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मेरा भाई मुझसे नफरत करता है. मैं क्या करूं?

सवाल

मैं 22 वर्षीय युवती हूं और अपने भाई भाभी के साथ रहती हूं. मेरी समस्या यह है कि मेरा भाई मुझ से नफरत करता है. मैं नहीं जानती मेरे प्रति उस के इस व्यवहार का क्या कारण है? सलाह दें कि मैं अपने प्रति भाई की नफरत को कैसे कम करूं क्योंकि भाई की नफरत के साथ उस घर में रहना मेरे लिए मुश्किल हो रहा है.

जवाब

सब से पहले आप अपने भाई से उस के मन में आप के प्रति नफरत का कारण जानने की कोशिश करें. भाई की नफरत का कारण बचपन की कोई घटना हो सकती हैं. जिस की वजह से भाई के दिल पर आप के प्रति नाराजगी पैदा हो गई हो. भाइयों को कई बार लगता है कि बहन संपत्ति में हिस्सा मांगेगी और बिना मांगे ही उसे शत्रु मान लेते हैं. वैसे भी हमारे देश में पुरुष अपने को बहन का रखवाला मानते हैं और लड़के पिता की तरह पेश आते हैं. आप भाई के अच्छे मूड को देख कर उस से बात करें. भाभी को अपनी समस्या बताएं और आप उस कड़वाहट को आमनेसामने बैठ कर सुलझाने का प्रयास करें. बात करने से ही नफरत का कारण पता चलेगा और समस्या का समाधान भी तभी निकल पाएगा.

RAKHI SPECIAL: ये हैं बौलीवुड के स्टार सिबलिंग्स

सेलिब्रिटीज के ये भाई-बहन अपने स्टार भाई बहनों की तरह ही काफी आकर्षक या खूबसूरत लगते हैं लेकिन उन्हें सुर्खियों में आना पसंद नहीं. जानिए बौलीवुड हस्तियों के स्टार सिबलिंग्स के बारे में.

करिश्मा और करीना कपूर, परिणीति और प्रियंका चोपड़ा, सनी और बौबी देओल और भी कई भाई बहन हैं, जो बौलीवुड में काम कर रहे हैं जिन्हें आप जानते हैं. लेकिन हम अभी इनके बारे में बात नहीं कर रहे हैं. हम यहां बात कर रहे हैं उन स्टार सिबलिंग्स की, जो थोड़े शर्मीले हैं और अक्सर कैमरे के सामने आने से बचते हैं.

सेलिब्रिटीज के ये भाई-बहन अपने स्टार भाई बहनों की तरह ही काफी आकर्षक या खूबसूरत लगते हैं लेकिन उन्हें सुर्खियों में आना पसंद नहीं. आइए देखते हैं कौन हैं ये बौलीवुड हस्तियों के स्टार सिबलिंग्स..

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अनीषा पादुकोण

अनीषा एक शौकिया गोल्फ खिलाड़ी हैं, जो दुनिया में भारत का प्रतिनिधित्व करने और एक ओलंपिक पदक अर्जित करने के लिऐ कड़ी मेहनत कर रही हैं. अनीषा पादुकोण की सुपरस्टार बहन दीपिका पादुकोण को आज पूरी दुनिया में पहचाना जाता है पर उनकी बहन अनीषा को बहुत कम लोग पहचानते हैं. अनीषा को अब तक की जानकारी के हिसाब में कैमरे के सामने आखरी बार पिछले साल यानि 2016 में, फिल्मफेयर्स अवार्डस में बहन दीपिका पादुकोण और माता पिता के साथ देखा गया था.

ईशान खट्टर

ईशान, शाहिद कपूर के सौतेले भाई हैं. यूं तो ईशान कैमरे के सामने बहुत कम आते हैं पर इंस्टाग्राम पर ईशान काफी फेमस हैं. उनके इंस्टाग्राम पर लगभग 31 हजार फॉलोअर्स हैं. अगर आप ईशान का इंस्टाग्राम एकाउन्ट देखें तो, फोटोग्राफी के लिए ईशान का प्यार उनके इंस्टा पोस्ट्स से सीधा स्पष्ट होता है. ये कहना बिल्कुल गलत नहीं होगा कि वह काफी आकर्षक लगते हैं और अगर वे अपने बड़े भाई, शाहिद कपूर की तरह बड़े परदे के लिए कुछ करते हैं तो इसमें किसी को कोई आश्चर्य नहीं होगा. ईशान माजिद मजीदी की फिल्म ‘बियाॉन्ज द क्लाउड’ से डेब्यू करने वाले हैं.

रितिका भवनानी

रितिका, आज के समय के बड़े एक्टर कहे जाने वाले रणवीर सिंह की बड़ी बहन हैं. क्या आप ये बात जानते हैं कि रितिका भवनानी, अनिल कपूर की पत्नी सुनीता कपूर से संबंधित हैं. इसका मतलब तो कुछ यूं है कि सोनम कपूर, रणवीर की ममेरी बहन हैं!

हर्षद मल्होत्रा

काफी हौट और आकर्षक सिद्धार्थ मल्होत्रा की तो लम्बी फिमेल फॉलोइंग लिस्ट है. लेकिन ये बात बहुत कम लोग जानते हैं कि सिद्धार्थ के एक बड़े भाई भी हैं. हर्षद मल्होत्रा, सिद्धार्थ की तरह ही आकर्षक हैं पर वे कैमरे से बहुत दूर रहते हैं. हर्षद मल्होत्रा बैंकिंग क्षेत्र में काम करते हैं और नियमित रूप से मुंबई में अपने भाई सिड यानि कि सिद्धार्थ के घर का दौरा करते रहते हैं.

एलन अब्राहम

कई लोग नहीं जानते हैं कि अभिनेता जॉन अब्राहम का एलन नाम का एक छोटा भाई है. किन्हीं छोटे ईवेन्टस में दोनो भाइयों को साथ देखकर लगता है कि दोनों को निश्चित रूप से एक साथ, किसी फिल्म में अभिनय जरूर करना चाहिए.

मानसी जोशी रौय

अभिनेता शरमन जोशी की बहन मानसी जोशी रॉय भी इसी वक्त की अदाकारा हैं. मानसी टेलीविजन अभिनेत्री हैं. अब ये बात तो माननी ही पड़ेगी कि जोशी परिवार गंभीर रूप से प्रतिभाशाली और खूबसूरत लोगों की फैमली है.

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मांगुआ: ईको टूरिज्म का नया ठौर

गरमी की छुट्टियों में पहाड़ से बेहतर और क्या हो सकता है. पश्चिम के उत्तर में हिमालय की पर्वतशृंखला में छुट्टी बिताना तनमन के लिए नई ताजगी से कुछ कम नहीं. दार्जिलिंग, कलिंपोंग कहीं भी जाया जा सकता है. इन के आसपास कई ऐसी जगहें हैं जो रुटीन पहाड़ पर्यटन से जरा हट कर हैं. कुछ साल पहले गंगटोक का मिरीक इसी तरह लोकप्रिय हुआ था. ऐसी ही एक जगह है मांगुआ. यह पर्यटनस्थल दार्जिलिंग जिले में ही है. लेकिन यहां का नजदीकी शहर कलिंपोंग है. स्थानीय लेपचा भाषा में यह मांगमाया के नाम से भी जाना जाता है. मांगुआ दरअसल ईको टूरिज्म के रूप में उभर रहा है.

रात को सियालदह स्टेशन से छूटने वाली दार्जिलिंग मेल से रवाना होने पर अगले दिन सुबह न्यू जलपाईगुड़ी पहुंचा जा सकता है. जलपाईगुड़ी से मांगुआ जाने के रास्ते से ही पर्यटन की मौजमस्ती का लुत्फ उठाया जा सकता है. मांगुआ जाने के रास्ते में लोहापुल में सुबह का नाश्ता किया जा सकता है. लोहापुल के आगे तिस्ता बाजार पड़ता है. तिस्ता बाजार में स्थानीय हस्तशिल्प का सामान मिलता है. तिस्ता बाजार से ही चढ़ाई शुरू हो जाती है. मांगुआ 2 भागों में बंटा है. छोटा मांगुआ और बड़ा मांगुआ. दोनों के बीच दूरी 2 किलोमीटर की है. मांगुआ पहुंचने के रास्ते में नारंगी के बागान के साथ लाल रंग के एक पहाड़ी फूल के पौधे पर्यटकों का स्वागत करते हैं. हालांकि मांगुआ पर्यटन के लिए अभी पूरी तरह से तैयार नहीं हुआ है. इसीलिए इस रास्ते की सड़क थोड़ी दिक्कत पैदा कर सकती है. बड़ा मांगुआ तक रास्ता अच्छा है. इस के बाद का रास्ता फिलहाल ऊबड़खाबड़ है. सड़क है तो पक्की, पर खस्ताहाल है.

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जिंदगी की भागदौड़ के बीच सुकून वाले ईको फ्रैंडली मांगुआ में चायबागान, नारंगी के बागान, नाथुला रेंज, सूर्योदय का नजारा, तिस्ता नदी और कंचनजंगा का प्राकृतिक नजारा मन मोह लेता है. यहां रिवर राफ्ंिटग का भी लुत्फ उठाया जा सकता है.यहां रहने के लिए कई रिजौर्ट हैं. इन में से एक है दार्जिलिंग ब्लौजम ईको टूरिज्म कौम्प्लैक्स. छोटा मांगुआ और बड़ा मांगुआ- दोनों में रिजौर्ट हैं. यह जगह पहाड़ पर एक द्वीप की तरह है. इस के 3 ओर खाई हैं और चौथी ओर पर्वतशृंखला है. रिजौर्ट में कुल 29 बैड हैं. 2, 3 और 4 बैड के रूम भी हैं. कौटेज बहुत ही खूबसूरत है. तमाम सुखसुविधाओं से लैस और मनमोहक साजसज्जा. रिजौर्ट सोलर सिस्टम से चलता है. कमरे से कंचनजंगा का नजारा देखते ही बनता है.

पहले से बुक कर लेने पर न्यूजलपाईगुड़ी में रिजौर्ट की गाड़ी रिसीव करने के लिए पहुंच जाएगी. हां, रिजौर्ट के आसपास और कोई होटलरेस्तरां नहीं हैं लेकिन सुबह के नाश्ते से ले कर लंचडिनर सब रिजौर्ट में उपलब्ध है. रिजौर्ट के पास ही में टकलिंग गांव है, यहां एक पुरानी मोनैस्ट्री है. इस के बाद बड़ा मांगुआ जाया जा सकता है. यहां और्किड समेत तरहतरह के पहाड़ी फूलों के बागान हैं. साथ में औरेंज जूस की एक फैक्टरी है. तिस्ता बाजार के करीब तिस्ता और रंगीत नदियों का संगम है. यहीं से करीब में लवर्स मिडव्यू पौइंट है. यहां से थोड़ी दूरी पर लामाहाट में एक खूबसूरत पार्क है.

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यहां पहुंचने का हवाई रास्ता बागडोगरा से है. बागडोगरा एअरपोर्ट यहां से सब से नजदीक है. इस के अलावा हावड़ा और सियालदह से ट्रेन के जरिए बहुत सारे साधन हैं. हावड़ा से शताब्दी ऐक्सप्रैस, सराईघाट ऐक्सप्रैस. सियालदह से कंचनजंगा ऐक्सप्रैस, दार्जिलिंग मेल, तिस्तातोर्सा, पदातिक ऐक्सप्रैस और न्यू जलपाईगुड़ी है.

बर्थ एनिवर्सरी: आज भी लोगों के दिलों पर राज करती हैं श्रीदेवी

बौलीवुड की मल्लिका और पहली महिला सुपरस्टार के रूप में अपनी पहचान बनाने वाली श्रीदेवी की आज आज 55वीं जयंती है. उनका जन्म 13 अगस्त 1963 को तमिलनाडु के शिकाशी में हुआ था. श्रीदेवी हमारे बीच नहीं है पर आज भी इनके अदाओं के फैंस दीवाने हैं.

श्रीदेवी का फिल्मी करियर के अलावा उनकी निजी जिंदगी भी अक्सर सुर्खियों में रही. श्रीदेवी ने पहले से शादीशुदा फिल्म प्रोड्यूसर बोनी कपूर संग शादी रचाई थी. इन दोनों की लवस्टोरी काफी दिलचस्प है और दोनों कई मौकों पर इसके बारे में बात करते भी नजर आए. आज श्रीदेवी की जयंती के मौके पर हम आपको श्रीदेवी और बोनी कपूर की लव स्टोरी के कुछ मजेदार किस्से बताते हैं…

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खबरों की माने तो  बोनी कपूर से पहले श्रीदेवी एक्टर मिथुन चक्रवर्ती के काफी करीब थीं. ये भी जाता है कि दोनों ने गुपचुप तरीके से शादी भी कर ली थी. लेकिन इससे जुड़ी कोई आधिकारिक जानकारी कभी सामने नहीं आई.

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जब श्रीदेवी एक्टर मिथुन के काफी करीब थी,  उसी दौरान श्रीदेवी ने बोनी कपूर की फिल्म ‘मिस्टर इंडिया’ साइन की थी. बोनी कपूर ने इस फिल्म के लिए श्रीदेवी को काफी पैसे दिए थे. इसी दौरान खबरें सामने आने लगीं कि श्रीदेवी और बोनी कपूर के बीच नजदिकीयां बढ़ रही हैं. जब ये खबर मिथुन तक पहुंची तो वो इस पर बेहद नाराज हुए. रिपोर्ट्स के इस दौरान मिथुन को यकीन दिलाने के लिए श्रीदेवी ने बोनी कपूर को राखी तक बांध दी थी.

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लेकिन बोनी कपूर पहली ही नजर में श्रीदेवी को अपना दिल दे बैठे थे. कहते हैं जब श्रीदेवी की मम्मी उनके लिए 10 लाख फीस मांगा करती थी तो बोनी कपूर 11 लाख दिया करते थे. उन दिनों वैनिटी वैन भी नहीं होती थी, लेकिन बोनी कपूर श्रीदेवी के लिए खासतौर पर मेकअप रूप का इंतजार करते थे.

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साल 1995 में श्रीदेवी की मां का न्यूयार्क के मेनहेटन के एक हौस्पिटल में ब्रेन ट्यूमर का औपरेशन हुआ था.लेकिन ये औपरेशन ब्रेन की गलत साइड पर कर दिया गया और श्रीदेवी की मम्मी की मौत हो गई. इसके बाद श्रीदेवी बुरी तरह टूट गईं थी. उन दिनों बोनी ने श्रीदेवी को आर्थिक तौर भी काफी मदद की. मुश्किल हालात का यही वो दौर था जब श्रीदेवी बोनी कपूर के और करीब आ गईं. बोनी कपूर के शादीशुदा होने के बावजूद श्रीदेवी उन्हें प्यार करने लगी थी.

शमिता शेट्टी ने किया अपने जीजा के निर्देशन में पंजाबी म्यूजिक

फिल्म ‘‘मोहब्बतें’’ फेम अभिनेत्री शमिता शेट्टी अपनी बहन शिल्पा शेट्टी की ही तरह उन अभिनेत्रियों में से हैं, जो कि अपने करियर में एक्टिंग के अलावा काफी कुछ करती आयी हैं. वह इंटीरियर डिजाइनिंग, फैशन डिजाइनिंग, डांसिंग, ट्रेवलिंग भी करती हैं. अब एक बार फिर अपने करियर को नया मोड़ देते हुए शमिता ने पंजाबी संगीत वीडियो ‘‘तेरी मां’’ में कदम रखा है.

मजेदार बात यह है कि इस संगीत वीडियो का निर्देशन उनके जीजा राज कुंद्रा कर रहे हैं. हमेशा नए डांस फार्म्स करने के लिए तैयार शमिता शेट्टी ने डांस के लिए अपने प्यार के चलते इस म्युजिक वीडियो को हामी भरी. इससे पहले शमिता ने ‘शरारा शरारा‘, ‘चोरी पे चोरी‘ और ‘बरस आये बादल‘ जैसे गानों पर अपने धमाकेदार डांस से दर्शकों के बीच अपनी पहचान बनाई है. अब इस पंजाबी म्यूजिक वीडियो से वो अपनी दमदार वापसी करने वाली हैं. टी-सीरीज द्वारा प्रस्तुत इस पंजाबी गाने में शमिता के साथ टिक टौक स्टार,  मानव छाबड़ा नजर आ सकते हैं.

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इस म्यूजिक वीडियो में व्यक्ति के मां और उसकी पसंद की लड़की पर आधारित कहानी दिखाई जाएगी. इसे एक गांव के ढाबे और एक नाइट क्लब सेटअप में शूट किया जा रहा है. इस म्युजिक वीडियो में शमिता शेट्टी पंजाबी कुड़ी के अवतार में हैं, जो कि मजाकिया तौर पर लड़के से कहती है कि वह उसे उसकी मां से ज्यादा प्यार करती है.

इस म्यूजिक वीडियो की चर्चा करते हुए शमिता शेट्टी कहती हैं, ‘‘यह एक मजेदार, पेप्पी पंजाबी गाना है और इसने मुझे वह करने का मौका दिया, जो मुझे सबसे अधिक पसंद है…डांस !!! हमने एक दिन में गाने को मुंबई की प्रचंड गर्मी में शूट किया, लेकिन सच कहूं तो ये मायने नहीं रखता है, क्योंकि टीम के साथ काम करने का अनुभव बहुत ही शानदार था. मुझे अपने जीजू के साथ पहली बार काम करने में बहुत मजा आया. जितना मैं उन्हें जानती हूं, वह बहुत ही पैशिनेट हैं.’’

शमिता शेट्टी ने 2000 में फिल्म ‘‘मोहब्बतें’’ से बौलीवुड में धमाकेदार शुरूआत की थी. लेकिन 2007 में वह अचानक गायब हो गयी. पता चला कि वह इंटीरियर डिजाइनिंग का कोर्स कर रही हैं. फिर 2017 में वह वेब सीरीज ‘यो क्या हुआ ब्रो’ में सुमन राव का किरदार निभाते हुए नजर आयीं. हाल ही में प्रदर्शित फिल्म ‘‘टेनेंट’’ में वह मीरा के किरदार में नजर आयी. वह कहती हैं- ‘‘इन दिनों अभिनय के साथ साथ कई क्षेत्रों में कार्यरत हूं और इंज्वौय कर रही हॅूं.’’ इतना ही नही वह इस वर्ष की शुरूआत में प्रसारित हुए रियालिटी शो ‘‘खतरों के खिलाड़़ी’ सीजन नौ की फाइनालिस्ट रहीं. वह हमेशा फिट नजर आती हैं.पर उनका दावा है कि वह फिट रहने के लिए डाइटिंग नही करती.

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अजब गजब: यहां बिना ईंधन के चलती हैं गाड़ियां

दुनिया में बहुत सी ऐसी जगह है, जो रहस्यों से भरी हैं… और कई ऐसे रहस्य है, जिससे पर्दा आज तक नहीं उठ पाया है. कई ऐसे जगह है, जो रहस्यों से भरी है और इन रहस्यों के बारे में आप नहीं जानते होंगे.

भारत में भी कई ऐसे जगह है, जिसके कई सारे रहस्य है, जो आज तक अनसुलझे ही रह गए. तो आईए आज आपको देश के एक ऐसे रहस्य के बारे में बताने जा रहे हैं जो आज तक पहेली बना हुआ हैं. क्या आपने बिना ईंधन के गाडिय़ों को चलते हुए देखा हैं? जी हां, बिना ईंधन की गाड़ियां भी चलती हैं. लद्दाख में स्थित ‘चुम्बकीय पहाड़ी’ में ऐसा होता है. ये पहाड़ी लद्दाख के लेह क्षेत्र में स्थित है, जहां गाड़ियां खुद ही चलती हैं.

यहां प्रकृति के कई कारनामें आपको देखने को मिल जाएंगे. अगर कोई रात को अपनी गाड़ी एक जगह खड़ी कर दें तो सुबह वह गाड़ी अपनी जगह पर नहीं मिलेगी.

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AC से हो सकते हैं ये साइड इफेक्ट

इस बात में शक नहीं कि ग्लोबल वार्मिंग बढ़ रही है. बारिश की मात्रा कम हो गई है, ठंंड के महीने सिकुड़ते जा रहे हैं. महानगरों सहित छोटे शहरों में भी अब औफिस और घरों में एसी का प्रयोग बढ़ता चला जा रहा है. पहले बच्चे जहां शाम होते ही छत पर चढ़ कर पतंगे उड़ाया करते थे, पार्क में खेलने निकल जाते थे, वहीं अब वे घरों में एसी की ठंडी हवा खाते हुए मोबाइल या टीवी में बिजी नजर आते हैं. गर्मी तेज हो या कम, लोगों को घर, औफिस और कार, हर जगह एसी में रहने की आदत पड़ती जा रही है. लेकिन यह आदत सेहत पर कई तरह के नकारात्मक असर डाल रही है. हालांकि गर्मियों में पूरी तरह से एसी और कूलर के इस्तेमाल से बचा नहीं जा सकता, लेकिन इसका कम से कम इस्तेमाल ही बेहतर है. एसी और कूलर का ज्यादा इस्तेमाल किस तरह से सेहत को नुकसान पहुंचाता है, आइए इस पर एक नजर डालते हैं :

बार-बार पड़ें बीमार

एक रिसर्च के अनुसार, आपको आराम पहुंचाने वाला एसी, स्वास्थ्य के लिए बिल्कुल भी अच्छा नहीं है. एसी, हमारे आस-पास एक आर्टिफिशल टेम्परेचर बनाता है, जो इम्यून सिस्टम के लिए खतरनाक है. ये आपके इम्यून सिस्टम को बुरी तरह प्रभावित करता है. इसके चलते ही आप बार-बार बीमार पड़ते हैं. वे लोग जो एसी में पांच घंटे से ज्यादा बैठते हैं, उन्हें साइनस होने का खतरा बना रहता है क्योंकि ठंडी हवा म्यूकस ग्रंथि को कठोर बना देती है. इसके अलावा खांसी, जुकाम, बुखार की जकड़ में आए-दिन आने की वजह भी एसी की हवा है.

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फंगल इंफेक्शन

कूलर-एसी की ज्यादा ठंडक में बिना ओढ़े सोने से न सिर्फ दमा के मरीजों को बल्कि सामान्य व्यक्तियों की छाती में भी ठंडक या फंगल इंफेक्शन हो जाता है. प्राकृतिक वातावरण में रहने और उसे सहन करने की आदत खत्म होने से हमारा शरीर बीमारियों को तेजी से आकर्षित करने लगता है. बाहर और कमरे के भीतर के तापमान की बात करें तो इनमें आदर्श रूप से 4 डिग्री से ज्यादा का अंतर नहीं होना चाहिए. यदि यह अंतर बहुत ज्यादा है तो आप बीमारी की चपेट में अवश्य आएंगे.

जोड़ों में दर्द

एसी और कूलर से निकलने वाली हवा कई बार शरीर के जोड़ों में दर्द पैदा करती है. गर्दन, हाथ और घुटनों का दर्द ठंडी हवा लगने की वजह से बढ़ जाता है, जो कि अगर लंबे समय तक बना रहे, तो बड़ी बीमारी का कारण भी बन सकता है. अर्थराइटिस के मरीजों को एसी की हवा ज्यादा नुकसान पहुंचाती है और उनके जोड़ों के दर्द को बढ़ा देती है.

बढ़ता मोटापा

ज्यादा देर तक एसी या कूलर में बैठने से मोटापा बढ़ता है. दरअसल, ठंडी जगह पर हमारे शरीर की ऊर्जा ज्यादा खर्च नहीं होती है, जिससे शरीर में फैट बढ़ता है.

मांसपेशियों में खिंचाव

लगातार एसी वाली जगह पर बैठे रहने से मांसपेशियों में खिंचाव आ जाता है, जो सिरदर्द का भी कारण बन जाता है.

ड्राई स्किन की प्रौब्लम

ज्यादा समय तक एसी और कूलर में रहने से आपकी स्किन ड्राई होने लगती है. पसीना न आने से रोमछिद्र लगभग बंद हो जाते हैं और दानों व खुजली की समस्या पैदा हो सकती है.  इसलिए ऑफिस के एसी में दिन भर काम करने वालों को 1-2 घंटे के बीच में मौइश्चराजर लगाते रहना चाहिए, ताकि स्किन में नमी बनी रहे.

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रखें ध्यान

– कमरे का तापमान यदि कम करें तो भी 20 डिग्री से कम नहीं किया जाना चाहिए.

– कूलर और एसी के इस्तेमाल करने से पहले उसमें फिल्टर जरूर लगवाएं.

– एसी-कूलर के प्रयोग करने से पहले उसे साफ करें और कूलर की खस पट्टी हर मौसम में बदलें.

– कूलर और एसी का उपयोग करते वक्त ध्यान रखें कि हवा सीधे आपको न लगे.

नशेड़ी बेटे की करतूत

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से 25 किलोमीटर दूर है तहसील मोहनलालगंज, इसी तहसील के कोराना गांव में 70 साल के बाबूलाल रावत अपने इकलौते बेटे रामकिशुन उर्फ कालिया, उस की पत्नी रेखा और बच्चों के साथ रहते थे. बाबूलाल खेतीकिसानी  कर के परिवार का गुजारा करते थे. इस गांव के तमाम लोग नशा करने के आदी हो गए थे.

गांव के लोगों की संगत का असर रामकिशुन पर भी हुआ. वह भी शराब के अलावा दूसरी तरह के नशीले पदार्थों का सेवन करने लगा. लंबे समय तक नशे में रहने का प्रभाव रामकिशुन के शरीर और सोच पर भी पड़ रहा था. वह पहले से अधिक गुस्से में रहने लगा था.

चिड़चिड़े स्वभाव की वजह से वह बातबात पर मारपीट करने लगता. केवल बाहर के लोगों के साथ ही नहीं बल्कि घर में भी वह पत्नी और बच्चों से झगड़ कर मारपीट करता था. उस की नशे की लत से घर के ही नहीं, मोहल्ले के लोग भी परेशान रहते थे.

रात में जब वह ठेके से शराब पी कर चलता तो गांव में घुसते ही गाली देनी शुरू कर देता था. चीखचीख कर गाली देने से गांव वालों को उस के घर लौटने का पता चल जाता था. घर पहुंचते ही वह घर में मारपीट करने लगता था, कभी पिता से कभी पत्नी से तो कभी बेटे के साथ.

जून, 2019 के पहले सप्ताह की बात है. रामकिशुन नशे में धुत हो कर घर आया. पत्नी रेखा ने उसे समझाना शुरू किया, ‘‘इतनी रात गए शराब पी कर घर आते हो, ऊपर से लड़ाईझगड़ा करते हो, यह कोई अच्छी बात है क्या. जानते हो, तुम्हारी वजह से गांव वाले कितना परेशान होते हैं.’’

रामकिशुन भी लड़खड़ाई आवाज में बोला, ‘‘मैं शराब अपने पैसे से पीता हूं. इस से गांव वालों का क्या लेनादेना. किसी के कहने का मेरे ऊपर कोई फर्क नहीं पड़ने वाला. तुम भी कान खोल कर सुन लो, मुझे ज्यादा समझाने की कोशिश मत करो. बस अपना काम करो.’’

रेखा भी मानने वाली नहीं थी. उसे पता था कि वह अभी नशे में है. ऐसी हालत में समझाने का उस पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा क्योंकि सुबह नशा उतरने पर वह सब भूल जाएगा. इस से बेहतर तो यह है कि इस से कल दिन में बात की जाए.

अगले दिन रेखा ने घर वालों के सामने पति रामकिशुन को समझाना शुरू किया. शुरुआत में तो वह इधरउधर की बातें कर के खुद को बचने की कोशिश करता रहा, इस के बाद भी जब रेखा ने रात के नशे की बात को ले कर बवाल जारी रखा तो रामकिशुन झगड़ा करने लगा. रेखा भी चुप रहने वालों में नहीं थी. उस ने झगड़े के बीच ही अपना फैसला सुना दिया, ‘‘अगर तुम नहीं सुधर सकते तो अपना घर संभालो, मैं अपने मायके चली जाऊंगी.’’

रेखा की धमकी ने 1-2 दिन तो असर दिखाया, इस के बाद रामकिशुन फिर से नशा कर के आने लगा. अब पानी सिर से ऊपर जा रह था, रेखा ने सोचा कि समझौता करने से कोई लाभ नहीं. उसे घर छोड़ कर चले जाना चाहिए. इस के बाद रेखा पति और बेटे को छोड़ कर अपने मायके चली गई.

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रामकिशुन नशे का आदी था. पत्नी के घर छोड़ कर जाने का उस के ऊपर कोई असर नहीं पड़ा बल्कि पत्नी के जाने के बाद तो वह और भी अधिक आजाद हो गया. वह देर रात तो वापस आता ही, अब वह दिन में भी नशा करने लगा था.

नशे में वह घर में सभी से मारपिटाई करता था. उस की पत्नी रेखा 15 दिन बीत जाने के बाद भी घर वापस नहीं आई थी. ऐसे में घर की जिम्मेदारी भी रामकिशुन के ऊपर आ गई थी. जिस से वह और भी अधिक चिड़चिड़ा हो गया था. 18 जून, 2019 की शाम 5 बजे रामकिशुन नशे में धुत हो कर घर आया. सुबह वह अपने बेटे रामकरन को घर के कुछ काम करने के लिए कह कर गया था, वह काम पूरे नहीं हुए तो गुस्से में आ कर रामकिशुन ने बेटे रामकरन की पिटाई शुरू कर दी.

अपने पोते की पिटाई होते देख रामकिशुन के पिता बाबूलाल गुस्से में आ गए. उन्हें नशा करने की वजह से बेटे पर गुस्सा तो पहले से था. अब यह गुस्सा और भी अधिक बढ़ गया था.

वह बोले, ‘‘पत्नी घर छोड़ कर चली गई, इस के बाद भी तुम्हें समझ नहीं आया कि शराब छोड़ दो. ध्यान रखो, यदि नशा करना बंद नहीं किया तो एकएक कर के सारा परिवार तुम्हें छोड़ देगा. बेटे को पीटते हुए तुम्हें शर्म नहीं आ रही.’’

रामकिशुन ने पिता की बात को दरकिनार कर के बेटे की पिटाई जारी रखी. वह बोला, ‘‘जब मैं इसे समझा कर गया था तो इस ने काम क्यों नहीं किया? इस की मां घर छोड़ कर चली गई है तो बदले में इसे ही काम करना होगा.’’

बाबूलाल अपने पोते को बचाने के लिए आए तो वह बोला, ‘‘देखो, यह मामला हमारे बापबेटे के बीच का है. तुम बीच में मत बोलो.’’ यह कह कर उस ने पिता को झगड़े से दूर रहने को कहा.

बाबूलाल के हाथ में कुल्हाड़ी थी. वह जंगल से लकड़ी काट कर वापस आ रहे थे. पोते की पिटाई का विरोध करते और उसे बचाने के प्रयास में कुल्हाड़ी रामकिशुन को लग गई. इस से उस की आंखों के पास से खून निकलने लगा. रामकिशुन को इस बात की गलतफहमी हो गई कि पिता ने उस पर कुल्हाड़ी से हमला किया है. आंख के पास से खून बहता देख कर वह पिता पर आगबबूला हो गया.

रामकिशुन बेटे को पीटना छोड़ कर पिता बाबूलाल की तरफ बढ़ गया. उस ने पिता के हाथ से कुल्हाड़ी ले कर फेंक दी और डंडे से पिता की पिटाई शुरू कर दी. पिटाई में बाबूलाल का सिर फूट गया पर इस बात का खयाल रामकिशुन को नहीं आया. बेतहाशा पिटाई से बाबूलाल की हालत खराब हो गई. रामकिशुन उन्हें मरणासन्न अवस्था में छोड़ कर भाग निकला.

बाबूलाल की खराब हालत देख कर पोता रामकरन बाबा को इलाज के लिए सिसेंडी कस्बे के एक निजी अस्पताल ले गया, जहां डाक्टरों ने बाबूलाल की खराब हालत और पुलिस केस देख कर जवाब दे दिया. वहां से निराश हो कर रामकरन बाबा को ले कर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, मोहनलालगंज ले गया.

वहां डाक्टरों ने बाबूलाल की गंभीर हालत देखते हुए उन्हें लखनऊ के ट्रामा सेंटर रेफर कर दिया. ट्रामा सेंटर के डाक्टरों ने बाबूलाल को एडमिट कर इलाज शुरू कर दिया. बाबा के इलाज में पैसा खर्च होने लगा. रामकरन के पास जो पैसे थे वह जल्दी ही खत्म हो गए.

रामकरन ने पैसों के इंतजाम के लिए प्रयास किए, पर कोई मदद करने वाला नहीं था. लोगों ने समझाया कि पैसे नहीं हैं तो अब बाबूलाल को यहां रखना ठीक नहीं है. अच्छा होगा कि घर पर ही रखा जाए. वहीं इन की सेवा की जाए.

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इलाज का कोई रास्ता न देख कर रामकरन ने डाक्टरों से कहा कि उस के पास पैसे खत्म हो चुके हैं ऐसे में हम बाबा को अपने गांव वापस ले जाना चाहते हैं. डाक्टरों से मिन्नतें कर के रामकरन अपने बाबा को अस्पताल से डिस्चार्ज करा कर घर ले आया. उसी दिन देर रात बाबूलाल ने अपने घर पर दम तोड़ दिया.

बाबूलाल की मौत के बाद सुबह को रामकरन ने पूरे मामले की सूचना मोहनलालगंज पुलिस को दे दी तो इंसपेक्टर जी.डी. शुक्ला बाबूलाल के घर पहुंच गए.

जरूरी काररवाई कर के पुलिस ने लाश पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दी. पुलिस ने रामकरन की सूचना पर उस के पिता रामकिशुन के खिलाफ गैरइरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज कर के उस की पड़ताल शुरू कर दी. इंसपेक्टर जी.डी. शुक्ला ने एक पुलिस टीम का गठन कर के रामकिशुन की तलाश शुरू कर दी.

इसी बीच पुलिस को पता चला कि रामकिशुन गांव के बाहर छिपा हुआ है, पुलिस ने पिता बाबूलाल की हत्या के आरोप में रामकिशुन को गांव के बाहर से गिरफ्तार कर लिया. उस से पूछताछ करने के बाद पुलिस ने उसे जेल भेज दिया. अगर रामकिशुन नशे का आदी नहीं होता तो वह पिता की हत्या नहीं करता और न ही उसे जेल जाना पड़ता. नशे की आदत ने पूरे परिवार को तबाह कर दिया.

कहानी सौजन्य: मनोहर कहानी

काली गर्दन को साफ करने के लिए अपनाएं ये 5 टिप्स

गोरा मुखड़ा जहां एक ओर आपकी खूबसूरती पर चार चांद लगाता है वहीं दूसरी तरफ काली गर्दन शर्मिंदगी का कारण बनती है. हम अपने चेहरे को निखारने के लिए फेस पैक तो लगा लेते हैं पर गर्दन को ऐसे ही छोड़ देते हैं. इससे पिगमेंटेशन और टैनिंग हो जाती है जिससे गर्दन काली लगने लगती है. आज हम इसी समस्‍या को दूर करने के लिए कुछ घरेलू टिप्स आपको बताने जा रहे हैं.

  1. गर्दन को साफ करने का सबसे उत्‍तम तरीका है कि आप स्‍क्रब का प्रयोग करें. स्‍क्रब को बनाने के लिए 2 चम्‍मच बादाम पाउडर लें और उसमें 3 चम्‍मच दूध के डालें. इस पेस्‍ट को अपनी गर्दन पर लगाएं और 15 मिनट तक मसाज करें. स्‍क्रब को सूखने दे और फिर ठंडे पानी से धो लें.

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2. 1 चम्‍मच दही के साथ 2 फुल स्‍पून वालनट पाउडर मिलाएं और गाढ़ा पेस्‍ट बना लें. इस पेस्‍ट से अपनी गर्दन को स्‍क्रब करें, अच्‍छा रिजल्‍ट पाने के लिए इसको रोजाना प्रयोग करें.

3.  2 चम्‍मच नींबू के रस को शहद में मिलाएं और पेस्‍ट बनाएं. इस पेस्‍ट को अपनी गर्दन पर 20 मिनट तक के लिए लगा रहने दें और फिर धो लें. धोते समय अपनी गर्दन को मसाज करें जिससे गंदगी साफ हो जाए.

4. एक चम्‍मच आलू का रस, एक चम्‍मच दूध और कुछ बूंदे नारियल तेल की एक साथ मिला लें. इस मिश्रण से अपनी गर्दन को कई बार पोंछे. इससे आप अपनी चिंता से मुक्‍त हो सकती हैं.

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5. गर्दन का कालापन दूर करने के लिए आपको दिन में चार बार अपनी गर्दन को खीरे के रस से साफ करना चाहिये. यही नहीं अगर आप नारियल का पानी भी प्रयोग करेंगी, तो भी आपको फायदा होगा.

सीपियों का द्वीप है फडिऊथ

अफ्रीका महाद्वीप अपनेआप में कई रहस्यों को समेटे हुए है. पश्चिमी अफ्रीका के सेनेगल कोस्ट देश में करीब 7,465 एकड़ क्षेत्र में फैला खूबसूरत द्वीप ‘जोल-फडिऊथ’ कुछ सालों से दुनियाभर के पयर्टकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. इस देश में सैकड़ों द्वीप हैं. 400 मीटर लंबा लकड़ी का पुल इन द्वीपों को आपस में जोड़ने का काम करता है. पुल पार करते ही कोई जैसे ही फडिऊथ द्वीप में प्रवेश करता है, उस का वहां चारों तरह बिखरी पड़ी सीपियों से साक्षात्कार होता है. द्वीप पर सीपियों के जमा होने में सैकड़ों साल लगे होंगे.

सीपियों का खजाना

इस द्वीप की 90 फीसदी आबादी मुसलिम है. बहरहाल, वहां खूबसूरत समुद्री तट, घने जंगल, झीलझरने और जड़ीबूटियों का अपार भंडार है. वहां बसे आदिवासी कहां से और कब आए, कोई मूल प्रमाण नहीं मिलता लेकिन यहां के आदिवासियों की जीविका समुद्र के सहारे ही निर्भर है. वे मछलियों के साथ समुद्री जीवों को पकड़ते हैं. यहां के समुद्र में सीपियां प्रचुर मात्रा में मिलती हैं, इसलिए ज्यादातर आदिवासी इस धंधे से जुड़े हुए हैं. इस में उन्हें 2 फायदे नजर आए. पहले, सीपियों के अंदर का मीट उन के खाने के काम आता है और अब खाली सीपियों का इस्तेमाल वे आर्किटैक्चर के रूप में कर रहे हैं.द्वीप के पुराने बाशिंदों का कहना है कि उन्होंने जब से होश संभाला है तब से सीपियों का ऐसा नजारा देख रहे हैं.

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समुद्री दृश्य का नजारा

कुछ वर्षों से पश्चिमी देशों से बड़ी संख्या में पर्यटकों, खासकर युवा जोड़ों, की आमद बढ़ने के साथ स्थानीय लोगों की प्रतिव्यक्ति आय काफी बढ़ी है. पैसा आने के बावजूद लोग द्वीप के पर्यावरण को ले कर काफी गंभीर रहते हैं. लोगों के विरोध के कारण ही द्वीप में सड़कों का जाल नहीं बिछ पाया है. आम आदमी हो या विदेशी पर्यटक सैर करने को पैदल ही निकलते हैं. सैलानियों के ठहरने व खाने के लिए वहां शानदार होटल, रैस्टोरैंट हैं, जहां सभी प्रकार की सुविधाएं हैं. होटलों में पर्यटकों के ठहरने की इस तरह की व्यवस्था की गई है कि वे समुद्री दृश्य और लहरों का हर वक्त आनंद उठा सकें. द्वीप की पढ़ीलिखी युवा पीढ़ी अपने खुद के कामधंधे को ज्यादा तरजीह दे रही है.

उल्लेखनीय है कि सेनेगल देश के पहले राष्ट्रपति म्बेड डिगोयो का जन्म इसी द्वीप में हुआ था. जो भी पर्यटक इस द्वीप की सैर करने को आता है, वह डिगोयो संग्रहालय जाना नहीं भूलता है. पहले राष्ट्रपति के घर को संग्रहालय की शक्ल दी गई है. संग्रहालय में उन के जीवन से जुड़ी चीजें रखी गई हैं.

बाओबाब का महत्त्व

दिलचस्प यह है कि समुद्री पक्षियों की बड़ी जनसंख्या द्वीप की रोजमर्रा जिंदगी का एक हिस्सा है. ‘बाओबाब’ पेड़ तो इस द्वीप के लिए बहुत महत्त्व रखता है. इस के बिना स्थानीय लोग जीने की कल्पना तक नहीं कर सकते. उल्लेखनीय है कि आदिकाल में आदिवासी लोग इस पेड़ की छाल से अपना जिस्म ढकते थे. इस पेड़ की पत्तियां संजीवनी से कम नहीं हैं. महिलाएं उन से पाउडर बना कर कई चीजों में इस्तेमाल करती हैं. यह पाउडर मधुमेह, कैंसर, एड्स, पेट रोग और कई बीमारियों में रामबाण की तरह असर करता है. खिलाड़ी, खासकर ऐथलेटिक्स में रुचि रखने वाले खिलाड़ी, अपना दमखम बढ़ाने के लिए पाउडर का इस्तेमाल करते हैं.

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स्थानीय लोगों का कहना है कि सीपियों का द्वीप होने के चलते उन्हें दुनिया भर में एक बड़ी पहचान मिली है. द्वीप का सामान्य तापमान 29 डिगरी सैल्सियस रहता है. जुलाई से अक्तूबर महीने तक गरम और नवंबर से अप्रैल तक साधारण तापमान रहता है.

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