औफिस रोमांस सुनने में तो बहुत अच्छा है मगर असल में वह अच्छा है या नहीं यह पता होना बेहद जरूरी है. असल में औफिस रोमांस शुरू शुरू में बहुत अच्छा लगता है. यूं कहे तो बहुत ज्यादा ही रोमांचकारी होता है. एक दूसरे से गलती से टकरा जाना, काम के बहाने आस पास से गुजरना, वक्त बे वक़्त एक दूसरे को देखना और नजरों का आपस में मिलना अच्छा लगता है. यह छोटी छोटी चीजें रोमांटिक टर्न लेती हैं और आप अपने को वर्कर के साथ रिलेशनशिप में आ जाते हैं या आप दोनों में अफेयर शुरू हो जाता है. यहीं से शुरू होती है असली परेशानियां और औफिस रोमांस के नुक्सान. हालांकि, औफिस अफेयर में स्थितियां काफी अलगअलग तरह की होती हैं और उन की अच्छी बुरी बातें भी काफी अलग होती हैं.

को वर्कर के साथ रोमांटिक रेलशनशिप

औफिस  में कई तरह के अफेयर होते हैं जिन में से एक है को वर्कर के साथ रोमांटिक रिलेशनशिप. रोमांटिक रिलेशनशिप का मतलब है कि इस में दोनों ही व्यक्ति एकदूसरे को प्यार भरी नजर से देखते हैं और इन की फीलिंग्स म्यूच्यूअल होती हैं. कविता और सौरीश के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ था. वे दोनों एकदूसरे के कोवर्कर्स थे और एकदूसरे के अच्छे दोस्त भी. कुछ ही दिनों बाद उन दोनों को ही यह महसूस हो गया कि वे दोस्त से कुछ ज्यादा हैं और उन्हें रिलेशनशिप में आ जाना चाहिए.

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रिलेशनशिप में आ जाने के बाद दोनों का व्यवहार काफी बदल गया. वे काम के बीच में ही कभी अकेले कोने में गप्पे मारते नजर आते तो कभी चाय पीने के बहाने साथ निकल जाते. उन दोनों के हावभाव से पूरा औफिस  परिचित होने लगा और सभी को यह जानने में देर नहीं लगी कि दोनों के बीच क्या चल रहा है. उन का रिलेशनशिप उन के काम में अड़ंगे डाल रहा था जिसे उन के कई सीनियर्स समझ रहे थे. दोनों को कई बार डेस्क के नीचे हाथ पकड़ते भी देखा गया. उन दोनों की परफौरमेंस पर काफी असर पड़ने लगा था. हद तो तब होने लगती जब दोनों के बीच किसी बात पर झगड़ा होता और उन के काम करने के ढंग से ही सब को पता लग जाता. लोग उन के पीठ पीछे बातें भी बनाते और हंसी मजाक में मुंह पर व्यंग्य भी कस जाते. दोनों का औफिस  में जीना मुश्किल तो हुआ ही और खुद बौस उन से चिढ़ने लगे वो अलग.

वन साइडेड लव अफेयर

एक तरफा प्यार चाहे स्कूल कालेज में हो या औफिस में, दुख, तकलीफ और इग्नोर गेम्स से भरा हुआ होता है. लेकिन, औफिस में हुआ एक तरफा प्यार जरुरत से ज्यादा दर्द देता है. कारण साफ है कि यहां आप अपने कोवर्कर से भाग नहीं सकते. आप को उसे हर दिन फेस करना ही होता है. निताशा और लक्ष्य कई महीनों से अच्छे दोस्त है जिस के चलते निताशा को लक्ष्य से प्यार हो गया. निताशा ने लक्ष्य को अपनी फीलिंग्स बताई और लक्ष्य ने भी कहा कि उसे निताशा से प्यार है. दोनों का अफेयर शुरू हुआ. औफिस  में किसी को भी उन के रेलशनशिप के बारे में कुछ नहीं पता था. दोनों के बीच सब अच्छा चल रहा था लेकिन निताशा नोटिस करने लगी कि लक्ष्य का इंटरेस्ट दिन-ब-दिन औफिस  में आई नई इंटर्न की तरफ बढ़ता ही जा रहा है. निताशा ने एक दिन लक्ष्य से पूछ ही लिया कि आखिर माजरा क्या है जिस पर लक्ष्य ने कहा कि उसे ऐसा लगा कि वह निताशा से प्यार करता है जबकि असल में ऐसा नहीं है, वे अच्छे दोस्त ही हैं.

इस बाबत उन दोनों की रिलेशनशिप तो खत्म हुई ही, साथ ही निताशा का दिल भी टूट गया. वह जितना अपने काम में मन लगाने की कोशिश करती उतना ही उस का ध्यान लक्ष्य की तरफ जाता. यह कालेज भी नहीं था जहां वह उसे इग्नोर कर सकती. जबजब वह लक्ष्य के पास कोई फाइल ले कर जाती तो उस के हाथ कांपने लगते. उस की धड़कनें इतनी तेज हो जातीं जैसे अभी सीने से बाहर निकल आएंगी. यह स्थिति निताशा के लिए किसी मानसिक प्रताड़ना से कम नहीं थी. लेकिन, वह करती भी तो क्या.

फ्रेंड्स विथ बेनिफिट्स

औफिस अफेयर्स में  फ्रेंड्स विथ बेनिफिट्स काफी कौमन है. लेकिन इस में होता यह है कि इस तरह के अफेयर्स के बारे में औफिस में बात फैलने में देर नहीं लगती और दो लोग कब पूरे औफिस की चर्चा का केंद्र बन जाएं उन्हें खुद पता नहीं चलता. केशव एक बड़ी मल्टीनेशनल कंपनी में नौकरी करता है. उस के औफिस में दो लोगों को ले का चर्चाएं हमेशा गर्म रहती हैं. यह दो लोग शादीशुदा हैं, नहीं नहीं आपस में नहीं. यहीं से तो असली बात शुरू होती है. एक सुबह केशव 10 की जगह साढ़े नौ बजे ही औफिस  पहुंच गया. औफिस  पहुंच कर वह वाशरूम की तरफ जा ही रहा था कि उस ने कोयल मैम को जेंट्स वाशरूम से निकलते देखा. एक मिनट बाद कोयल मैम के पीछे ही उसे अपने सीनियर गौतम सर वाशरूम से निकलते दिखे.

उस ने भी इन दोनों के किस्से खूब सुने थे लेकिन जब अपनी आंखों से देखा तब असल में यकीन किया. उस ने यह बात अपने दोस्त नीरज को बताई, नीरज ने प्रिया को, प्रिया ने किसी और को और किसी और ने किसी और को. इस तरह पूरे औफिस में कोयल और गौतम के चर्चे होने लगे. अब तो सभी कोयल के मुंह पर मुस्कुराते हैं और पीठ पीछे उसे स्लट कहते हैं. गौतम की इमेज भी कुछ खास नहीं. सीनियर होने के बावजूद उन की इज्जत लोगों के लिए कोई माने नहीं रखती तभी तो हर किसी के लिए वे हंसी के पात्र बनकर रह गए हैं.

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बौस से अफेयर

बौस के साथ न दुश्मनी अच्छी और न ही दोस्ती, यह तो शायद आप ने सुना ही होगा. लेकिन, बौस के साथ अफेयर अच्छा है या बुरा. इस के बारे में तो सभी की राय अलगअलग ही होगी. टीवी के कई सीरियलों में बौस और सेक्रेटरी की प्रेम कहानी का कांसेप्ट दिखाया गया है. इन में से अधिकतर में यह भी दिखाया जाता रहा है कि गरीब घर की लड़की से जब अमीर बौस को प्यार हुआ तो दोनों की जिंदगी बदल गई. अंत में दोनों की शादी हो जाती है और दोनों खुशीखुशी घर परिवार संभालते हैं.

मगर असल में ऐसा कुछ नहीं होता. अमीर बौस का दिल इतना मुलायम नहीं होता कि उसे सेक्रेटरी भा जाए और वह उस से शादी रचा ले. बौस के साथ अफेयर में लड़की को अक्सर गोल्ड डिगर यानी पैसा खाने वाली की ख्याति ही मिलती है. फिर चाहे लड़की या लड़का कितना ही टैलेंटेड क्यों न हो पर बौस से संबंध रखने पर यदि किसी भी  तरह की सफलता हाथ लगती है तो श्रेय चापलूसी को ही दिया जाता है.

यानी कुल मिलाकर औफिस अफेयर एक अच्छा आईडिया नहीं है. कई बार तो यह भी होता है कि जिस के साथ आप रिलेशनशिप में हैं उस की कोई और भी रिलेशनशिप है जिस के बारे में आप को कुछ खबर ही नहीं है. वैसे भी, जिन के साथ आप काम कर रहे हैं जरूरी नहीं कि आप उन्हें सचमुच जानते ही हों. औफिस अफेयर्स में बदनामी और प्रोफेशनल लाइफ पर असर दो मुख्य बातें हैं जिन का सभी को ध्यान होना चाहिए. हां, कई बार जब दोनों तरफ से चीजें सही हों और आप दोनों को ही लगे कि आप दोनों का प्यार परवान चढ़ रहा है और रिलेशनशिप में आना एक अच्छा सुझाव है, तो बेहतर है कि रिलेशनशिप में आइए, लेकिन इस शर्त पर कि इस से आप की प्रोफेशनल लाइफ पर असर नहीं पड़ेगा.

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