सिंगार को दुनियाभर की औरतें अपना जन्मसिद्ध अधिकार मानती हैं. सिंगार बिना औरत रह ही नहीं सकती. औरत शहर की हो, गांव की या जंगल की, वह किसी न किसी तरह खुद को सजा-संवार कर ही रखना चाहती है. सिंगार के बिना वह खुद को मुकम्मल नहीं देखती. सिंगार के लिए अगर उसे अपने शरीर को छिदवाना या गुदवाना भी पड़े तो वह उससे भी परहेज नहीं करती है, फिर चाहे कितना भी दर्द क्यों न हो. आप यह देखकर आश्चर्य में पड़ जाएंगे कि भारत ही नहीं बल्कि दुनिया भर में आदिवासी महिलाएं सिंगार को लेकर कितनी उतावली और उत्साहित हैं. उनके सिंगार तो आपको आश्चर्य में डाल देंगे -

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