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ये है दुनिया की सबसे रहस्यमयी किताब

दुनिया में ऐसी कई चीजें हैं, जो  रहस्यों से भरी पड़ी है. लेकिन ऐसी कई सारे रहस्य है, जो आज तक नहीं सुलझ पाया है. और ये अब तक रहस्य ही बने हुए है. तो आइए आज आपको एक रहस्यमयी किताब के बारे में बताते हैं.इस किताब के रहस्य को अब तक कोई नहीं सुलझा पाया है.

दरअसल इस किताब में  240 पन्ने हैं और इसे कोई नहीं पढ़ पाया है. कई इतिहासकारों का मानना है कि यह  किताब 600 साल पुरानी है. वैसे इस किताब के बारे में कार्बन डेटिंग से पता चला है कि इसे 15वीं सदी में लिखा गया. जो हाथ से  लिखी गई है, लेकिन इस किताब में क्या लिखा गया है. इसके बारे में कोई नहीं जान पाया. यही नहीं ये किताब किस भाषा में लिखी गई है इसके बारे में भी आजतक पता नहीं चल सका.

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इस किताब के रहस्यों को आजतक कोई नहीं सुलझा पाया, अब इस किताब को वायनिक मैनुस्क्रिप्ट नाम दिया गया है. बता दें कि इस किताब में इंसानों से लेकर पेड़-पौधों तक के कई चित्र बनाए गए हैं, लेकिन इसमें सबसे हैरानी की बात ये है कि इस किताब में कुछ ऐसे पेड़-पौधों के चित्र बनाए गए हैं, जो धरती पर मौजूद किसी भी पेड़-पौधे से मेल नहीं खाते.

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इस किताब को ‘वायनिक मैनुस्क्रिप्ट’ नाम इटली के एक बुक डीलर विलफ्रीड वायनिक के नाम पर दिया गया है. बता दें कि उन्होंने ही इस रहस्यमयी किताब को साल 1912 में कहीं से खरीदा था. बताया जाता है कि इस रहस्यमयी किताब में कई पन्ने हुआ करते थे, लेकिन समय के साथ इसके कई पन्ने कट-पट गए. हालांकि अभी भी इस किताब में 240 पन्ने शेष बचे हैं. इस किताब के बारे में कुछ खास तो पता नहीं चल पाया है, लेकिन इतना जरूर पता चला है कि किताब में लिखे गए कुछ शब्द लैटिन और जर्मन भाषा के हैं.

वहीं कई लोगों का ये भी मानना है कि इस किताब को इस तरह लिखा गया है कि इसके रहस्य को छिपाया जा सके. लेकिन इस किताब के रहस्य को कोई नही जान पाया और इसका रहस्य किताब लिखने वाले के साथ ही समाप्त हो गया.

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जानें, क्या है यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन 

यह इन्फेक्शन बेहद आम है. यह पुरुषों और महिलाओं दोनों को हो सकता है लेकिन महिलाओं को इस समस्या से ज्यादा परेशान होना पड़ता है .गंदे शौचालयों या शौचालयों की कमी जैसे कारणों के साथ भारत में लगभग 50 फीसदी महिलाएं यूटीआई से पीड़ित हैं. नौकरी पेशे वाली महिलाओं में हर दूसरी महिला इस रोग की गिरफ्त में  है. यह रोग हालांकि बहुत खतरनाक नहीं है लेकिन अगर समय रहते ध्यान न  दिया जाए तो यह किडनी तक को प्रभावित कर सकता है. कुछ सावधानियां बरतकर यूटीआई से बचा जा सकता है.

 यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन(UTI ) है क्या

यूटीआई आपके ब्लैडर, किडनी और इनकी जोड़ने वाले ट्यूब्स में जर्म्स का इन्फेक्शन हो होता है. अगर आपको ब्लैडर इन्फेक्शन है जो कि बहुत कौमन है तो आपको दर्द, पेशाब के वक्त जलन, बार-बार टौयलट आना, पेट के निचले हिस्से में दर्द और पेशाब से बदबू जैसे समस्याएं हो सकती हैं. ब्लैडर इन्फेक्शन का अगर ठीक से इलाज न हो तो यह किडनी तक पहुंच जाता है.15 से 40 की उम्र के बीच के लोगों में  यह समस्या अधिक पायी जाती है.

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लक्षण

  • UTI संक्रमण, ऊपरी यूरिनरी ट्रैक्ट का संक्रमण, (किडनी और यूरेटर), निचला यूरेनरी ट्रैक्ट संक्रमण (किडनी और मूत्रमार्ग) या दोनों हो सकते हैं .-
  • निचला यूरेनरी ट्रैक्ट संक्रमण मे इन समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है
  • अगर आपको UTI हो तो आप मूत्रत्याग करते समय जलन अनुभव करेंगे.
  • आपको पेट के निचले हिस्से में दर्द भी अनुभव हो सकता है .
  • बार बार पेशाब आना.
  • पेशाब से बदबू आना.
  • ऊपरी यूरिनरी ट्रैक्ट का संक्रमण
  • आप हाई टेम्परेचर  अनुभव कर सकते हैं .
  • मितली और अनियंत्रित कपकपी भी हो सकती है .
  • उल्टियां और दस्त  का होना .

कारण

आजकल वेस्टर्न स्टाइल के टौयलेट ज्यादा होते है  जिससे इस संक्रमण का जोखिम अधिक बढ़ जाता है वहीं  दूषित पानी का सेवन और निर्जलीकरण (डीहाइड्रेशन) और नियंत्रित मधुमेह भीयूटीआई को बुलावा दे सकता है.

पुरुषों में 45 की उम्र के बाद यह परेशानी शुरू होती है और ज्यादा उम्र के पुरुषों को यह बीमारी प्रोस्टेट ग्रंथि के बड़ा होने, मधुमेह, एचआईवी या फिर यूरिनरी ट्रैक्ट में स्टोन होने के कारणहोती है. चूंकि पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में यूरेथ्रा छोटा होता है, इसलिए बैक्टीरिया यूरिनरी ब्लाडर को जल्दी प्रभावित करते हैं.

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कैसे बचें

  • शौच जाने से पहले व बाद में  फ्लश अवश्य करें.
  • यह पुरुषों और महिला  दोनों को हो सकता है इसलिए सुरक्षित यौन संबंध भी इससे बचने का एक तरीका है .
  • टौयलेट आने पर उसे अधिक समय रोके नहीं .
  • गर्मियों में खासतौर पर चुस्त कपड़े नहीं पहने .
  • विटामिन-सी युक्त आहार को अपने भोजन में शामिल करें .
  • पानी का  सेवन ज्यादा करें .
  • अगर घरेलू उपचारों से आप अपने सिस्टम में 24 से 36 घंटे में कोई बड़ा सुधार न देखें तो आप प्रोफेशनल मेडिकल हेल्प ले.

दुष्चक्र : भाग 1

स्कूल छूटने के बाद मैं साथी शिक्षिकाओं के साथ घर लौट रही थी, तभी घर के पास वाले चौराहे पर एक आवाज सुनाई दी, ‘बहनजी, जरा सुनिए तो.’

पहले तो मैं ने आवाज को अनसुना कर दिया यह सोच कर कि शायद किसी और के लिए आवाज हो लेकिन वही आवाज जब मुझे दोबारा सुनाई दी, ‘बहनजी, मैं आप से ही कह रहा हूं, जरा इधर तो आइए,’ तो इस बार मजबूरन मुझे उस दिशा में देखना ही पड़ा.

मैं ने देखा, चौराहे पर स्थित एकमात्र पान की दुकान वाला मुझे ही बुला रहा था. मुझे भी आश्चर्य हुआ कि पान की दुकान पर भला मेरा क्या काम? साथ की शिक्षिकाएं भी मेरी ओर प्रश्नवाचक दृष्टि से देखने लगीं, लेकिन जब मुझे स्वयं ही कुछ पता नहीं था तो मैं भला उन से क्या कहती? अत: उन सब को वहीं छोड़ कर मैं पान की दुकान पर पहुंच गई और दुकानदार से कुछ पूछती उस से पहले उस ने स्वयं ही बोलना शुरू कर दिया :

‘‘बहनजी, आप इस महल्ले में अभी नईनई ही आई हैं न?’’

‘‘जी हां, अभी पिछले महीने ही मैं ने गुप्ताजी का मकान किराए पर लिया है,’’ मैं ने उसे जवाब दे दिया फिर भी दुकानदार द्वारा बुलाने का कारण मेरी समझ में नहीं आया.

‘‘अच्छा, तो मिस्टर श्याम आप के पति हैं?’’ दुकानदार ने आगे पूछा.

‘‘जी हां, लेकिन आप यह सब पूछ क्यों रहे हैं?’’ अब उस दुकानदार पर मुझे खीज होने लगी थी.

‘‘कुछ खास बात नहीं है, मुझे तो आप को सिर्फ यह बताना था कि सुबह  आप के पति दुकान पर आए थे और सिगरेट के 2 पैकेट, 4 जोड़े पान और कोल्डड्रिंक की 1 बड़ी बोतल ले गए थे. उस वक्त शायद उन की जेब में पैसे नहीं थे या फिर वे अपना पर्स घर पर ही भूल गए थे. उन्होेंने आप का परिचय दे कर आप से रुपए ले लेने के लिए कहा था,’’ दुकानदार ने मुझे बुलाने का अपना प्रयोजन स्पष्ट किया.

मैं ने पर्स खोल कर 100 रुपए का एक नोट दुकानदार की ओर बढ़ा दिया. उस ने पैसे काट कर जो पैसे वापस दिए, उन्हें बिना गिने ही मैं ने पर्स में रखा और वहां से चल दी. रास्ते में सोचने लगी कि इस आदमी ने यहां भी उधार लेना शुरू कर दिया. मेरे कानों में दुकानदार के कहे शब्द अब भी गूंज रहे थे :

‘कुछ भी हो आदमी वे बड़े दिलचस्प हैं. बातों का तो जैसे उन के पास खजाना है. बड़े काम की बातें करते हैं. दिमाग भी उन्होंने गजब का पाया है. मेरी दुकान की तो बहुत तारीफ कर रहे थे. साथ ही कुछ सुझाव भी दे गए.’

‘दिमाग की ही तो खा रहा है,’ मन ही मन सोचा और शिक्षिकाओं के समूह से आ मिली.

‘‘क्यों? क्या बात हो गई? क्यों बुलाया था दुकानदार ने?’’ रीना मैडम ने पूछा.

‘‘कुछ नहीं, बस यों ही,’’ कहते हुए मैं ने बात को टाल दिया.

वे भी शायद घर पहुंचने की जल्दी में थीं, इसलिए किसी ने भी बात को आगे नहीं बढ़ाया. सब चुपचाप जल्दीजल्दी अपनेअपने घरों की ओर बढ़ने लगीं.

घर पहुंची तो देखा महाशय ड्राइंगरूम में सोफे पर लेट कर सिगरेट फूंक रहे थे. टेलीविजन चल रहा था और एक फैशन चैनल पर आधुनिक फैशन का ज्ञान लिया जा रहा था.

मुझे देखते ही श्याम बोले, ‘‘अच्छा हुआ यार, तुम आ गईं. मैं भी घर पर बैठेबैठे बोर हो रहा था. टेलीविजन भी कोई कहां तक देखे? फिर इस पर भी तो वही सब घिसेपिटे कार्यक्रम ही आते हैं.’’

जवाब में मैं ने कुछ भी नहीं कहा.

मेरी चुप्पी की ओर बिना कोई ध्यान दिए श्याम बोले, ‘‘सुनो, बहुत जोर की भूख लगी है. मैं सोच ही रहा था कि तुम आ जाओ तो साथ में भोजन करते हैं. अब तुम आ गई हो तो चलो फटाफट भोजन लगाओ, तब तक मैं हाथ धो कर आता हूं.’’

मेरा मन तो हुआ कि पूछ लूं, ‘क्या थाली ले कर खा भी नहीं सकते हो. सुबह स्कूल जाने से पहले ही मैं पूरा भोजन बना कर जाती हूं, क्या भोजन परोस कर खाना भी नहीं होता?’ लेकिन फालतू का विवाद हो जाएगा, यह सोच कर चुप रही.

‘‘क्या सोच रही हो?’’ मुझे चुप देख कर श्याम ने पूछा.

इन्तकाम : भाग 4

अपने घर पहुंच कर निकहत सीधी अपने कमरे में पहुंची. दरवाजा बन्द करते-करते वह फूट-फूट कर रो पड़ी. संजीव से उसे ऐसे धोखे, ऐसी बेरुखी और ऐसी बेशर्मी की उम्मीद नहीं थी. उसको तो यकीन ही नहीं हो रहा था कि यह वही संजीव है, जिसने उससे बेइंतहा मोहब्बत की थी. यह वही संजीव है जो उससे मिलने के लिए हर दिन भागा चला आता था. यह वही संजीव है जिसको इबादत की हद तक उसने चाहा था. कोई ज्यादा वक्त तो नहीं हुआ है. महज तीन महीने में ही वह क्या से क्या हो गया? निकहत की आंखों के सामने से संजीव के संग बिताया वक्त और प्यार का एक-एक पल चलचित्र की तरह घूम रहा था. वह बिस्तर पर पड़ी ज़ार-ज़ार रोये जा रही थी. रात गुजरती जा रही थी और उसके आंसू थमने का नाम ही नहीं ले रहे थे. इतना तो वह अपने अब्बा के मरने पर भी न रोयी थी. आज तो जैसे वह सारी जिन्दगी का रोना रो लेना चाहती हो. चाहती थी कि आज उसके सारे आंसू बह जाएं… हमेशा-हमेशा के लिए खत्म हो जाएं. सारी रात रो लेने के बाद सुबह तक उसका मन काफी हल्का हो गया था. दिमाग कुछ सोचने के काबिल हुआ तो उसने उठकर हाथ-मुंह धोया. कपड़े बदल कर कमरे से बाहर आयी, तो देखा अम्मी लाठी के सहारे खड़ी होकर चूल्हे पर चाय का पानी चढ़ा रही थीं.

‘क्या बात है बेटा…? कल रात तो तूने खाना भी नहीं खाया. मैं तो दरवाजा पीटते-पीटते थक गयी. बड़ी जल्दी सो गयी थी…?’ अम्मी ने उसे रसोई में देखा तो बोलीं.

‘हां अम्मी, तबियत नहीं ठीक थी…’ उसने संक्षिप्त सा जवाब दिया और पतीले में चीनी-पत्ती डालने लगी.

‘बुखार तो नहीं है…? डौक्टर को दिखा ले…’ अम्मी चिन्तित हो गयीं.

‘नहीं अम्मी, अब ठीक है, बस सिरदर्द था…’ वह चाय की पतीली चूल्हे से उतारने लगी.

नाश्ता करके वह सीधी प्रेमभाई के स्टूडियो पहुंची. उसका दिमाग बड़ी तेजी से काम कर रहा था. उसके कानों में रह-रह कर संजीव के शब्द गूंज रहे थे, ‘मैं तुम्हारे प्यार की कीमत चुकाने को तैयार हूं…’

प्रेमभाई ने निकहत को अपने सामने देखा, तो राहत की सांस ली, ‘आओ निकहत… बैठो…’ वह कुर्सी की ओर इशारा करते हुए बोले.

‘प्रेमभाई, मुझे कुछ पैसे चाहिए… आप मेरा पुराना सारा बैलेंस क्लियर कर दीजिए…’ वह बैठते हुए बोली.

‘क्या बात है…? अचानक इतने पैसे की क्या जरूरत आ पड़ी…?’

‘कुछ नहीं… बस अब इस शहर से दिल हट गया है, वैसे भी इस छोटे से शहर में मेरा करियर चौपट हो रहा है… जिंगल्स गा-गाकर मैं थक गयी हूं… मैं अब अपने गीत गाना चाहती हूं….’ उसने मुस्कुराने की असफल चेष्टा की.

‘वो तो ठीक है, मगर तुम जाओगी कहां…? कोई औफर मिला है क्या…?’ प्रेमभाई ने उत्सुकता से पूछा.

‘नहीं, ऐसा कुछ नहीं है प्रेमभाई, दुनिया बहुत बड़ी है, मैं भी कोई दूसरा ठौर ढूंढ लूंगी… आप बस मेरा हिसाब बना दीजिए…’ उसने बात को खत्म करना चाहा.

‘ठीक है, मैं भी तुम्हें नहीं रोकना चाहता, कुछ दिनों के लिए कहीं घूम-फिर आओ… दिल बहल जाएगा…’ कहकर उन्होंने अपनी डायरी निकला ली और उसका हिसाब देखने लगे.

‘निकहत… मैं शाम तक तुम्हें रुपया भिजवा दूंगा… बैंक जाना पड़ेगा…’ उन्होंने जवाब दिया.

‘ठीक है प्रेमभाई… मैं घर पर ही मिलूंगी… अच्छा आदाब…’ वह घर लौट आयी.

प्रेमभाई ने उसे रोका नहीं. वह उसके दिल का हाल समझ रहे थे. अधूरे पड़े जिंगल का जिक्र भी उन्होंने नहीं किया. सोचा कुछ दिन बाहर घूम कर जब वह लौट आएगी, तब पूरा कर लेंगे.

प्रेमभाई के स्टूडियो से घर पहुंचते ही निकहत ने घोषणा की, ‘अम्मी… अब हम इस शहर में नहीं रहेंगे…’

‘क्या…?’ अम्मी ने चौंकते हुए उसकी तरफ देखा, ‘फिर कहां रहेंगे…?’ अम्मी उसकी बात नहीं समझीं थीं. जाहिद भी अपनी किताबों से सिर उठाकर बहन की ओर ताकने लगा.

‘हां अम्मी… अब हम किसी दूसरे शहर में रहेंगे… किसी बड़े शहर में…’ वह अपनी बड़ी-बड़ी आंखें नचाते हुए बोली.

‘पागल हो गयी है क्या…? अच्छा भला तो शहर है…’ अम्मी भुनभुनायी. वह उसकी बातों को मजाक समझ रही थीं.

‘अम्मी, तुम समझती क्यों नहीं? यहां मेरे लिए तरक्की का कोई चान्स नहीं है… क्या तुम चाहती हो कि तुम्हारी बेटी बस इन छोटे-मोटे कार्यक्रमों के पीछे भागती रहे? नहीं, अम्मी नहीं… मुझे आगे बढ़ना है… बहुत आगे जाना है… बोलो, मेरा साथ दोगी?’ वो अपनी अम्मी के घुटनों के पास जमीन पर बैठ गयी.

अम्मी प्यार से उसके सिर पर हाथ फेरते हुए बोलीं, ‘वो तो ठीक है बेटा, मैं तेरे रास्ते में रुकावट क्यों बनने लगी? तेरी ही मेहनत से तो घर चल रहा है. हां, मगर पता भी तो चले, कहां जाना है?’

‘मुम्बई…’ उसने जवाब दिया.

‘मुम्बई!’ जाहिद खुशी से चहकते हुए बोला, ‘अप्पी, क्या सचमुच… हमलोग मुम्बई में रहेंगे…? वहां तो बड़े-बड़े हीरो भी मिलेंगे, है न…?’ जाहिद उत्साहित हो गया.

‘हां जाहिद, हम सब मुम्बई चलेंगे… वहां बड़े स्टूडियो हैं… बड़े-बड़े हीरो हैं…. बड़ा काम है… वहां अम्मी के पैरों का इलाज भी बड़े अस्पताल में करवाएंगे… बस, दो-तीन दिनों में मैं पैसों का सारा इंतजाम कर लूंगी… बस अगले हफ्ते चलते हैं…’ निकहत बोली.

अम्मी अपनी बेटी की बातों पर हैरान थी. इतनी जल्दी? ऐसे कैसे सबकुछ छोड़ कर चल देंगे? इसे अचानक क्या हो गया? अम्मी चिन्तित हो उठीं.

‘और वह संजीव लौटेगा तो…?’ उन्होंने उसे याद दिलाना चाहा.

‘अरे… मारो गोली संजीव को…’ निकहत लापरवाही से कहते हुए उठ खड़ी हुई, ‘संजीव जैसे तेरी बेटी को हजारों मिल जाएंगे अम्मी… बस पैसे आने दो… पैसे से दुनिया खरीदी जा सकती है… संजीव जैसों की तो लाइन लग जाएगी… अब इतनी घटिया किस्मत भी नहीं है तेरी निकहत की…’ उसने हंसते हुए जवाब दिया और अपने कमरे की ओर बढ़ गयी. जाहिद अपने सवालों और जिज्ञासाओं की पोटली लिए उसके पीछे-पीछे उसके कमरे में पहुंच गया.

बेचारी अम्मी अपनी जगह सन्न बैठी रह गयी, ‘क्या यह वही निकहत है?’ उन्हें यकीन नहीं हो रहा था, ‘अचानक इसे हुआ क्या है…? कल तक तो यह संजीव के लिए जान देने पर तुल जाती थी और आज ऐसी बातें कर रही है? लगता है उससे झगड़ा करके आयी है. चलो अच्छा ही है, उससे नाता तोड़ ले तो बिरादरी में अपनी इज़्ज़त बच जाएगी. इसे अक्ल आ जाए तो अपने वहां लड़कों की कमी थोड़ी न है… एक से एक पड़े हैं… मगर ये तो संजीव के पीछे दीवानी है…’ सोचते हुए वह अपने काम में लग गयीं.

एक हफ्ते में निकहत ने पूरे घर का जरूरी सामान समेट कर पैक कर लिया. प्रेमभाई के अधूरे पड़े जिंगल्स भी पूरे कर दिये और उनसे मुम्बई की कुछ बड़ी म्यूजिक कम्पनियों और म्यूजिक डायरेक्टर्स के नाम-पते भी इकट्ठा कर लिये. अम्मी उसके इस फैसले और जल्दबाजी से परेशान भी थीं और खुश भी. परेशाान इसलिए कि मुम्बई जैसे बड़े और नये शहर में, नये लोगों के बीच कहां और कैसे रहेंगे और खुश इसलिए कि चलो, इस बहाने संजीव का कांटा तो निकल गया. उन्होंने गांव में अपनी बड़ी बहन के वहां संदेशा भिजवाया कि उनके पीछे वह अपने बड़े बेटे के परिवार को इस घर में रहने के लिए भेज दें. घर को खाली छोड़ कर कैसे चली जातीं? पति की आखिरी निशानी है, बेचने की तो सोच भी नहीं सकतीं. इसलिए किसी का यहां रहना जरूरी है… कहीं खाली पड़ा देखकर किसी ने कब्जा कर लिया तो…?

निकहत ने प्रेमभाई से उनके एक पुराने मित्र के घर का पता लिया था, जो मुम्बई में काफी अरसे से रह रहे थे. यूं कहें कि प्रेमभाई ने खुद ही निकहत को उनका पता दिया था और कहा था, ‘नया शहर होगा, मैं बलजीत को फोन कर दूंगा. तुम जब तक चाहो उसके वहां रह सकती हो, मियां-बीवी दोनों बहुत ही नेक हैं, वह भी दो-तीन लोगों से तुम्हें इन्ट्रोड्यूस करा देगा… काम मिलने में आसानी हो जाएगी…’ प्रेमभाई अपनी तरफ से निकहत की काफी मदद कर रहे थे. निकहत प्रेमभाई की अहसानमंद थी. इस मामले में उन्होंने सचमुच बड़े भाई की तरह उसकी मदद की थी.

समय बीतता गया. निकहत को गये करीब-करीब तीन साल होने को आये. इस बीच उसकी कोई खबर नहीं मिली. वह कहां है, किस हाल में है, कोई नहीं जानता. प्रेमभाई ने बलजीत को फोन भी किया था. पता चला कि वह लोग उसके वहां बस एक महीना ही रहे, फिर उनको अंधेरी की किसी चाल में जगह मिल गयी और तीनों उधर ही शिफ्ट हो गये. कुछ दिन फोन करके निकहत हालचाल देती रही थी, फिर उसके फोन आने बंद हो गये… आजकल वह लोग कहां हैं, ये बलजीत को भी नहीं पता.

जब सलमान ने खुद को मारे कोड़े तो भीड़ ने बजाई तालियां, वीडियो वायरल

बौलीवुड सुपरस्टार सलमान खान की एक वीडियो काफी वायरल हो रही है. दरअसल सलमान खान ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो शेयर किया है जो काफी वायरल हो रहा है. वीडियो में सलमान खान खुद को चाबुक मार कर पैसे मांगने वालों से बातें करते नजर आ रहे हैं. सलमान पहले उन्हें खुद को कोड़े मारते हुए देखते हैं और फिर उनसे कोड़ा लेकर वह खुद भी वैसे करने की कोशिश करते हैं.

सलमान पूछते हैं कि ये आवाज कैसे आती हैं. इस पर खुद को कोड़े मारकर पैसे मांगने वाला बताता है कि कि कोड़े की टिप पर जो चीज बंधी हुई है उससे आवाज आती है. कुछ देर चीजों को समझने के बाद सलमान फिर कोशिश करते हैं.

इस बार दबंग खान थोड़ी ज्यादा तेजी से खुद को कोड़ा मारते हैं. इस बार वह ज्यादा जोर से खुद को कोड़े मारते हैं और बिलकुल वैसा ही सीन बन जाता है जैसा मांगने वाले करते हैं. सलमान के इस तरह खुद को कोड़े मारते हुए देख कर आस पास खड़ी पूरी भीड़ जोर से तालियां बजाती है. सलमान खान मांगने वालों के साथ तस्वीर खिंचवाते हैं और इसके बाद वह सभी लोगों के प्रति आभार प्रकट करते हैं.

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कैप्शन में सलमान खान ने लिखा, “उनकी भावनाओं और तकलीफों को साझा करने में एक अलग ही अहसास है. बच्चा पार्टी इसे घर पर मत ट्राय करना.” वीडियो को पोस्ट किए जाने के महज 1 घंटे के भीतर इसे 7 लाख से ज्यादा लोगों ने देखा, लाइक किया और साझा किया है.

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नच बलिए 9: इस एक्ट्रेस ने शो में हिस्सा लेने के लिए एक्स को किया कौल तो मिला ये जवाब

स्टार प्लस पर प्रसारित होने वाला रियलिटी शो नच बलिए 9  काफी चर्चा में बना हुआ है. क्योंकि शो की इस बार की थीम ‘एक्स कपल’ जो  काफी दिलचस्प है. इस शो में एक्स कपल के साथ जोड़ियां परफौर्म कर रही हैं.

आपको बता दें इस शो में एक्स कपल मधुरिमा तुली और विशाल आदित्य सिंह अपने झगड़ों को लेकर खबरों में हैं. तो वही एक्स कपल उर्वशी ढोलकिया और अनुज सचदेवा बाहर हो गए हैं. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक टीवी एक्ट्रेस चाहत खन्ना और कनन को नच बलिए में साथ आने के लिए औफर किया गया.

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चाहत ने इस बारे में अपने एक्स बौयफ्रेंड कनन से बात की. चाहत ने कनन को कौल किया और पूछा कि क्या वो नच बलिए में उसके साथ हिस्सा लेने में इंटरस्टेड है. तो इसके जवाब में कनन ने कहा, मेरा तलाक हो जाएगा.

इनके रिलेशनशिप के बारे में बात करें तो चाहत और कनन दो साल तक रिलेशन में रहे थे. बाद में चाहत ने बिजनेसमैन भरत नर्सिंघानी से शादी कर ली थी. लेकिन दोनों की शादी ज्यादा चल नहीं पाई. इसके बाद चाहत ने 2013 में फरहान मिर्जा से शादी की थी. लेकिन चाहत खन्ना ने फरहान पर शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए थे. दोनों अलग हो गए. चाहत दो बच्चियों की मां है.

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जरूरत तो फाइनेंशियली फिट होने की है!

बिना किसी चूं चपड़ के मान लेना चाहिए कि स्वच्छ भारत अभियान के चलते देश से गंद छट चुकी है. कश्मीर से धारा 370 हट चुकी है, तीन तलाक नाम की मुस्लिम समुदाय में व्याप्त कुरीति दूर हो चुकी है और ताजा खबर ये कि 6 छोटे सरकारी बेंकों का 4 बड़े सरकारी बैंको में विलय हो गया है इससे देश की अर्थव्यवस्था सरपट दौड़ने लगेगी आगे भी बेंकों के मर्ज (ईकरण) का सिलसिला जारी रहेगा. इस सुधरी अर्थव्यवस्था के साथ आम लोग भी सरपट दौड़ेंगे क्योंकि उन्हें जिंदा रहने खाने पीने और दीगर जरूरतों को पूरा करने के लिए अब और मेहनत करनी पड़ेगी .

इसी मेहनत से वे उस फिटनेस को प्राप्त करेंगे जिसका आव्हान और उद्घोष आरबीआई से 1.76 लाख करोड़ रु छीनने के बाद प्रधान सेवक नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय खेल दिवस के मौके पर नई दिल्ली के इन्दिरा गांधी स्टेडियम से किया. (भगवान ने चाहा तो जल्द ही इस स्टेडियम का नाम सुषमा स्वराज स्टेडियम होगा ठीक वैसे ही जैसे फिरोजशाह कोटला स्टेडियम अब अरुण जेटली स्टेडियम हो गया है.)

मोदी जी इस बार नई तुकबंदी वाला स्लोगन लेकर आए हैं कि बौडी फिट है तो माइंड हिट है. बात सौ नहीं बल्कि लाख टका सच है कि भयानक मंदी के दौर से गुजरते देशवासियों को फिट रहने की बड़ी जरूरत है. जिन लोगों को मंदी से निबटना है उन्हें चुस्त दुरुस्त रहना ही होगा नहीं तो वे भी जल्द ही किसी मंदिर के आगे कटोरा हाथ में लिए खड़े दे दाता के नाम… टाईप नगमा गुनगुनाते नजर आएंगे या फिर डिनर के लिए सपरिवार किसी लंगर की लाइन में लगे होंगे. अब सभी तो रानू मण्डल जैसी किस्मत लेकर चले नहीं होंगे कि किसी हिमेश रेशमिया की नजर उन पर पड़े और वे रातों रात रंक से राजा बन जाएं.

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अब यहां तो हर किसी को रानू बनाने के हालत पैदा किया जा रहे हैं. सरकार घर का सोना बेचकर दिवाली मना रही है. अर्थशास्त्र कहता है कि पैसा कमाने के लिए मेहनत करनी पड़ती है. पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी कहते थे कि पैसा पेड़ पर नहीं लगता तब भाजपा ने उनका खूब मजाक बनाया और उड़ाया था और 2014 में घोषित तौर पर पहले हिन्दू प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से यह उम्मीद पाल ली थी कि वे पेड़ पर पैसा उगाने का करिश्मा भी कर दिखाएंगे क्योंकि वे मानव नहीं बल्कि अवतार हैं .

हुआ उल्टा मोदी जी ने वह पेड़ जो उनके 2 साल के कार्यकाल में ही ठूंट बन चुका था जड़ से ही उखाड़ डाला और पूरे नोट नोटबंदी के जरिये समेट लिए और आश्वासन दिया कि जल्द ही नोटों का कल्प वृक्ष लहराएगा जिसमें से लोग जब चाहे जितने नोट तोड़कर घर ले जा सकते हैं. फिर न गरीब रहेंगे और न गरीबी रहेगी सब समान हो जाएंगे. लोग तो टांपते और ताकते ही रह गए और उधर सरकार ने रिजर्व बैक के नोट समेट कर उसे ही रिजर्व में ला दिया. आरबीआई नाम की यह गाड़ी कुछ किलोमीटर और ढर्रढर्र कर चलेगी और फिर हांफते हांफते वित्त मंत्रालय के गैरेज में कहीं खड़ी हो जाएगी .

8 नवंबर 2016 तक देश के लोग बड़े फिट थे. वे अपने नोट जेबों और पोटलियों में भरकर दुतिचंद की तरह द्रुत गति से दौड़ते बैंको के सामने लाइन में जाकर खड़े हो गए थे तब अफरातफरी इतनी थी कि कई लोग लाइनों में लगे लगे ही वीरगति को प्राप्त हो गए थे और जिदगी भर की मेहनत की गाढ़ी कमाई हाथ से जाते देख कइयों के दिलों ने घर में ही धड़कने से इंकार कर दिया था. कइयों के भूतपूर्व नोट आज भी उसी तरह घर के धन स्थान की शोभा बढ़ा रहे हैं जैसे ठाकुरों की हवेलियों में उनके पूर्वजों की मूंछदार तस्वीरें दीवारों में जान डाल देती हैं.

इधर चार सालों में कुछ बदमाश, चालाक व्यापारी और मध्यमवर्गीय फिर से फिट नजर आने लगे तो सरकार का ध्यान उनकी फिटनेस की वजहों पर गया. सरकार को समझ आया कि ठूंठ फिर से हरिया गया है तो उसने कहा कुछ ही क्यों सभी लोग फिट हों और अगर न हो पाएं तो सब को अनफिट करार दे दिया जाएगा, फिटो से फिर उनकी फिटनेस छीन ली जाएगी. कुछ लोग फिट हों और बाकी अनफिट रहें यह तो राष्ट्रद्रोह है. अब जो फिट हैं वे दुआ मांग रहे हैं कि हे प्रभु इन अनफिटों को सेहत बख्श, इसके लिए हम अपनी फिटनेस का कुछ हिस्सा शेयर करने के लिए तैयार हैं.

जैसे रावण अपने भाई कुबेर को लूटकर सोने की लंका में बैठकर राजकाज चलाया करता था वही अब सरकार कर रही है. यह आरोप गलत है कि उसने रिजर्व बेंक की स्वायत्ता खत्म कर दी है बल्कि उसने रिजर्व बैंक की हत्या ही कर दी है क्योंकि उसे साल 1935 में अंग्रेजों ने बनाया था. जिसके पीछे उनका कोई मकसद नहीं बल्कि स्वार्थ थे कि द्वीतीय विश्वयुद्ध के समय तरलता का संकट था .

अर्थशास्त्र की भाषा देश के अनफिट तो क्या फिट लोग भी नहीं समझते इसलिए विपक्ष के आरोप भी उन्हें सरकार विरोधी लग रहे हैं. लोगों को न विमल जालान से कोई मतलब है न विरल आचार्य की अर्जेन्टीना वाली थ्योरी से कोई सरोकार है. लोगों को ऊर्जित पटेल और उनके इस्तीफे से कोई मतलब है और न ही रघुराम राजन के बयानों से क्योंकि ये लोग अनफिट हैं.

ये लोग मोदी जी की महिमा न जानते और न मानते इसलिए कुछ भी बका करते हैं. ये मूढ़ लोग नहीं चाहते कि राम राज आए और घर घर में तुलसी की पेड़ के साथ साथ हरे भरे नोटों का भी पेड़ लगे .

बेचारे साबित हो चुके विपक्ष की आजकल सुनता कौन है, घुंघराले बालों बाले सीताराम येचूरी घिघियाते रह गए कि सरकार हर साल आरबीआई का 99 फीसदी मुनाफा हड़प लेती है. एक फीसदी छोड़ देने की उदारता पर जाने क्यों येचूरी खामोश रहे. ट्विटर पर बैठे राहुल गांधी चोरी चोरी का राग अलापते रह गए और इधर मोदी जी मुसकुराते हुये फिटनेस का फंडा लेकर प्रकट हो गए कि लोगों को पैसों की नहीं फिटनेस की जरूरत है. उन्होंने साफ साफ बिना अपना नाम लिए कहा भी कि ज्यादातर सफल (अर्थात धनी) लोग फिट हैं. बात सच इस लिहाज से है कि देश के लाखों करोड़ों भिक्षुक हट्टे कट्टे और मुस्टंडे हैं लेकिन फायनेंशली अनफिट हैं फिर भले ही वे सफल भिखारी हों .

मोदी जी चाहते हैं कि अपने पूर्वजों की नसीहत पर अमल करते लोग खूब व्यायाम करें जिससे वे स्वस्थ रहकर लंबी आयु और सुख भोगें. बात की गहराई यह है कि इन सब के लिए उन्हें धन कमाना चाहिए लेकिन उसका संचय नहीं करना चाहिए क्योंकि इससे बेड कोलस्ट्रोल बढ़ता है और लोग अपने कमाए पैसे का सुख नहीं उठा पाते जिससे झख मारकर सरकार को उनके हिस्से का सुख भोगना पड़ता है. उन्होने सही कहा कि लोगों को स्वार्थ छोडकर स्वास्थ्य की तरफ आना चाहिए.

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यह बात भी सच ही है क्योंकि स्वस्थ नागरिक ही कर भर सकता है जिसका बड़ा हिस्सा कश्मीर में तैनात सेना पर खर्च हो रहा है. अब लोग यदि धारा 370 हटाने की कीमत भी अदा नहीं कर सकते तो उन्हें हिन्दू राष्ट्र का सपना भी छोड़ देना चाहिए. फिर मोदी जी का क्या है वे अपने लिए तो कुछ नहीं कर रहे वे तो फकीर हैं जब मन करेगा कमंडल उठाकर हिमालय चल देंगे इसके बाद कोई देश को हिन्दू राष्ट्र नहीं बना पाएगा.

तो अर्थव्यस्था का हिन्दुत्व से बड़ा गहरा नाता है जिसके लिए लोगों को और कीमत चुकाने के लिए तैयार रहना चाहिए. मंदी को एक मानसिक अवस्था मानते खुद को फिट रखते और ज्यादा पैसे कमाना चाहिए और जो न कमा पाएं उन्हें हिन्दुत्व से बाहर खुद को मान लेना चाहिए. पारले जी और आटो मोबाइल सेक्टर में छटनी जैसी खबरों से युवाओं को घबराना नहीं चाहिए बल्कि कश्मीरी कन्याओं के सपने देखना चाहिए, वहां प्लाट खरीदने पैसा कमाना चाहिए और इतना भी नहीं कर सकते तो रानू मण्डल की तरह ज़िंदगी को लेकर तेरी मेरी कहानी और प्यार का नगमा गाना चाहिए इससे कुछ और मिले न मिले भीख तो मिल ही जाएगी.

सेफ्टी पिन के बारे में इन बातों को जानकर हैरान रह जायेंगे आप

सेफ्टी पिन देखने में भले ही छोटी हो लेकिन यह बड़े- बड़े काम बहुत आसानी से कर सकती हैं और इसका उपयोग हर घर में होता है. इसकी खूबियां ही ऐसी है, जिससे इसका उपयोग हर घर में किया जाता है.  खासतौर से, महिलाएं  इसका अक्सर इस्तेमाल करती हैं. तो आईए आज आपको बताते हैं इससे जुड़ी कुछ दिलचस्प बातें.

  • सबसे पहले आपको बता दें, साल 1849 में  वाल्टर हंट ने इसका आविष्कार किया.
  • वाल्टर ने 8 इंच के तांबे के तार से ये पिन बनाई थी.
  • ये पहली पिन थी, जिसमें पिन को रोकने के लिए बक्कल लगा था.
  • वाल्टर ने इसके अलावा सिलाई मशीन, ट्राम घंटी, स्पिनर और सड़क साफ करने की मशीन का भी आविष्कार किया है.

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  • इस पिन को वाल्टर ने सबसे पहले ‘डब्लू आर एंड कम्पनी’ को बेचा. जिसमे कम्पनी ने उन्हें एक बड़ी संख्या में सेफ्टी पिन बनाने का और्डर दिया. इस बिजनेस से वाल्टर ने काफी पैसे कमाएं.
  •  उस वक्त वाल्टर ने सभी को सेफ्टी पिन के बारे में कुछ इन शब्दों में समझाया था.‘’Useful Improvement in the Make of Form of Dress-Pins’’तो सेफ्टी पिन बहुत काम की चीज है. भले देखने में ये छोटी हो….

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मेरे शरीर के कई हिस्सों पर स्ट्रैच मार्क्स हो गए हैं. मैं क्या करूं?

सवाल

मैं 18 वर्षीय युवती हूं. शरीर के कई हिस्सों पर स्ट्रैच मार्क्स हो गए हैं जो न केवल खराब दिखते हैं, बल्कि उन की वजह से मैं शौर्ट ड्रैसेज और स्लीवलैस कपड़े भी नहीं पहन पाती हूं. कृपया स्ट्रैच मार्क्स को दूर करने के उपाय बताएं?

जवाब

स्ट्रेच मार्क्स या शरीर पर दिखने वाली सफेद धारियां तब होती हैं जब अचानक आप का वजन बढ़ता है और फिर आप उसे ऐक्सरसाइज के द्वारा घटाने की कोशिश करती हैं. इस के अलावा डिलिवरी के बाद भी जब बढ़ा वजन घटता है तो पेट के अलावा शरीर के उन हिस्सों पर भी स्ट्रैच मार्क्स दिखाई देते हैं जहां वजन कम होता है.

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दरअसल, त्वचा की 2 सतहें होती हैं ऊपरी और भीतरी. जब वजन बढ़ता है तो त्वचा में खिंचाव आता है और त्वचा की ऊपरी सतह स्ट्रैच हो जाती है. लेकिन भीतरी त्वचा इस स्ट्रैच को सह नहीं पाती और त्वचा के भीतरी टिशूज टूट जाते हैं, जिस से स्ट्रैच मार्क्स बनते हैं. वैसे तो स्ट्रैच मार्क्स हटाने के लिए कई तरह की स्ट्रैच मार्क्स रिमूवल क्रीम व लोशन उपलब्ध हैं, लेकिन आप चाहें तो घरेलू उपाय भी अपना सकती हैं.

आप उन स्थानों पर जहां स्ट्रेच मार्क्स हैं ऐलोवेरा जैल लगाएं. ऐलोवेरा जैल त्वचा को टोन करने के साथसाथ उसे हाइड्रेट भी करता है जिस से स्ट्रैच मार्क्स धीरेधीरे हलके होते जाते हैं. इस के अतिरिक्त आप नीबू का रस या आलू का रस भी प्रभावित स्थान पर लगा सकती हैं. इस से भी स्ट्रैच मार्क्स के हलके होने में मदद मिलेगी.

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क्या एक लड़का और लड़की कभी दोस्त नहीं बन सकते?

जी हां आज ये सवाल हर कोई पूछता है और खासतौर पर एक लड़की, जब उसे ये कहा जाता है कि अरे तुम एक लड़के से फोन पर बात कर रही हो,अरे तुम लड़के के साथ घूमने गयी थी, वो लड़का कौन था जो तुम्हें घर तक छोड़ने आया था,तुम्हारी फोटो में साथ में ये लड़का कौन है?

तमाम तरह के सवाल जब एक लड़की से पूछे जाते हैं तब वो सोचती है और सवाल करती है कि क्या एक लड़का और लड़की कभी अच्छे दोस्त नहीं हो सकते हैं? जरूरी है कि एक लड़की किसी लड़की को ही अपना दोस्त बनाए,लड़के को दोस्त बनाना क्या गुनाह है?

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लेकिन ये समाज इनका क्या करें जो जहां किसी लड़की या लड़के को साथ देखा नहीं कि शूरू हो जाते हैं जरूर इसका उस लड़के के साथ चक्कर चल रहा होगा देखो तो कैसे चिपक-चिपक कर बातें कर रहीं हैं और देर रात भी देखा था मैनें इसे इस लड़के के साथ न जाने कहां से घूम कर आ रही थी… और सबसे ज्यादा तो इस तरह की बातें अगल-बगल की औरतें करती हैं क्योंकि उनको तो मसाला ही चाहिए बातें करने के लिए अरे मैंने शर्मा जी की बेटी को कल एक लड़के के साथ देखा था,कुछ ज्यादा ही छूट दे रखी हैं शर्मा जी ने अपनी बेटी को… लो कर लो बात अब भला इन लोगों को कौन समझाए कि ये जरूरी नहीं कि अगर कोई लड़का–लड़की साथ हैं तो उनका चक्कर ही चल रहा होता है अरे वो एक अच्छे दोस्त भी हो सकते हैं.

अगर लड़के की बात करें तो हर लड़की की जिंदगी में एक लड़के का दोस्त होना बहुत जरूरी है क्योंकि अक्सर ऐसा होता है जब कुछ बातें हम अपनी दोस्तों से नहीं कह पाते लेकिन वही बात एक लड़का दोस्त है तो उससे कह देते हैं. और लड़को को भला लड़को से बेहतर कौन समझ सकता है उन्हें तो लड़कों के बारे में सब पता होता है और हमारा दोस्त हमें सलाह भी देता है. देखो इससे दूर रहना,इसके साथ मत जाना,ये लड़का अच्छा नहीं है…एक तरह से वो दोस्त होकर भाई वाले सारे फर्ज निभाता है.हमारा ध्यान रखता है,हर वक्त हमारी मदद करने के लिए तैयार रहता है. अगर घर आने में देरी होती है तो एक बॉडीगार्ड की तरह घर छोड़ने भी आएगा.आपको छेड़ेगा भी और आपसे लड़ेगा भी, गुस्सा भी होगा लेकिन कुछ ही पल में बात भी करने लगेगा क्योंकि बिना बात किए एक अच्छा दोस्त ज्यादा देर तक रह नहीं सकता..और तो और आपकी शादी में सबसे ज्यादा नाचेगा भी वही..

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ऐसे दोस्त बहुत नसीब वालों को मिलतें है और बहुत मुश्किल से लेकिन ये समाज ऐसे पाक रिश्तों को भी नहीं छोड़ता है..अरे दोस्ती से अच्छा और सच्चा रिश्ता तो कहीं नहीं मिलता लेकिन ये समाज उसे भी गंदी नजरों से देखने से बाज़ नहीं आता. आप खुद सोचिए क्या एक लड़के का दोस्त होना इतना बड़ा पाप है या इतना बड़ी गलती है कि लड़की हर जगह सफाई देती फिरे. क्या ये समाज अपनी सोच को बदल नहीं सकता है.हम इक्कीसवीं सदी में हैं और समाज की सोच लेकिन अभी भी वही पुराने ज़माने में अटकी है.अपनी सोच को बदलें और इस बात को माने कि एक लड़का और लड़की बहुत अच्छे दोस्त भी हो सकते हैं और इस रिश्ते का सम्मान करें.

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