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ऐसे बनाएं राजमा की सब्जी

राजमा की सब्जी काफी  स्वादिष्ट  होती है. और इसे कई तरीकों से आप बना सकते हैं. और यह आसानी से बनने वाला  डिश है. तो चलिए जानते हैं राजमा बनाने की सब्जी.

सामग्री

2 प्याज (कटे हुए)

6 लहसुन की कालिया (कटी हुई)

1 चम्मच अदरक (पीसी हुई)

2 हरी मिर्च (कटी हुई)

2 टमाटर (पिसे हुए)

1 चम्मच धनिया पत्ती (बारीक कटी हुई)

¾ चम्मच लाल मिर्च पाउडर

½ चम्मच हल्दी पाउडर

1 चम्मच काली मिर्च

1 कप राजमा (रातभर भिगोया हुआ)

1 चम्मच धनिया पाउडर

1 चम्मच गरम मसाला

स्वादानुसार (नमक)

1 चम्मच बटर

1 चम्मच तेल

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बनाने की विधि

एक कढ़ाई लें, उसमे राजमा और एक चुटकी नमक के साथ 3 कप पानी डाले. 20-30 मिनट तक पकायें. तब तक पकायें जब तक की राजमा नरम और मुलायम नहीं हो जाता.

एक छोटा बर्तन लें और उसमें सभी मसाले मिर्च पाउडर, हल्दी पाउडर, जीरा पाउडर, धनिया पाउडर, नमक और काली मिर्च डालें. मसालों को अच्छी तरह से मिला ले.

अब एक कढ़ाई में तेल गर्म करें. कड़ाई में कटे हुए प्याज डालें और 7 से 8 मिनट तक पकाएं. अब प्याज में लहसुन और हरी मिर्च डालें और कुछ मिनटों तक पकने दें.

अदरक और टमाटर डाले और मिश्रण को अच्छी तरह से मिलने दें. जबतक मिश्रण में से तेल नहीं दीखता तब तक उसे कम से कम 7-8 मिनटों तक पकने दें. अब इस मिश्रण में पका हुआ राजमा बटर और एक कप पानी डालें. अब धीमी आंच पर उसे 30 मिनटों तक पकने दे.

आपका राजमा बन कर तैयार है. इसे एक बर्तन में निकालें और धनिया पत्ती से सजायें.

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 पिया बने परदेसिया घर संभाले बहुरिया

देश के किसी भी हिस्से में जाएं तो चौड़ी, चिकनी सड़कों के किनारे जैसे ही कोई छोटा शहर, कसबा या गांव आता है, वहां पर बहुत सारी चीजें बिकती नजर आती हैं. इन में ज्यादातर हिस्सा उन चीजों का होता है, जो वहां के लोकल यानी स्थानीय फल या खानेपीने की होती हैं. भुने हुए आलू, शकरकंद, नारियल पानी, मेवा और दूसरी बहुत सी चीजें यहां मिल जाती हैं. यहां बात बेचने वाली औरतों से जुड़ी हैं. ये औरतें इस तरह के काम कर के अपने घर का खर्च चलाती हैं.

सड़क किनारे दुकान चलाने के साथ ही साथ ये औरतें अपने छोटेछोटे बच्चों को संभाल रही होती हैं. इन के पति अपने गांवघर से दूर किसी दूर शहर में नौकरी करने गए होते हैं.

लखनऊउन्नाव हाईवे के किनारे अजगैन कसबे के पास अमरूद बेच रही रेहाना बताती है, ‘‘हम रोज 20 से 30 किलो अमरूद सीजन में बेच लेते हैं. 5 से 7 रुपए किलो की बचत भी हो गई तो कुछ घंटों में 150 से 200 रुपए की कमाई हो जाती है.

‘‘सीजन के हिसाब से हम अपने सामान को बदल देते हैं. ऐसे में रोज का खर्च हमारी कमाई से चलता है और जो पैसा पति बाहर कमा रहे हैं वह किसी बड़े काम के लिए जमा हो जाता है.’’

मिल कर संभाल रहे घर

भोजपुर गांव की रहने वाली सितारा देवी के पास गांव में खेती करने के लिए 3 बीघा जमीन थी. घरपरिवार बड़ा हो गया था. सितारा के 3 बेटियां और 2 बेटे थे. इन का खर्च चलाना आसान नहीं था. पति सुरेश भी परेशान रहता था.

भोजपुर गांव का ही रहने वाला प्रदीप मुंबई में कपड़ों की धुलाई का काम करता था. वह सुरेश से मुंबई चलने के लिए कहने लगा.

सुरेश बोला, ‘‘मैं मुंबई कैसे चल सकता हूं. घरपरिवार किस के भरोसे छोड़ कर जाऊं? पत्नी घरपरिवार और बच्चों को अकेले कैसे संभाल पाएगी?’’

यह बात सुरेश की पत्नी सितारा भी सुन रही थी. वह भी सोचती थी कि अगर सुरेश पैसा कमाने घर से बाहर चला जाए तो घरपरिवार का खर्च आसानी से चल जाएगा.

सुरेश और प्रदीप की बातें सुन कर सितारा को लगा कि पति मुंबई इसलिए नहीं जा रहा क्योंकि पत्नी घर का बोझ कैसे उठा पाएगी.

वह बोली, ‘‘तुम घरपरिवार की चिंता मत करो. उस को मैं संभाल लूंगी. तुम बाहर से चार पैसा कमा कर लाओगे तो घर का खर्च चलाना और भी आसान हो जाएगा.’’

सितारा के हिम्मत बंधाने के बाद  सुरेश ने मुंबई जा कर पैसा कमाने का फैसला कर लिया. कुछ ही सालों के बाद दोनों की घर गृहस्थी खुशहाल हो गई.

सुरेश सालभर में एक महीने की छुट्टी ले कर घर आता था तो एकमुश्त पैसा ले कर आता था. इतना पैसा गांव की खेती में कभी नहीं बच सकता था.

गांव के लोगों ने कहना शुरू किया कि सुरेश की कमाई से उस का घरपरिवार सुधर गया तो खुद सुरेश कहता था, ‘‘मेरे घर की खुशहाली में मुझ से ज्यादा मेरी पत्नी सितारा का हाथ है. अगर उस ने हमारे घरपरिवार, खेती को नहीं संभाला होता तो मेरे अकेले की कमाई से क्या हो सकता था.’’

अब सुरेश और सितारा के साथ उन के बच्चे भी खुश थे. बड़ा बेटा भी कुछ सालों में सुरेश के साथ मुंबई कमाई करने चला गया.

परसपुर गांव की रहने वाली हमीदा का पति गांव में कपड़ों की बुनाई का काम करता था. इस के बाद भी उस को इतना पैसा नहीं मिलता था कि घरपरिवार ठीक से चल सके.

हमीदा के मायके में कुछ लोग कपड़ों की बुनाई का काम करने सूरत जाते थे. वहां उन को अच्छा पैसा मिल जाता था.

हमीदा ने अपने पति रहमान से भी सूरत जाने के लिए कहा तो वह कहने लगा, ‘‘मैं सूरत जा तो सकता हूं, पर तुम यहां घर पर अकेले कैसे रहोगी? बूढ़े मांबाप भी हैं.’’

हमीदा बोली, ‘‘तुम हम लोगों की चिंता मत करो. यहां घर की जिम्मेदारी मुझ पर है. तुम केवल परदेस जाओ. जितनी मेहनत तुम यहां करते हो, उतनी मेहनत वहां भी करोगे तो अच्छा पैसा मिल जाएगा जिस से हमारा घरपरिवार सही से रह सकेगा. मांबाप का इलाज भी हो सकेगा.’’

रहमान सूरत चला गया. वहां उस ने मेहनत से कपड़ों की बुनाई का काम किया. मिल का मालिक भी खुश हो गया. उस ने एक साल में ही रहमान की तनख्वाह बढ़ा दी.

रहमान को रहने के लिए मिल में ही जगह दे दी जिस से रहने पर होने वाला खर्च बच गया. इस से रहमान की कमाई में बरकत दिखने लगी. घर वाले भी सही से रहने लगे. मांबाप का इलाज भी शहर के डाक्टरों से होने लगा.

रहमान कहता है, ‘‘यह कमाई उस की नहीं है. इस में पत्नी का भी पूरा सहयोग रहा है. अगर पत्नी ने घरपरिवार की जिम्मेदारी नहीं संभाली होती तो में कमाई करने कभी सूरत नहीं जा पाता.’’

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पत्नी बनी सहयोगी

सुरेश और रहमान दोनों का कहना है कि उन की नजर में पत्नी उन की सहयोगी है. इन दोनों के सहयोग से ही घर की गृहस्थी की गाड़ी सही तरह से चलती है. घर में रह कर कुछ पत्नियां अपने हुनर का इस्तेमाल कर के खुद भी कमाई करती हैं और अपने घर को माली सहयोग करने लगती हैं.

मानिकपुर गांव का इकबाल जब कमाने के लिए दिल्ली चला गया तो उस की पत्नी शोभा ने न केवल घर के काम किए, खेती कराई, बल्कि उस ने ठेके पर कपड़े ले कर साड़ी वगैरह में तार की कढ़ाई करने का काम शुरू कर दिया.

एक साड़ी की कढ़ाई करने में शोभा को 10 दिन का समय लगता था. वह हर रोज 2 घंटे इस काम को करती थी. इस के बदले उस को 500 रुपए मिल जाते थे. इस तरह महीने में 50 से 60 घंटे काम कर के शोभा को 1,500 से 2,000 रुपए के बीच पैसे मिलने लगे.

शोभा ने यह पैसे गांव में बने डाकघर में जमा करने शुरू किए. कुछ ही सालों के अंदर शोभा ने खुद अपनी कमाई से हजारों रुपए जुटा लिए.

बीए करने वाली बिन्नो की शादी टूसरपुर गांव में हुई थी. बिन्नो पढ़नेलिखने में बहुत तेज थी. वह नौकरी करना चाहती थी, पर उस को नौकरी नहीं मिली. उस के गांव में ‘शिक्षा मित्र’ की जगह निकली तो गांव के बड़े लोगों ने उस के बजाय दूसरी औरत को नौकरी पर रखवा दिया.

बिन्नो का पति दीपक भी बेरोजगार था. वह कमाने के लिए दिल्ली चला गया. इधर बिन्नो ने गांव के बच्चों को ट्यूशन पढ़ाने का काम शुरू कर दिया.

शुरुआत में तो गांव के लोगों ने बिन्नो के पास पढ़ने के लिए बच्चे भेजने में आनाकानी की. बिन्नो का घर 2 गांव के बीच था. उस ने दूसरे गांव के बच्चों को पढ़ाना शुरू कर दिया.

बिन्नो इन बच्चों से 20 रुपए महीना फीस लेती थी. दोनों गांव के बच्चे एक ही सरकारी स्कूल में पढ़ते थे. उस स्कूल में जब छमाही इम्तिहान हुए तो वे बच्चे पढ़ाई में आगे निकल गए जिन को बिन्नो ट्यूशन पढ़ाती थी. इस के बाद तो बिन्नो के पास ट्यूशन पढ़ने वाले बच्चों की तादाद काफी बढ़ गई.

इस तरह घर बैठ कर बिन्नो ने पति का काम भी संभाल लिया और ट्यूशन के जरीए पैसा कमा कर माली मदद भी कर दी.

काम आई समझदारी

बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी ने गांव के हालात को बहुत खराब कर दिया है. गांव में रहने वाले बहुत से लोगों के पास खेती करने के लिए जमीन नहीं है.  जिन के पास थोड़ीबहुत जमीन है, उन को भी उस से कोई लाभ नहीं मिलता. उन की सारी कमाई दो जून की रोटी का ही इंतजाम करने में खर्च हो जाती है.

बहुत से लोग गांव में ही रह कर मेहनतमजदूरी करते हैं लेकिन उन को वहां ठीक से पैसा नहीं मिलता है. इसके लिए गांव में रहने वाले तमाम लोग कमाई करने शहरों की ओर जाते हैं. गांव में उन की पत्नी और बच्चे रह जाते हैं.

समझदार पत्नियां गांव में रहते हुए अपना घर भी संभाल लेती हैं और कुछ न कुछ काम कर के पैसा जुटाने की कोशिश में लगी रहती हैं.

गांव की ये महिलाएं सिलाई, बुनाई, कढ़ाई जैसे काम करती हैं. कुछ पढ़ीलिखी औरतें बच्चों को ट्यूशन पढ़ाने का काम भी करती हैं. वहीं दालमोंठ, अचार, पापड़, सेंवई, माचिस, मोमबत्ती, अगरबत्ती जैसे सामान ठेके पर बनाने का काम भी करती हैं जिस से उन की अच्छीखासी कमाई हो जाती है. आसपास के बाजारों में पता करने से इस तरह के कामों का पता चल जाता है.  पत्रपत्रिकाओं के पढ़ने, टैलीविजन और रेडियो के कार्यक्रमों को सुनने से इस तरह की तमाम जानकारियां हासिल हो जाती हैं.

कोशिश यह करें कि लड़कियों को पढ़ाएं जिस से जब वे अपनी गृहस्थी शुरू करें तो कुछ न कुछ काम करने का हुनर उन को पता हो.

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आसान नहीं रास्ते

गांव में अकेली रह रही औरतों के लिए परेशानियां भी कम नहीं हैं. जोठरा गांव की रहने वाली प्रेमा का पति हरखू मुंबई में काम करने चला गया था. प्रेमा गांव में अकेली रहती थी. प्रेमा के साथ उस की बीमार सास भी रहती थी, जिस को दिखाई भी नहीं देता था.

प्रेमा का 2 साल का एक बेटा भी था.  वह जंगल में तेंदूपत्ता तोड़ने और मजदूरी का काम करती थी. जब वह मजदूरी करने जाती थी तो अपने बेटे के पांव में रस्सी बांध देती थी जिस से वह बच्चा पास के बने कुएं तक न जा सके.

प्रेमा कहती है कि वह यह काम मजबूरी में करती है. अगर बच्चा सास के सहारे छोड़ जाए तो उन को दिखाई नहीं देता है. बच्चा दूर जा सकता है.  कभी कोई हादसा हो सकता है. अगर वह बच्चे को ले कर मजदूरी करने जाती है तो वहां भी वह परेशान करता है.

इस तरह की तमाम परेशानियां और भी हैं. गांव में रहने वालों की सब से बड़ी परेशानी यह है कि वह किसी दूसरे की तरक्की को देख कर सहज नहीं रहते. जब कोई औरत आगे बढ़ती है तो उस पर तमाम तरह के लांछन भी लगने लगते हैं.

अकेली औरत के दामन पर दाग लगाना आसान होता है इसलिए गांव के लोग औरतों को बदनाम भी करते हैं. कभीकभी अगर पतिपत्नी समझदारी से काम नहीं करते तो उन के बीच झगड़ा भी हो जाता है इसलिए जब कभी इस तरह की गलतफहमी हो तो समझदारी से काम लें.

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इन्तकाम : भाग 3

संजीव के घर के दरवाजे पर पहुंच कर निकहत ने धड़कते दिल से कौलबेल पर उंगली रखी. थोड़ी देर में एक नौकर ने दरवाजा खोला.

‘जी… मेमसाहब…?’ उसने निकहत को प्रश्नात्मक दृष्टि से देखा.

‘मुझे संजीव से मिलना है….’ निकहत ने जवाब दिया.

‘जी, वो तो अपनी नयी वाली कोठी में हैं…’ नौकर ने कहा.

‘नयी वाली कोठी में…?’  निकहत  ने आश्चर्य से पूछा, ‘क्या तुम वहां का पता बता सकते हो…?’

‘जी हां… तिलक रोड पर तीसरे नम्बर की सफेद रंग की कोठी है…’ वह बोला.

‘ठीक है…’ संक्षिप्त सा उत्तर देकर वह पलट पड़ी.

टैक्सीवाले को उसने तिलक रोड चलने के लिए कहा. तिलक रोड  पर स्थित तीसरे नम्बर की कोठी बहुत शानदार थी. गेट पर खड़े गार्ड ने जब निकहत को गेट की तरफ आते देखा तो सावधान की मुद्रा में खड़ा हो गया.

‘किससे मिलना है मेमसाहब…?’ उसने पूछा.

‘क्या संजीव यहीं रहते हैं…?’ निकहत ने हिचकिचाते हुए पूछा.

‘जी हां… संजीव साहब का ही बंगला है…’ उसने गर्दन अकड़ाकर जवाब दिया.

‘मुझे उनसे मिलना है…’ निकहत ने कहा.

‘आप अपना विजिटिंग कार्ड दे दीजिए… मैं अन्दर पहुंचाये देता हूं….’

‘नहीं, कार्ड तो नहीं है… तुम उनको बता दो कि निकहत मिलना चाहती है… वह समझ जाएंगे….’ निकहत ने गार्ड से कहा.

‘जी, आप यहीं ठहरें, मैं अन्दर पूछता हूं…’ कह कर गार्ड अन्दर की तरफ चला गया.

निकहत बेचैनी से गेट के पास ही इधर-उधर टहलने लगी. उसके ऊपर हर लम्हा जैसे भारी होता जा रहा था. आंखों में बार-बार आंसू उमड़ रहे थे. जो कुछ हो चुका था उस पर विश्वास कर पाना उसके लिए असम्भव हो रहा था.

‘काश कि यह मेरा संजीव न हो…’ वह अपने मन को फरेब देने लगी. चंद मिनटों बाद उसने दूर से गार्ड को अपनी तरफ आते देखा.

‘आइये, साहब ने ड्राइंगरूम में बैठने को बोला है…’ वह गेट खोलकर निकहत को साथ लिए अन्दर की ओर चल दिया.

निकहत बोझिल कदमों से अन्दर की ओर बढ़ रही थी. विशाल ड्रॉइंगरूम में प्रवेश करते हुए उसका दिल बुरी तरह धड़क रहा था. ड्रॉइंगरूम खाली था. कमरे का जायजा लेते हुए उसकी नजरें दीवार पर टंग गयीं, जहां संजीव और उसकी पत्नी की शादी की बड़ी सी तस्वीर एक सुन्दर से फ्रेम में जड़ी टंगी हुई थी. उसकी नजरें उस तस्वीर पर चिपक कर रह गयीं.

‘यस…?’ अचानक एक जानी-पहचानी आवाज ने उसे चौंका दिया. वह झटके से पलटी. सामने संजीव एक कीमती रेशमी गाउन पहने खड़ा था. संजीव… उसका अपना संजीव…

निकहत उसे एकटक देखती रह गयी. मुंह से कोई बोल नहीं फूटा. और दिल… उसने तो जैसे धड़कना ही बन्द कर दिया.

‘कहिए… मैं आपके लिए क्या कर सकता हूं…?’ खामोशी तोड़ते हुए संजीव ने पूछा.

‘संजीव… मैं निकहत हूं…’ वह उसके अजनबीपन से घबरा उठी.

‘जानता हूं… कैसे आना हुआ…?’ संजीव ने मेज पर झुक कर हाथ में पकड़ी सिगरेट ऐश-ट्रे में बुझाते हुए पूछा. बेरुखी की स्पष्ट झलक उसके चेहरे पर प्रकट हो रही थी.

निकहत सकते की हालत में थी. उसको संजीव से ऐसे व्यवहार की कतई कोई उम्मीद नहीं थी.

‘संजीव… क्या तुमने… शादी…?’ उसने हकलाते हुए संजीव से पूछना चाहा.

‘देखो निकहत… अब तुम यहां तक आ पहुंची हो तो तुम्हें यह बात भी अच्छी तरह पता होगी…’ वह बड़ी ढिठाई से बोला.

‘तो क्या… जो कुछ तुमने मेरे साथ किया वह सिर्फ… सिर्फ एक खेल था…?’ निकहत की सांसें लौटने लगीं.

‘देखो निकहत… प्यार और शादी में बड़ा फर्क होता है… शादी के मामले में परिवार, बिरादरी और स्टेटस हर बात का ख्याल करना पड़ता है.’ वह समझाने के अंदाज में बोला.

‘तुमने प्यार करते वक्त इन बातों को क्यों नहीं सोचा था संजीव…? तुम मुझसे झूठ बोल कर गये… तुमने मुझे धोखे में रखा…?’ निकहत उखड़ने लगी.

‘देखो… अब जो हुआ उसे खत्म करो. हमारी तुम्हारी शादी किसी कीमत पर नहीं हो सकती थी निकहत. मैं अपने परिवार वालों की मर्जी के बाहर नहीं जा सकता था. शादी-ब्याह हमेशा बराबर वालों में ही होता है… रही बात प्यार की… तो मैं उसकी कीमत चुकाने को तैयार हूं… तुम्हें जितनी भी आर्थिक मदद की जरूरत हो, मुझसे कह सकती हो…’ संजीव सौदा करने लगा.

‘संजीव….?’ निकहत की चीख कमरे में गूंज गयी.

‘निकहत, चिल्लाने की जरूरत नहीं है. यदि मैंने कुछ समय के लिए तुम्हारे प्यार से अपना दिल बहलाया था, तो मैं उसकी पूरी कीमत चुकाने को तैयार हूं…’ संजीव सोफे पर फैल गया.

‘मुझे नहीं मालूम था संजीव कि दौलत का नशा आदमी को इतना नीचे गिरा सकता है…’ उसकी आंखें भर आयीं, ‘अगर प्यार तुम्हारे लिए सिर्फ दिल बहलाने की चीज है तो आज के बाद इस बात को मैं हमेशा याद रखूंगी…’ आंखों में भरे हुए मोती उसके गालों पर लुढक आये थे. ज्यादा कुछ कहने के लिए उसके पास शब्द न बचे. उसने तेजी से आंसू पोछे और दरवाजे की ओर बढ़ गयी. उसकी चाल में तेजी आ गयी थी. लगभग भागते हुए उसने संजीव की कोठी का गेज पार किया.

‘चलो बला टली…’ संजीव ने राहत की ठंडी सांस ली. उसे उम्मीद नहीं भी कि मामला इतनी आसानी से निपट जाएगा. निकहत की जगह कोई और लड़की होती तो शायद चीख-चीख कर आसमान सिर पर उठा लेती, पुलिस में जाने की धमकी देती, मगर ये तो… बस थोड़े से आंसू बहा कर ही चली गयी… ये तो अच्छा हुआ कि इस वक्त मोनिका घर पर नहीं थी, क्लब गयी हुई थी… वरना स्थिति संभालनी मुश्किल हो जाती… खैर, चलो खामोशी से मामला खत्म हो गया. संजीव को इस बात का जरा भी आभास नहीं था कि यह सन्नाटा उसकी जिन्दगी में आने वाले बड़े तूफान से पहले का सन्नाटा था. उसने जेब से नयी सिगरेट निकाल कर सुलगायी और आराम से सोफे पर पैर फैला लिये.

शाम घिरने लगी थी. मोनिका अभी तक घर नहीं लौटी थी. वैसे भी वह अक्सर रात देर से ही घर लौटती थी. कभी क्लब, कभी पार्टी, तो कभी किसी दोस्त के घर पर डिनर, उसके लिए रोजमर्रा की बात थी. अक्सर संजीव उसके साथ होता था, मगर पार्टी इत्यादि में जब वह संजीव को छोड़कर बेतकल्लुफी से अपने दोस्तों की बाहों में लिपटी डांस फ्लोर पर थिरक रही होती, तो संजीव को बड़ा बुरा लगता था. शुरू-शुरू में उसने दबी जुबान में उसे टोका भी, मगर मोनिका ने सबके सामने उस पर बैकवर्ड और स्टूपिड जैसे शब्द न्योछावर कर दिये, तो वह चुप लगा गया. इतनी कीमती बीवी को वह किसी कीमत पर नाराज नहीं कर सकता था. धीरे-धीरे वह क्लब और देर रात पार्टियों से कटने लगा था. कभी सिर दर्द, कभी थकान का बहाना करके वह घर पर ही रुक जाता था. आया तो वह भी एक मध्यमवर्गीय परिवार से था. ऊंची सोसायटी में रचने-बसने और उनके तौर-तरीके सीखने में वक्त तो लगेगा ही. ऐसा सोचकर मोनिका भी उस पर क्लब या पार्टी में चलने के लिए ज्यादा जोर नहीं देती थी. संजीव के बगैर वह भी पार्टी में खुल कर इन्जौय करती थी, वरना संजीव के साथ होने पर तो वह उसकी नजरों में खुद को बंधा-बंधा सा महसूस करती थी और संजीव भी पूरे वक्त बेचैन रहता था.

तलाक के बाद ऋतिक रोशन और सुजैन खान के बीच ऐसे हैं रिश्ते

बौलीवुड एक्टर ऋतिक रोशन और सुजैन खान का भले ही तलाक हो चुका है लेकिन अब भी दोनों के बीच दोस्ती का रिश्ता कायम है. अलग होने के बाद भी दोनों अक्सर साथ में नजर आते हैं. कई बार वे वेकेशन पर या कभी डिनर पर नजर आते रहते हैं.

बकायदा ये दोनो एक-दूसरे की जमकर तारीफ भी करते हैं. आपको बता दें, हाल ही में ऋतिक रोशन ने सुजैन को लेकर कहा है. उन्होंने कहा कि सुजैन अब भी उनके लिए खास हैं.

मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक ऋतिक ने कहा, मैंने सुजैन के साथ बहुत खास समय बिताया है. सुजैन पहले भी मेरी जिंदगी का बहुत बड़ा हिस्सा थी और आज भी वो मेरी जिंदगी में बहुत मायने रखती हैं. काफी अच्छा लगता है जब लोग मुझसे बोलते हैं कि हमारा रिश्ता उन्हें इंन्सपायर करता है. ज्यादातर कपल्स के साथ ऐसा होता की तलाक लेने के बाद वो एक दूसरे के लिए अच्छे नहीं रहते. उनके बीच एक अच्छा रिश्ता नहीं बचता, लेकिन ऐसा नहीं होना चाहिए.

बता दें ऋतिक की फिल्म ‘वार’ जल्द ही रिलीज होने वाली है. इस फिल्म में टाइगर श्रौफ उनके साथ लीड रोल में नजर आएंगे. फिल्म का ट्रेलर भी रिलीज  हो चुका है जो काफी दमदार है. इस फिल्म का ट्रेलर रिलीज होने के बाद सुजैन ने ऋतिक की तारीफ भी की थी.

जानें क्यों अपने हसबैंड के साथ काम नहीं कर रही हैं विद्या बालन    

बौलीवुड एक्ट्रेस विद्या बालन ने शादी के बाद भी अपना फिल्मी करियर जारी रखा हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं, अब तक विधा बालन ने अपने पति प्रोड्यूसर सिद्धार्थ रौय कपूर के साथ काम नहीं किया है. जब कि दोनों की शादी को सात साल हो चुके हैं. लेकिन विद्या ने अभी तक किसी ऐसी फिल्म में काम नहीं किया है जिसे सिद्धार्थ रौय कपूर ने प्रोड्यूस किया हो.

दरअसल हाल ही में विद्या ने मीडिया से बात करते हुए अपने पति के साथ काम ना करने के बारे में बात करते हुए कहा कि मेरी डायरेक्टर्स और प्रोड्यूसर्स के साथ बहस हो जाती है. मैं लड़ती नहीं हूं बल्कि बहस के साथ ही सही निष्कर्ष पर पहुंचने की कोशिश करती हूं. लेकिन मैं ऐसा सिद्धार्थ के साथ नहीं कर सकती हूं क्योंकि वे काफी पर्सनल हैं और उनके साथ मेरी लड़ाई होने के चांस बढ़ जाएंगे.

विद्या ने ये भी बताया कि ऐसा भी हुआ है जब दोनों को ही कोई स्क्रिप्ट अच्छी लगी है लेकिन इसके बावजूद दोनों ने साथ काम करने की बात को स्वीकार नहीं किया है. क्योंकि वे पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ को अलग रखना पसंद करते हैं.

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विधा ने बताया कि मैं सिद्धार्थ के साथ पैसों के लेन-देन की बात नहीं कर पाती हूं. अगर वो मुझसे कहें कि तुम्हें इस फिल्म के लिए इतनी फीस मिलती है और मैं कहती हूं कि नहीं मुझे इसके लिए दस गुना ज्यादा मिलना चाहिए. मैं उन्हें कहूंगी कि क्या तुम मुझे कम आंक रहे हो ? मैं उस तरह की फीलिंग्स के बारे में सोचना नहीं चाहती हूं.

विद्या और सिद्धार्थ ने साल 2012 में साउथ इंडियन  और पंजाबी और रीति-रिवाजों के अनुसार शादी की थी. हाल ही में विद्या फिल्म मिशन मंगल में नजर आई थीं. इस फिल्म ने बौक्स औफिस पर लगभग 200 करोड़ से अधिक कमाई कर ली है.

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‘नेशनल स्पोर्ट्स डे’ पर तापसी पन्नू और भूमि पेडनेकर ने कही ये बात

यूं तो भारत में क्रिकेट, कुश्ती, बैडमिंटन, कबड्डी सहित कई खेलों में हर दिन प्रतिभाएं उभरकर आ रही हैं. मगर मेरठ के एक गांव में तो लोग शार्प शूटर ही बनने में ज्यादा रूचि रखते हैं. इसकी मुख्य वजह यह है कि इस गांव की साठ की उम्र पार कर चुकी दो महिलाओं चंद्रो तोमर और प्रकाशी तोमर ने अपने तेज शूटिंग स्किल से देश को गौरवान्वित किया है. 60 साल की उम्र पार करने बाद सबसे उम्रदराज ‘शार्प शूटर‘  का खिताब अपने नाम किया है.

इन्हीं दो बहादुर महिलाओं के जीवन से प्रेरित फिल्म ‘‘सांड़ की आंख’’ दर्शकों के बीच रिलीज होने के लिए तैयार है, जो कि शार्प शूटर्स पर बनी पहली फिल्म है. इसमें तापसी पन्नू और भूमि पेडनेकर दमदार किरदार में नजर आएंगी.

नेशनल स्पोर्ट्स डे पर,‘‘सांड की आंख‘’ की दोनों नायिकाओं ने इस फिल्म से जुड़े अपने अनुभवो की चर्चा करते हुए अपने विचार व्यक्त किए.

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प्रकाशी तोमर की भूमिका निभाने वाली तापसी पन्नू कहती हैं, “एक ऐसी महिला की भूमिका निभाना जिसने सभी बाधाओं के बाद भी बंदूक उठाई और उस उम्र में गौरव और सफलता की राह पर निशाना साधा, बहुत ही प्रेरित करने वाला था.फिल्म की शूटिंग के दौरान,  मैं उनके घर में उनके साथ रहती थी. मैंने देखा कि कैसे वे दोनों शार्प शूटिंग के खेल को प्रोत्साहित करते हैं. एक ग्रामीण स्थान से आने के बावजूद, इन दो महिलाओं ने मुझे दिखाया है कि बात जब खेल की हो तो भारतीय महिलाएं मजबूत इच्छाशक्ति और अपने सपने के लिए लड़ने में, दुनिया में किसी से कम नहीं हैं.”

भूमि पेडनेकर के लिए यह फिल्म एक इमोशनल और सीखने की यात्रा रही. वह कहती हैं-‘‘ शार्प शूटिंग एक बहुत ही दिलचस्प खेल है और चंद्रो तोमर की भूमिका निभाते हुए मुझे खेल के बारे में बहुत कुछ सीखने को मिला. मैंने मेरठ के उस गांव में रहने वाले बहुत सारे लोगों के साथ बातचीत की और यह जाना कि सभी लोग शार्प शूटिंग को लेकर कितने पैशनेट है. वह इस खेल में माहिर होने के लिए जो मेहनत करते हैं, उसे देखकर मेरे रोंगटे खड़े हो जाते हैं. इस खेल के लिए उत्साह बढ़ रहा है और मुझे उम्मीद है कि इसके लिए और अधिक खिलाड़ी सामने आएंगे.‘‘

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फिल्म के निर्देशक तुषार हीरानंदानी के निर्देशन में बनी इस फिल्म में प्रकाश झा और विनीत कुमार भी हैं.

गर्भावस्था में डायबिटीज को न करें अनदेखा

गर्भावस्था हर महिला को  वो  खुशी  देती  है. जिसके  सामने  दुनिया  की  हर एक  धन-दौलत फीकी नजर आती है. क्योंकि वो इस दौरान एक नहीं दो जिंदगियां जी रही होती हैं, एक खुद की और एक अपने अंदर पल रहे  बच्चे की. ऐसे में उसे दोनों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है.

इस समय महिलाओं में कई तरह के बदलाव  देखे जाते हैं. इस दौरान कई बार महिलाओं का शुगर लेवल भी काफी बढ़ जाता है. इस स्थिति को गर्भावधि मधुमेह (जेस्टेशनल डायबिटीज) कहा जाता है.

गर्भावधि मधुमेह (जेस्टेशनल डायबिटीज )

गर्भवती  महिलाओं का शुगर लेवल कभी कभी बढ़ जाता हैं.ऐसा तब होता है, जब आपका शरीर पर्याप्त मात्रा में इंसुलिन नामक हार्मोन पैदा नहीं कर रहा होता है.यह उन महिलाओं को भी हो सकता है जिन्हें  पहले से शुगर नहीं है.

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लक्षण –

जिन महिलाओं को अपने अंदर ये बदलाव नजर आए  तो उसे अनदेखा न करें:

बहुत जल्दी थक जाना, बार-बार प्यास लगना, जल्दी-जल्दी पेशाब जाने की जरूरत होना, जी-मिचलाना, धुंधला दिखाई देना, मूत्राशय, योनि और त्वचा के लगातार संक्रमण होना.

कारण

इन्सुलिन वह  हार्मोन है जो शरीर मे ग्लूकोस व भोजन को ऊर्जा मे बदलता है. गर्भवस्था के दौरान  कई हार्मोन्स के स्तर मे बढ़ोतरी होती है. जिससे वजन बढ़ने जैसे बदलाव सामने आते हैं. इससे शरीर में ब्लड शुगर बढ़ जाता है .और शरीर को ज्यादा इन्सुलिन की जरूरत होती है. किसी किसी को इस परेशानी का सामना गर्भवस्था के शुरू में ही करना पड़ता है तो किसी को आखरी महीनों में. डौक्टर गर्भावस्था के 24वें सप्ताह से 28वें सप्ताह के बीच में गर्भावधि मधुमेह की जांच जरूर करवाने की सलाह देते हैं.

हो सकतीं  हैं ये परेशानियां –

अगर किसी गर्भवती महिला को मधुमेह हैं तो उसके गर्भ मे पल रहे बच्चे का आकर समान्य से ज्यादा हो सकता हैं, समय से पूर्व डिलीवरी का खतरा होना, बच्चे को पीलिया होना, इलाज न करने पर  बच्चा मृत भी पैदा हो सकता है, बच्चे और महिला दोनों को टाइप-2 डायबिटीज का खतरा हो सकता है.

किनको  है गर्भावधि मधुमेह होने का खतरा 

  • 25 साल से अधिक उम्र की महिलाओं को.
  • परिवार में किसी और को मधुमेह है तो.
  • अगर पहले से ही पीड़ित है इस रोग से तो खतरा बढ़ सकता है.
  • अगर गर्भवती महिला का वज़न सामान्य से ज्यादा है.

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उपचार

  • सही जीवनशैली और स्वस्थ खानपान है बेहद जरूरी.
  • सामान्य मधुमेह में दी जाने वालीं कई दवाइयां गर्भावस्था में लेनी सुरक्षित नहीं.
  • डौक्टर की सलाह पर  इंसुलिन के इंजेक्शन लें.
  • व्यायाम अवश्य करें.
  • वजन नियंत्रित रखें.

क्या खाएं

अनाज जिनमें भरपूर मात्रा में फाइबर हो, जैसे साबुत अनाज खाना चाहिए, हरी सब्जियों व फल खाये, दूध व योगर्ट खाना होगा अच्छा,मछली, अंडे, मीट, टोफू व नट्स खाएं, थोड़ा-थोड़ा करके तीन बार खाना खाएं और दो बार स्नैक्स लें.गर्भावधि मधुमेह में कार्बोहाइड्रेट लेना ज़रूरी होता  है.

क्या न खाएं

तेज मीठा न खाएं,कोल्ड ड्रिंक, कैंडी व टौफी से परहेज़ करें,फास्ट फूड बिल्कुल न खाएं,बेक की गई चीजें जैसे केक व मफिंस न खाएं, जैम और शहद से बनाए दूरी.

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ट्रैवल टिप्स: अपनी यात्रा को बनाएं यादगार

अगर आप कहीं घूमने जाने का प्लान बना रहे हैं तो आज आपको कुछ टिप्स बताते हैं. इन्हें अपनाकर अपने यात्रा को यादगार और आसान बना सकते हैं.  तो आईए जानते हैं आप यात्रा पर जाने के लिए कैसे तैयारी करें.

ऐसे करें तैयारी

अपने डैस्टिनेशन को ध्यान में रखते हुए तैयारी करें. वहां कैसा मौसम है, उसी हिसाब से कपड़े पैक करें. ध्यान रहे कपड़े अधिक न हों. अगर ज्यादा दिन के लिए सैरसपाटे पर जा रहे हैं, तो ज्यादा कपड़े रखने से अच्छा होगा साबुन की टिकिया साथ रखें ताकि कपड़े वहीं धोसुखा कर पहन सकें. ज्यादा वजन सैरसपाटे में बाधक बनता है.

अपने बैग में रोजमर्रा का सामान अवश्य रखें ताकि आप को वहां परेशान न होना पड़े.

– अपने साथ कुछ किताबें व एक डायरी अवश्य रखें. किताबें इसलिए कि स्टूडैंट लगें व डायरी इसलिए कि हर जगह जाने पर वहां की जानकारी नोट कर सकें. इस से कहीं भी मदद मिलने में आसानी रहती है.

– अपना बस या ट्रेन का टिकट पहले ही संभाल कर रख लें और उसे बैग में ऐसी जगह रखें ताकि निकाल कर दिखाने में आसानी रहे. अपना स्कूलकालेज का आईकार्ड या फिर आधार कार्ड भी पहचान के लिए साथ अवश्य रखें.

– यदि आप के पास कैमरा है तो साथ रखें या फिर स्मार्टफोन है तो उसे भी बतौर कैमरा इस्तेमाल कर सकते हैं. साथ ही स्मार्टफोन या डिजिटल कैमरे का चार्जर रखना न भूलें. यदि आप के पास स्मार्टफोन या कैमरा नहीं है तो अपने किसी परिचित से अरेंज कर साथ ले जाएं ताकि सैरसपाटे का हर पल यादगार बना सकें. बाद में कैमरा व स्मार्टफोन लौटाते समय फोटो कंप्यूटर में डाउनलोड करना न भूलें.

–  अपने बैग में मोटी चादर अवश्य रखें ताकि कहीं भी आराम करने के लिए बिछा कर बैठ सकें.

–  आप जहां जा रहे हैं वहां की विस्तृत जानकारी, दर्शनीय स्थल, ऐतिहासिक स्थल आदि नैट पर सर्च कर लें. साथ ही यह जानकारी भी रखें कि कम से कम खर्च में कैसे

इन जगहों पर जा कर सैरसपाटे का आनंद ले सकते हैं. मसलन, लोकल बस, ट्रेन आदि की जानकारी, किराया व अन्य सुविधाएं.

– अगर कोई दवा लेते हैं या जिस की आप को जरूरत पड़ती है उसे साथ रखें. अगर सफर में उलटी आना या जी मिचलाना जैसी समस्याएं आप के साथ होती हैं तो चटपटी गोली साथ रखें.

हिल डैस्टिनेशन पर जाना हो तो

–  सैरसपाटे के लिए यदि आप पहाड़ी इलाके में जा रहे हैं तो वहां के मौसम के अनुसार कपड़े ले जाएं. ध्यान रहे, पहाड़ी इलाकों पर जाते समय एकाध गरम कपड़ा जैसे स्वैटरजैकेट अवश्य ले जाएं, क्योंकि वहां गरमी के मौसम में भी कभीकभी रातें अधिक ठंडी होती हैं.

–  अगर आप के पास बरसाती है तो उसे साथ रखें, क्योंकि पहाड़ी इलाकों में कभी भी अचानक बरसात हो सकती है. ऐसे में बरसाती आप के काम आएगी. वैसे ऐसी चीजें इन स्थानों पर किराए पर भी मिल जाती हैं पर उस से आप का बजट बिगड़ेगा.

– ऐसे इलाकों में सैरसपाटे पर जाते समय सामान की पैकिंग पहले पन्नी के अंदर करें और बाद में बैग में रखें. इस से सामान सुरक्षित रहेगा व बरसात में गीला भी नहीं होगा साथ ही नमी से भी बचेगा.

– इन इलाकों में जाते समय यदि खाने में ड्राइफू्रट्स साथ रख सकें तो अच्छा रहेगा. सूखे मेवे ठंड में गरमी का एहसास कराते हैं.

–  पहाड़ी इलाकों में सैरसपाटे पर जाते समय फ्लैट जूते पहनें. स्पोर्ट्स शूज यहां के लिए सब से उपयोगी रहते हैं.

समुद्री इलाकों में जाएं तो

–  अगर आप सैरसपाटे के लिए समुद्री इलाकों की तरफ जा रहे हैं तो कपड़ों में लड़के निकर, टीशर्ट भी रखें. लड़कियां अपनी सुविधानुसार स्विमिंग सूट, निकर, शौर्ट्स आदि रख सकती हैं. साथ में तौलिया व अपने अंत:वस्त्रों का सैट भी अवश्य रखें.

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–  बीच पर जाएं तो अपने साथ कम से कम सामान ले जाएं. फ्लैट चप्पल या फ्लिपफ्लौप ऐसे इलाकों के लिए ज्यादा कंफर्टेबल रहते हैं.

–  समुद्र का पानी खारा होने के कारण पीने लायक नहीं होता इसलिए वहां मिनरल वाटर साथ ले जाएं. भूखे न रहें. नमकीनबिस्कुट आदि खाते रहें व पानी की कमी भी न होने दें.

–  बीच पर नहाते समय समुद्र में ज्यादा आगे न जाएं. लहरों से खेलना खतरनाक हो सकता है. सैल्फी लेते समय भी इस बात का ध्यान रखें.

गरम प्रदेशों में जा रहे हैं तो

–  अगर आप गरम मैदानी इलाकों में सैरसपाटे पर जा रहे हैं तो पैकिंग में टोपी और धूप का चश्मा रखना न भूलें. टोपी जहां सिर को तेज धूप से बचाएगी, वहीं चश्मा आंखों को सेफ रखेगा.

–  ऐसे इलाकों में सैरसपाटे के लिए शाम के समय जाएं तो अच्छा रहेगा. दिन में किसी ठंडी जगह पर आराम करें.

–  अगर संगीत प्रेमी हैं तो अपने साथ कोई हलका वाद्ययंत्र जैसे गिटार आदि रख सकते हैं. इस से सैरसपाटे में आप का मजा और भी बढ़ जाएगा.

–  अगर आप गरमी सहन नहीं कर पाते या नकसीर आने की समस्या है तो उस की दवा साथ रखें.

कुछ सामान्य बातें

–   जिस भी स्थान पर जाएं, वहां फोटोग्राफ अवश्य लें. उस जगह पर लगे निर्देशों का पालन भी अवश्य करें.

–   सैल्फी लेते समय सजग रहें और खतरनाक अंदाज न अपनाएं जैसे पहाड़ी पर या समुद्र में काफी आगे जा कर, बसट्रेन में लटक कर या छत पर चढ़ कर सैल्फी लेना जीवन के साथ खिलवाड़ है.

–  प्राकृतिक नजारों का लुत्फ उठाना न भूलें. आप वहां की लोकल संस्कृति से रूबरू हो जानकारी हासिल कर सकते हैं.

–  सस्ता कमरा, धर्मशाला आदि आप के रहने का खर्च कम करेंगे. अगर वहां किसी दोस्त का घर है तो उस के साथ प्रोग्राम बनाएं.

–    पहाड़ी नदियों में बिना सोचेसमझे न उतरें. इन की गहराई का अंदाजा नहीं लगता.

–   अठखेलियों से हर जगह बचें. अपने सामान का स्वयं ध्यान रखें.

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–   ऐतिहासिक स्थानों पर घूमने जाते समय ध्यान रखें कि इमारतों की दीवारों आदि पर नाम न लिखें, जिस तख्ती पर उस स्थान का ब्योरा लिखा रहता है उस का फोटो अवश्य लें. यह बाद में ज्ञान बढ़ाने के काम आएगा.

ब्रेकफास्ट में बनाएं इडली चाट

अगर आपको इडली खाना पसंद हैं तो आप इडली की एक नई डिश बना सकते हैं. तो चलिए आपको बेहद ही टेस्टी व करारी इडली चाट के बारें में बताते हैं. जो आपको काफी पसंद आएगी.

सामग्री

40 मिनी इडली

20 पापड़ी

50 ग्राम उबला हुआ काबुली चना

75 ग्राम कटा हुआ पनीर

50 ग्राम कतरा हुआ आलू

4 टेबल स्पून मिंट या पुदीने की चटनी

4 टेबल स्पून सोठ पाउडर

20 टेबल स्पून मीठा दही

सजाने के लिए कतरी हुई मिर्च और हरी धनिया

स्वादानुसार नमक

1 टी स्पून लाल मिर्च पाउडर

जरूरत के अनुसार तेल

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बनाने की विधि

इडली, पनीर और आलू को अलग-अलग तल लें.

अब काबुली चने, हरी मिर्च, धनिया, नमक और लाल मिर्च पाउडर एक बाउल में डालें.

इसमें पापड़ी को तोड़कर डालें. फिर हलके से सभी सामग्री एकसाथ मिलाएं.

अब पुदीने की चटनी और सोंठ डालकर अच्छी तरह मिलाएं.

अब एक अन्य बाउल में इस मिश्रण को व्यवस्थित करें. फिर बाउल के किनारे पर दही डाले और हरी धनिया से सजाकर सर्व करें.

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क्या आप जानते हैं, बालों में तेल कब और कैसे लगाना चाहिए?

बालों को हेल्दी रखने के लिए तेल मालिश करना बहुत जरूरी है. हालांकि इस भागदौड़ भरी जिंदगी में अक्सर लोग बालों में तेल नहीं लगा पाते. लेकिन ऐसा करना बालों को नुकसान पहुंचा सकता है इसलिए बालों में तेल जरूर लगाएं.

आपको बता दें कि बालों में तेल लगाने का भी सही और गलत तरीका होता है. इसके अलावा अगर सही समय पर बालों में तेल लगाया जाए तो यह न सिर्फ बाल बल्कि स्किन को भी फायदा पहुंचाता है.

जानें तेल कब और कैसे लगाना चाहिए

रात को सोने से पहले सिर में तेल लगाएं और अगली सुबह धो लें. इससे न सिर्फ स्कैल्प बल्कि बालों को भी पूरा नरिशमेंट व माइस्चर मिलेगा. साथ ही में यह फेस के लिए भी अच्छा होता है. माना जाता है कि रात में तेल लगाकर सोने से स्किन पर रिंकल्स की समस्या भी दूर रहती है.

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कैसे लगाएं

बालों में लगाने वाले तेल को एक कटोरी में निकाल लें. इसमें उंगलियों के पोरों को डुबाएं और तेल को बालों की जड़ों में लगाते हुए मसाज करें. ध्यान रहे कि आप ज्यादा प्रेशर न लगाएं नहीं तो बाल टूट सकते हैं. मसाज के बाद हाथ पर कुछ बूंद तेल लें और बालों की लेंथ पर लगाएं.

बालों पर ज्यादा तेल न लगाएं नहीं तो वाश करने के दौरान आपको ज्यादा शैंपू का इस्तेमाल करना पड़ेगा, जिससे हेयर को नुकसान होगा. साथ ही में तेल को सिर में 24 घंटे से ज्यादा लगा न छोड़े, यह भी स्कैल्प के लिए अच्छा नहीं है.

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