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कुछ देर मैं दुनिया से अलग रह पाती, दिल में उठते हुए तूफान थम गये जैसे…

रात को चांद मेरी छत पे टहलने आया
उसने देखा बड़ा गुमसुम, बड़ा उदास मुझे
पास आकर बड़े हौले से दी आवाज़ मुझे
मैं उसे देखकर हैरान हुई जाती थी
मेरे सीने में मेरी सांस रुकी जाती थी
उसकी आंखें चमक रही थीं इक शरारत में
मुस्कुराया वो मुझे देखकर इस हालत में
फिर बढ़ाते हुए मेरी तरफ़ वो दस्ते-अदब
पूछ बैठा मेरी ख़ामोश तबीयत का सबब
मैं जो रहती थी ज़माने के छलावों से अलग
झूठे लोगों से, फ़रेबों से, दिखावों से अलग
मैंने पाया ही नहीं भीड़ के क़ाबिल खुद को
रास आयी फ़क़त तन्हाई की महफ़िल मुझको
इससे पहले कि ये बातें मैं उससे कह पाती
और कुछ देर मैं दुनिया से अलग रह पाती
दिल में उठते हुए तूफ़ान थम गये जैसे
शब्द होंठों पे थरथरा के जम गये जैसे
उसकी बाहों में गिरफ़्तार हो चुकी थी मैं
एक दुल्हन-सी लालो-ज़ार हो चुकी थी मैं
रात को चांद मेरी छत पे टहलने आया

मेरे कानों में जैसे बजने लगी शहनाई
जाग उठे सैकड़ों अरमान लेके अंगड़ाई
इक क़यामत हुआ उसका मेरे क़रीब आना
मेरा आग़ोश-ए-मोहब्बत में डूबते जाना
उसकी पलकें मेरी पलकों पे झुकी जाती थीं
उसकी सांसें मेरी सांसों में घुली जाती थीं
मेरे दिल में समा रही थीं धड़कनें उसकी
और नस-नस में दौड़ती थीं चाहतें उसकी
था वो परवाना, तो शमां सी जल रही थी मैं
उसके होंठों की तपिश से पिघल रही थी मैं
प्यार में गूंजते नग़मात सुने थे मैंने
उसकी आंखों से कई ख़्वाब चुने थे मैंने
उससे करने को मेरे पास थीं कितनी बातें
अब मेरे साथ नहीं थीं मेरी तन्हा रातें
रात को चांद मेरी छत पे टहलने आया

उसने दिल को खुशी, होंठों को वो हंसी दे दी
जैसे इक लाश को दोबारा ज़िन्दगी दे दी
दुनिया-ए-रंग-ए-मोहब्बत की कशिश ऐसी थी
मैं ज़माने के ग़मो-दर्द भूल बैठी थी
उसकी बाहों में यूं लहरा के झूल जाती थी
वो मेरे पास था, मैं खुद को भूल जाती थी
मैं अपने प्यार पे करती थी एतबार बहुत
और मेरे वास्ते वो भी था बेक़रार बहुत
पर मेरे मन में इक सवाल उठा करता था
क्यों मेरा चांद बस रातों को मिला करता था
क्यों नहीं दिन के उजाले में पास आता था
क्यों अपने प्यार को दुनिया से वो छुपाता था
जबकि रातों को एक जिस्म, एक जान थे हम
फिर ज़माने की निगाहों में क्यों अनजान थे हम
क्या मेरा चांद इस दुनिया में आ नहीं सकता
एक छोटा सा घरौंदा बना नहीं सकता
मैंने उस रात ये सवाल किया था उससे
अपने दिल का बयान हाल किया था उससे
बस मेरा चांद मेरे पास फिर नहीं आया
पड़ गयी मुझ पे अमावस की वो काली छाया
मैं सिसकती रही गुमनाम अन्धेरों में पड़ी
इन्तज़ार आज भी करती हूं उसका छत पे खड़ी
जबकि मालूम है कि अब वो नहीं आएगा
मेरी क़िस्मत का अन्धेरा कभी न जाएगा
जिसको पूजा था, जिस पे जान-ओ-जिस्म हारा था
वो मोहब्बत का नहीं था, हवस का मारा था
रूह को मेरी तार-तार किया था उसने
भावनाओं से बलात्कार किया था उसने
प्यार धोखा है ये पैग़ाम दे गया मुझको
मेरी चाहत का ये ईनाम दे गया मुझको
अब किसी और की बाहों में मचलता होगा
अब किसी और की छत पर वो टहलता होगा
अब किसी और की छत पर वो टहलता होगा
अब किसी और की छत पर वो टहलता होगा

शब्दार्थ : 
दस्ते-अदब – इज़्ज़त का हाथ
सबब – कारण
लालो-ज़ार – शर्म से लाल
आग़ोश-ए-मोहब्बत – प्रेम की गोद
नग़मात – गीत
दुनिया-ए-रंग-ए-मोहब्बत – प्रेम की दुनिया का रंग

जेपी नड्डा की पहली चुनौती यूपी

भारतीय जनता पार्टी ने अध्यक्ष के चुनाव की पुरानी परंपरा को छोड़ अब मनोनयन की पंरपरा को ही आगे बढ़ाना पंसद किया है. दूसरी पार्टियों की ही जरह भाजपा में संगठन का चुनाव खत्म सा हो चला है. ऐसे में पार्टी में लोकतंत्र है, यह बात केवल कहने भर के लिये ही बची है.

भाजपा से जुड़ी युवा पीढ़ी ने तो यह देखा ही नहीं कि पार्टी में संगठन के चुनाव भी होते हैं. जगत प्रकाश नड्डा यानि जेपी नड्डा भारतीय जनता पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष बनाये गये हैं. इसमें उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा योगदान माना जा रहा है. उत्तर प्रदेश में बसपा-सपा के गठबंधन के बाद भी भाजपा ने जो सफलता हासिल कि है, उसमें जेपी नड्डा का सबसे बड़ा योगदान माना जा रहा है. उत्तर प्रदेश में पार्टी को सफल बनाने के वाले को भाजपा में जल्दी तरक्की दी जाती है.

2014 के लोकसभा चुनाव में अमित शाह भी उत्तर प्रदेश के प्रभारी थे. उत्तर प्रदेश में बड़ी सफलता के बाद जेपी नड्डा को कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया. 2019 के लोकसभा चुनाव में जेपी नड्डा उत्तर प्रदेश के प्रभारी थे अब वह पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष बनाये गये हैं. जेपी नड्डा ने उत्तर प्रदेश की जंग को जीतने के लिये प्रदेश को अवध, काशी, गोरखपुर, ब्रज, पश्चिम, कानपुर बुन्देलखंड में बैठको का दौर चलाया. यहा पार्टी को बूथ, सेक्टर, मंडल और जिला संगठन स्तर पर चुनाव प्रबंधन के लिये तैयार किया.

हर क्षेत्र में बूथ सम्मेलन कराये गये जेपी नड्डा ने पूरे प्रदेश के संगठन में आपसी खींचतान को बंद कराया और पार्टी में डेली रिपोटिंग सिस्टम शुरू कराया. जिससे हर कार्यकर्ता की जवाबदेही को तय की जा सकें. जिस उत्तर प्रदेश ने जेपी नड्डा को कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने में खास भूमिका अदा की, वही अब उनके सामने चुनौती बना है. उत्तर प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष डाक्टर महेन्द्र पांडेय लोकसभा चुनाव जीत कर केन्द्र में मंत्री बन गये हैं. अब उत्तर प्रदेश में नया प्रदेश अध्यक्ष बनाना है. उत्तर प्रदेश में प्रदेश अध्यक्ष बनाने के समय जाति का गणित सबसे पहले देखा जाता है.

मुख्य मंत्री की कुर्सी पर ठाकुर बिरादरी के योगी आदित्यनाथ का बैठाने के बाद प्रदेश अध्यक्ष पद पर डाक्टर महेन्द्र पांडेय को लाया गया था. अब यह देखना बाकी है कि ब्राहमण बिरादरी के खेमे में ही प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी रहेगी या किसी और जाति के खेमे में जायेगी. इसको हल करने के साथ ही जेपी नड्डा को ऐसे संगठन चलाना है, जिससे 2022 के विधानसभा चुनाव में पार्टी चुनाव जीत सके. उत्तर प्रदेश आने वाले दिनो में भी सबसे बड़ी चुनौती के रूप में सामने है.

अमिताभ बच्चन की नातिन नव्या नवेली का वीडियो हुआ वायरल

बौलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन की नातिन नव्या नवेली नंदा का एक वीडियो सोशल वीडियो पर खूब वायरल हो रहा है. इस वीडियो में नव्या न्यूयार्क की सड़कों पर एक्सरसाइज करती दिखाई दे रही हैं. यह वीडियो सोशल मीडिया पर काफी धूम मचा रहा है.

 

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इस वीडियो की बात करें तो इसमें नव्या नवेली नंदा खुद को ‘फिट’ रखने के लिए खूब मेहनत करती दिख रही हैं. यह वीडियो नव्या नवेली नंदा के फैन क्लब के पेज से इंस्टाग्राम पर शेयर किया गया है.

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navya

इस वीडियो में नव्या नवेली नंदा ने नियोन ग्रीन टाप और ग्रे टाइट्स पहना है. इसके साथ ही नव्या ने हेयरस्टाइल में बालों का हाई पोनी टेल बनाया हुआ है. जो उनपर काफी सूट कर रहा है.

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जानें क्यों, दीपक ठाकुर ने जसलीन मथारू से मांगी माफी

आपने ‘बिग बौस’ के घर में तो झगड़े बहुत देखे होंगे लेकिन क्या आपने बिग बौस के कंटेस्टेंयट को घर के बाहर भी आपस में भिड़ते हुए देखा हैं? आपको बात दें, बिग बौस 12 के कंटेस्टेंट जसलीन मथारू ने एक वीडियो शेयर करने के बाद दीपक ठाकुर के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी.

दरअसल, दीपक ठाकुर इस वीडियो में अपने कजिन के साथ मिलकर बोलते दिखाई दिए कि बिग बौस के घर में शामिल होने का मौका मिलेगा तो वे क्याल करेंगे? इसका जवाब देते हुए कजिन ने कहा – ‘जसलीन मथारू के साथ पूल में नहायेंगे’ भले ही दीपक का ये वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा हो लेकिन जसलीन मथारू और उनके पिता केसर मथारू को ये वीडियो बिलकुल पसंद नहीं आया और उन्होंने इस वीडियो पर आपत्ति जताते हुए पुलिस में इसके खिलाफ शिकायत दर्ज करा दी.

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लेकिन अब दीपक ठाकुर ने इसको लेकर जसलीन मथारू और उनके पिता केसर मथारू ने माफी मांगी है. मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक केसर मथारु ने कहा है कि इस वीडियो से सोशल मीडिया पर मेरी बेटी को लेकर नकारात्मक टिप्पणियां मिली है. लोगों ने उसके बारे में तरह- तरह की बातें की. इसलिए, हम दीपक के खिलाफ शिकायत दर्ज करने के लिए पुलिस के पास गए. हालांकि माफी मांगने के बाद हमने दीपक के खिलाफ दर्ज की हुई शिकायत वापस ले ली है.

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एडवेंचर टूरिज्म: इस पहाड़ी झील पर है

हिमालय के ऊंचे पहाड़ों पर वाटर स्पोर्ट्स और वह भी रोमांचित कर देने वाला. पहली बारी में यह खबर बेबुनियाद लगती है, पर है बिलकुल खरी. इस के लिए आप को ज्यादा दिन भी नहीं देने पड़ते हैं और यह आप की जेब के लिए भी फायेदमंद ट्रिप कही जा सकती है. हम बात कर रहे हैं टिहरी बांध से पहले बनी टिहरी झील की, जहां अव्वल दर्जे का वाटर स्पोर्ट्स लोगों को अपनी तरफ खींच रहा है.

अगर आप इस बार की चिलचिलाती गरमी में वाटर स्पोर्ट्स का मजा लेना चाहते हैं, तो खूबसूरत उत्तराखंड के नई टिहरी इलाके में जरूर जाइए. वहां आप को रोमांच का ऐसा नायाब तोहफा मिलेगा, जिस के बारे में आप ने सपने में भी सोचा भी नहीं होगा.

देश की राजधानी दिल्ली से तकरीबन 325 किलोमीटर की दूरी तय कर के आप देहरादून, मसूरी, धनौल्टी, चंबा होते हुए 8 से 9 घंटे में टिहरी बांधे जा सकते हैं. वैसे, ऋषिकेश से भी हो कर जाया जा सकता है.

टिहरी शहर भागीरथी और भीलांगना नदियों के संगम गणेश प्रयाग पर बसा एक छोटा सा खूबसूरत शहर था. टिहरी बांध के बनने के बाद यह शहर पानी में डूब गया था. यहां पर एक गहरी झील बन गई थी जिसे आज सुमन सागर के नाम से जाना जाता है. पुराने टिहरी इलाके के लोगों को वहां से हटा कर नई टिहरी शहर में बसाया गया है.

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‘लक्ष्य वाटर स्पोर्ट्स’ के साहिल गिल ने बताया कि टिहरी झील में वाटर बाइक के अलावा आप स्पीड बोट, नौर्मल बोट, जेट स्की, जेट अटैक, बनाना राइड, सर्फिंग राइड, कयाकिंग के अलावा और भी बहुतकुछ कर सकते हैं. चूंकि झील बहुत ज्यादा गहरी है, इसलिए सैलानियों की सिक्योरिटी का पूरा ध्यान रखा जाता है.

इस झील में फ्लोटिंग हट भी बनी हुई हैं जिन में सैलानी रहने का मजा भी ले सकते हैं. इस के साथ ही सैलानियों को लुभाने के लिए दूसरी और भी योजनाओं पर काम किया जा रहा है.

साहिल गिल ने बताया कि लोगों को और भी ज्यादा रोमांचित करने के लिए टिहरी और उस के आसपास जंगल कैंपिंग का भी इंतजाम किया जाता है जिन में पूरी तरह से जंगली माहौल में रहने का अपना ही मजा होता है.

कैसे जाएं : नई टिहरी से सब से नजदीकी हवाई अड्डा जौलीग्रांट हवाई अड्डा है. यह 93 किलोमीटर की दूरी पर है. अगर आप रेल से जाना चाहते हैं तो ऋषिकेश सब से नजदीकी रेलवे स्टेशन है. ऋ षिकेश से टिहरी 76 किलोमीटर दूर बसा है. सड़कमार्ग की बात करें तो नई टिहरी कई महत्त्वपूर्ण मार्गों, जैसे देहरादून, मसूरी, हरिद्वार, पौढ़ी, ऋषिकेश और उत्तरकाशी आदि जगहों से जुड़ा हुआ है. आसपास की जगह घूमने के लिए टैक्सी द्वारा जाया जा सकता है.

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कभी प्यार कभी तकरार, मजबूत रिश्ते का यही आधार…

जराजरा सी बात पर तकरार करने लगे हो. ..
लगता है मुझ से बेइंतहा प्यार करने लगे हो…

किसी भी रिश्ते में प्यारमनुहार के साथसाथ छोटी-मोटी नोकझोंक और झगड़े होने स्वभाविक है और इस से प्यार बढ़ता ही है. पर ध्यान रखें यहां छोटे झगड़ों की बात की गई है जिन्हें हम 2 -1 दिन के अंदर सुलझा लेते हैं. ऐसे झगड़ों के बाद कपल्स एकदूसरे के पहले से भी ज्यादा करीब हो जाते हैं.

भारत के लगभग 44% विवाहित जोड़े यह स्वीकारते हैं कि कभीकभार होने वाला झगड़ा जरूरी है. इस से आप को अपने पार्टनर की पसंदनापसंद के साथसाथ अच्छेबुरे पहलुओं को समझने का मौका मिलेगा.

हाल ही में की गई एक नई स्टडी की रिपोर्ट भी इस बात की पुष्टि करती है. स्टडी के मुताबिक पार्टनर के साथ किसी बात पर हुई बहस या झगड़े से रिश्ता मजबूत बनता है.

लगभग 1000 लोगों पर किये गए सर्वे पर आधारित इस रिपोर्ट में यह बात सामने आई कि जो कपल्स छोटीछोटी बातों को ले कर अपने पार्टनर से झगड़ने लगते हैं वे उन लोगों के मुकाबले 10 गुना ज्यादा खुश रहते हैं जो पार्टनर की किसी बात पर बुरा मान कर अकेले में ही रो कर अपने आंसुओं को पोंछ लेते हैं.

स्टडी के मुख्य लेखक जोसेफ ग्रेनी के मुताबिक कई कपल्स किसी सेंसिटिव टॉपिक पर पार्टनर से लड़ाई करने से बचते हैं क्यों कि उन्हें लगता है ऐसा करने से उन का रिश्ता टूट सकता है. लेकिन स्टडी में शामिल 5 में से 4 लोगों ने माना कि पार्टनर के साथ उन का रिश्ता खराब होने की अहम वजह खराब संवाद यानी बातचीत में कमी है.

इस अध्ययन से पता चलता है कि अपनी भावनाओं को अपने पार्टनर से शेयर करना और किसी बात के बुरा लगने पर पार्टनर से झगड़ा करने से रिश्ता कमजोर नहीं बल्कि मजबूत बनता है. सिर्फ रिश्ते में विश्वास और प्यार होना चाहिए. यानी पतिपत्नी में होने वाले मनमुटाव उन्हें एकदूसरे के और नजदीक लाने में सहायक सिद्ध होते हैं.

झगड़ा करने वाला पार्टनर होता है ज्यादा वफादार

शोधकर्ताओं का मानना है कि रिलेशनशिप में नाराज रहने वाले पार्टनर एकदूसरे के प्रति ज्यादा वफादार होते हैं. वे अपने पार्टनर से प्यार करते हैं उन पर ध्यान देते हैं और उन की कुछ बातें जो पसंद नहीं आतीं उन में सुधार करते रहना चाहते हैं. जब कि वैसे लोग जो पार्टनर से ज्यादा मतलब नहीं रखते और उन की तरफ ध्यान ही नहीं देते सामान्यतया बेवफा होते हैं.

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जर्नल आफ बायोबिहेवरल मेडिसिन में प्रकाशित एक शोध के मुताबिक़ रिलेशनशिप में झगड़ने वाले कपल्स की लवलाइफ ज्यादा स्ट्रौन्ग होती है और वे ज्यादा वफादार होते हैं. शोधकर्ताओं ने 192 ऐसे जोड़ों पर शोध किया जो करीब 32 सालों से एकदूसरे के साथ थे. शोध में हर कपल से सवाल किया गया कि रिलेशनशिप में टकराव की स्थिति पैदा होने पर वे कैसी प्रतिक्रिया देते हैं? क्या झगड़े के बाद वे खुद को अलग कर लेते हैं या फिर स्थिति पर काबू पा लेते हैं या जो कुछ भी उन के दिमाग में चल रहा है उसे बाहर निकालना पसंद करते हैं ?

बौन्डिंग ज्यादा मजबूत होती है-

शोधकर्ताओं ने पाया कि पार्टनर के झगड़े का रिस्पौन्स उसी के अंदाज में देने वाले लोगों की लवलाइफ ज्यादा लंबी होती है. अगर आप झगड़े के दौरान अपने पार्टनर की बातों का जवाब पूरे तेवर में दे रहे हैं और अपनी बातों को पूरी तरह क्लियर कर रहे है तो निश्चित तौर पर आप की बौन्डिंग ज्यादा मजबूत होगी. झगड़े के बाद चुप रहना सही नहीं. अपने मन की भड़ास निकालें. अपनी भावनाएं बह जाने दें ताकि  उन पर बातचीत कर कोई सोल्युशन निकाला जा सके.

रिसर्च में शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि झगड़े के दौरान अपने इमोशन जाहिर न करने के बजाय उन पर बातचीत करना ज्यादा बेहतर विकल्प है.

अपने पार्टनर को समझने और अपने रिश्ते को बेहतर बनाने के लिए अपनी भावनाओं को जाहिर करना भी जरूरी होता है. इस से आप का पार्टनर आप का पक्ष और आप के दिल में चल रही उलझनों को समझ पायेगा और रिलेशनशिप मजबूत होगा.

जाहिर है कि झगड़ा करना गलत नहीं मगर इस झगड़े को आप कैसे मैनेज करते हैं यह महत्वपूर्ण है.

झगड़े के बाद चुप न रहे. अपनी भावनाओं को बह जाने दे. मगर इस बात का ख्याल भी जरूर रखें कि आप झगड़े के दौरान अपनी सीमा पार न करें. क्यों कि यदि झगड़ा लंबा खिंच जाए या बात कड़वाहट और मारपीट तक पहुंच जाए तो फिर रिश्तो में मोहब्बत को सहेजना मुश्किल हो जाता है.

पार्टनर से इस तरह के कटु शब्द न कहे कि बाद में आप शब्दों से लगे इस जख्म का इलाज ही न ढूंढ पाए. ध्यान रखें कुछ बातें ऐसी होती हैं जिन्हें लड़ते वक्त भी आप को अपने पार्टनर से नहीं कहनी चाहिए:

तुम से कुछ नहीं होगा

झगड़े के दौरान यदि आप अपने पार्टनर की इंसल्ट करने लगे हैं तो ज़रा संभल जाइए. झगड़ा बढ़ रहा हो तो आप को थोड़ा रुक कर गहरी सांस लेनी चाहिए और सिचुएशन से निपटने के बारे में सोचना चाहिए न कि उसे और भी ज्यादा बिगाड़ने के बारे में. बस इस बात का ध्यान रख‍िए कि ऐसी कड़वी बात कभी न बोले जिस की चोट आप का पार्टनर कभी भूल न पाए. कितना भी बड़ा झगड़ा हो हमेशा एकदूसरे के ल‍िए मन में रेस्पेक्ट होना बहुत जरूरी है.

हमें अलग हो जाना चाहिए 

झगड़े के दौरान या तुरंत बाद कोई भी बड़ा फैसला लेने से बचें. याद रख‍िए कि इस समय अलग होने की बात करना हमेशा-हमेशा के लिए आप के रिश्ते को खत्म कर देगा. आप का पार्टनर भी आप पर भरोसा नहीं करेगा क्‍यों कि इस से उसे ऐसा लगेगा कि थोड़ीबहुत दिक्कत आने या मतभेद होने पर ही आप भाग खड़े होने वालों में से हैं.

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तुम हमेशा ऐसा करते/करती हो

वैसे तो हर बार झगड़े का मुद्दा अलगअलग होता है पर झगड़े के वक्त पुरानी बातों को ले कर बैठ जाना बहुत ही गलत है. वह भी ऐसी बातें जिन्हें आप पहले ही सुलझा चुके हैं. उन पर फिर से बहस करना बेवकूफी है. याद रख‍िए अगर आप अपने पार्टनर से प्यार करते हैं तो इस तरह के गड़े मुर्दे उखाड़ने की भूल कतई न करें. इस से आप को कुछ भी हासिल नहीं होगा.

तुम्हे क्या पता मैं कितनी मुश्किल से कमाता हूं, और एक तुम हो जिसे केवल बेवजह उड़ाना आता है.

यह ऐसी लाइन है जिसे कोई भी पत्नी सुनना नहीं चाहेगी. कभी भी अपनी कमाई का रुतबा झाड़ कर पत्नी को दबाने का प्रयास न करें क्यों कि पति हो या पत्नी दोनों अपनीअपनी जिम्मेदारियां निभा रहे होते हैं। इस में तुलना करने का कोई प्रश्न ही नहीं उठता.

तुम बात का बतंगड़ क्यों बना रहे/रही हो

बात बड़ी हो या छोटी आप के पार्टनर को पूरा हक़ है कि वह अपना पक्ष रखे। आप को उन की बात तो सुननी ही चाहिए. कई बार आप का साथी सिर्फ ये चाहता है कि आप बस उसकी बात सुन लें. ऐसे में अपनी राय को किनारे रखकर पार्टनर के नजरिए से चीजों के देखने की कोश‍िश करें. इससे बात को सुलझाने में मदद मिलेगी.

तुम से बात करने का कोई फायदा ही नहीं है

अगर आप भी कुछ ऐसा ही कहते हैं तो याद रख‍िए कि आप बातचीत से मुंह मोड़ रहे हैं न कि वो. हां, ये अलग बात है कि कुछ लोग जिद्दी होते हैं और उन्‍हें समझाना मुश्किल होता है, लेकिन आपको धैर्य से काम लेना चाहिए. क्‍योंकि सच्‍चाई ये है कि आप और आपका पार्टनर एक दूसरे से लड़ रहे हैं और ऐसे में मुद्दे का समाधान तभी निकल सकता है जब आप बात करेंगे.

तुम अपने एक्स के पास वापस क्यों नहीं चले जाते/जाती ?’

झगड़े के दौरान पुराने रिश्तों के बारे में बात करना गलत है. आप के पार्टनर के दिमाग में यदि एक्स का ख्याल नहीं है तो भी इस तरह की बातें उसे यह सोचने पर विवश करेंगी कि कहीं सचमुच आप भी एक्स की तरह उन्हें छोड़ कर तो नहीं चली जाएंगी. इस तरह की बात कर के आप वास्तव में अपने जीवन साथी को खो बैठेंगी . इस लिए बेहतर होगा कि झगड़े का रुख मोड़ने और रिश्तो को उलझाने के बजाय आप समाधान निकालने का प्रयास करें.

तुम्हारे रिश्तेदार ऐसे ही हैं

अक्सर होता यह है कि जिस बात पर झगड़ा शुरू होता है उसे भूल कर हम अपने पार्टनर के रिश्तेदारों को कोसना शुरू कर देते हैं. याद रखें झगड़े के दौरान एकदूसरे के मातापिता या भाईबहन को निशाना बनाते हुए उन के बारे में कोई अप्रिय बात न कहें. इस से झगड़ा सुलझने के बजाय और उलझ सकता.

यूरिन में क्यों आता है ब्लड, जानें यहां

शायद आप को पता न हो कि हमारी यूरीन में हमेशा ब्लड मौजूद रहता है. इस की मात्रा इतनी कम होती है कि माइक्रोस्कोप से देखने पर ही उस का पता चलता है. मगर जब खुद मरीज को अपनी यूरीन में ब्लड जाता हुआ दिखाई देता है तब मामला गंभीर माना जाता है क्यों कि उस वक्त ब्लड की मात्रा काफी अधिक होती है.

सामान्यतः इसे ले कर ज्यादा चिंतित होने की जरूरत नहीं होती लेकिन कभीकभी यह लक्षण किसी गंभीर बीमारी का पूर्व संकेत भी हो सकता है. इसलिए मूत्ररोग विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. जांच के बाद ही पता चलता है कि यूरीन के साथ ब्लड बाहर क्यों आ रहा है. नारायणा सुपर स्पेशियालिटी हास्पिटल, गुरुग्राम के नेफ्रोजिस्ट डा. सुदीप सिंह सचदेव बता रहे हैं ऐसे कुछ कारणों के बारे में जिन की वजह से यूरीन के साथ खून निकल सकता है;

यूटीआई इन्फेक्शन

शरीर में ब्लेडर या यूरेथ्रा में जहां यूरिन इकठ्ठा होता है और बाहर निकलने के मार्ग में रहता है वहां बैक्टेरियल इन्फेक्शन हो जाता है. उसे हर वक्त यूरिन करने की जरुरत महसूस होने लगती है. इन्फेक्शन होने पर मूत्रत्याग के समय जलन का अहसास भी होने लगता है. गंभीर केसेस में पेडू और प्रजजन अंगों के आसपास तेज दर्द होने लगता है. यूटीआई एक बहुत ही आम तरह का इंफेक्शन है जो सभी को कभी न कभी होता ही है और एंटीबायोटिक्स के इस्तेमाल के बाद खत्म भी हो जाता है.

किडनी का इंफेक्शन

यूरीनरी ट्रेक्ट इंफेक्शन बहुत देर तक ठीक न हो तो उस का असर किडनी पर भी हो जाता है. किडनी में इंफेक्शन होने के लक्षण पहले की तरह ही होते हैं लेकिन इस तरह के इंफेक्शन के बाद मरीज को बुखार भी आने लगता है. उसे कमर के दोनों ओर दर्द भी रहने लगता है. किडनियों से होते हुए यह इंफेक्शन अगर शरीर के दूसरे अवयवों तक फैलने लगे तो बीमारी और गंभीर रूप में प्रकट होने लगती है.

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किडनी स्टोन

किडनी में कई तरह के खनिजों के जमा होने से वहां स्टोन बनने लगते हैं. यदि शरीर में कैल्शियम या अन्य खनिजों की मात्रा अधिक हो तो पथरी बनने लगती है. पथरी होने के बाद नितंब, कमर का निचला हिस्सा तथा पसलियों में बहुत तेज और असहनीय दर्द होता है. संभव है कि यूरीन के साथ ब्लड भी आता हुआ दिखाई देने लगे. कई मरीजों को यूरीन के साथ बारीक स्टोन्स भी निकलते दिखाई देते हैं. पथरियों का आकार बड़ा हो तो सर्जरी से निकाला जा सकता है.

बढ़ी हुई प्रोस्टेट ग्रंथि

पुरुषों के मूत्राशय के पास इस छोटी पौरूष ग्रंथि में संक्रमण के कारण अथवा सर्जरी या किसी चोट लगने के कारण सूजन आ जाती है. इस वजह से मूत्र के साथ रक्त आने लगता है साथ ही मूत्र बहुत मुश्किल के साथ बाहर निकलता है. ऐसा हर मूत्रत्याग के समय होता है. यदि आपको मलत्याग अथवा वीर्य स्खलन के समय पेडू के निचले हिस्से में तीव्र दर्द का अहसास हो तो चिकित्सक की सलाह से एंटीबायोटिक्स लें.

किडनी में सूजन

किडनी में किसी वजह से आई सूजन के कारण यूरिन के साथ रक्त बाहर निकलता है. किडनी में सूजन हो जाने से विषैले तत्वों के शरीर से बाहर निकलने में दिक्कत आने लगती है. अक्सर मरीजों को तब तक इस समस्या की जानकारी नहीं होती जब तक चिकित्सक पैथौलौजी जांच के माध्यम से पता न लगा ले. यदि मरीज को अपनी यूरीन त्याग करने के समय झाग उत्पन्न होता हुआ दिखाई दे अथवा उस का रंग भूरा दिखाई दे साथ ही चेहरे और पैरों में सूजन भी हो तो तुरंत चिकित्सक को दिखाएं. इस समय इलाज से ही किडनी को खराब होने से रोका जा सकता है.

पौलिसिस्टिक किडनी डिसीज

मातापिता से विरासत में ऐसी जीन मिल सकती है जिस की वजह से किडनी में छोटी गांठें बन जाती हैं. इस की वजह से किडनी खराब हो सकती है और यूरीन के साथ ब्लड बाहर आ सकता है. बहुत से मरीजों को 30-40 साल की उम्र से पहले इस के कोई लक्षण नजर नहीं आते हैं. इस का पहला लक्षण पेट बढऩे और बारबार यूटीआई होने के रूप में दे सकता है. ऐसे मरीजों को कमर और पीठ में लगतार दर्द बना रहता है. इन मरीजों को हाई ब्लडप्रेशर की शिकायत होती है साथ ही सीने में धमक के साथ दर्द हो सकता है. इस समस्या का कोई इलाज नहीं है लेकिन लक्षणों को काबू करने की औषधियां दी जा सकती हैं. विरासत में मिलने वाली दूसरी बीमारियों में सिकल सेल एनिमिया भी है जिस की वजह से यूरीन के साथ रक्त बाहर निकलता है.

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हैवी वर्कआउट

हैवी वर्कआउट करने वालों के साथसाथ मैराथान रनर भी यूरीन के साथ ब्लड निकलने की शिकायत कर सकते हैं. यद्यपि ऐसा सभी एथलीट्स के साथ नहीं होता लेकिन चिकित्सा विज्ञान अब भी इस के कारण के बारे में अनजान है. अनुमान है कि मैराथान रनर अथवा हैवी वर्कआउट करने वालों को पानी की कमी हो जाती है जिस का असर उन की किडनी पर पड़ता है. इसी वजह से इन खिलाडिय़ों के यूरिन के साथ ब्लड बाहर निकल सकता है.

दवाओं का बुरा असर

कुछ दवाएं जैसे एंटीबायोटिक्स या कैंसर के इलाज में इस्तेमाल की जाने वाली दवाएं यूरिन के साथ ब्लड को बाहर निकलने में सहायक हो जाती हैं. मूत्रवर्धक अथवा रक्त को पतला करने वाली दवाएं लेने पर भी मूत्र के साथ रक्त निकल सकता है.

चोट लगना

यदि किसी फुटबौलर को पीठ और कमर के निचले हिस्से में जोर से फुटबाल की किक आकर लगे तो उसकी यूरीन के साथ रक्त निकल सकता है. इसी तरह कार एक्सीडेंट और सीढिय़ों से नीचे गिरने पर भी हो सकता है. अक्सर चोट लगने पर आराम करने की सलाह दी जाती है और चोट का असर आराम करने से खत्म भी हो जाता है लेकिन गंभीर मामलों में चिकित्सक की सलाह लेना जरूरी है. जरूरत पडऩे पर सर्जरी भी कराई जा सकती है.

कैंसर

ब्लैडर कैंसर हो तो यूरीन के साथ रक्त निकल आता है. किडनी और प्रोस्टेट कैंसर के मामलों में भी यही लक्षण सामने आता है. कई मरीजों के मामलों में किसी तरह के दूसरे लक्षण सामने ही नहीं आते हैं इसलिए मरीज को जैसे ही मूत्र के साथ रक्त आता हुआ दिखाई देता हो उसे तुरंत डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए.

जांच प्रक्रिया

यूरीन के साथ ब्लड आने की शिकायत पर यूरीन में इन्फेक्शन की कल्चर रिपोर्ट कराई जा सकती है. इस के अलावा सीटी स्कैनिंग और एमआरआई तथा सिस्टोस्कोप से जांचें कराई जानी चाहिए.

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कलारिपयट्टू: 3 हजार साल पुरानी युद्धकला

भारत में कई ऐसी कलाएं हैं, जो पौराणिक युद्धकलाओं पर आधारित हैं. कहींकहीं खासकर दक्षिण भारत में इन्हीं कलाओं को नृत्य में भी शामिल किया गया है. कलारिपयट्टू  एक ऐसी ही कला है.भारत में ऐसी तमाम कलाएं और कलाकौशल हैं, जिन के बारे में ज्यादातर लोग नहीं जानते. ऐसी ही एक कला है कलारिपयट्टू, जो दक्षिण भारत के केरल की पुरानी कला है. यह कला केरल के अलावा तमिलनाडु, कर्नाटक से सटे इलाकों, पूर्वोत्तर में श्रीलंका और मलेशिया के मलयाली समुदाय में प्रचलित है.

वैसे कलारिपयट्टू मूलत: मलयालम का शब्द है. युद्धकला कलारिपयट्टू लगभग 3 हजार साल पुरानी कला है. मुख्य रूप से केरल की योद्धा जातियां इस का प्रशिक्षण देती हैं. इस कला में पैर से मारना, मल्लयुद्ध और पूर्व निर्धारित तरीकों का इस्तेमाल होता है. इस का क्षेत्रीय स्वरूप केरल की भौगोलिक स्थिति के अनुसार वर्गों में बंटा हुआ है. यानी मलयालियों की उत्तरी शैली, तमिलों की दक्षिणी शैली और अंदरूनी केरल की केंद्रीय शैली हैं.

उत्तरी कलारिपयट्टू कठिन प्रविधि के सिद्धांत पर आधारित है. जबकि दक्षिणी शैली मुख्यत: आसान तरीकों का अनुसरण करती है. कलारिपयट्टू के कुछ युद्ध प्रशिक्षणों को कलाकारों ने नृत्य के रूप में ढाला है. कथकली नृत्य इसी पर आधारित है. कुछ पारंपरिक भारतीय नृत्य स्कूल अभी भी कलारिपयट्टू को अपने यहां वर्जिश में शामिल करते हैं.

केरल और तमिलनाडु में फूलीफली यह कला आज भी भारत की युद्धकलाओं की तरह आत्मरक्षा के काम आती है. यह कला व्यायाम के लिए भी उत्तम है. साथ ही यह नृत्यकला का भी अभिन्न अंग है.

सच यह है कि कलारिपयट्टू ने दक्षिण भारत के इतिहास में लंबे समय तक अपना वर्चस्व बनाए रखा है. भारतीय युद्धकला के महान आत्मज्ञानी बौद्ध धर्म ने भी इस कला का काफी प्रचारप्रसार किया और इसे चीन, जापान तक पहुंचाया. प्राचीन धर्मग्रंथों के अनुसार इस कला के प्रणेता मुनि अगस्त्य और परशुराम थे.

कलारिपयट्टू असलियत में 2 शब्दों को जोड़ कर बना है. अगर इस का संधि विच्छेद करें तो यह कलारी+पयट्टू बनेगा. कलारी मलयालम भाषा का शब्द है, जिस का अर्थ है व्यायामशाला. जबकि पयट्टू का मतलब युद्धकला का अभ्यास, व्यायाम करना या कड़ी शारीरिक मेहनत है.

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20वीं शताब्दी की शुरुआत में इस शब्द का उपयोग मलयालम रंगमंच से जुड़े एक कलाकार उल्लूर एस. परमेश्वरा अय्यर ने ‘अंबा’ नाम के एक नाटक में किया था. इस नाटक में इस प्रकार की कला का प्रयोग किया गया था.

दक्षिण भारत के लोकगीतों में भी इस कला का भरपूर उल्लेख है, जिस में शस्त्रों की उपमा दे कर मनुष्य को आत्मरक्षा, सामाजिक सुरक्षा और शक्तिशाली बन कर संघर्ष करने की प्रेरणा दी जाती है. कुछ इतिहासकारों के अनुसार कलारियपयट्टू कला 3 हजार साल पुरानी है, जिस का उल्लेख 12वीं शताब्दी तक मिलता है.

चेर और चोल वंश के राजाओं ने भी 11वीं सदी तक इस कला को अपनी सेनाओं को सिखाया था. 9वीं शताब्दी में यह कला और भी ज्यादा विकसित हुई और केरल के नायर समुदाय के योद्धाओं ने इस का काफी प्रचारप्रसार किया.

योद्धा इस कला के प्रशिक्षण के लिए अपने बच्चों को 7 साल की आयु में विद्यालय भेज देते थे, जहां उन्हें शारीरिक व्यायाम के साथसाथ युद्ध कौशल के गुर और चुस्तीफुरती सिखाई जाती थी.  इस कला में मुख्यरूप से ऊंची छलांग लगाना, नृत्य करना, पलटी मारना, धरती पर उछल कर कई तरह से घूमना और छलांग लगा कर कई तरह के अस्त्रशस्त्रों का प्रयोग सिखाया जाता था. अस्त्रशस्त्रों में लाठी, भाला, तलवार के अलावा धनुषबाण चलाने की शिक्षा भी दी जाती थी. इस कला को सीखने में कड़ी मेहनत और कई साल लगते हैं.

जिस मार्शल आर्ट को सीखने के लिए लोग विदेशों तक जाते हैं, दरअसल वह भारत की देन है जिसे दक्षिण भारत में कलारिपयट्टू के नाम से जाना जाता है. यह कला इस तरह की सभी कलाओं की जननी है.
भारतीय परंपरा के अनुसार कृष्ण इस कला के जनक थे और उन्होंने अपनी इसी विद्या से मुष्टिक और चाणुर जैसे मल्ल योद्धाओं का वध किया था. कालिया नाग को भी कृष्ण ने इसी विद्या से नाथा था.
पौराणिक कथाओं के अनुसार कृष्ण ने इस कला का विकास ब्रज क्षेत्र के वनों में किया था और इस कला से पारंगत उन की नारायणी सेना अपने प्रहारों से बड़ी से बड़ी सेना पर भी भारी पड़ती थी. यह वही नारायणी सेना थी, जिसे कौरवों ने पांडवों से युद्ध जीतने के लिए कृष्ण से मांगा था.

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कुंगफू जैसी आर्ट का विकास भी इसी कलारिपयट्टू से होना बताया जाता है, जो जंग, उपचार और थेरेपी का विज्ञान है. केरल में कलारिपयट्टू को कुंगफू का पारंपरिक रूप माना जाता है. कलारिपयट्टू में ग्रैपलिंग, स्ट्राइक, प्रीसेंट फौर्म, किक्स हथियार और उपचार विधियां शामिल हैं.मार्शल आर्ट की तरह कलारिपयट्टू शरीर का लचीलापन बढ़ाता है. इस विद्या को सीखने के दौरान खुद को सुरक्षित रखने के लिए शरीर का लचकदार होना जरूरी है. कलारिपयट्टू से शरीर मजबूत और सुडौल बनता है.

इस के प्रशिक्षकों का मानना है कि आप की शक्ति आप के अंदर ही छिपी होती है. जब तक आप आंतरिक रूप से स्वस्थ नहीं है, तब तक खुद को मजबूत नहीं कह सकते. इसी तरह मार्शल आर्ट में व्यक्ति को बहुत तेज और फुरतीले दांव सीखने पड़ते हैं. इस खेल में व्यक्ति को आक्रमण के साथसाथ बचाव के तरीके भी सिखाए जाते हैं.

इस तरह सजाएं अपना घर कि हर कोई देखता रह जाए

हमारे घर के डेकोरेशन में लाइटिंग का विशेष महत्व है. इसका सबसे ज्यादा प्रभाव हमारे मूड पर पड़ता है. इसलिए हम लाइटिंग से भी घर को सजाते हैं. आइए एक नजर ड़ालते हैं बाजार में उपलब्ध लाइटिंग प्रोड़क्टस पर….

अगर आप चाहते हैं कि घर-आंगन रोशनी से सराबोर हो, तो घर को खूबसूरती से रोशन करने के लिए आजकल बाजार में कई शानदार विकल्प उपलब्ध हैं. ये घर को रोशन तो करते ही हैं, इनका कलात्मक डिजाइन घर को बेहद खूबसूरत लुक भी देता है.

एलईडी कैंडल्स

आजकल बाजारों में एलईडी कैंडल्स भी आ गई हैं. बिना किसी झंझट के त्योहारों में घर को रोशन करने के लिए ये बेहतरीन हैं. इसके अलावा आप पिलर कैंडल्स, अनूठे आकारों की सजावटी कैंडल्स, प्रिंटिड मोटिफ्स वाली कैंडल्स से भी घर को रोशनी से सराबोर कर सकते हैं.

डिजाइनर लैम्प्स

टिप्पणियां छिद्रों वाले सजावटी ब्रास लैम्प्स रोशनी को एक खूबसूरत आयाम देते हैं. इन लैंप्स में सजावटी पैटर्न में बने छिद्रों में से चारों ओर छनकर बिखरती रोशनी पूरे माहौल को चकाचौंध से सराबोर कर देती है. साथ ही इस तरह के कुछ खास लैंप्स की रोशनी से दीवारों पर फूलों या अन्य तरह की खूबसूरत आकृतियां बनती हैं, जो घर को उत्सवी आभा देती हैं.

मिट्टी के दीपक आज भी हैं फेमस

अपने घर को खूबसूरत, झिलमिलाता और दमकता हुआ रूप देने के लिए मिट्टी के परंपरागत दीयों से लेकर, टी लाइट्स, फ्लोटिंग कैंडल्स और फंकी लैम्प्स के जरिए सजाया जा सकता है. इसके अलावा मद्धम रोशनी बिखेरते बेहद छोटे साइज के मिट्टी के दीये भले ही घर-आंगन को रोशन करने का पांरपरिक तरीका हो, लेकिन आजकल इनमें भी काफी खूबसूरत बदलाव आ गया है. कांच, झिलमिलाते गोटा और किनारी से सजे डिजाइनर दीये कई खूबसूरत रंगों और अनोखे डिजाइन में मिलते हैं.

फ्लोटिंग कैंडल्स

फ्लोटिंग कैंडल्स भी एक खास अंदाज में रोशनी के साथ ही घर को खूबसूरत अंदाज भी देती हैं. मिट्टी या मेटल के किसी बड़े बाउल या दीये में पानी भरकर कई सारे छोटे फ्लोटिंग कैंडल्स इसमें रख दें. पानी में तैरते इन खूबसूरत फ्लोटिंग कैंडल्स का समूह बेहद आकर्षक दिखाई देगा. इस पानी में गुलाब के फूलों की पत्तियां डालकर आप इसमें रोशनी के साथ रंग का खूबसूरत तालमेल कर सकती हैं. इसे आप सेंटरपीस के तौर पर सजा सकते हैं.

जोधपुर कोर्ट: झूठा शपथ पत्र दायर करने के मामले में सलमान खान हुए बरी

जोधपुर कोर्ट ने काला हिरण शिकार केस के मामले में सलमान खान को निर्दोश करार देते हुए बरी कर दिया है. दरअसल, काला हिरण शिकार मामले के साथ-साथ सलमान खान पर आर्म्स एक्ट का मामला भी दर्ज था,  जिसमें उन पर आरोप था कि उन्होंने कोर्ट में झूठा शपथ पत्र दायर किया है.

आपको बता दें कि 1998 के काले हिरण शिकार के मामले में सलमान खान पर ये भी आरोप था कि उन्होंने अपने हथियार का लाइसेंस गुम हो जाने का झूठा शपथ पत्र दायर किया था. इसी मामले में कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए सलमान पर एक अन्य केस चलाने से इंकार कर दिया है.इससे पहले इस मामले की सुनवाई 11 जून को हुई थी.

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बकायदा सलमान खान के वकील ने कोर्ट में कहा भी था कि सलमान का इंटेशन नहीं था कि वे झूठा शपथ पत्र दें. ऐसे में उनके विरुद्ध किसी तरह की कार्यवाही करना न्यायोचित नहीं है. आपको बता दें कि जोधपुर में ‘हम साथ-साथ हैं’ की शूटिंग के दौरान सलमान खान के खिलाफ काला हिरण शिकार के तीन व आर्म्स एक्ट का एक मामला दर्ज किया गया था. यहा मामला साल 1998 से चल रहा था.

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