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छोटी सरदारनी: क्या परम की बीमारी की सच्चाई मेहर से छिपा पाएगा सरब?

कलर्स के शो, ‘छोटी सरदारनी’ में सरब, परम की बीमारी के बारे में सुनकर हैरान है. लेकिन वह मेहर से अपना दर्द छिपा रहा है ताकि मेहर के आने वाले बच्चे की जिंदगी को किसी तरह का नुकसान ना हो. पर क्या मेहर समय रहते परम की बीमारी के बारे में पता लगा पाएगी. आइए आपको बताते हैं क्या होगा शो में आगे…

झूठी रिपोर्ट देता है सरब

अब तक आपने देखा कि सरब, परम के ट्यूमर की रिपोर्ट की जगह मेहर को झूठी रिपोर्ट देता है ताकि वह किसी तरह का तनाव ना ले, लेकिन हरलीन और डौली, मेहर को परम की फ्रिक करने का झूठा नाटक बताते हैं, जिसे सुनकर सरब को गुस्सा आ जाता है. सरब, हरलीन और डौली को अलग ले जाकर परम के ट्यूमर का सच बताता है और कहता है कि इस बारे में मेहर को पता नही लगना चाहिए.

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डौक्टर से मिलेगा सरब

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आज आप देखेंगे कि मेहर, सरब को कहीं जाते हुए देखेगी, जबकि सरब कहेगा कि वह औफिस में है. दूसरी तरफ, सरब होटल जाकर परम की डौक्टर संजना से मिलेगा और कहेगा कि जितने भी पैसे चाहिए वो दे देगा, लेकिन ये बात किसी को पता नही लगनी चाहिए. मेहर सरब की ये बातें सुनकर हैरान हो जाएगी. साथ ही मेहर को इस बात का यकीन हो जाएगा कि सरब कोई न कोई बात छिपा रहा है.

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अब देखना ये है कि क्या सरब, परम की बीमारी का सच मेहर से छिपाने में कामयाब हो पाएगा? जानने के लिए देखते रहिए ‘छोटी सरदारनी’, सोमवार से शनिवार, रात 7:30 बजे, सिर्फ कलर्स पर.

शादी में ज्यादा खर्च से बचना है तो अपनाएं ये 5 तरीके

अक्सर शादी ब्याह में लोगों के ज्यादा पैसे खर्च हो जाते हैं. जितना इंसान सोचता है उससे कुछ ज्यादा ही खर्च हो जाते हैं. कई बार ज्यादा खर्च हो जाने की वजह से उसे उधार लेना पड़ता है. एक तो वैसे ही शादी का खर्च ऊपर सें उधार होने पर अलग ही टेंशन हो जाती हैतो कुछ ऐसे तरीके हैं जिन्हें अपनाकर आप फालतू के खर्चों से बच सकते हैं और आपके ऊपर ना ही उधार होगा और ना ही कोई टेंशन..

  1. कपड़ों और ज्वेलरी पर खर्च

सबसे पहले तो आप कपड़ों पर होने वाले खर्च से बच सकते हैं. यहां पर बात दुल्हन के कपड़ों की हो रही है. हर कोई चाहता है कि वो सुंदर दिखे अपनी शादी में ऐसे में वो डिजाइनर लहंगा बनवाती हैं और जिसका इस्तेमाल एक बार ही होता है सिर्फ शादी पर उसके बाद कभी नहीं…तो उसके पैसे वेस्ट ही लगते हैं ऐसे में आप दुल्हन के सुंदर से सुंदर जोड़े को रेंट पर यानी कि किराए पर ले सकती हैं इससे आपके पैसे भी बचेंगे और आपको सोचना भी नहीं पड़ेगा कि इस कपड़े का शादी के बाद करेंगे क्या ? साथ ही आप ज्वेलरी भी किराए पर ही लें सकती हैं क्योंकि लहंगे के साथ उसका सेट भी आपको साथ में ही मिल जाएगा इस तरह से आप कई हजार रुपये बचा सकती हैं जिनका इस्तेमाल दूसरे कामों में हो सकता है.साथ ही जब मार्केट में कुछ ऑफर चल रहा हो तभी शॉपिंग करें शादी की इससे भी काफी हद तक पैसे बचेंगे आपके.

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2. आपकी खुद की मेकअप किट हो

दुल्हन अक्सर तैयार होने के लिए पार्लर जाती है जहां पर पार्लर वाली अपना मेकअप किट इस्तेमाल करती है दुल्हन को तैयार करने में और फिर मनचाहा पैसा वसूलती है कि हमने ये किया वो किया करके तो यदि आपकी अपनी खुद की मेकअप किट होगी तो पार्लर वाली आपसे ज्यादा पैसा नहीं लेगी और आप रेडी भी हो जाएंगी वैसे तो कोशिश करें कि यदि आपकी कोई दोस्त जो अच्छा मेकअप करती हो तो और भी अच्छा होता है वो आपको तैयार कर देगी और यदि नहीं तो आपकी खुद की मेकअप किट इस्तेमाल करें इससे आप काफी हद तक पैसा बचा सकती हैं.

3. स्पेशल और कम आइटम ही रखें

कई बार लड़की वालें खाने में ज्यादा आइटम रखने के चक्कर में पैसे बर्बाद कर देते हैं और लोगों को पसंद भी नहीं आते तो कोशिश ये करनी चाहिए कि वही आइटम रखें जो लोग खा सकें और साथ ही उन्हें पसंद भी आए.ऐसे भी आप काफी हद तक पैसे की बचत कर सकते हैं.

4. बजट बनाने के बाद भी एक अलग बजट होना चाहिए

आपका शादी के लिए जितना बजट है उसी बजट में कुछ पैसे अलग से रखें औऱ उसके बाद खर्च करना शुरू करें इससे आपको फायदा ये होगा कि उतने ही बजट में आपका काम हो जाएगा साथ यदि पैसा ज्याद लगता है तो आपके बचाए हुए पैसे ही जाएंगे यानी कि आपको उधार नहीं लेना पड़ेगा.

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5. मैरिज हौल पहले से बुक करके रखें

यदि आप मैरिज हौल बुक कर रहें हैं शादी नजदीक आने का वेट मत करें बल्कि जब कुछ औफर चल रहा हो और शादी में अभी टाइम हो तभी बुक कर लें क्योंकि उस वक्त कम पैसे में आपका हौल बुक हो जाऐगा इससे आपकी और भी बचत होगी.

‘पुलिस कमिश्नर सिस्टम‘ से रुकेगा अपराध

नोएडा पुलिस के दामन पर लगे दाग और लखनऊ में खराब होती कानून व्यवस्था पर उठ रही आवाजों को रोकने के लिये उत्तर प्रदेश सरकार ने इन दोनो जिलों में कमिश्नरी सिस्टम लागू कर दिया है. उत्तर प्रदेश में पुलिस के राजनीतिक दुरूपयोग पुराना इतिहास है. ऐसे में पुलिस कमिश्नरी सिस्टम के रूप में पुलिस को मिलने वाले अधिकार से जनता का कितना लाभ होगा समझने वाली बात है. दिल्ली और हैदराबाद में पुलिस कमिश्नरी सिस्टम कितनी सफल रही है यह वहां की पुलिस के कारनामों से समझ आता है.

देश में राजधानी दिल्ली सहित 15 राज्यों के 71 शहरों में पुलिस कमिश्नरी सिस्टम लागू है. देश का सबसे चर्चित निर्भया कांड दिल्ली पुलिस के दामन पर दाग सा है. निर्भया को न्याय मिलने में जिस तरह से देरी हुई वह दिल्ली के कमिश्नरी सिस्टम को दिखाता है. 2012 से 2019 के बीच दिल्ली पुलिस कितनी बेहतर हुई यह ‘पुलिस वकील’ संघर्ष और ‘जेएनयू प्रकरण’ में पुलिस की विवेचना से समझा जा सकता है. ‘जेएनयू प्रकरण’ में उसकी जांच इसका उदाहरण है. छात्र ही नहीं वहां के शिक्षकों तक के मुकदमें नहीं लिखे गये दिल्ली पुलिस आरोपियो के गलत फोटो जारी करके लोगों को भ्रमित कर रही. जेएनयू के पहले अदालत में पुलिस वकील संघर्ष में उसकी नाकामी पूरे देश ने देखी है. पुलिस अपने ही महिला अफसर को न्याय नहीं दिला पाई.

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दिल्ली की ही तरह से हैदराबाद एक और शहर है जहां पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू है. हैदराबाद पुलिस कितनी पेशेवर है यह अभी एक घटना ने इसको बता दिया है. हैदाराबाद में महिला डाक्टर का अपहरण करके उसके साथ बलात्कार, फिर हत्या और बाद में पहचान छिपाने के लिये जला दिया जाता है. हैदराबाद की पेशेवर पुलिस जब आरोपियों को घटना स्थल पर ले जाती है तो 4 निहत्थे आरोपी हैदराबाद की बहादुर हथियारीधारी पुलिस के 10 जवानों पर इतना भारी पडते है कि उनको रोकने के लिये पुलिस को 4 आरोपियों को गोली मार देनी पड़ती है. आरोपियों के मरने से सारी विवेचना और दरकिनार हो जाती है.

दिल्ली और हैदराबाद में वही पुलिस  कमिश्नरी सिस्टम लागू है जो अब उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ और नोएडा में लागू हो गया है. नोएडा में आईपीएस वैभव कृष्ण का एक विवादित वीडियो जारी होने के बाद पुलिस विभाग में रिश्वतखोरी का एक बड़ा खुलासा हुआ. जिसके तार राजधानी लखनऊ ही नहीं सरकार और संगठन तक से जुडे दिख रहे थे. योगी सरकार ने जनता के ध्यान को अपराध और रिश्वतखोरी के जंजाल से दूर रखने के लिये पुलिस प्रणाली की जगह कमीश्री सिस्टम को लागू कर उसमें उलझाने का काम किया है.

आईएएस बनाम आईपीएस की लडाई है कमीश्नर सिस्टम :    

पुलिस को जब भी अधिक अधिकार मिलते है वह उनको दुरूपयोग करती है. यही कारण है कि पुलिस को प्रशासनिक अधिकार कम से कम दिये जाते रहे है. पुलिस को नियंत्रण में रखने के लिये प्रशासन को अधिक जवाबदेह माना जाता है. दोनो ही स्तर के अधिकारियों की टेनिंग और कार्यशैली में भी अंतर होता है. उत्तर प्रदेश में वैसे ही पुलिस राजनीतिक दबाव में काम करती है. मायावती और अखिलेश सरकार में खुद भाजपा इस बात को बारबार कहती थी. यही कारण है कि 1990 के बाद 4 बार भाजपा के मुख्यमंत्री बने पर पुलिस को ज्यादा अधिकार देने का काम नहीं किया. प्रतापगढ के विधायक रघुराज प्रताप सिंह के खिलाफ मायावती सरकार की पुलिस ने किस तरह से काम किया सभी हो पता है. भाजपा ही उस समय पोटा के दुरूपयोग की बात कर रही थी. भाजपा के दखल के बाद ही पोटा कानून खत्म किया गया था.

नाम बदलने से अगर सुधार होता तो योगी सरकार की परेशानियां कभी नहीं बढ़ती. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कुर्सी पर बैठते ही नाम बदलने की शुरूआत सी कर दी थी. नाम बदलने से हालात बदलने के टोटके पर प्रदेश सरकार अभी भी कायम है. उत्तर प्रदेश में बढ़ते अपराधों को रोकने के लिये पुलिस के पुराने सिस्टम की जगह पर उत्तर प्रदेश के 2 जिलों लखनऊ और नोएडा में ‘कमिश्नरी सिस्टम’ को लागू किया गया है. उत्तर प्रदेश सरकार के द्वारा ‘कमिश्नरी सिस्टम’ को अपराध रोकने का ‘ब्रम्हास्त’ बताया जा रहा है. यह दावा भी किया गया कि ‘कमिश्नरी सिस्टम’ को 1977 से रोका गया था. जिस हिम्मत का काम विपक्ष ही नहीं भाजपा की कल्याण सिंह, राम प्रकाश गुप्त और राजनाथ सिंह सरकार नहीं कर पाई वह काम योगी सरकार ने कर दिखाया है.

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कैसे कम होगी आम आदमी की मुश्किले :

‘कमिश्नरी सिस्टम’ को लागू करने के समय यह संदेश भी जनता को दिया जा रहा है कि अब तक पुलिस के पास अधिकार कम थे. हर काम में पुलिस को डीएम और कमीश्नर का मुंह देखना पड़ता था. वहां से पुलिस को समय पर आदेश नही मिलता था जिसकी वजह से अपराध को रोका नहीं जा पा रहा था. अब ‘कमिश्नरी सिस्टम’ इन कमियों को दूर कर देगा. ‘कमिश्नरी सिस्टम’ पुलिस महकमे के लिए उम्मीद से ज्यादा देने वाला फैसला है. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसको ‘यूपी की आम जनता के हित में लिया ऐतिहासिक फैसला माना है.’ मुख्यमंत्री ने कहा है कि ‘आम आदमी के लिए अब त्वरित न्याय होगा. आम लोगों के दरवाजे पर ही न्याय मुहैया होगा. यह फैसला लगातार बेहतर हो रही कानून व्यवस्था को और और बेहतर करेगा. जब तक पुलिस में भ्रष्टाचार खत्म नहीं होगा. थानो पर मुकदमे दर्ज नहीं होगे तब तक आम आदमी को न्याय नहीं मिल सकेगा.

योगी सरकार ने कहा कि पिछले कई दशकों से यूपी में पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू करने की मांग कई दशको से उठ रही थी. धरमवीर कमीशन (तीसरे राष्ट्रीय पुलिस आयोग) ने 1977 भी पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू करने की सिफारिश की थी. नौकरशाही के एक बड़े तबके और राजनीतिक आकाओं ने सालों से इसे दबा कर रखा था. अब तक राजनीतिक इच्छाशक्ति के अभाव में यूपी में कमिश्नर सिस्टम लागू नहीं हो पाया. पूर्व में कोई भी मुख्यमंत्री इसे लागू नहीं कर पाया. सरकारें पुलिस को फ्री हैंड देने से डरती रहीं. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपनी दृढ राजनीतिक इच्छाशक्ति के कारण इसको लागू करने का साहस किया. उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री हेल्पलाइन की शुरूआत बडे जोरशोर से हुई थी. उसमें आने वाली ज्यादातर शिकायतों का केवल कागजी निस्तारण हो रहा है.

बढ़ेगा पुलिस का राजनीतिक दुरूपयोग

पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू करने के पक्ष में राजनीतिक संरक्षण में अपराधियों, माफियाओं व अपराध को बढावा देने वालों के दिन अब खत्म हो जायेंगे. मुख्यमंत्री ने हर विरोध को दरकिनार करते हुये त्वरित, पारदर्शी और जनहित के लिये कमिश्नर सिस्टम को लागू कर दिया है. पुलिस को पर्याप्त अधिकार के साथ पर्याप्त जवाबदेही वाला यह कानून लागू होने के बाद अब दंगाइयों, उपद्रवियों के बुरे दिन, बल प्रयोग के लिए पुलिस को नहीं करना पड़ेगा मजिस्ट्रेट का इंतजार नहीं करना होगा. अब जो दंगा करेगा, उपद्रव करेगा, आमजन और पुलिस पर हमला करेगा सार्वजनिक संपत्तियों को बर्बाद करेगा, उससे सीधे निपटेगी पुलिस. अब गुडों, माफियाओं, सफेदपोशों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई के लिए पुलिस को मजिस्ट्रेटों के कार्यालयों में भटकना नहीं पड़ेगा पुलिस को खुद होगा गुंडों, माफियाओं और सफेदपोशों को चिन्हित कर उनके खिलाफ त्वरित कार्रवाई का पूरा अधिकार होगा.

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अपराधियों, माफियाओं और सफेदपोशों के असलहों के लाइसेंस कैंसिल करने के लिए भी पुलिस के पास हुए सीधे अधिकार होगे. 151 और 107, 116 जैसी धाराओं में पुलिस को गिरफ्तार कर सीधे जेल भेजने का अधिकार होगा. देश के 15 राज्यों के 71 शहरों जिनमें दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, बंगलुरू, अहमदाबाद, राजकोट, बड़ौदा, हैदराबाद, त्रिवेंद्रम आदि शामिल हैं, वहां ये सिस्टम लागू है. सवाल उठता है क्या इन राज्यों में अपराध नहीं है ? ऐसे में साफ लगता है कि उत्तर प्रदेश में बढ़ते अपराधों से लोगों का ध्यान हटाने के लिये योगी सरकार ने यह फैसला लागू किया है. पुलिस के ताकतवर होने से इसके दुरूपयोग का खतरा बढ़ेगा. नागरिकता कानून के विरोध में राजधानी लखनऊ में हिंसा के मामलें में पुलिस पर पक्षपात के गंभीर आरोप लगे है. पुलिस से यह मांग हो रही है कि वह घटना के दिन वाले सभी वीडिया जारी करके दिखाये कि जिन लोगों को पकड़ा गया वह वीडियों में हिंसा करते कहा दिख रहे है ?

ऐसे करें मेहंदी की खेती

भारत में पुराने जमाने से मेहंदी का इस्तेमाल प्रसाधन के रूप में होता आया है. मेहंदी का प्रयोग शादीविवाह, दीवाली, ईद, क्रिसमस औैर दूसरे तीजत्योहार वगैरह पर लड़कियां और सुहागिन औरतें करती हैं.

ऐसा माना जाता है कि मेहंदी का प्रयोग प्राचीन मिस्र के लोग भी जानते थे. यह समा जाता है कि मेहंदी का प्रयोग शीतकारक पदार्थ के रूप में शुरू हुआ.

प्राचीनकाल से ही मेहंदी की पत्तियां तेज बुखार को कम करने और लू व गरमी के असर को दूर करने में इस्तेमाल होती रही हैं.

मेहंदी का वैज्ञानिक नाम ‘लासोनिया इनर्मिस’ है, जो मोनोटाइप कुल से संबंधित है. यह पौधा आमतौर पर उत्तरी अफ्रीका और दक्षिणी पश्चिमी एशिया का देशज है. इसे संस्कृत में मंडिका, रक्तगर्मा, रंगागी, अरबी में हिना, अलखन्ना, हिंदी में मेहंदी, बंगाली में महेंदी, मेंदी, मराठी में मेंधी, गुजराती में मेदी, मेंदी, तेलुगु में गोरंती, तमिल में मारियांडि, मारुथानी, कन्नड़ में मलीलांची, गोरंत, मलयालम में मैलांची, पोंटलासी, उडि़या में बैंजाति, कश्मीर में मोहूज, पंजाब में मेंहदी, मुंडारी में भिंदी या बिंड के नाम से इसे जाना जाता है.

यह पौधा छोटीछोटी पत्तियों वाला बहुशाखीय और ाड़ीनुमा होता है और इस का उत्पादन पर्सिया, मेडागास्कर, पाकिस्तान और आस्ट्रेलिया में होता है.

भारत में मेहंदी की खेती आमतौर पर पंजाब, गुजरात, मध्य प्रदेश और राजस्थान में होती है. इस के उत्पादन के महत्त्वपूर्ण केंद्र हरियाणा में गुड़गांव, फरीदाबाद व गुजरात के सूरत जिले में बारदोलीर व माधी है, जहां मेहंदी की पत्तियों के कुल उत्पादन का 87 फीसदी हासिल होता है.

राजस्थान में मेहंदी का उत्पादन पाली जिले की सोजत और मारवाड़ जंक्शन तहसीलों में होता है और सोजत कसबे में मेहंदी पाउडर और पैस्ट बनाने का काम होता है. सोजत की मेहंदी देशविदेश में काफी मशहूर है. इस की खेती रंजक प्रदान करने वाली पत्तियों की वजह से ही की जाती है.

यों करें खेती : मेहंदी का पौधा अकसर सभी तरह की मिट्टियों में रोपा जा सकता है, लेकिन आर्द्रताग्राही भारी मिट्टी में यह अच्छी तरह पनपता है. इस की खेती क्षारीय मिट्टी में नहीं की जा सकती है, पर यह जमीन में मौजूद थोड़़ी क्षारीयता सह लेता है. इस का प्रवर्धन बीजों या कलमों द्वारा किया जाता है.

बीजों को नर्सरी में क्यारियों में बोआई करने से पहले कुछ दिन तक पानी से भर कर रखा जाता है. बीजों को 20-25 दिन तक जल्दीजल्दी पानी बदलते हुए भिगोया जाता है. उस के बाद मार्चअपै्रल माह में बोआई करते हैं. एक हेक्टेयर में 7-12 किलोग्राम तक बीजों की जरूरत होती है. पौधे की ऊंचाई 45-60 सैंटीमीटर हो जाने पर उन्हें जुलाईअगस्त माह में खेतों में प्रतिरोपित कर देते हैं. खेतों में 2 पौधों के मध्य 3 फुट की दूरी रखी जाती है.

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बारिश के पानी से इस की पैदावार अच्छी होती है, पर बारिश न होने पर हर दिन सिंचाई करना जरूरी है. ज्यादा बारिश से फसल में कीड़े लग सकते हैं जो मेहंदी की पत्तियों को खा जाते हैं और तेज धूप में यह कीड़ा अपनेआप ही खत्म हो जाता है.

पहले 2-3 सालों में मेहंदी का उत्पादन कम होता है, पर उस के बाद फसल की कटाई साल में 2 बार अपै्रलमई और अक्तूबरनवंबर माह में की जाती है. अक्तूबरनवंबर माह के दौरान गरमी की फसल कटाई करने पर अच्छी और उत्तम किस्म की फसल हासिल होती है, जबकि अपै्रलमई माह में हासिल दूसरी फसल रंग कम देती है.

मेहंदी की फसल की कटाई आमतौर पर ट्रेंड मजदूरों द्वारा की जाती है. अक्तूबरनवंबर माह की कटाई में मजदूरों की मांग अधिक होने के चलते फसल की कटाई महंगी पड़ती है, जबकि दूसरी कटाई में औफ सीजन होने से मजदूरी अपेक्षाकृत कम लगती है. एक बार लग जाने पर पौधे कई सालों तक लगातार पनपे रह सकते हैं.

फसल में गुड़ाई करने के बाद बारिश का पानी अधिक पहुंचाने के लिए गड्ढे बनाए जाते हैं. फसल की कटाई के बाद उस की कुटाई की जाती है और इस के बाद पत्तियों को बडे़बडे़ बोरों में भर देते हैं.

मेहंदी का औसतन भाव प्रति 40 किलोग्राम 800-1,000 रुपए तक होता है. मेहंदी की परंपरागत घुटाई खरल में करने पर बहुत तेज रंग आता है, पर बढ़ते व्यावसायीकरण के चलते इस की क्वालिटी में कमी आई है.

आजकल पत्तियों से पाउडर बनाने के लिए थ्रेशर मशीन में चरणबद्ध तरीके से पिराई कर के फिर प्लोवाइजर नाम की मशीन से इस की बारीक पिसाई की जाती है. इस मशीन में पत्तियों का चूरा डालने से पहले प्रति 40 किलोग्राम मेहंदी में 3 किलोग्राम तेल, 300 ग्राम डायमंड व 100 ग्राम मीठा सोडा मिलाते हैं, जिस से मेहंदी के रंग को उड़ने से रोका जा सकता है. इसी वजह से इसे रंग तेल प्रक्रिया भी कहते हैं. इस विधि से तैयार मेहंदी को पैक कर सप्लाई की जाती है.

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मेहंदी की किस्में

व्यापार में मेहंदी की 3 किस्में हैं, जिन्हें दिल्ली, गुजराती और मालवा मेहंदी कहते  हैं. दिल्ली किस्म चूर्ण के रूप में मिलती है, जबकि गुजराती मेहंदी पत्तियों के रूप में मिलती है. मालवा मेहंदी राजस्थान का उत्पाद है. मेहंदी के प्रमुख खरीदार अल्जीरिया, फ्रांस, बहरीन, सऊदी अरब, सिंगापुर व सीरिया हैं. फ्रांस और यूनाइटेड किंगडम मेहंदी के प्रमुख आयातक देश हैं.

राजस्थान के पाली जिले की सोजत तहसील के बागावास, देवली, खोखरा, रूपावास, साडिया वगैरह गांवों में इस की खेती होती है. हर साल एक बड़ी विदेशी मुद्रा इस के निर्यात से हासिल होती है. अगर इस की  शुरुआती मजदूरी यानी कटाई मजदूरी को कम किया जा सकता हो तो मेहंदी की फसल से करोड़ों रुपए कमाए जा सकते हैं. सोजत की मेहंदी ने देशविदेश में कारोबार को एक नई पहचान दी है.

वैसे, मेहंदी के औषधीय, पारंपरिक, सांस्कृतिक महत्त्व के चलते ही इस का महत्त्व आधुनिक युग में बहुत बढ़ गया है. इस की खेती कर के माली तरक्की की जा सकती है.

सेहत के लिए सोने पर सुहागा है अंकुरित दाल

अंकुरित दालें रक्त को शुद्ध करने में लाभकारी होती हैं जो आपकी त्वचा से लेकर आपके बालों को निखारने में मदद करती हैं. अकुरित दालों को अपने आहार में शामिल कर आप कई बीमारियों से मुक्त हो सकते हैं.तो आईये जानते है अंकुरित दाल के फायदों के बारे में…

* अंकुरित दालें औक्सीजन का एक बहुत अच्छा स्त्रोत हैं. औक्सीजन युक्त खाद्य पदार्थ शरीर में उपस्थित तरह-तरह के वाइरस और बैक्टीरिया को खत्म करने में मदद करते हैं.

* अंकुरित दालें एक संतुलित आहार है जो आपको संतुलित पोषण देता है. अंकुरित दालों से शरीर को प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, विटामिन और खनिज प्राप्त होता है जो की स्वास्थ्य के लिये बहुत लाभदायक है.

* अंकुरित दालें फाइबर का एक प्राकृतिक स्रोत हैं. फाइबर पाचन तंत्र को स्वस्थ रखता है और आपके नाश्ते और लंच के बीच के समय में आपको भरपेट रखता है. इससे आप अस्वास्थ्यकर चीजे खाने से बचते हैं और अपने आहार को भी नियंत्रित कर सकते हैं.

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* अंकुरित दाले विटामिन बी और सी का एक अच्छा स्त्रोत है. अनाज को पूरी रात भिंगोकर रखने से अंकुरित दालों मे उपस्थित आवश्यक पोषक तत्वों की महत्वता और बढ़ जाती है  इसलिये अंकुरित दालें हर तरह से आपको लाभ देती हैं.

* आहार में अंकुरित दालें लेने से शरीर में प्रोटीन की गिनती बढ़ती है. अंकुरित दालों में पर्याप्त मात्रा में वनस्पति प्रोटीन होता है जो एक स्वस्थ आहार को सपोर्ट करता है.

* अंकुरित दाले मीट के लिए एक स्वस्थ विकल्प है. अगर आप शाकाहारी हैं तो अंकुरित दालों को अपने प्रतिदिन के आहार का हिस्सा बनाएं.

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* अंकुरित दालों में कैलोरी की मात्रा बहुत कम होती है. अगर आप अपने वज़न को लेकर चिंतित हैं और कैलोरीज घटाने का आसान तरीका ढ़ूंड रहे हैं तो अंकुरित दालें आपकी जीवन शैली को स्वस्थ रूप देंगी.

* अगर आप को बाल झड़ने की समस्या हैं और आप उससे परेशान है, तो आप अंकुरित दाल की एक कटोरी रोज़ सुबह नाशते में लें. ऐसा करने से आपके बालों को सही पोषण मिलेगा.

युवा होता भारत

नरेंद्र ( स्वामी विवेकानंद) का जन्म 12 जनवरी 1863 को कलकत्ता (कोलकाता) में हुआ. उनके जन्म दिवस को ही हम युवा दिवस के रूप में मनाते हैं. बालक नरेंद्र बचपन से ही बहुत जिज्ञासु स्वभाव के थे और हर वक़्त सवाल करते रहते थे, इस पर कुछ लोग हंसते थे और कुछ मौन हो जाते हैं.

इत्तेफाक से एक दिन स्वामी परमहंस जी से उनकी मुलाकात हुई.. उन्होंने नरेंद्र के सभी प्रश्नों का जवाब दिया.  स्वामी जी से धर्म, वेदांत, संस्कृति की शिक्षा लेकर प्रचार प्रसार करने निकल पड़े. इस बीच उनकी मुलाकात राजस्थान के राजा अजित सिंह से हुई, उन्होंने ही “विवेकानंद” नाम दिया और शिकागो में हो रहे विश्व धर्म सम्मेलन में भेजा. स्वामी विवेकानंद को शून्य काल में बोलने के लिए समय दिया गया था, मगर जब उन्होंने बोलना शुरू किया तो वहां मौजूद सभी देशों के लोग मंत्र मुग्ध हो गए. इसी विश्व धर्म सम्मेलन से उन्होंने बहुत ही कम उम्र में भारत को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाई , इसलिए उनका जन्म दिवस “युवा दिवस” के रूप में मनाया जाता है. स्वामी विवेकानंद में गजब की वाक पटुता और तर्क शक्ति थी. स्वामी विवेकानंद युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत रहे हैं.. उनके आदर्श समाज, युवाओं के लिए मिशाल है. स्वामी विवेकानंद ने युवा शक्ति का केन्द्र शरीर के बजाय मन को माना है और मानसिक शक्तियों के विकास पर जोर दिया है. इसके लिए उन्होनें युवाओं को पथ प्रदर्शन भी किया है.

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उनका कहना है कि “महसूस करो कि तुम महान हो और महान बन जाओगे”. भारत सर्वाधिक युवाओं वाला देश है और देश की दशा दिशा को बदलने के लिए युवाओं की सक्रियता बहुत जरूरी है.  युवाओं को स्वामी विवेकानंद के मूल्यों, आदर्शों को समझने और प्रेरित होनी की जरूरत है.

युवा शब्द वास्तव में आयु, रूप से परे सक्रियता, उत्साह, स्फूर्ति और सकारात्मकता का प्रतीक है.  हम हर वर्ष 12 जनवरी को युवा दिवस के अवसर पर युवाओं के बीच तरह तरह के प्रोग्राम, भाषण, परेड व लेखन द्वारा स्वामी विवेकानंद के विचारों से अवगत कराया जाता है और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है.

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शुभारंभ: क्या रानी की खुशियों के लिए उसके ही ससुराल में चोरी करेगा उत्सव?

कलर्स के शो, ‘शुभारंभ’ में शादी के बाद राजा-रानी की नई जिंदगी का शुभारंभ हो गया है. धीरे-धीरे दोनों के बीच प्यार और नज़दीकियाँ बढ़ रही हैं. वहीं राजा की माँ, आशा ने राजा और रानी को हनीमून पर भेजने का मन बना लिया है, लेकिन क्या कीर्तिदा, आशा की इस चाहत को पूरा होने देगी? आइए आपको बताते हैं क्या होगा शो में आगे…

हनीमून पर स्विट्जरलैंड भेजेगी आशा

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अब तक आपने देखा कि शादी के बाद राजा-रानी की पहली रात आ चुकी है, जिसमें दोनों पहली बार करीब आने वाले होते हैं. दूसरी तरफ कीर्तिदा और गुणवंत ये सुनकर हैरान हो जाते हैं कि आशा ने राजा और रानी के हनीमून के लिए स्विजरलैंड की टिकट बुक कर दी है. वहीं रानी, राजा को बताती है कि उसे हवाई जहाज में बैठने से डर लगता है, तब राजा, रानी का डर मिटाने की एक प्यारी सी कोशिश करता है. 

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पगफेरे के लिए मायके जाएगी रानी

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आने वाले एपिसोड में आप देखेंगे कि, राजा और रानी दोनों पगफेरे के लिए रानी के मायके जाएंगे. वहीं राजा की माँ को पैसे देने का डर रानी के भाई, उत्सव को सताएगा, जिसके लिए उत्सव का दोस्त रानी के ससुराल से पैसे चुराने की सलाह देता है. अपनी माँ से ससुराल की बातें करते वक्त जब रानी उन्हें चाबियाँ दिखाती है, उत्सव के मन में चोरी का ख्याल घर करने लगता है.

अब देखना ये है कि क्या उत्सव अपनी बहन, रानी की खुशियों के लिए उसके ही ससुराल में चोरी करेगा? जानने के लिए देखते रहिए शुभारंभ, सोमवार से शुक्रवार रात 9 बजे, सिर्फ कलर्स पर.

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अपनी तस्वीरों के जरिए फैंस का दिल जीत रही हैं  ये नागिन एक्ट्रेस

मशहूर टीवी अभिनेत्री करिश्मा तन्ना लगातार सुर्खियों में बनी रहती हैं. कभी अपनी एक्टिंग से तो कभी अपनी आदाओं से.. पर इन दिनों करिश्मा अपनी  खूबसूरत तस्वीरों की वजह से चर्चा में है. जी हां, करिश्मा तन्ना की बेहद खूबसूरत तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है. फैंस इन तस्वीरों को खुब पसंद कर रहे हैं.

 

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हाल ही में करिश्मा ने अपनी तस्वीरों को इंस्टाग्राम पर शेयर किया है. करिश्मा इन तस्वीरों में पीले रंग की बिकिनी में नजर आ रही हैं. करिश्मा की ये तस्वीरें खुब वायरल हो रही है. इन तस्वीरों पर खुब सारे कमेंट्स भी आए है. मशहूर प्रोड्यूसर एकता कपूर भी खुद को कंमेंट करने से नहीं रोक पाईं. उन्होंने करिश्मा की इन तस्वीरों पर कमेंट किया, ‘माई गाड’.

करिश्मा तन्ना के काम की बात करे तो करिश्मा कुछ दिनों पहले टीवी शो ‘कयामत की राम’ में नजर आईं थीं. इस सीरीज में उनके काम को काफी सराहा गया था. सीरीज में करिश्मा के अपोजित अभिनेता विवेक दहिया नजर आए थे.

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सीरीज में दोनों की केमिस्ट्री को लोगों ने काफी पसंद भी किया था. फिलहाल करिश्मा कलर्स के मशहूर शो ‘नागिन’ के तीसरे सीजन में लीड रोल में नजर आ रही हैं.

‘जनतंत्र एवं संसदीय संवाद’

बुक रिव्यू : ‘जनतंत्र एवं संसदीय संवाद’

संसद से जुड़ी, उसकी कार्यप्रणाली को उजागर करती हुईं किताबें वैसे तो कई हैं लेकिन ‘डा. राकेश कुमार योगी’ की लिखी हुई यह किताब ‘जनतंत्र एवं संसदीय संवाद’ अपनी तरह की एक अलग किताब है. यह न केवल यह संसद की बाहरी दुनिया से परिचय कराती है बल्कि संसद के पूर्व अध्यक्षों के माध्यम से संसद के आंतरिक रूप, मुद्दे, देशविदेश की नीतियों की सही समीक्षा और व्यवस्थाओं का सही ब्योरा भी देती है. डा. योगी ने लोकसभा और राज्यसभा के कार्यों और  नीतियों को समीप से देखने वाले ‘शिवराज पाटिल’, ‘डा. मनोहर जोशी’, ‘डा. नजमा हेप्तुल्ला’, ‘करिया मुंडा’, ‘हरिवंश और सुभाष कश्यप’ से साक्षात्कारों के माध्यम से किताब को लिखा है. सत्य की पराकाष्ठा पर खरी उतरती यह किताब न केवल संसद को समझने का एक माध्यम है बल्कि संसद के दोनों सदनों की आवश्यकता से सरोकार भी रखती है.

नई दिल्ली की संसद रहीं ‘मीनक्षी लेखी’ पुस्तक की भूमिका को लिखते हुए कहती हैं, “पार्लियामेंट में जो बातचीत होती है उसे पार्लियामेंटरी डिबेट कहते हैं, लेकिन हम इस पुस्तक का नाम संसदीय संवाद यानी पार्लियामेंटरी डाइलाग रख रहे हैं.” बकौल मीनाक्षी लेखी संसदीय बातचीत असल में वाद-विवाद न हो कर बातचीत होनी चाहिए जो एक निश्चित मुद्दे को आगे ले जाए. संसद को इतने समीप से देखने और समझने के बाद जब व्यक्ति उसका आकलन कर लोगों तक पहुंचाता है तो लोग भी इसे भलीभांति समझने में सक्षम होते हैं.

किताब के लेखक ‘डा. राकेश कुमार योगी’ ने ‘लेखक की बात’ के माध्यम से अपना नजरिया लोगों के सामने रखा है. लेखक के किताब लिखने के पीछे का कारण उनके संसद को लेकर विचारों का सटीक न होना था और न ही वह उस की असल संरचना से वाकिफ थे, इसलिए उन्होंने अपने प्रश्नों के समाधान के लिए इस पुस्तक के लेखन को प्रारम्भ किया. लेकिन, अन्य लेखकों की तरह उन्होंने अपने विचार पाठकों पर थोपने की बजाए उन लोगों की विचारधारा का समावेश इस पुस्तक के माध्यम से किया है. जिनके पास संसद का अनुभव भी है और जिन्होंने असल में संसद को करीब से देखा, जाना, समझा और कार्य किया हैं. यह काबिलेतारीफ होने के साथ साथ सराहनीय भी है.

पहला अध्याय ‘अपनी बात को ही ठीक मानना है सबसे बड़ी बाधा’  में महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष, केंद्रीय वाणिज्य मंत्री और छह बार लगातार लोकसभा सांसद रहे शिवराज पाटिल से बातचीत कर पार्लियामेंटरी डिस्कशन, नगरपालिका, विधानसभा का कार्य अनुभव, वाजपेयी, चंद्रशेखर, वी. पी. सिंह, शरद यादव जैसे नेताओं के समय स्पीकर का दृष्टिकोण आदि को बताया गया है. दूसरा अध्याय डा. मनोहर जोशी द्वारा ‘संसदीय संवाद की शक्ति को समझा आना अभी शेष है’ की तर्ज पर लिखा गया है. डा. मनोहर जोशी देश की राजनीति का एक अहम हिस्सा रह चुके हैं. महाराष्ट्र में शिवसेना-बीजेपी गठबंधन की सरकार आने पर उन्होंने दो बार मुख्यमंत्री पद संभाला. 2002 में लोकसभा अध्यक्ष चुने गए. सदन के सदस्य, विपक्षी नेता, मुख्यमंत्री और अध्यक्ष की भूमिकाओं में रहकर संसद के बहुआयामी व भीतरी अनुभव से संसदीय संवाद पर उनकी टिप्पणी सटीक व उपयुक्त है. जोशी ने न केवल अपने कार्यकाल के अंतर्गत हुई विभिन्न कार्यवाहियों को साझा किया है बल्कि अनेक विधेयकों के पास होने न होने के कारणों की समीक्षा भी की है.

अगले चार अध्याय ‘बोलना ही नहीं सुनना भी है जरूरी’ ‘महत्वाकांक्षाओं के संघर्ष के लिए नहीं है संसद,’ ‘मतभेद और असहमतियों के बीच भी आवश्यक संवाद’ व ‘जरूरी है व्यवस्था परिवर्तन’ क्रमानुसार डा. नजमा हेप्तुल्ला, करिया मुंडा, हरिवंश तथा सुभाष कश्यप से बातचीत पर आधारित हैं. उपर्युक्त अध्यायों की खास बात यह है कि यह संसद के विभिन्न सत्रों के साथ ही साथ देश के इतिहास के अतिमहत्वपूर्ण नेताओं और प्रधानमंत्रियों के संवादों को भी पाठक तक पहुंचाते हैं. एक पाठक के रूप में इन चार अध्यायों को मैंने खासतौर पर दिलचस्पी लेते हुए पढ़ा है. इन अध्यायों की दो या तीन पंक्तियों में समीक्षा करना मेरे लिए संभव नहीं हो पा रहा है. व्यवस्था परिवर्तन पर सुभाष कश्यप की टिप्पणी कि “हमारी संसदीय व्यवस्था न ही ब्रिटिश संसदीय व्यवस्था है न ही राष्ट्रपति व्यवस्था है, यह मिश्रित व्यवस्था है,” तर्कसम्मत है. इसी तरह जब नजमा हेप्तुल्ला कहती हैं, “सवाल यहां (संसद में) लिटररी स्पीच देने का नहीं है, यहां पर लोगों के इश्यूज को उठाने का सवाल है, और जिस तरीके से कोई इश्यूज को उठाता है, वह अपना तरीका है,” तो तार्किकता सिद्ध होती है.

मेरे अनुसार इस किताब को लिखने का मूल उद्देश्य लोगों तक इस संदेश को पहुंचाना है कि जनतंत्र में संवाद का क्या महत्व है और संसद इसमें क्या भूमिका निभाती है. किताब यकीनन अपने उद्देश्य को पूर्ण करने में सफल हुई है. राजनीति में रुचि रखने या उसे सही तरह से समझने व सम्मत रखने वाले लोगों को इसे जरूर पढ़ना चाहिए. वे लोग जो संसद के गहन अध्ययन की इच्छा रखते हैं उनके लिए यह किताब काफी सहायक हो सकती है.

मरते दम तक एक्टिंग करूंगी : करीना कपूर

करीना कपूर ने अपने कैरियर की शुरुआत साल 2000 में आई फिल्म ‘रिफ्यूजी’ से की थी. इसी फिल्म से अभिषेक बच्चन का भी कैरियर शुरू हुआ था. ‘रिफ्यूजी’ फ्लौप हो गई थी, लेकिन करीना कपूर और अभिषेक बच्चन स्टार किड होने की वजह से चल निकले.

रिफ्यूजी के बाद करीना कपूर 63 फिल्मों में काम कर चुकी हैं, जिन में उन की फिल्म ‘कभी खुशी कभी गम’, ‘3 इडियट्स’, ‘बौडीगार्ड’, ‘बजरंगी भाईजान’ और ‘गोलमाल-3’ ब्लौकबस्टर फिल्में थीं. जबकि ‘मुझे कुछ कहना है’, ‘हलचल’, ‘चुप चुपके’, ‘जब वी मेट’, ‘गोलमाल’, ‘सिंघम रिटर्न’ और ‘हीरोइन’ सुपरहिट फिल्में थीं.

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वैसे करीना का कहना है कि उन का कैरियर फ्लौप फिल्मों ने बनाया है. 20 सालों का मेरा फिल्मी सफर बड़े कमाल का रहा है. इस बीच मैं ने कई कमाल के लोगों के साथ काम किया. मेरे अंदर वो पैशन है कि मैं मरते दम तक एक्टिंग करती रहूंगी.

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सच तो यह कि मैं ने अपनी हर फ्लौप फिल्म से कुछ न कुछ सीखा और उन्हें अपने कैरियर की सीढ़ी मान कर ऊपर चढ़ती गई.

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गौरतलब है कि करीना कपूर ने 2012 में सैफ अली खान से शादी के बाद भी अपनी एक्टिंग का सफर जारी रखा और दिसंबर 2016 में बच्चा पैदा होने के बाद भी. ऐसे में अगर वह ताउम्र एक्टिंग की बात करें तो गैरवाजिब नहीं है.

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