भारतीय जनता पार्टी ने अध्यक्ष के चुनाव की पुरानी परंपरा को छोड़ अब मनोनयन की पंरपरा को ही आगे बढ़ाना पंसद किया है. दूसरी पार्टियों की ही जरह भाजपा में संगठन का चुनाव खत्म सा हो चला है. ऐसे में पार्टी में लोकतंत्र है, यह बात केवल कहने भर के लिये ही बची है.

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