस्त्री था.

रमेश सांवले रंग का जरूर था, लेकिन उस का व्यवहार अच्छा था. जयशंकर ने रमेश को देख कर उसे अपनी बेटी आरती के लिए पसंद कर लिया. हालांकि रमेश की उम्र आरती से काफी ज्यादा थी, लेकिन अपनी कमजोर आर्थिक स्थिति के कारण जयशंकर ने इन बातों पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया. बहरहाल, आरती का विवाह रमेश से कर दिया.

शादी से पहले आरती रमेश से नहीं मिली थी. उस ने रमेश को पहले फोटो में ही देखा था. शादी के समय जब उस ने पहली बार रमेश को देखा तो उस के अरमानों पर पानी फिर गया.

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विदा हो कर वह ससुराल चली तो गई लेकिन वहां बेमन से रही. आरती कुछ माह ससुराल में रही फिर रमेश उसे लखनऊ ले आया. वहां गोमतीनगर में उस ने किराए पर कमरा ले रखा था. लखनऊ में वह रमेश के साथ रहने लगी. आरती को शराब से नफरत थी, जबकि रमेश शराब का आदी था. शराब पीने को ले कर दोनों में अकसर तकरार होती रहती थी.

बढ़ते समय के साथ आरती 2 बच्चों की मां बन गई. 2 बच्चों की मां बनने के बावजूद उस के शरीर की कसावट बनी हुई थी. वह बनसंवर कर रहती थी, जिस से वह पहले से अधिक सुंदर दिखने लगी थी.

रमेश राजमिस्त्री था. दिन भर धूपछांव में काम कर के जब वह शाम को घर आता तो इतना थका होता कि खाना खा कर निढाल हो कर सो जाता. आरती उसे झिंझोड़ती तो कभी वह बेमन से उस की इच्छा पूरी करता.

पति की उपेक्षा से आरती परेशान थी. यूं तो आरती का दांपत्य सामान्य नहीं था. भले ही रास रंग में अब रमेश की पहले जैसी रुचि नहीं रह गई थी, मगर आरती की ख्वाहिशों का जलजला कम नहीं हुआ था. तभी अचानक उस के जीवन में राजू नाम का युवक आया.

राजू मूलरूप से गोंडा के ही कटरा बाजार का निवासी था. लखनऊ में रह कर वह मजदूरी करता था. गोमतीनगर स्थित जिस बहुमंजिला इमारत के निर्माण में रमेश राजमिस्त्री का काम करता था, उसी में राजू मजदूरी करता था.

रमेश और राजू दोनों ही गोंडा के रहने वाले थे, इसलिए दोनों में खूब पटती थी. काम खत्म करने के बाद दोनों शराब के ठेके पर साथ बैठ कर शराब पीते थे. शराब के लिए पैसे राजू ही देता था.

एक शाम दोनों के कदम शराब ठेके पर जा कर रुके तो रमेश बोला, ‘‘यार राजू, तुम अकसर अपने पैसों से मुझे शराब पिलाते हो, लेकिन आज मैं तुम्हें शराब की दावत दूंगा. शराब के साथ आज का खाना तुम मेरे घर पर ही खाओगे.’’

राजू इस के लिए राजी हो गया. रमेश यह सोच कर खुश था कि दोस्ती में उस ने यह नेक काम किया है. लेकिन यही उस की सब से बड़ी गलती थी.

उसी शाम राजू रमेश के घर पहुंचा तो पहली बार आरती से सामना हुआ. नजरें मिलीं तो मानो उलझ कर रह गई. राजू के मन में विचार आया कि आरती कहां रमेश के पल्ले पड़ गई.

रमेश अधेड़ उम्र का कालाकलूटा और आरती खूबसूरत. इसे तो मेरे नसीब में होना चाहिए था. दूसरी तरफ आरती के दिल में भी राजू को देख कर हलचल मच गई थी. आरती की नजरों में राजू सच में ऐसा पुरुष था, जैसी उस ने कल्पना की थी.

उस रोज राजू ने आरती के हाथ का बना खाना खाया तो उस ने उस की जम कर तारीफ की. खानेपीने के दौरान कई बार राजू और आरती की आंखें चार हुईं. इस अल्प अवधि में ही राजू और आरती में आंखों के जरिए नजदीकियां बन गईं.

दोनों के अंदर आग एक जैसी थी, इसलिए संपर्क बनाए रखने के लिए उन्होंने एकदूसरे के मोबाइल नंबर ले लिए. इस के बाद वे आपस में बातचीत करने लगे. कुछ दिनों तक औपचारिक बातचीत हुई, फिर यही बातचीत प्यारमोहब्बत तक पहुंच गई.

एक दिन दोपहर को राजू मौका निकाल कर रमेश के घर जा पहुंचा. उस समय रमेश साइट पर था और बच्चे स्कूल गए थे. घर में आरती अकेली थी. आरती के सौंदर्य को देख कर राजू खुद को रोक न सका और उस ने आगे बढ़ कर आरती को अपनी बांहों में भर लिया. आरती ने दिखावे के लिए छूटने का प्रयास किया, लेकिन छूट न सकी.

राजू की बांहों में आरती जो सुख महसूस कर रही थी, वह उस सुख से काफी समय से वंचित थी. उस की तमन्नाएं अंगड़ाई लेने लगीं. फिर वह भी अमरबेल की तरह राजू से लिपट गई. इस के बाद दोनों ने मर्यादाएं लांघ कर अपनी हसरतें पूरी कीं.

उस दिन के बाद आरती राजू के प्यार में इतनी ज्यादा दीवानी हो गई कि वह पति से ज्यादा प्रेमी राजू का खयाल रखने लगी. राजू भी अपनी कमाई आरती पर खर्च करने लगा. रमेश शराब का लती था. उस की इस कमजोरी का राजू ने भरपूर फायदा उठाया. वह हर शाम शराब की बोतल ले कर उस के घर पहुंच जाता. वह खुद कम पीता और रमेश को अधिक पिला कर नशे में चूर कर देता. जब रमेश सो जाता, तब आरती और राजू वासना का खेल खेलते.

एक रात रमेश की नींद खुल गई. उस ने आरती व राजू को आपत्तिजनक स्थिति में देखा तो क्रोध से पगला गया. गालीगलौज कर के उस ने राजू को भगा दिया. इस के बाद उस ने आरती की खूब पिटाई की. मौके की नजाकत भांप कर आरती ने रमेश से वादा किया कि आइंदा वह राजू से किसी तरह का संबंध नहीं रखेगी.

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आरती ने पति से यह वादा कर तो लिया लेकिन 2-4 दिन बाद ही उसे राजू की याद सताने लगी. वहीं राजू को भी चैन नहीं था. लिहाजा मौका देख कर आरती राजू को फोन लगा देती और दोनों बात कर लेते.

एक दिन रमेश साइट पर गया, लेकिन किसी कारणवश काम बंद था. अत: वह वापस घर पहुंच गया. कमरा अंदर से बंद था. तभी उसे कमरे के अंदर से पत्नी के हंसने की आवाज सुनाई दी. उस ने दरवाजा खुलवाने के बजाए दरवाजे की झिर्री से अंदर झांका तो अंदर का दृश्य देख कर सन्न रह गया. कमरे में आरती राजू के साथ मौजमस्ती कर रही थी.

दोस्त के साथ पत्नी को एक बार फिर देख कर रमेश का खून खौल उठा. लेकिन वह बोला कुछ नहीं. कुछ देर वह जड़वत खड़ा रहा. उस के बाद दरवाजा खुलवाया तो अपराधबोध से आरती व राजू कांपने लगे. दोनों ने रमेश से माफी मांगी. पर उस ने माफ नहीं किया. रमेश ने राजू को फटकार लगाई, ‘‘आस्तीन के सांप, भाग जा घर से वरना मैं तेरा गला घोंट दूंगा.’’

राजू बिना कुछ बोले वहां से चला गया.

इस के बाद रमेश ने सारा गुस्सा आरती पर उतारा. वह आरती को तब तक पीटता रहा, जब तक वह थक नहीं गया. आरती कई दिन तक चारपाई पर पड़ी रही. लेकिन आरती की इस पिटाई ने आग में घी का काम किया. वह पति से नफरत करने लगी. उस ने घर में कलह भी शुरू कर दी. आरती जान गई थी कि अब उस का ऐसे जुल्मी पति के साथ गुजारा संभव नहीं है.

अत: उस ने एक दिन राजू से मुलाकात की और उसे बताया कि यदि वह उसे सच्चा प्यार करता है तो उसे अपने साथ ले चले, वरना वह अपनी जान दे देगी. राजू भी यही चाहता था. अत: उस ने आरती को समझाया कि वह धैर्य रखे. शीघ्र ही वह उसे अपना जीवनसाथी बना लेगा. आश्वासन पा कर आरती खुश हो गई.

आरती अब घर में खुश रहने लगी थी. पति की बात भी मानने लगी थी. इतना ही नहीं, उस ने घर में लड़ना भी बंद कर दिया था. घर का सारा काम भी वह समय पर करने लगी थी. पत्नी में आए इस बदलाव से रमेश हैरान था. वह यही सोच रहा था कि आरती को अपनी गलती का अहसास हो गया है, जिस से वह सुधर गई है.

लेकिन एक दिन जब शाम को रमेश घर आया तो बच्चे भूख से बिलबिला रहे थे. पूछने पर बच्चों ने बताया कि वे जब स्कूल से घर वापस आए तो मम्मी घर में नहीं थीं. उन्होंने पासपड़ोस में खोजा, लेकिन वह नहीं मिली.

बच्चों की बात सुन कर रमेश का माथा ठनका. उस ने घर में नजर दौड़ाई तो संदूक का ताला खुला था. संदूक में रखे पैसे गायब थे. संदूक में रखे आरती के कपड़े भी गायब थे. उस ने सोचा कि आरती कहीं बच्चों को छोड़ कर भाग तो नहीं गई. लेकिन उसे लगा कि आरती बच्चों को छोड़ कर नहीं जा सकती.

रमेश के मन में तरहतरह के विचार आ ही रहे थे कि तभी उस की निगाह अलमारी में रखे एक कागज पर पड़ी. उस कागज को खोल कर रमेश ने पढ़ा तो उस के होश उड़ गए. कागज में लिखा था, ‘मैं तुम जैसे राक्षस के साथ जिंदगी नहीं बिता सकती. इसलिए राजू के साथ जा रही हूं. मुझे खोजने की कोशिश मत करना. बच्चे तुम ने पैदा किए हैं, इसलिए उन्हें तुम्हारे पास ही छोड़ रही हूं.’

इधर राजू आरती को साथ ले कर लखनऊ से कानपुर आ गया. वहां उस ने विजय नगर कच्ची बस्ती में एक मकान किराए पर ले लिया और आरती के साथ रहने लगा. एक महीने बाद दोनों ने शास्त्रीनगर स्थित काली मंदिर में एकदूसरे को जयमाला पहना कर प्रेम विवाह कर लिया. प्रेम विवाह करने के बाद दोनों सुखमय जीवन व्यतीत करने लगे. राजू और आरती दोनों एकदूसरे को टूट कर चाहते थे. राजू आरती को हर तरह से खुश रखने में लगा रहता था. आरती भी अपने दूसरे पति का भरपूर खयाल रखती थी.

हंसीखुशी 3 साल बीत गए. उस के बाद आरती का मन राजू से भर गया. अब वह राजू से दूरियां बनाने लगी. दरअसल, राजू की आर्थिक स्थिति अब कमजोर हो गई थी. उस की कमाई का आधा हिस्सा आरती अपने शृंगार व कपड़ों पर ही खर्च कर देती थी. फिर मकान का किराया और गृहस्थी के अन्य खर्चों की वजह से पैसे का अभाव हो जाता था. इसे ले कर आरती और राजू में झगड़ा होने लगा था.

राजू का एक दोस्त निर्मल श्रीवास्तव था. वह भी राजू के साथ मजदूरी करता था. दोनों में खूब पटती थी. कभीकभी शाम को राजू के घर दोनों की महफिल भी जम जाती थी. वह राजू की आर्थिक मदद भी करता रहता था. इसलिए राजू निर्मल के अहसानों तले दबा रहता था. निर्मल आरती को मन ही मन चाहता था, लेकिन आरती से अपनी बात कह नहीं पाता था.

कहते हैं औरत की निगाह पारखी होती है. आरती जानती थी कि निर्मल उसे मन ही मन चाहता है. अत: आरती ने अपने कदम निर्मल की तरफ बढ़ा दिए. आरती निर्मल के साथ होने वाली हंसीमजाक की सीमाएं भी लांघने लगी.

निर्मल श्रीवास्तव कमाता तो था लेकिन तनहा जिंदगी व्यतीत कर रहा था. उसे औरत की कमी खलती थी. आरती ने जब उसे भाव देना शुरू किया तो वह आरती के प्रेम में डूबता चला गया. निर्मल ने अब राजू की गैरमौजूदगी में भी उस के घर आना शुरू कर दिया. निर्मल जब भी आता, आरती के लिए कुछ न कुछ उपहार जरूर लाता.

एक दोपहर निर्मल घर आया तो उस ने आते ही आरती को अपनी बांहों में भर लिया और प्रणय निवेदन करने लगा. आरती उस की बांहों में कसमसाते हुए बोली, ‘‘बाहर का दरवाजा खुला है. कोई देख लेगा तो बिना मतलब फजीहत होगी.’’

निर्मल ने आरती को बाहुपाश से मुक्त किया और बाहर का दरवाजा बंद कर फिर उसे बांहों में जकड़ लिया. आरती भी निर्मल का साथ देने लगी. इस के बाद दोनों ने अपनी हसरतें पूरी कीं.

इस के बाद निर्मल और आरती का मिलन अकसर होने लगा. आरती निर्मल की ऐसी दीवानी बन गई कि उस ने उसे तीसरे पति के रूप में चुन लिया. यही नहीं, उस ने राजू को बिना बताए कामेश्वर मंदिर, विजय नगर में निर्मल से प्रेम विवाह भी कर लिया. अब आरती और निर्मल गुपचुप तरीके से पतिपत्नी की तरह रहने लगे.

राजू को जब निर्मल और आरती के संबंधों की बात पता चली तो उस का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया और उस ने आरती की जम कर पिटाई की तथा निर्मल को भी भलाबुरा कहा. इस के बाद राजू ने विजय नगर वाला मकान छोड़ दिया और काकादेव थानांतर्गत मतैयापुरवा में अमित राजपूत के मकान में किराए पर रहने लगा. यह बात अगस्त 2018 की है.

आरती, राजू के साथ मतैयापुरवा वाले मकान में रहने जरूर लगी, लेकिन उस ने निर्मल का साथ नहीं छोड़ा. राजू घर से काम पर चला जाता तो आरती सजसंवर कर निर्मल के पास पहुंचा जाती. फिर मौजमस्ती कर वापस आ जाती. राजू को आरती पर शक रहने लगा था, इसलिए निर्मल को ले कर दोनों में अकसर झगड़ा होने लगा था. झगड़े के दौरान ही एक दिन आरती ने बता दिया कि उस ने निर्मल से ब्याह रचा लिया है और अब वह निर्मल की पत्नी बन कर उस के साथ ही रहेगी.

आरती की बात सुन कर राजू सन्न रह गया. उस ने आरती को बहुत समझाया लेकिन वह नहीं मानी. इस के बाद वह राजू का साथ छोड़ कर निर्मल के साथ विजय नगर में रहने लगी.

पत्नी की बेवफाई से राजू टूट गया. वह परेशान रहने लगा तथा शराब भी ज्यादा पीने लगा. पत्नी की बेवफाई में उस ने कई पत्र लिखे. आखिर में राजू ने आरती को बेवफाई की सजा देने का निश्चय कर लिया.

26 फरवरी, 2019 की दोपहर राजू ने आरती से मोबाइल पर बात की और उस से घर आने का आग्रह किया. आरती ने पहले तो मना कर दिया लेकिन राजू के बारबार आग्रह से वह पिघल गई.

लगभग 2 बजे आरती राजू के मतैयापुरवा वाले कमरे पर पहुंची. राजू ने आरती को मना कर फिर से उस की जिंदगी में लौट आने की मिन्नत की. लेकिन आरती ने दो टूक जवाब दे दिया. इस के बाद बेवफाई को ले कर आरती और राजू में तीखी बहस शुरू हो गई.

इसी बहस के दौरान राजू अचानक ही दुपट्टे से आरती का गला कसने लगा. बचाव में आरती की चूडि़यां भी टूट गईं और कपड़े भी अस्तव्यस्त हो गए. आरती ने जान बचाने की पूरी कोशिश की लेकिन सफल नहीं हो सकी. राजू के हाथ तभी ढीले पड़े, जब उस ने आरती का काम तमाम कर दिया.

आरती की हत्या के बाद राजू ने निर्मल को फोन के जरिए जानकारी दी कि उस ने आरती को मार दिया है, उस की लाश उस के कमरे में पड़ी है, आ कर लाश ले जाए. इस के बाद राजू कमरे में ताला लगा कर फरार हो गया.

इधर निर्मल बदहवास हालत में राजू के कमरे पर पहुंचा तो कमरे में ताला लगा था. उस ने खिड़की से झांक कर देखा तो आरती की लाश पड़ी थी. निर्मल ने शोर मचाया तो मकान मालिक अमित कुमार आ गया. इस के बाद अमित कुमार थाना काकादेव पहुंचा और आरती की हत्या की सूचना दी. सूचना पाते ही थानाप्रभारी राजीव सिंह घटनास्थल पर पहुंचे और शव को कब्जे में ले कर जांच शुरू की.

3 मार्व, 2019 को थाना काकादेव पुलिस ने अभियुक्त राजू को कानपुर कोर्ट में रिमांड मजिस्ट्रैट के समक्ष पेश किया, जहां से उसे जिला कारागार भेज दिया गया. मृतका आरती के प्रेमी (पति) निर्मल श्रीवास्तव का हत्या में कोई हाथ नहीं था इसलिए पुलिस ने उसे छोड़ दिया.

   —कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

(कहानी सौजन्य- मनोहर कहानियां)

 

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