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दीपिका पादुकोण के सपोर्ट में सामने आया बौलीवुड, JNU में की थी छात्रों से मुलाकात

जेएनयू जाने की वजह से कई लोग दीपिका का विरोध कर रहे हो. लेकिन पूरा बौलीवुड उनके सपोर्ट में आगे आ गया है. बीते रोज बौलीवुड एक्ट्रेस दीपिका पादुकोण अपनी नई फिल्म छपाक का प्रमोशन करने के लिए दिल्ली पहुंची थीं. प्रमोशन के बाद वो JNU (जेएनयू) भी पहुंचीं, जहां उन्होंने घायल छात्रों मुलाकात की और उनके साथ खड़ी रहीं. हालांकि इस दौरान दीपिका ने एक भी शब्द नहीं कहा और दस मिनिट बाद ही वहां से चली गई. लेकिन कुछ लोगों को दीपिका का ये कदम सही नहीं लगा और वो उन्हें सोशल मीडिया पर ट्रोल करने लगे.

बौलीवुड ने किया दीपिका का सपोर्ट

भले ही सोशल मीडिया पर दीपिका को ट्रोल किया जा रहा हो लेकिन पूरा बौलीवुड इस छपाक गर्ल के सपोर्ट में सामने आ गया है और हर कोई दीपिका के इस बहादुरी भरे फैसले की तारीफ कर रहा है. सबका मानना है कि इन हालातों में जब कोई बड़ा सेलेब बयान देने से भी बच रहा है. ऐसे में दीपिका का जेनएयू जाना वाकई इस बात का सबूत है कि वो असल जिंदगी में भी अपने किरदारों की तरह ही मजबूत हैं. आइए देखते है किसने क्या कहा…

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छोटी सरदारनी: लोहड़ी सेलिब्रेशन के दौरान मेहर को पता चलेगी परम की ये बात

कलर्स के शो छोटी सरदारनी में 2 महीने का लीप आ गया है, जिसके बाद परम के दस्तरबंदी और लोहरी सेलिब्रेशन के कारण गिल परिवार में खुशियों का माहौल है. वहीं मेहर भी अपने होने वाले बच्चे के साथ अपनी इस नई जिंदगी में खुश है, लेकिन क्या ये खुशियां बनीं रहेंगी. आइए आपको बताते हैं क्या होगा शो में आगे…

मेहर और हरलीन के बीच बढ़ रही हैं दूरियां

अब तक आपने देखा कि हरलीन दस्तरबंदी सेलिब्रेशन के लिए परम को पगड़ी पहनाने की कोशिश करती है, लेकिन परम पग पहनने से इंकार कर देता है. इस बात से हरलीन अपनी सास और ननद के सामने अपमानित महसूस करती है और सोचती है कि इन सबके लिए मेहर जिम्मेदार है.

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लोहरी सेलिब्रेशन में सरब देता है मेहर को गिफ्ट

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मेहर और सरब की दोस्ती गहरी हो रही है. वहीं सरब, मेहर को पायल गिफ्ट करता है और फिर मेहर से सरब अपना गिफ्ट मांगता है. मेहर कहती है कि सरब जो मांगना चाहे मांग ले, मेहर उसकी हर ख्वाहिश पूरी करेगी. इस बात पर सरब, मेहर से उसके साथ सात जन्मों का साथ मांगता है.

मेहर को पता चलेगी परम की ये बात

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सेलिब्रेशन के दौरान, मेहर देखती है कि परम गायब है. मेहर परम को वौशरूम से बाहर निकलते हुए देखती है, जहां वह फ्लश करना भूल जाता है. यहां मेहर देखती है कि परम का यूरीन पीला है और उसमें खून भी आ रहा है. ये देखकर मेहर बुरी तरह घबरा जाती है.

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अब देखना ये है कि आखिर क्या हुआ है परम को? क्या मेहर और सरब की जिंदगी में आने वाला है कोई बड़ा तूफान? जानने के लिए देखते रहिए ‘छोटी सरदारनी’, सोमवार से शनिवार, रात 7:30 बजे, सिर्फ कलर्स पर.

एक तीर दो शिकार : भाग 2

‘‘मेरी बहुत पुरानी सहेली है. उस नेबडि़यांपापड़ बनाने का लघुउद्योग कायम कर रखा है. वह मुझे भी काम देगी. अगर रहने का इंतजाम भी उस ने कर दिया तो मैं यहां नहीं…’’

‘‘नहीं, मां, तुम यहीं रहोगी,’’ अंजलि ने उन्हें अपनी बात पूरी नहीं करने दी और आवेश भरे लहजे में बोली,  ‘‘जिस घर में तुम्हारे बेटाबहू ठाट से रह रहे हैं, वह घर आज भी तुम्हारे नाम है. अगर बेघर हो कर किसी को धक्के खाने ही हैं तो वह तुम नहीं वे होंगे.’’

‘‘तू इतना गुस्सा मत कर, बेटी.’’

‘‘मां, तुम ने कभी अपने दुखदर्द की तरफ पहले जरा सा इशारा किया होता तो अब तक मैं ने राकेश और सारिका के होश ठिकाने लगा दिए होते.’’

‘‘अब मैं काम करना शुरू कर के आत्मनिर्भर हो जाऊंगी तो सब ठीक हो जाएगा.’’

‘‘मुझे तुम पर गर्व है, मां,’’ आरती के गले लग कर अंजलि ने अपने पति को बताया, ‘‘मुझे वह समय याद है जब मां अपना सुखचैन भुला कर दिनरात मेहनत करती थीं. हमें ढंग से पालपोस कर काबिल बनाने की धुन हमेशा इन के सिर पर सवार रहती थी.

‘‘आज राकेश बैंक आफिसर और मैं पोस्टग्रेजुएट हूं तो यह मां की मेहनत का ही फल है. लानत है राकेश पर जो आज वह मां की उचित देखभाल नहीं कर रहा है.’’

‘‘मेरी यह बेटी भी कम हिम्मती नहीं है, संजीव,’’ आरती ने स्नेह से अंजलि का सिर सहलाया, ‘‘पापड़बडि़यां बनाने में यह मेरा पूरा हाथ बटाती थी. पढ़ने में हमेशा अच्छी रही. मेरा बुरा वक्त न होता तो जरूर डाक्टर बनती मेरी गुडि़या.’’

‘‘आप दोनों बैठ कर बातें करो. मैं जरा एक बीमार दोस्त का हालचाल पूछने जा रहा हूं. मम्मी, आप यहां रुकने में जरा सी भी हिचक महसूस न करें. राकेश और सारिका को मैं समझाऊंगा तो सब ठीक हो जाएगा,’’ संजीव उन के बीच से उठ कर अपने कमरे में चला गया.

कुछ देर बाद वह तैयार हो कर बाहर चला गया. उस के बदन से आ रही इत्र की खुशबू को अंजलि ने तो नहीं, पर आरती ने जरूर नोट किया.

‘‘कौन सा दोस्त बीमार है संजीव का?’’ आरती ने अपने स्वर को सामान्य रखते हुए अंजलि से पूछा.

‘‘मुझे पता नहीं,’’ अंजलि ने लापरवाह स्वर में जवाब दिया.

‘‘बेटी, पति के दोस्तों की…उस के आफिस की गतिविधियों की जानकारी हर समझदार पत्नी को रखनी चाहिए.’’

‘‘मां, 2 बच्चों को संभालने में मैं इतनी व्यस्त रहती हूं कि इन बातों के लिए फुर्सत ही नहीं बचती.’’

‘‘अपने लिए वक्त निकाला कर, बनसंवर कर रहा कर…कुछ समय वहां से बचा कर संजीव को खुश करने के लिए लगाएगी तो उसे अच्छा लगेगा.’’

‘‘मैं जैसी हूं, उन्हें बेहद पसंद हूं, मां. तुम मेरी फिक्र न करो और यह बताओ कि क्या कल सुबह तुम सचमुच शीला आंटी के पास काम मांगने जाओगी?’’ अपनी आंखों में चिंता के भाव ला कर अंजलि ने विषय परिवर्तन कर दिया था.

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आरती काम पर जाने के लिए अपने फैसले पर जमी रहीं. उन के इस फैसले का अंजलि ने स्वागत किया.

रात को राकेश और सारिका ने आरती से फोन पर बात करनी चाही, पर वह तैयार नहीं हुईं.

अंजलि ने दोनों को खूब डांटा. सारिका ने उस की डांट खामोश रह कर सुनी, पर राकेश ने इतना जरूर कहा, ‘‘मां ने कभी पहले शिकायत का एक शब्द भी मुंह से निकाला होता तो मैं जरूर काररवाई करता. मुझे सपना तो नहीं आने वाला था कि वह घर में दुख और परेशानी के साथ रह रही हैं. उन्हें घर छोड़ने से पहले हम से बात करनी चाहिए थी.’’

अंजलि ने जब इस बारे में मां से सवाल किया तो वह नींद आने की बात कह सोने चली गईं. उन के सोने का इंतजाम सोनू और प्रिया के कमरे में किया गया था.

उन दोनों बच्चों ने नानी से पहले एक कहानी सुनी और फिर लिपट कर सो गए. आरती को मोहित बहुत याद आ रहा था. इस कारण वह काफी देर से सो सकी थीं.

अगले दिन बच्चों को स्कूल और संजीव को आफिस भेजने के बाद अंजलि मां के साथ शीला से मिलने जाने के लिए घर से निकली थी.

शीला का कुटीर उद्योग बड़ा बढि़या चल रहा था. घर की पहली मंजिल पर बने बडे़ हाल में 15-20 औरतें बडि़यांपापड़ बनाने के काम में व्यस्त थीं.

वह आरती के साथ बड़े प्यार से मिलीं. पहले उन्होंने पुराने वक्त की यादें ताजा कीं. चायनाश्ते के बाद आरती ने उन्हें अपने आने का मकसद बताया तो वह पहले तो चौंकीं और फिर गहरी सांस छोड़ कर मुसकराने लगीं.

‘‘अगर दिल करे तो अपनी परेशानियों की चर्चा कर के अपना मन जरूर हलका कर लेना, आरती. कभी तुम मेरा सहारा बनी थीं और आज फिर तुम्हारा साथ पा कर मैं खुश हूं. मेरा दायां हाथ बन कर तुम चाहो तो आज से ही काम की देखभाल में हाथ बटाओ.’’

अपनी सहेली की यह बात सुन कर आरती की पलकें नम हो उठी थीं.

आरती और अंजलि ने वर्षों बाद पापड़बडि़यां बनाने का काम किया. उन दोनों की कुशलता जल्दी ही लौट आई. बहुत मजा आ रहा था दोनों को काम करने में.

कब लंच का समय हो गया उन्हें पता ही नहीं चला. अंजलि घर लौट गई क्योंकि बच्चों के स्कूल से लौटने का समय हो रहा था. आरती को शीला ने अपने साथ खाना खिलाया.

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आरती शाम को घर लौटीं तो बहुत प्रसन्न थीं. संजीव को उन्होंने अपने उस दिन के अनुभव बडे़ जोश के साथ सुनाए.

रात को 8 बजे के करीब राकेश और सारिका मोहित को साथ ले कर वहां आ पहुंचे. उन को देख कर अंजलि का पारा सातवें आसमान पर चढ़ गया.

बड़ी कठिनाई से संजीव और आरती उस के गुस्से को शांत कर पाए. चुप होतेहोते भी अंजलि ने अपने भाई व भाभी को खूब खरीखोटी सुना दी थीं.

एक तीर दो शिकार : भाग 3

‘‘मां, अब घर चलो. इस उम्र में और हमारे होते हुए तुम्हें काम पर जाने की कोई जरूरत नहीं है. दुनिया की नजरों में हमें शर्मिंदा करा कर तुम्हें क्या मिलेगा?’’ राकेश ने आहत स्वर में प्रश्न किया.

‘‘मैं इस बारे में कुछ नहीं कहनासुनना चाहती हूं. तुम लोग चाय पिओ, तब तक मैं मोहित से बातें कर लूं,’’ आरती ने अपने 5 वर्षीय पोते को गोद में उठाया और ड्राइंगरूम से उठ कर बच्चों के कमरे में चली आईं.

उस रात राकेश और सारिका आरती को साथ वापस ले जाने में असफल रहे. लौटते समय दोनों का मूड बहुत खराब हो रहा था.

‘‘मम्मी अभी गुस्से में हैं. कुछ दिनों के बाद उन्हें समझाबुझा कर हम भेज देंगे,’’ संजीव ने उन्हें आश्वासन दिया.

‘‘उन्हें पापड़बडि़यां बनाने के काम पर जाने से भी रोको, जीजाजी,’’ राकेश ने प्रार्थना की, ‘‘जो भी इस बात को सुनेगा, हम पर हंसेगा.’’

‘‘राकेश, मेहनत व ईमानदारी से किए जाने वाले काम पर मूर्ख लोग ही हंसते हैं. मां ने यही काम कर के हमें पाला था. कभी जा कर देखना कि शीला आंटी के यहां काम करने वाली औरतों के चेहरों पर स्वाभिमान और खुशी की कैसी चमक मौजूद रहती है. थोड़े से समय के लिए मैं भी वहां रोज जाया करूंगी मां के साथ,’’ अपना फैसला बताते हुए अंजलि बिलकुल भी नहीं झिझकी थी.

बाद में संजीव ने उसे काम पर न जाने के लिए कुछ देर तक समझाया भी, पर अंजलि ने अपना फैसला नहीं बदला.

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‘‘मेरी बेटी कुछ मामलों में मेरी तरह से ही जिद्दी और धुन की पक्की है, संजीव. यह किसी पर अन्याय होते भी नहीं देख सकती. तुम नाराज मत हो और कुछ दिनों के लिए इसे अपनी इच्छा पूरी कर लेने दो. घर के काम का हर्जा, इस का हाथ बटा कर मैं नहीं होने दूंगी. तुम बताओ, तुम्हारे दोस्त की तबीयत कैसी है?’’ आरती ने अचानक विषय परिवर्तन कर दिया.

‘‘मेरे दोस्त की तबीयत को क्या हुआ है?’’ संजीव चौंका.

‘‘अरे, कल तुम अपने एक बीमार दोस्त का हालचाल पूछने गए थे न.’’

‘‘हां, हां…वह…अब ठीक है…बेहतर है…’’ अचानक बेचैन नजर आ रहे संजीव ने अखबार उठा कर उसे आंखों के सामने यों किया मानो आरती की नजरों से अपने चेहरे के भावों को छिपा रहा हो.

आरती ने अंजलि की तरफ देखा पर उस का ध्यान उन दोनों की तरफ न हो कर प्रिया की चोटी खोलने की तरफ लगा हुआ था.

आरती के साथ अंजलि भी रोज पापड़बडि़यां बनाने के काम पर जाती. मां शाम को लौटती पर बेटी 12 बजे तक लौट आती. दोनों इस दिनचर्या से बेहद खुश थीं. मोहित को याद कर के आरती कभीकभी उदास हो जातीं, नहीं तो बेटी के घर उन का समय बहुत अच्छा बीत रहा था.

आरती को वापस ले जाने में राकेश और सारिका पूरे 2 हफ्ते के बाद सफल हुए.

‘‘आया की देखभाल मोहित के लिए अच्छी नहीं है, मम्मी. वह चिड़चिड़ा और कमजोर होता जा रहा है. सारा घर आप की गैरमौजूदगी में बिखर सा गया है. मैं हाथ जोड़ कर प्रार्थना करती हूं…अपनी सारी गलतियां सुधारने का वादा करती हूं…बस, अब आप घर चलिए, प्लीज,’’ हाथ जोड़ कर यों विनती कर रही बहू को आरती ने अपनी छाती से लगाया और घर लौटने को राजी हो गईं.

अंजलि ने पहले ही यह सुनिश्चित करवा लिया कि घर में झाड़ूपोछा करने व बरतन मांजने वाली बाई आती रहेगी. वह तो आया को भी आगे के लिए रखवाना चाहती थी पर इस के लिए आरती ही तैयार नहीं हुईं.

‘‘मैं जानती थी कि आज मुझे लौटना पडे़गा. इसीलिए मैं शीला से 15 दिन की अपनी पगार ले आई थी. अब हम सब पहले बाजार चलेंगे. तुम सब को अपने पैसों से मैं दावत दूंगी…और उपहार भी,’’ आरती की इस घोषणा को सुन कर बच्चों ने तालियां बजाईं और खुशी से मुसकरा उठे.

आरती ने हर एक को उस की मनपसंद चीज बाजार में खिलवाई. संजीव और राकेश को कमीज मिली. अंजलि और सारिका ने अपनी पसंद की साडि़यां पाईं. प्रिया ने ड्रेस खरीदी. सोनू को बैट मिला और मोहित को बैटरी से चलने वाली कार.

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वापस लौटने से पहले आरती ने अकेले संजीव को साथ लिया और उस आलीशान दुकान में घुस गइ्रं जहां औरतों की हर प्रसाधन सामग्री बिकती थी.

‘‘क्या आप यहां अपने लिए कुछ खरीदने आई हैं, मम्मी?’’ संजीव ने उत्सुकता जताई.

‘‘नहीं, यहां से मैं कुछ बरखा के लिए खरीदना चाहती हूं,’’ आरती ने गंभीर लहजे में जवाब दिया.

‘‘बरखा कौन?’’ एकाएक ही संजीव के चेहरे का रंग उड़ गया.

‘‘तुम्हारी दोस्त जो मेरी सहेली उर्मिला के फ्लैट के सामने वाले फ्लैट में रहती है…वही बरखा जिस से मिलने तुम अकसर उस के फ्लैट पर जाते हो..जिस के साथ तुम ने गलत तरह का रिश्ता जोड़ रखा है.’’

‘‘मम्मी, ऐसी कोई बात नहीं…’’

‘‘संजीव, प्लीज. झूठ बोलने की कोशिश मत करो और मेरी यह चेतावनी ध्यान से सुनो,’’ आरती ने उस की आंखों में आंखें डाल कर सख्त स्वर में बोलना शुरू किया, ‘‘अंजलि तुम्हारे प्रति…घर व बच्चों के प्रति पूरी तरह से समर्पित है. पिछले दिनों में तुम्हें इस बात का अंदाजा हो गया होगा कि वह अन्याय के सामने चुप नहीं रह सकती…मेरी बेटी मानसम्मान से जीने को सब से महत्त्वपूर्ण मानती है.

‘‘उसे बरखा  की भनक भी लग गई तो तुम्हें छोड़ देगी. मेरी बेटी सूखी रोटी खा लेगी, पर जिएगी इज्जत से. जैसे मैं ने बनाया, वैसे ही वह भी पापड़बडि़यां बना कर अपने बच्चों को काबिल बना लेगी.

‘‘आज के बाद तुम कभी बरखा के फ्लैट पर गए तो मैं खुद तुम्हारा कच्चा चिट्ठा अंजलि के सामने खोलूंगी. तुम्हें मुझे अभी वचन देना होगा कि तुम उस से संबंध हमेशा के लिए समाप्त कर लोगे. अगर तुम ऐसा नहीं करते हो, तो अपनी पत्नी व बच्चों से दूर होने को तैयार हो जाओ. अपनी गृहस्थी उजाड़ कर फिर खूब मजे से बरखा के साथ मौजमस्ती करना.’’

संजीव ने कांपती आवाज में अपना फैसला सुनाने में ज्यादा वक्त नहीं लिया, ‘‘मम्मी, आप अंजलि से कुछ मत कहना. वह खुद्दार औरत मुझे कभी माफ नहीं करेगी.’’

‘‘गुड, मुझे तुम से ऐसे ही जवाब की उम्मीद थी. आओ, बाहर चलें.’’

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आरती एक तीर से दो शिकार कर के बहुत संतुष्ट थीं. उन्होंने घर छोड़ कर राकेश व सारिका को अपना महत्त्व व उन की जिम्मेदारियों का एहसास कराया था. साथ ही अंजलि के व्यक्तित्व की कुछ विशेषताओं से संजीव को परिचित करा कर उसे सही राह पर लाई थीं. उन का मिशन पूरी तरह सफल रहा था.

बच्चों की नाराजगी, पेरेंट्स की दुविधा

इस 4 जुलाई को राजधानी दिल्ली के वसंत विहार इलाके में 11वीं क्लास के एक बच्चे साहिल को पिता की डांट इतनी बुरी लगी कि उस ने आत्महत्या कर ली. उस के कमरे से एक पर्ची मिली है जिस पर लिखा है , सौरी मोम डैड. अपने इकलौते बेटे द्वारा आत्महत्या किये जाने से पूरा परिवार सदमे में है.

हुआ कुछ यों कि साहिल ने दो दिन पहले औनलाइन शौपिंग साइट से ब्लूटूथ बुक करवाया था. बीते बुधवार को उस के पिता के फोन पर इस डिवाइस की डिलिवरी के लिए मेसेज आया तब उन्हें इस बुकिंग के बारे में पता चला. इस के बाद उन्होंने फोन पर ही अपने बेटे को डांट लगाई. उन्होंने साहिल से कहा कि अभी पढ़ाई पर ध्यान देना चाहिए. इतना महंगा ब्लूटूथ मंगवाने की क्या जरूरत थी.

इस बात से 16 वर्षीय साहिल इतना आहत हो गया कि उस ने अपने कमरे में खुद को फांसी लगा ली. घटना के समय साहिल की मां और बहन घर पर ही थे जब कि पिता अपने कालेज गए थे. पिता को जब आत्महत्या का पता चला तो वे उसे ले कर अस्पताल गए लेकिन वहां पर डौक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया.

इस तरह की घटनाएं आज के युवा और किशोर बच्चों के मन में चल रहे झंझावातों और पेरेंट्स के प्रति विद्रोह के भावों का खुलासा करती हैं.

ऐसा नहीं है कि साहिल ने खुदकुशी का फैसला पिता की केवल एक डांट के आधार पर ले लिया होगा. बल्कि उस के मन में काफी समय से कशमकश चल रही होगी. पिता के रवैयों के प्रति लम्बे समय से नाराजगी के भाव रहे होंगे. नतीजा यह हुआ कि उस डांट ने विद्रोह की चिंगारी को हवा दे दी और वह खुद को उस आग में झोंकने से रोक नहीं पाया.

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देखा जाए तो यहां दोष न पिता का है और न ही बच्चे का है. दोष तो समझ में अंतर का है. एक पिता जब तक यह स्वीकार नहीं करेगा कि मेरे बच्चे की जिंदगी उस की अपनी है, उस के भविष्य की जिम्मेदारी भी उस की खुद की है , तब तक यह समस्या सुलझ नहीं सकती. पेरेंट्स होने के नाते पिता या मां बच्चे को सही दिशा दिख सकते हैं, उसे समझा सकते हैं मगर उस की जिंदगी पर अपना कंट्रोल नहीं जमा सकते.

बच्चे को अपनी जिंदगी खुद जीने दें. उसे एक पैरेंट के रूप में अपने हिसाब से चलाने का प्रयास न करें. बल्कि खुद फैसले लेने दें. उस पर कठोर अनुशाशन न रखें बल्कि कभीकभी ठोकर भी खाने दें ताकि वह अपनी गलतियों से खुद सबक ले.

कभीकभी उस के जज्बातों को समझने का भी प्रयास करें. वह आज के समय का है. उस की सोच को सिरे से नकारें नहीं बल्कि समय के साथ आगे बढ़ने दें. सही गलत का बेसिक अंतर जरूर बताएं मगर उसे अपने तरीके से जीने से न रोकें वर्ना एक असंतुष्टि के भाव मन में गहराते जाएंगे.

अमेरिका में किए गए एक अध्ययन के मुताबिक 11 से 12 वर्ष के बच्चों के पेरेंट्स सब से ज्यादा अकेले और परेशान पाए जाते हैं. इस उम्र में यानी टीनएज की शुरुआत में मां को बच्चों की वजह से सब से अधिक तनाव से गुजरना पड़ता है. एक मां को उस वक्त ज्यादा दुख नहीं होता जब बच्चे अपना अलग घर बना लेते हैं बल्कि दुख तब होता है जब वे मानसिक और भावनात्मक दूरी का एहसास कराते हैं.

किशोरावस्था के दौरान बच्चे और मातापिता के बीच का रिश्ता बड़े ही नाजुक दौर से गुजर रहा होता है. इस समय जहाँ बच्चे का साक्षात्कार नए अनुभवों से हो रहा होता है वहीँ भावनात्मक उथलपुथल भी हावी रहती है. इस उम्र में न केवल बच्चे के अंदर हजारों हार्मोनल चेंज होते हैं बल्कि वे उग्र और अपनी मर्जी चलाने वाले बन जाते हैं. वे खुद को साबित करने और अपना व्यक्तित्व निखारने की जद्दोजहद में लगे होते है. विपरीत लिंग के प्रति आकर्षण भी बढ़ रहा होता है.

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ऐसे में अगर आप जान लें कि आप के बच्चे के दिमाग में क्या चल रहा है तो इस स्थिति से निपटना शायद आप के लिए आसान हो जाएगा .जब भी समय मिले तो बच्चे के साथ समय बिताएं. उस से बातचीत करें. उस की भावनाओं को समझें उस की समस्याएं सुलझाने में अपना सहयोग दें.  तानाशाही रवैये के बजाय दोस्ताना व्यवहार रखें.

5 टिप्स: ढीली त्वचा में ऐसे लाएं कसाव

प्रेगनेंसी के बाद या जब आप अपना वजन कम करती हैं तो, पेट या फिर जांघों के आस पास की त्‍वचा में ढीलापन आ जाता है जिससे वह जगह देखने में बड़ी ही भद्दी नजर आती है. प्रेगनेंसी में वजन बढ़ जाता है और जब आप बहुत तेजी से वजन कम करती हैं तो त्‍वचा में जो लचीलापन होता है वह भी चला जाता है और काफी वक्‍त के बाद वापस आता है या फिर आता ही नहीं है. अगर आप धीरे धीरे वजन कम करती हैं तो यह आपके लिये फायदेमंद रहेगा क्‍योंकि इससे आपकी त्‍वचा एक दम से ढीली नहीं होगी.

आपको कुछ ऐसे आसान होममेड टिप्स बताएंगे जिसे आजमाने से आप दुबारा अपनी त्‍वचा का खोया हुआ लचीलापन और कसाव वापस पा सकती हैं.

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हमेशा हाइड्रेट रहें

दिन में कम से कम 8 गिलास पानी पियें. इससे आपको अपनी त्‍वचा में बदलाव महसूस होगा. अगर त्‍वचा में पानी की कमी रहती है तो त्‍वचा रूखी और झुर्रियों से भरी दिखती है.

प्रोटीन युक्‍त आहार

खाएं प्रोटीन खाने से मसल्‍स दुबारा बनने शुरु हो जाते हैं और त्‍वचा का लचीलापन वापस आ जाता है. अपने आहार में दालें, बींस, चिकन और मछली आदि शामिल करें.

लचीलापन वापस लाने वाले आहार खाएं

अपने आहार में विटामिन ए, सी, ई और के शामिल करें. इससे त्‍वचा के अंदर कोलाजेन बनने की प्रक्रिया शुरु होगी जो कि त्‍वचा में लचीलापन लाता है. इसलिये आपको ढेर सारे मेवे खाने चाहिये जिसमें जिंक और सीलियम होता है.

अपनी स्‍किन को ब्रश करें

त्‍वचा पर स्‍क्रब और ब्रशिंग करने से डेड स्‍किन निकल जाती है. ऐसा हर रोज करें जिससे खून का सर्कुलेशन बढ़े और नई सेल्‍स की ग्रोथ हो.

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कच्‍चे फल और सब्‍जियां खाएं

अपनी डाइट में ढेर सारे फल और सब्‍जियां शामिल करें क्‍योंकि इनमें विटामिन्‍स और मिनलल्‍स होते हैं जो स्‍किन को टाइट बनाते हैं.

पनीर की इस नई रेसिपी को ऐसे बनाएं

धनिया पनीर रेसिपी आपको बेहद पसंद आएगी. यह डिश टेस्टी होनो के साथ-साथ बनाने में भी काफी आसान है. तो आइए जानते हैं कि इस धनिया पनीर रेसिपी कैसे बनाया जाता है.

सामग्री

धनिया पत्ता

हरी मिर्च (2)

लहसुन की कलियां (2)

गरम मसाला पाउडर (1 चम्मच)

हल्दी पाउडर (1 चम्मच)

नींबू का रस (2 चम्मच)

पनीर (250 ग्राम)

प्याज (1)

अदरक (1 चम्मच)

लाल मिर्च पाउडर (1 चम्मच)

धनिया पाउडर (1 चम्मच)

रिफाइन्ड औइल (2 चम्मच)

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बनाने की वि​धि

सबसे पहले पनीर को काट लें और एक बड़े से बोल में रख लें.

अब इसमें लाल मिर्च पाउडर, धनिया पाउडर, गरम मसाला पाउडर, नमक और नींबू का रस डालें

हल्के हाथ से मिलाएं ताकि पनीर के सभी टुकड़ों पर मसाले और नींबू का रस लग जाए.

अब धनिया पत्ता को अच्छी तरह से धो लें और बारीक काटकर मिक्सी में पीस लें और साथ में हरी मिर्च भी पीस लें.

एक पैन में तेल गरम करें और अदरक-लहसुन का पेस्ट डालें.

थोड़ी देर चलाएं और फिर कटा प्याज डालकर भूनें और जब प्याज हल्की ब्राउन हो जाए तो धनिया और मिर्च का पेस्ट डाल दें.

अब बचे मसाले ऊपर से डाल दें और नमक स्वादानुसार ऊपर से डालें. अब मैरिनेट किए हुए पनीर के टुकड़े डालें और फिर एक बोल में गर्मागर्म परोसें.

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एक तीर दो शिकार : भाग 1

आरती अपने बेटेबहू से नाराज हो कर अपनी बेटी अंजलि के घर आ गई. अब आरती का अगला कदम जहां अपने बेटेबहू को अपनी अहमियत बताना था वहीं किसी और की भी अक्ल ठिकाने लगाने का काम उसे करना था.

अटैची हाथ में पकड़े आरती ड्राइंगरूम में आईं तो राकेश और सारिका चौंक कर खडे़ हो गए.

‘‘मां, अटैची में क्या है?’’ राकेश ने माथे पर बल डाल कर पूछा.

‘‘फ्रिक मत कर. इस में तेरी बहू के जेवर नहीं. बस, मेरा कुछ जरूरी सामान है,’’ आरती ने उखड़े लहजे में जवाब दिया.

‘‘किस बात पर गुस्सा हो?’’

अपने बेटे के इस प्रश्न का आरती ने कोई जवाब नहीं दिया तो राकेश ने अपनी पत्नी की तरफ प्रश्नसूचक निगाहों से देखा.

‘‘नहीं, मैं ने मम्मी से कोई झगड़ा नहीं किया है,’’ सारिका ने फौरन सफाई दी, लेकिन तभी कुछ याद कर के वह बेचैन नजर आने लगी.

राकेश खामोश रह कर सारिका के आगे बोलने का इंतजार करने लगा.

‘‘बात कुछ खास नहीं थी…मम्मी फ्रिज से कल रात दूध निकाल रही थीं…मैं ने बस, यह कहा था कि सुबह कहीं मोहित के लिए दूध कम न पड़ जाए…कल चाय कई बार बनी…मुझे कतई एहसास नहीं हुआ कि उस छोटी सी बात का मम्मी इतना बुरा मान जाएंगी,’’ अपनी बात खत्म करने तक सारिका चिढ़ का शिकार बन गई.

‘‘मां, क्या सारिका से नाराज हो?’’ राकेश ने आरती को मनाने के लिए अपना लहजा कोमल कर लिया.

‘‘मैं इस वक्त कुछ भी कहनेसुनने के मूड में नहीं हूं. तू मुझे राजनगर तक का रिकशा ला दे, बस,’’ आरती की नाराजगी उन की आवाज में अब साफ झलक उठी.

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‘‘क्या आप अंजलि दीदी के घर जा रही हो?’’

‘‘हां.’’

‘‘बेटी के घर अटैची ले कर रहने जा रही होे?’’ राकेश ने बड़ी हैरानी जाहिर की.

‘‘जब इकलौते बेटे के घर में विधवा मां को मानसम्मान से जीना नसीब न हो तो वह बेटी के घर रह सकती है,’’ आरती ने जिद्दी लहजे में दलील दी.

‘‘तुम गुस्सा थूक दो, मां. मैं सारिका को डांटूंगा.’’

‘‘नहीं, मेरे सब्र का घड़ा अब भर चुका है. मैं किसी हाल में नहीं रुकूंगी.’’

‘‘कुछ और बातें भी क्या तुम्हें परेशान और दुखी कर रही हैं?’’

‘‘अरे, 1-2 नहीं बल्कि दसियों बातें हैं,’’ आरती अचानक फट पड़ीं, ‘‘मैं तेरे घर की इज्जतदार बुजुर्ग सदस्य नहीं बल्कि आया और महरी बन कर रह गई हूं…मेरा स्वास्थ्य अच्छा है, तो इस का मतलब यह नहीं कि तुम महरी भी हटा दो…मुझे मोहित की आया बना कर आएदिन पार्टियों में चले जाओ…तुम दोनों के पास ढंग से दो बातें मुझ से करने का वक्त नहीं है…उस शाम मेरी छाती में दर्द था तो तू डाक्टर के पास भी मुझे नहीं ले गया…’’

‘‘मां, तुम्हें बस, एसिडिटी थी जो डाइजीन खा कर ठीक भी हो गई थी.’’

‘‘अरे, अगर दिल का दौरा पड़ने का दर्द होता तो तेरी डाइजीन क्या करती? तुम दोनों के लिए अपना आराम, अपनी मौजमस्ती मेरे सुखदुख का ध्यान रखने से कहीं ज्यादा महत्त्वपूर्ण है. मेरी तो मेरी तुम दोनों को बेचारे मोहित की फिक्र भी नहीं. अरे, बच्चे की सारी जिम्मेदारियां दादी पर डालने वाले तुम जैसे लापरवाह मातापिता शायद ही दूसरे होंगे,’’ आरती ने बेझिझक उन्हें खरीखरी सुना दीं.

‘‘मम्मी, हम इतने बुरे नहीं हैं जितने आप बता रही हो. मुझे लगता है कि आज आप तिल का ताड़ बनाने पर आमादा हो,’’ सारिका ने बुरा सा मुंह बना कर कहा.

‘‘अच्छे हो या बुरे, अब अपनी घरगृहस्थी तुम दोनों ही संभालो.’’

‘‘मैं आया का इंतजाम कर लूं, फिर आप चली जाना.’’

‘‘जब तक आया न मिले तुम आफिस से छुट्टी ले लेना. मोहित खेल कर लौट आया तो मुझे जाते देख कर रोएगा. चल, रिकशा करा दे मुझे,’’ आरती ने सूटकेस राकेश को पकड़ाया और अजीब सी अकड़ के साथ बाहर की तरफ चल पड़ीं.

‘पता नहीं मां को अचानक क्या हो गया? यह जिद्दी इतनी हैं कि अब किसी की कोई बात नहीं सुनेंगी,’ बड़बड़ाता हुआ राकेश अटैची उठा कर अपनी मां के पीछे चल पड़ा.

परेशान सारिका को नई आया का इंतजाम करने के लिए अपनी पड़ोसिनों की मदद चाहिए थी. वह उन के घरों के फोन नंबर याद करते हुए फोन की तरफ बढ़ चली.

करीब आधे घंटे के बाद आरती अपने दामाद संजीव के घर में बैठी हुई थीं. अपनी बेटी अंजलि और संजीव के पूछने पर उन्होंने वही सब दुखड़े उन को सुना दिए जो कुछ देर पहले अपने बेटेबहू को सुनाए थे.

‘‘आप वहां खुश नहीं हैं, इस का कभी एहसास नहीं हुआ मुझे,’’ सारी बातें सुन कर संजीव ने आश्चर्य व्यक्त किया.

‘‘अपने दिल के जख्म जल्दी से किसी को दिखाना मेरी आदत नहीं है, संजीव. जब पानी सिर के ऊपर हो गया, तभी अटैची ले कर निकली हूं,’’ आरती का गला रुंध गया.

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‘‘मम्मी, यह भी आप का ही घर है. आप जब तक दिल करे, यहां रहें. सोनू और प्रिया नानी का साथ पा कर बहुत खुश होंगे,’’ संजीव ने मुसकराते हुए उन्हें अपने घर में रुकने का निमंत्रण दे दिया.

‘‘यहां बेटी के घर में रुकना मुझे अच्छा…’’

‘‘मां, बेकार की बातें मत करो,’’ अंजलि ने प्यार से आरती को डपट दिया, ‘‘बेटाबेटी में यों अंतर करने का समय अब नहीं रहा है. जब तक मैं उस नालायक राकेश की अक्ल ठिकाने न लगा दूं, तब तक तुम आराम से यहां रहो.’’

‘‘बेटी, आराम करने के चक्कर में फंस कर ही तो मैं ने अपनी यह दुर्गति कराई है. अब आराम नहीं, मैं काम करूंगी,’’ आरती ने दृढ़ स्वर में मन की इच्छा जाहिर की.

‘‘मम्मी, इस उम्र में क्या काम करोगी आप? और काम करने के झंझट में क्यों फंसना चाहती हो?’’ संजीव परेशान नजर आने लगा.

‘‘काम मैं वही करूंगी जो मुझे आता है,’’ आरती बेहद गंभीर हो उठीं, ‘‘जब अंजलि के पापा इस दुनिया से अकस्मात चले गए तब यह 8 और राकेश 6 साल के थे. मैं ससुराल में नहीं रही क्योेंकि मुझ विधवा की उस संयुक्त परिवार में नौकरानी की सी हैसियत थी.

‘‘अपने आत्मसम्मान को बचाए रखने के लिए मैं ने ससुराल को छोड़ा. दिन में बडि़यांपापड़ बनाती और रात को कपड़े सिलती. आज फिर मैं सम्मान से जीना चाहती हूं. अपने बेटेबहू के सामने हाथ नहीं फैलाऊंगी. कल सुबह अंजलि मुझे ले कर शीला के पास चलेगी.’’

‘‘यह शीला कौन है?’’ संजीव ने उत्सुकता दर्शाई.

प्यार का ऐसा अंजाम तो सपने में भी नहीं सोचा

सोशल मीडिया पर जहां मी टू जैसे कैंपेन चल रहे हैं, वहीं एक मौडल को इस की कीमत अपनी जान दे कर चुकानी पड़ी. वजह, फेसबुक फ्रैंड ने ही मौडल बनने आई कुलीग के साथ ऐसी हरकत कर डाली कि उसे अपनी जान से हाथ धोना पड़ा.

मलाड (पश्चिम) में माइंडस्पेस के पास झाड़ियों के बीच ट्रैवल बैग में 20 साल की मौडल की लाश मिलने से हड़कंप मच गया. बैग के अंदर एक महिला की लाश थी जिस के सिर पर चोट थी. उस के शव को कुशन और बेडशीट से कवर किया हुआ था.

हालांकि सीसीटीवी फुटेज में एक कार दिखी है जिस के अंदर बैठे एक शख्स ने सड़क किनारे सूटकेस फेंका था. इसी के आधार पर पुलिस ने आरोपी की पहचान की और उसे उस की बिल्डिंग से पकड़ लिया गया. आरोपी की पहचान 20 साला मुजम्मिल सईद के रूप में हुई. आरोपी सेकंड ईयर का छात्र है. वह मिल्लत नगर अंधेरी (पश्चिम) में रहता था. वहीं मृतका का नाम मानसी दीक्षित है जो राजस्थान से मुंबई मौडल बनने का सपना ले कर आई थी.

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पुलिस के मुताबिक, मानसी राजस्थान के कोटा शहर की रहने वाली थी, आरोपी मुजम्मिल सईद हैदराबाद का रहने वाला है. मानसी आरोपी से इंटरनेट के जरीए मिली थी. दोनों ने अंधेरी स्थित आरोपी के फ्लैट में मुलाकात की थी. दोपहर में दोनों के बीच किसी बात पर बहस हो गई, जिस के बाद मुजम्मिल सईद ने गुस्से में मानसी को किसी चीज से सिर पर मारा जिस से उस की मौत हो गई.

घटना को अंजाम देने के बाद सईद ने मानसी के शव को बैग में भरा और अंधेरी से मलाड तक एक प्राइवेट कैब बुक की. इस के बाद उस ने मलाड के माइंडस्पेस के पास झाड़ियों में बैग को फेंक दिया और वहां से फरार हो गया.

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पुलिस को इस घटना की जानकारी कैब ड्राइवर ने दी. कैब ड्राइवर ने सईद को झाड़ियों में बैग फेंक कर आटोरिक्शा में फरार होते देखा था. पुलिस ने तुंरत मौके पर पहुंच कर मामले की जांच शुरू की और मानसी का शव बरामद कर लिया.

मुजम्मिल ने बताया कि हादसे के दौरान मानसी उस के फ्लैट में थी. उस ने गुस्से में मानसी के सिर पर स्टूल मार दिया जिस से अनजाने में मानसी की मौत हो गई. आरोपी ने हत्या की बात कबूल कर ली है.

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