ताबड़तोड़ कर लगाने से जो मायूसी आर्थिक बाजार में छाई थी, उस का मुकाबला यह मजबूत सरकार नहीं कर पाई. झक मार कर सरकार को विदेशी व देशी निवेशकों के पूंजीनिवेश पर हुए लाभ पर लगाए कर में कटौती करनी पड़ी, गाडि़यों की रजिस्ट्रेशन फीस को टालना पड़ा और पैंडिंग जीएसटी क्रैडिट लौटाने का वादा करना पड़ा है. ये कदम लड़खड़ाते बाजार को संभालने के लिए उठाए गए हैं, पर आज जो माहौल है उस में ये सरकंडे की बैसाखी का ही काम करेंगे.

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