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शातिर बहू की चाल: भाग 2

शातिर बहू की चाल: भाग 1

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आखिरी भाग

सतनाम कौर ने पूरी बिरादरी में हरजोत और उस के बच्चों, जो कि उन के पोतापोती थे को बदनाम कर रखा था. इस घटना से 2 सप्ताह पहले हरजोत कौर यह शिकायत ले कर अपने मामा ससुर यानी सतनाम कौर के भाई राजिंदर सिंह के पास गई थी कि वह अपनी बहन को समझाएं.

वह उसे और उस के बच्चों को बेवजह बदनाम करना छोड़ दें. नहीं तो वह जहर खा कर आत्महत्या कर लेगी. राजिंदर सिंह ने सतनाम कौर को समझाया भी था, लेकिन सतनाम कौर अपनी आदत से बाज नहीं आई थीं. इसलिए हरजोत कौर ने अपनी सास को ही रास्ते से हटाने की योजना बना ली थी.

अपनी योजना को अमली जामा पहनाने के लिए उस ने ये सारी बातें विक्रमजीत को बताईं. विक्रम नशे का आदी था. सो थोड़ा सा नशा करने के बाद वह हरजोत का साथ देने के लिए तैयार हो गया. रिमांड के दौरान दिए गए अपने बयान में हरजोत ने बताया कि उस ने पति के जीवित रहते 2 साल पहले अपनी सास की कोठी की रेकी कर ली थी.

अब ताजा स्थिति में उस ने आदर्श नगर जा कर यह देखा था कि सतनाम कौर की कोठी तक पहुंचने के लिए रास्ते में किनकिन सीसीटीवी कैमरों का सामना करना पड़ सकता है. नए हिसाब से उस ने नई योजना तैयार की थी.

घटना वाले दिन 29 मार्च को वह अपनी एक्टिवा पर सवार हो कर विक्रम के साथ सतनाम पुरा पहुंची. विक्रम ने उस से 500 रुपए मांगे और पैसे ले कर पहले नशा किया. इस दौरान वह एक दुकान पर बैठ कर बर्गर खाती रही. इस के बाद दोनों सतनाम कौर की आदर्श नगर स्थित कोठी पर पहुंचे.

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सतनाम कौर उसे देखते ही भड़क उठी और दोनों को वहां से चले जाने को कहा, लेकिन कोई जरूरी बात करनी है. बोल कर दोनों सतनाम के बेडरूम में बैठ गए. फिर मौका पाते ही विक्रम ने अपने गले में डाला हुआ काले रंग का साफा सतनाम के गले में डाल दिया, फिर दोनों ने मिल कर उस की हत्या कर दी.

आदर्शनगर, सतनामपुरा इलाके में सतनाम कौर कोठी नंबर 534 बी की ऊपरी मंजिल पर अकेली रहती थी. जबकि कोठी की नीचली मंजिल पर संदीप शर्मा व रामशरण 2 लोग किराए पर रहते थे. दिनांक 29 मार्च की सुबह किराएदार अपने काम पर चले गए थे, और देर रात घर लौटे थे. आ कर दोनों सो गए थे.

30 तारीख की सुबह जब किराएदार अध्यापक संदीप शर्मा ऊपर गया तो सतनाम कौर को आवाजें लगाने पर भी जब कोई आवाज नहीं आई, तो उसे शक हुआ. उस ने ऊपर जा कर देखा तो सतनाम कौर को मरा पाया और पुलिस को सूचना दे दी.

पुलिस ने दोनों आरोपियों की निशानदेही पर काले रंग का साफा बरामद कर लिया, जिस से उन्होंने सतनाम कौर का गला घोंट कर हत्या की थी. पुलिस ने आननफानन में 24 घंटे के भीतर सतनाम कौर के हत्यारों को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया.

आरोपियों ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया था. पर एक बात अभी तक पुलिस को हजम नहीं हो रही थी कि हरजोत कौर ने बिना किसी विरोध के साथ अपना अपराध स्वीकार कैसे कर लिया.

जबकि हत्या जैसा संगीन अपराध कोई भी आरोपी इतनी आसानी से कबूल नहीं करता. पुलिस ने पूरे मामले की दोबारा गहनता से जांच की तो कई चौंकाने वाले खुलासे हुए. 2 दिन बाद इस मामले में अचानक एक नया मोड़ आ गया.

पुलिस ने इस केस की एक और अभियुक्त  अंजू को हिरासत में ले लिया. पूछताछ के दौरान उस ने स्वीकार किया कि उस ने हरजोत के कहने पर विक्रम के साथ जा कर सतनाम कौर की हत्या की थी.

हरजोत कौर तो मौकाएवारदात पर गई ही नहीं थी. दरअसल सीसीटीवी फुटेज को बारीकी से चेक करने पर पुलिस को पता चला था कि एक्टिवा पर सवार औरत की कद काठी और उस समय पहने हुए कपड़े हरजोत से मेल नहीं खा रहे थे.

जब हरजोत से दोबारा सख्ती से पूछताछ की गई तो उस ने सब सच उगल दिया. वह और विक्रम अब तक पुलिस से झूठ बोलते आए थे. दरअसल, पुलिस को गुमराह करने और जांच की दिशा भटकाने के लिए यह हरजोत की चाल थी.

अंजू कई सालों से हरजोत के घर काम करती थी और उसी गांव की रहने वाली थी. हरजोत ने उसे अपनी बातों के जाल में फंसा कर इस काम के लिए राजी किया था. अंजू के अनुसार उस ने यह काम पैसों या किसी अन्य लालच में नहीं किया था.

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वह हरजोत को अपनी बड़ी बहन जैसी मानती थी. हरजोत ने इसी बात का फायदा उठाया था. घटना वाले दिन 29 मार्च को अंजू, विक्रम और हरजोत तीनों एक साथ सतनामपुरा आए थे. हरजोत बर्गर की एक दुकान पर रुक गई थी और अंजू विक्रम के साथ हरजोत की एक्टिवा पर घटना को अंजाम देने सतनाम कौर के घर पहुंच गई.

सतनाम की हत्या करने के बाद हरजोत की योजना अनुसार वे दोनों अपने गांव दादूवाल लौट गए थे. गांव पहुंच कर अंजू ने अपना पहना हुआ सूट जला दिया था. ऐसा करने के लिए उस से हरजोत ने ही कहा था. पुलिस ने अंजू की निशानदेही पर वह अधजला सूट भी बरामद कर लिया.

3 अप्रैल को अंजू, विक्रम और हरजोत को पुन: अदालत में पेश किया गया. उस दिन विक्रम और हरजोत का रिमांड समाप्त हो गया था, इसलिए उन दोनों को जेल भेज दिया गया. जबकि अंजू को 5 अप्रैल तक पुलिस रिमांड पर लिया गया.

बाद में रिमांड अवधि समाप्त होने पर अंजू को भी जेल भेज दिया गया. पुलिस जांच भटकाने के पीछे हरजोत का मकसद यह था कि जरूरत पड़ने पर वह यह साबित कर सकती है कि घटना के समय वह मौका ए वारदात पर मौजूद नहीं थी. और अगर वह पकड़ी भी गई तो उस के बच्चों की देखभाल अंजू कर लेगी. दोनों हालातों में एक औरत का बाहर रहना तय था, पर पुलिस जांच में हरजोत की पोल खुल गई और उस के साथ अंजू भी पुलिस की गिरफ्त में आ फंसी.

सौजन्य: मनोहर कहानियां

औफिस अफेयर: बन सकता है जी का जंजाल

औफिस रोमांस सुनने में तो बहुत अच्छा है मगर असल में वह अच्छा है या नहीं यह पता होना बेहद जरूरी है. असल में औफिस रोमांस शुरू शुरू में बहुत अच्छा लगता है. यूं कहे तो बहुत ज्यादा ही रोमांचकारी होता है. एक दूसरे से गलती से टकरा जाना, काम के बहाने आस पास से गुजरना, वक्त बे वक़्त एक दूसरे को देखना और नजरों का आपस में मिलना अच्छा लगता है. यह छोटी छोटी चीजें रोमांटिक टर्न लेती हैं और आप अपने को वर्कर के साथ रिलेशनशिप में आ जाते हैं या आप दोनों में अफेयर शुरू हो जाता है. यहीं से शुरू होती है असली परेशानियां और औफिस रोमांस के नुक्सान. हालांकि, औफिस अफेयर में स्थितियां काफी अलगअलग तरह की होती हैं और उन की अच्छी बुरी बातें भी काफी अलग होती हैं.

को वर्कर के साथ रोमांटिक रेलशनशिप

औफिस  में कई तरह के अफेयर होते हैं जिन में से एक है को वर्कर के साथ रोमांटिक रिलेशनशिप. रोमांटिक रिलेशनशिप का मतलब है कि इस में दोनों ही व्यक्ति एकदूसरे को प्यार भरी नजर से देखते हैं और इन की फीलिंग्स म्यूच्यूअल होती हैं. कविता और सौरीश के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ था. वे दोनों एकदूसरे के कोवर्कर्स थे और एकदूसरे के अच्छे दोस्त भी. कुछ ही दिनों बाद उन दोनों को ही यह महसूस हो गया कि वे दोस्त से कुछ ज्यादा हैं और उन्हें रिलेशनशिप में आ जाना चाहिए.

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रिलेशनशिप में आ जाने के बाद दोनों का व्यवहार काफी बदल गया. वे काम के बीच में ही कभी अकेले कोने में गप्पे मारते नजर आते तो कभी चाय पीने के बहाने साथ निकल जाते. उन दोनों के हावभाव से पूरा औफिस  परिचित होने लगा और सभी को यह जानने में देर नहीं लगी कि दोनों के बीच क्या चल रहा है. उन का रिलेशनशिप उन के काम में अड़ंगे डाल रहा था जिसे उन के कई सीनियर्स समझ रहे थे. दोनों को कई बार डेस्क के नीचे हाथ पकड़ते भी देखा गया. उन दोनों की परफौरमेंस पर काफी असर पड़ने लगा था. हद तो तब होने लगती जब दोनों के बीच किसी बात पर झगड़ा होता और उन के काम करने के ढंग से ही सब को पता लग जाता. लोग उन के पीठ पीछे बातें भी बनाते और हंसी मजाक में मुंह पर व्यंग्य भी कस जाते. दोनों का औफिस  में जीना मुश्किल तो हुआ ही और खुद बौस उन से चिढ़ने लगे वो अलग.

वन साइडेड लव अफेयर

एक तरफा प्यार चाहे स्कूल कालेज में हो या औफिस में, दुख, तकलीफ और इग्नोर गेम्स से भरा हुआ होता है. लेकिन, औफिस में हुआ एक तरफा प्यार जरुरत से ज्यादा दर्द देता है. कारण साफ है कि यहां आप अपने कोवर्कर से भाग नहीं सकते. आप को उसे हर दिन फेस करना ही होता है. निताशा और लक्ष्य कई महीनों से अच्छे दोस्त है जिस के चलते निताशा को लक्ष्य से प्यार हो गया. निताशा ने लक्ष्य को अपनी फीलिंग्स बताई और लक्ष्य ने भी कहा कि उसे निताशा से प्यार है. दोनों का अफेयर शुरू हुआ. औफिस  में किसी को भी उन के रेलशनशिप के बारे में कुछ नहीं पता था. दोनों के बीच सब अच्छा चल रहा था लेकिन निताशा नोटिस करने लगी कि लक्ष्य का इंटरेस्ट दिन-ब-दिन औफिस  में आई नई इंटर्न की तरफ बढ़ता ही जा रहा है. निताशा ने एक दिन लक्ष्य से पूछ ही लिया कि आखिर माजरा क्या है जिस पर लक्ष्य ने कहा कि उसे ऐसा लगा कि वह निताशा से प्यार करता है जबकि असल में ऐसा नहीं है, वे अच्छे दोस्त ही हैं.

इस बाबत उन दोनों की रिलेशनशिप तो खत्म हुई ही, साथ ही निताशा का दिल भी टूट गया. वह जितना अपने काम में मन लगाने की कोशिश करती उतना ही उस का ध्यान लक्ष्य की तरफ जाता. यह कालेज भी नहीं था जहां वह उसे इग्नोर कर सकती. जबजब वह लक्ष्य के पास कोई फाइल ले कर जाती तो उस के हाथ कांपने लगते. उस की धड़कनें इतनी तेज हो जातीं जैसे अभी सीने से बाहर निकल आएंगी. यह स्थिति निताशा के लिए किसी मानसिक प्रताड़ना से कम नहीं थी. लेकिन, वह करती भी तो क्या.

फ्रेंड्स विथ बेनिफिट्स

औफिस अफेयर्स में  फ्रेंड्स विथ बेनिफिट्स काफी कौमन है. लेकिन इस में होता यह है कि इस तरह के अफेयर्स के बारे में औफिस में बात फैलने में देर नहीं लगती और दो लोग कब पूरे औफिस की चर्चा का केंद्र बन जाएं उन्हें खुद पता नहीं चलता. केशव एक बड़ी मल्टीनेशनल कंपनी में नौकरी करता है. उस के औफिस में दो लोगों को ले का चर्चाएं हमेशा गर्म रहती हैं. यह दो लोग शादीशुदा हैं, नहीं नहीं आपस में नहीं. यहीं से तो असली बात शुरू होती है. एक सुबह केशव 10 की जगह साढ़े नौ बजे ही औफिस  पहुंच गया. औफिस  पहुंच कर वह वाशरूम की तरफ जा ही रहा था कि उस ने कोयल मैम को जेंट्स वाशरूम से निकलते देखा. एक मिनट बाद कोयल मैम के पीछे ही उसे अपने सीनियर गौतम सर वाशरूम से निकलते दिखे.

उस ने भी इन दोनों के किस्से खूब सुने थे लेकिन जब अपनी आंखों से देखा तब असल में यकीन किया. उस ने यह बात अपने दोस्त नीरज को बताई, नीरज ने प्रिया को, प्रिया ने किसी और को और किसी और ने किसी और को. इस तरह पूरे औफिस में कोयल और गौतम के चर्चे होने लगे. अब तो सभी कोयल के मुंह पर मुस्कुराते हैं और पीठ पीछे उसे स्लट कहते हैं. गौतम की इमेज भी कुछ खास नहीं. सीनियर होने के बावजूद उन की इज्जत लोगों के लिए कोई माने नहीं रखती तभी तो हर किसी के लिए वे हंसी के पात्र बनकर रह गए हैं.

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बौस से अफेयर

बौस के साथ न दुश्मनी अच्छी और न ही दोस्ती, यह तो शायद आप ने सुना ही होगा. लेकिन, बौस के साथ अफेयर अच्छा है या बुरा. इस के बारे में तो सभी की राय अलगअलग ही होगी. टीवी के कई सीरियलों में बौस और सेक्रेटरी की प्रेम कहानी का कांसेप्ट दिखाया गया है. इन में से अधिकतर में यह भी दिखाया जाता रहा है कि गरीब घर की लड़की से जब अमीर बौस को प्यार हुआ तो दोनों की जिंदगी बदल गई. अंत में दोनों की शादी हो जाती है और दोनों खुशीखुशी घर परिवार संभालते हैं.

मगर असल में ऐसा कुछ नहीं होता. अमीर बौस का दिल इतना मुलायम नहीं होता कि उसे सेक्रेटरी भा जाए और वह उस से शादी रचा ले. बौस के साथ अफेयर में लड़की को अक्सर गोल्ड डिगर यानी पैसा खाने वाली की ख्याति ही मिलती है. फिर चाहे लड़की या लड़का कितना ही टैलेंटेड क्यों न हो पर बौस से संबंध रखने पर यदि किसी भी  तरह की सफलता हाथ लगती है तो श्रेय चापलूसी को ही दिया जाता है.

यानी कुल मिलाकर औफिस अफेयर एक अच्छा आईडिया नहीं है. कई बार तो यह भी होता है कि जिस के साथ आप रिलेशनशिप में हैं उस की कोई और भी रिलेशनशिप है जिस के बारे में आप को कुछ खबर ही नहीं है. वैसे भी, जिन के साथ आप काम कर रहे हैं जरूरी नहीं कि आप उन्हें सचमुच जानते ही हों. औफिस अफेयर्स में बदनामी और प्रोफेशनल लाइफ पर असर दो मुख्य बातें हैं जिन का सभी को ध्यान होना चाहिए. हां, कई बार जब दोनों तरफ से चीजें सही हों और आप दोनों को ही लगे कि आप दोनों का प्यार परवान चढ़ रहा है और रिलेशनशिप में आना एक अच्छा सुझाव है, तो बेहतर है कि रिलेशनशिप में आइए, लेकिन इस शर्त पर कि इस से आप की प्रोफेशनल लाइफ पर असर नहीं पड़ेगा.

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धर्म की आड़ में सब्जबाग

धर्म के नाम पर दान दक्षिणा देने का पाखंड शुरू से ही चला आ रहा है लेकिन अब यह सिर्फ एक व्यापार का साधन बन चुका है. आज हर धार्मिक स्थान पर आपको ऐसे व्यापारी बैठे मिलेंगे जो पूजा-पाठ का सहारा लेकर लोगों के न सिर्फ भावनाओं और विश्वास के साथ खेलते हैं, उन्हें कंगाल भी बना देते हैं.

सोनाली को भी ऐसे ही एक बाबा ने फंसाने की कोशिश की. कानपुर की रहने वाली गृहणी सोनाली की शादी को 6 साल हो गए हैं और उस की 4 साल की बेटी भी है. सोनाली के पति का खुद का साईकिल का स्टोर है. शादी के 4 साल बाद सोनाली के जीवन में सब कुछ बदलने लगेगा ऐसा उस ने शायद ही सोचा होगा. सोनाली को जिस बात की जानकारी मिली कि उस के पति का किसी और साथ अफेयर चल रहा है, तो उस के पैरों तले जमीन खिसक गई थी. यह बात सोनाली को तब पता चली जब एक दिन वह अपने पति के फोन से अपनी मां से बात कर रही थी. तभी उस लड़की का मैसेज आया. सोनाली ने जब पूरा चैट पढ़ा तो वह हैरान रह गई. हालांकि उस ने उस वक्त समझदारी दिखाई और अपने पति से कुछ सवाल जवाब नहीं किया. कुछ महीने बाद उस के पति की हरकतें ज्यादा बदलने लगीं. रात को देर से आना, कभी शराब पीकर आ जाना, पूरे दिन फोन पर व्यस्त रहना और बात बात पर सोनाली को डांटना. यह सब देख कर सोनाली बहुत परेशान हो चुकी थी. सोनाली उस लड़की के चंगुल से अपने पति को दूर करना चाहती थी. लेकिन उसे कोई उपाय नहीं मिल रहा था. एक दिन उसकी नजर अखबार के विज्ञापन पर गई तो वह चौंक पड़ी. उसमें लिखा था ‘शक्ति चमत्कार देखें, घर बैठे 2 घंटे में समाधान, गुरु सिकंदर कलकत्ते वाला, मेरे किए की कोई काट नहीं,घर बैठे 2 घंटे में समाधान. प्रेम विवाह, मनचाह प्यार, ग्रहकलेश, सौतन, दुश्मन आदि से छुटकारा पाएं.इन सभी समस्याओं का हल, एक बार फोन करें.’नंबर है 9997096520.

यह पढ़ते ही सोनाली को लगा शायद इस से सब ठीक हो जाए. उस ने उस विज्ञापन में दिए गए नंबर पर फोन किया. फोन पर बात करने पर एक आदमी ने फोन उठाया. सोनाली ने उस आदमी को अपनी सारी दुख भरी कहानी सुना दी. सोनाली की बात सुनने के बाद उस व्यक्ति ने उस से कहा “ बेटी तू चिंता मत कर सब ठीक हो जाएगा. अगले दिन तेरा पति तेरे आसपास घूमेगा. हम तेरे, तेरे पति और उस लड़की के नाम पर हवन करेंगे. इस हवन से तेरा पति हमेशा के लिए तेरा हो जाएगा,” यह सुन कर सोनाली खुश हो गई. उस ने फिर एक सवाल किया, “ मैं हवन के लिए कब आऊं?” यह सुनकर उस व्यक्ति ने बोला “आपको आने की जरूरत नहीं है, बस आपको हवन सामाग्री और जाप के लिए पैसे देने होंगे.” सोनाली ने जब पूछा कि कितने पैसे देने होंगे? तो उस व्यक्ति ने कहा कि आपको 3000 रुपए देने होंगे. सोनाली ने पूजा के लिए हां कर दी. फोन कट ने से पहले उस व्यक्ति ने सोनाली को समझाया कि इस पूजा में बहुत शक्ति है सब ठीक हो जाएगा. मैं अभी आप के मोबाइल नंबर पर बैंक अकाउंट नंबर भेज रहा हूं उस में आप 3000 रुपए भेज दो. आप का काम हो जाएगा.

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उस बाबा ने बिना देरी किए सोनाली के फोन पर  बैंक अकाउंट की डिटेल भेज दिया.

बाबा का बैंक अकाउंट नंबर 511200608 और आईएफ़एससी कोडKKBK0000148 था. साथ ही बाबा ने इस बैंक अकाउंट यूजर का नाम नफीस लिख कर भेजा हुआ था.

पूजा के नाम पर धोखा

सोनाली ने बहुत सोचा फिर उसे लगा कि पति और मेरे परिवार के लिए मैं इतना तो कर ही सकती हूं. उस ने उस व्यक्ति के अकाउंट में पूरे 3000 रुपए ट्रांसफर कर दिए. पैसे ट्रांसफर करने के बाद उस व्यक्ति का फिर फोन आया. वह सोनाली से कहने लगा, “बेटी, अब तेरा काम हो जाएगा. सोनाली को भी लगा कि अब उस की जिंदगी बादल जाएगी और पति पहले की तरह प्यार करने लगा.

इधर सोनाली का पति कुछ दिनों के लिए अपने गांव गया हुआ था. वहां से वह हर रोज सोनाली को फोन करता था और बहुत प्यार से हालचाल पूछता. सोनाली को यकीन होने लगा कि अब सब ठीक हो रहा है.

2-3 दिन बाद जब सोनाली का पति घर आया तो उसके व्यवहार में कुछ बदलाव नहीं दिखा.वह पहले की ही तरह हरकतें करता था. रोज शराब पी कर आना, और उस युवती के संपर्क में रहना. यह सब देख कर सोनाली सोच में पड़ गई की सबकुछ पहले जैसा ही क्यों है? उस बाबा ने तो कहा था सब ठीक हो जाएगा. उसने उस बाबा से फिर से बात करने के लिए फोन उठाया कि तभी गांव से उसकी सासु मां का फोन आ गया. सोनाली ने भावुक हो कर अपनी सारी कहानी अपनी सासु मां को बता दी. तब उसकी सासु मां ने सोनाली को बताया की उसका पति अपनी मर्जी से सोनाली को फोन नहीं करता था उसके कहने पर करता था. बाबा वाली बात सुनकर सोनाली की सास ने बहुत गुस्सा किया और उसे समझाया की ‘कोई बाबा रिश्तों को नहीं जोड़ सकता. उसने तो सिर्फ तुम्हें ठगा है. अगर उसकी बाबा की बात सच होती तो अभी तुम्हारा पति तुम्हारे साथ बैठा होता.

उसकी सास ने उसे समझाया कि रिश्तों को जोड़ना और तोड़ना हमारे हाथ में होता है. तुम जा कर अपने पति से बात करो पहले. बात करने से समस्या का समाधान जरूर निकलता है.

उस दिन सोनाली को लगा सच में उसने गलती की उस बाबा से बात कर के उसने 3000  रूपए भी लिए और कुछ ठीक भी नहीं हुआ.

सोनाली जैसे कई औरतें हर दिन हर रोज ऐसे बाबाओं के जाल में फंसती रहती हैं.

आधुनिक दौर में इन लूटेरों ने लूटने का तरीका भी बादल लिया है. वे अब आधुनिक तरीका अपन ने लगे हैं. टीवी हो या यूट्यूब ये ढपोरशंखी अपना पिटारा खोल कर बैठ जाते हैं और अपने लच्छेदार बातों से लोगों को खूब मूर्ख बनाते हैं.

ऐसे ही एक ढपोरशंखी के जाल में फंसी मीनू

ठगी का आधुनिक तरीका

मीनू 25 वर्षीय है. वैसे तो मीनू मथुरा की रहने वाली है लेकिन पिछले 3 साल से नौकरी के वजह से वह दिल्ली में अपने दोस्तों के साथ रहती है. स्वभाव से अंधविश्वासी मीनू की एक अजीब आदत है. वह अपनी दिन की शुरुआत अखबार में राशिफल पढ़ने से करती है या फिर सुबह सुबह टीवी पर ज्योतिषि का कार्यक्रम देख कर. कई बार तो वह यूट्यूब पर भी भविष्यवाणी बताने वाली वीडियोज भी देखने लग जाती है. एक बार ऐसे ही वह यूट्यूब पर वीडियो देख रही थी, जिसमें ज्योतिषि ओमप्रकाश राशि के अनुसार आने वाला दिन कैसा होगा, क्या करना चाहिए, कोई संकट आने वाला है तो उससे कैसे बचें. मीनू इस वीडियो को बहुत ध्यानपूर्वक देख रही थी. जब ज्योतिषि मीनू के राशि पर आए तो उन्होंनें बहुत कुछ अच्छा तो बहुत कुछ ऐसा बताया जिससे मीनू परेशान हो गई. उस वीडियो में ज्योतिषि का नंबर भी दिया गया था.

मीनू ने 8527654519 जो ज्योतिषि ओमप्रकाश का नंबर था उस पर फोन किया. जब मीनू ने ज्योतिषि से बात की तो उस ने मीनू का जन्मदिवस, जन्मदिन, माता-पिता का नाम आदि पूछने लगे. मीनू ने सब ज्योतिषि को बता दिया. सब कुछ देखने के बाद ज्योतिषि का कहना था कि आप मांगलिक हो,आप पर शनि ग्रह भी है जिस से आगे चल कर आपके जीवन पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है, आने वाले समय में आपके में बाधा आ सकती है. ज्योतिषि का कहना था कि वह आपकी कुंडली बना कर देगा लेकिन इस के लिए उस यहां आना होगा.

जब मीनू ने खर्चा पूछा तो ज्योतिषि ने कुंडली बनवाने, बताने और उपाय बताने का 2500 रुपए बता दिए.

मीनू ने यह सारी बातें जब अपने दोस्तों को बताने लगी तब उसके दोस्तों ने उसे उस ज्योतिषी के पास जाने से मना कर दिया और उसे समझाने लगें कि ये लोग बातों को बढ़ा चढ़ा कर बताते हैं. सिर्फ पैसों के लिए. यह सब इनका धंधा होता है. दोस्तों की बात मीनू मान तो गई लेकिन ज्योतिषी की बात सुन कर मीनू बहुत परेशान हो गई थी और उसके व्यवहार में भी एक चिड़चिड़ापन आ गया था. जब कि उसके जीवन में सब कुछ अच्छा चल रहा था.

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कह सकते हैं कि आज के समय में लोगों को खुद पर से भरोसा ही उठ गया है. उन्हें भरोसा है तो उंगलियों में रंगबिरंगी अंगूठी पहनने वाले और राम नाम का चोला लटका कर घूमने वाले बहरूपियों पर. यदि जिंदगी में कुछ ठीक नहीं चल रहा, पति-पत्नी में लड़ाई हो रही है तो यहां इन ज्योतिषियों के अनुसार राहु और शनी की महादशा चल रही होती है. जीवन में कुछ भी हो रहा है तो माना जाता है कि यह सब ग्रहनक्षत्रों का खेल है. धर्म के नाम पर लूट मचाने वाले इन बहरूपियों की संख्या बढ़ती ही जा रही है और इन्हें बढ़ावा देने वाला हमारा समाज ही है.

बाबाओं की असलियत

टीवी पर लोग कई बाबाओं को देखते और सुनते हैं. एक समय के बाद यह उन्हें अपना ईश्वर मान बैठते हैं. लोगों के अंदर इन के प्रति आस्था जाग जाती है. लेकिन ऐसे कई बाबा और ज्योतिषी हैं जिन्होंनें धर्म के नाम पर खूब पैसा कमाया. लेकिन अभी इन की हालत ऐसी है कि ये खुद अपने दुखों का निवारण नहीं कर सकते. खुद को साधू संत बोलने वाले राम रहीम को कोई कैसे भूल सकता है. धर्म के नाम पर बड़ीबड़ी बाते करने वाला, धर्म के नाम पर फिल्म बनाने वाला आज जेल में राम राम कर रहा है. ऐसे ही आसाराम बापू भी है. खुद को धर्मगुरु बताने वाला आसाराम भी कई सालों से जेल में है. बलात्कार जैसे अपराध को अंजाम देने वाले ये दोनों ही तथाकथित पाखंडी साधु और धर्मगुरु ने लोगों की आस्था के साथ जम कर खिलवाड़ किया था.

देखने में लगता था इनका जीवन सादे भोजन की तरह है लेकिन यह सब तो सिर्फ दिखावा होता है. असल में ये इतनी ऐयाशी करते हैं जिस का किसी को शायद अंदाज़ा ही नहीं होगा. इन के पास पैसों की कमी नहीं. धर्म के नाम पर इन की कमाई इतनी अधिक हो जाती है कि इनकी जेब नोटों से भरी होती हैं. ऐसे अनेक बाबा हैं जो अभी भी टीवी पर आते हैं और बेतुकी बातें करते हैं, लेकिन फिर भी लोग उन्हें सुनते हैं.

अजब गजब अंधविश्वास

त्योहारों के समय कोई आपको बंदर, गाय तो कोई सांप लटकाए घरघर घूमते दिखेंगे. लोग इन्हें हनुमान, शिव, पार्वती का रूप मानकर खुल कर दान दक्षिणा देते हैं. यही नहीं, इन के धंधे का दिन भी तय होता है. सब से ज्यादा इन को फायदा मंगलवार और शनिवार को होता है. कई बार ये लोग दान के कई फायदे बताकर लोगों से जबरदस्ती धन देने को बोलते हैं.

जबरदस्ती करवाते हैं दान

आप को यकीन नहीं होगा कि जिन पंडित, बाबा या गुरुओं को लोग भगवान का दर्जा देते है वही इन लोगों को लूटने का प्रयास सब से ज्यादा करते हैं. भारत में कई धार्मिक स्थल हैं जिस में से मथुरा वृन्दावन, गोकुल भी एक है. गोकुल में जो मंदिर है वहां एक बहुत अजीब मान्यता है. वहां के मंदिर में लोग दीवारों, जमीन. और मंदिर के अंदर नाम लिखवाते हैं. ऐसा कहा जाता है कि नाम लिखवाने से सभी कष्ट और दुख दूर हो जाते हैं. अगर आप जमीन पर नाम लिखवाते हैं तो इस का दक्षिणा कम लिया जाता है, दीवार पर लिखवाते है तो यह दक्षिणा थोड़ा ज्यादा महंगा होता है और अगर आप मंदिर के अंदर नाम लिखवाते हैं तो यहां आप को सब से ज्यादा दक्षिणा देना होता है. मंदिर में जगहजगह पंडित आप को दिखेंगे जो लोगों को इस के बारे में बताते है और अगर किसी ने मना किया तो यह उन को सुखी जीवन का लालच देत हैं, नाम लिखवाने से जीवन में कई तरह से लाभ होगा ऐसा बोलकर जबरदस्ती अपना काम बनवा लेते हैं.

लेकिन यह सब सुनने के बाद अगर कोई व्यक्ति नाम लिखवाने से मना करता है तो यह उनके साथ अच्छा व्यवहार नहीं करते. अचानक इन के व्यवहार में बदलाव दिखाई देने लगता है.

यह नाम लिखवाना, जानवरों के नाम पर बाबाओं की जेबें भरना, टीवी पर अनेक गुरु या बाबा को पूजना यह सब आस्था के नाम पर लोगों को मूर्ख बनाने का जरीया हैं.

चढ़ावे से व्यापार

मंदिरों में कितना चढ़ावा चढ़ता है, क्या आपने सोचा है? इतना चढावा हर रोज जाता कहा है? दरअसल, यह सभी चढ़ावे वापस बाजार में जा कर बिकते हैं. कोई भी धार्मिक त्योहार के समय मंदिरों में अधिक भीड़ होती है. ऐसे में लोग अधिक से अधिक फल-फूल चढ़ाते हैं और यही फलफूल वापस बाजार में बिकने के लिए दे दिए जाते हैं.

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आज धर्म एक व्यापार का केंद्र बन चुका है. आज के लोगो कि धार्मिक सोच है कि जितना चढ़ावा चढ़ाओ उतना लाभ होगा. पंडितों को खुश रखो तो ईश्वर अपने आप खुश हो जाएगा. पर ये ईश्वर हैं.

कहां और कैसे दिखते हैं? यह शायद ही किसी को पता हो.

गुलाब की महक से गुलजार

एक समय में गुलाब की खेती को कांटों की खेती कह कर खिलाफत करने वाले ही अब गुलाब के बगीचे लगा रहे हैं. गुलाब के फूलों की खेती से एक छोटे से गांव मालीखेड़ा के लोगों की जिंदगी में माली तरक्की की महक घुल गई है. भीलवाड़ा और चित्तौड़गढ़ जिलों की सीमा पर स्थित इस गांव की पहचान अब गुलाब की खेती से बनती जा रही है.

भीलवाड़ा जिले की सीमा पर स्थित चित्तौड़गढ़ जिले के बेगूं इलाके की मोतीपुरा ग्राम पंचायत के इस छोटे से गांव मालीखेड़ा में गुलाब की खेती की शुरुआत गांव के ही देवीलाल और कालूलाल धाकड़ ने साल 2008 में की थी. उन्होंने महज आधा बीघा जमीन पर गुलाब के पौधे रोपे. जब उत्पादन और मुनाफा अच्छा हुआ तो उन्हें गुलाब की खेती रास आने लगी. ऐसे में उन्होंने बोआई का क्षेत्र बढ़ा दिया. गुलाब के फूलों से उन्हें प्रति बीघा सालाना डेढ़ लाख रुपए तक की कमाई होने लगी.

देवीलाल और कालूलाल धाकड़ के मुताबिक, गुलाब की खेती हमारे लिए वरदान साबित हो रही है. भले ही शुरुआत में गांव व परिवार में इसे घाटे की खेती बनाने का विरोध हुआ था, लेकिन अब माहौल बदल गया है. पूरे गांव के किसान साथी गुलाब की खेती करने लगे हैं.

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गांव के दूसरे किसानों ने गुलाब की खेती से देवीलाल और कालूलाल की तरक्की देखी तो उन्होंने भी देखादेखी गुलाब की खेती करना शुरू कर दिया. धीरेधीरे पूरा गांव ही गुलाब की खेती करने लगा.

इतना ही नहीं, आसपास के गांवों मोतीपुरा, किशनपुरा, बरनियास, हमेरपुर, बरूनंदनी सरीखे गांवों के किसानों ने भी गुलाब की खेती करना शुरू कर दिया. नतीजतन, गुलाब उत्पादन से इलाके के गांवों की पहचान आज गुलाबी गांवों के रूप में होती है.

मालीखेड़ा में खासतौर से लाल (बिलायती) और गुलाबी (देशी) किस्म के गुलाब की खेती होती है. जहां लाल गुलाब के फूल माला बनाने के काम में आते हैं, वहीं गुलाबी गुलाब के फूल की पत्तियों को सुखा कर बेचा जाता है. इन पत्तियों का इस्तेमाल गुलकंद बनाने में होता है.

मालीखेड़ा में गुलाब की खेती के माहिर देवीलाल व कालूलाल धाकड़ का कहना है कि एक बार पौध रोपण के बाद यदि इन की ठीक तरीके से देखभाल की जाए व खादपानी दिया जाए तो इन से 20-25 साल तक फूलों का अच्छाखासा उत्पादन लिया जा सकता है. पौधा लगाने के 2-4 माह के भीतर ही इन पर फूल खिलने लगते हैं. गुलाब के पौधों पर फूल आमतौर पर जुलाई से अक्तूबर माह और जनवरी से अप्रैल माह की अवधि में ज्यादा खिलते हैं. गुलाब की पौध कलमों द्वारा बेहतर तरीके से तैयार की जाती है.

गुलाब की खेती कई माने में किसानों के लिए फायदेमंद है. इस की खेती में हकाई, जुताई व यूरिया जैसे कैमिकलों की जरूरत नहीं होती?है. इस का प्रति बीघा उत्पादन से कमाई भी दूसरी फसलों के मुकाबले ज्यादा होती है.

मालीखेड़ा के किसानों का मानना है कि गेहूं, सरसों, मक्का व दूसरी मौसमी फसलों के मुकाबले गुलाब की खेती ज्यादा मुनाफा देती है.

शुरुआत में यहां के किसान फूल बेचने के लिए भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़ व अजमेर का सफर तय करते थे, लेकिन फूलों के बाहरी कारोबारी अब सीधे खेतों से ही फूल खरीद कर ले जाने लगे हैं. इस से किसानों को आनेजाने के झंझट से नजात मिल गई है.

किसानों के मुताबिक, लाल गुलाब के फूल 70 से 80 रुपए प्रति किलोग्राम की दर से बिकते हैं, वहीं गुलाबी फूल की सूखी पत्तियों के 400 से 500 रुपए प्रति किलोग्राम की दर से दाम मिल जाते हैं.

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हालांकि गुलाब में छाछिया व फफूंदी रोग लगने की समस्या ज्यादा रहती है. अमूमन रोग लगने की समस्या फसल की शुरुआत के समय ज्यादा रहती है.

गुलाब की खेती के माहिरों के मुताबिक, गुलाब में डाइबैक रोग से बचाव के लिए सूखी टहनियों को काट कर कटे हुए हिस्से पर बोर्डो पेस्ट लगा दें.

वापसी की राह : भाग 1

लेखक : विनय कुमार सिंह

रोरो कर जरीना का बुरा हाल था. बेटी कल से वापस नहीं लौटी थी. शाम जैसेजैसे रात की तरफ बढ़ रही थी, उस का दिल बैठा जा रहा था. रोज की ही तरह वह घर से कालेज के लिए निकली थी. घर से कालेज वैसे तो ज्यादा दूर नहीं था लेकिन औटो और बस दोनों लेने पड़ते थे उसे वहां पहुंचने के लिए. उस ने बेटी को गेट तक छोड़ा था और जब वह औटो में बैठ गई थी तो जरीना वापस आ गई थी.

तकरीबन रोजाना ही अखबार में अपहरण और ह्यूमन ट्रैफिकिंग की खबरें छपती रहती थीं. पढ़ कर जरीना कई बार बहुत दुखी भी हो जाती थी और अकसर उसे गुस्सा भी आ जाता था. कोसने लगती थी सब को, कानून व्यवस्था, समय, लड़कों और सब से ज्यादा अपनेआप को. वजह थी, उस का लड़की की मां होना और ऐसी लड़की की जिस का पिता नहीं है.

यह इंसानी फितरत ही है जिस में कमजोर व्यक्ति अकसर अपनेआप को सब से पहले कारण मान लेता है किसी घटना के लिए, चाहे वह उस के लिए जिम्मेदार हो या न हो. यह स्वभावगत कमजोरी होती है, खासतौर से महिलाओं की, क्योंकि उन के पास ज्यादा विकल्प नहीं होते. और यही वजह थी कि जरीना भी अपनेआप को इस का जिम्मेदार मानने लगी थी.

रात आंखों में ही बीती और हर खटके पर उसे लगता जैसे बेटी आ गई हो. लेकिन सुबह की रोशनी ने जब उस के कमरे में प्रवेश किया. वह कुरसी पर ही औंधी पड़ी हुई थी. अब तक पड़ोसियों को भी खबर हो चुकी थी और हर कोईर् अपने हिसाब से कयास लगा रहा था. सब की अपनीअपनी राय और अलगअलग सलाह.

जरीना को कुछ समझ नहीं आ रहा था. आखिरकार, लोगों के कहने पर वह पुलिस स्टेशन गई. आज पहला अवसर था वहां जाने का और उस का अंतस बुरी तरह कांप रहा था. वैसे भी किसी भी सामान्य व्यक्ति को अगर पुलिस स्टेशन जाना पड़े तो उस की मनोदशा दयनीय हो जाती है. यही कुछ हुआ था जरीना के साथ भी. कहने को तो पड़ोसी इस्माइल साथ था, लेकिन जरीना से ज्यादा वह खुद भी घबराया हुआ था.

जैसे ही वह थाने के गेट पर पहुंची, बेहद अजीब निगाहों से उस को गेट पर खड़े संतरी ने घूरा. उसे देख कर वह उस की हालत समझ गया था.

‘‘क्या हुआ, क्यों चली आई यहां,’’ उस के सवाल के लहजे और उस की बंदूक पर उस के कसे हुए हाथ को देख कर जरीना थर्रा गई.

‘‘साहब, बेटी कल से कालेज से वापस नहीं लौटी है,’’ किसी तरह घबराते हुए उस ने कहा. ‘‘अपनी रिश्तेदारी में पूछा सब जगह?’’ उस ने बेहद रूखे तरीके से कहा.

‘‘हां साहब, सब जगह फोन कर लिया है, कहीं भी नहीं है.’’

‘‘अच्छा, क्या उम्र थी उस की,’’ अभी भी वह संतरी सवाल दागे जा रहा था. इस्माइल बिलकुल खामोशी से थोड़ी दूर पर खड़ा था. उसे अब समझ में आ गया था कि सब बात उस को ही करनी है.

‘‘साहब, 18 साल की है, मुझे रिपोर्ट लिखवानी है, किस से मिलूं,’’ बोलते हुए वह अंदर की तरफ चली.

‘‘18 साल की है, तो अपनी मरजी से कहीं भाग गई होगी. जाओ, अंदर साहब बैठे हैं.’’ संतरी की आंखों और चेहरे पर अजीब सा लिजलिजापन था और अंदर जाते समय उसे उस की निगाह अपना पीछा करती लग रही थी.

अंदर एक टेबल के सामने एक पुलिस वाला बैठा था. टोपी उस ने टेबल पर ही रखी थी और उस के शर्ट के सामने के बटन खुले हुए थे. अब हिम्मत जवाब दे गई जरीना की, यह आदमी उस की मदद क्या करेगा जो खुद ही किसी मवाली जैसा लग रहा हो. उस पुलिस वाले ने आंखों से उस के सारे बदन का एक्सरे किया औैर बेहद भद्दे अंदाज में दांत को एक सींक से खोदते हुए बोला, ‘‘क्या हुआ, किसलिए आई यहां पर?’’

जरीना ने फिर से वही सब दोहराया और इस ने भी वही सवाल पूछा. उस की ज्यादा दिलचस्पी जरीना को घूरने में थी. जब जरीना ने एक बार फिर हाथ जोड़ कर कहा कि उस की रपट लिख ले, तो उस ने टरका दिया.

‘‘उस की कोई फोटो लाई है, तो दे जा और उस के सब यारदोस्तों से पूछ. ऐसी उम्र में कोई प्यारवार का चक्कर ही होता है, भाग गई होगी किसी यार के साथ. कुछ दिन देख ले, अगर नहीं लौटी तो हम लोग पता लगाएंगे,’’ कहते हुए वह वापस अपने दांत खोदने लगा.

जरीना ने उसे बेटी की एक फोटो दी और एक कागज पर अपना नाम व फोन नंबर लिख कर दिया. फिर टूटे कदमों से बाहर निकली. आज तक उस की जो भी धारणा पुलिस के प्रति थी, वह पुख्ता हो गई थी. वहीं एक दीवार पर लिखा एक वाक्य, ‘‘पुलिस आप की मित्र है,’’ उसे अपना भद्दा मजाक उड़ाता लगा.

वापसी के समय इस्माइल बोल रहा था कि अपने एरिया के नेता के पास चलेंगे, वे जरूर मदद करेंगे. जरीना ने सुन के भी अनसुना कर दिया, पता नहीं कितने सवाल वहां भी पूछे जाएं और आंखों से उस के जिस्म का एक्सरे फिर से हो.

घर वापस आ कर उस ने एक बार फिर सब रिश्तेदारों के यहां फोन किया, जवाब हर जगह से नकारात्मक ही था. शाम तक वह लगभग हर परिचित और उस की सब सहेलियों के यहां हो आईर् थी, कहीं कुछ पता नहीं चल रहा था. अब करे तो क्या करे. पति था नहीं और इकलौती लड़की गायब थी.

अब तो एक ही उम्मीद लगी थी कि शायद कोई फोन आए फिरौती के लिए और वह सबकुछ बेच कर भी उसे छुड़ा ले.

3 दिन बीत गए, फिरौती के लिए कोई फोन नहीं आया, हां सब रिश्तेदार और परिचित जरूर फोन करते और कहते कि कोई जरूरत हो तो बताना. सब को पता था कि अभी उसे किस चीज की जरूरत है लेकिन उस के लिए कोईर् भी मदद नहीं कर पा रहा था. चौथे दिन फिर वह पुलिस स्टेशन गई. लेकिन टका सा जवाब मिला कि कुछ पता नहीं चला है, जब पता चलेगा, खबर कर देंगे.

खानापीना सब छूट गया था, पूरीपूरी रात जाग कर बीत रही थी उस की. जहां भी उम्मीद होती, भागती चली जाती कि शायद कुछ पता चले. जब भी बाहर निकलती, लोग सहानुभूतिपूर्वक ही पूछते कि कुछ पता चला, लेकिन उन के लहजे से लगता जैसे व्यंग्य ज्यादा कर रहे हों. और पीछे से कई बार वह सुन चुकी थी कि बेटी को ज्यादा पढ़ाने का नतीजा देख लिया, भाग गई किसी के साथ. कुछ लोगों ने कहा कि अखबार भी देखते रहो, कभीकभी कोई खोया इस में भी मिल जाता है.

कुछ तो इतने बेरहम थे कि उन्होंने कह दिया कि कभीकभी लावारिस लाश की भी फोटो छपती है अखबार में. यह सुन कर उस का कलेजा कांप गया था. लेकिन मजबूरी में वह अखबार भी देख लेती थी, शायद कोई खबर मिल ही जाए. इन्हीं उलझनों में उलझी हुई थी कि अचानक उस की नजर अखबार की एक खबर पर गई. खबर बल्लू के बारे में थी. किसी कत्ल के केस में उस का नाम उछल रहा था अखबार में. उसे ध्यान आया कि बल्लू तो कभी उस के ही क्लास में साथ पढ़ता था.

शुरू से ही बल्लू की संगत खराब थी और वह पढ़ाई भी पूरी नहीं कर पाया. उस के कदम जरायम की दुनिया की ओर मुड़ गए थे और आज अखबार में उस की गुंडागर्दी की खबर पढ़ कर उसे कुछ अजीब नहीं लगा. उस ने क्लास में कभी बल्लू से ज्यादा बातचीत नहीं की थी, वैसे भी वह लड़कों से खुद को दूर ही रखती थी. लेकिन बल्लू की हरकतों के चलते सब उसे जानते थे और कभीकभी बात भी करनी पड़ जाती थी.

जरीना सोच में पड़ गई, क्या वह बल्लू से मिले, शायद वह कुछ मदद कर पाए. लेकिन उस ने अपने विचार को ही झटक दिया, कहीं कोई गुंडा भी किसी की मदद कर सकता है, वह तो सिर्फ लोगों को परेशान ही कर सकता है.

कुछ कहानियों में उस ने पढ़ा भी था कि कुछ ऐसे बदमाश भी होते हैं जो जरूरतमंदों की मदद करते हैं. रातभर उस के दिमाग में ये सब विचार अंधड़ मचाते रहे. क्या वह बल्लू के पास जाए? किसी से पूछने की न तो इच्छा थी उस की और उसे उम्मीद भी नहीं थी कि कोई इस में सही राय दे पाएगा. रात बीती, सुबह होने तक उस ने एक फैसला कर लिया था. पुलिस का हाल वह देख ही चुकी थी और नेताओं से कोई उम्मीद वैसे भी नहीं थी. तो अब बल्लू को आजमाने के अलावा और कोई चारा उसे नजर नहीं आ रहा था. 4 दिनों में ही रिश्तेदार और परिचित अब बहाने बनाने लगे थे. बेटी को पाने की कम होती उम्मीद ने उसे अब बल्लू के पास जाने के लिए मजबूर कर दिया.

ऐसे लोगों का पता लगाना पुलिस के अलावा हर किसी के लिए बहुत आसान होता है. जरीना हैरान भी थी कि कितनी आसानी से उसे बल्लू का अड्डा पता चल गया जबकि पुलिस उसे नहीं ढूंढ़ पा रही है. वह पता पूछते हुए उस के अड्डे पर पहुंची, अंधेरे घर में शराब की बदबू और सिगरेट के धुएं की गंध चारों ओर फैली हुई थी.

वहां के लोगों की चुभती निगाहों ने उसे पस्त कर दिया और उसे पुलिस स्टेशन की याद आ गई. लेकिन उस अनुभव ने उस की मदद की और वह उन नजरों को बरदाश्त करती बल्लू के पास पहुंची. उस ने तो बल्लू को पहचान लिया, अखबार में उस की तसवीर देखी थी उस ने, लेकिन बल्लू उसे पहचान नहीं पाया. उस की निगाहों में उभरे प्रश्न को समझते हुए उस ने पहले अपने स्कूल की बात बताई तो वह चौंक गया. अभी भी कुछ लिहाज बचा था बल्लू में, वह तुरंत उसे ले कर अंदर के कमरे में गया और जब तक बल्लू कुछ पूछे, जरीना फूटफूट कर रो पड़ी.

ऐसी स्थिति से बल्लू का पाला बहुत कम ही पड़ता था, इसलिए पहले तो उसे समझ में ही नहीं आया कि वह क्या करे, फिर उस ने किसी तरह जरीना को शांत कराया और आने का कारण पूछा. जरीना ने सारा किस्सा एक सांस में कह डाला और उस के सामने हाथ जोड़ कर खड़ी हो गई. बल्लू के चेहरे पर कई भाव आजा रहे थे. कुछ तय नहीं कर पा रहा था वह. समझ में तो उसे आ गया था कि किसी गिरोह ने ही अगवा किया है जरीना की बेटी को, लेकिन वह कुछ कह नहीं पा रहा था.

अब तो जरीना को लगा कि शायद यहां भी उस का आना व्यर्थ ही हुआ, लेकिन वह बल्लू को लगातार आशाभरी निगाहों से देखे जा रही थी. एक बार तो बल्लू की भी इच्छा हुई कि जरीना को टरका दे. लेकिन फिर जरीना के जुड़े हुए हाथों ने उसे कशमकश में डाल दिया. आखिर वह उस के साथ पढ़ी थी और बहुत उम्मीद के साथ आईर् थी. उस ने जरीना के जुड़े हुए हाथों को अपने हाथों में ले कर दृढ़ शब्दों में कहा, ‘‘जाओ जरीना, अपने घर जाओ. बस, बेटी की एक फोटो देती जाओ. मैं हर तरह से कोशिश करूंगा कि किसी भी हालत में उसे तुम्हारे पास वापस ले आऊं.’’

जरीना ने कृतज्ञता से उस की ओर देखा और फोटो के साथ नंबर उसे थमा कर बाहर निकली. घर लौटते हुए जरीना के कदमों में एक दृढ़ता आ गई थी. आज पहली बार वह सोच रही थी कि लोग जिन्हें बुरा कहते हैं, क्या सचमुच वे बुरे होते हैं या उन्हें बुरा कहने वाले समाज के ये तथाकथित शरीफ और सभ्य लोग? उस के दुख में काम आना तो दूर की बात, गलत बातें बनाना और उस से मुंह चुराने लगे थे लोग. क्या एक इंसान का फर्ज अदा करने वाला बल्लू बेहतर इंसान नहीं है भले ही वह गुंडागर्दी करता है. अब वह कुछ और सोच नहीं पा रही थी. बस, उसे तो बल्लू के रूप में एक ही आसरा दिखाई पड़ रहा था जो उस की बेटी को ढूंढ़ सकता था.

जरीना के जाने के बाद बल्लू सिर पकड़ कर बैठ गया. अब क्या करे. एक बार तो उस ने सोचा कि एकदो दिनों बाद वह फोन कर के बता देगा कि उसे कोई खबर नहीं मिली, लेकिन जैसे ही उसे जरीना के जुड़े हुए हाथ और उस की आंखें याद आईं, वह सोच में पड़ गया. एक तरफ तो बेमतलब का सिरदर्द लग रहा था, दूसरी तरफ उसे किसी की आस दिख रही थी. कहीं न कहीं उस के मन में भी यह बात तो थी ही कि वह भी कुछ अच्छा करे. आखिर दिल से तो वह एक इंसान ही था जिस में कुछ अच्छी चीजें भी थीं. उस ने फोटो और कागज उठा कर अलमारी में रख दिए और कुरसी पर पसर गया.

अब बल्लू का दिमाग काफी साल पहले के स्कूल के दिनों की ओर चला गया था. वह जरीना को स्कूल में याद करने की कोशिश करने लगा. बहुत धुंधला सा कुछ उसे याद आया और उस के चेहरे पर मुसकराहट छा गई. यही एक पल था जब उस ने जरीना की बेटी का पता लगाने का निश्चय कर लिया.

देश का भला नहीं

सुस्ती, डर और मंदी का माहौल अब कश्मीर के श्रीनगर या जम्मू में ही नहीं है, देशभर में फैलने लगा है. बढ़ती बेकारी, बाजारों का ठंडापन, सरकारी कामों में देर होना, सरकार के भुगतान रुकने आदि का नतीजा यह है कि जो उत्साह और उमंग एक वर्ग में कश्मीर के 370 व 35ए अनुच्छेदों को लगभग समाप्त करने से उत्पन्न हुई थी वह सप्ताहों में ही गायब हो गई है.

कश्मीर में जो किया गया उस का फायदा अगर मिलेगा तो वर्षों बाद मिलेगा. सोशल मीडिया पर जो वहां जमीनें खरीदने या वहां की गोरियों को लाने की बातें कर रहे थे, वे नहीं जानते थे कि कश्मीर तो एक जेल की तरह बन जाएगा जहां न कुछ बनेगा न जहां कोई जा पाएगा.

आज कश्मीर बुरी तरह आहत है. जो यह सोच रहे थे कि सरकार का यह कदम कश्मीर के लिए संवैधानिक जंजीर को तोड़ना होगा, गलत थे, क्योंकि ये 2 धाराएं कश्मीरियों के लिए एक वादे को निभाने के लिए थीं. उन के प्रावधानों को हटाने से कश्मीरियों को कोई लाभ होगा, यह समझना जरूरी था. अपने गरूर और संसद में बहुमत के आधार पर भारत सरकार ने तो वहां संचार साधन ही बंद कर दिए जिस से कश्मीर की जनता को न लाभहानि का पता है न सरकार की मंशा का. अगर कश्मीरियों को यह एहसास दिलाया जा सकता कि इन प्रावधानों के हटने से वे देश की उन्नति में बराबर के हिस्सेदार बन जाएंगे तो बात दूसरी थी. पर इन दिनों शेष देश खुद कराहने लगा है, वह कश्मीर या किसी और का क्या भला करेगा.

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एक सरकार केवल धर्मादेशों पर नहीं चल सकती. जिन पुराणों पर सरकार के शासकों की आज नजर रहती है उन में किसी भी प्रसंग को देख लें, वहां किसी न किसी तरह की निराशा ही टपकेगी. दशरथ को एक अंधे मांबाप के युवा बेटे को अकारण मार डालने के कारण जो बुराभला सुनना पड़ा वह एक शासक के लिए शर्म की बात है. अंधे मातापिता कहते हैं कि वे ऋषि हैं पर चूंकि वे जन्म से वैश्य व शूद्र हैं और उन की दशरथ द्वारा मारी गई संतान वर्णसंकर है, इसलिए राजा को ब्रह्महत्या का पाप तो नहीं लगेगा पर वे दशरथ को ऐसी ही मौत मिलने की कामना कर जाते हैं. इस तरह के ग्रंथों पर विश्वास करने के

दंभ में डूबी मौजूदा सरकार की सोच दूरदर्शी न हो, तो यह स्वाभाविक है. आर्थिक और राजनीतिक दोनों क्षेत्रों में लड़खड़ाती सरकार वोट तो अवश्य पाएगी पर देश का कोई खास भला कर पाएगी, इस में संदेह है.

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इस गड्ढे से निकले 2720 किलो हीरे

बीती सदी के उत्तरार्द्ध तक धरती के ऊपर या नीचे पानी की कमी नहीं थी. हां, धरती से पानी निकालने वाले संसाधनों की कमी जरूर थी. धीरेधीरे दुनिया भर में नएनए साधनों का विकास हुआ. एक से एक अच्छी तकनीक सामने आती चली गईं.

तकनीकों का यह आलम है कि धरती के हजारों फीट नीचे से पानी निकालना तो आसान हो ही गया, इंसान अथाह गहराइयों वाले समुद्र के नीचे से गैस और तेल निकालने लगा है. कई जगहों पर तो अंडरवाटर रेस्टोरेंट तक बन गए हैं.

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लेकिन पिछली और उस से पिछली सदी में स्थिति यह थी कि आदमी को जमीन में गड्ढा कर के पानी निकालना पड़ता था. दक्षिण अफ्रीका के विंबरले स्थित इस बड़े गहरे गड्ढे को देखिए. दावा है कि हाथों से खोदा गया यह दुनिया का सब से बड़ा गड्ढा है. हालांकि इस बात पर विवाद है.

वैसे कहा यह भी जाता है कि इस गड्ढे को 1871 से 1914 के बीच 50 हजार मजदूरों ने कुदाल और फावड़े से खोद कर यहां से 2720 किलोग्राम (1,36,00,000 कैरट) हीरे निकले थे. यह गड्ढा 42 एकड़ में फैला है. इस की चौड़ाई 463 मीटर और गहराई 240 मीटर है. हां, पानी और मलबा गिरने से अब इस की गहराई केवल 215 मीटर रह गई है.

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बुढ़ापे में जो दिल बारंबार खिसका : भाग 2

‘‘कोई घर पर इंतजार तो नहीं कर रहा होगा?’’ वह मुसकराई.

‘‘नहीं, ऐसा कुछ नहीं, अभी शादी नहीं की. मां को इंतजार रहता है, फोन कर देता हूं.’’ और वे दोनों कौम्प्लैक्स के हल्दीराम रैस्टोरैंट में आराम से बैठ गए. मां को तभी आज उस ने 8 बजे घर पहुंचने का टाइम बता दिया. दोनों बचपन के किस्सों में खो गए. फिर अब तक क्याक्या, कैसे किया वगैरह एकदूसरे से शेयर करते व हंसते बाहर निकल आए. रणवीर बहुत दिनों बाद इतना हंसा था. जयंति अब भी वैसी ही मस्तमौला खुराफाती है. उस को उस का साथ बहुत भला लगा. ‘इतनी परेशानियां झेली… पिता का असमय अचानक देहांत, मां का कैंसर से निधन, भाई का ससुराल में घरजमाई बन कर चले जाना और जाने क्याक्या उस ने इतने दिनों में. पर अपने मस्तमौला स्वभाव पर कोई असर न आने दिया. यह सीखने वाली बात है,’ यह सोच कर वह हलका महसूस कर रहा था.

उस दिन रणवीर को कुछ मालूम नहीं चलने पाया कि कोई पड़ोसी फिर पापा की शिकायत कर के गए हैं. वह खाना खा कर सो गया और दूसरे दिन सुबह फिर औफिस चला गया. रेवती ने चैन की सांस ली. बेकार ही इन पर गुस्सा हो कर उलझता, और फिर बहुत बड़ा बखेड़ा हो जाता. घर बिखर जाए, इस से पहले मैं ही कुछ करती हूं. पिछली बार अपनी सहेली संध्या के दरोगा भतीजे ने इन पर विश्वास कर, भला जानते हुए इन्हें छेड़खानी के आरोप से छुड़ाया था. उसी से मदद लेती हूं. बिना शर्म के बताऊंगी कि ये ऐसे ही मस्तमिजाज हैं. लोग सही आरोप लगाते हैं. तू ही सुधार के लिए कुछ कर, यही ठीक रहेगा. यह सोचते हुए वह कुछ आश्वस्त हुई.

रणवीर और जयंति का तकरीबन रोज ही मिलना हो जाता. दोनों को एकदूसरे का बरसों बाद मिला साथ अच्छा लगने लगा था. एक दिन जब जयंति ने रणवीर से कहा, ‘‘यार, इतने दिन हो गए कई बार कहा भी, घर में तो सब से मिलवाओ, मेरा तो कोई है नहीं, लेदे के एक वही मस्ताना डौग है, वैसे वह भी मिलने लायक चीज है, चलोगे, मिलोगे?’’ वह हंसी थी.

‘‘चलूंगा, पर आज नहीं. मैं तुम्हें कुछ बताना चाहता हूं जयंति कि क्यों मैं तुम्हें घर नहीं ले जा पाता,’’ रणवीर ने पिता की वजह से घरबाहर फैले रायते को जयंति के सामने रख दिया. ‘‘छि, बड़ी शर्म आती है मुझे, घर से बाहर निकलते लोगों से मिलते. सब बाप की तरह बेटे को भी समझते होंगे. क्या करूं कोई उपाय सूझ नहीं पाता. मैं खुद उस घर में नहीं जाना चाहता. सिर्फ मां की वजह से वहां हूं. मां से अलग घर, मैं सोच भी नहीं पाता. ऐसे पिता की वजह से न घर में कोई आता है न ही हम किसी को बुलाने की हिम्मत कर पाते हैं.

मां की तो पूरी जिंदगी ही उन्होंने खराब कर दी, वही अब मेरे साथ भी कर रहे हैं. रानी दी ने तो सही किया, लड़की थीं, निकल गईं जंजाल से. पर मैं तो बेटा हूं, इन्हें छोड़ भी नहीं सकता, बुढ़ापे में मां को इन से अलग भी नहीं कर सकता. साथ रख कर ही पालना पड़ेगा. जब तक इन की हरकतें रहेंगी, ये जिंदा रहेंगे, तब तक कुछ नहीं हो सकता. कितना भी कर लूं, पर न मैं ऐसे में खुश रह सकता हूं, न मां को या किसी को खुशी दे सकता हूं. शादी के बारे में तो सोच ही नहीं सकता.’’

‘‘ओह, तो यह बात है जरा सी, जो तुम सब को कब से परेशान किए हुए है.’’

‘‘तुम्हें यह जरा सी बात लगती है?’’

‘‘इसीलिए तुम ने शादी न करने का फैसला कर लिया है,’’ वह बोली.

‘‘ऊं, न, नहीं, ऐसा कुछ नहीं. पर कुछ हद तक सही ही है. जहां खुद मेरा दम घुटता हो वहां किसी को लाने की मैं सोच भी कैसे सकता हूं.’’

‘‘लग तो कुछ ऐसा ही रहा है,’’ वह मुसकराई, तुम शादी तो करो, यार, मैं उसे ऐसे गुरुमंत्र दूंगी कि बस, फिर तुम कमाल देखते ही रहना. आई प्रौमिस यू, तुम तो जानते ही हो, जो मैं कहती हूं वह जरूर कर के रहती हूं.’’

‘‘कोई और क्यों, तुम क्यों नहीं. जानता हूं कि असलियत जान कर किसी को मुझ से शादी करना मंजूर नहीं होगा,’’ वह कुछ संकुचाते हुए बोल ही गया. उस के संबल में उसे एक उम्मीद की किरण सी उसे दिखने लगी.

पर जयंति अचानक दिए इस प्रपोजल पर हैरान थी. अपनी हैसियत से उसे ऐसी सपने में भी कल्पना न थी. जल्दी में कुछ न सूझा तो वह बोल पड़ी, ‘‘मेरे ऊपर तो बड़ी जिम्मेदारी है जो कभी पीछा नहीं छोड़ेगी.’’

‘‘अभी तो तुम ने कहा, कोई नहीं रहता, तुम अकेले हो?’’

‘‘भूल गए, मस्ताना, उस का भी कोई नहीं मेरे सिवा,’’ वह अमिताभ की फिल्म ‘द ग्रेट गैम्बलर’ के अंदाज में गा उठी.

‘‘मैं मजाक नहीं कर रहा, पूरी तरह से सीरियस हूं.’’

‘‘अच्छा, चलो, फिर कर लेते हैं, पर समझ लो, मैं तुम्हारी हस्ती से मैच भी करूंगी? एक पहिया गाड़ी का, एक स्कूटी का. आड़ातिरछा चलाचला के झूम…’’ और वह हंसने लगी. रणवीर की गंभीर गुस्से वाली मुद्रा देख कर वह फिर बोली, ‘‘अच्छा, अब सीरियस हो जाती हूं. मां से तो मिलवाओगे या सीधे कोर्ट मैरिज कर के घर ले चलना है.’’ वह फिर से हंसने वाली थी, अपने को रोक कर मुसकराई.

जयंति रणवीर की मां रेवती से मिली, आशीर्वाद लिया और फिर शहनाइयां बज उठीं. जयंति ब्याह कर रणवीर के घर आ गई. उस के साथ मस्ताना भी था. रेवती, रणवीर दोनों ही ने उसे साथ लाने को कहा था. रेवती ने देखा, हमेशा गंभीर दिखने वाले बेटे के चेहरे पर खुशी साफ झलक रही थी.

मस्ताना की चमकती आंखें रामशरण को लगता उन्हें ही घूर रही हैं. वह अपनी लहरदार, घनी पूंछ जब पटकता तो लगता उन्हें धमकी दे रहा हो. कई बार रामशरण मस्ताना की वजह से ताकझांक करते हुए, कहीं चोरी पकड़ी न जाए, गिरतेगिरते बचते क्योंकि मस्ताना कहीं न कहीं से उन्हें देख लेता. लहराती दुम उठा कर जो वह जोरजोर से भूंकना शुरू करता तो रुकने का नाम ही न लेता. जयंति को मालूम हो गया था कि ससुरजी मस्ताना से थोड़ा डरते हैं. वह अकसर उन्हें मस्ताना से काफी दूर घूम कर जाते हुए देखती तो मुसकराती. कोई शरारत उस के खुराफाती दिमाग में दौड़ने लगी थी. कुछ तो करना ही पड़ेगा घर में सब के सुकून के लिए.

सुबहशाम जयंति भी ससुरजी के  टाइम पर ही मस्ताना को टहलाने  के लिए जाने लगी. पहले बहुत जिद की थी पापाजी से, ‘‘आप ही उसे अपने साथ ले जाया कीजिए पापाजी, मैं मां का हाथ बंटा लूंगी. फिर औफिस भी जाना होता है.’’ पर रामशरण किसी न किसी बहाने से टाल गए. अगले वीक उस की छुटटी सैंक्शन हो गई. जितनी भी छुट्टियां बची थीं, सब ले डालीं. रणवीर तो उसे यह जौब छोड़ कर उसे अपना पसंदीदा एनीमेशन कोर्स कर कुछ बड़ा करने पर जोर दे रहा था जिसे वह अपने घर की परेशानियों के चलते पूरा न कर सकी थी.

‘‘अब ये सब करने की क्या जरूरत है? जो चाहती थी वह कर डालो न.’’

‘‘ओ थैंक्स डियर, तुम्हें अब भी याद है? मेरा तो सपना ही था. अभी कुछ दिन रुक जाओ, फिर देखती हूं.’’

रणवीर की आंखों में असीमित प्यार देख कर वह निहाल हुई जा रही थी. उसे सब याद आया कि वह ब्लैकबोर्ड पर, कौपी में अकसर सहपाठियों, टीचर के कार्टून बना दिया करती, हूबहू कोई भी पहचान लेता. एक बार प्रिंसिपल शशिपुरी का भी कार्टून बना डाला.

 

‘बिग बौस 13’: घर में नजर आएंगी हिना खान, इस वींकेंड होने वाला है धमाल

कलर्स टीवी पर प्रसारित होने वाला रियलिटी शो ‘बिग बौस 13’ में ये वीकेंड और भी शानदार होने वाला है. जी हां इस वीकेंड और भी धमाल होने वाला है. क्योंकि इस वीकेंड हिना खान बतौर गेस्ट आने वाली हैं. उन्होंने सलमान खान के साथ फोटो भी शेयर की हैं.

तो इससे यही लगता है कि हिना खान बिग बौस के घर में इस वीकेंड धमाल मचाने आने वाली हैं. दरअसल, हिना ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट से सलमान के साथ फोटो शेयर किए हैं. साथ ही कैप्शन में लिखा है, ‘जब मिस खान मिस्टर खान से मिलीं.’ सलमान के साथ स्टेज शेयर करना हमेशा सुखद रहता है. पिछले चार सीजन से आपको मिल रही हूं.

इस फोटो और कैप्शन से तो यही अंदाजा लगाया जा सकता है कि वे इस वीकेंड बिग बौस के घर में मेहमान बनकर आ रही हैं. फिलहाल ये बात सच है या नहीं,  ये तो शो देखने के बाद ही पता चलेगा.

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आपको बता दें, हिना खान ‘बिग बौस 11’ के कंटेस्टेंट रह चुकी हैं. उनका ड्रामा और परफौर्मेंस ने दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया. खबरों की माने तो हिना शो की सबसे महंगी कंटेस्टेंट थीं.  वैसे हिना बिग बौस 11 की विनर शिल्पा शिंदे को कड़ी टक्कर दी.

टीवी का मशहूर सीरियल ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ से हिना खान काफी पौपुलर हुई. ‘कसौटी जिंदगी के 2’ में  भी कोमोलिका का किरदार निभा चुकी हैं. इसके अलावा ‘खतरों के खिलाड़ी 8’ में भी हिस्सा ले चुकी हैं.

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‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’: नायरा और कार्तिक की लव स्टोरी लेगी एक नयी मोड़

छोटे पर्दे का मशहूर सीरियल ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’  में आपको लगातार धमाकेदार ट्विस्ट देखने को मिलने वाला है. जी हां, अपकमिंग एपिसोड में इस सीरियल की कहानी एक नयी मोड़ लेते हुए नजर आएगी. आने वाले एपिसोड में कार्तिक और नायरा की जिंदगी पूरी तरह बदल जाएगी.

तो आइए आपको बताते है, कार्तिक और नायारा की जिंदगी में क्या नया बदलाव आने वाला है. खबरों की माने तो इस शो में ऐसा ट्विस्ट आने वाला है कि नायरा और कार्तिक  ना चाहते हुए भी एक दूसरे के करीब आने लगेंगे. तो वही इस रोमांटिक ट्विस्ट के पहले दिखाया जाएगा कि नायरा और कार्तिक एक दूसरे से वादा करेंगे कि वह कोर्ट में एक दूसरे के सम्मान को ठेस नहीं पहुंचाएंगे.

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उधर कार्तिक अपनी वकील दामिनी से रिक्वेस्ट करेगा कि वह नायरा से कोई भी ऐसा सवाल ना पूछे जिससे उस पे कोई आच आए. ऐसे में कार्तिक के इस कदम को देखकर नायरा इमोशनल तो जरुर होगी.

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तो दूसरी ओर इस शो में डांडिया उत्सव मनाया जाएगा. रिपोर्टस के मुताबिक अपकमिंग एपिसोड में कैरव सभी के सामने अपने मम्मी-पापा की लव-स्टोरी बताने वाला है. कैरव सभी को बताएगा कि किस तरह डांडिया खेलते-खेलते उसके मम्मी पापा यानी नायरा और कार्तिक को एक दूसरे से प्यार हो गया था.

त्यौहार के मौके पर कार्तिक नायरा को कुछ खास गिफ्ट भी देने वाला है. ऐसे में नायरा का क्या रिएक्शन होगा. ये देखना दिलचस्प होगा. तो दर्शकों को अपकमिंग एपिसोड में बहुत सारे धमाकेदार ट्विस्ट  देखने को मिलेंगे.

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