सुस्ती, डर और मंदी का माहौल अब कश्मीर के श्रीनगर या जम्मू में ही नहीं है, देशभर में फैलने लगा है. बढ़ती बेकारी, बाजारों का ठंडापन, सरकारी कामों में देर होना, सरकार के भुगतान रुकने आदि का नतीजा यह है कि जो उत्साह और उमंग एक वर्ग में कश्मीर के 370 व 35ए अनुच्छेदों को लगभग समाप्त करने से उत्पन्न हुई थी वह सप्ताहों में ही गायब हो गई है.

Tags:
COMMENT