देश की धार्मिक व्यवस्था चाहे सुदृढ़ हो गई हो पर आर्थिक व्यवस्था चरमराने लगी है. यज्ञों और हवनों की सरकार की देन नोटबंदी, जीएसटी और कैशलैस सारे देश को फकीर बनाने में तुले हैं. कहने को चाहे हम अपने मुंह मियां मिट्ठू बनते हुए कहते रहें कि हम विश्वगुरु हैं, हम ढोल बजाते रहें कि हम दुनिया की सब से तेज गति से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था हैं.

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