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हैप्पीनैस में फिसड्डी

प्रसन्नता की कोई परिभाषा नहीं होती. फिर भी अच्छी आय, मुख्य स्वतंत्रताओं, विश्वास, स्वास्थ्य, जीवन की औसत आयु, सामाजिक सहायता व उदारता के पैमानों पर संयुक्त राष्ट्र संघ के सस्टेनेबल डैवलपमैंट सौल्यूशन नैटवर्क ने देशों को हैप्पीनैस क्रम में डाला है. दुनिया के सब से ज्यादा खुश रहने वाले देश10 हैं- फिनलैंड, डेनमार्क, नौर्वे, आइसलैंड, नीदरलैंड, स्विट्जरलैंड, स्वीडन, न्यूजीलैंड, कनाडा, और औस्ट्रिया.

भारत का स्थान विशेष माना जाएगा. 5 साल के विकास, अच्छे दिनों, कुंभों, नर्मदा बचाओ, गंगा यात्राओं, बद्रीनाथ धाम के पुनरुत्थान, सरदार पटेल की मूर्ति, रातदिन नरेंद्र मोदी के तीखे व तेवरभरे भाषणों से भारत को 10 में नहीं तो 15वें20वें स्थान पर तो होना ही चाहिए. अरुण जेटली दिन में 6 बार कहते हैं कि भारत दुनिया की सबसे तेज गति से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था है, चीन से भी आगे.

देश के लोग तो जानते हैं कि वे खुद कितने खुश रहते हैं. संयुक्त राष्ट्र संघ की रिपोर्ट भारत को वर्ष 2019 में 156 देशों में से 140वें स्थान पर रखती है तो कम से कम देश में किसी को आश्चर्य न होगा. हां, इतना आश्चर्य जरूर है कि भारतीय नेताओं के बयानों के अनुसार आतंकवाद की फैक्ट्ररी पाकिस्तान 67वें स्थान पर क्यों है जबकि पाकिस्तान की प्रतिव्यक्ति आय 1,500 डौलर है.

भारत के 1,900 डौलर प्रतिव्यक्ति के मुकाबले. चीन, जो 93वें स्थान पर है, 8,000 डौलर प्रतिव्यक्ति आय वाला देश है. भूटान और बंगलादेश प्रतिव्यक्ति आय में तो भारत से पीछे हैं पर हैप्पीनैस क्रमांक में 95वें व 125वें स्थान पर हैं. भारत की स्थिति गिरी क्यों है? इसलिए कि स्वतंत्रताओं के बावजूद यहां भय का वातावरण बना दिया गया है. आम आदमी हर समय भयभीत रहता है.

अमीर को टैक्स छापेमारों का डर है, गरीब को ऊंची जातियों के कहर का. युवाओं को बेरोजगारी का डर है, औरतों को बलात्कार का. शायद अपराधी भी यहां डरे रहते होंगे क्योंकि जेलों में भी भयंकर करप्शन, आतंक है.

मगर हमारे यहां पंडों की मौज है, इसलिए कि 140वें स्थान वाले भारतीय खुशी के लिए मेहनत की जगह पूजापाठ करते रहते हैं. नतीजा सामने है. बौद्ध भूटानी, इसलामी पाकिस्तानी बेहतर हैं. जय गंगा मैया…

प्रदूषण से बदलता है लोगों का व्यवहार, बनते हैं अपराधी

दुनिया भर के लिए वायु प्रदूषण एक बड़ी चुनौती बनी हुई है. लोग शहरी परिवेश से हों या ग्रामीण से, किसी ना किसी तरह से इस समस्या की गिरफ्त में आए जा रहे हैं. इस वजह से हर साल लाखों लोगों की मौत होती है. पर हाल में सामने आई एक स्टडी में हैरान करने वाले खुलासे हुए हैं. स्टडी की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि प्रदूषित हवा में सांस लेने से लोग ज्यादा क्राइम करने लगते हैं.

जानकारों का दावा है कि प्रदूषित हवा में सांस लेने से लोगों के अंदर बेचैनी पैदा होती है जिससे उनके व्यवहार में बदलाव आता है. शोध में ये बात भी सामने आई कि जिन जगहों पर प्रदूषम अधिक है, वहां क्राइम रेट भी काफी ज्यादा है.

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न्यू यौर्क के कोलंबिया बिजनेस स्कूल में हुए इस शोध में वायु प्रदूषण और पराध के बीच संबंध जानने की कोशिश की गई है. नतीजों में सामने आया कि जिन जगहों पर वायु प्रदूषण का स्तर ज्यादा है वहां क्राइम रेट अधिक होता है.

स्टडी में शामिल जानकारों का मानना है कि हवा में मौजूद प्रदूषित तत्व सेहत और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने के साथ लोगों के व्यवहार को भी प्रभावित करते हैं.

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शोधकर्ता ने बताया, ‘वायु प्रदूषण दुनियाभर के लोगों के लिए एक गंभीर समस्या है, जो दुनियाभर के करोड़ों लोगों को प्रभावित करती है. स्टडी के पहले चरण में शोधकर्ताओं ने पाया कि वायु प्रदूषण और लोगों के आक्रामक व्यवहार में गहरा संबंध है’.

edited by- Shubham

समय पर होना है प्रेग्नेंट तो इस बात का रखें ध्यान

खराब खानपान हमारी सहत को बुरी तरह से प्रभावित करता है. इसका असर दिखने में लंबा वक्त लग जाता है, जब तक असर सामने आता है तब तक काफी देरी हो चुकी होती है. कुछ ऐसा ही जंक फूड और फास्ट फूड के साथ है. इसका सेहत पर काफी बुरा असर होता है.

हाल ही में हुए एक स्टडी में ये बात सामने आई कि जंकफूड का अधिक प्रयोग करने वाली महिलाओं को प्रेगनेंसी के दौरान बहुत परेशानी होती है. शोध में पाया गया कि हफ्ते में तीन चार बार से अधिक जंकफूड का सेवन करने वाली महिलाओं को प्रेग्नेंट होने में ज्यादा वक्त लगता है. वहीं जो महिलाएं जंकफूड का सेवन कम करती है वो ज्यादा सहूलियत और आसानी से प्रेग्नेंट होती हैं.

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औस्ट्रेलिया में हुए इस शोध में ये बात सामने आई कि जो महिलाएं हेल्दी फूड खाती हैं वो ज्यादा फिट रहती हैं और सही वक्त पर गर्भवती भी होती हैं. फर्टिलिटी में भी हेल्दी फूड बेहद लाभकारी होते हैं. इसके अलावा ये बात भी सामने आई कि जिन खाद्य पदार्थों में जिंक और फोलिक एसिड की मात्रा प्रचुर होती है उनके सेवन से गर्भधारण की संभावना ज्यादा बढ़ जाती है. हरे पत्तेदार सब्जियों, मछली, बीन्स और नट्स में ये तत्व पाए जाते हैं.

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edited by- Shubham

समर ड्रिंक : फ्रूट टिंगल

फ्रूट टिंगल औरेंज और नींबू के रस से बनती है. इसमें दोनो फलों की खटाई का टेस्ट आता है. गरमी के मौसम में इसे पीने के बाद आप काफी ठंडक महसूस करेंगे. और इसे बनाना भी काफी आसान है.

फ्रूट टिंगल की सामग्री

संतरे का जूस (30 मिली)

नींबू का रस (15 मिली)

शुगर सिरप  (15 मिली)

ब्लू क्यूरैको (15 मिली)

सोडा

गार्निशिंग के लिए संतरे का स्लाइस

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बनाने की वि​धि

– हरकेन या हाइ बॉल को बर्फ से भरे दें।

– इसमें क्यूरैको और नींबू का रस डालकर हल्के से मिलाएं।

– इसके बाद संतरे का जूस और सोडा डालें.

– संतरे के स्लाइस से इसे गार्निश करें.

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edited by-  saloni

हावेन पपाया सैलेड रेसिपी

गरमी के मौसम में हावेन पपाया सैलेड आपके लिए काफी हेल्दी साबित होगा. ये पपीता, नींबू और नारियल से बनता है. पपीता विटामिन सी और ए का भी अच्छा स्रोत है. इस सैलेड में  आपको एक साथ सारे विटामिन मिल जाएंगे.

सामग्री

वाटरमेलन बौल्स (3 कप)

पाइनएप्पल के टुकड़े (2 कप)

नारियल (1 कप)

वनीला फ्लेवर योगर्ट (3 कप)

पपीता (1 छोटा सा)

नींबू का रस

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बनाने की वि​धि

पपीते को छीलकर इसके बीज को बाहर निकाल लें और इसके छोटे टुकड़ों को नींबू के रस में डालें.

तरबूज, पाइनएप्पल और नारियल और पपीते के टुकड़ों को एक बड़े कांच के बाउल में डालें.

एक दूसरे बाउल में योगर्ट और पपीते के बीजों को मिक्स करें.

इसे फ्रूट्स पर डालें और अच्छे से मिलाएं.

इसे सर्विंग बाउल या पाइनएप्पल के बाहरी हिस्से में रखें.

वैसे इसे पाइनएप्पल के शेल में बोट का आकार देकर सर्व करें.

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4 टिप्स: खाने में ही नही स्किन के लिए भी फायदेमंद है आलू

लोगों को खाने में आलू की सब्जी और उससे बनने वाली अलग-अलग डिश बेहद पसंद आती हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह आपकी स्किन और बालों के लिए भी बहुत असरदार होता है. आलू आपकी स्किन से जुड़ी हर प्रौब्लम जैसे पिंप्लस, डार्क सर्कल आदि से छुटकारा दिलाता है. आइए आपको बताते हैं बालों और स्किन के लिए आलू के रस को किस तरह इस्तेमाल करें…

  1. पिंपल की प्रौब्लम के लिए आलू है असरदार

पिंपल की प्रौब्लम को दूर करने के लिए एक कटोरी में आलू के रस में नींबू का रस और थोड़ी सी मुल्तानी मिट्टी मिलाएं. तैयार हुए पेस्ट को चेहरे पर लगाएं. याद रखें इस पैक को लगाने से पहले चेहरे की सफाई करना न भूलें. आप चाहे तो गुलाब जल से चेहरे को पहले साफ कर सकते हैं. फेस पैक को चेहरे पर 15 से 20 मिनट को लिए लगा रहने दें. इसके बाद हाथों को गीला कर इसे रब करते हुए साफ करें. हफ्ते में 3 से 4 बार इस पैक को लगाएं और फिर देखें कमाल.

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2. डार्क सर्कल को खत्म करने का बेस्ट औप्शन

डार्क सर्कल अच्छे खासे चेहरे को बिगाड़ देते हैं। इसके लिए आलू के रस में रुई को डिप करके रखें और फिर इस रुई को 10 से 15 मिनट के लिए आंखों पर रखें. आप चाहें तो आलू को काटकर उसकी स्लाइस भी रख सकती हैं. यह डार्क सर्कल के साथ-साथ आंखों के आस-पास झुर्रियों को भी दूर करने में मदद करता है.

3. बालों के लिए आलू का रस है इफैक्टिव

बालों के लिए आलू का रस बहुत फायदेमंद है. यह बालों का झड़ना और डेंड्रफ जैसी परेशानियों से छुटकारा दिलाने में मदद करता है. इसके लिए आपको आलू के रस में एलोवेरा जेल और एक चम्मच शहद मिलाकर मास्क तैयार करना है. हफ्ते में एक बार इस मास्क को एक घंटे के लिए बालों में मसाज करते हुए लगाएं. इसके बाद बालों को सिर्फ पानी से धो लें. अगले दिन बालों को शैंपू कर धोएं.

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4. स्किन को करता है क्लीन

आलू का रस त्वचा को साफ करता है. आलू के रस में कच्चा दूध मिलाकर कौटन की मदद से स्किन और गर्दन पर हफ्ते में तीन बार लगाएं. कुछ दिनों में आपको इसका असर नजर आने लगेगा. आपकी स्किन पर एक अलग ही ग्लो नजर आएगा.

edited by-rosy

क्या क्या ख्वाब दिखाए

ख्वाब दिखाना तो महिलाओं का शगल होता है. मेरी पत्नी छंदा को भी सपने दिखाने का शौक है. मैं ने एक दिन छंदा से कहा, ‘‘तुम प्लीज मुझे सपने मत दिखाया करो. यह सब काम तो प्रेमिका का होता है.’’

वह गार्डन में मिलती है. मुसकराती है, जूड़े में लगे फूल को संवारती है, फिर धीरे से कहती है, ‘‘हमारी शादी हो जाएगी न हैंडसम, तब मैं डैड से कह कर दफ्तर में पीए बनवा दूंगी. कार दिलवा दूंगी फिर हम हनीमून के लिए बैंकाक, सिंगापुर जाएंगे. बड़ा मजा आएगा न.’’

प्रेमी ख्वाब के समुद्र में गोता लगाने लगता है. बाद में पता चलता है कि ऐसे ख्वाब के चक्कर उस ने कई पे्रमियों के साथ चलाए हैं. सब को पतंग समझ कर सपनों के आसमान पर जी भर कर उड़ाया है. अपनी जमीन छोड़ चुके प्रेमी हवा में उड़ते रहे और वे अब जमीन के रहे न आसमान के, त्रिशंकु बन कर अधर में लटकते रहे.

मैं ने कहा, ‘‘क्षमा करना देवी, मैं शादीशुदा हूं, घर में सपने दिखाने के लिए पत्नी है. वह रातदिन सपने दिखाती रहती है.’’

प्रेमिका ठहाका मार कर हंसते हुए बोली, ‘‘पत्नी व सपने? अच्छा मजाक कर लेते हो. सपने दिखाना प्रेमिका को ही शोभा देता है. पत्नी तो बेचारी चूल्हाचौका,  झाड़ूपोंछा, बर्तनों की सफाई में, बच्चों की चिल्लपों में उलझी रहती है. उस के पास न तो सोने की फुरसत होती है न सपने देखने का समय बचता है. एक पल पति से बात करने के लिए तरस जाती है बेचारी. घरगृहस्थी का चक्कर होता ही ऐसा है. पत्नी तो ब्लाटिंगपेपर बन कर रह जाती है जहां सारे सपने एकएक कर सोख लिए जाते हैं.’’

इस के बाद प्रेमिका की खिल- खिलाहट काफी देर तक मेरे कान में गूंजती रही. मैं मन ही मन एक फिल्मी गीत गुनगुनाने लगा, ‘‘रात ने क्याक्या ख्वाब दिखाए…’’

सात फेरों के समय पत्नी का हर फेरा किसी रंगीन ख्वाब से कम नहीं होता. पहले फेरे में छंदा ने ख्वाब का पहला फंदा डालते हुए कहा था, ‘‘डार्लिंग, मैं वचन देती हूं कि मेरी ओर से तुम्हें किसी प्रकार की शिकायत नहीं होगी.’’

मैं ने कहा था, ‘‘थैंक्स…’’

दूसरा फेरा लेते हुए वह बोली थी, ‘‘मैं तुम्हें वह सब सुख दूंगी जो हर पति चाहता है.’’

मैं ने प्रसन्न मुद्रा में कहा, ‘‘ख्वाब अच्छा है. बुनती जाओ.’’

वह तुरंत बोली, ‘‘हम अपने बच्चों को जापान पढ़ने भेजेंगे.’’

ख्वाबों के आकाश से वह तारे तोड़ने लगी. तब मेरा पति धर्म जाग गया.

मैं ने पूछा, ‘‘ठंडा पीओगी? सपने बुनने में तुम्हें राहत मिलेगी.’’

‘‘आप ऐसा कैसे बोल रहे हैं. मैं तो अपनी गृहस्थी की नींव मजबूत करने के लिए अपनी कोमल भावनाएं जाहिर कर रही थी. तुम्हारी पत्नी बन रही हूं. खाना बनाऊंगी भी और पेट भर तुम्हें खिलाऊंगी भी. तुम तो जानते ही होगे कि पत्नी अपने पति के दिल पर शासन करने के लिए उस के पेट से ही रास्ता बनाती है.’’

छंदा नारी रहस्य बताती जा रही थी.

‘‘मतलब?’’ मैं ने पूछा.

‘‘जो पत्नी स्वादिष्ठ भोजन बनाना जानती है उस का पति हमेशा उस के आसपास मंडराता रहता है, फुदकता रहता है. उन के बीच सदैव प्रेम बना रहता है. प्यार कभी मुरझाता नहीं.’’

छंदा सप्तपदी की एकएक शपथ में ख्वाबों का उल्लेख करती रही, जिस में कम खर्च, सहनशीलता, आपसी सहयोग ‘…सुख मेरा ले ले मैं दुख तेरा ले लूं’ टाइप के फिल्मी गीत के मुखड़े शामिल थे.

ऐसी बातें कर जो सपने छंदा ने मुझे दिखाए तब मैं ने अपने भाग्य को सराहा था. अपने को दुनिया का सब से भाग्यशाली पति समझा था, जिसे ऐसी सुशील, दूरदर्शी पत्नी मिली थी.

गृहस्थी के विषय में मैं निश्ंिचत था. ख्वाबगाह में आराम से लेटेलेटे चैन की बांसुरी बजाता रहा. तब मुझे क्या पता था कि छंदा ने अभी तो सिर्फ मेरी उंगली पकड़ी है, वह धीरेधीरे पहुंचा पकड़ने की गुप्त तैयारी कर रही है.

छंदा ने कहा, ‘‘सुनो, मिसेज चोपड़ा ने बसंत विहार में 45 लाख का फ्लैट लिया है. क्यों न हम भी एक फ्लैट वहां बुक करा लें. आप का ख्वाब पूरा हो जाएगा.’’

मेरे कान खड़े हो गए. एक पल को मुझे लगा कि मेरा ख्वाब टूटने से कहीं मेरा ब्लडप्रेशर न बढ़ जाए. गंभीर हो कर मैं ने कहा, ‘‘प्रिय छंदा, मध्यवर्गीय परिवार के सपने भी छोटेछोटे होते हैं. बड़ेबड़े सपने देखना हमें शोभा नहीं देता. इन के टूटने पर हम डिप्रेशन के शिकार हो सकते हैं. ख्वाब तो शुद्ध घी की तरह होता है जिसे हर कोई पचा नहीं पाता. अपना यह छोटा सा मकान क्या बुरा है. सिर पर बस, छत होनी चाहिए. रातोंरात तुम्हारे लखपति बनने के ख्वाब ने ही हमें शेयरमार्केट के आकाश से पटक कर जमीन दिखला दी. तब तुम ने इस हादसे को सहजता से लिया था.’’

‘‘ऐसी करवटें तो शेयर बाजार का ऊंट बदलता रहता है. आज घाटे में हैं कल फिर लाभ में आ जाएंगे. सब दिन एक जैसे नहीं होते,’’ कहते हुए वह मुझे फिर से अच्छे दिन आने के ख्वाब दिखाने लगी.

मैं जानता हूं कि बीवी के ख्वाब के पीछे उस की महत्त्वाकांक्षी भावनाएं ही हैं. मैं ने विवाह के समय ली गई शपथ याद दिलाते हुए कहा, ‘‘तुम सभी सुख मुझे दोगी जो हर पति चाहता है.’’ मेरे द्विअर्थी संवाद सुन कर वह ‘धत’ कहते हुए शरमा गई.

मेरी स्थिति ‘खरबूजे को देख खरबूजा रंग बदलता है’ की तरह हो गई. मैं भी पत्नी के साथ रहतेरहते रातदिन ख्वाब देखने लगा हूं. हम शाम को साथसाथ ख्वाब बुनते हैं. ख्वाब देखना आज देश की पहली जरूरत है. ख्वाब ही तो हमें आगे बढ़ाते हैं. पहले जब मैं ख्वाब नहीं देखता था तब रक्तचाप, मधुमेह बीमारी का शिकार था. अब ख्वाब साकार करने के लिए नईनई योजनाएं बना रहे हैं. इसी अनुसार अर्थात चादर के अनुसार पैर पसार रहे हैं. आशा का संचार मन में हो रहा है. छंदा अब पत्नी के रूप में प्रेमिका नजर आने लगी है. नएनए ख्वाबों की जननी है वह, उसे मैं अब ख्वाबों की मलिका कहने लगा हूं.

बुलबुला

सिर्फ 3 महीने के अंदर राकेश की हंसीखुशी से भरी दुनिया जबरदस्त उथलपुथल का शिकार हो गई.

विश्व बाजार में आई आर्थिक मंदी से उस का तांबे का व्यापार भी प्रभावित हुआ था. अपनी पूंजी डूब जाने के साथसाथ सिर पर भारी कर्जा और हो गया था. कहीं से भी आगे कर्ज मिलने की उम्मीदें खत्म हो गई थीं. बाजार में पैसा था ही नहीं.

ऐसे कठिन समय में पत्नी सीमा भी उस का साथ छोड़ कर दोनों बच्चों के साथ मायके चली गई. उसे दुख इस का भी था कि ऐसा करने की न तो सीमा ने उस से इजाजत ली और न उसे इस कदम को उठाने की जानकारी ही दी.

जिस औरत ने 18 साल पहले अग्नि को साक्षी मान कर हमेशा सुखदुख में उस का साथ निभाने की सौगंध खाई थी, उस से ऐसे रूखे व कठोर व्यवहार की कतई उम्मीद राकेश को नहीं थी.

जबरदस्त तनाव से जूझ रहे राकेश का मन अकेले घर में घुसने को राजी नहीं हुआ, तो वह सीमा को मनाने के लिए अपनी ससुराल चला आया.

वहां उस की बेटी शिखा और बेटा रोहित ही उसे देख कर खुश हुए. सीमा, उस के मातापिता और भैयाभाभी शुष्क और नाराजगी भरे अंदाज में उस से मिले.

राकेश खुद को अंदर से बड़ा थका और टूटा हुआ सा महसूस कर रहा था. इस वक्त वह नींद की गोली खा कर सोना चाहता था पर मजबूरन उसे अपनी पत्नी व ससुराल वालों के साथ बहस में उलझना पड़ा.

‘‘क्या हम ने अपनी बेटी तुम्हें मारपीट कर के दुखी रखने के लिए दी थी?’’ बड़े आक्रामक अंदाज में यह सवाल पूछ कर उस के ससुर सोमनाथजी ने वार्तालाप शुरू किया.

‘‘आजकल मैं बहुत टेंशन में जी रहा हूं, पापा. कल रात मेरा गुस्से में सीमा पर जो हाथ उठा, उस के लिए मैं माफी चाहता हूं,’’ बात को आगे न बढ़ाने के इरादे से राकेश ने शांत लहजे में फौरन क्षमा मांग ली.

‘‘जीजाजी, आप ने तो पिछले कई महीनों से दीदी का जीना हराम कर रखा है. न आप से बिजनेस संभलता है और न शराब. गलतियां आप की और गालियां सुनें दीदी. नहीं, हम दीदी को आप के साथ और अत्याचार सहने के लिए नहीं भेजेंगे,’’ उस के साले समीर ने गुस्से से भरी आवाज में ये फैसला राकेश को सुना दिया.

‘‘तुम आग में घी डाल कर मेरी घरगृहस्थी को तोड़ने की कोशिश मत करो, समीर,’’ राकेश ने अपने साले को डांट दिया.

‘‘अभी घर न लौटने का फैसला मेरा है, राकेश,’’ इन शब्दों को मुंह से निकाल कर सीमा ने राकेश को चौंका दिया.

‘‘परेशानियों से भरे इस समय में क्या तुम मेरा साथ छोड़ रही हो,’’ राकेश एकदम से भावुक हो उठा,  ‘‘मुझे बच्चों से अगर दूर रहना पड़ा तो मैं पागल हो जाऊंगा, सीमा.’’

‘‘और अगर मैं तुम्हारे साथ रही तो मेरे दिमाग की नस फट जाएगी,’’ सीमा ने पलट कर क्रोधित लहजे में जवाब दिया.

‘‘बच्चों जैसी बातें मत करो. इस वक्त तुम्हें मेरा साथ देना चाहिए या मेरी परेशानियां और बढ़ानी चाहिए?’’

‘‘राकेश, तुम एक बात अच्छी तरह से समझ लो,’’ सोमनाथजी बीच में बोल पड़े, ‘‘बिजनेस में हुए घाटे को पूरा करने के लिए सीमा अपने जेवर नहीं बेचेगी. उस के नाम पर जो फ्लैट है, उस को बेचने की बात भी तुम भूल जाओ.’’

‘‘इन को बेचे बिना मेरी समस्याओं का अंत नहीं होगा, पापा. इस महत्त्वपूर्ण बात को आप सब क्यों नहीं समझ रहे हैं?’’ राकेश गुस्सा हो उठा.

‘‘तुम्हारे बिजनेस में पहले ही लाखों डूब चुके हैं. ये जेवर ही भविष्य में शिखा की शादी और रोहित की पढ़ाई के काम आएंगे. कल को सिर पर सुरक्षित छत उस फ्लैट से ही मिलेगी तुम सब को. तुम जिस मकान में रह रहे हो, उसे क्यों नहीं बेच देते हो,’’ राकेश की सास सुमन ने तीखे लहजे में सवाल पूछा.

‘‘अपने इस सवाल का जवाब आप को मालूम है, मम्मी. इस मकान में मेरे दोनों छोटे भाइयों का भी हिस्सा है. ये मकान मेरे पिता ने बनाया था.’’

‘‘लेकिन इस की देखभाल पर हमेशा सिर्फ तुम ने अकेले ही खर्च किया है. तुम्हारे दोनों भाइयों को रहने के लिए इस मकान की जरूरत भी नहीं. मेरी समझ से तुम्हें इस मकान को बेचने का पूरा अधिकार है.’’

‘‘भाइयों को हिस्सा दे कर जो मुझे मिलेगा, उस से मेरा कर्ज नहीं…’’

‘‘तब तुम भाइयों को उन का हिस्सा अभी मत दो,’’ सोमनाथजी ने उसे टोकते हुए सलाह दी.

‘‘आप समस्या का समाधान ढूंढ़ने के बजाय उसे और ज्यादा न उलझाइए, पापा.’’

‘‘हम ने अपनी बात कह दी है. न जेवर बिकेंगे, न फ्लैट.’’

‘‘फिर मेरा कर्ज कैसे उतरेगा, सीमा?’’ परेशान राकेश की आंखों में अपनी पत्नी से ये सवाल पूछते हुए डर के भाव साफ पढ़े जा सकते थे.

‘‘मुझे नहीं पता,’’ सीमा ने फर्श को ताकते हुए रूखे से स्वर में जवाब दे दिया.

‘‘ऐसा मत कहो, प्लीज. मेरी कमाई से ही तो जेवर और फ्लैट खरीदा गया है. आज बुरे वक्त में उन्हें बेचने की जरूरत आ पड़ी है, तो…’’

‘‘आप भूल रहे हैं कि मैं भी नौकरी करती हूं. आज हर महीने मुझे भी 20 हजार की पगार मिलती है. जो भी हमारे पास है उस को हासिल करने में मेरा भी योगदान रहा है और वह सब मैं दोनों बच्चों के भविष्य को सुरक्षित बनाने के काम में ही लाऊंगी.’’

‘‘अगर मैं कर्ज नहीं चुका पाया तो मुझे जेल जाना पड़ेगा. इतना भारी अपमान मैं बरदाश्त नहीं कर पाऊंगा, सीमा.’’

‘‘तब आप उस अपमान से बचने का रास्ता ढूंढ़ो. आप की समस्या को हल करने की काबिलीयत और समझ मुझ में नहीं है. न ही ऐसा करना मेरी जिम्मेदारी है,’’ बेहद गंभीर नजर आ रही सीमा अपना फैसला सुना कर झटके से उठी और मकान के अंदर चली गई.

राकेश अपने दोनों बच्चों से 5-10 मिनट बातें कर के लुटापिटा सा अपने ससुर के घर से बाहर निकल आया.

बाहर से खाना खाए बिना वह घर पहुंच गया. उस का मन बहुत दुखी और परेशान था. आंतरिक तनाव को कम करने के लिए उस ने शराब पीनी शुरू कर दी.

इस वक्त उसे अपना आर्थिक संकट नहीं बल्कि सीमा की बेरुखी और परायापन बहुत ज्यादा कष्ट पहुंचा रहे थे.

मैं ने कौन सा सुख सीमा को नहीं दिया? उस की खुशी की खातिर मैं ने अपने घर वालों से संबंध तोड़ दिए थे. आज इसी सीमा ने मुझे डूबने को अकेला छोड़ दिया. जेवरों और फ्लैट की खातिर उस ने पति का साथ न देने का फैसला कितनी आसानी से कर लिया. हमारा रिश्ता कितना कमजोर निकला. मुझे नफरत है उस से. ऐसे विचारों से उलझा राकेश एक के बाद एक शराब के गिलास खाली किए जा रहा था.

अचानक मोबाइल की घंटी बजी तो उसे उठा कर नंबर देखने लगा. गांव से उस की मां आरती का फोन था जो गांव में अपने सब से छोटे बेटे के पास रहती थीं.

नशे से थरथराती आवाज में राकेश ने अपनी मां से बातें कीं. मां की आवाज सुन कर राकेश अचानक ही बेहद भावुक हो उठा था.

‘‘तुम सब का क्या हालचाल है?’’ मां ने यह सवाल पूछ कर अपने बड़े बेटे के दिल पर लगे जख्म को और हरा कर दिया.

‘‘तेरा यह नालायक बेटा बहुत दुखी और अकेला महसूस कर रहा है, मां. आज तो मुझे अपनी जिंदगी ही सब से बड़ा बोझ लग रही है,’’ अचानक ही राकेश की आंखों में आंसू छलक आए तो वह खुद ही हैरान हो उठा था.

‘‘ऐसी गलत बात मुंह से मत निकाल, बेटा. बहू कहां है?’’

‘‘मर गई तुम्हारी बहू, मां.’’

‘‘चुप कर. मेरी बात करा उस से.’’

‘‘वह मुझे अकेला छोड़ कर अपने बाप के घर चली गई है, मां. दोनों बच्चे भी साथ ले गई…यह अकेला घर मुझे काट खाने को आ रहा है, मां.’’

‘‘अपने घर क्यों गई है वह? तुम में झगड़ा हुआ है क्या?’’

‘‘मां, वह अपने स्वार्थ के खातिर मुझे छोड़ गई. मेरा बिजनेस डूब रहा है, तो वह अब क्यों रहेगी मेरे पास? पहले जैसे मेरी गरीब मां और छोटे भाई उसे बोझ लगते थे, वैसे ही अब मैं उसे बोझ लगने लगा हूं. मां…वह मुझे अकेला छोड़ कर भाग गई है.’’

‘‘तू परेशान मत हो, मैं कल आ कर उसे समझाऊंगी तो फौरन वापस घर लौट आएगी.’’

‘‘मैं अब उस की शक्ल भी नहीं देखना चाहता हूं, मां. उसे अपने पति से नहीं, सिर्फ दौलत से प्यार है. उस ने मेरी सुखशांति को नजरअंदाज कर जेवर और फ्लैट चुना. समाज में तड़कभड़क वाली जिंदगी जीने की शौकीन उस औरत को मैं इस घर में कदम नहीं रखने दूंगा.’’

‘‘अपना गुस्सा थूक दे, राकेश. अपने बच्चों की खुशियों की खातिर तुम दोनों को साथ रहना ही होगा.’’

‘‘मां, तू उस औरत की तरफदारी क्यों कर रही है जिसे तू फटी आंख कभी नहीं भाई? जिस ने तेरा मेरे घर में घुसना बंद करा दिया, तू उस की चिंता क्यों कर रही है?’’

‘‘बच्चे नादानी करें तो क्या बड़े भी नासमझी दिखा कर उन का अहित सोचने लगें, बेटा?’’

‘‘मां, मुझे अपनी अतीत की गलतियां सोचसोच कर इस वक्त रोना आ रहा है. मैं सीमा के स्वार्थी स्वभाव को कभी पहचान नहीं पाया. उस के कहे में आ कर मुझे अपनी मां और छोटे भाइयों से दूर नहीं होना चाहिए था.’’

‘‘तू कहां हम से दूर है. तेरे दोनों भाई तेरी बड़ी इज्जत करते हैं. बहू से छिपा कर तू ने कई बार उन दोनों की रुपएपैसों से सहायता नहीं की है क्या?’’

‘‘आज रुपयापैसा भी नहीं रहा है मेरे पास, मां. सारा बिजनेस चौपट हो गया है. वह स्वार्थी औरत मेरे ही रुपयों से खरीदे जेवर और फ्लैट बेचने को तैयार नहीं है. उस की नजर तो इस मकान पर लगी है, पर मैं ऐसा स्वार्थी नहीं जो अपने छोटे भाइयों का हक मार कर यह मकान हड़प लूं…मुझे मर जाना मंजूर है, पर ऐसा गलत काम मैं कभी नहीं करूंगा, मां.’’

‘‘तू ने मरने की बात अब मुंह से निकाली तो तू मेरा मरा मुंह देखेगा.’’

‘‘ऐसा मत कह, मां.’’

‘‘तो तू भी गलत मत बोल.’’

‘‘नहीं बोलूंगा, मां.’’

‘‘देख बेटा, अब और शराब मत पीना. तुझे मेरी सौगंध है.’’

‘‘तुझे वचन देता हूं मां, अब और शराब नहीं पीऊंगा.’’

‘‘फ्रिज में कुछ रखा हो तो खा कर सो जा.’’

‘‘अच्छा, मां.’’

‘‘बेकार की बातें बिलकुल मत सोच. मैं कल सुबह तुम से मिलने आऊंगी.’’

उसे अपनी मां को दिया वचन याद रहा और उस ने शराब नहीं पी. नशे में होने के बावजूद उसे जल्दी से नींद नहीं आई थी. सीमा से जुड़ी बहुत सी बीती घटनाओं को याद करते हुए वह कभी गुस्से तो कभी दुख और अफसोस के भावों से भर जाता. अपने दोनों बच्चे उसे बहुत याद आ रहे थे. अपनी जिंदगी को समाप्त कर लेने का भाव कई बार उस के मन में उठा, लेकिन बच्चों के भविष्य के प्रति अपने उत्तरदायित्व को महसूस करते हुए उस ने आत्महत्या के विचार को अपने मन में मजबूत जड़ें नहीं जमाने दी थीं.

अगले दिन सुबह अपनी मां और दोनों छोटे भाइयों के आने पर ही राकेश की नींद टूटी थी. उस की चिंता ने इन तीनों के चेहरों पर तनाव और घबराहट के भाव पैदा किए हुए थे.

मां मकान की रजिस्ट्री साथ लाई थीं. अपने दोनों छोटे बेटों उमेश और नरेश की रजामंदी से उस ने मकान बेचने के लिए वह रजिस्ट्री राकेश को सौंप दी.

‘‘बेटा, मकान तो फिर बन जाते हैं, पर मैं ने अपना बेटा खो दिया तो उसे कहां से लाऊंगी? इस शहर में तू कुछ भी ले कर नहीं आया था. फिर तू ने अपनी लगन और मेहनत से लाखों कमाए. आज बाजार में मंदी आई है तो ज्यादा दुखी मत हो. यह खराब वक्त भी जरूर बीत जाएगा. मकान बेच कर तू अपने सिर पर बना कर्जे का बोझ फौरन कम कर,’’ अपने बड़े बेटे का प्यार से माथा चूमते हुए उन की पलकें नम हो उठी थीं.

अपने दोनों छोटे भाइयों को गले लगाने के बाद राकेश एक नए उत्साह, हौसले और आत्मविश्वास के साथ आफिस जाने को घर से निकला.

‘तू इस शहर में कुछ भी तो ले कर नहीं आया था,’ अपनी मां के मुंह से निकले इस वाक्य को बारबार मन में दोहरा कर राकेश व्यापार में हुए भारी घाटे के सदमे से खुद को उबरता देख हलका महसूस कर रहा था.

उस दिन वह आफिस में बेहद व्यस्त रहा. उसे नुकसान पहुंचाने वाले कई महत्त्वपूर्ण निर्णय लेने पड़े, पर उन्हें लेते हुए उस का न कलेजा कांपा, न मन को पीड़ा हुई.

उस दिन रात 8 बजे के करीब जब राकेश अपनी ससुराल पहुंचा तो कई हफ्तों से उस के मन पर बना चिंता और तनाव का कोहरा बहुत हद तक छंट चुका था.

राकेश के होंठों पर मुसकान और हाथों में मिठाई का डब्बा देख सीमा और उस के घर वाले असमंजस का शिकार हो गए. अपने बच्चों के साथ हंसताबोलता राकेश उन के लिए पहेली बन गया था. हैरानी के मारे वे अपने मन में उस के प्रति बसे नाराजगी और शिकायत के भावों को भुला ही बैठे.

‘‘तुम्हारे जेवर और फ्लैट अब सुरक्षित हैं, सीमा. हमारे बीच बनी झगड़े की जड़ नष्ट हो गई है. इसलिए सारा सामान समेट कर घर लौटने की तैयारी करो,’’ अपनी पत्नी को ऐसा आदेश देते हुए राकेश रहस्यमय अंदाज में मुसकरा रहा था.

‘‘मार्किट में तो कोई बदलाव आया नहीं है. फिर आप ने कैसे सारी समस्या हल की है?’’ सोमनाथजी ने माथे में बल डाल कर सवाल पूछा.

‘‘मैं ने जो किया है उसे जान कर आप सब क्या करेंगे?’’

‘‘हम यह जानकारी इसलिए चाहते हैं कि कल को तुम सीमा के साथ जेवरों व फ्लैट को ले कर फिर से झगड़ा और मारपीट न शुरू कर दो.’’

‘‘तब सुनिए, मैं ने तांबा घाटे में ही बेचने का फैसला करने के साथसाथ मकान को एक बैंक के पास गिरवी रख दिया है.’’

‘‘तुम्हारी मां और दोनों भाई मकान को गिरवी रख देने के लिए राजी हो गए हैं?’’

‘‘बिलकुल हो गए हैं. आखिर उन का मुझ से खून का रिश्ता है. मैं जेल जाऊं या आत्महत्या कर लूं, ऐसी कल्पना ही उन के दिलों को बुरी तरह से कंपा गई थी. आप सब लोग उन की भावनाओं को नहीं समझ सकेंगे,’’ राकेश के स्वर में मौजूद व्यंग्य के भावों से उस के सासससुर, साले व पत्नी तिलमिला उठे.

सीमा ने चिढ़ कर सवाल पूछा, ‘‘अपना बिजनेस चौपट कर के अब आगे क्या करने का इरादा है?’’

‘‘माई डियर, अपने कैरियर की शुरुआत मैं ने कमीशन एजेंट के काम से की थी और अब फिर से वही बन जाऊंगा. बहुत लंबाचौड़ा व्यापार फैलाया था, पर वह सारी सफलता पानी का बुलबुला साबित हुई.

‘‘वह बुलबुला बड़ा रंगीन था और अन्य लाखोंकरोड़ों लोगों की तरह मैं किसी पागल की तरह उस के पीछे दौड़ा. जब अपनी नियति के अनुरूप बुलबुला अचानक फूटा तो मैं ने अपने होशोहवास घबरा कर खो दिए थे.

‘‘लेकिन अब मेरी समझ में आ गया है कि बुलबुले तो हमेशा अचानक ही फूटते हैं. लालच के कारण जैसा बेवकूफ मैं इस बार बना हूं वैसा फिर कभी नहीं बनूंगा,’’ राकेश ने नाटकीय अंदाज में अपने कान पकड़े और फिर ठहाका मार कर हंस पड़ा.

‘‘यों हंस कर अपना सबकुछ बरबाद होने की खुशी जाहिर कर रहे हो क्या? समाज में अब कितनी बेइज्जती के साथ जीना पड़ेगा, जरा इस पर भी कुछ सोचविचार करो,’’ सीमा का चेहरा एकाएक ही गुस्से से लाल हो उठा.

राकेश ने किसी दार्शनिक के अंदाज में जवाब दिया, ‘‘सीमा, बाजार की भारी उथलपुथल ने लाखों लोगों को जबरदस्त नुकसान पहुंचाया है. ऐसे संकट का सामना इनसान अलगअलग ढंग से करता है. जो लोग समाज की नजरों में चमकदमक की जिंदगी जीना महत्त्वपूर्ण मानते हैं वे ऐसे कठिन समय में टूट कर बिखर जाते हैं. उन्हें हार्टअटैक पड़ते हैं, वे आत्महत्या करते हैं.

‘‘दूसरी तरह के लोग बदली परिस्थितियों का सामना हौसले और आत्मविश्वास के साथ करते हैं. वे अपनों के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को निभाने के महत्त्व को समझते हैं. अपनों का सहारा और प्रेम उन की ताकत होता है. देखो, मेरी मां और भाइयों ने मेरा साथ दे कर मुझे संकट से निकाल ही लिया है न. जीवन की खुशियां और सुखशांति ऐसे रिश्तों से बनती हैं न कि धनदौलत के अंबार से…पर यह बात शायद तुम नहीं समझोगी.’’

सीमा से कोई जवाब देते नहीं बना. अचानक गहरी उदासी ने उसे घेर लिया और वह गरदन झुकाए लौटने की तैयारी करने कमरे में चली गई.

संघर्ष से सब को गुजरना पड़ता है : अक्षय कुमार

जिस रफ्तार से खिलाडि़यों के खिलाड़ी अक्षय कुमार सफलता की सीढि़यां चढ़ रहे हैं, उन्हें हिट मशीन भी कहा जाए तो अतिशयोक्ति न होगी.

90 के दशक में हिट और ऐक्शन फिल्म देने वाले अभिनेता अक्षय कुमार आज ऐसे मुकाम पर पहुंच चुके हैं कि हर निर्माता निर्देशक उन्हें अपनी फिल्मों में लेना चाहता है. कभी ऐसा वक्त था जब अक्षय कुमार को काम के लिए प्रोडक्शन हाउस के चक्कर लगाने पड़ते थे. ‘खिलाड़ी शृंखला’ ने उन के जीवन को एक अलग दिशा दी और आज वे हिंदी सिनेमाजगत में ऐक्शन हीरो के नाम से मशहूर हैं. उन्होंने केवल एक्शन ही नहीं, हर तरह की फिल्मों जैसे रोमकौम, कौमेडी, थ्रिलर आदि में काम किया है.

मार्शल आर्ट के ऐक्सपर्ट अक्षय कुमार 29 साल से फिल्म इंडस्ट्री में काम कर रहे हैं. वे अपनी अनुशासित दिनचर्या के लिए भी जाने जाते हैं.

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जीवन में संघर्ष के बारे में अक्षय कहते हैं, ‘‘संघर्ष से सब को गुजरना पड़ता है और मेरे लिए भी है. रोज सुबह उठ कर अच्छा काम करने की चाहत और न मिलने पर हताश होना, ये सारी बातें संघर्ष की ही पहचान हैं.’’

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आप स्टंट हमेशा खुद करते हैं, इसे देख कर आज की युवा पीढ़ी भी कोशिश करती है, उन के लिए क्या संदेश देना चाहेंगे, इस पर वे अपनी राय रखते हुए कहते हैं, ‘‘कोई भी स्टंट ऐसे ही नहीं होता, इस के लिए एक बड़ी टीम होती है जो हर बात की निगरानी करती है. ऐसे में किसी को भी स्टंट खुद करने की जरूरत नहीं है. बिना सावधानी के करने पर ये जानलेवा भी हो सकते हैं.

‘‘मैं ने बचपन से स्टंट किए हैं और मुझे कोई खतरा नहीं लगता, लेकिन हमेशा मैं यह कहता आया हूं कि घर पर कभी भी खुद कोशिश न करें,क्योंकि ये संभल कर, सावधानी के साथ किए जाते हैं. मेरे मातापिता ने हमेशा मेरे हर काम पर सहयोग दिया है. मैं पहले एक स्टंटमैन हूं, बाद में अभिनेता बना. फिल्म ‘मैं खिलाड़ी तू अनाड़ी’ के स्टंट के बाद ही मुझे काम मिला था. वरना यहां कोई मेरा गौडफादर नहीं था जिस की वजह से मुझे काम मिला हो. मैं स्टंटमैन बन कर ही आज यहां पर आया हूं.’’

आप की और ट्विंकल की बौंडिंग सालों से अच्छी चल रही है, जबकि आज रिश्तों के माने बदल चुके हैं. आप दोनों की इस गहरी बौंडिंग के पीछे का राज क्या है और अपने टीनेज बच्चों की देखभाल कैसे करते हैं?

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इस सवाल के जवाब में अक्षय बताते हैं, ‘‘हम एकदूसरे के प्रोफैशन में कभी दखलंदाजी नहीं करते, एकदूसरे का सम्मान करते हैं, स्पेस देते हैं आदि. इस से हमारा रिश्ता गहरा रहता है. आज के बच्चे काफी होशियार हैं. वे गलत व सही को समझ सकते हैं. मेरे पिता ने भी मुझे वह आजादी दी थी और किसी भी गलत बात को छिप कर करने से मना किया था.’’

नेताओं के बिगड़े बोल कह दी गंदी बात

“क्या वह राहुल गांधी को इस बात का सुबूत दे पाएंगी कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी उन के पिता हैं?”

यह सवाल अकसर विवादित बयान देने भाजपा नेता विनय कटियार ने संप्रग अध्यक्ष से एक रैली में की.

इस से पहले कटियार ने प्रियंका गांधी पर भी कथित आपत्तिजनक टिप्पणी की थी.

“नरेंद्र मोदी ने पैंट और पैजामा पहनना भी नहीं सीखा था तब पूर्व प्रधानमंत्रियों जवाहर लाल नेहरू और इंदिरा गांधी ने देश की फौज, नौसेना और वायुसेना बनाई थी…”

यह कहना है कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कमलनाथ का.

छींटाकशी का दौर शुरू

नेताओं के बिगड़े बोलों और बेतुके बयानों के लगातार मीडिया में सुर्खियां बनने पर लोगों को एकबारगी फिर यह एहसास हो गया कि चुनावी मौसम आ गया है और इस मौसम में गालियां, एकदूसरे को नीचा दिखाना और छींटाकशी का दौर शुरू होना नेताओं की फितरत है.

वैसे, हमारे देश के कुछ नेता चुनावी मौसम में जरूरत से ज्यादा सक्रिय हो जाते हैं और उन की जबान करेले की तरह कड़वी हो जाती है.

चुनावी समय में कोई धर्म के नाम पर वोट मांगता है तो कोई जाति के नाम पर. इस दौरान सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने का माहौल भी खूब बनाया जाता है.

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सिद्धू भी पीछे नहीं

क्रिकेटर से नेता बने नवजोत सिंह सिद्धू ने पिछले दिनों चुनावी रैली में बोलते हुए कहा,”अल्पसंख्यको, समय आ गया है कि आप वोट की ताकत दिखाओ और उन्हें हराओ जो आप का दुश्मन है. इस जगह आप की आबादी ज्यादा है, इसलिए यह आप के हाथ में है कि किसे बहुमत से जीता सकते हो…”

यह क्या बोल गए आजम खान सपा नेता आजम खान के कथित बोल ने तो मर्यादा की सारी हदें ही लांघ दीं.

आजम खान के ‘अंडरवियर’ वाले विवादित बयान के बाद देश में खासा बवाल मच गया.

हालांकि इस शर्मनाक बयान के बाद निर्वाचन आयोग ने भी कुछ समय के लिए उन के चुनाव प्रचार करने पर रोक लगा दी, तो उत्तर प्रदेश पुलिस ने उन के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की. राष्ट्रीय महिला आयोग ने भी आजम खान को कारण बताओ नोटिस जारी किया है और जवाब मांगा है, बावजूद खान को अपने बयान पर कोई खेद नहीं है.

घटनाक्रम पर आजम खान के बेटे ने अपने पिता का बचाव करते हुए मीडिया से बातचीत में कहा,”आजम खान पर इसलिए काररवाई की गई क्योंकि वह एक मुसलमान हैं.”

उधर आजम खान ने कहा,”मेरे बयान को तोङमरोङ कर पेश किया गया. मैं ने अपने बयान में किसी का नाम नहीं लिया.”

देर से जागा आयोग

आजम खान के अलावा चुनाव आयोग ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, भाजपा नेता व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी और बसपा सुप्रीमो व उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के विवादित बयानों को ले कर भी उन पर कुछ समय के लिए उन के चुनाव प्रचार करने पर प्रतिबंध की घोषणा की.मगर आश्चर्य तो यह है कि इन में से किसी ने भी अपने विवादित बोलों पर न तो खेद जताया और न ही माफी मांगी.

डर्टी पौलिटिक्स पर शीर्ष अदालत ने भी संज्ञान लिया और आयोग की काररवाई को उचित ठहराया.

जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा,”हम कह सकते हैं कि चुनाव आयोग ने अपनी शक्तियों का इस्तेमाल किया. उस ने आचार संहिता तोड़ने वालों पर काररवाई की. लगता है आयोग हमारे आदेश के बाद जाग गया है…”

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ये भी कम नहीं

योगी से मुख्यमंत्री बने आदित्यनाथ भी कङवी बोलों के लिए बदनाम रहे हैं. हिन्दुत्व पर तीखी बयानबाजी और बेतुके बोलों का एक नजारा कुछ दिनों पहले तब दिखा जब योगी आदित्यनाथ ने हनुमान को ही दलित बता कर खासा विवाद खङा कर दिया था, जिसे न तो उन्होंने कभी देखा होगा न जाना होगा.

अच्छा होता अगर योगी आदित्यनाथ आधुनिकता की बात करते, रोजगार, स्वास्थ्य व शिक्षा की बात करते.

भाजपा नेता पीएस श्रीधरन पिल्लई की एक रैली में एक विवादित बयान से तो सनसनी फैल गई. पिल्लई ने कहा, “मुसलिमों की पहचान उन के कपड़े खोलने से हो जाएगी.”

हालांकि सोशल मीडिया पर यह वीडियो मौजूद होने के बावजूद पिल्लई ने इस प्रकार की टिप्पणी करने से इनकार किया है.

उधर केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे भी कहां पीछे रहने वाले थे. बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को उन्होंने राजनीति छोङ घूंघट में रहने की नसीहत दे डाली.

इस बयान की भी कङी निंदा की गई और उन्हें पुरूषवादी सोच का कहा गया, बावजूद अश्विनी चौबे को भी अपने इस बोल पर अफसोस नहीं है.

सोशल मीडिया बन रहा हथियार

सोशल मीडिया में राहुल गांधी को ले कर जितना मजाक उड़ाया जाता है वह भी तथाकथित विपक्ष के नेताओं की सोचीसमझी साजिश का हिस्सा हो सकता है.  कुछ कांग्रेसी नेताओं ने प्रधानमंत्री मोदी पर भी व्यक्तिगत हमले किए. मोदी की पत्नी यशोदाबेन तक को चुनावी रैलियों में टारगेट किया गया.

बौलीवुड हीरोइन से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लङ रहीं उर्मिला मातोंडकर के राजनीति में प्रवेश के बाद से उन्हें निशाना बना कर लैंगिक हमले किए गए. उन पर जानलेवा हमला भी किया गया जिस के बाद उन्होंने पुलिस सुरक्षा की मांग तक कर डाली.

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बयान के पीछे मंशा क्या

दरअसल, इस तरह के बयान अकसर रणनीति का हिस्सा होते हैं ताकि मतदाताओं का ध्रुवीकरण किया जा सके. इस को हवा देते हैं आज का सोशल मीडिया, जिस पर तथ्यों को और भी तोङमरोङ कर पेश किया जाता है.

चुनावी रणनीतिकार मानते हैं, “दो विभिन्न राजनीतिक दलों द्वारा नेताओं के कङवे बोल चुनाव प्रचार का ही एक हथकंडा हो सकता है जिस में पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की हामी होती है. जाहिर है, इस से एक माहौल बनता है और वोटरों का ध्रुवीकरण हो सकता है.”

नैतिक पतन

मगर सवाल यह भी है कि क्या भारतीय राजनीति इतनी दूषित हो गई  है कि वोट की खातिर या फिर वोटों के ध्रुवीकरण के लिए नैतिक मूल्यों को भी ताक पर रख दिया जाए?

देश की राजनीति अगर इतनी गंदी हो गई तो लोकतंत्र की बात करने वाले सफेदपोश नेताओं को व्यक्तिगत कमैंट्स करने की आजादी किस ने दे दी?

इस के लिए जिम्मेदार कौन हो सकता है- क्या नेता, जो बेशर्मी की हद पार कर जाते हैं या फिर जनता, जो अब तक ऐसे नेताओं को वोट की चोट से राजनीति से ही बाहर नहीं कर पा रही?

क्या यह डर्टी पौलिटिक्स नहीं है?

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